डॉक कर्मकार (सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण) अधिनियम, 1986
(1986 का अधिनियम संख्यांक 54)
[7 दिसम्बर, 1986]
डॉक कर्मकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए
और उनसे संबंधित विषयों का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के सैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार, प्रारम्भ और लागू होना-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम डॉक कर्मकार (सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण) अधिनियम, 1986 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
(4) यह किसी भी राष्ट्रीयता के किसी युद्ध पोत को लागू नहीं होगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) समुचित सरकार" से, किसी महापत्तन के संबंध में, केन्द्रीय सरकार, और किसी अन्य पत्तन के संबंध में, राज्य सरकार अभिप्रेत है ;
(ख) स्थोरा" के अन्तर्गत कोई भी वस्तु आती है जो किसी पोत या अन्य जलयान में ले जाई गई है या ले जाई जानी है ;
(ग) मुख्य निरीक्षक" से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किया गया डॉक सुरक्षा मुख्य निरीक्षक अभिप्रेत है ;
(घ) डॉक कार्य" से पोत या अन्य जलयान, पत्तन, डॉक, भण्डारकरण स्थान या उतराई स्थान में या उससे स्थोरा के लादे जाने, उतारे जाने, उसके संचलन, या भण्डारकरण के संबंध में या उसके लिए अपेक्षित अथवा उससे आनुषंगिक किसी पत्तन में या उसके आस-पास कोई कार्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी है :-
(i) स्थोरा की प्राप्ति या उतराई अथवा पत्तन छोड़ने के लिए पोतों या अन्य जलयानों की तैयारी के संबंध में कार्य ; और
(ii) पोत के फलक पर या डॉक में किसी फलक, टैंक, संरचना या उत्थापक मशीनरी या किसी अन्य भण्डारकरण क्षेत्र को छीलना, पेन्ट करना या साफ करना ;
(ङ) डॉक कर्मकार" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे डॉक कार्य पर मुख्य नियोजक की जानकारी से या उसके बिना, सीधे या किसी अभिकरण (जिसके अन्तर्गत ठेकेदार भी है) द्वारा या उसके माध्यम से, चाहे पारिश्रमिक पर या उसके बिना नियोजित किया गया है या नियोजित किया जाना है ;
(च) डॉक कर्मकार के संबंध में, नियोजक" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके द्वारा उसे डॉक कार्य पर, चाहे पारिश्रमिक पर या उसके बिना, नियोजित किया गया है या नियोजित किया जाना है ;
(छ) किसी अभिकरण (जिसके अन्तर्गत ठेकेदार भी है) द्वारा या उसके माध्यम से नियोजित किए गए या नियोजित किए जाने वाले किसी डॉक कर्मकार के संबंध में, मुख्य नियोजक" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके कार्य के संबंध में ऐसे अभिकरण द्वारा उसे नियोजित किया गया है या नियोजित किया जाना है ;
(ज) विनियम" से इस अधिनियम के अधीन बनाया गया कोई विनियम अभिप्रेत है ।
3. निरीक्षक-(1) समुचित सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, ऐसे पत्तनों पर, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, ऐसे व्यक्ति को जिसे वह ठीक समझे, डॉक सुरक्षा मुख्य निरीक्षक और ऐसे व्यक्तियों को, जिन्हें वह ठीक समझे, मुख्य निरीक्षक के अधीनस्थ निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी ।
(2) मुख्य निरीक्षक, निरीक्षक की शक्तियों का भी प्रयोग करेगा ।
(3) मुख्य निरीक्षक और सभी निरीक्षक भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे ।
4. निरीक्षक की शक्तियां-कोई निरीक्षक, उस पत्तन में जिसके लिए वह नियुक्त किया जाता है, -
(क) ऐसी सहायता के साथ (यदि कोई हो), जो वह ठीक समझे, किसी ऐसे पोत, डॉक, भाण्डागार या अन्य परिसर में, जहां कोई डॉक कार्य किया जा रहा है या जहां उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि कोई डॉक कार्य किया जा रहा है, प्रवेश कर सकेगा ;
(ख) ऐसे पोत, डॉक, उत्थापक मशीनरी, स्थोरा गियर, मंच, परिवहन उपस्कर, भाण्डागार या अन्य परिसरों की, जिसका किसी डॉक कार्य के लिए उपयोग किया गया है या किया जाने वाला है, परीक्षा कर सकेगा ;
(ग) डॉक कर्मकारों के नियोजन से संबंधित किसी रजिस्टर, मस्टर रोल या अन्य दस्तावेज के पेश किए जाने की अपेक्षा कर सकेगा और ऐसे दस्तावेज की परीक्षा कर सकेगा ;
(घ) स्थल पर ही या अन्यथा किसी व्यक्ति का ऐसा साक्ष्य ले सकेगा जो वह आवश्यक समझे :
परन्तु किसी भी व्यक्ति को इस धारा के अधीन अपने आपको अपराध में फंसाने वाले किसी प्रश्न का उत्तर देने या कोई साक्ष्य देने के लिए विवश नहीं किया जाएगा ;
(ङ) ऐसे रजिस्टरों, अभिलेखों या अन्य दस्तावेजों या उनके भागों की प्रतिलिपियां ले सकेगा जिन्हें वह किसी ऐसे अपराध के संबंध में, जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह किया गया है, या किसी जांच के प्रयोजन के लिए, सुसंगत समझे ;
(च) ऐसा फोटो, स्केच, नमूना, माप या अभिलेख ले सकेगा जो वह किसी परीक्षा या जांच के प्रयोजन के लिए आवश्यक समझे ;
(छ) किसी ऐसी दुर्घटना के कारणों के बारे में जांच कर सकेगा जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह उत्थापक मशीनरी, परिवहन उपस्कर, मंच के एकाएक गिर जाने या खराब हो जाने के अथवा इस अधिनियम या विनियमों के किसी उपबन्ध के अननुपालन के परिणामस्वरूप हुई थी ;
(ज) इस अधिनियम या विनियमों के अधीन उद्भूत होने वाले सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण उपबन्धों से संबंधित हेतुक दर्शित करने के लिए सूचना जारी कर सकेगा ;
(झ) इस अधिनियम का विनयमों के अधीन उद्भूत हाने वाले किसी परिवाद या अन्य कार्यवाही के संबंध में किसी न्यायालय के समक्ष अभियोजन, संचालन या प्रतिरक्षा कर सकेगा ;
(ञ) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा, जो उसको विनियमों द्वारा प्रदत्त की जाएं ।
5. निरीक्षक की शक्तियां, जहां डॉक कर्मकारों का नियोजन खतरनाक है-(1) यदि निरीक्षक को यह प्रतीत हो कि कोई स्थान, जहां कोई डॉक कार्य किया जा रहा है, ऐसी दशा में है कि वह डॉक कर्मकारों के जीवन, सुरक्षा या स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, तो वह स्वामी पर या ऐसे स्थान के भारसाधक व्यक्ति पर ऐसे स्थान में किसी डॉक कार्य का तब तक प्रतिषेध करने वाले लिखित रूप में आदेश की तामील कर सकेगा जब तक कि खतरे के कारण को समाप्त करने के लिए, उसके समाधानप्रद रूप में उपाय नहीं किया जाता है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी आदेश की तामील करने वाला कोई निरीक्षक उसकी प्रतिलिपि मुख्य निरीक्षक को पृष्ठांकित करेगा, जो अपील के लिए प्रतीक्षा किए बिना आदेश को उपांतरित या रद्द कर सकेगा ।
6. किसी निरीक्षक को दी जाने वाली सुविधाएं-उस स्थान का स्वामी या भारसाधक व्यक्ति, जहां कोई डॉक कार्य किया जा रहा है, मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक को इस अधिनियम या विनियमों के अधीन कोई प्रवेश, निरीक्षण, सर्वेक्षण, माप, परीक्षा या जांच करने के लिए सभी उचित सुविधाएं देगा ।
7. सूचना के प्रकटीकरण पर निर्बन्धन-(1) किसी डॉक कार्य के संबंध में रजिस्टरों या अन्य अभिलेखों की सभी प्रतियां या उनसे उद्धरण और सभी अन्य जानकारी, जो मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक या उसकी सहायता करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम या विनियमों के प्रयोजनों के लिए किए गए निरीक्षण या अन्वेषण के दौरान अपेक्षित हो, गोपनीय मानी जाएगी और किसी व्यक्ति अथवा प्राधिकारी को तब तक प्रकट नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसा प्रकटीकरण इस अधिनियम या विनियमों के या किसी अन्य विधि के अधीन किसी कार्रवाई या कार्यवाही के प्रयोजन के लिए न हो अथवा जब तक मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक ऐसे प्रकटीकरण को किसी डॉक कर्मकार के स्वास्थ्य, सुरक्षा या कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक न समझता हो ।
(2) मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक किसी शिकायत के उस स्रोत को प्रकट नहीं करेगा जिससे त्रुटि या किन्हीं विधिक उपबंधों के भंग को उसकी जानकारी में लाया गया है और यदि किसी ऐसी शिकायत के संबंध में कोई परिदर्शन या निरीक्षण किया जाना है तो वह नियोजक को कोई ऐसी सूचना नहीं देगा कि परिदर्शन ऐसी शिकायत की प्राप्ति के परिणामस्वरूप किया गया है :
परन्तु इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किए गए निर्बन्धन किसी ऐसे मामले को लागू नहीं होंगे जहां परिवादी ने स्वयं शिकायत का स्रोत प्रकट करने के लिए अपनी रजामंदी प्रकट की है ।
(3) यदि मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक या उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई अन्य व्यक्ति, इस धारा के उपबन्धों के प्रतिकूल, यथापूर्वोक्त कोई जानकारी प्रकट करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
8. अपील-धारा 5 के अधीन किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति उस तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर, जिसको उसे आदेश संसूचित किया गया है, अपील मुख्य निरीक्षक को कर सकेगा, या जहां ऐसा आदेश मुख्य निरीक्षक द्वारा किया गया है, वहां ऐसे प्राधिकारी को कर सकेगा जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए और मुख्य निरीक्षक अथवा ऐसा प्राधिकारी अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् यथासंभव शीघ्रता से अपील का निपटारा करेगा :
परन्तु मुख्य निरीक्षक या ऐसा प्राधिकारी पन्द्रह दिन की उक्त अवधि के अवसान के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलर्थी पर्याप्त हेतुक से समय से अपील फाइल करने से निवारित रहा था :
परन्तु यह और कि धारा 5 के अधीन किसी आदेश का, मुख्य निरीक्षक या ऐसे प्राधिकारी के विनिश्चय के लंबित रहने तक, अनुपालन किया जाएगा ।
9. सलाहकार समिति-(1) समुचित सरकार इस अधिनियम और विनियमों के प्रशासन से उद्भूत होने वाले ऐसे विषयों पर, सलाह देने के लिए एक सलाहकार समिति का गठन कर सकेगी जो वह सरकार उसे सलाह के लिए निर्दिष्ट करे ।
(2) सलाहकार समिति के सदस्यों की नियुक्ति समुचित सरकार द्वारा की जाएगी और उनकी संख्या उतनी होगी और उनका चयन ऐसी रीति से किया जाएगा जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए :
परन्तु सलाहकार समिति में-
(i) समुचित सरकार,
(ii) डॉक कर्मकारों, और
(iii) डॉक कर्मकारों और पोत परिवहन कंपनियों के नियोजकों,
का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की समान संख्या होगी ।
(3) सलाहकार समिति का अध्यक्ष समुचित सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किए गए ऐसे सदस्यों में से एक होगा, जो उस सरकार द्वारा इस निमित्त नामनिर्दिष्ट किया जाए ।
(4) समुचित सरकार राजपत्र में सलाहकार समिति के सभी सदस्यों के नाम प्रकाशित करेगी ।
(5) सलाहकार समिति के सदस्यों की पदावधि और उनमें रिक्त स्थान भरने की रीति और सदस्यों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया वह होगी जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए ।
10. समुचित सरकार की दुर्घटना अथवा बीमारियों के मामले में जांच का निदेश देने की शक्ति-(1) यदि समुचित सरकार ऐसा करना समीचीन समझे तो वह किसी डॉक कार्य के संबंध में होने वाली किसी दुर्घटना के कारणों की अथवा ऐसे मामलों की जहां कोई ऐसी बीमारी हो गई है जो विनियमों द्वारा डॉक कार्य से संबंधित बीमारी विनिर्दिष्ट की गई है, या जिसके बारे में यह संदेह किया जाता है कि वह डॉक कर्मकारों को हो गई है, जांच करने के लिए किसी सक्षम व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगी और ऐसी जांच में असेसरों के रूप में कार्य करने के लिए विधि का या विशेष ज्ञान रखने वाले एक या अधिक व्यक्तियों को भी नियुक्त कर सकेगी ।
(2) इस धारा के अधीन कोई जांच करने के लिए नियुक्त किए गए व्यक्ति को साक्षियों को हाजिर कराने और दस्तावेजों तथा तात्त्विक वस्तुओं को पेश कराने के प्रयोजन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी और वह, जांच के प्रयोजनों के लिए जहां तक आवश्यक हो, इस अधिनियम के अधीन निरीक्षक की किसी शक्ति का भी प्रयोग कर सकेगा और जांच करने वाले व्यक्ति द्वारा कोई जानकारी देने के लिए अपेक्षित प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 176 के अर्थ में ऐसा करने के लिए वैध रूप से आबद्ध समझा जाएगा ।
(3) इस धारा के अधीन जांच करने वाला व्यक्ति, यथास्थिति, दुर्घटना या बीमारी के कारणों और किसी विद्यमान परिस्थिति को कथित करते हुए और कोई ऐसा संप्रेक्षण करते हुए, जो वह या कोई असेसर करना ठीक समझे, समुचित सरकार को रिपोर्ट करेगा ।
(4) इस धारा के अधीन जांच में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया वह होगी जो समुचित सरकार धारा 20 के अधीन नियमों द्वारा विहित करे ।
11. डॉक कर्मकारों की बाध्यताएं-(1) कोई डॉक कर्मकार-
(क) डॉक कर्मकारों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए किसी डॉक कार्य के संबंध में उपबंधित किए गए किसी साधित्र, सुविधा या अन्य वस्तु में जानबूझकर बाधा नहीं डालेगा या उसका दुरुपयोग नहीं करेगा ;
(ख) जानबूझकर और युक्तियुक्त हेतुक के बिना कोई ऐसी बात नहीं करेगा जिससे उसका या दूसरों का जीवन संकटापन्न होने की संभावना हो ; और
(ग) डॉक कर्मकारों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए किसी डॉक कार्य के संबंध में उपबंधित किसी साधित्र, सुविधा या अन्य वस्तु का उपयोग करने में जानबूझकर उपेक्षा नहीं करेगा ।
(2) यदि कोई डॉक कर्मकार उपधारा (1) के किसी उपबन्ध का उल्लंघन करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
12. छूट देने की शक्ति-समुचित सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम और विनियमों के सभी या किन्हीं उपबन्धों से ऐसी शर्तों पर, यदि कोई हों, जो वह ठीक समझे-
(क) किसी पत्तन या स्थान, डॉक, घाट, घट्टी या वैसे ही परिसरों को, यदि उस सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसे पत्तन, डॉक, घाट, घट्टी या वैसे ही परिसरों पर डॉक कार्य यदाकदा किया जाता है या यातायात कम है और वह छोटे पोतों और मछली पकड़ने वाली नौकाओं तक सीमित है, छूट दे सकेगी ;
(ख) किसी विनिर्दिष्ट पोत या किसी वर्ग के पोतों को, यदि उस सरकार का, ऐसे पोत या पोतों की विशेषताओं, वहां किए गए डॉक कार्य की प्रकृति, परिमाण तथा आवधिकता और अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए, यह समाधान हो जाता है कि ऐसा करना आवश्यक है तो छूट दे सकेगी :
परन्तु समुचित सरकार इस धारा के अधीन तब तक छूट नहीं देगी जब तक कि उसका यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसी छूट से डॉक कर्मकारों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण पर प्रतिकूल रूप से प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
13. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी ऐसी बात के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी जो इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई है या की जाने के लिए आशयित है ।
14. शास्ति-(1) जो कोई-
(क) किसी निरीक्षक को इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में जानबूझकर बाधा पहुंचाएगा या निरीक्षक द्वारा मांग की जाने पर किसी डॉक कार्य के संबंध में विनियमों के अनुसरण में या अन्यथा रखे हुए किसी रजिस्टर या अन्य दस्तावेज को पेश करने में असफल रहेगा या किसी व्यक्ति को किसी निरीक्षक के समक्ष उपसंजात होने से या निरीक्षक द्वारा उसकी परीक्षा किए जाने से छिपाएगा या रोकेगा या रोकने का प्रयास करेगा ; अथवा
(ख) विनियमों द्वारा या उनके अधीन उपबंधित की जाने के लिए अपेक्षित किसी बाड़, गैंगवे, गियर, सीढ़ी, प्राणरक्षक साधन या साधित्र, प्रकाश, चिह्न, मंच या अन्य वस्तु को जब तक कि सम्यक् रूप से प्राधिकृत नहीं किया गया हो या आवश्यकता की दशा के सिवाय हटाएगा ; या
(ग) किसी ऐसी बाड़, गैंगवे, गियर, सीढ़ी, प्राणरक्षक साधन या साधित्र, प्रकाश, चिह्न, मंच या अन्य वस्तु को किसी आवश्यकता की दशा में हटाए जाने पर उस अवधि की समाप्ति पर जिसके लिए उसका हटाया जाना आवश्यक था, उसे प्रतिस्थापित करने में लोप करेगा,
वह कारावास से जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
(2) यदि कोई व्यक्ति, जो ऐसा व्यक्ति है जिसका कर्तव्य विनियमों में से किसी का अनुपालन करना है, ऐसे विनियमों का उल्लंघन करेगा और ऐसे उल्लंघन के परिणामस्वरूप-
(क) किसी डॉक कर्मकार के साथ प्राणान्तक दुर्घटना हो जाती है, या
(ख) कोई ऐसी दुर्घटना हो जाती है, जो किसी डॉक कर्मकार को पन्द्रह दिन से अधिक तक उसकी पूरी मजदूरी का उपार्जन करने में असमर्थ बनाती है,
तो ऐसा व्यक्ति कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो खण्ड (क) के अधीन आने वाले किसी मामले में दो हजार रुपए से कम और खण्ड (ख) के अधीन आने वाले किसी मामले में पांच सौ रुपए से कम नहीं होगा किन्तु जो, दोनों में से किसी दशा में, पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा और न्यायालय संपूर्ण जुर्माने या उसके किसी भाग को, यथास्थिति, मृत डॉक कर्मकार के आश्रित को या क्षतिग्रस्त डॉक कर्मकार को संदत्त किए जाने का आदेश दे सकेगा ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के उपबन्ध किन्हीं ऐसे उपबंधों के अतिरिक्त होंगे, जो धारा 21 की उपधारा (4) के अधीन बनाए जा सकेंगे ।
(3) धारा 11 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, यदि कोई डॉक कर्मकार, डॉक कर्मकारों पर कोई कर्तव्य या दायित्व अधिरोपित करने वाले इस अधिनियम या विनियमों के किसी उपबन्ध का उल्लंघन करेगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
(4) यदि कोई व्यक्ति, जिसे इस अधिनियम या विनियमों के किन्हीं उपबन्धों के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है, पूर्ववर्ती दोषसिद्धि के दो वर्ष के भीतर किए गए और उसी उपबन्ध का उल्लंघन अंतर्वलित करने वाले किसी अपराध के लिए पुनः दोषसिद्ध किया जाता है तो वह प्रत्येक पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि के लिए उस कारावास से, जिसके लिए वह ऐसे उपबन्ध के प्रथम उल्लंघन के लिए दायी होता, दुगने कारावास से दंडनीय होगा ।
15. कुछ मामलों में अपराध के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों का अवधारण-यदि इस अधिनियम या विनियमों द्वारा दंडनीय कोई अपराध या उसका कोई दुष्प्रेरण करने वाला व्यक्ित, कोई फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम या कंपनी या स्थानीय प्राधिकरण है, तो उसके सभी या कोई भागीदार या सदस्य या निदेशक, साथ ही वह फर्म, व्यष्टियों का संगम, कंपनी या स्थानीय प्राधिकरण उस अपराध या दुष्प्रेरण का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार उसके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकेगी और उसे दंडित किया जा सकेगा :
परन्तु जहां किसी फर्म, संगम या कंपनी ने उस पत्तन के, जहां कोई डॉक कार्य किया जा रहा है, मुख्य निरीक्षक और निरीक्षक को लिखित रूप में यह सूचना दी है कि उसने-
(क) किसी फर्म की दशा में, उसके किसी भागीदार को ;
(ख) किसी संगम की दशा में, उसके किसी सदस्य को ;
(ग) किसी कंपनी की दशा में, उसके किसी निदेशक को,
जो प्रत्येक मामले में उस स्थान का, जिस पर इस अधिनियम का विस्तार है, निवासी है और जो प्रत्येक मामले में ऐसी फर्म, संगम या कंपनी के प्रबन्ध का या तो वास्तव में भारसाधक है या उसमें अधिकतम संख्या में शेयर धारण करता है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी डॉक कार्य के भारसाधक व्यक्ति का उत्तरदायित्व धारण करने के लिए नामनिर्दिष्ट किया है वहां, यथास्थिति, ऐसा भागीदार, सदस्य या निदेशक, जब तक वह पूर्वोक्त रीति से निवास करता है और भारसाधक रहता है या अधिकतम संख्या में शेयर धारण करता है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसे डॉक कार्य का भारसाधक व्यक्ति तब तक समझा जाएगा तब तक कि उसके नामनिर्देशन को रद्द करने वाली या यह कथन करने वाली लिखित सूचना कि वह, यथास्थिति, ऐसा भागीदार, सदस्य या निदेशक नहीं रह गया है, मुख्य निरीक्षक को प्राप्त नहीं हो जाती है ।
16. न्यायालय की आदेश करने की शक्ति-(1) जहां कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाता है वहां न्यायालय, उसे कोई दंड अधिनिर्णीत करने के अतिरिक्त लिखित आदेश द्वारा, उससे आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर (जिसे न्यायालय इस निमित्त किए गए आवेदन पर समय-समय पर बढ़ा सकेगा) ऐसे विषयों के उपचार के लिए, जिनकी बाबत अपराध किया गया था, ऐसे उपाय करने की अपेक्षा कर सकेगा जो इस प्रकार विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(2) जहां उपधारा (1) के अधीन आदेश किया जाता है वहां वह व्यक्ति उस अवधि के या बढ़ाई गई अवधि, यदि कोई हो, के दौरान अपराध के चालू रहने की बाबत इस अधिनियम के अधीन दायी नहीं होगा, किन्तु यदि ऐसी अवधि या बढ़ाई गई अवधि के अवसान पर न्यायालय के आदेश का पूर्णतः पालन नहीं किया गया है तो उस व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने एक और अपराध किया है, और वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो ऐसे अवसान के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसको आदेश का पालन नहीं किया गया है, एक सौ रुपए तक काहो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
17. अधिकारिता के संबंध में उपबन्ध-(1) किसी महानगर मजिस्ट्रेट या किसी प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट से अवर कोई न्यायालय इस अधिनियम या विनियमों के अधीन किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
(2) इस अधिनियम या विनियमों के अधीन किसी अपराध का अभियोजन किसी निरीक्षक द्वारा या उसकी पूर्व मंजूरी से ही संस्थित किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
(3) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, कोई न्यायालय इस अधिनियम या विनियमों के अधीन किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं करेगा जब तक कि उसके लिए-
(क) जुर्माने से दंडनीय किसी अपराध के मामले में,-
(i) अपराध की तारीख से छह मास के भीतर ; या
(ii) जहां अपराध का किया जाना निरीक्षक को ज्ञात नहीं था वहां उस प्रथम तारीख से, जिसको अपराध निरीक्षक की जानकारी में आता है, छह मास के भीतर ; या
(iii) जहां यह ज्ञात नहीं है कि अपराध किसके द्वारा किया गया है वहां उस प्रथम तारीख से जिसको अपराधी की पहचान निरीक्षक की जानकारी में आती है, छह मास के भीतर ; या
(ख) कारावास से दंडनीय किसी अराध के मामले में,-
(i) अपराध की तारीख से एक वर्ष के भीतर ; या
(ii) जहां अपराध का किया जाना निरीक्षक को ज्ञात नहीं था वहां उस तारीख से, जिसको अपराध निरीक्षक की जानकारी में आता है, एक वर्ष के भीतर ; या
(iii) जहां यह ज्ञात नहीं है कि अपराध किसके द्वारा किया गया है वहां उस प्रथम तारीख से जिसको अपराधी की पहचान निरीक्षक की जानकारी में आती है छह मास के भीतर,
परिवाद नहीं किया गया है ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, चालू रहने वाले किसी अपराध की दशा में, परिसीमा की नई अवधि उस समय के प्रत्येक क्षण से प्रारंभ होगी जिसके दौरान वह अपराध चालू रहता है ।
18. जुर्माने के बारे में उपबन्ध-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 29 में किसी बात के होते हुए भी, किसी महानगर मजिस्ट्रेट या किसी प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के लिए इस अधिनियम या विनियमों द्वारा प्राधिकृत पांच हजार रुपए से अधिक जुर्माने का दंडादेश, उसे अधीन किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किसी व्यक्ति पर, पारित करना विधिपूर्ण होगा ।
19. अन्य अपराधों के लिए दंड के लिए साधारण उपबन्ध-वह व्यक्ति, जो इस अधिनियम के किसी उपबंध का उल्लंघन करेगा, यदि इस अधिनियम के अधीन ऐसे उल्लंघन के लिए किसी अन्य शास्ति का उपबंध नहीं किया गया है तो जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
20. नियम बनाने की शक्ति-समुचित सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निम्नलिखित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए इस अधिनियम से सुसंगत नियम बना सकेगी, अर्थात् :-
(क) वह रीति जिससे किसी निरीक्षक को इस अधिनियम के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करना है ;
(ख) उन पोतों के परिसर का निरीक्षण जहां कोई डॉक कार्य किया जाता है ;
(ग) इस अधिनियम के अधीन किए गए आदेशों को तामील करने की रीति ;
(घ) सलाहकार समिति के सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें, उनकी रिक्तियां भरने की रीति और धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन उनके कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ;
(ङ) धारा 10 के अधीन जांच की प्रक्रिया ;
(च) कोई अन्य विषय जिसका इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है ।
21. विनियम बनाने की शक्ति-(1) समुचित सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, डॉक कर्मकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण का उपबंध करने के लिए इस अधिनियम से संगत विनियम बना सकेगी ।
(2) ऐसे विनियमों में निम्नलिखित प्रयोजनों में से सभी या किन्हीं के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-
(क) तट, पोत, डॉक, संरचना और ऐसे अन्य स्थानों पर जहां कोई डॉक कार्य किया जाता है, कार्यकरण स्थलों की सुरक्षा के लिए सन्निर्माण, उपस्करण और अनुरक्षण से संबंधित साधारण अपेक्षा ;
(ख) डॉक, घाट, घट्टी या अन्य स्थानों पर, जिनका डॉक कर्मकारों को कार्य पर जाने के लिए उपयोग करना होता है, किन्हीं नियमित पहुंच मार्गों की सुरक्षा और ऐसे स्थानों तथा परियोजनाओं पर बाड़ लगाना है ;
(ग) डॉक, पोत, किसी अन्य जलयान, डॉक संरचना या कार्यकरण स्थलों के सभी क्षेत्रों में, जहां कोई डॉक कार्य किया जाता है, और ऐसे स्थानों के, जहां डॉक कर्मकारों के उनके नियोजन के दौरान जाने की अपेक्षा है, सभी पहुंच मार्गों में पर्याप्त रोशनी करना ;
(घ) ऐसे प्रत्येक भवन या पोत के किसी अहाते में, जहां डॉक कर्मकारों को नियोजित किया जाता है, पर्याप्त संवातन और उचित तापमान की व्यवस्था करना और उन्हें बनाए रखना ;
(ङ) अग्िन और विस्फोट निवारण तथा संरक्षण ;
(च) पोतों, खावों, मंचों, उपस्कर, उत्थापक साधित्रों और अन्य कार्यकरण स्थलों तक पहुंच के सुरक्षित साधन ;
(छ) हेचों को खोलने और बंद करने में लगे कर्मकारों की सुरक्षा, डॉक के ऐसे मार्गों और अन्य मुखों का संरक्षण जो उनके लिए खतरनाक हो सकते हैं ;
(ज) डॉक पर लदाई या उतराई संक्रियाओं के दौरान स्थोरा की टक्कर से फलक पर गिरने के जोखिम से कर्मकारों की सुरक्षा ;
(झ) उत्थापक और अन्य स्थोरा को उठाने-धरने के साधित्रों और सेवाओं के जैसे, भार को अंतर्विष्ट करने वाली या सहारा देने वाली पट्टिकाओं का सन्निर्माण, अनुरक्षण और उपयोग और उन पर सुरक्षा साधित्रों की, यदि आवश्यक हो, व्यवस्था ;
(ञ) एकीकृत स्थोरा को उठाने-धरने के लिए ढुलाई आधान टर्मिनलों या अन्य टर्मिनलों में नियोजित कर्मकारों की सुरक्षा ;
(ट) मशीनरी, सजीव विद्युत चालकों, वाष्प नलियों और परिसंकटमय मुखों पर बाड़ लगाना ;
(ठ) मंच का सन्निर्माण, अनुरक्षण और उपयोग ;
(ड) रिगिंग और पोत के डेरिकों का उपयोग ;
(ढ) खुले गियरों की जिनके अंतर्गत जंजीर और रस्सियां हैं, तथा डॉक कार्य में उपयोग में लाई गई स्लिगों और अन्य उत्थापक युक्तियों की जांच, परीक्षा, निरीक्षण और उनके समुचित होने का प्रमाणन ;
(ण) जब कर्मकार कोयला या अन्य खुला स्थोरा की उठाई-धराई करते समय खाव, बिन, हापर या वैसे ही स्थानों पर या खाव के डेकों के बीच नियोजित हैं, तब उनका निकल जाना सुकर बनाने के लिए की जाने वाली पूर्वावधानियां ;
(त) स्थोरा का चट्टा लगाने, चट्टा उठाने, उसे भरने और निकालने के कार्यकरण के या उसके संबंध में उठाई-धराई के खतरनाक तारीकों के निवारण के लिए किए जाने वाले उपाय ;
(थ) खतरनाक पदार्थों को उठाने-धरने और खतरनाक या हानिकर वातावरण में काम करने और ऐसी उठाई-धराई के संबंध में की जाने वाली पूर्वावधानियां ;
(द) सफाई, छीलन, रंगरोगन संक्रियाओं के संबंध में कार्य और ऐसे कार्यों के संबंध में की जाने वाली पूर्वावधानियां ;
(ध) स्थोरा की उठाई-धराई, साधित्रों, शक्ति प्रचालित हैच छादनों या अन्य शक्ति प्रचालित पोत उपस्कर, जैसे, किसी पोत के हल के दरवाजे, रैंप, रेक्ट्रेसेबल कार डेक या वैसे ही उपस्कर का प्रयोग करने के लिए या ऐसी मशीनरी के चालकों को संकेत देने के लिए व्यक्ितयों का नियोजन ;
(न) डॉक कर्मकारों के परिवहन के लिए व्यवस्था करना ।
(प) कार्यकरण स्थल पर अत्यधिक ध्वनि, स्पन्दन और वायु-प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव से डॉक कर्मकारों के संरक्षण के लिए की जाने वाली पूर्वावधानियां ;
(फ) संरक्षात्मक उपस्कर या संरक्षात्मक वस्त्रों की व्यवस्था ;
(ब) सफाई, धुलाई और कल्याण सुविधाओं के लिए व्यवस्था ;
(भ) संरक्षा उपस्कर या संरक्षा वस्त्र-
(i) चिकित्सा पर्यवेक्षण ;
(ii) एम्बुलेंस कक्ष, प्राथमिक उपचार और बचाव सुविधाएं तथा डॉक कर्मकारों को उपचार के निकटतम स्थान पर ले जाने का प्रबंध ;
(iii) सुरक्षा और स्वास्थ्य संगठन ; और
(iv) डॉक कर्मकारों का प्रशिक्षण और कार्यकरण स्थल पर डॉक कर्मकारों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए उनकी बाध्यताएं, प्रसुविधाएं और अधिकार ;
(म) उपजीविकाजन्य दुर्घटनाओं, खतरनाक घटनाओं और रोगों का अन्वेषण, ऐसे रोगों और सूचनाओं के प्ररूपों, उन व्यक्तियों और अधिकारियों, जिन्हें वे दिए जाएंगे, उनमें दी जाने वाली विशिष्टियों तथा उस कालावधि को, जिसमें, उन्हें दिया जाना है, विनिर्दिष्ट करना ; और
(य) दुर्घटनाओं, हानि हुए श्रमिक दिनों, उठाए-धरे गए स्थोरा की मात्रा का विवरण और डॉक कर्मकारों की विशिष्टियां प्रस्तुत करना ।
(3) इस धारा के अधीन बनाए गए विनियमों में-
(क) उन परिस्थितियों का जिनमें और उन शर्तों का जिनके अधीन रहते हुए इस धारा के अधीन बनाए गए किन्हीं विनियमों से छूट दी जा सकेगी ; उन प्राधिकारियों को विनिर्दिष्ट करते हुए जो ऐसी छूट दे सकेंगे और उनकी प्रक्रिया को विनियमित करते हुए, उपबंध किया जा सकेगा ; और
(ख) किसी विशिष्ट पत्तन या पत्तनों की विशेष अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए विशेष उपबंध किया जा सकेगा ।
(4) इस धारा के अधीन विनियम बनाते समय समुचित सरकार यह निदेश दे सकेगी कि उसका भंग कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा, और यदि ऐसा भंग दोषसिद्धि के पश्चात् चालू रहता है तो वह ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जब ऐसा भंग इस प्रकार चालू रहता है, एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
22. नियमों और विनियमों की बाबत साधारण उपबंध-(1) धारा 20 और धारा 21 द्वारा प्रदत्त नियम और विनियम बनाने की शक्ति इस शर्त के अधीन है कि ऐसे नियम और विनियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाए जाएंगे ।
(2) साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 23 के खंड (3) के अनुसार विनिर्दिष्ट की जाने वाली तारीख, अर्थात् जिस तारीख के पश्चात् बनाए जाने के लिए प्रस्थापित नियम या विनियम के प्रारूप पर विचार किया जाएगा, उस तारीख से, जिसको प्रस्थापित नियमों या विनियमों का प्रारूप सर्वधारण की जानकारी के लिए प्रकाशित किया जाता है, पैंतालीस दिन से कम की नहीं होगी ।
(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु, नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
(4) इस अधिनियम के अधीन किसी राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधान मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।
23. 1948 के अधिनियम 9 का संशोधन-डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 (1948 का 9) की धारा 3 की उपधारा (2) में,-
(क) खण्ड (छ) में और कल्याण" शब्दों का लोप किया जाएगा,
(ख) खण्ड (ज) का लोप किया जाएगा ।
24. निरसन-भारतीय डॉक श्रमिक अधिनियम, 1934 (1934 का 19) को इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
25. व्यावृत्ति-इस प्रकार निरसित भारतीय डॉक श्रमिक अधिनियम, 1934 (1934 का 19) की धारा 5 के अधीन बनाया गया भारतीय डॉक श्रमिक विनियम, 1948 और डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 की धारा 4 के अधीन बनाई गई डाक कर्मकार (सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण) स्कीम, 1961 इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियम समझे जाएंगे और तब तक प्रवृत्त रहेंगे जब तक कि उन्हें अधिनियम के अधीन परिवर्तित या निरसित नहीं कर दिया जाता है ।
________________

