संसद में शुक्रवार को अंतरिम बजट पेश होने के कुछ घंटों के भीतर, सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में इसे निरस्त करने का अनुरोध किया गया. याचिका में आरोप लगाया गया कि अंतरिम बजट का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है. अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि संविधान के तहत, केवल पूर्ण वार्षिक बजट और लेखानुदान पेश करने का प्रावधान है इसलिए यह बजट खारिज कर दिया जाना चाहिए।याचिकाकर्ता का कहना है कि संविधान के तहत केवल पूर्ण बजट और लेखानुदान पेश करने का ही प्रावधान है। लेखानुदान चुनावी साल में सीमित समय के लिए सरकारी खर्च की पूर्ति के लिए ली जाने वाली मंजूरी होती है, जबकि पूर्ण बजट बाद में निर्वाचन के बाद गठित हुई सरकार पेश करती है।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में भी एडवोकेट शर्मा केंद्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन तब आरबीआई के कैपिटल रिजर्व से जुड़े मुद्दे पर तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ जनहित याचिका के लिए शीर्ष अदालत ने उन पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया था।

आम चुनावों से ठीक पहले ज्यादा से ज्यादा वर्गों को खुश करने की जोरदार कोशिश के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने शुक्रवार को पेश अंतरिम बजट में मध्यम वर्ग, किसानों और मजदूरों के लिये लोक लुभावन घोषणायें कीं. प्रस्तावों में सरकार ने मध्यम वर्ग और आम नौकरी पेशा तबके की पांच लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त करने तथा दो हेक्टेयर तक की जोत वाले किसानों को साल में 6,000 रुपये का नकद समर्थन देने की पेशकश की है

 

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