सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल को लेकर अहम निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने सर्च कमेटी को निर्देश दिया है कि वह लोकपाल और सदस्यों की सूची तय करे। अदालत ने कहा कि लोकपाल और सदस्यों के नामों को अंतिम रूप दिया जाए। इसके लिए अदालत ने फरवरी तक की मियाद दी है।लोकपाल बिल पर चल रही सुनवाई में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को चीफ जस्टिस ने जमकर फटकार लगाई। चीफ जस्टिस ने भूषण को चीजों को सकारात्मक तरीके से देखने की नसीहत दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीजेआई ने बेहद तल्ख अंदाज में भूषण से कहा कि ऐसा लगता है आप जजों से भी ज्यादा जानते हैं। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 7 मार्च को तय की और सरकार से सर्च कमिटी को तब तक काम पूरे करने का निर्देश भी दिया। प्रशांत भूषण ने वर्किंग सर्च कमिटी पर जब संदेह जाहिर किया तो चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कुछ नाराजगी में वरिष्ठ वकील को सकारात्मक रहने की सीख दी। चीफ जस्टिस ने कहा, 'चीजों को हमेशा नकारात्मक तरीके से नहीं देखिए। चीजों का सकारात्मक पक्ष देखें और दुनिया ज्यादा बेहतर नजर आने लगेगी। हम सभी कोशिश कर रहे हैं कि इस दुनिया को ज्यादा बेहतर जगह बना सकें। '
इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने 4 जनवरी को केन्द्र को निर्देश दिया था कि वह सितंबर 2018 से अभी तक लोकपाल खोज समिति के संबंध में उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा सौंपे। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस. के. कौल की पीठ ने कहा था कि ‘‘हलफनामे में आपको लोकपाल खोज समिति गठित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी सुनिश्चित करनी होगी।’’ जब अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सितंबर, 2018 से अभी तक कई कदम उठाए गए हैं, तब पीठ ने उनसे पूछा, ‘‘आपने अभी तक क्या किया है। बहुत वक्त लिया जा रहा है।’’
अब वेणुगोपाल ने दोहराया कि कई कदम उठाए गए हैं। तब पीठ ने नाराज होते हुए कहा, ‘‘सितंबर 2018 से उठाए गए सभी कदमों को रिकॉर्ड पर लाएं।’’ एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार ने खोज समिति के सदस्यों के नाम तक अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं किये हैं।
क्या है लोकपाल का फायदा
लोकपाल के पास सेना को छोड़कर प्रधानमंत्री से लेकर नीचे चपरासी तक किसी भी जन सेवक (किसी भी स्तर का सरकारी अधिकारी, मंत्री, पंचायत सदस्य आदि) के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत की सुनवाई का अधिकार होगा। साथ ही वह इन सभी की संपत्ति को कुर्क भी कर सकता है। विशेष परिस्थितियों में लोकपाल को किसी आदमी के खिलाफ अदालती ट्रायल चलाने और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी अधिकार होगा।
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