सुप्रीम कोर्ट से पंजाब, हरियाणा, केरल, पश्चिम बंगाल और बिहार सरकार को झटका लगा है. कोर्ट ने राज्यों में डीजीपी नियुक्त करने के नियम में बदलाव करने से इनकार कर दिया है. राज्यों की याचिका खारिज कर दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की कमेटी के माध्यम से ही होगी।चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि डीजीपी के चयन और तय कार्यकाल के संबंध में अदालत की व्यवस्था पुलिस तंत्र को राजनीतिक/कार्यपालिका के दखल से बचाना चाहती थी, निर्देश बिल्कुल ठीक थे और इसका क्रियान्वयन जनहित में सहायक होगा. पीठ में न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एसके कौल भी थे.

कोई भी राज्य खुद पुलिस महानिदेशक नियुक्त नहीं कर सकता। इनमें गुहार लगाई गई थी कि उनकी आंतरिक कमेटी के जरिये पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति होनी चाहिए न कि यूपीएससी की कमेटी के जरिये। इन राज्यों ने गत वर्ष 3 जुलाई को प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति के लिए तय प्रक्रिया में बदलाव करने की गुहार लगाई थी।

राज्यों का कहना था कि पुलिस राज्य सूची में आता है और पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति उनके स्थानीय कानून के तहत होनी चाहिए। उनका कहना था कि इसमें केंद्र सरकार का दखल नहीं होना चाहिए। वहीं अदालत के निर्देश के तहत यूपीएससी के सचिव बुधवार को पीठ के समक्ष उपस्थित हुए। पीठ ने सचिव से जानना चाहा कि क्या आयोग डीजीपी की नियुक्ति के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का पैनल तैयार करता है। सचिव ने कहा कि पैनल आयोग तैयार करता है।

दरअसल प्रशांत भूषण ने कहा था कि महानिदेशक की नियुक्ति के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी नहीं, बल्कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) तैयार करता है। पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि पुलिस महानिदेशक के चयन व नियुक्ति को लेकर प्रकाश सिंह मामले में दिए गए फैसले में बदलाव नहीं होगा। पीठ ने कहा कि वह आदेश जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।

 

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