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उच्च मूल्य बैंक नोट (विमुद्रीकरण) अधिनियम, 1978 ( High Denomination Bank Notes (Demonetisation) Act, 1978 )


 

उच्च मूल्य बैंक नोट (विमुद्रीकरण) अधिनियम, 1978

(1978 का अधिनियम संख्यांक 11)

[30 मार्च, 1978]

लोकहित में कुछ उच्च मूल्य बैंक नोटों के विमुद्रीकरण

और उनसे सम्बन्धित या उनके आनुषंगिक

विषयों का उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

उच्च मूल्य बैंक नोटों की उपलभ्यता ऐसे संव्यवहारों के वित्त पोषण के लिए, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए अपहानिकर हैं या जो अवैध प्रयोजनों के लिए हैं, धन के अवैध अन्तरण को सुकर बनाती है, अतः लोकहित में उच्च मूल्य बैंक नोटों का विमुद्रीकरण आवश्यक है ;

भारत गणराज्य के उनतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम उच्च मूल्य बैंक नोट (विमुद्रीकरण) अधिनियम, 1978 है ।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।

(3) यह 16 जनवरी, 1978 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) बैंक" से,-

(i) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खण्ड () में परिभाषित बैंककारी कम्पनी ;

(ii) भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक ; 

(iii) भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) में परिभाषित समनुषंगी बैंक; 

(iv) बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन गठित तत्स्थानी नया बैंक ; 

(v)  प्रादेशिक ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 (1976 का 21) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित प्रादेशिक ग्रामीण बैंक ;

(vi)  भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 2 में परिभाषित सहकारी बैंक, अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत उसकी प्रत्येक शाखा भी है ;

(ख) बैंक नोट" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 22 के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्गमित बैंक नोट अभिप्रेत हैं ;

(ग) किसी उच्च मूल्य बैंक नोट के सम्बन्ध में विशिष्ट संख्यांक" से नोट के अग्रभाग पर अंकित संख्यांक अभिप्रेत है जिसके अन्तर्गत उस संख्यांक के पहले दिए गए अक्षर और अंक भी हैं ;

(घ) उच्च मूल्य बैंक नोट" से  [इस अधिनियम के प्रांरभ के ठीक पूर्व रिजर्व बैंक द्वारा निर्गमितट एक हजार रुपए या पांच हजार रुपए या दस हजार रुपए के अंकित मूल्य का बैंक नोट अभिप्रेत है ;

(ङ) पब्लिक सेक्टर बैंक" से खण्ड (क) के उपखण्ड (ii), (iii) या (iv) में निर्दिष्ट बैंक अभिप्रेत हैं ;

(च) रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है ;

(छ) अनुसूचित बैंक" से पब्लिक सेक्टर बैंक या कोई अन्य बैंक अभिप्रेत है जो ऐसा बैंक है जिसे भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की द्वितीय अनुसूची में सम्मिलित किया गया है ;

() स्टेट बैंक" से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक अभिप्रेत है

3. उच्च मूल्य बैंक नोटों का वैध निविदा रह जाना-16 जनवरी, 1978 के अवसान पर, सभी उच्च मूल्य बैंक नोट, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 26 में किसी बात के होते हुए भी, किसी भी स्थान पर भुगतान में या उस लेखे में वैध निविदा नहीं रह जाएंगे ।

4. उच्च मूल्य बैंक नोटों के अन्तरण और प्राप्ति का प्रतिषेध-इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन जैसा उपन्धित है उसके सिवाय, कोई भी व्यक्ति 16 जनवरी, 1978 के पश्चात् कोई उच्च मूल्य बैंक नोट किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में नहीं देगा या किसी अन्य व्यक्ति से अपने कब्जे में नहीं लेगा ।

5. बैंकों और सरकारी खजानों द्वारा उच्च मूल्य बैंक नोटों की घोषणा-(1) प्रत्येक बैंक और सरकारी खजाना इस धारा में उपबंधित रीति से ऐसी विवरणी तैयार करेगा और रिजर्व बैंक को भेजेगा जिसमें 16 जनवरी, 1978 को कामकाज बन्द होने के समय उसके द्वारा धारित प्रत्येक अंकित मूल्य के उच्च बैंक नोटों का मूल्य और उस अंकित मूल्य के उच्च मूल्य बैंक नोटों के विशिष्ट संख्यांक प्रत्येक अंकित मूल्य के नीचे अलग-अलग दर्शित हों :

                परन्तु ऐसा बैंक और सरकारी खजाना भी, जिसमें रिजर्व बैंक के निर्गमन विभाग का करेन्सी चेस्ट स्थापित किया गया है, अलग से ऐसी विवरणी प्रस्तुत करेगा जिसमें 16 जनवरी, 1978 को कामकाज बन्द होने के समय ऐसे करेन्सी चेस्ट में धारित उच्च मूल्य बैंक नोटों का कुल मूल्य और प्रत्येक अंकित मूल्य के उच्च मूल्य बैंक नोटों के विशिष्ट संख्यांक प्रत्येक अंकित मूल्य के नीचे अलग-अलग दर्शित हों ।

                (2) ऐसी प्रत्येक विवरणी उपधारा (3) में उपबंधित रूप में तीन प्रतियों में तैयार और प्रस्तुत की जाएगी और बैंक का प्रबन्धक अथवा बैंक या सरकारी खजाने का अन्य भारसाधक व्यक्ति उस पर हस्ताक्षर करेगा ।

(3) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक विवरणी रिजर्व बैंक को भेजी जाने के लिए उन स्थानों पर, जो धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट है, रिजर्व बैंक के उप-कार्यालय, कार्यालय या शाखा के प्रबन्धक को अथवा जिला  मजिस्ट्रेट को या उपखण्ड मजिस्ट्रेट को अथवा यदि ऐसा प्रबन्धक या मजिस्ट्रेट उपलब्ध नहीं है तो, उस ज्येष्ठतम राजस्व या पुलिस अधिकारी को जो उपलब्ध है, 17 जनवरी, 1978 को अपराह्न तीन बजे तक प्रस्तुत की जाएगी :

परन्तु यदि विवरणी का यथापूर्वोक्त किसी व्यक्ति को प्रस्तुत किया जाना साध्य नहीं है तो वह विवरणी 17 जनवरी, 1978 को अपराह्न तीन बजे तक किसी तारघर को उसकी दो प्रतियां देते हुए प्रस्तुत की जा सकेगी । इनमें से एक प्रति, यथास्थिति, बैंक या सरकारी खजाने के खर्च पर मुम्बई स्थित रिजर्व बैंक को तुरन्त तार द्वारा भेजी जाने के लिए होगी और दूसरी प्रति उसे प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को उस रीति से, जो उपधारा (4) में उपबन्धित है, लौटाई जाने के लिए होगी और उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित तीसरी प्रति उसी दिन रजिस्ट्री डाक द्वारा मुम्बई स्थित रिजर्व बैंक को भेजी जाएगी ।

(4) वह अधिकारी, जिसे विवरणी प्रस्तुत की जाती है, उसे प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को उसकी एक प्रति अपने हस्ताक्षर और कार्यालय की मुद्रा सहित, प्राप्ति की अभिस्वीकृति करते हुए वापस कर देगा । उस पर प्राप्ति का समय और तारीख भी अभिलिखित की जाएगी, और ऐसा अधिकारी उस विवरणी की एक प्रति मुम्बई स्थित रिजर्व बैंक को अविलम्ब भेजेगा ।

(5) प्रत्येक बैंक या सरकारी खजाने का प्रबन्धक या अन्य भारसाधक व्यक्ति इस धारा के अधीन प्रस्तुत किए जाने के लिए अपेक्षित विवरणियों के तैयार किए जाने के तुरन्त पश्चात् उसमें वर्णित उच्च मूल्य बैंक नोटों को एक पृथक् पात्र में रखवाएगा और उसे अपनी मुद्रा से और ऐसे पात्र को अभिरक्षा में रखने वाले अधिकारियों की मुद्रा से मोहरबन्द करेगा ।

6. बैंकों और सरकारी खजानों द्वारा धारित उच्च मूल्य बैंक नोटों का विनिमय-(1) पब्लिक सेक्टर बैंक से भिन्न कोई बैंक, धारा 5 में निर्दिष्ट विवरणी में उसके द्वारा घोषित उच्च मूल्य बैंक नोटों के विनिमय में समतुल्य रकम, रिजर्व बैंक या पब्लिक सेक्टर बैंक में रखे गए खाते में जमा करवाकर या बैंक नोटों में रिजर्व बैंक या पब्लिक सेक्टर बैंक से अभिप्राप्त कर सकेगा ।

                (2) पब्लिक सेक्टर बैंक धारा 5 में निर्दिष्ट विवरणी में उसके द्वारा घोषित उच्च मूल्य बैंक नोटों के या उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा प्राप्त उच्च मूल्य बैंक नोटों के विनिमय में समतुल्य रकम रिजर्व बैंक में रखे गए खाते में जमा करवा कर या बैंक नोटों में रिजर्व बैंक से अभिप्राप्त कर सकेगा ।

(3) सरकारी खजाना धारा 5 में निर्दिष्ट विवरणी में उसके द्वारा घोषित उच्च मूल्य बैंक नोटों के विनिमय में समतुल्य रकम बैंक नोटों में या सरकारी खाते में जमा करवाकर रिजर्व बैंक से अभिप्राप्त कर सकेगा ।

(4) उपधारा (1), उपधारा (2) और उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, जहां धारा 5 में निर्दिष्ट विवरणी उस धारा की उपधारा (3) के परन्तुक में उपबंधित रीति से प्रस्तुत की जाती है वहां इस धारा में निर्दिष्ट विनिमय मुम्बई स्थित रिजर्व बैंक द्वारा ही किया जा सकेगा ।

(5) इस धारा के अधीन उच्च मूल्य बैंक नोटों के विनिमय के लिए प्रत्येक आवेदन के साथ धारा 5 की उपधारा (4) के अधीन प्राप्त विवरणी की प्रति होगी जिसमें ऐसे बैंक नोटों के विशिष्ट संख्यांक दिए गए हों ।

7. अन्य व्यक्तियों द्वारा धारित उच्च मूल्य बैंक नोटों का विनिमय-(1) भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, किसी बैंक या सरकारी खजाने से भिन्न किसी व्यक्ति के स्वामित्व में किसी उच्च मूल्य बैंक नोट का विनिमय इस धारा में उपबन्धित समय के भीतर और रीति से उस नोट को 16 जनवरी, 1978 के पश्चात् केवल निविदत्त करके निम्नलिखित द्वारा किया जा सकेगा, अर्थात् :-

(क) जहां उच्च मूल्य बैंक नोट किसी व्यष्टि के स्वामित्व में है वहां स्वयं व्यष्टि द्वारा ; या जहां व्यष्टि भारत से अनुपस्थित है वहां संबंधित व्यष्टि द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा; या जहां व्यष्टि अपने कार्यों की देखभाल करने में मानसिक रूप से असमर्थ है वहां उसके संरक्षक द्वारा या उसकी ओर से कार्य करने के लिए सक्षम किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ;

(ख) जहां उच्च मूल्य बैंक नोट किसी हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के स्वामित्व में है वहां कर्ता द्वारा; और जहां कर्ता भारत से अनुपस्थित है या अपने कार्यों की देखभाल करने में मानसिक रूप से असमर्थ है वहां उसके कुटुम्ब के किसी अन्य वयस्क सदस्य द्वारा ;

(ग) जहां उच्च मूल्य बैंक नोट किसी कम्पनी के स्वामित्व में है वहां उसके प्रबन्ध निदेशक द्वारा, या जहां किसी अपरिहार्य कारण से ऐसा प्रबन्ध निदेशक उस नोट को निविदत्त करने में असमर्थ है ; या जहां कोई प्रबन्ध निदेशक नहीं है वहां उसके किसी निदेशक द्वारा ;

(घ) जहां उच्च मूल्य बैंक नोट किसी फर्म की आस्तियों का भाग है वहां उसके प्रबन्ध भागीदार द्वारा, या जहां किसी अपरिहार्य कारण से ऐसा प्रबन्ध भागीदार उस नोट को निविदत्त करने में असमर्थ है ; या जहां उस प्रकार का कोई प्रबन्ध भागीदार नहीं है वहां उसके किसी भागीदार द्वारा जो अवयस्क नहीं है ;

(ङ) जहां उच्च मूल्य बैंक नोट व्यक्तियों के किसी अन्य संगम के स्वामित्व में है वहां उस संगम के किसी सदस्य या उसके प्रधान अधिकारी द्वारा ; और

(च) जहां उच्च मूल्य बैंक नोट किसी अन्य व्यक्ति के स्वामित्व में है वहां उस व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से कार्य करने के लिए सक्षम किसी व्यक्ति द्वारा ।

(2) इस धारा के अधीन किसी उच्च मूल्य बैंक नोट का विनिमय करने के लिए निविदान करने की वांछा करने वाला प्रत्येक व्यक्ति अनुसूची में दिए गए प्ररूप में ऐसी घोषणा तीन प्रतियों में तैयार करेगा जिन पर वह हस्ताक्षर करेगा और जिसमें उस प्ररूप द्वारा अपेक्षित पूर्ण विशिष्टियां दी जाएंगी तथा 19 जनवरी, 1978 तक ऐसी प्रतियां, ऐसे उच्च मूल्य बैंक नोटों के साथ, जिनका वह विनिमय करना चाहता है निम्नलिखित को स्वयं देगा, अर्थात् :-

(क) मुम्बई स्थित रिजर्व बैंक के कार्यालयों में से किसी कार्यालय को अथवा उस बैंक के अहमदाबाद, बंगलौर, भुवनेश्वर, कलकत्ता, गोहाटी, हैदराबाद, जयपुर, कानपुर, मद्रास, नागपुर, नई दिल्ली और पटना स्थित, यथास्थिति, उप-कार्यालय, कार्यालय या शाखा को ; या

(ख) किसी जिले के मुख्यालय स्थित स्टेट बैंक के मुख्य कार्यालय या शाखा को ; या

(ग) इस निमित्त रिजर्व बैंक द्वारा अधिसूचित किसी पब्लिक सेक्टर बैंक के किसी अन्य कार्यालय को :

परन्तु यदि ऐसा व्यक्ति ऐसे स्थान में निवास करता है जहां से ऐसे किसी कार्यालय या शाखा तक सुविधापूर्वक नहीं पहुंचा जा सकता है अथवा यदि आयु, अंग-शैथिल्य या बीमारी के कारण वह वहां उपस्थित होने में असमर्थ है तो वह ऐसे उच्च मूल्य बैंक नोट जिनका वह विनिमय करना चाहता है और उनसे संबंधित घोषणा की तीन प्रतियां बीमाकृत डाक द्वारा मुम्बई स्थित रिजर्व बैंक को     19 जनवरी, 1978 तक भेज सकेगा ।

(3) इस धारा के अधीन घोषणा करने वाले व्यक्ति की शनाख्त के प्रयोजन के लिए प्रत्येक घोषणा का अनुप्रमाणन उस बैंक के, यदि कोई हो, जिसमें उसका खाता है, प्रबन्धक या अन्य भारसाधक व्यक्ति द्वारा या वैतनिक मजिस्ट्रेट या जस्टिस ऑफ दि पीस या ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा किया जाएगा जो पुलिस निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो ।

(4) यदि यह प्रतीत होता है कि घोषणा सभी तात्त्विक विशिष्टियों में पूर्ण है तो, यथास्थिति, रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक या   उपधारा (2) के खण्ड (ग) के अधीन अधिसूचित कोई बैंक, जिससे उच्च मूल्य बैंक नोटों के विनिमय के लिए कोई आवेदन इस धारा के अधीन किया जाता है, किसी अनुसूचित बैंक में, यथास्थिति, स्वामी या घोषणाकर्ता के उचित रूप से परिचित खाते में जमा किए जाने के लिए उक्त नोटों के विनिमय मूल्य का संदाय करेगा :

परन्तु यदि, यथास्थिति, स्वामी या घोषणाकर्ता का बैंक खाता नहीं है, तो उक्त नोटों के विनिमय मूल्य का संदाय उचित शनाख्त पर ही किया जाएगा और जब तक इस प्रकार संदाय नहीं कर दिया जाता तब तक वह रकम, यथास्थिति, रिजर्व बैंक या उस बैंक की अभिरक्षा में रहेगी जिसको उच्च मूल्य बैंक नोट निविदत्त थे ।

(5) जहां यह प्रतीत होता है कि घोषणा सभी तात्त्विक विशिष्टियों में पूर्ण नहीं है वहां, यथास्थिति, रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक या अधिसूचित बैंक, जिसको ऐसा आवेदन पूर्वोक्त रूप से किया जाता है, जब तक, घोषणाकर्ता अविलम्ब उस कमी की पूर्ति करने में समर्थ न हो, तब तक, ऐसे बैंक नोटों का, जिनसे घोषणा सम्बन्ध रखती है, प्रतिग्रहण और उनके लिए संदाय करने से इंकार कर देगा और जहां वह इस प्रकार इंकार करता है वहां वह घोषणा की एक प्रति, उस पर वह तारीख डालने के पश्चात् जिसको वह प्रस्तुत की जाती है, घोषणाकर्ता को लौटा देगा और उस मामले को केन्द्रीय सरकार को निर्देशित करेगा जिसे वह बैंक नोटों के लिए संदाय करने से इंकार करने के कारणों के संक्षिप्त कथन सहित उस घोषणा की एक प्रति भेजेगा ।

(6) केन्द्रीय सरकार उपधारा (5) में निर्दिष्ट किसी घोषणाकर्ता से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह अपनी घोषणा का उस विस्तार तक और ऐसी विशिष्टियों की बाबत परिवर्धन करे जिन्हें वह सरकार ठीक समझे और जब तक कि घोषणाकर्ता ऐसी अपेक्षा का पूर्णतः अनुपालन करने में समर्थ हो तब तक वह ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, ऐसे उच्च मूल्य बैंक नोटों के, जिनसे घोषणा सम्बन्ध रखती है, विनिमय की मंजूरी देने से इंकार कर सकेगी

(7) केन्द्रीय सरकार या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई व्यक्ति या प्राधिकारी, लिखित आदेश द्वारा और ऐसे कारणों से, जो उसमें लेखबद्ध किए जाएंगे, किसी मामले में या मामलों के किसी वर्ग में उस अवधि को बढ़ा सकेगा जिसके दौरान उच्च मूल्य बैंक नोट इस धारा के अधीन विनिमय के लिए निविदत्त किए जा सकेंगे ।

8. धारा 7 में विनिर्दिष्ट समय की परिसीमा के पश्चात् नोटों का विनिमय-(1) धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति, जो उस धारा में उपबन्धित समय के भीतर किन्हीं उच्च मूल्य बैंक नोटों के विनिमय के लिए आवेदन करने में असफल रहता है, उन नोटों को और उस धारा के अधीन अपेक्षित घोषणा को उस धारा की उपधारा (2) के खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट स्थानों में से किसी स्थान पर रिजर्व बैंक को 24 जनवरी, 1978 तक निविदत्त कर सकेगा जिनके साथ उक्त समय की परिसीमा के भीतर आवेदन करने में उसके असफल रहने के कारणों का स्पष्टीकारक कथन भी होगा :

परन्तु यदि ऐसा व्यक्ति किसी ऐसे स्थान पर निवास करता है जहां से रिजर्व बैंक के उप-कार्यालय, कार्यालय या शाखा के स्थानों तक आसानी से पहुंचा नहीं जा सकता है अथवा यदि वह आयु, अंग-शैथिल्य या बीमारी के कारण वहां उपस्थित होने में असमर्थ है तो वह ऐसे उच्च मूल्य बैंक नोटों को जिनका वह विनिमय करना चाहता है, धारा 7 के अधीन अपेक्षित घोषणा की तीन प्रतियों के साथ रिजर्व बैंक, मुम्बई को बीमाकृत डाक द्वारा 24 जनवरी, 1978 तक भेज सकेगा और उसके साथ एक कथन, भी होगा जिसमें उन कारणों को स्पष्ट किया गया हो कि वह धारा 7 में विनिर्दिष्ट समय के भीतर आवेदन करने में क्यों असफल रहा है ।

(2) यदि रिजर्व बैंक का ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह आवश्यक समझे, यह समाधान हो जाता है कि धारा 7 में उपबंधित समय के भीतर विनिमय के लिए नोटों के प्रस्तुत करने में असफलता के लिए जो कारण हैं वे यथार्थ हैं तो वह उस धारा की उपधारा (4) में विनिर्दिष्ट रीति से उन नोटों के मूल्य का संदाय कर सकेगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन नोटों के मूल्य का संदाय करने में रिजर्व बैंक के इंकार करने से व्यथित कोई व्यक्ति ऐसे इंकार से उसे संसूचित किए जाने से चौदह दिन के भीतर केन्द्रीय सरकार को अपील कर सकेगा ।

9. बैंकों और सरकारी खजानों का बन्द रहना-(1) सभी बैंक और सरकारी खजाने, धारा 5 में निर्दिष्ट विवरणियों को तैयार करने और, यथास्थिति, प्रस्तुत या प्राप्त करने के सिवाय, सभी प्रकार का कारबार करने के लिए, 17 जनवरी, 1978 को बन्द रहेंगे ।

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का 26) के प्रयोजनों के लिए,   17 जनवरी, 1978 को उस अधिनियम के अधीन अधिसूचित लोक अवकाश-दिन समझा जाएगा ।

10. आस्तियां-(1) यदि कोई बैंक धारा 5 में निर्दिष्ट कोई विवरणी उस धारा द्वारा उपबन्धित समय के भीतर और रीति से तैयार और प्रस्तुत करने में असफल रहेगा या उस धारा के अधीन कोई ऐसी विवरणी प्रस्तुत करेगा जो किसी तात्त्विक विशिष्टि में मिथ्या है तो बैंक का प्रबन्धक या अन्य भारसाधक व्यक्ति, जब तक कि वह यह नहीं साबित कर देता है कि उसकी जानकारी के बिना असफलता हुई थी या मिथ्या विवरणी प्रस्तुत की गई थी अथवा उसने उसका निवारण करने के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी, ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

(2) जो कोई धारा 7 के अधीन किसी घोषणा में जानते हुए कोई ऐसा कथन करेगा जो मिथ्या है या केवल भागतः सत्य है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है या इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के किसी उपबन्ध का उल्लंघन करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

(3) अनुसूचित बैंक का कोई अधिकारी ऐसी रकम में से, जो धारा 7 की उपधारा (4) के अधीन जमा किए गए उच्च मूल्य बैंक नोट का विनिमय मूल्य है, ऐसे बैंक में रखे गए उस खाते में संदाय करेगा, जो ऐसा खाता नहीं है जिसे समुचित परिचय कराए जाने के पश्चात् खोला गया है वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

11. अपराधों के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध-(1) इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से ही संस्थित किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

(2) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 29 में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण करने वाले प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय या महानगर मजिस्ट्रेट का न्यायालय पांच हजार रुपए से अधिक का जुर्माना अधिरोपित कर सकेगा ।

12. स-ावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन स-ावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही सरकार या सरकार के किसी अधिकारी या रिजर्व बैंक या किसी पब्लिक सेक्टर बैंक या ऐसे बैंक के किसी अधिकारी के विरुद्ध न होगी ।

13. कठिनाइयों का दूर किया जाना-यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, कोई ऐसा आदेश कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हो और जो उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए उसे आवश्यक प्रतीत होता हो :

परन्तु ऐसा प्रत्येक आदेश किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

14. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी विषय के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-

(क) इस अधिनियम के अधीन विनिमय के लिए निविदत्त उच्च मूल्य बैंक नोटों और उनके सम्बन्ध में घोषणाओं की अभिरक्षा तथा व्ययन ;

(ख) वह समय जिसके भीतर धारा 6 की उपधारा (5) में निर्दिष्ट आवेदन किए जा सकेंगे ; और

(ग) वह समय जिसके भीतर और वह रीति जिससे स्टेट बैंक और धारा 7 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) के अधीन अधिसूचित पब्लिक सेक्टर बैंक उन संदायों की प्रतिपूर्ति के लिए रिजर्व बैंक से दावा कर सकेंगे जो उनके द्वारा उक्त धारा के अधीन प्रतिगृहीत उच्च मूल्य बैंक नोटों के सम्बन्ध में उन्होंने किए थे ।

(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

15. निरसन और व्यावृत्ति-(1) उच्च मूल्य बैंक नोट (विमुद्रीकरण) अध्यादेश, 1978 (1978 का 1) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्समान उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी ।

अनुसूची

[धारा 7(2) देखिए]

घोषणा का प्ररूप

(तीन प्रतियों में भरा जाए)

1.

बैंक नोटों के स्वामी का नाम ।

(स्पष्ट अक्षरों में)

2.

पता :      कार्यालय

 

निवास

3.

प्रास्थिति, अर्थात् व्यष्टि, हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब, कम्पनी, फर्म, आदि ।

4.

(क) क्या आय-कर का निर्धारण हो चुका है ।

(ख) यदि हां, तो उस आय-कर सर्किल/वार्ड/जिले का नाम जहां अन्तिम बार निर्धारण किया गया है ।

(ग) स्थायी खाता संख्यांक ।

5.

यदि कारबार, वृत्ति या व्यवसाय में लगा है तो वह नाम जिससे ऐसा कारबार चलाया जाता है ।

6.

कारबार, वृत्ति या व्यवसाय का मुख्य स्थान और प्रत्येक शाखा का अवस्थान और अभिनाम ।

7.

फर्म की दशा में, प्रत्येक भागीदार का नाम और पता ।

8.

किसी फर्म के भागीदार की दशा में, ऐसी प्रत्येक फर्म का नाम और पता जिसमें वह भागीदार है ।

9.

वैतनिक व्यक्ति की दशा में, वार्षिक वेतन की रकम ।

10.

सरकारी कर्मचारी की दशा में, सरकारी विभाग और धारित पद ।

11.

सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी की दशा में अन्तिम धारित पद, वह सरकारी विभाग जिसके अधीन ऐसा पद धारण किया गया था और सेवा-निवृत्ति की तारीख ।

12.

सरकार से भिन्न नियोजक के सेवानिवृत्त कर्मचारी की दशा में, अन्तिम धारित पद की विशिष्टियां ।

13.

किसी अन्य व्यक्ति की दशा में, यथास्थिति, वृत्ति या व्यवसाय की अथवा पूर्ववर्ती वृत्ति या व्यवसाय की विशिष्टियां ।

14.

निविदत्त उच्च मूल्य बैंक नोटों की विशिष्टियां ।

 

अंकित मूल्य

नोटों की संख्या विशिष्ट संख्यांक। कुल मूल्य

 

1,000 रु०

 

 

5,000 रु०

 

 

10,000 रु०

---रुपए

 

 

---रुपए

 

 

(शब्दों में)

 

निविदत्त बैंक नोटों के विशिष्ट संख्यांक दिए जाने चाहिएं जिनमें नोटों के उस संख्यांक के पहले दिए गए अक्षर और अंक उपदर्शित हों । यदि स्थान पर्याप्त न हो तो विवरण संलग्न कीजिए ।

15.

ऐसे उच्च मूल्य के बैंक नोटों के रूप में नकद रकम रखने के लिए कारण ।

16.

बैंक नोट कब और किस स्रोत से कब्जे में आए ।

17.

यदि निविदत्त नोटों में से कोई नोट उधार के रूप में है तो उन व्यक्तियों के नाम और पते जिनसे उधार लिया गया  है और उधार लेने की तारीख ।

18.

वह रीति जिससे बैंक नोटों के मूल्य के संदाय की वांछा की गई है, अर्थात्, नकदी में या बैंक को संदाय, आदि ।

19.

यदि संदाय किसी बैंक खाते में किया जाना है तो बैंक खाते का पूर्ण ब्यौरा ।

20.

क्या स्वामी के अन्य बैंक नोटों के बारे में कोई अन्य घोषणा की गई है ? यदि हां, तो उसकी पूरी विशिष्टियां दीजिए ।

21.

यदि घोषणाकर्ता बैंक नोटों का स्वामी नहीं है तो वह हैसियत जिसमें घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए हैं ।

मैं-----------जो---------का  पुत्र/पुत्री/पत्नी  हूं,  इसके  द्वारा  सत्यनिष्ठा  से

      (स्पष्ट अक्षरों में नाम)                 (पिता/पति का नाम)

घोषणा करता/करती हूं कि ऊपर दी गई विशिष्टियां मेरी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास के अनुसार पूर्ण, सत्य और सही   हैं । मैं यह भी घोषणा करता/करती हूं कि इसके साथ निविदत्त बैंक नोट मेरे हैं/------------के हैं और बेनामी धारित नहीं हैं ।                                                                                             (बैंक नोटों के स्वामी का नाम)

                                                                                                                     

मैं सत्यनिष्ठा से यह भी प्रतिज्ञान करता/करती हूं कि मैंने इस अधिनियम के अधीन कोई अन्य घोषणा फाइल नहीं की है ।

                                                                                                                                                           मैंने संलग्न विशिष्टियों के अनुसार

                                                                                                दूसरी/अन्य घोषणा (घोषणाएं) फाइल की हैं ।

               

 

मैं यह भी घोषणा करता/करती हूं कि मैं यह घोषणा-------की प्रास्थिति में कर रहा/रही हूं और मैं यह घोषणा

                                                                                                (पदाभिधान, आदि)

करने और इसे सत्यापित करने के लिए सक्षम हूं ।

स्थान-----                                                                                                                                                                   ------

तारीख------                                                                                                                                  (घोषणाकर्ता के हस्ताक्षर)

 

                मैं,--------इसके द्वारा साक्ष्य देता/देती हूं कि मैं घोषणाकर्ता को जानता/जानती हूं और प्रमाणित करता/करती

                    (स्पष्ट अक्षरों में नाम)

हूं कि उपरोक्त घोषणा मेरी उपस्थिति में हस्ताक्षर की गई थी । 

स्थान-----                                                                                                                                             ------------

तारीख-------                                                                                                                              (हस्ताक्षर और पदाभिधान)

मुद्रा :

_____________________

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