सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक ए के बस्सी की उस अपील पर शुक्रवार को, केंद्रीय जांच एजेंसी से जवाब मांगा जिसमें बस्सी ने अपना तबादला पोर्ट ब्लेयर किए जाने को चुनौती दी है। देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने केंद्रीय जांच एजेंसी को एक नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब मांगा है। दिल्ली हेडक्वार्टर में डिप्टी एसपी के पद पर तैनात बस्सी को जनवरी में ही पोर्ट ब्लेयर भेज दिया गया था. बस्सी राकेश अस्थाना घूसकांड की जांच कर रही टीम का नेतृत्व कर रहे थे.सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका में डीएसपी अजय कुमार बस्सी ने अपने पोर्ट ब्लेयर ट्रांसफर को चुनौती दी है. एके बस्सी का दावा है कि उनका तबादला दुर्भावना से प्रेरित है और इससे जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच प्रभावित होगी. इतना ही नहीं जांच एजेंसी के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज प्राथमिकी की जांच करने वाले एके बस्सी ने आरोप लगाया गया है कि वह जांच एजेंसी के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव के शोषण का शिकार हैं.
उन्होंने कहा कि यह एक अधिकारी के तबादले का सामान्य मामला नहीं है। वर्मा के मामले में दिए गए आवेदन में उन्होंने कहा था कि उनका तबादला उस गहरी साजिश के तहत है जिसका उद्देश्य अस्थाना के खिलाफ जांच को प्रभावित करना है और मामले में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से जांच करने के लिए उन्हें परेशान करना है।
बस्सी ने कहा कि सीबीआई में काम करते हुए वह किसी भी गुट या धड़े का हिस्सा नहीं रहे और केंद्रीय जांच एजेंसी में उठे कथित विवादों से उनका कोई लेनादेना नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसे किसी भी मामले में जांच दल का हिस्सा बनने का अधिकार नहीं मांगा जिसकी जांच सीबीआई कर रही है या जो टीम अस्थाना के खिलाफ प्राथमिकी की जांच कर रही है।
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