सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई के तत्कालीन अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव को तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले की जांच कर रहे अधिकारी का बिना अनुमति ट्रांसफर किए जाने पर सीबीआई को फटकार लगाई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के तत्कालीन अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव को अवमानना का नोटिस भेजा और उन्हें 12 फरवरी को पेश होने का आदेश दिया। दरअसल, तत्कालीन CBI चीफ ने एजेंसी के पूर्व संयुक्त निदेशक एके शर्मा का ट्रांसफर कर दिया था, जो बिहार के शेल्टर होम मामलों की जांच कर रहे थे। SC ने कहा कि एजेंसी से बाहर अधिकारी का स्थानांतरण करना कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।मालूम हो कि पिछले साल अक्तूबर में सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच उपजे विवाद के बाद तत्कालीन संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक बनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड केस की सुनवाई बिहार से नई दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। सुनवाई पटना से दिल्ली के साकेत पॉक्सो कोर्ट में ट्रांसफर की गई है। कोर्ट ने जज को आदेश दिया है कि दो हफ्ते के भीटर ट्रायल शुरू करें और 6 महीने के भीतर इसे खत्म करें।

बिहार सरकार और सीबीआई को फटकार

इस दौरान कोर्ट ने आश्रय गृहों की देखभाल को लेकर बिहार सरकार की आलोचना की। कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामले में बिहार सरकार से कहा, बस बहुत हो गया, बच्चों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य सभी सूचनाएं मुहैया कराने में असफल रहा तो वह बिहार के मुख्य सचिव को समन कर सकता है। कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे अधिकारी का तबादला करने को लेकर सीबीआई को भी फटकार लगाई है।

ये है पूरा मामला

बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 34 लड़कियों के साथ रेप का खुलासा होने के बाद ही राजनीतिक बहस तेज हो गई थी। इस कांड का खुलासा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सांइसेज(टिस्स) की रिपोर्ट में हुआ।

जब सरकार पर विपक्षी पार्टियों और लोगों का दबाव बढ़ा तो इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की गई। पिछले दिनों मुजफ्फरपुर के बालिका गृह से 15 साल की बच्ची का भी कंकाल मिला है। जिससे मामले में नया मोड़ आ गया है।

 

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