देशविरोधी नारेबाजी केस में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य समेत 10 आरोपियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने सोमवार को चार्जशीट दाखिल कर दी. कोर्ट पुलिस के चार्जशीट पर मंगलवार को सुनवाई करेगा। पुलिस तीन साल तक चली जांच के बाद चार्जशीट की कॉपी और अन्य दस्तावेजों को एक ट्रंक में लेकर कोर्ट पहुंची।
कन्हैया समेत 10 लोगों के नाम हैं शामिल पटियाला हाऊस कोर्ट में दाखिल 1200 पन्नों की इस चार्जशीट में कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य, आकिब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, राईए रसूल, बशीर भत, शेहला रशीद, अपराजिता राजा समेत कई लोगों के नाम है. जांच एजेंसी ने इस केस में पूरी तैयारी के साथ चार्जशीट तैयार की है। इस मामले के गवाहों के बयान सीआरपीसी की ऐसी धारा के तहत दर्ज किए गए हैं कि बयान से पलटने पर उन्हें सजा मिल सकती है। पुलिस ने इसके साथ ही फरेंसिक और फेसबुक डेटा के जरिए भी साक्ष्य जुटाए हैं।
1200 पेज की इस चार्जशीट को पुलिस ने अदालत में पेश किया है। पुलिस ने इस मामले के तीन साल बाद दाखिल हुए इस चार्जशीट में कहा है कि जेएनयू में देश विरोधी नारे 7 कश्मीरी छात्रों ने लगाए थे. इसमें कहा गया है कि उमर खालिद इस सभी आरोपियों के संपर्क में था और उसे कैंपस में आयोजित कार्यक्रम में भी बुलाया गया था. इन पर IPC की धारा 124A, 147, 149 और 120B के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
क्या है जांच में जांच के मुताबिक, कन्हैया ने 9 फरवरी की शाम प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किया। कन्हैया कुमार के खिलाफ नारे लगाने का कोई सबूत नहीं है लेकिन उन पर नारे लगाने वालों का समर्थन करने का आरोप है.
कन्हैया समेत अन्य छात्र नेताओं पर दिल्ली स्थित जेएनयू परिसर में संसद हमले का दोषी अफजल गुरू को फांसी पर लटकाए जाने के विरोध में कार्यक्रम आयोजित करने का आरोप है. साथ ही इन पर कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण देने की धाराओं में भी मामला दर्ज किया गया है.
पुलिस ने पाया कि जेएनयू कैंपस में ऐसी किसी भी गतिविधि के लिए ली जाने वाली अनुमति की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई थी। इन प्रदर्शनकारियों को रोका गया और उन्हें बताया गया कि ऐसे किसी भी कार्यक्रम को करने के लिए उनके पास अनुमति नहीं है।
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