प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव की याचिका पर संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 मई को होगी।अपनी याचिका में सुष्मिता ने कहा था कि इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद आयोग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार की थी। सिंघवी ने कहा था कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने केबाद कई बार चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया गया है लेकिन अब तक आयोग ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने कहा था कि अब तक करीब 12 शिकायतें दर्ज की जा चुकी है। पीठ ने याचिका पर मंगलवार को विचार करने का निर्णय लिया है। सुनवाई की शुरुआत में सिंघवी ने मोदी और शाह का नाम नहीं लिया। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, आप साफ-साफ नाम क्यों नहीं लेते। कौन आचार संहिता का उल्लंघन कर रहा है। आप सांप-सीढ़ी का खेल न खेलें।’
सुष्मिता देव ने कहा था कि यह सार्वजनिक है कि चुनाव प्रचार में मोदी और शाह लगातार नफरत फैलाने वाले बयान दे रहे हैं। लगातार सशस्त्र सेना का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट शब्दों में इस पर प्रतिबंध लगा रखा है।
याचिका में कहा गया था कि चुनाव आचार संहिता का खुले आम उल्लंघन करते हुए प्रधानमंत्री ने गुजरात में तीसरे चरण के मतदान वाले दिन (23 अप्रैल) को रैली की। सुष्मिता ने यह दावा किया है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद कम से कम 40 बार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। लेकिन आयोग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
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