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ज्वलनशील पदार्थ अधिनियम, 1952 ( Inflammable Substances Act, 1952 )


 

ज्वलनशील पदार्थ अधिनियम, 1952

(1952 का अधिनियम संख्यांक 20)

[6 मार्च, 1952]

कतिपय पदार्थों के बारे में यह घोषित करने के लिए कि वे खतरनाक रूप से

ज्वलनशील हैं और उन पर पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 और तद्धीन

बने नियमों को लागू करके उनके आयात, परिवहन, भंडारकरण

और उत्पादन के विनियमन की व्यवस्था करने के लिए

तथा ऐसे विनियमन से सम्बद्ध

कतिपय मामलों के लिए

अधिनियम

संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम ज्वलनशील पदार्थ अधिनियम, 1952 है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में,-

                                (क) “खतरनाक रूप से ज्वलनशील पदार्थ” से ऐसा कोई द्रव या अन्य पदार्थ अभिप्रेत है जिसे इस अधिनियम द्वारा खतरनाक रूप से ज्वलनशील घोषित किया गया है ;

(ख) “पेट्रोलियम अधिनियम” से पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 (1934 का 30) अभिप्रेत है ।

                3. कतिपय पदार्थों के खतरनाक रूप से ज्वलनशील होने के संबंध में घोषणा-इसमें इसके पश्चात् वर्णित द्रव तथा अन्य पदार्थ, अर्थात् :-

                                (1) ऐसिटोन,

(2) कैल्शियम फास्फाइड,

(3) कैल्शियम का कार्बाइड,

(4) नाइट्रो सेलुलोज आधार वाली चलचित्र फिल्में,

(5) एथिल ऐल्कोहल,

(6) मेथिल ऐल्कोहल,

(7) काष्ठ नैफ्था,

एतद्द्वारा खतरनाक रूप से ज्वलनशील घोषित किए जाते हैं ।

                4. पेट्रोलियम अधिनियम को खतरनाक रूप से ज्वलनशील पदार्थों पर लागू करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, पेट्रोलियम अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के सभी या किन्हीं उपबन्धों का, ऐसे उपान्तरणों सहित, जिन्हें वह विनिर्दिष्ट करे, किसी खतरनाक रूप से ज्वलनशील पदार्थ पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, लागू कर सकेगी और तदुपरि इस प्रकार लागू किए गए उपबन्धों का प्रभाव वैसा ही होगा मानो वह पदार्थ उस अधिनियम के अधीन पेट्रोलियमञ्ज् की परिभाषा के अन्तर्गत ले लिया गया है ।

                (2) केन्द्रीय सरकार ऐसे नियम बना सकेगी जिनमें विशेषतया किसी ऐसे खतरनाक रूप से ज्वलनशील पदार्थ का परीक्षण करने के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा जिसे पेट्रोलियम अधिनियम के कोई उपबंध उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना द्वारा लागू किए गए हों, और ऐसे नियम उस अधिनियम  के अध्याय 2 के किन्हीं उपबन्धों को, उन्हें ऐसे परीक्षण करने की विशेष आवश्यकताओं के निमित्त अनुकूलित करने के लिए, संपूरित कर सकेंगे ।

                5. कतिपय अधिसूचनाओं और नियमों का प्रवर्तन-अप्रैल, 1937 के प्रथम दिन और इस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख के बीच पेट्रोलियम अधिनियम की धारा 30 के अधीन जारी की गई या जारी की गई तात्पर्यित अधिसूचनाएं या नियम इस अधिनियम के अधीन जारी गई अधिसूचनाएं या बनाए गए नियम समझे जाएंगे और तद्नुसार प्रवृत्त बने रहेंगे ।

                6. कतिपय कार्यों की विधिमान्यता और उनकी बाबत क्षतिपूर्ति-कार्यपालक प्रधिकारी के वे सभी कार्य, तथा वे कार्यवाहियां और दण्डादेश, जो अप्रैल, 1937 के प्रथम दिन के बाद से किन्तु इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व, सरकार के किसी अधिकारी द्वारा या उसके प्राधिकार के अधीन या अन्यथा सरकार के किसी आदेश के अनुसरण में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा किसी ज्वलनशील पदार्थ की बाबत या उसके कारण इस विश्वास या तात्पर्यित विश्वास के साथ किए गए, की गई या दिए गए हैं कि वे कार्य, कार्यवाहियां या दण्डादेश पेट्रोलियम अधिनियम के अधीन किए गए, की गई या दिए गए थे उसी प्रकार विधिमान्य और प्रवर्तनशील रहेंगे मानो वे विधि के अनुसार किए गए, की गई या दिए गए थे; और कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध इस आधार पर नहीं की जाएगी या जारी रखी जाएगी कि ऐसे कोई कार्य, कार्यवाहियां या दण्डादेश विधि के अनुसार नहीं किए गए, की गई                     या दिए गए थे ।

                7. [1934 के अधिनियम सं० 30 की धारा 30 का निरसनट-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1957 (1957 का 36) की धारा 2 और पहली अनुसूची द्वारा निरसित ।

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