उच्चतम न्यायालय में समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है। इस मामले में उन्होंने गुरुवार को अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया है। एक वकील ने उनके खिलाफ याचिका दायर की है। जिसमें उसका कहना है कि उनकी संपत्ति की जांच होनी चाहिए क्योंकि उनके पास ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति हैइस मामले के संबंध में अदालत में दायर किए गए हलफनामे में मुलायम ने दावा किया है कि जांच के दौरान प्रथम दृष्ट्या सीबीआई ने उन्हें क्लीनचिट दी और एजेंसी को उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला था।

बता दें कि अदालत में मुलायम के अलावा बेटों अखिलेश और प्रतीक यादव के खिलाफ भी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति मामले में सुनवाई चल रही है। 25 मार्च को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने सीबीआई को इस मामले में जांच की स्थिति बताने के संबंध में दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा था।

याचिकाकर्ता वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी ने मांग की थी कि सीबीआई को मुलायम, अखिलेश और प्रतीक यादव की संपत्तियों की जांच की रिपोर्ट अदालत में रखने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कहा गया था कि जांच पूरी हो गई थी और पहली नजर में पाया गया था कि यादव परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला बनता है।

इस जांच को छह साल बीतने के बाद भी सीबीआई ने रिपोर्ट किसी अदालत में पेश नहीं की। 2013 में किए गए एक आकलन में ये संपत्ति आय से 24 करोड़ रुपये अधिक पाई गई थी। उच्चतम न्यायालय ने मार्च 2007 में चतुर्वेदी की जनहित याचिका पर सीबीआई को मुलायम, अखिलेश व पत्नी डिम्पल और भाई प्रतीक यादव की संपत्तियों की जांच करने का आदेश दिया था।

 

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