सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर पाया कि उसके आदेश में फेरबदल किया गया है। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। बुधवार को आम्रपाली मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने पाया कि उसके पूर्व आदेश में बदलाव हुआ है।पीठ ने कहा कि कुछ प्रभावशाली लोग अदालत के आदेश में बदलाव करने की कोशिश में जुटे हैं। यह अफसोसजनक है कि चंद लोग अपने निजी स्वार्थ और खुद को बचाने के लिए यह गंदा खेल खेल रहे हैं। पीठ ने ऐसे लोगों को चेताया कि वे सावधान हो जाएं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

असल में पिछली सुनवाई में अदालत ने आम्रपाली समूह को लोहा और स्टील सप्लाई करने वाली कंपनियों के बैंक खातों के साथ उनके निदेशकों को फोरेंसिक ऑडिटर पवन अग्रवाल के समक्ष पेश होने को कहा था, लेकिन जब आदेश आया तो उसमें दूसरे ऑडिटर का नाम था।

आदेश में हुए इस बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बेहद गंभीर बात है। इसी तरह पहले भी गड़बड़ी हुई थी, जिसमें दो लोगों को नौकरी से बर्खास्त किया गया था। पीठ ने कहा कि लगता है कुछ और लोगों पर कार्रवाई करने की जरूरत है।

 

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