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इनामी चिट और धन परिचालन स्कीम (पाबन्दी) अधिनियम, 1978 ( Prize Chits and Money Circulation Schemes (Banning) Act, 1978 )


 

इनामी चिट और धन परिचालन स्कीम (पाबन्दी) अधिनियम, 1978

(1978 का अधिनियम संख्यांक 43)

[12 दिसम्बर, 1978]

इनामी चिटों और धन परिचालन स्कीमों के सम्प्रवर्तन या संचालन

पर पाबन्दी लगाने के लिए और उससे संबंधित

या उसके आनुषंगिक

विषयों के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के उनतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम इनामी चिट और धन परिचालन स्कीम (पाबन्दी) अधिनियम, 1978 है ।

                (2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) संविदाजात चिट" से ऐसा संव्यवहार अभिप्रेत है चाहे वह चिट, चिट फण्ड, कुरी या किसी अन्य नाम से ज्ञात हो जिसके द्वारा या जिसके अधीन कोई ऐसा व्यक्ति, जो चिट के संचालन के लिए उत्तरदायी है, विनिर्दिष्ट संख्या में व्यक्तियों के साथ कोई ऐसा करार करता है कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति एक निश्चित अवधि के लिए कालिक किस्तों के रूप में निश्चित धनराशि का (या उसके बदले में अनाज की निश्चित मात्रा) अभिदाय करेगा और ऐसा प्रत्येक अभिदाता अपनी बारी पर जिसे लाट या नीलाम या निविदा द्वारा या चिट करार में उपबन्धित अन्य रीति से अवधारित किया जाएगा, इनामी रकम पाने का हकदार होगा ।

स्पष्टीकरण-इस खंड में इनामी रकम" से ऐसी रकम चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, अभिप्रेत है जो सभी अभिदाताओं द्वारा प्रत्येक किस्त पर संदत्त या संदेय कुल रकम में से,-

(i) सम्प्रवर्तक या प्रधान या अभिकर्ता की हैसियत में की गई सेवा के लिए प्रभार के रूप में प्रभारित कमीशन की ; और

(ii) अभिदाता को संदत्त किए जा रहे अतिशेष के प्रतिफल के रूप में प्रत्येक किस्त के कुल अभिदायों में से किसी ऐसी धनराशि की जिसे अभिदाता छोड़ने के लिए सहमत है,

कटौती करके आए ; 

                (ख) धन" के अन्तर्गत चैक, पोस्टल आर्डर, मांगदेय ड्राफ्ट, तार द्वारा अन्तरण या मनीआर्डर भी है ;

                (ग) धन परिचालन स्कीम" से कोई ऐसी स्कीम, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, अभिप्रेत है जो सदस्यों को उस स्कीम में नामांकित करने से सम्बन्धित या उसको लागू किसी घटना या आकस्मिकता पर, तुरन्त या सुलभ धन उपार्जित करने के लिए या धन के संदाय के किसी वचन के लिए प्रतिफल के रूप में किसी धन या मूल्यवान वस्तु की प्राप्ति के लिए है, चाहे ऐसा धन या वस्तु ऐसी स्कीम के सदस्यों के प्रवेश धन या कालिक अभिदानों से प्राप्त हुई हो या नहीं ;

(घ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

(ङ) इनामी चिट" के अन्तर्गत कोई ऐसा संव्यवहार या ठहराव भी है, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, जिसके अधीन कोई भी व्यक्ति, सम्प्रवर्तक, प्रधान, अभिकर्ता के रूप में या किसी अन्य हैसियत में एकमुश्त राशि में या अभिदायों या अभिदानों के रूप में किश्तों में या यूनिटों, प्रमाणपत्रों या अन्य लिखतों के विक्रय द्वारा या किसी अन्य रीति से या किसी बचत, पारस्परिक फायदे, प्रत्यय या किसी अन्य स्कीम या ठहराव, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, के लिए या उसके सम्बन्ध में सदस्यता फीस या प्रवेश फीस या की गई सेवा के लिए प्रभार के रूप में धनराशि एकत्र करता है और इस प्रकार एकत्र की गई धनराशि का या उसके किसी भाग का या ऐसी धनराशि के विनिधान से या अन्य प्रयोग से प्रोद्भूत होने वाली आय का निम्नलिखित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए उपयोग करता है, अर्थात् :-

(i) विनिर्दिष्ट संख्या में अभिदाताओं को जिनका अवधारण लाट, ड्रा या किसी अन्य रीति से किया जाए, कालिकतः या अन्यथा नकद या वस्तु के रूप में इनाम या उपहार देना या प्रदान करना, चाहे ऐसे इनाम या उपहार का प्राप्तिकर्ता ऐसी स्कीम या ठहराव के सम्बन्ध में आगे कोई संदाय करने के लिए दायी हो या नहीं ;

(ii) ऐसी स्कीम या ठहराव की समाप्ति पर अथवा उसमें अनुबद्ध अवधि की समाप्ति पर या उसके पश्चात् अभिदाताओं या उनमें से ऐसे अभिदाताओं को जिन्होंने कोई इनाम या उपहार नहीं जीता है, एकत्र किए गए सम्पूर्ण अभिदान, अभिदाय या अन्य धनराशि या उसका कोई भाग किसी बोनस, प्रीमियम, ब्याज या अन्य फायदे के, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, बिना या उसके सहित, वापस करना,   

किन्तु इसके अन्तर्गत संविदाजात चिट नहीं है ;

() रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है

3. इनामी चिट और धन परिचालन स्कीम पर या उसमें सदस्यों के रूप में अपना नाम दर्ज कराने या उसमें भाग लेने पर पाबन्दी-कोई भी व्यक्ित किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम का सम्प्रवर्तन या संचालन नहीं करेगा या किसी ऐसी चिट या स्कीम के सदस्य के रूप में अपना नाम दर्ज नहीं कराएगा या उसमें अन्यथा भाग नहीं लेगा या ऐसी चिट या स्कीम के अनुसरण में कोई धन प्राप्त नहीं करेगा या प्रेषित नहीं करेगा ।

4. धारा 3 के उपबन्धों के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई धारा 3 के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा :

परन्तु किन्हीं प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारणों के अभाव में जो न्यायालय के निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगे, ऐसा कारावास एक वर्ष से कम का नहीं होगा और ऐसा जुर्माना एक हजार रुपए से कम का नहीं होगा ।

5. इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम से संबंधित अन्य अपराधों के लिए शास्ति-जो कोई इस अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम का सम्प्रवर्तन या संचालन करने के उद्देश्य से या पूर्वोक्त रीति से सम्प्रवर्तित या संचालित किसी चिट या स्कीम के सम्बन्ध में,-

(क) इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम में प्रयोग के लिए कोई टिकट, कूपन या अन्य दस्तावेज का मुद्रण या प्रकाशन करेगा ; या

(ख) इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के प्रयोग के लिए किसी टिकट, कूपन या अन्य दस्तावेज का विक्रय या वितरण करेगा अथवा विक्रय या वितरण के लिए उसकी प्रस्थापना करेगा या उसका विज्ञापन करेगा अथवा विक्रय या वितरण के प्रयोजन के लिए उसे अपने कब्जे में रखेगा ; या

(ग) (i) इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के किसी विज्ञापन का ; या

(ii) इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के सदस्यों की किसी सूची का, चाहे वह पूरी हो या नहीं ; या

(iii) इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम की वर्णनात्मक या उससे अन्यथा सम्बन्धित कोई ऐसी सामग्री का जो उस इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम अथवा किसी अन्य इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम में भाग लेने के लिए व्यक्तियों को उत्प्रेरित करने के लिए प्रकल्पित है,

मुद्रण करेगा, प्रकाशन करेगा, या वितरण करेगा अथवा प्रकाशन या वितरण के प्रयोजन के लिए उसे अपने कब्जे में रखेगा ; या

(घ) इनामी चिट या धन परिचालन स्कमी में अथवा ऐसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के किसी विज्ञापन में प्रयोग के लिए कोई टिकट, कूपन या अन्य दस्तावेज, विक्रय या वितरण के प्रयोजन के लिए लाएगा या उसे भेजने के लिए किसी व्यक्ति को आमंत्रित करेगा ; या

(ङ) इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के सम्प्रवर्तन या संचालन से संबंधित प्रयोजनों के लिए किसी स्थान का प्रयोग करेगा या किसी ऐसे स्थान का प्रयोग करवाएगा या जानबूझकर अनुज्ञात करेगा ; या

(च) उपरोक्त कार्यों में से किसी कार्य को किसी व्यक्ति से करवाएगा या कराएगा अथवा कराने का प्रयत्न करेगा,

कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो तीन हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा :

परन्तु किन्हीं प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारणों के अभाव में जो न्यायालय के निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगे, ऐसा कारावास एक वर्ष से कम का नहीं होगा और ऐसा जुर्माना एक हजार रुपए से कम का नहीं होगा ।

6. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कम्पनी द्वारा किया गया है वहां प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबन्धित किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित होता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-

() कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है ; तथा

                (ख) फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार, अभिप्रेत है ।

7. प्रवेश, तलाशी और अभिग्रहण की शक्ति-(1) किसी पुलिस अधिकारी के लिए जो पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की पंक्ति से नीचे का न हो, यह विधिपूर्ण होगा कि वह,- 

(क) किसी ऐसे परिसर में जिसके बारे में उसे यह संदेह करने का कारण है कि उसका इस अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के सम्प्रवर्तन या संचालन से संबंधित प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जा रहा है, ऐसी सहायता के साथ जो वह आवश्यक समझे, चाहे दिन में या रात्रि में, यदि आवश्यक हो तो बलपूर्वक प्रवेश करे ;

(ख) उक्त परिसर की और ऐसे व्यक्तियों की तलाशी ले जिन्हें वह उसमें पाए ;

(ग) ऐसे सभी व्यक्तियों को अभिरक्षा में ले और किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करे जो यथापूर्वोक्त किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम से संबंधित प्रयोजनों के लिए उक्त परिसर के प्रयोग से या उसके सम्प्रवर्तन या संचालन से सम्बन्ध रखते हैं अथवा जिनके विरुद्ध ऐसी शिकायत की गई है या ऐसी विश्वसनीय जानकारी प्राप्त हुई है या कोई ऐसा युक्तियुक्त सन्देह विद्यमान है कि वे यथापूर्वोक्त किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम से संबंधित प्रयोजनों के लिए ऐसे परिसर के प्रयोग से या उसके सम्प्रवर्तन या संचालन से सम्बन्ध रखे हुए हैं ;

(घ) उक्त परिसर में पाई गई सभी वस्तुओं का अभिग्रहण करे जो यथापूर्वोक्त किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के सम्बन्ध में प्रयोग की जाने के लिए आशयित हैं या जिनके बारे में युक्तियुक्त सन्देह है कि उनका यथापूर्वोक्त किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के संबंध में प्रयोग किया गया है ।

                (2) राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी,-

(क) सभी युक्तियुक्त समयों पर, किसी ऐसे परिसर में प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा जिसके बारे में उसे यह संदेह करने का कारण है कि उसका इस अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के सम्प्रवर्तन या संचालन से संबंधित प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जा रहा है ;

(ख) किसी ऐसे व्यक्ति की परीक्षा कर सकेगा जो किसी ऐसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम का नियंत्रण रखता है या उसके सम्बन्ध में नियोजित है ;

(ग) किसी ऐसे व्यक्ति के जो किसी ऐसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम का नियंत्रण रखता है या उसके सम्बन्ध में नियोजित है, कब्जे में या शक्ति के अधीन की किन्हीं दस्तावेजों, पुस्तकों या अभिलेखों को पेश करने का आदेश कर सकेगा ; और

(घ) उक्त परिसर में पाए गए किसी रजिस्टर, लेखा बहियों, दस्तावेजों या किसी अन्य मुद्रित सामग्री का निरीक्षण कर सकेगा और उसका अभिग्रहण कर सकेगा ।

(3) इस धारा के अधीन सभी तलाशी दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबन्धों के अनुसार की जाएंगी

8. ऐसे समाचारपत्र और प्रकाशन का समपहरण जिनमें इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम हों-जहां किसी समाचारपत्र या अन्य प्रकाशन में इस अधिनियम के उपबन्धों के उल्लघंन में सम्प्रवर्तित या संचालित किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम से संबंधित कोई सामग्री है या उससे संबंधित कोई विज्ञापन है वहां राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे समाचारपत्र की प्रत्येक प्रति को और ऐसे प्रकाशन की प्रत्येक प्रति को जिसमें ऐसी सामग्री या विज्ञापन है, राज्य सरकार को समपहृत घोषित कर सकेगी ।

9. अपराधों के विचारण की शक्ति-मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या, यथास्थिति, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से अवर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।

10. इस अधिनियम के अधीन अपराधों का संज्ञेय होना-इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय सभी अपराध संज्ञेय होंगे

11. अधिनियम का कुछ इनामी चिटों या धन परिचालन स्कीमों को लागू होना-इस अधिनियम की कोई बात निम्नलिखित द्वारा सम्प्रवर्तित किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम को लागू नहीं होगी, अर्थात् :-

(क) राज्य सरकार या उसकी ओर से किसी अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा ; या

() किसी कम्पनी द्वारा जो पूर्णतः किसी राज्य सरकार के स्वामित्व में है और जो इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के संचालन से भिन्न कोई कारबार नहीं करती है, चाहे वह संविदाजात चिट के रूप में हो या अन्यथा ; या

(ग) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खण्ड (ग) में यथापरिभाषित किसी बैंककारी कम्पनी या उस अधिनियम की धारा 51 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किसी बैंककारी संस्था या भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक या भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 3 के अधीन गठित किसी समनुषंगी बैंक या बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन गठित किसी तत्स्थानी नए बैंक या प्रादेशिक ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 (1976 का 21) की धारा 3 के अधीन स्थापित किसी प्रादेशिक ग्रामीण बैंक या भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 2 के खण्ड (खत्त्) में यथापरिभाषित किसी सहकारी बैंक द्वारा ; या

(घ) रिजर्व बैंक के परामर्श से राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित किसी पूर्त या शैक्षणिक संस्था द्वारा ।

12. अस्थायी उपबन्ध-(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी यह है कि इस अधिनियम के प्रारम्भ पर किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम का संचालन करने वाला कोई व्यक्ति ऐसी चिट या स्कीम का संचालन ऐसी अवधि के लिए चालू रख सकेगा जो ऐसी चिट या स्कीम से सम्बन्धित कारबार के परिसमापन के लिए आवश्यक हो किन्तु ऐसी अवधि किसी भी दशा में ऐसे प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि से अधिक की नहीं होगी :

परन्तु उक्त व्यक्ति राज्य सरकार को या ऐसे अधिकारी को जो उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए और रिजर्व बैंक के ऐसे कार्यालय को जो विहित किया जाए, चिट या स्कीम के सम्बन्ध में पूरी जानकारी और साथ ही किन्हीं ऐसे नियमों के जो राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन इस निमित्त बनाए जाएं, उपबन्धों के अनुसार तैयार की गई परिसमापन योजना ऐसे प्ररूप में और ऐसी अवधि के भीतर देगा, जो विहित की जाए :

परन्तु यह और कि यदि राज्य सरकार का, इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम का संचालन करने वाले व्यक्ति द्वारा किए गए आवेदन पर, यह समाधान हो जाता है कि चिट या स्कीम का, पूर्वगामी परन्तुक के अधीन राज्य सरकार को दी गई परिसमापन योजना में नियत अवधि के भीतर परिसमापन नहीं किया जा सकता है तो वह, रिजर्व बैंक के परामर्श से, ऐसे व्यक्ति को उक्त चिट या स्कीम से सम्बन्धित कारबार के संचालन को ऐसी अतिरिक्त अवधि के लिए चालू रखने की अनुज्ञा दे सकेगी जो मामले की परिस्थितियों को और उक्त चिट या स्कीम के सदस्यों के हित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक समझी जाए ।

(2) राज्य सरकार, रिजर्व बैंक के परामर्श से, उपधारा (1) के अधीन दी गई परिसमापन योजना का परिवर्तनों सहित या उनके बिना अनुमोदन कर सकेगी या उसे अस्वीकार कर सकेगी और उस चिट या स्कीम के संचालन को चालू रखने की अनुज्ञा दे सकेगी या देने से इंकार कर सकेगी :

परन्तु किसी भी ऐसी परिसमापन योजना में, ऐसे व्यक्ति को जो ऐसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम का संचालन करता है, सुनवाई का अवसर दिए बिना तो कोई परिवर्तन किया जाएगा, और उसे अस्वीकार किया जाएगा

(3) यदि कोई व्यक्ित उक्त चिट या स्कीम के सम्बन्ध में पूरी जानकारी और साथ ही उसकी परिसमापन योजना विहित प्ररूप में और अवधि के भीतर नहीं देगा तो वह ऐसी अवधि की समाप्ति पर उक्त चिट या स्कीम से सम्बन्धित कारबार को चालू रखने के अपने अधिकार का समपहरण कर देगा ।

(4) किसी ऐसी चिट या स्कीम का संचालन करने वाले किसी व्यक्ति और अभिदाता के बीच हुए किसी करार या ठहराव में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, उस चिट या स्कीम का संचालन करने वाला व्यक्ति उपधारा (3) में निर्दिष्ट व्यतिक्रम की तारीख तक एकत्र की गई धनराशि या अभिदान ऐसी अवधि के भीतर वापस कर देगा जो विहित की जाए ।

(5) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (4) के उपबन्धों का अनुपालन करने में असफल रहेगा तो वह कारवास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो तीन हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा :

परन्तु किन्हीं प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारणों के अभाव में जो न्यायालय के निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगे, कारावास एक वर्ष से कम का नहीं होगा और ऐसा जुर्माना एक हजार रुपए से कम का नहीं होगा ।

13. नियम बनाने की शक्ति-(1) राज्य सराकर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, और रिजर्व बैंक के परामर्श से, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-

(क) रिजर्व बैंक का कार्यालय जिसको किसी इनामी चिट या धन परिचालन स्कीम के सम्बन्ध में पूरी जानकारी धारा 12 की उपधारा (1) के प्रथम परन्तुक के अधीन दी जा सकेगी और वह प्ररूप जिसमें और वह अवधि जिसके भीतर ऐसी जानकारी दी जा सकेगी ;

(ख) वे विशिष्टियां जो इनामी चिटों या धन परिचालन स्कीमों से सम्बन्धित कारबार की परिसमापन योजना से सम्बन्ध रखती हैं ।

14. निरसन और व्यावृत्ति-(1) आन्ध्र प्रदेश मनी सर्क्यूलेशन स्कीम्स (प्रोहिबीशन) ऐक्ट, 1965 (1965 का आन्ध्र प्रदेश    ऐक्ट 30) जैसा कि वह आन्ध्र प्रदेश राज्य और चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त है और मध्य प्रदेश धन परिचालन स्कीम (प्रतिषेध) अधिनियम, 1975 (1975 का मध्य प्रदेश अधिनियम 19), इसके द्वारा निरसित किए जाते हैं ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी अधिनियम के निरसन के होते हुए भी यह है कि ऐसे किसी अधिनियम के उपबन्धों के अधीन की गई कोई बात या कार्यवाही, जहां तक कि ऐसी बात या कार्यवाही इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत नहीं है,इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन इस प्रकार की गई समझी जाएगी मानो उक्त उपबन्ध उस समय प्रवृत्त थे जब ऐसी बात या कार्यवाही की गई थी और उक्त उपबन्ध तद्नुसार तब तक प्रवृत्त बने रहेंगे जब तक कि उन्हें इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या कार्यवाही द्वारा प्रतिष्ठित नहीं कर दिया जाता ।

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