आम्रपाली समूह ने घर खरीदारों के 3500 करोड़ से ज्यादा अलग अलग परियोजनाओं में लगाए थे। फोरेंसिक ऑडिटर ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने आयकर विभाग और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को ताजा रिपोर्ट देने की अनुमति दी। कंपनी ने यह पैसा बोगस बिल, निदेशकों व उच्च अधिकारियों को अग्रिम भुगतान और फ्लैट की फर्जी बुकिंग के जरिये दूसरे प्रोजेक्ट में डायवर्ट किया थाजस्टिस अरुण मिश्रा और यूयू ललित की पीठ को मंगलवार को कोर्ट द्वारा नियुक्त फोरेंसिक ऑडिटर पवन अग्रवाल और रवि भाटिया ने बताया कि उन्हें आयकर विभाग और ईओडब्ल्यू से नोटिस मिला था, जिसमें ऑडिट रिपोर्ट की मांग की गई थी। इसके बाद पीठ ने फोरेंसिक ऑडिटर्स को रिपोर्ट की कॉपी जांच एजेंसियों के साथ साझा करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि यह हमारे संज्ञान में आया था कि आर्थिक अपराध शाखा के कमिश्नर को फोरेंसिक ऑडिटर की रिपोर्ट की आवश्यकता थी। हम उन्हें आर्थिक अपराध शाखा को रिपोर्ट देने की अनुमति देते हैं, लेकिन ऑडिटर्स को जांच में सहायता के लिए किसी उद्देश्य से नहीं बुलाया जाएगा। इसके साथ ही पीठ ने आम्रपाली समूह को रिपोर्ट पर एक या दो दिन में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

फोरेंसिक ऑडिटर्स ने अपनी ताजा पूरक रिपोर्ट में कहा कि अब तक जांच में उन्होंने पाया कि आम्रपाली समूह ने घर खरीदारों का 3500 करोड़ रुपये कंपनी के अन्य प्रोजेक्ट में निवेश किए। आम्रपाली के प्रमोटर्स ने एक भी रुपया रियल एस्टेट कारोबार में नहीं लगाया और खरीदारों के पैसे से ऊंची इमारतों का निर्माण किया। करीब 400 करोड़ रुपये तीन कंपनियों बिहारीजी हाइराइज प्रा. लि, जोतिंद्र स्टील एंड ट्यूब्स लि. और मौरिया उद्योग लि. में लगाया गया। जोतिंद्र स्टील और मौरिया उद्योग सुरेखा परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियां हैं। सुरेखा परिवार के सदस्य आम्रपाली समूह के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और उसकी कंपनियों में निदेशक थे। इसके बाद कोर्ट ने अखिल सुरेखा और नवनीत सुरेखा के वकील से बुधवार तक हलफनामा दायर करने को कहा।

 

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