राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987
(1987 का अधिनियम संख्यांक 53)
[23 दिसंबर, 1987]
आवास वित्त संस्थाओं का स्थानीय और प्रादेशिक, दोनों, स्तरों पर
संवर्धन करने और ऐसी संस्थाओं को वित्तीय और अन्य सहायता
उपलब्ध कराने के लिए प्रधान अभिकरण के रूप में कार्य
करने के लिए एक बैंक की, जो राष्ट्रीय आवास बैंक
के नाम से ज्ञात होगा, स्थापना करने के लिए
और उससे संबद्ध या उसके आनुषंगिक
विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के अड़तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो : -
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी तथा इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी उपबंध के किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रति निर्देश है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) बोर्ड" से धारा 6 में निर्दिष्ट राष्ट्रीय आवास बैंक का निदेशक बोर्ड अभिप्रेत है;
(ख) अध्यक्ष" से धारा 6 के अधीन नियुक्त बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;
(ग) निदेशक" से धारा 6 के अधीन नियुक्त निदेशक अभिप्रेत है;
(घ) आवास वित्त संस्था" के अंतर्गत प्रत्येक ऐसी संस्था है, चाहे वह निगमित हो या न हो, जो प्रधानतया आवास के लिए चाहे प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः, वित्त उपलब्ध कराने का कारबार करती है या [जिसके मुख्य उद्देश्यों में से एक] ऐसा कारबार करना है;
(ङ) प्रबंध निदेशक" से धारा 6 के अधीन नियुक्त प्रबंध निदेशक अभिप्रेत है;
(च) राष्ट्रीय आवास बैंक" से धारा 3 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय आवास बैंक अभिप्रेत है;
(छ) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;
(ज) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(झ) रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है;
(ञ) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं, किंतु जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में हैं;
(ट) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और इस अधिनियम में या भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) में परिभाषित नहीं हैं, किंतु बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 में हैं ।
अध्याय 2
राष्ट्रीय आवास बैंक की स्थापना और उसकी पूंजी
3. राष्ट्रीय आवास बैंक की स्थापना और उसका निगमन-(1) ऐसी तारीख से जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक बैंक की स्थापना की जाएगी जो राष्ट्रीय आवास बैंक के नाम से ज्ञात होगा ।
(2) राष्ट्रीय आवास बैंक शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा और इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए उसे संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उस नाम से वह वाद ला सकेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा ।
(3) राष्ट्रीय आवास बैंक का प्रधान कार्यालय मुम्बई या अन्य ऐसे स्थान पर होगा जो रिजर्व बैंक, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ।
(4) राष्ट्रीय आवास बैंक भारत में किसी स्थान पर और रिजर्व बैंक के पूर्व अनुमोदन से भारत के बाहर किसी स्थान पर कार्यालय, शाखाएं या अभिकरण स्थापित कर सकेगा ।
[4. पूंजी-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक की प्राधिकृत और समादत्त पूंजी तीन अरब पचास करोड़ रुपए होगी:
परंतु केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक के परामर्श से, अधिसूचना द्वारा, प्राधिकृत पूंजी को बढ़ाकर बीस अरब रुपए तक कर सकेगी ।
(2) बोर्ड, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो समय-समय पर उसके द्वारा अवधारित की जाएं, रिजर्व बैंक, केन्द्रीय सरकार, अनुसूचित बैंकों, लोक वित्तीय संस्थाओं, आवास वित्त संस्थाओं या ऐसी अन्य संस्थाओं को, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित की जाएं, बढ़ी हुई प्राधिकृत पूंजी निर्गमित कर सकेगा:
परंतु पुरोधृत पूंजी में कोई भी वृद्धि ऐसी रीति से नहीं की जाएगी जिससे रिजर्व बैंक, केन्द्रीय सरकार, पब्लिक सैक्टर बैंक, लोक वित्तीय संस्थाएं या केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाएं, किसी समय कुल मिलाकर राष्ट्रीय आवास बैंक की पुरोधृत पूंजी के इक्यावन प्रतिशत से कम धारण करें ।]
अध्याय 3
राष्ट्रीय आवास बैंक का प्रबंध
5. प्रबंध-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक के कार्यकलाप और कारबार का साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबंध निदेशक बोर्ड में निहित होगा जो ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे सभी कार्य और बातें करेगा, जिनका प्रयोग राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा किया जा सकता है या जिन्हें राष्ट्रीय आवास बैंक कर सकता है ।
(2) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, बोर्ड अपने कृत्यों का निर्वहन करने में, लोकहित का सम्यक् ध्यान रखते हुए कारबार के सिद्धांतों पर कार्य करेगा ।
(3) उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए और इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, -
[(क) यदि अध्यक्ष पूर्णकालिक निदेशक है या यदि वह अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, दोनों पदों को धारण करता है, तो अध्यक्ष, या
(ख) यदि अध्यक्ष पूर्णकालिक निदेशक नहीं है, या यदि अध्यक्ष पूर्णकालिक निदेशक है और वह अनुपस्थित है तो प्रबंध निदेशक,]
को भी राष्ट्रीय आवास बैंक के कार्यकलाप और कारबार के साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबंध की शक्तियां प्राप्त होंगी और वह ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे सभी कार्य और बातें कर सकेगा जिनका प्रयोग राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा किया जा सकता है और जिन्हें राष्ट्रीय आवास बैंक कर सकता है और वह लोकहित का सम्यक् ध्यान रखते हुए कारबार के सिद्धांतों पर कार्य करेगा ।
(4) प्रबंध निदेशक, अपनी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों के निर्वहन करने में ऐसे निदेशों का अनुसरण करेगा जो अध्यक्ष उसे दे ।
(5) राष्ट्रीय आवास बैंक, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने में, नीति के उन विषयों के बारे में, जिनमें लोकहित अंतर्ग्रस्त हो, ऐसे निदेशों का अनुसरण करेगा जो रिजर्व बैंक के परामर्श से केंद्रीय सरकार या रिजर्व बैंक उसे लिखित रूप में दे ।
6. निदेशक बोर्ड-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक का निदेशक बोर्ड निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात्: -
(क) अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक:
परंतु एक ही व्यक्ति को अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नियुक्त किया जा सकेगा;
(ख) [दो निदेशक,] जो आवास, वास्तुकला, इंजीनियरी, समाजशास्त्र, वित्त, विधि, प्रबंध और निगमित योजना या किसी अन्य क्षेत्र में विशेषज्ञ हों; जिनका विशेष ज्ञान राष्ट्रीय आवास बैंक के लिए उपयोगी समझा जाता है;
1[(ग) दो निदेशक, जो ऐसे व्यक्ति होंगे, जिन्हें ऐसी संस्थाओं के कार्यकरण का अनुभव है जो आवास के लिए निधियां उपलब्ध कराने में अंतवर्लित हैं या आवास विकास में लगी हुई हैं या जिन्हें वित्तीय संस्थाओं और अनुसूचित बैंकों के कार्यकरण का अनुभव है;
(गक) दो निदेशक, जो रिजर्व बैंक, केन्द्रीय सरकार और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं से भिन्न शेयरधारकों द्वारा ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, निर्वाचित किए जाएंगे;]
(घ) दो निदेशक, रिजर्व बैंक के निदेशकों में से होंगे;
(ङ) तीन निदेशक, केंद्रीय सरकार के पदधारियों में से होंगे;
(च) दो निदेशक, राज्य सरकार के पदधारियों में से होंगे ।
(2) अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और 1[खंड (गक) और खंड (घ) में निर्दिष्ट निदेशकों को छोड़कर,] अन्य निदेशक, केंद्रीय सरकार द्वारा रिजर्व बैंक से परामर्श करके, नियुक्त किए जाएंगे और खंड (घ) में निर्दिष्ट निदेशक रिजर्व बैंक द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे ।
7. अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और अन्य निदेशकों की पदावधि, सेवा-शर्तें, आदि-(1) अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, पांच वर्ष से अनधिक की ऐसी अवधि तक पद धारण करेंगे और ऐसे वेतन और भत्ते प्राप्त करेंगे तथा सेवा के ऐसे निबंधन और शर्तों द्वारा शासित होंगे जो केंद्रीय सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके, विनिर्दिष्ट करे और इस प्रकार नियुक्त कोई व्यक्ति पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होगा:
परंतु, यथास्थिति, अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक, अपनी पदावधि का अवसान हो जाने पर भी तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक कि उसका उत्तरवर्ती अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है ।
(2) धारा 6 की उपधारा (1) के [खंड (ख), खंड (ग) और खंड (गक)ट में निर्दिष्ट निदेशक तीन वर्ष की अवधि तक पद धारण करेंगे:
। । । । । । ।
(3) केंद्रीय सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके, अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक या उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी अन्य निदेशक को, उसकी पदावधि के अवसान के पूर्व किसी भी समय उसे, उसके प्रस्तावित हटाए जाने के विरुद्ध कारण दर्शित करने का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, हटा सकेगी ।
(4) उपधारा (1) और उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्रीय सरकार को, रिजर्व बैंक से परामर्श करके, उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के अवसान के पूर्व किसी भी समय, यथास्थिति, अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक को कम से कम तीन मास की लिखित सूचना देकर या उसके बदले में तीन मास का वेतन और भत्ता देकर उसकी पदावधि समाप्त करने का अधिकार होगा और, यथास्थिति, अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक को भी उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के पूर्व किसी भी समय, केंद्रीय सरकार को कम से कम तीन मास की लिखित सूचना देकर या उसके बदले में तीन मास का वेतन और भत्ता देकर अपना पद त्याग करने का अधिकार होगा ।
(5) निदेशकों को बोर्ड के या उसकी समितियों के अधिवेशनों में हाजिर होने के लिए और राष्ट्रीय आवास बैंक के किसी अन्य कार्य को करने के लिए ऐसी फीस और भत्ते दिए जाएंगे, जो विहित किए जाएं:
परंतु ऐसी फीस, किसी ऐसे निदेशक को देय नहीं होगी, जो सरकार या रिजर्व बैंक का पदधारी है ।
8. निरर्हताएं-कोई व्यक्ति बोर्ड का निदेशक नहीं होगा यदि वह-
(क) विकृतचित्त है या विकृतचित्त हो जाता है और सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित कर दिया गया है; या
(ख) ऐसे किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया गया है या ठहराया जा चुका है जिसमें केंद्रीय सरकार की राय में, नैतिक अधमता अंतर्वलित है; या
(ग) दिवालिया न्यायनिर्णीत है या किसी समय किया गया है या जिसने अपने ऋण का संदाय निलंबित कर दिया है या अपने लेनदारों के साथ प्रशमन कर लिया है; या
(घ) किसी भी कारण से-
(i) सरकार, या
(ii) रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक या किसी अन्य बैंक, या
(iii) किसी लोक वित्तीय संस्था, या राज्य वित्तीय निगम, या
(iv) सरकार के स्वामित्व में या नियंत्रण के अधीन किसी अन्य निगम,
की सेवा से हटा दिया गया है या पदच्युत कर दिया गया है ।
9. निदेशकों के पद में रिक्ति और उनके द्वारा पदत्याग-(1) यदि कोई निदेशक-
(क) धारा 8 में वर्णित किसी निरर्हता के अधीन हो जाता है, या
(ख) बोर्ड के उसके लगातार तीन या अधिक अधिवेशनों में उसकी इजाजत के बिना अनुस्थित रहता है,
तो उसका स्थान रिक्त हो जाएगा ।
(2) कोई निदेशक उस प्राधिकारी को जिसने उसे नियुक्त या नामनिर्देशित किया था, लिखित सूचना देकर अपना त्याग कर सकेगा और ऐसे प्राधिकारी द्वारा उसका त्यागपत्र स्वीकार कर लिए जाने पर या यदि उसका त्यागपत्र शीघ्र स्वीकार नहीं किया जाता है तो ऐसे प्राधिकारी द्वारा त्यागपत्र की प्राप्ति के तीन मास के अवसान पर, यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद रिक्त कर दिया है ।
10. अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक के पद में आकस्मिक रिक्ति-यदि, अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक, अंग शैथिल्य के कारण या अन्यथा, अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हो जाता है या छुट्टी पर या अन्यथा ऐसी परिस्थितियों में अनुपस्थित है, जिनसे उसकी नियुक्ति में रिक्ति अंतवर्लित नहीं है, तो केंद्रीय सरकार उसकी अनुपस्थिति के दौरान उसके स्थान पर कार्य करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगी ।
11. बोर्ड के अधिवेशन-(1) बोर्ड के अधिवेशन ऐसे समय और स्थानों पर होंगे और वह अपने अधिवेशनों में कामकाज के संबंध में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का अनुपालन करेंगे, जो विहित किए जाएं ।
(2) अध्यक्ष, या यदि किसी कारण से वह बोर्ड के किसी अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो, प्रबंध निदेशक, या अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, दोनों के अधिवेशन में उपस्थित होने कर दशा में, अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त नामनिर्देशित कोई अन्य निदेशक, और ऐसे नामनिर्देशन के अभाव में अधिवेशन में उपस्थित निदेशकों द्वारा अपनों में से निर्वाचित कोई निदेशक अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा ।
(3) बोर्ड के किसी अधिवेशन में उठने वाले सभी प्रश्नों का विनिश्चय उपस्थित और मतदान करने वाले निदेशकों के बहुमत से किया जाएगा और मतों के बराबर होने की दशा में अध्यक्ष का या उसकी अनुपस्िथति में सभापतित्व करने वाले व्यक्ति का द्वितीय या निर्णायक मत होगा ।
12. कार्यपालिका समिति और अन्य समितियां-(1) बोर्ड एक कार्यपालिका समिति का गठन कर सकेगा जिसमें उतने निदेशक होंगे जितने विहित किए जाएं ।
(2) कार्यपालिका समिति ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगी जो विहित किए जाएं या जो बोर्ड द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।
(3) बोर्ड, या तो पूर्णतः निदेशकों से या पूर्णतः अन्य व्यक्तियों से या भागतः निदेशकों से और भागतः अन्य व्यक्तियों से, जिन्हें वह ठीक समझे, मिल कर बनने वाली अन्य समितियां ऐसे प्रयोजनों के लिए, गठित कर सकेगा, जिनका वह विनिश्चय करे और इस प्रकार गठित कोई समिति ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगी जो बोर्ड द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।
(4) इस धारा के अधीन गठित कार्यपालिका समिति या किन्हीं अन्य समितियों के अधिवेशन, ऐसे समय और स्थानों पर होंगे और वे अपने अधिवेशनों के संचालन में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेंगी जो विहित किए जाएं ।
13. बोर्ड के निदेशक या उसकी समिति के सदस्य का कुछ मामलों में अधिवेशनों में भाग न लेना-बोर्ड का कोई निदेशक या किसी समिति का कोई सदस्य, जिसका बोर्ड या उसकी समिति के अधिवेशनों में विचार के लिए आने वाले किसी विषय में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष धन संबंधी हित है, संसुगत परिस्थितियां उसकी जानकारी में आने के पश्चात् यथासंभव शीघ्र ऐसे अधिवेशन में अपने हित का स्वरूप प्रकट करेगा और यह प्रकटीकरण, यथास्थिति, बोर्ड या समिति के कार्यवृत्त में अभिलिखित किया जाएगा और वह निदेशक या सदस्य उस विषय के सबंध में बोर्ड या समिति के किसी विचार-विमर्श या विनिश्चय में कोई भाग नहीं लेगा ।
अध्याय 4
राष्ट्रीय आवास बैंक का कारबार
14. राष्ट्रीय आवास बैंक का कारबार-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रीय आवास बैंक, निम्नलिखित में से सभी या किसी प्रकार का कारबार कर सकेगा, अर्थात्: -
(क) आवास वित्त संस्थाओं का संवर्धन या स्थापन करना और उनकी सहायता करना या उनके संवर्धन, स्थापन और समर्थन में सहयोग देना;
[(ख) आवास वित्त संस्थाओं, अनुसूचित बैंकों, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों या किसी अन्य संस्था या ऐसे वर्ग की संस्थाओं को, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित की जाएं, आवास क्रियाकलापों के लिए उधार और अग्रिम देना या किसी भी प्रकार की किसी अन्य रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करना;
(खक) आवास या आवासीय नगरी एवं आवास-विकास अथवा गंदी बस्ती सफाई परियोजनाओं के लिए उधार और अग्रिम देना;]
(ग) प्रत्येक अन्य प्रकार के स्टाकों, शेयरों, बंधपत्रों, डिबेंचरों और प्रतिभूतियों में, अभिदाय करना या उनका क्रय करना;
(घ) आवास वित्त संस्थाओं की वित्तीय बाध्यताओं की गारंटी देना और आवास वित्त संस्थाओं के प्रत्येक अन्य प्रकार के स्टाकों, शेयरों, बंधपत्रों, डिबेंचरों और प्रतिभूतियों की पुरोधृति की हामीदारी करना;
(ङ) विनिमय-पत्रों, वचनपत्रों, बंधपत्रों, डिबेंचरों, हुंडियों, कूपनों और किसी भी नाम से कही जाने वाली अन्य लिखतों का आहरण, प्रतिग्रहण, मितिकाटे पर भुगतान या पुनः मितिकाटे पर भुगतान, क्रय या विक्रय करना और उनका कारबार करना;
[(ङक) अनुसूचित बैंकों या आवास वित्तीय संस्थाओं से संबंधित, स्थावर संपत्ति के बंधक या उस पर भार द्वारा प्रत्याभूत किन्हीं उधारों या अग्रिमों का क्रय, विक्रय या अन्यथा उनमें व्यवहार करना;
(ङख) एक या अधिक न्यासों का सृजन करना और उधारों या अग्रिमों को, उनकी प्रतिभूतियों सहित या उनके बिना, ऐसे न्यासों को प्रतिफल के लिए अंतरित करना;
(ङग) राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा धृत उधारों या अग्रिमों को, अपास्त करना और इस प्रकार अपास्त किए गए ऐसे उधारों और अग्रिमों पर आधारित प्रतिभूतियों को ऋण बाध्यताओं, फायदाप्रद हित के न्यास प्रमाणपत्रों अथवा अन्य लिखतों के रूप में, जिन्हें किसी भी नाम से पुकारा जाए, निर्गमित करना और उनका विक्रय करना और ऐसी प्रतिभूतियों के धारकों के लिए न्यासी के रूप में कार्य करना;
(ङघ) आवास वित्त क्रियाकलाप करने के लिए एक या अधिक पारस्परिक निधियों की स्थापना करना;
(ङङ) आवास बंधक बीमा का कार्य करना और उसमें भाग लेना;]
1[(च) इस अधिनियम के अधीन अपने सभी या किन्हीं कृत्यों को करने के लिए कंपनियों, बंधक बैंकों, समनुषंगियों, सोसाइटियों, न्यासों या व्यक्तियों के ऐसे अन्य संगम का, जिसे वह ठीक समझे, संवर्धन करना, बनाना या संचालन करना या उनके संवर्धन, बनाने या संचालन में सहयोजित होना;]
(छ) आश्रय, आवास और लोगों के निवास से संबंधित या उसके संबंध में सन्निर्माण तकनीकों और अन्य अध्ययनों पर अनुसंधान और सर्वेक्षण करना;
(ज) आवास के लिए साधन जुटाने और उधार देने के प्रयोजन के लिए एक या अधिक स्कीमें बनाना;
[(जज) स्वैच्छिक निक्षेप (उन्मुक्ति और छूट) अधिनियम, 1991 (1991 का 47) की धारा 2 के खंड (क) में निर्दिष्ट निक्षेपों का प्रतिग्रहण करने के प्रयोजन के लिए स्कीम तैयार करना और ऐसे निक्षेपों की रकम का चालीस प्रतिशत धारा 37 के अधीन सृजित किसी विशेष निधि में जमा करना;]
(झ) समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए एक या अधिक स्कीमें तैयार करना, जिन्हें केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी अन्य स्रोत द्वारा सहायता दी जा सकेगी;
(ञ) आवास से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, सेमीनार और विचार-गोष्ठी आयोजित करना;
(ट) आवास वित्त संस्थाओं को सुव्यवस्थित आधारों पर उनकी प्रगति सुनिश्चित करने के लिए मार्ग दर्शन उपलब्ध कराना;
(ठ) आवास वित्त संस्थाओं को तकनीकी और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराना;
(ड) अपने समग्र कृत्यों के निर्वहन में भारतीय जीवन बीमा निगम, भारतीय यूनिट ट्रस्ट, भारतीय साधारण जीवन बीमा निगम और अन्य वित्तीय संस्थाओं के साथ समन्वय करना;
(ढ) इस अधिनियम के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक को सौंपे गए कर्तव्यों के अनुपालन में सभी शक्तियों और कृत्यों का प्रयोग करना;
(ण) केंद्रीय सरकार, राज्य सरकार या रिजर्व बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा प्राधिकृत किसी प्राधिकरण के अभिकर्ता के रूप में कार्य करना;
(त) किसी अन्य प्रकार का कारबार करना जिसे केंद्रीय सरकार, रिजर्व बैंक की सिफारिश पर प्राधिकृत करे;
(थ) साधारणतया, ऐसे सभी विषय और बातों के संबंध में कार्य करना जो इस अधिनियम के अधीन उसकी शक्तियों के प्रयोग या उसके कर्तव्यों के निर्वहन के लिए आनुषंगिक या परिणामिक हैं ।
15. राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा उधार लिया जाना और निक्षेपों का प्रतिग्रहण-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के प्रयोजनों के लिए-
(क) केंद्रीय सरकार की प्रत्याभूति के सहित या उससे रहित बंधपत्र और डिबेंचर, ऐसी रीति से और ऐसे निबंधनों पर जो विहित किए जाएं, पुरोधृत कर सकेगा और उनका विक्रय कर सकेगा;
(ख) [केंद्रीय सरकार, अनुसूचित बैंकों, वित्तीय संस्थाओं, पारस्परिक निधियोंट से और उस सरकार द्वारा अनुमोदित किसी अन्य प्राधिकरण या संगठन या संस्था से, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो करार पाई जाएं, धन उधार ले सकेगा;
(ग) 1[ऐसी अवधि के अवसान के पश्चात् और ऐसे निबंधनों पर, जो रिजर्व बैंक द्वारा साधारणतया या विशिष्टतया, अनुमोदित किए जाएं, प्रतिसंदेय निक्षेपट प्रतिगृहीत कर सकेगा:
[परंतु इस खंड की कोई बात बैंक द्वारा धारा 14 के खंड (जज) के अनुसरण में तैयार की गई स्कीम के अधीन प्रतिगृहीत निक्षेपों को लागू नहीं होगी;]
(घ) रिजर्व बैंक से, -
1[(i) ऐसे उधार और अग्रिमों के रूप में और साधारणतः ऐसी रीति से और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो रिजर्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, वित्तीय सहायता अभिप्राप्त कर सकेगा;]
(ii) भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 46घ के अधीन स्थापित राष्ट्रीय आवास प्रत्यय (दीर्घकालिक प्रवर्तन) निधि में से या उस धारा में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों में से किसी के लिए धन उधार ले सकेगा;
(ङ) दी गई सेवाओं के लिए ऐसा पारिश्रमिक, कमीशन, प्रतिबद्धता प्रभार, परामर्श प्रभार, सेवा प्रभार, स्वामित्व, प्रीमियम, अनुज्ञप्ति फीस, और किसी भी प्रकार का कोई अन्य प्रतिफल, प्राप्त कर सकेगा -
(च) सरकार या किसी अन्य स्रोत से दान, अनुदान, संदान या उपकृति प्राप्त कर सकेगा ।
(2) केंद्रीय सरकार, राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा अनुरोध किए जाने पर, राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा पुरोधृत बंधपत्रों और डिबेंचरों के मूलधन के प्रतिसंदाय और ऐसी दर से, जो वह सरकार नियत करे, ब्याज के संदाय की बाबत प्रत्याभूति दे सकेगी ।
16. विदेशी करेंसी में उधार-(1) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) में या विदेशी मुद्रा से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रीय आवास बैंक, इस अधिनियम के अधीन ऋण और उधार देने के प्रयोजन के लिए भारत या विदेश के किसी बैंक या वित्तीय संस्था से ऐसी रीति से और ऐसी शर्तों पर जो रिजर्व बैंक के परामर्श से विहित की जाएं, केंद्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से विदेशी करेंसी उधार ले सकेगा ।
(2) केंद्रीय सरकार, जहां आवश्यक हो, राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा उपधारा (1) के अधीन लिए गए किसी उधार या उसके किसी भाग के मूलधन के प्रतिसंदाय और ब्याज और अन्य आनुषंगिक प्रभारों के संदाय की बाबत प्रत्याभूति दे सकेगी ।
[16क. उधार लेने वाले को सहायता प्रतिभूति के रूप में प्रस्थापित संपत्ति पर प्रभार के रूप में कब प्रवर्तित होगी-(1) जहां कोई व्यक्ति या संस्था, राष्ट्रीय आवास बैंक अपनी या उस संस्था की किसी स्थावर संपत्ति की प्रतिभूति पर या ऐसे किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति की प्रतिभूति पर, जिसकी संपत्ति ऐसी सहायता के लिए सांपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में प्रस्थापित की जाती है, कोई वित्तीय सहायता चाहती है, वहां, यथास्थिति, ऐसा व्यक्ति या संस्था या ऐसा अन्य व्यक्ति, इस अधिनियम की तीसरी अनुसूची में वर्णित प्ररूप में लिखित घोषणा को, जिसमें उस स्थावर संपत्ति की जो ऐसी सहायता के लिए, यथास्थिति, प्रतिभूति या सांपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में प्रस्थापित किए जाने के लिए प्रस्तावित है, विशिष्टियां कथित करते हुए निष्पादित कर सकेगा और इससे सहमत होगा कि ऐसी सहायता से, यदि अनुदत्त की गई है तो संबंधित शोध्य धन, ऐसी स्थावर संपत्ति पर भार होंगे और यदि ऐसी घोषणा की प्राप्ति पर, राष्ट्रीय आवास बैंक, पूर्वोक्त व्यक्ति या संस्था को कोई वित्तीय सहायता अनुदत्त करता है तो ऐसी सहायता से संबंधित शोध्य धन, इस प्रकार विनिर्दिष्ट स्थावर संपत्ति की बाबत कोई पूर्विक भार या बंधक धारण करने वाले किसी अन्य लेनदार के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस धारा के उपबंधों के आधार पर पूर्वोक्त घोषणा में विनिर्दिष्ट संपत्ति पर भार होगा ।
(2) जहां किसी व्यक्ति या किसी संस्था द्वारा उपधारा (1) में निर्दिष्ट वित्तीय सहायता के लिए प्रतिभूति के रूप में कोई और स्थावर संपत्ति प्रस्थापित की जाती है, वहां ऐसा व्यक्ति या संस्था, जहां तक हो सके, इस अधिनियम की तीसरी अनुसूची में वर्णित प्ररूप में नई घोषणा निष्पादित कर सकेगा, जिस पर ऐसी सहायता से संबंधित शोध्य धन भी, इस धारा के उपबंधों के आधार पर, ऐसी नई घोषणा में विनिर्दिष्ट संपत्ति पर भार होगा ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन की गई घोषणा, पूर्वोक्त व्यक्ति या संस्था द्वारा, राष्ट्रीय आवास बैंक के पूर्व अनुमोदन से, किसी समय परिवर्तित या प्रतिसंहृत की जा सकेगी ।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन की गई प्रत्येक घोषणा, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के उपबंधों के अधीन करार के रूप में रजिस्टर किए जाने योग्य दस्तावेज समझी जाएगी और ऐसी कोई घोषणा उस समय तक प्रभावी नहीं होगी जब तक वह इस प्रकार रजिस्टर नहीं की जाती है ।
16ख. न्यास में धारित की जाने वाली रकम और प्रतिभूति-(1) उधार लेने वाली संस्था द्वारा, राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा पूर्णतः या भागतः वित्त पोषित या पुनः वित्त पोषित उधारों और अग्रिमों के प्रतिसंदाय या वसूली में प्राप्त कोई धनराशियां, राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा अनुदत्त सौकर्य सुविधा की सीमा तक और शेष बकाया को, राष्ट्रीय आवास बैंक की ओर से न्यास में उधार लेने वाली संस्था द्वारा प्राप्त किया गया समझा जाएगा और तद्नुसार ऐसी संस्था द्वारा राष्ट्रीय आवास बैंक को संदत्त किया जाएगा ।
(2) जहां कोई सौकर्य राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा किसी उधार लेने वाली संस्था को अनुदत्त किया गया है, वहां किसी ऐसे संव्यवहार मद्दे जिसके संबंध में ऐसा सौकर्य अनुदत्त किया गया है, सभी प्रतिभूतियां, जो ऐसी उधार लेने वाली संस्था द्वारा धारित हैं या धारित की जा सकती हैं, ऐसी संस्था द्वारा राष्ट्रीय आवास बैंक की ओर से न्यास में धारित की जाएंगी ।]
17. अधिकार अंतरित करने की शक्ति-राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा दिए गए किसी ऋण का उधार या वसूल की जा सकने वाली किसी रकम के संबंध में उसके अधिकारों और हितों का (जिसके अंतर्गत उनसे आनुषंगिक कोई अन्य अधिकार भी हैं) राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा पूर्णतः या भागतः अंतरण किसी लिखत को निष्पादित या जारी करके या पृष्ठांकन द्वारा किसी लिखत का अंतरण करके या किसी अन्य रीति से, जिससे ऐसे ऋण या उधार से संबंधित अधिकार और हित विधिपूर्वक अंतरित किए जा सकते हैं, किया जा सकेगा और ऐसे अंतरण के होते हुए भी, राष्ट्रीय आवास बैंक, अंतरिती की ओर से भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) की धारा 3 के अर्थ में न्यासी के रूप में कार्य कर सकेगा ।
18. अधिकार अर्जित करने की शक्ति-राष्ट्रीय आवास बैंक को यह अधिकार होगा कि वह [किसी संस्था] द्वारा दिए गए किसी ऋण या उधार या वसूल की जा सकने वाली किसी रकम के संबंध में ऐसी संस्था के अधिकारों और हितों का (जिनके अंतर्गत उनसे आनुषंगिक कोई अन्य अधिकार भी हैं), अंतरण या समनुदेशन द्वारा, पूर्णतः या भागतः अर्जन किसी लिखत को निष्पादित या जारी करके या किसी लिखत को अंतरण करके या किसी अन्य रीति से कर ले जिससे ऐसे ऋण या उधार से संबंधित अधिकार और हित विधिपूर्वक अंतरित किए जा सकते हैं ।
[18क. रजिस्ट्रीकरण से छूट-रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) की धारा 17 की उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, -
(क) राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा, आवास वित्त संस्थाओं और अनुसूचित बैंकों द्वारा अनुदत्त ऋणों को प्रतिभूत करने के लिए, वहां तक के सिवाय जहां तक वह रजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा प्रदान किए गए अविभक्त हित के लिए उसके धारक को हकदार बनाती है, और न कि किसी स्थावर संपत्ति में किसी अधिकार, हक या हित का सृजन, घोषणा, समनुदेशन,सीमित करने या उसे समाप्त करने के लिए, जारी की गई ऋण बाध्यताओं या फायदाप्रद हित के न्यास प्रमाणपत्र या अन्य लिखतों के रूप में, चाहे उसका कोई भी नाम हो, कोई लिखत, जिसके द्वारा राष्ट्रीय आवास बैंक ने ऐसे ऋणों और उनके लिए प्रतिभूतियों के संबंध में अधिकार और हित अर्जित कर लिया है ; या
(ख) खंड (क) में विनिर्दिष्ट ऐसी लिखतों के किसी अंतरण,
के लिए कोई अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अपेक्षित नहीं होगा ।
18ख. शोध्यों की भू-राजस्व के बकायों के रूप में वसूली-जहां कोई रकम राष्ट्रीय आवास बैंक को किसी करार के अधीन, चाहे वह बैंक न्यासी के रूप में कार्य कर रहा हो या अन्यथा, आवास वित्त संस्थाओं और अनुसूचित बैंकों के ऋणों को प्रतिभूत करने की बाबत शोध्य है, वहां राष्ट्रीय आवास बैंक, वसूली के किसी अन्य ढंग पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राज्य सरकार को उसे शोध्य रकम की वसूली के लिए आवेदन कर सकेगा और यदि राज्य सरकार या ऐसे प्राधिकारी का, जिसे वह सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, यह समाधान हो जाता है कि कोई रकम शोध्य है तो वह कलैक्टर को उस रकम के लिए एक प्रमाणपत्र जारी कर सकेगा और कलैक्टर उस रकम को उस रीति में वूसल करने के लिए कार्रवाई करेगा जिसमें भू-राजस्व के बकायों की वसूली की जाती है ।]
19. सौकर्य के लिए शर्तें अधिरोपित करने की शक्ति-किसी उधार लेने वाली [संस्था] के साथ इस अध्याय के अधीन कोई संव्यवहार करने में राष्ट्रीय आवास बैंक ऐसी शर्तें अधिरोपित कर सकेगा, जो वह राष्ट्रीय आवास बैंक के हितों के संरक्षण के लिए आवश्यक या समीचीन समझे ।
20. करार की गई अवधि से पूर्व प्रतिसंदाय की मांग करने की शक्ति-किसी करार में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रीय आवास बैंक लिखित सूचना द्वारा, किसी उधार लेने वाली 1[संस्था] से, राष्ट्रीय आवास बैंक के प्रति उसके दायित्वों का पूर्णतः तुरंत उन्मोचन करने की अपेक्षा कर सकेगा यदि-
(क) बोर्ड को यह प्रतीत होता है कि ऋण या उधार के लिए आवेदन में किसी तात्त्विक विशिष्टि की बाबत मिथ्या या भ्रामक जानकारी दी गई थी; या
(ख) उधार लेने वाली 1[संस्था] ने ऋण या उधार के विषय में राष्ट्रीय आवास बैंक के साथ करार के किन्हीं निबंधनों का अनुपालन नहीं किया है; या
(ग) यह युक्तियुक्त आशंका है कि उधार लेने वाली 1[संस्था] अपने ऋणों का संदाय करने में असमर्थ है या उसके बारे में समापन की कार्यवाहियां प्रारंभ की जा सकती हैं; या
(घ) किसी कारण से राष्ट्रीय आवास बैंक के हितों के संरक्षण के लिए ऐसा करना आवश्यक है ।
21. राष्ट्रीय आवास बैंक की अभिलेखों तक पहुंच होना-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक की ऐसी किसी 1[संस्था] के, जो राष्ट्रीय आवास बैंक से कोई प्रत्यय सुविधाएं लेने की ईप्सा करता है, ऐसे सभी अभिलेखों तक और ऐसे किसी व्यक्ति के, जो ऐसी 1[संस्था] से कोई प्रत्यय सुविधाएं लेने की ईप्सा करता है, ऐसे सभी अभिलेखों तक पहुंच होगी जिनका परिशीलन राष्ट्रीय आवास बैंक को ऐसी 1[संस्था] को वित्तीय या अन्य सहायता का प्रबंध करने के संबंध में या उस 1[संस्था] द्वारा ऐसे व्यक्ति को दिए गए किसी ऋण या उधार का पुनर्वित्त पोषण करने के संबंध में आवश्यक प्रतीत हो ।
(2) राष्ट्रीय आवास बैंक उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी संस्था या व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस उपधारा में निर्दिष्ट किसी अभिलेख की प्रति उसे दे और, यथास्थिति, वह संस्था या व्यक्ति ऐसी अपेक्षा का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगा ।
22. ऋण या उधार की विधिमान्यता का प्रश्नगत न किया जाना-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में दिए गए किसी ऋण या उधार की विधिमान्यता केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि ऐसी अन्य किसी विधि की या किसी संकल्प या उधार लेने वाली 1[संस्था] के गठन को विनियमित करने वाली किसी लिखत की अपेक्षाओं का अनुपालन नहीं किया गया है:
परंतु इस धारा की कोई बात किसी कंपनी या सहकारी सोसाइटी को तब उधार या अग्रिम अभिप्राप्त करने के लिए समर्थ नहीं बनाएगी जब ऐसी कंपनी या सहकारी सोसाइटी के गठन से संबंधित लिखत ऐसी कंपनी या सहकारी सोसाइटी को ऐसा करने के लिए सशक्त नहीं बनाती है ।
23. राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा अपने स्वयं के बंधपत्रों या डिबेंचरों के प्रति ऋण या उधार न दिया जाना-राष्ट्रीय आवास बैंक अपने स्वयं के बंधपत्रों या डिबेंचरों की प्रतिभूति पर कोई ऋण या उधार नहीं देगा ।
24. निरीक्षण करने की शक्ति-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक, ऐसी 1[संस्था] का, जिसे राष्ट्रीय आवास बैंक ने कोई ऋण या उधार दिया है या कोई अन्य वित्तीय सहायता दी है, तथा उसकी बहियों और लेखाओं का, निरीक्षण किसी भी समय, ऐसी 1[संस्था] के अपने एक या अधिक अधिकारियों द्वारा करा सकेगा और रिजर्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट किए जाने पर ऐसा अवश्य कराएगा; और राष्ट्रीय आवास बैंक ऐसे निरीक्षण के बारे में अपनी रिपोर्ट की एक प्रति 1[संस्था] को देगा ।
(2) 1[संस्था] के प्रत्येक अधिकारी, कर्मचारी या उसके संपूर्ण या भागतः कार्यकलाप या उसके भाग के भारसाधक अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का यह कर्तव्य होगा कि वे अपनी अभिरक्षा या शक्ति के अधीन सब ऐसी बहियों, लेखाओं और अन्य दस्तावेजों को उपधारा (1) के अधीन निरीक्षण कर रहे किसी अधिकारी के समक्ष पेश करे तथा उस [संस्था] के कार्यकलाप से संबंधित ऐसा कोई विवरण और जानकारी, जैसा उक्त अधिकारी उससे अपेक्षा करे, उतने समय के भीतर दे, जितना उक्त अधिकारी विनिर्दिष्ट करे ।
25. प्रत्यय-जानकारी संग्रह करने की शक्ति-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के प्रयोजन के लिए, किसी 1[संस्था] को किसी भी समय यह निदेश दे सकेगा कि वह उसे प्रत्यय-जानकारी ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के भीतर दे जो राष्ट्रीय आवास बैंक समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे ।
(2) प्रत्येक 1[संस्था,] तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में या उसके गठन को विनियमित करने वाली किसी लिखत या उसके घटकों के साथ उसके व्यवहार की गोपनीयता से संबंधित उसके द्वारा निष्पादित किसी करार में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए किन्हीं निर्देशों का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगी ।
(3) राष्ट्रीय आवास बैंक, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के प्रयोजन के लिए, केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारों, स्थानीय प्राधिकारियों, रिजर्व बैंक, किसी बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट वित्तीय या अन्य संस्थाओं से प्रत्यय-जानकारी या अन्य जानकारी ले सकेगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा और धारा 26 के प्रयोजनों के लिए, प्रत्यय-जानकारी से, निम्नलिखित से संबंधित जानकारी अभिप्रेत है, -
(i) ऋण और उधार की रकम तथा आवास के प्रयोजन के लिए दी गई अन्य प्रत्यय-सुविधाएं;
(ii) ऐसे ऋणों या उधार या अन्य प्रत्यय-सुविधाओं के लिए ली गई प्रतिभूति की प्रकृति;
(iii) दी गई प्रत्याभूतियां; और
(iv) कोई अन्य जानकारी, जो उधार लेने वाले की प्रत्यय-योग्यता से संबंधित है ।
26. जानकारी प्रकाशित करने की शक्ति-यदि राष्ट्रीय आवास बैंक लोकहित में ऐसा करना आवश्यक समझता है, तो वह इस अधिनियम के अधीन अपने द्वारा अभिप्राप्त किसी प्रत्यय-जानकारी या अन्य जानकारी को, ऐसे समेकित प्ररूप में या किसी अन्य प्ररूप में, जैसा वह ठीक समझे, प्रकाशित कर सकेगा ।
27. सलाहकार सेवाएं-राष्ट्रीय आवास बैंक, केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारों, स्थानीय प्राधिकारियों और आवास से संबंधित अन्य अभिकरणों को, निम्नलिखित की बाबत सलाहकार सेवाएं उपलब्ध करा सकेगा-
(क) ऐसी संपूर्ण नीतियों का बनाया जाना जिनका उद्देश्य आवास और आवास वित्त संस्थाओं के विकास का संवर्धन करना है;
(ख) आश्रयस्थान, आवास और मानववास पर प्रभाव डालने वाले विषयों से संबंधित विधान ।
अध्याय 5
निक्षेप प्राप्त करने वाली आवास वित्त संस्थाओं से संबंधित उपबंध
28. निक्षेप की परिभाषा-इस अध्याय में निक्षेप" पद का वही अर्थ है जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934(1934 का 2) की धारा 45झ में है ।
29. कुछ मामलों में अध्याय का लागू न होना-(1) इस अध्याय के उपबंध किसी ऐसी आवास वित्त संस्था द्वारा, जो फर्म या व्यष्टियों का अनिगमित संगम है, प्रतिगृहीत निक्षेपों को लागू नहीं होंगे ।
(2) शंकाओं के निराकरण के लिए, यह घोषित किया जाता है कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट फर्म और व्यष्टियों के अनिगमित संगम, भारतीय रिवर्ज बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अध्याय 3ग के उपबंधों से शासित होते रहेंगे ।
[29क. रजिस्ट्रीकरण और शुद्ध स्वामित्व निधि की अपेक्षा-(1) इस अध्याय में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, किसी आवास वित्त संस्था का कारबार, -
(क) इस अध्याय के अधीन दिया गया रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त किए बिना; और
(ख) पच्चीस लाख रुपए की या ऐसी उच्चतर रकम रखे बिना, जो राष्ट्रीय आवास बैंक अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, शुद्ध स्वामित्वाधीन निधि,
प्रारंभ नहीं करेगी या नहीं चलाएगी ।
(2) प्रत्येक ऐसी आवास वित्त संस्था, ऐसे प्ररूप में, जो राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, राष्ट्रीय आवास बैंक को रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करेगी:
परंतु ऐसी आवास वित्त संस्था, जो राष्ट्रीय आवास बैंक (संशोधन) अधिनियम, 2000 के प्रारंभ पर विद्यमान कंपनी है, ऐसे प्रारंभ से छह मास की समाप्ति के पूर्व राष्ट्रीय आवास बैंक को रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करेगी और उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, तब तक आवास वित्त संस्था का कारबार करना चालू रख सकेगी जब तक रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र उसे दे दिया नहीं जाता या रजिस्ट्रीकरण के आवेदन के नामंजूर करने की संसूचना उसे नहीं दे दी जाती ।
(3) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई आवास वित्त संस्था, जो राष्ट्रीय आवास बैंक (संशोधन) अधिनियम, 2000 के प्रारंभ पर विद्यमान कंपनी है और जो शुद्ध स्वामित्वाधीन निधि पच्चीस लाख रुपए से कम रखती है, ऐसी संस्था को शुद्ध स्वामित्वाधीन निधि की अपेक्षा को पूरा करने में समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए आवास वित्त संस्था का कारबार, -
(क) ऐसे प्रारंभ से तीन वर्ष की अवधि के लिए; या
(ख) ऐसी और अवधि के लिए, जो राष्ट्रीय आवास बैंक, ऐसा करने के लिए कारणों को लेखबद्ध करने के पश्चात् बढ़ाए,
इस शर्त के अधीन रहते हुए, चालू रख सकेगी कि ऐसी संस्था, शुद्ध स्वामित्वाधीन निधि की अपेक्षा पूरा करने के तीन मास के भीतर ऐसी पूर्ति के बारे में राष्ट्रीय आवास बैंक को सूचित करेगी:
परंतु इस उपधारा के अधीन कारबार चालू रखने के लिए अनुज्ञात अवधि, किसी भी दशा में कुल मिलाकर छह वर्ष से अधिक नहीं होगी ।
(4) राष्ट्रीय आवास बैंक, रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन पर विचार करने के प्रयोजन के लिए, ऐसी आवास वित्त संस्था की बहियों के निरीक्षण द्वारा या अन्यथा यह समाधान करने की अपेक्षा कर सकेगा कि निम्नलिखित शर्तें पूरी कर दी गई हैं: -
(क) कि आवास विकास संस्था, अपने वर्तमान या भावी निक्षेपकों को, जब भी उनके दावे प्रोद्भूत हों, पूर्ण संदाय करने की स्थिति में हैं या होगी;
(ख) कि आवास वित्त संस्था के कार्यकलापों का संचालन ऐसी रीति में नहीं किया जा रहा है या किए जाने की संभावना नहीं है जो उसके वर्तमान या भावी निक्षेपकों के हित के लिए हानिकारक हो;
(ग) कि आवास वित्त संस्था के प्रबंध या प्रस्तावित प्रबंध का साधारण स्वरूप लोकहित या उसके निक्षेपकों के हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नहीं होगा;
(घ) कि आवास वित्त संस्था के पास पर्याप्त पूंजी संरचना और उपार्जन की संभावनाएं हैं;
(ङ) कि आवास वित्त संस्था को भारत में कारबार प्रारंभ करने या चलाने के लिए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र देने से लोकहित की पूर्ति होगी;
(च) रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के दिए जाने से, देश में आवास वित्त सैक्टर के प्रचालन और संवृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा; और
(छ) अन्य कोई शर्त, जिसका पूरा किया जाना राष्ट्रीय आवास बैंक की राय में यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होगा कि आवास वित्त संस्था द्वारा भारत में कारबार का प्रारंभ करना या उसे चलाना लोकहित या निक्षेपकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नहीं होगा ।
(5) राष्ट्रीय आवास बैंक, यह समाधान हो जाने के पश्चात् कि उपधारा (4) में विनिर्दिष्ट शर्तें पूरी कर दी गई हैं, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो वह अधिरोपित करना ठीक समझे, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र दे सकेगा ।
(6) राष्ट्रीय आवास बैंक, इस धारा के अधीन किसी आवास वित्त संस्था को दिया गया रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर सकेगा, यदि ऐसी संस्था, -
(i) भारत में आवास वित्त संस्था का कारबार चलाना बंद कर देती है; या
(ii) किसी ऐसी शर्त का अनुपालन करने में असफल रहती है जिसके अधीन रहते हुए उसे रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र दिया गया था; या
(iii) उपधारा (4) के खंड (क) से खंड (छ) में निर्दिष्ट शर्तों में से किसी को पूरा करने में किसी समय असफल रहती है; या
(iv) (क) इस अध्याय के उपबंधों के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा दिए गए किसी निर्देश के अनुपालन में; या
(ख) किसी विधि की अपेक्षा के अनुसार या इस अध्याय के उपबंधों के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा दिए गए किसी निदेश या आदेश के अनुसार लेखाओं को रखने में; या
(ग) अपनी लेखा बहियों और अन्य सुसंगत दस्तावेजों को निरीक्षण के लिए, जब उनकी राष्ट्रीय आवास बैंक के किसी निरीक्षण प्राधिकारी द्वारा ऐसी मांग की जाए तो, प्रस्तुत करने या देने में, असफल रहती है; या
(ध्) इस अध्याय के उपबंधों के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा दिए गए किसी आदेश द्वारा निक्षेप स्वीकार करने से प्रतिषिद्ध कर दी गई है और ऐसा आदेश कम से कम तीन मास की अवधि के लिए प्रवर्तन में रहा है:
परंतु इस आधार पर, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को रद्द करने से पूर्व कि आवास वित्त संस्था खंड (ii) के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल हो गई है या उपधारा (4) के खंड (क) से खंड (छ) में निर्दिष्ट शर्तों में से किसी को पूरा करने में असफल हो गई है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक, जब तक कि उसकी यह राय न हो कि रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को रद्द करने में हुआ विलंब लोकहित या निक्षेपकों या आवास वित्त संस्था के हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला होगा, ऐसी संस्था को, ऐसे निबंधनों पर, जो राष्ट्रीय आवास बैंक ऐसे उपबंधों का अनुपालन या ऐसी शर्त की पूर्ति कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए विनिर्दिष्ट करे, अवसर देगा :
परंतु यह और कि रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के रद्द करने का कोई आदेश करने से पूर्व ऐसी संस्था को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।
(7) रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन को रद्द करने या रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र रद्द करने के आदेश से व्यथित कोई आवास वित्त संस्था नामंजूरी या रद्दकरण के ऐसे आदेश की उसे संसूचना दिए जाने की तारीख से केंद्रीय सरकार को, उस तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर, जिसको खारिज करने या रद्द करने का ऐसा आदेश संसूचित किया जाता है, अपील कर सकेगी और जहां कोई अपील केंद्रीय सरकार को की जाती है वहां उसका और जहां ऐसी कोई अपील नहीं की जाती है, वहां राष्ट्रीय आवास बैंक का विनिश्चय अंतिम होगा:
परंतु अपील के खारिज करने का कोई आदेश करने से पूर्व ऐसी संस्था को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -
(ख्र्) शुद्ध स्वामित्वाधीन निधि" से अभिप्रेत है, -
(क) आवास वित्त संस्था के अंतिम तुलन-पत्र में प्रकटित रूप में समादत्त साधारण पूंजी और खुली आरक्षितियों का वह योग अभिप्रेत है जो उसमें से, -
(i) हानि का संचित अतिशेष;
(ii) आस्थगित राजस्व व्यय; और
(iii) अन्य अमूर्त आस्तियों,
की कटौती करने के पश्चात्; और
(ख) इसके अतिरिक्त, -
(1) ऐसी संस्था के, -
(i) उसकी समनुषंगियों;
(ii) उसी समूह की कंपनियों;
(iii) ऐसी अन्य सभी आवास वित्त संस्थाएं, जो कंपनियां हैं,
के अंशों में विनिधान; और
(2) ऐसे डिबेंचरों, बंधपत्रों, बकाया उधारों और अग्रिमों (इसके अंतर्गत अवक्रय और पट्टा वित्त भी है) के, जो-
(i) ऐसी कंपनी की समनुंषगियों; और
(ii) उसी समूह की कंपनियों,
को दिए गए हैं या उनके पास निक्षिप्त किए गए हैं, बही मूल्य के रूप में रकमों को उस सीमा तक, जिस तक ऐसी रकमें ऊपर (क) के दस प्रतिशत से अधिक है,
और घटाकर आता है ।
(ख्र्ख्र्) समनुषंगियों" और उसी समूह की कंपनियों" का वही अर्थ है जो उनका कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में है ।
29ख. आस्तियों का बनाए रखना-(1) प्रत्येक आवास वित्त संस्था, ऐसी अविल्लंगमित अनुमोदित प्रतिभूतियों में, जिनका मूल्यांकन ऐसी कीमत पर किया गया हो, जो ऐसी प्रतिभूतियों की चालू बाजार कीमत से अधिक न हो, उतनी रकम का भारत में विनिधान करेगी या विनिधान करती रहेगी जो किसी भी दिन कारबार बंद करने के समय, द्वितीय पूर्ववर्ती तिमाही के अंतिम कार्य दिवस को कारबार बंद करने के समय पर बकाया निक्षेपों के पांच प्रतिशत से अधिक नहीं होगी या ऐसी उच्चतर प्रतिशत होगी, जो पच्चीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, जो आवास बैंक अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।
(2) प्रत्येक आवास वित्त संस्था, भारत में किसी अनुसूचित बैंक में किसी खाते में निक्षेपों या निक्षेपों के प्रमाणपत्र (प्रभार या धारणाधिकार से मुक्त) के रूप में या राष्ट्रीय आवास बैंक में निक्षेपों द्वारा या राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा जारी बंधपत्रों के अभिदान द्वारा या भागतः ऐसे लेखे में या ऐसे निक्षेप में या अंशतः ऐसे अभिदान द्वारा ऐसी राशि, जो किसी दिन कारबार बंद होने पर उपधारा (1) के अधीन किए गए विनिधान के साथ दूसरी पूर्ववर्ती तिमाही के अंतिम कार्य दिवस पर कारबार के बंद होने पर आवास वित्त संस्था की बहियों में बकाया निक्षेपों के दस प्रतिशत से कम नहीं होगी या ऐसे उच्चतर प्रतिशत, जो पच्चीस प्रतिशत से अधिक नहीं हों, जिसे राष्ट्रीय आवास बैंक, समय-समय पर, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, बनाए रखेगी ।
(3) इस धारा के उपबंधों का अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए, राष्ट्रीय आवास बैंक ऐसी प्रत्येक आवास वित्त संस्था से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह एक विवरणी ऐसे प्ररूप में, ऐसी रीति से और ऐसी अवधि के लिए, जो राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, उसे दे ।
(4) यदि किसी आवास वित्त संस्था द्वारा किसी दिन कारबार बंद करने के समय पर विनिधान की गई रकम, उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट दर से कम हो जाती है तो ऐसी आवास वित्त संस्था, ऐसी कमी की बाबत, राष्ट्रीय आवास बैंक को, उस रकम पर, जो वास्तव में रखी गई या विनिधान की गई रकम में विनिर्दिष्ट प्रतिशत से कम हो जाती है, बैंक की दर से ऊपर तीन प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से शास्तिक ब्याज का संदाय करने के दायित्वाधीन होगी और जहां ऐसी कमी पश्चात्वर्ती तिमाहियों में जारी रहती है वहां शास्तिक ब्याज की दर प्रत्येक पश्चात्वर्ती तिमाही के लिए ऐसी कमी पर बैंक दर के ऊपर पांच प्रतिशत प्रतिवर्ष होगी ।
(5) (क) उपधारा (4) के अधीन संदेय शास्तिक ब्याज उस तारीख से, जिसको उसके संदाय की मांग करने वाली राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा जारी की गई सूचना की आवास वित्त संस्था पर तामील की जाती है, चौदह दिन की अवधि के भीतर संदेय होगा और आवास वित्त संस्था ऐसी अवधि के भीतर उसका संदाय करने में असफल रहने की दशा में, ऐसे प्रधान सिविल न्यायालय के निदेश द्वारा, जिसकी अधिकारिता उस क्षेत्र पर है, जहां व्यतिक्रमी आवास वित्त संस्था का कार्यालय स्थित है, शास्ति का उद्ग्रहण किया जा सकेगा और ऐसा निदेश राष्ट्रीय आवास वित्त संस्था द्वारा न्यायालय को इस निमित्त किए गए आवेदन पर ही दिया जाएगा ; और
(ख) जब न्यायालय खंड (क) के अधीन निदेश देता है तो वह आवास वित्त संस्था द्वारा संदेय राशि विनिर्दिष्ट करते हुए एक प्रमाणपत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाणपत्र उसी रीति से प्रवर्तनीय होगा मानो वह न्यायालय द्वारा किसी वाद में की गई एक डिक्री हो ।
(6) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, यदि राष्ट्रीय आवास बैंक का यह समाधान हो जाता है कि व्यतिक्रमी आवास वित्त संस्था के पास उपधारा (1) या उपधारा (2) के उपबंधों का अनुपालन करने में उसकी असफलता के लिए पर्याप्त कारण थे तो वह शास्तिक ब्याज के संदाय की मांग भी नहीं कर सकता है ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -
(i) अनुमोदित प्रतिभूतियों" से अभिप्रेत है किसी राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार की प्रतिभूतियों और ऐसे बंधपत्र जिनके मूलधन और उन पर ब्याज दोनों ही ऐसी किसी सरकार द्वारा पूर्ण रूप से और बिना शर्त प्रत्याभूत किए गए हों;
(ii) अविल्लंगमित अनुमोदित प्रतिभूतियों" के अंतर्गत ऐसी अनुमोदित प्रतिभूतियां भी हैं जो आवास वित्त संस्था द्वारा किसी अन्य संस्था के पास किसी अग्रिम या किसी अन्य ठहराव के लिए, उस सीमा तक जिस तक ऐसी प्रतिभूतियां किसी रीति में निकाली नहीं गई हैं या उनका उपयोग नहीं किया गया है या उन्हें विल्लंगमित नहीं किया गया है, जमा की गई हैं;
(iii) तिमाही" से मार्च, जून, सितम्बर या दिसम्बर के अंतिम दिन को समाप्त होने वाली तीन मास की अवधि अभिप्रेत है ।
29ग. आरक्षित निधि-(1) प्रत्येक आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, एक आरक्षित निधि का सृजन करेगी और उसमें प्रत्येक वर्ष अपने शुद्ध लाभ के बीस प्रतिशत से अन्यून ऐसी राशि का, जो लाभ और हानि लेखा में प्रकट की गई हो और कोई लाभांश घोषित किए जाने से पूर्व अंतरण करेगी ।
स्पष्टीकरण-ऐसी कोई आवास वित्त संस्था जिसने आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (ध्त्त्त्) के निबंधनानुसार कोई विशेष आरक्षित निधि सृजित और अनुरक्षित की है, इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए उसके द्वारा ऐसी विशेष आरक्षित निधि में उस वर्ष के लिए अंतरित किसी राशि को हिसाब में ले सकेगी ।
(2) आरक्षित निधि में से किसी राशि, जिसके अंतर्गत विशेष आरक्षित निधि की कोई ऐसी राशि है जिसे उपधारा (1) के निबंधनानुसार आरक्षित निधि के प्रयोजनों के लिए हिसाब में लिया गया है, का विनियोग ऐसी आवास वित्त संस्था द्वारा केवल उस प्रयोजन के लिए किया जाएगा जो राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किया जाए, अन्यथा नहीं और ऐसे प्रत्येक विनियोग की रिपोर्ट राष्ट्रीय आवास बैंक को ऐसे निकाले जाने की तारीख से इक्कीस दिन के भीतर की जाएगी :
परंतु राष्ट्रीय आवास बैंक, किसी विशिष्ट मामले में और पर्याप्त हेतुक दर्शित किए जाने पर इक्कीस दिन की अवधि को ऐसी और अवधि तक, जो वह उचित समझे, बढ़ा सकेगा या ऐसी रिपोर्ट करने में हुए किसी विलंब को माफ कर सकेगा ।
(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्रीय सरकार, राष्ट्रीय आवास बैंक की सिफारिश पर और किसी आवास वित्त संस्था की, जो एक कंपनी है, उसके निक्षेप दायित्वों के संबंध में समादत्त पूंजी और आरक्षित निधियों की पर्याप्तता को ध्यान में रखते हुए, लिखित आदेश द्वारा यह घोषित कर सकेगी कि उपधारा (1) के उपबंध ऐसी आवास वित्त संस्था को ऐसी अवधि के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, लागू नहीं होंगे :
परंतु ऐसा कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक उपधारा (1) के अधीन आरक्षित निधि में रकम, अंश प्रीमियम खाते में रकम सहित आवास वित्त संस्था की समादत्त पूंजी से कम नहीं है ।]
30. धन के निक्षेप की याचना करने वाले प्रास्पेक्टस या विज्ञापन का राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा विनियमन या प्रतिषेध-यदि राष्ट्रीय आवास बैंक लोकहित में ऐसा करना आवश्यक समझता है तो वह, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, -
(क) जनता से धन के निक्षेपों की याचना करने वाले किसी प्रास्पेक्टस या विज्ञापन के किसी आवास वित्त संस्था द्वारा निकाले जाने का विनियमन या प्रतिषेध कर सकेगा; तथा
(ख) वे शर्तें विनिर्दिष्ट कर सकेगा जिन पर कोई ऐसा प्रोस्पेक्टस या विज्ञापन उस दशा में, जिसमें कि उसका निकाला जाना प्रतिषिद्ध नहीं किया गया है, निकाला जा सकेगा ।
[30क. नीति निर्धारित करने और निदेश जारी करने की राष्ट्रीय आवास बैंक की शक्ति-(1) यदि राष्ट्रीय आवास बैंक का यह समाधान हो जाता है कि लोकहित में या देश की आवास वित्त प्रणाली को इसके फायदे के लिए विनियमित करने के लिए या किसी आवास वित्त संस्था के ऐसे कार्यकलापों को निवारित करने के लिए, जिनका संचालन ऐसी रीति से किया जा रहा है, जो निक्षेपकर्ताओं के हित के लिए हानिकर है या ऐसी रीति से किया जा रहा है जो गैर आवास वित्त संस्था के हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह धारा 5 की उपधारा (5) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, नीति का निर्धारण कर सकेगा और सभी आवास वित्त संस्था या उनमें से किसी की आय मान्यता, लेखा मानकों, डूबंत और शंकास्पद ऋणों के लिए समुचित उपबंध करने, आस्तियों के लिए जोखिम भार पर आधारित पूंजी पर्याप्तता तथा इतर तुलन-पत्र मदों के लिए प्रत्यय संपरितर्वन कारकों के संबंध में और, यथास्थिति, किसी आवास वित्त संस्था या किसी वर्ग की आवास वित्त संस्था या साधारणतया आवास वित्त संस्थाओं द्वारा निधियों के अभिनियोजन के संबंध में भी निदेश दे सकेगा और ऐसी आवास वित्त संस्थाएं इस प्रकार अवधारित नीति और इस प्रकार जारी किए गए निदेशों का अनुसरण करने के लिए आबद्ध होंगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन निहित शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राष्ट्रीय आवास बैंक, आवास वित्त संस्थाओं को साधारणतया या किसी वर्ग की आवास वित्त संस्थाओं को अथवा आवास वित्त संस्थाओं को विशिष्टतया निम्नलिखित के बारे में निदेश दे सकेगा-
(क) वह प्रयोजन जिसके लिए अग्रिम या अन्य निधि आधारित या निधि इतर आधारित सौकर्य नहीं किया जा सकेगा; और
(ख) वह अधिकतम रकम, जिसके अग्रिम या अन्य वित्तीय सौकर्य या शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों के विनिधान जो, गैर आवास वित्त संस्था की समादत्त पूंजी, आरक्षितियों और निक्षेपों को तथा अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए उस आवास वित्त संस्था द्वारा किसी व्यक्ति या किसी कंपनी या कंपनियों के किसी समूह के लिए किए जा सकेंगे ।]
31. आवास वित्त संस्थाओं से यह जानकारी संगृहीत करने की कि उनके यहां कितने निक्षेप हैं तथा उन्हें निदेश देने की राष्ट्रीय आवास बैंक की शक्ति-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक किसी समय यह निदेश दे सकेगा कि निक्षेप प्रतिगृहीत करने वाली आवास वित्त संस्था, उस आवास वित्त संस्था द्वारा प्राप्त निक्षेपों से संबंधित या संसक्त ऐसे कथन, ऐसी जानकारी, या विशिष्टियां राष्ट्रीय आवास बैंक को, ऐसे प्ररूप में, ऐसे अंतरालों पर, और इतने समय के भीतर दे जो राष्ट्रीय आवास बैंक ने, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट किया हो ।
(2) उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक में निहित शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यह है कि जो कथन, जानकारी या विशिष्टियां उपधारा (1) के अधीन दी जानी हैं वे निम्नलिखित सभी या उनमें से किसी से संबंधित हो सकेंगी, अर्थात् निक्षेपों की रकम, वे प्रयोजन और अवधियां जिनके लिए तथा ब्याज की वे दरें और अन्य निबंधन और शर्तें, जिन पर, वे प्राप्त की जाती हैं ।
(3) यदि राष्ट्रीय आवास बैंक लोकहित में ऐसा करना आवश्यक समझता है [तो निक्षेपों को स्वीकार करने वाली आवास वित्त संस्था की क्रेडिट रेटिंग और निक्षेपों पर देय ब्याज की दरों सहित] तथा उन कालावधियों सहित, जिनके लिए ऐसे निक्षेप प्राप्त किए जा सकेंगे, और ऐसे निक्षेपों से संबंधित या संसक्त किन्हीं बातों की बाबत निदेश, निक्षेप ग्रहण करने वाली आवास वित्त संस्थाओं को, साधारणतः, या आवास वित्त संस्थाओं के किसी समूह को विशिष्टितः दे सकेगा ।
(4) यदि निक्षेप प्रतिगृहीत करने वाली कोई आवास वित्त संस्था उपधारा (3) के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा दिए गए किसी निदेश का अनुपालन करने में असफल रहती है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक, उस आवास वित्त संस्था द्वारा निक्षेपों का प्रतिगृहीत किया जाना प्रतिषिद्ध कर सकेगा ।
(5) निक्षेप प्रतिगृहीत करने वाली प्रत्येक आवास वित्त संस्था, राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा यह अपेक्षा की जाने पर, तथा उतने समय के भीतर जितना राष्ट्रीय आवास बैंक विनिर्दिष्ट करे, अपने वार्षिक तुलनपत्र की तथा लाभ-हानि लेखा की या अन्य वार्षिक लेखा की उस रूप में जिसमें कि वे उस वर्ष के अंतिम दिन हैं जिससे लेखा संबंधित है, एक प्रति अपने खर्चे पर प्रत्येक ऐसे व्यक्ति को भिजवाएगी जिससे उनके पास उतनी राशि से अधिक के निक्षेप हैं जितनी राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट की गई है ।
32. राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा अपेक्षित विवरण आदि देने का आवास वित्त संस्थाओं का कर्तव्य-प्रत्येक आवास वित्त संस्था इस अध्याय के उपबंधों के अधीन मांगे गए विवरण, जानकारी या विशिष्टियां, ऐसे प्ररूप में जो विहित किया जाए, देंगी, और दिए गए किसी निदेश का अनुपालन करेगी ।
33. लेखा परीक्षकों की शक्तियां और कर्तव्य-(1) प्रत्येक आवास वित्त संस्था का लेखापरीक्षक यह जांच करेगा कि आवास वित्त संस्था ने, उसको प्राप्त निक्षेपों से संबंधित या संसक्त ऐसे विवरण, जानकारी या विशिष्टियां राष्ट्रीय आवास बैंक को दी हैं या नहीं जिनके दिए जाने की इस अध्याय के अधीन अपेक्षा की गई है, और लेखापरीक्षक उस आवास वित्त संस्था द्वारा धारित ऐसे निक्षेपों की कुल धनराशि की रिपोर्ट, राष्ट्रीय आवास वित्त बैंक को भेजेगा, किंतु उस दशा में नहीं भेजेगा जिसमें ऐसी जांच करने पर उसका यह समाधान हो गया हो कि उस आवास वित्त संस्था ने ऐसे विवरण, जानकारी या विशिष्टियां दे दी हैं ।
[(1क) राष्ट्रीय आवास बैंक, यह समाधान हो जाने पर कि लोकहित में या निक्षेपकों के हित में अथवा लेखा बहियों के समुचित निर्धारण के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है, किसी आवास वित्त संस्था को या आवास वित्त संस्थाओं के किसी समूह को या साधारण रूप से सभी आवास वित्त कंपनियों को या ऐसी आवास वित्त संस्था या संस्थाओं के लेखा-परीक्षकों को तुलनपत्र, लाभ और हानि लेखा, लेखाबहियों में दायित्वों के प्रकटीकरण या उससे संबंधित किसी बात के संबंध में निदेश जारी कर सकेगा ।]
(2) जहां, किसी ऐसी आवास वित्त संस्था की दशा में, जो कंपनी है, लेखापरीक्षक ने राष्ट्रीय आवास बैंक को उपधारा (1) के अधीन रिपोर्ट भेज दी है या भेजने का आशय है तो वह उस रिपोर्ट की जो उसने राष्ट्रीय आवास बैंक को भेजी है या भेजने का आशय है, अंतर्वस्तु को, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 227 की उपधारा (2) के अधीन अपनी रिपोर्ट में सम्मिलित करेगा ।
2[(3) जहां, राष्ट्रीय आवास बैंक की यह राय हो कि लोकहित में या आवास वित्त संस्था के हित में अथवा ऐसी संस्था के निक्षेपकों के हित में ऐसा करना आवश्यक है वहां वह किसी भी समय, आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगा कि ऐसे किसी संव्यवहार या किसी वर्ग के संव्यवहारों के संबंध में या ऐसी अवधि या अवधियों के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, आवास वित्त संस्था के लेखाओं की विशेष लेखा परीक्षा की जाएगी, और राष्ट्रीय आवास बैंक, ऐसी विशेष लेखा परीक्षा करने के लिए लेखा परीक्षक या लेखा परीक्षकों को नियुक्त कर सकेगा और लेखा परीक्षक या लेखा परीक्षकों को उसे रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगा ।
(4) लेखा परीक्षकों का पारिश्रमिक, जो राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा लेखापरीक्षा में अंतर्वलित कार्य की प्रकृति और मात्रा को ध्यान में रखते हुए नियत किया जाए, तथा लेखा परीक्षा और उससे आनुषंगिक व्यय इस प्रकार लेखा परीक्षा की गई आवास वित्त संस्था द्वारा वहन की जाएंगे ।]
[33क. निक्षेप स्वीकार करने और आस्तियों के अन्य संक्रामण को प्रतिषिद्ध करने की राष्ट्रीय आवास बैंक की शक्ति-(1) यदि कोई आवास वित्त संस्था, किसी धारा के उपबंधों का अतिक्रमण करती है या इस अध्याय के उपबंधों में से किसी के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा दिए गए किसी निदेश या आदेश का अनुपालन करने में असफल रहती है तो राष्ट्रीय आवास बैंक, आवास वित्त संस्था को किसी निक्षेप का प्रतिग्रहण करने से प्रतिषिद्ध कर सकेगा ।
(2) तत्समय प्रवृत्त किसी करार या लिखत या किसी विधि में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, राष्ट्रीय आवास बैंक, यह समाधान हो जाने पर कि लोकहित में या निक्षेपकों के हित में ऐसा करना आवश्यक है, ऐसी आवास वित्त संस्था का, जिसके विरुद्ध निक्षेप का प्रतिग्रहण करने से प्रतिषिद्ध करने वाला आदेश जारी किया गया है, यह निदेश दे सकेगा कि वह अपनी संपत्ति और आस्तियों का राष्ट्रीय आवास बैंक की पूर्व लिखित अनुज्ञा के बिना ऐसी अवधि तक, जो आदेश की तारीख से छह मास से अधिक न हो, विक्रय, अंतरण न करे, उनको भारित या बंधक न करे या उनके संबंध में किसी भी रीति से व्यौहार न करे ।
33ख. परिसमापन अर्जी फाइल करने की राष्ट्रीय आवास बैंक की शक्ति-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक, यह समाधान हो जाने पर कि कोई आवास वित्त संस्था, -
(क) अपने ऋण का संदाय करने में असमर्थ है; या
(ख) धारा 29क के उपबंधों के आधार पर आवास वित्त संस्था का कारबार करने के लिए निरर्हित हो गई है; या
(ग) राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा, किसी आदेश से, निक्षेप का प्रतिग्रहण करने से प्रतिषिद्ध कर दी गई है और ऐसा आदेश तीन मास की अन्यून अवधि के लिए प्रवृत्त रहा है; या
(घ) आवास वित्त संस्था का बना रहना, लोकहित या कंपनी के निक्षेपकों के हित के लिए हानिकर है,
तो ऐसी आवास वित्त संस्था के परिसमापन के लिए कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन आवेदन फाइल कर सकेगा ।
(2) किसी आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, को अपने ऋण का संदाय करने में असमर्थ तब समझा जाएगा जब उसने अपने किसी कार्यालय या अपनी किसी शाखा में की गई किसी विधिपूर्ण मांग को पांच कार्य दिवस के भीतर पूरा करने से इंकार कर दिया है या वह उसे पूरा करने में असफल रही है, और राष्ट्रीय आवास बैंक लिखित रूप में यह प्रमाणित करता है कि ऐसी कंपनी अपने ऋण का संदाय करने में असमर्थ है ।
(3) राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा उपधारा (1) के अधीन किए गए प्रत्येक आवेदन की एक प्रति कंपनी रजिस्ट्रार को भेजी जाएगी ।
(4) किसी कंपनी के परिसमापन से संबंधित कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के सभी उपबंध, राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा इस उपबंध के अधीन किए गए आवेदन पर आरंभ की गई किसी परिसमापन कार्यवाही को लागू होंगे ।]
34. निरीक्षण-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक किसी भी समय अपने अधिकारियों या कर्मचारियों में से किसी एक या अधिक अथवा किन्हीं अन्य व्यक्तियों द्वारा (जिन्हें इस धारा में इसके पश्चात् निरीक्षक प्राधिकारी कहा गया है) निक्षेप प्रतिगृहीत करने वाली आवास वित्त संस्था का निरीक्षण ऐसे किसी विवरण, जानकारी या विशिष्टियों के, जो राष्ट्रीय आवास बैंक को भेजी गई हैं, सही या पूर्ण होने का सत्यापन करने के प्रयोजनों के लिए या कोई ऐसी जानकारी या विशिष्टियां अभिप्राप्त करने के प्रयोजन के लिए करा सकेगा जिन्हें वह आवास वित्त संस्था ऐसा करने की मांग की जाने पर देने में असफल रहा है ।
(2) ऐसे प्रत्येक निदेशक, किसी समिति या निकाय के सदस्य का या किसी व्यक्ति का, जिसमें निक्षेप प्रतिगृहीत करने वाली किसी आवास वित्त संस्था के कार्यकलाप का प्रबंध तत्समय पूर्णतः या भागतः निहित है, या उसके अन्य अधिकारी या कर्मचारी का, यह कर्तव्य होगा कि उसकी अभिरक्षा में या शक्ति के अधीन जो भी बहियां, लेखे और अन्य दस्तावेज हैं उन्हें निरीक्षक प्राधिकारी के समक्ष पेश करे तथा उस प्राधिकारी को उस संस्था के कारबार से संबंधित ऐसे विवरण और जानकारी, जिसकी वह प्राधिकारी उससे अपेक्षा करे, इतने समय के भीतर दे, जितना उस प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट किया गया हो ।
(3) निरीक्षक प्राधिकारी ऐसे किसी निदेशक, समिति या निकाय के किसी सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति की, जिसमें निक्षेप प्रतिगृहीत करने वाली आवास वित्त संस्था के कार्यकलाप का प्रबंध तत्समय निहित है, अथवा उसके किसी अधिकारी या कर्मचारी की उस संस्था के कारबार के संबंध में, शपथ पर, परीक्षा कर सकेगा ।
35. अप्राधिकृत व्यक्तियों द्वारा निक्षेपों की याचना न किया जाना-व्यक्ति किसी आवास संस्था की ओर से जनता से धन के निक्षेपों की, कोई प्रास्पेक्टस या विज्ञापन प्रकाशित करके या कारबार या किसी भी अन्य रीति से, तब तक, याचना नहीं करेगा जब तक-
(क) उक्त आवास वित्त संस्था द्वारा उसे ऐसा करने के लिए लिखित रूप में प्राधिकृत न किया गया हो और वह उस संस्था का नाम विनिर्दिष्ट न करे जिसने उसे इस प्रकार प्राधिकृत किया है, और
(ख) वह प्रास्पेक्टस या विज्ञापन धारा 30 के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा किए गए किसी आदेश और तत्समय प्रवृत्त विधिक किसी अन्य उपबंध के अनुपालन में न हो जो ऐसे प्रास्पेक्टस या विज्ञापन के प्रकाशन को लागू होता है ।
[35क. जानकारी का प्रकटन-(1) किसी आवास वित्त संस्था से संबंधित कोई ऐसी जानकारी जो, -
(क) ऐसी संस्था द्वारा इस अध्याय के उपबंधों के अधीन प्रस्तुत किए गए किसी कथन या विवरणी में अंतर्विष्ट है; या
(ख) राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा लेखापरीक्षा या निरीक्षण के माध्यम से या अन्यथा अभिप्राप्त की गई है,
गोपनीय समझी जाएगी और इस धारा में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, प्रकट नहीं की जाएगी ।
(2) इस धारा की कोई बात, -
(क) किसी आवास वित्त संस्था द्वारा राष्ट्रीय आवास बैंक की पूर्व अनुज्ञा से, उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक को दी गई जानकारी के प्रकटन को;
(ख) राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा, यदि वह लोकहित में ऐसा करना आवश्यक समझे, तो उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा एकत्र की गई किसी जानकारी के ऐसे समेकित प्ररूप में, जिसे वह उचित समझे, किसी आवास वित्त संस्था या उसके उधार लेने वालों का नाम प्रकट किए बिना किए गए प्रकाशन को;
(ग) आवास वित्त संस्था या राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा किसी अन्य आवास वित्त संस्था को ऐसी जानकारी के या ऐसी कंपनियों के बीच चलन और रूढ़िगत प्रथा के अनुसार या किसी अन्य विधि के अधीन अनुज्ञात अथवा अपेक्षित प्रकटन या प्रकाशन को,
लागू नहीं होगी:
परंतु इस खंड के अधीन किसी आवास वित्त संस्था द्वारा प्राप्त की गई किसी ऐसी जानकारी को कंपनियों के बीच चलन और रूढ़िगत प्रथा के अनुसार अथवा किसी अन्य विधि के अधीन अनुज्ञात या अपेक्षित रीति के अनुसार ही प्रकाशित किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
(3) इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रीय आवास बैंक, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि लोकहित में या निक्षेपकों अथवा आवास वित्त संस्था के हित में या किसी ऐसी आवास वित्त संस्था के ऐसे कार्यकलापों को निवारित करने के लिए, जिनका संचालन ऐसी रीति से किया जाता रहा है, जो निक्षेपकों के हित के लिए हानिकर है, ऐसा करना समीचीन है, तो स्वप्रेरणा से या अनुरोध किए जाने पर, किसी आवास वित्त संस्था के कारबार के संचालन के संबंध में कोई जानकारी किसी विधि के अधीन गठित किसी प्राधिकारी को दे सकेगा अथवा संसूचित कर सकेगा ।
(4) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई न्यायालय या अधिकरण अथवा अन्य प्राधिकारी, राष्ट्रीय आवास बैंक को इस अध्याय के किन्हीं उपबंधों के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा अभिप्राप्त किसी विवरण या अन्य सामग्री को पेश करने या उसका निरीक्षण कराने के लिए विवश नहीं करेगा ।
35ख. किसी आवास वित्त संस्था को छूट देने की राष्ट्रीय आवास बैंक की शक्ति-राष्ट्रीय आवास बैंक, यह समाधान हो जाने पर कि ऐसा करना आवश्यक है, अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगा कि इस अध्याय का कोई या सभी उपबंध किसी आवास वित्त संस्था या किसी वर्ग की आवास वित्त संस्थाओं को साधारणतया अथवा ऐसी किसी अवधि के लिए, जो विनिर्दिष्ट की जाए, ऐसी शर्तों, परिसीमाओं या निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, जिन्हें वह अधिरोपित करना उचित समझे, लागू नहीं होंगे ।]
36. अध्याय 5 का अन्य विधियों पर अध्यारोही होना-इस अध्याय के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या किसी ऐसी विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।
[36क. निक्षेप का प्रतिसंदाय करने का आदेश देने की शक्ति-(1) आवास वित्त संस्था द्वारा प्रतिग्रहण किए गए प्रत्येक निक्षेप का, जब तक कि उसका नवीकरण नहीं कर दिया जाता, ऐसे निक्षेप के निबंधनों और शर्तों के अनुसार प्रतिसंदाय किया जाएगा ।
(2) जहां कोई आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, किसी निक्षेप या उसके किसी भाग का ऐसे निक्षेप के निबंधनों और शर्तों के अनुसार प्रतिसंदाय करने में असफल रही है, वहां राष्ट्रीय आवास बैंक का ऐसा अधिकारी, जिसे इस धारा के प्रयोजन के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत किया गया है (जिसे इसमें इसके पश्चात् प्राधिकृत अधिकारी" कहा गया है), यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि आवास वित्त संस्था, निक्षेपकों के हितों की सुरक्षा के लिए अथवा लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है, तो स्वप्रेरणा से या निक्षेपक के आवेदन पर, आदेश द्वारा आवास वित्त संस्था को निदेश दे सकेगा कि वह ऐसे निक्षेप या उसके भाग का तुरंत या ऐसे समय के भीतर और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, प्रतिसंदाय करे :
परंतु प्राधिकृत अधिकारी, इस उपधारा के अधीन कोई आदेश करने से पूर्व, आवास वित्त संस्था और उस मामले में हितबद्ध अन्य व्यक्तियों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दे सकेगा ।
36ख. निक्षेपकों द्वारा नामनिर्देशन-(1) जहां किसी आवास वित्त संस्था द्वारा कोई निक्षेप किसी एक या अधिक व्यक्तियों के जमा खाते में रखा जाता है, वहां, यथास्थिति, निक्षेपक या सभी निक्षेपक एक साथ केंद्रीय सरकार द्वारा बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45यक के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित रीति में एक व्यक्ति को नामनिर्देशित कर सकेंगे जिसको एकमात्र निक्षेपक की मृत्यु की दशा में अथवा सभी निक्षेपकों की मृत्यु की दशा में आवास वित्त संस्था द्वारा निक्षेप की रकम वापस की जा सकेगी ।
(2) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अथवा ऐसे निक्षेप के संबंध में, किसी अभिसाक्ष्य में, चाहे वह वसीयती है अथवा अन्यथा, किसी बात के होते हुए भी, जहां किया गया नामनिर्देशन किसी व्यक्ति को आवास वित्त संस्था से निक्षेप की रकम प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करने के लिए तात्पर्यित हो, वहां नामनिर्देशिती, यथास्थिति, एकमात्र निक्षेपक की मृत्यु पर या सभी निक्षेपकों की मृत्यु पर ऐसे निक्षेप के सबंध में अन्य सभी व्यक्तियों को अपवर्जित करते हुए, यथास्थिति, एकमात्र निक्षेपक अथवा निक्षेपकों के सभी अधिकारों का हकदार हो जाएगा जब तक कि नामनिर्देशन, केंद्रीय सरकार द्वारा बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45यक के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित रीति में परिवर्तित या रद्द नहीं कर दिया जाता है ।
(3) जहां नामनिर्देशिती अवयस्क है वहां नामनिर्देशन करने वाले निक्षेपक के लिए नामनिर्देशिती की अवयस्कता के दौरान उसकी मत्यु की दशा में बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45यक के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित रीति में किसी व्यक्ति को निक्षेप की रकम प्राप्त करने के लिए नियुक्त करना विधिपूर्ण होगा ।
(4) इस धारा के उपबंधों के अनुसार आवास वित्त संस्था द्वारा किया गया संदाय आवास वित्त संस्था को निक्षेप की बाबत अपने दायित्व से पूर्णतः उन्मोचित करेगा :
परंतु इस उपधारा की कोई बात ऐसे किसी अधिकार या दावे पर प्रभाव नहीं डालेगी, जो कोई व्यक्ति उस व्यक्ति के विरुद्ध रखता हो जिसे इस धारा के अधीन संदाय किया जाता है ।
(5) उस व्यक्ति अथवा उन व्यक्तियों से, जिनके नाम में आवास वित्त संस्था द्वारा निक्षेप धारित किया जाता है, भिन्न किसी व्यक्ति के दावे की कोई सूचना आवास वित्त संस्था द्वारा प्राप्त नहीं होगी और न आवास वित्त संस्था ऐसी किसी सूचना द्वारा आबद्ध होगी भले ही उसे यह सूचना अभिव्यक्ततः दी गई हो:
परंतु जहां ऐसे निक्षेप के संबंध में सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय से कोई डिक्री, आदेश, प्रमाणपत्र अथवा अन्य प्राधिकार किसी आवास वित्त संस्था के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है वहां आवास वित्त संस्था ऐसी डिक्री, आदेश, प्रमाणपत्र अथवा अन्य प्राधिकार का सम्यक् ध्यान रखेगी ।]
[अध्याय 5क
आवास वित्त संस्थाओं से संबंधित अन्य उपबंध
36ग. परिभाषाएं-इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) अपील अधिकरण" से धारा 36झ के अधीन स्थापित अपील अधिकरण अभिप्रेत है;
(ख) अनुमोदित संस्था" से निम्नलिखित अभिप्रेत है, -
(i) ऐसी कोई आवास वित्त संस्था जिसे धारा 29क की उपधारा (5) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त किया गया है;
(ii) कोई अनुसूचित बैंक;
(iii) राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा किए गए आवास बंधकों के प्रतिभूतिकरण के संव्यवहार में न्यासी के रूप में या अन्यथा कार्य करने वाला राष्ट्रीय आवास बैंक;
(iv) ऐसी अन्य संस्थाएं, जिन्हें केंद्रीय सरकार राष्ट्रीय आवास बैंक की सिफारिश पर, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे;
(ग) सहायता" से किसी अनुमोदित संस्था द्वारा किए गए किसी आवास वित्त क्रियाकलाप के अनुक्रम के दौरान उसके द्वारा प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से अनुदत्त वित्तीय सहायता अभिप्रेत है;
(घ) उधार लेने वाला" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसको, किसी आवासीय गृह के क्रय, निर्माण, मरम्मत, विस्तार या नवीकरण के प्रयोजनों के लिए किसी अनुमोदित संस्था द्वारा कोई सहायता दी गई है;
(ङ) शोध्य" से ऐसा दायित्व अभिप्रेत है जिसका, किसी अनुमोदित संस्था द्वारा किसी व्यक्ति से शोध्य के रूप में दावा किया गया है और जिसमें उसके संबंध में संदेय ब्याज, लागत, प्रभार और अन्य राशि सम्मिलित हैं;
(च) वसूली अधिकारी" से धारा 36घ के अधीन नियुक्त अधिकारी अभिप्रेत है ।
36घ. वसूली अधिकारी की नियुक्ति-(1) केंद्रीय सरकार, राष्ट्रीय आवास बैंक से परामर्श करने के पश्चात्, ऐसे व्यक्तियों को, जो अनुमोदित संस्था के अधिकारी हैं, जिन्हें वह ठीक समझे, इस अध्याय के प्रयोजन के लिए वसूली अधिकारी, अधिसूचना द्वारा, नियुक्त कर सकेगी, जिनके पास ऐसी अर्हताएं होंगी, जो केंद्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित करे ।
(2) वे स्थानीय सीमाएं, जिनके भीतर वसूली अधिकारी इस अध्याय द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग और अधिरोपित कर्तव्यों का पालन करेगा, वे होंगी जो केंद्रीय सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट की जाएं ।
36ङ. वसूली अधिकारी को आवेदन-(1) जहां, ऐसा उधार लेने वाला, जो किसी करार के अधीन किसी अनुमोदित संस्था के प्रति दायित्वाधीन है, किसी सहायता या उसकी किसी किस्त के प्रतिसंदाय में व्यतिक्रम करता है या उक्त करार के निबंधनों का अनुपालन करने में अन्यथा असफल रहता है वहां, संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 (1882 का 4) की धारा 69 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, अनुमोदित संस्था, उस वसूली अधिकारी को, जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर, उधार लेने वाला वास्तव में और स्वेच्छया निवास करता है या कारबार करता है अथवा अभिलाभ के लिए व्यक्तिगत रूप से कार्य करता है या वाद हेतुक संपूर्ण रूप से या भागतः उद्भूत होता है, शोध्यों के लिए प्रतिभूति के रूप में अनुमोदित संस्था के पास गिरवी रखी गई, बंधक की गई, आड्मान की गई या समनुदेशित संपत्ति के विक्रय के लिए आवेदन कर सकेगी ।
(2) जहां किसी ऐसी अनुमोदित संस्था ने, जिसे किसी उधार लेने वाले से अपने शोध्यों को वसूल करना है, उपधारा (1) के अधीन वसूली अधिकारी को कोई आवेदन फाइल किया है और वही संपत्ति किसी अन्य अनुमोदित संस्था या व्यक्ति के पास भी गिरवी, बंधक, आड्मान या समनुदेशित है वहां अन्य अनुमोदित संस्था या व्यक्ति, उस वसूली अधिकारी को अंतिम आदेश पारित होने से पूर्व कार्यवाहियों के किसी प्रक्रम पर एक आवेदन करके अनुमोदित संस्था के साथ सम्मिलित हो सकेगा ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन आवेदन में, अनुमोदित संस्था या व्यक्ति के प्रति उधार लेने वाले के दायित्व की प्रकृति और सीमा, वे आधार जिन पर उक्त आवेदन किया गया है, कथित किए जाएंगे और वह ऐसे प्ररूप में होगा तथा उसके साथ ऐसे दस्तावेज या अन्य साक्ष्य लगे होंगे, जो विहित किए जाएं ।
36च. धारा 36ङ के अधीन आवेदन की बाबत प्रक्रिया-(1) धारा 36ङ के अधीन आवेदन के प्राप्त होने पर, यदि वसूली अधिकारी की यह राय है कि उधार लेने वाला किसी करार के अधीन किसी अनुमोदित संस्था के प्रति दायित्व के अधीन है, या उसने सहायता अथवा उसकी किसी किस्त के प्रतिसंदाय में व्यतिक्रम किया है या उक्त करार के निबंधनों का अनुपालन करने में अन्यथा असफल हो गया है तो वह ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, उधार लेने वाले पर एक लिखित मांग सूचना तामील कराएगा जिसमें उससे सूचना में विनिर्दिष्ट रकम का उसकी तामील की तारीख से नब्बे दिन की अवधि के भीतर संदाय करने की या यह हेतुक दर्शित करने की कि प्रार्थित अनुतोष क्यों नहीं अनुदत्त किया जाए, मांग की जाएगी ।
(2) वसूली अधिकारी, आवेदक और उधार लेने वाले को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, आवेदन पर ऐसा अंतरिम या अंतिम आदेश पारित कर सकेगा जो वह न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ठीक समझे, जिसके अंतर्गत उस तारीख को या उसके पूर्व उस तारीख से, जिसको वसूली या वास्तविक संदाय शोध्य पाया जाता है, ब्याज के संदाय का आदेश भी है ।
(3) वसूली अधिकारी उधार लेने वाले द्वारा, अनुमोदित संस्था या व्यक्ति के विरुद्ध मुजराई के किसी दावे या स्थापित प्रतिदावे पर भी विचार कर सकेगा और यदि उसका समाधान हो जाता है तो उसे अनुज्ञात कर सकेगा ।
(4) वसूली अधिकारी अपने द्वारा पारित प्रत्येक आदेश की प्रति अनुमोदित संस्था और उधार लेने वाले को देगा ।
(5) वसूली अधिकारी, उधार लेने वाले के विरुद्ध किसी ऐसी संपत्ति के विरुद्ध जिसे शोध्यों के लिए प्रतिभूति के रूप में अनुमोदित संस्था के पास गिरवी रखा गया है, बंधक रखा गया है, आड्मान या समनुदिष्ट किया गया है, अंतरित करने, अन्य संक्रामित करने या उसके साथ अन्यथा व्यवहार करने या उसका व्ययन करने से उसे विवर्जित करने के लिए अंतरिम आदेश (चाहे व्यादेश या रोक के रूप में हो या कुर्की के रूप में) कर सकेगा ।
(6) धारा 36ङ के अधीन वसूली अधिकारी को किए गए आवेदन के बारे में उसके द्वारा यथासंभव शीघ्रता से कार्रवाई की जाएगी और आवेदन के प्राप्त करने की तारीख से छह मास के भीतर उसके द्वारा आवेदन को अंतिम रूप से निपटाने का प्रयास किया जाएगा ।
36छ. वसूली अधिकारी के आदेश का प्रवर्तन-(1) जहां उधार लेने वाला, आदेश का उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर अनुपालन करने से इन्कार कर देता है या करने में असफल रहता है वहां वसूली अधिकारी, किसी ऐसी सहायता के लिए, जिसकी बाबत व्यतिक्रम किया गया है, प्रतिभूति के रूप में अनुमोदित संस्था को गिरवी, बंधक रखी गई, आड्मान या समनुदिष्ट की गई किसी संपत्ति का कब्जा ले सकेगा और ऐसी संपत्ति का विक्रय, पट्टा द्वारा या अन्यथा, अंतरण कर सकेगा ।
(2) इस धारा के अधीन विक्रय, पट्टा द्वारा या अन्यथा कोई अंतरण ऐसी रीति से किया जाएगा जो विहित की जाए ।
(3) वसूली अधिकारी द्वारा, उपधारा (1) के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, किए गए संपत्ति के किसी अंतरण से अंतरित संपत्ति में के या उसके प्रति सभी अधिकार अंतरिती में ऐसे निहित हो जाएंगे मानो वह अंतरण संपत्ति के स्वामी द्वारा किया गया हो ।
(4) जहां उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन उधार लेने वाले के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई है वहां ऐसे सभी खर्चे, प्रभार, व्यय, जो वसूली अधिकारी की राय में उसके आनुषंगिक होने के नाते उसके द्वारा समुचित रूप से उपगत किए गए हैं, उधार लेने वाले से वसूलनीय होंगे और वह धन, जो उसके द्वारा प्राप्त किया जाता है, किसी तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में, उसके द्वारा प्रथमतः ऐसे खर्चों, प्रभारों और व्ययों के संदाय में और द्वितीयतः अनुमोदित संस्था को देय ऋण के उन्मोचन में उपयोजित किए जाने के लिए न्यासतः धारित किया जाएगा और ऐसे प्राप्त धन की अवशिष्टि उसके हकदार व्यक्ति को दे दी जाएगी ।
(5) यदि अनुमेदित संस्था के शोध्य, वसूली अधिकारी द्वारा उपगत सभी खर्चों, प्रभारों और व्ययों सहित, अनुमोदित संस्था को या वसूली अधिकारी को विक्रय या अंतरण के लिए नियत तारीख के पूर्व किसी समय निविदत्त कर दिए जाते हैं तो संपत्ति का विक्रय या अंतरण नहीं किया जाएगा और उस संपत्ति के अंतरण या विक्रय के लिए कोई और कदम नहीं उठाए जाएंगे ।
36ज. संपत्ति का भारसाधन लेने में वसूली अधिकारी की मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सहायता किया जाना-(1) जहां धारा 36ङ द्वारा प्रदत्त किसी शक्ति के अनुसरण में किसी संपत्ति का विक्रय किया जाता है या उसे पट्टे पर दिया जाता है वहां वसूली अधिकारी, किसी ऐसी संपत्ति को अभिरक्षा या नियंत्रण में लेने के प्रयोजन के लिए, उस मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट को, जिसकी अधिकारिता के भीतर कोई ऐसी संपत्ति स्थित है या उससे संबंधित अन्य दस्तावेज पाए जाएं, उनका कब्जा लेने के लिए लिखित रूप में अनुरोध कर सकेगा और, यथास्थिति, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट, अपने को ऐसा अनुरोध किए जाने पर,-
(क) ऐसी संपत्ति या उससे संबंधित दस्तावेजों को कब्जे में लेगा; और
(ख) उन्हें वसूली अधिकारी को अग्रेषित करेगा ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों का अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट ऐसे कदम उठा सकेगा या उठवाएगा और ऐसा बल प्रयोग करेगा या करवाएगा जो उसकी राय में आवश्यक है ।
(3) मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा इस धारा के अनुसरण में किया गया कोई कार्य किसी न्यायालय में या किसी प्राधिकारी के समक्ष प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।
36झ. अपील अधिकरण की स्थापना-(1) केंद्रीय सरकार, इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अपील अधिकरण को प्रदत्त अधिकारिता, शक्तियों और प्राधिकार का प्रयोग करने के लिए, अधिसूचना द्वारा, एक या अधिक अपील अधिकरण स्थापित करेगी, जिसका नाम आवास वित्त संस्था ऋण वसूली अपील अधिकरण होगा ।
(2) केंद्रीय सरकार, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिसूचना में, उन क्षेत्रों को भी विनिर्दिष्ट करेगी जिनके संबंध में अपील अधिकरण अधिकारिता का प्रयोग कर सकेगा ।
(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्रीय सरकार, किसी अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी को अन्य अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए भी प्राधिकृत कर सकेगी ।
36ञ. अपील अधिकरण की संचरना-अपील अधिकरण केवल एक व्यक्ति से (जिसे इसमें इसके पश्चात् अपील अधिकरण का पीठासीन अधिकारी कहा गया है) मिलकर बनेगा जो केंद्रीय सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा, नियुक्त किया जाएगा ।
36ट. अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्ति के लिए अर्हताएं-कोई व्यक्ति अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्ति के लिए तभी अर्हित होगा जब-
(क) वह जिला न्यायाधीश है या रहा है या जिला न्यायाधीश होने के लिए अर्हित है;
(ख) वह भारतीय विधिक सेवा का सदस्य रहा है और उसने उस सेवा की श्रेणी 2 का पद, कम से कम तीन वर्ष तक धारण किया है ।
36ठ. पदावधि-किसी अपील अधिकरण पीठासीन अधिकारी अपने पद ग्रहण करने की पांच वर्ष की अवधि तक या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें जो भी पूर्वतर हो, अपना पद धारण करेगा ।
36ड. अपील अधिकरण के कर्मचारिवृंद-(1) केन्द्रीय सरकार, अपील अधिकरण को उतने अधिकारी और अन्य कर्मचारी उपलब्ध कराएगी जितने वह सरकार ठीक समझे ।
(2) अपील अधिकरण के अधिकारी और अन्य कर्मचारी, पीठासीन अधिकारी के साधारण अधीक्षण के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करेंगे ।
(3) अपील अधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा की अन्य शर्तें वे होंगी जो केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।
36ढ. पीठासीन अधिकारियों के वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें-किसी अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी को संदेय वेतन और भत्ते तथा उसकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें (जिनके अंतर्गत पेंशन, उपदान और अन्य सेवानिवृत्ति फायदे भी हैं) ऐसी होंगी जो केंद्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट करे:
परंतु किसी पीठासीन अधिकारी के वेतन और भत्तों में और अन्य निबंधनों और शर्तों में उनकी नियुक्ति के पश्चात् उनके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा ।
36ण. रिक्तियों का भरा जाना-यदि, किसी अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के पद में कोई रिक्ति अस्थायी अनुपस्थिति से भिन्न किसी कारण से, हो जाती है तो केन्द्रीय सरकार रिक्ति को भरने के लिए अन्य व्यक्ति को, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार नियुक्त करेगी और कार्यवाहियां उस प्रक्रम से जब रिक्ति भरी जाती है अधिकरण या अपील अधिकरण के समक्ष चालू रखी जा सकेगी ।
36त. त्यागपत्र और हटाया जाना-(1) किसी अपील अधिकरण का पीठासीन अधिकारी, केन्द्रीय सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षर द्वारा लिखित रूप में सूचना देकर अपना पद त्याग सकेगा:
परंतु उक्त पीठासीन अधिकारी, जब तक कि उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा उससे पहले अपना पद त्यागने की अनुज्ञा नहीं दी जाती है ऐसी सूचना की प्राप्ति की तारीख से तीन मास के अवसान होने तक या उसके पदोत्तरवर्ती के रूप में सम्यक् रूप से नियुक्त व्यक्ति द्वारा अपना पद ग्रहण कर लेने तक या अपनी पदावधि का अवसान होते तक, इनमें से जो भी पूर्वतम हो, अपना पद धारण करता रहेगा ।
(2) किसी अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी को, साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए आदेश से ही उसके पद से हटाया जाएगा जो उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश द्वारा की गई ऐसी जांच के पश्चात् किया गया हो जिसमें सम्बद्ध पीठासीन अधिकारी को उसके विरुद्ध आरोपों के बारे में सूचित किया गया हो और आरोपों के संबंध में सुनवाई का उचित अवसर दिया गया हो ।
(3) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा, पूर्वोक्त पीठासीन अधिकारी के कदाचार या असमर्थता के अन्वेषण करने की प्रक्रिया को नियंत्रित कर सकेगी ।
36थ. अपील अधिकरण गठित करने वाले आदेशों का अंतिम होना और उसकी कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना-किसी अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में किसी व्यक्ति को नियुक्त करने वाला केन्द्रीय सरकार का कोई आदेश किसी भी रीति से प्रश्नगत नहीं किया जाएगा और किसी अपील अधिकरण के समक्ष कोई कार्य या कार्यवाही किसी भी रीति से केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि किसी अपील अधिकरण के गठन में कोई त्रुटि है ।
36द. अपील अधिकरण की अधिकारिता, शक्तियां और प्राधिकार-कोई अपील अधिकरण, इस अधिनियम के अधीन वसूली अधिकारी द्वारा किए गए या किए गए समझे गए किसी आदेश के विरुद्ध अपीलें ग्रहण करने की अधिकारिता, शक्तियों और प्राधिकार का प्रयोग करेगा ।
36ध. अपील अधिकरण को अपील-(1) इस अध्याय के अधीन वसूली अधिकारी द्वारा किए गए या किए गए समझे गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, उस अपील अधिकरण को अपील कर सकेगा जिसकी उस मामले में अधिकारिता है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक अपील, उस तारीख से, जिसको वसूली अधिकारी द्वारा किए गए या किए गए समझे गए आदेश की प्रति उसे प्राप्त होती है, पैंतालीस दिन की अवधि के भीतर फाइल की जाएगी और वह ऐसे प्ररूप में होगी और उसके साथ ऐसी फीस होगी जो विहित की जाए:
परंतु अपील अधिकरण उक्त पैंतालीस दिन की अवधि की समाप्ति के पश्चात् कोई अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि उस अवधि के भीतर अपील फाइल न करने के लिए पर्याप्त हेतुक था ।
(3) उपधारा (1) के अधीन अपील की प्राप्ति पर, अपील अधिकरण, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् उस आदेश को, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, पुष्ट, उपांतरित या अपास्त करते हुए उस पर ऐसा आदेश पारित कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
(4) अपील अधिकरण अपने द्वारा किए गए प्रत्येक आदेश की प्रति अपील के पक्षकारों को और सम्बद्ध वसूली अधिकारी को भेजेगा ।
(5) उपधारा (1) के अधीन अधिकरण के समक्ष फाइल की गई अपील के बारे में उसके द्वारा यथासंभव शीघ्रता से कार्रवाई की जाएगी और अपील की प्राप्ति की तारीख से छह मास के भीतर उसके द्वारा अंतिम रूप से अपील को निपटाने का प्रयास किया जाएगा ।
36न. अपील फाइल किए जाने पर शोध्य रकम का निक्षेप किया जाना-जहां किसी उधार लेने वाले द्वारा अपील की जाती है वहां ऐसी अपील, अपील अधिकरण द्वारा तब तक ग्रहण नहीं की जाएगी जब तक ऐसे व्यक्ति ने अपील अधिकरण के पास वसूली अधिकारी द्वारा यथा अवधारित उससे शोध्य रकम का पचहत्तर प्रतिशत जमा नहीं कर दिया हो:
परंतु अपील अधिकरण, ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, इस धारा के अधीन निक्षिप्त की जाने वाली रकम का अधित्यजन कर सकेगा या उसे कम कर सकेगा ।
36प. वसूली अधिकारी तथा अपील अधिकरण की प्रक्रिया और शक्तियां-(1) वसूली अधिकारी और अपील अधिकरण, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) द्वारा अधिकथित प्रक्रिया से आबद्ध नहीं होंगे किन्तु नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे और इस अधिनियम के तथा किन्हीं विनियमों के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, वसूली अधिकारी और अपील अधिकरण को, अपनी प्रक्रिया जिसके अंतर्गत वे स्थान भी हैं, जहां पर उनकी बैठकें होंगी, को विनियमित करने की शक्ति होगी ।
(2) वसूली अधिकारी और अपील अधिकरण को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजनों के लिए, निम्नलिखित विषयों की बाबत वही शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय किसी सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात्: -
(क) किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना;
(ख) दस्तावेजों के प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना;
(ग) शपथ-पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना;
(घ) साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना;
(ङ) अपने विनिश्चयों का पुनर्विलोकन करना;
(च) किसी आवेदन को व्यतिक्रम के लिए खारिज करना या उसका एकपक्षीय रूप से विनिश्चय करना;
(छ) किसी आवेदन को व्यतिक्रम के लिए खारिज करने के किसी आदेश को या अपने द्वारा एकपक्षीय रूप से पारित किसी आदेश को अपास्त करना; और
(ज) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए ।
(3) वसूली अधिकारी अपील अधिकरण के समक्ष कोई कार्यवाही या भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थान्तर्गत और उसकी धारा 196 के प्रयोजनों के लिए न्यायिक कार्यवाही समझा जाएगा और वसूली अधिकारी या अपील अधिकरण दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के सभी प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।
36फ. परिसीमा-परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 36) के उपबंध, जहां तक हो सके, वसूली अधिकारी को किए गए किसी आवेदन को लागू होंगे ।
36ब. पीठासीन अधिकारी, वसूली अधिकारी, अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी, अन्य अधिकारी और कर्मचारी तथा वसूली अधिकारी, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे ।
36भ. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण-इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम या किए गए किसी आदेश के उपबंधों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध या किसी अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के विरुद्ध या वसूली अधिकारी के विरुद्ध नहीं होगी ।
36म. अधिकारिता का वर्जन-किसी भी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी को (संविधान के अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 227 के अधीन अधिकारिता का प्रयोग कर रहे उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के सिवाय) इस अध्याय में विनिर्दिष्ट विषयों के संबंध में कोई अधिकारिता, शक्तियां या प्राधिकार नहीं होगा या उसका प्रयोग करने का हक नहीं होगा ।
36य. संक्रमणकालीन उपबंध-इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, धारा 36झ के अधीन किसी क्षेत्र के लिए अपील अधिकरण की स्थापना तक, बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को शोध्य ऋण वसूली अधिनियम, 1993 (1993 का 51) की धारा 8 के अधीन स्थापित अपील अधिकरण, जो उस क्षेत्र में कार्य कर रहा है, इस अधिनियम के अधीन अपील अधिकरण को प्रदत्त अधिकारिता, शक्तियों और प्राधिकार का प्रयोग करेगा ।]
अध्याय 6
निधियां, लेखे और लेखापरीक्षा
37. साधारण निधि और अन्य निधियां-(1) ऐसी तारीख से जो रिजर्व बैंक विनिर्दिष्ट करे, राष्ट्रीय आवास बैंक साधारण निधि के नाम से ज्ञात एक निधि स्थापित करेगा और राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा सभी संदाय उक्त साधारण निधि में से किए जाएंगे ।
(2) यदि रिजर्व बैंक ऐसा निदेश देता है तो बोर्ड एक विशेष निधि या एक आरक्षित निधि या ऐसी निधियां, जैसी विहित की जाएं, सृजित कर सकेगा, और ऐसा करेगा ।
38. राष्ट्रीय आवास बैंक के तुलनपत्र, आदि तैयार करना-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक का तुलनपत्र और लेखे ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी रीति से तैयार किए जाएंगे जो विहित की जाए ।
(2) बोर्ड राष्ट्रीय आवास बैंक की बहियों और लेखाओं को हर वर्ष जून के तीसवें दिन बंद और संतुलित करवाएगा ।
39. अधिशेष का व्ययन-डूबंत और शंकास्पद ऋणों, आस्तियों के अवक्षयण और उन सब बातों के लिए, जिनकी बाबत उपबंध करना आवश्यक या समीचीन हो या जिनके लिए बैंककारों द्वारा प्रायः उपबंध किया जाता है उपबंध करने के पश्चात् राष्ट्रीय आवास बैंक: -
(i) उस लेखा वर्ष के, जिसके दौरान राष्ट्रीय आवास बैंक स्थापित किया जाता है, आगामी पंद्रह वर्ष की अवधि के लिए, अतिशेष रकम को (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् अधिशेष" कहा गया है) धारा 37 में निर्दिष्ट निधियों में से ऐसी निधि में, जो रिजर्व बैंक विनिर्दिष्ट करे, अंतरित कर देगा; और
(ii) उक्त पंद्रह वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् राष्ट्रीय आवास बैंक, धारा 37 में निर्दिष्ट निधियों के लिए उपबंध करने के पश्चात्, अतिशेष को रिजर्व बैंक को अंतरित कर देगा ।
40. लेखापरीक्षा-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक के लेखाओं की लेखापरीक्षा, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 226 की उपधारा (1) के अधीन लेखापरीक्षकों के रूप में कार्य करने के लिए सम्यक् रूप से अर्हित लेखापरीक्षकों द्वारा की जाएगी जो रिजर्व बैंक द्वारा ऐसी अवधि के लिए और ऐसे पारिश्रमिक पर नियुक्त किए जाएंगे जो रिजर्व बैंक नियत करे ।
(2) लेखापरीक्षकों को राष्ट्रीय आवास बैंक के वार्षिक तुलनपत्र की एक प्रति दी जाएगी और उनका यह कर्तव्य होगा कि वे उसकी तत्सम्बद्ध लेखाओं तथा वाउचरों के सहित परीक्षा करें और वे राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा रखी गई सब लेखा-पुस्तकों की सूची का अपने को परिदान कराएंगे और राष्ट्रीय आवास बैंक की पुस्तकें, लेखे, वाउचर तथा अन्य दस्तावेज सब युक्तियुक्त समयों पर उनकी पहुंच में होंगे ।
(3) लेखापरीक्षक लेखाओं के संबंध में बोर्ड को किसी निदेशक या राष्ट्रीय आवास बैंक के अधिकारी या अन्य कर्मचारी की परीक्षा कर सकेंगे और बोर्ड से या राष्ट्रीय आवास बैंक के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों से ऐसी जानकारी और स्पष्टीकरण मांगने के हकदार होंगे जो वे अपने कर्तव्यों के पालन के लिए आवश्यक समझें ।
(4) लेखापरीक्षक अपने द्वारा परीक्षित वार्षिक तुलनपत्र और लेखाओं पर राष्ट्रीय आवास बैंक को रिपोर्ट देंगे और ऐसी हर रिपोर्ट में वे यह कथित करेंगे कि क्या उनकी राय में तुलनपत्र सब आवश्यक विशिष्टियों से युक्त, पूरा और ठीक तुलनपत्र है और ऐसे उचित रूप में तैयार किया गया है कि उससे राष्ट्रीय आवास बैंक के कार्यकलाप की स्थिति सही और ठीक रूप में प्रदर्शित होती है और यदि उन्होंने बोर्ड से या राष्ट्रीय आवास बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी से कोई जानकारी या स्पष्टीकरण मांगा था तो क्या वह दिया गया है और क्या वह समाधानप्रद है ।
(5) राष्ट्रीय आवास बैंक केंद्रीय सरकार और रिजर्व बैंक को सुसंगत वर्ष के बंद होने या यथाविद्यमान अपने तुलनपत्र और उस वर्ष के लाभ-हानि लेखा की एक प्रति और साथ में लेखापरीक्षकों की रिपोर्ट की एक प्रति और उस वर्ष के दौरान राष्ट्रीय आवास बैंक के कामकाज की रिपोर्ट, वार्षिक लेखाओं के बंद और संतुलित किए जाने की तारीख से [चार मास] के भीतर देगा और वह जैसे ही केंद्रीय सरकार को प्राप्त होती है वह उसे, उसके पश्चात् यथासंभव शीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
(6) पूर्ववर्ती उपधाराओं में अंतर्विष्ट किसी बात पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्रीय सरकार, किसी भी समय, राष्ट्रीय आवास बैंक के लेखाओं की परीक्षा करने और उन पर अपनी रिपोर्ट देने के लिए भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को नियुक्त करेगी तथा भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसी परीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा उसे देय होगा ।
41. विवरणियां-राष्ट्रीय आवास बैंक, समय-समय पर, रिजर्व बैंक को ऐसी जानकारी और विवरणियां देगा जिनकी रिजर्व बैंक अपेक्षा करे ।
42. आवास के बारे में वार्षिक रिपोर्ट-राष्ट्रीय आवास बैंक देश में आवास के स्वरूप और प्रगति के बारे में केंद्रीय सरकार और रिजर्व बैंक को वार्षिक रिपोर्ट देगा और उस रिपोर्ट में ऐसे सुझाव दे सकेगा जैसे वह आवास के विकास के लिए आवश्यक या समीचीन समझे और केंद्रीय सरकार अपने द्वारा रिपोर्ट प्राप्त हो जाने के पश्चात् उसे यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
अध्याय 7
प्रकीर्ण
43. राष्ट्रीय आवास बैंक के कर्मचारिवृंद-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक उतने अधिकारी और अन्य कर्मचारी नियुक्त कर सकता है जितने वह अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए आवश्यक या वांछनीय समझता है तथा उनकी नियुक्ति और सेवा के निबंधन और शर्तें अवधारित कर सकता है ।
(2) राष्ट्रीय आवास बैंक के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के कर्तव्य और आचरण, उनकी सेवा के निबंधन और शर्तें वे होंगी, तथा उनके फायदे के लिए भविष्य निधि या अन्य निधि की स्थापना और अनुसरण ऐसा होगा, जो विहित किया जाए ।
(3) राष्ट्रीय आवास बैंक किसी अधिकारी या अपने कर्मचारिवृंद के किसी सदस्य को ऐसी अवधि के लिए और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जैसे वह अवधारित करे, किसी संस्था को, जिसके अंतर्गत आवास वित्त संस्था है, प्रतिनियुक्त कर सकता है ।
(4) इस धारा की कोई बात राष्ट्रीय आवास बैंक को अपने किसी अधिकारी या कर्मचारिवृंद के किसी सदस्य को किसी संस्था को ऐसे किसी वेतन, परिलब्धियों या ऐसे अन्य निबंधनों और शर्तों पर प्रतिनियुक्त करने के लिए सशक्त नहीं करेगी जो उसके लिए उनसे कम अनुकूल हैं जिनका कि वह ऐसी प्रतिनियुक्ति के ठीक पूर्व हकदार है ।
(5) राष्ट्रीय आवास बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 54कक के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी संस्था से, जिसके अंतर्गत आवास वित्त संस्था है, ऐसी अवधि के लिए और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जैसे वह राष्ट्रीय आवास बैंक के हित में आवश्यक समझता है, किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर स्वीकार या ग्रहण कर सकता है ।
[43क. शक्तियों का प्रत्यायोजन-बोर्ड, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, राष्ट्रीय आवास बैंक के किसी अधिकारी या अधिकारियों को, ऐसी शर्तों और परिसीमाओं, यदि कोई हों, के अधीन रहते हुए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों और कर्तव्यों में से ऐसी शक्तियां और कर्तव्य, जो वह आवश्यक समझे, प्रत्यायोजित कर सकेगा ।]
44. विश्वस्तता और गोपनीयता के बारे में बाध्यता-(1) इस अधिनियम या किसी अन्य विधि द्वारा अन्यथा अपेक्षित के सिवाय, राष्ट्रीय आवास बैंक अपने संघटकों के संबंध में या उनके कार्यकलापों के संबंध में कोई जानकारी, केवल उन्हीं परिस्थितियों में प्रकट करेगा जिनमें विधि या बैंककारों में रूढ़िगत पद्धति और प्रथा के अनुसार उसे प्रकट करना राष्ट्रीय आवास बैंक के लिए आवश्यक या समुचित है, अन्यथा नहीं ।
(2) राष्ट्रीय आवास बैंक या रिजर्व बैंक का प्रत्येक निदेशक, समिति का सदस्य, लेखापरीक्षक, सलाहकार, अधिकारी या अन्य कर्मचारी जिसकी सेवाओं का उपयोग राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किया जाए, अपना कर्तव्य ग्रहण करने से पूर्व इस अधिनियम की प्रथम अनुसूची में दिए गए प्ररूप में विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणा करेगा ।
[(3) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 (2005 का 30) के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।]
45. नियुक्ति में त्रुटि के कारण कार्यों आदि का अविधिमान्य न होना-(1) राष्ट्रीय आवास बैंक के बोर्ड या किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर अविधिमान्य नहीं होगी कि, यथास्थिति, बोर्ड या समिति में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है ।
(2) राष्ट्रीय आवास बैंक के बोर्ड के निदेशक या उसके किसी समिति के सदस्य के रूप में सद्भावपूर्वक कार्य करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कोई कार्य केवल इस आधार पर ही अविधिमान्य नहीं हो जाएगा कि वह निदेशक होने के लिए निरर्हित था या उसकी नियुक्ति में कोई अन्य त्रुटि थी ।
[45क. निदेशकों की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रीय आवास बैंक के साथ ठहराव का अभिभावी होना-(1) जहां राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा किसी आवास वित्त संस्था के साथ, जो एक कंपनी है, किए गए किसी ठहराव में राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा ऐसी आवास वित्त संस्था के एक या अधिक निदेशकों की नियुक्ति का उपबंध है, वहां ऐसा उपबंध और उसके अनुसरण में की गई निदेशकों की नियुक्ति, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या उस आवास वित्त संस्था से संबंधित ज्ञापन, संगम-अनुच्छेद या किसी अन्य लिखत में या शेयर अर्हता, आयु सीमा, निदेशक पदों की संख्या, निदेशकों के पद से हटाए जाने के बारे में किसी उपबंध में अंतर्विष्ट और पूर्वोक्त ऐसी किसी विधि या लिखत में अंतर्विष्ट वैसी ही शर्तों के प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी यथा पूर्वोक्त ठहराव के अनुसरण में राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा नियुक्त किए गए किसी निदेशक को लागू नहीं होगा ।
(2) यथापूर्वोक्त नियुक्त कोई निदेशक-
(क) राष्ट्रीय आवास बैंक के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा और उसे राष्ट्रीय आवास बैंक के लिखित आदेश द्वारा हटाया जा सकेगा या उसके स्थान पर कोई व्यक्ति रखा जा सकेगा;
(ख) निदेशक होने के कारण ही या निदेशक के रूप में अपने कर्तव्यों के निर्वहन में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने से लोप की गई किसी बात या उसके संबंध में किसी बात के लिए कोई बाध्यता या दायित्व उपगत नहीं करेगा;
(ग) चक्रानुक्रम से निवर्तनीय नहीं होगा और निवर्तित निदेशकों की संख्या की संगणना करने में उसकी गिनती नहीं की जाएगी ।]
46. इस अधिनियम के अधीन की गई कार्रवाई का संरक्षण-कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के या विधि का बल रखने वाले किसी उपबंध के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुई या होनी संभावित किसी भी हानि या नुकसान के लिए राष्ट्रीय आवास बैंक या उसके किसी निदेशक या अधिकारी या अन्य कर्मचारी अथवा राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कृत्यों के निर्वहन के लिए प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
47. निदेशकों की क्षतिपूर्ति-(1) प्रत्येक निदेशक की उसके द्वारा उपगर्त ऐसी सभी हानि और व्यय के लिए, जो उसके कर्तव्यों के निर्वहन में या उनके संबंध में उसके द्वारा उपगत किए गए हों, राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा क्षतिपूर्ति की जाएगी, किंतु उस दशा में नहीं जब उसके स्वयं जानबूझकर किए गए कार्य या व्यतिक्रम के कारण ऐसा हुआ हो ।
(2) कोई निदेशक राष्ट्रीय आवास बैंक के किसी अन्य निदेशक के लिए, अथवा किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के लिए, या राष्ट्रीय आवास बैंक को होने वाली किसी ऐसी हानि या उस पर पड़ने वाले किसी ऐसे व्यय के लिए जो राष्ट्रीय आवास बैंक की ओर से अर्जित की गई या ली गई किसी संपत्ति या प्रतिभूति के मूल्य की, या उस संपत्ति या प्रतिभूति में हक की किसी अपर्याप्तता या कमी के कारण या किसी ऋणी या राष्ट्रीय आवास बैंक के प्रति बाध्यताधीन किसी व्यक्ति के दिवाले या सदोष कार्य के कारण अथवा उस निदेशक के अपने पद के कर्तव्यों के निष्पादन में या उसके संबंध में सद्भावपूर्वक की गई किसी बात के कारण हो, उत्तरदायी न होगा ।
[47क. निक्षेपों, बंधपत्रों आदि के संबंध में नामनिर्देशन-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी निक्षेप, बंधपत्रों या अन्य प्रतिभूतियों के संबंध में कोई नामनिर्देशन विहित रीति से राष्ट्रीय आवास बैंक में किया जाता है, तो ऐसे निक्षेपों, बंधपत्रों या प्रतिभूतियों के संबंध में शोध्य रकम, निक्षेपक या उसके धारक की मृत्यु पर, ऐसे निक्षेपों, बंधपत्रों या प्रतिभूतियों के संबंध में किसी अन्य व्यक्ति के किसी अधिकार, हक या हित के अधीन रहते हुए, नामनिर्देशिति में निहित हो जाएगी या उसे संदेय होगी ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा किया गया कोई संदाय ऐसे निक्षेपों, बंधपत्रों या प्रतिभूतियों के संबंध में राष्ट्रीय आवास बैंक के पक्ष में उसके दायित्वों का पूर्ण उन्मोचन होगा ।]
। । । । । । ।
49. शास्तियां-(1) जो कोई किसी विवरणी या तुलन-पत्र या अन्य दस्तावेज में अथवा इस अधिनियम के किसी उपबंध द्वारा या उसके अधीन या उसके प्रयोजनों के लिए अपेक्षित या दी गई किसी जानकारी में जानबूझकर ऐसा कथन करेगा जो किसी तात्त्विक विशिष्टि में मिथ्या है, जिसका मिथ्या होना वह जानता है, या कोई तात्त्विक कथन में करने में जानबूझकर लोप करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(2) यदि कोई व्यक्ति किसी बही, लेखा या अन्य दस्तावेज को पेश करने में अथवा ऐसा कोई विवरण या अन्य जानकारी देने में, जिसे पेश करेना या देना इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसका कर्तव्य है, असफल रहेगा तो वह जुर्माने से, जो प्रत्येक अपराध के लिए दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, और जारी रहने वाली असफलता की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो उस प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान असफलता ऐसी पहली असफलता के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् जारी रहती है, सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
[(2क) यदि कोई व्यक्ति धारा 29क की उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
(2ख) यदि कोई लेखा परीक्षक, राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा धारा 33 के अधीन दिए गए किसी निदेश या किए गए किसी आदेश का पालन करने में असफल रहेगा, तो वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
(2ग) जो कोई धारा 36क की उपधारा (2) के अधीन प्राधिकृत अधिकारी द्वारा किए गए किसी आदेश का पालन करने में असफल रहेगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसा अननुपालन जारी रहता है, पचास रुपए से अन्यून जुर्माने से भी दंडित किया जाएगा ।]
(3) [यदि लेखा परीक्षक से भिन्न कोई व्यक्ति, -]
(क) अध्याय 5 के अधीन दिए गए किसी निदेश या किए गए आदेश के उल्लंघन में कोई निक्षेप प्राप्त करेगा; या
1[(कक) अध्याय 5 के उपबंधों में से किसी उपबंध के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा दिए गए किसी निदेश या किए गए किसी आदेश का पालन करने में असफल रहेगा; या]
(ख) कोई प्रास्पेक्ट्स या विज्ञापन, यथास्थिति, धारा 35 के या किसी ऐसे आदेश के, जो धारा 30 के अधीन दिया गया है, अनुसार निकालने से अन्यथा निकालेगा,
तो वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, और जुर्माने से भी दंडनीय होगा जो-
(1) खंड (क) के अधीन आने वाले किसी उल्लंघन की दशा में, प्राप्त निक्षेप की रकम के दुगुने तक का हो सकेगा, और
(2) खंड (ख) के अधीन आने वाले किसी उल्लंघन की दशा में, प्रास्पेक्ट्स या विज्ञापन द्वारा मांगे गए निक्षेप की रकम के दुगुने तक हो सकेगा ।
(4) यदि इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध का उल्लंघन किया जाएगा अथवा इस अधिनियम या उसके अधीन दिए गए या बनाए गए किसी आदेश, विनियम या निदेश का या उसके अधीन अधिरोपित किसी शर्त का अनुपालन करने में कोई व्यतिक्रम किया जाएगा जो ऐसे उल्लंघन या व्यतिक्रम का दोषी कोई व्यक्ति जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा और जहां कोई उल्लंघन या व्यतिक्रम जारी रहता है, वहां अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम अपराध के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान वह उल्लंघन या व्यतिक्रम जारी रहता है, एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
50. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, वहां प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन में कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:
परंतु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित होता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियां को अन्य संगम भी है; और
(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
51. अपराधों का संज्ञान-(1) कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान राष्ट्रीय आवास बैंक के ऐसे अधिकारी द्वारा, जो राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा लिखित रूप में साधारणतया या विशिष्टतया इस निमित्त प्राधिकृत है, लिखित रूप में किए गए परिवाद पर ही करेगा अन्यथा नहीं और महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय या उससे वरिष्ठ न्यायालय से भिन्न कोई न्यायालय ऐसे अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
(2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, यदि मजिस्ट्रेट को ऐसा करने का कोई कारण दिखाई देता है तो वह उस अधिकारी को जिसने परिवाद फाइल किया है, स्वीय हाजिरी से अभिमुक्त कर सकेगा, किंतु मजिस्ट्रेट कार्यवाहियों के किसी भी प्रक्रम पर परिवादी की स्वीय हाजिरी का निदेश स्वविवेकानुसार दे सकेगा ।
[52. जुर्माने का उपयोजन-अधिनियम के अधीन जुर्माना अधिरोपित करने वाला कोई भी न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि जुर्माना, यदि वसूल कर लिया गया है, -
(क) प्रथमतः, कार्यवाहियों के खर्चे में या उन खर्चों के संदाय के लिए उपयोजित किया जाएगा, और
(ख) द्वितीयतः, उस व्यक्ति के निक्षेप के प्रतिसंदाय के लिए उपयोजित किया जाएगा जिसको निक्षेप का प्रतिसंदाय किया जाना था, और ऐसे संदाय पर, आवास वित्त संस्था का निक्षेप का प्रतिसंदाय करने का दायित्व, न्यायालय द्वारा संदत्त रकम तक, उन्मोचित हो जाएगा ।
52क. जुर्माना अधिरोपित करने की राष्ट्रीय आवास बैंक की शक्ति-(1) धारा 49 में किसी बात के होते हुए भी, यदि धारा 49 में उल्लिखित प्रकृति का कोई उल्लंघन या व्यतिक्रम ऐसी आवास वित्त संस्था द्वारा किया जाता है जो कंपनी है, तो राष्ट्रीय आवास बैंक ऐसी संस्था पर-
(क) पांच हजार रुपए से अनधिक की शास्ति अधिरोपित कर सकेगा; या
(ख) जहां उल्लंघन या व्यतिक्रम धारा 49 की उपधारा (2क) या उपधारा (3) के खंड (क) या खंड (कक) के अधीन हो वहां पांच लाख रुपए से अनधिक की या ऐसे उल्लंघन या व्यतिक्रम में, जहां रकम अनुमान्य है, अंतर्वलित रकम के दो गने की, इनमें से जो भी अधिक हो, शास्ति अधिरोपित कर सकेगा और जहां ऐसा उल्लंघन या व्यतिक्रम जारी रहने वाला है वहां प्रथम शास्ति के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन या व्यतिक्रम जारी रहता है, पच्चीस हजार रुपए तक की शास्ति और अधिरोपित कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन शास्ति अधिरोपित करने के प्रयोजन के लिए, राष्ट्रीय आवास बैंक, आवास वित्त संस्था पर सूचना की तामील करेगा जिसमें उससे इस बारे में कारण दर्शित करने की अपेक्षा की जाएगी कि सूचना में विनिर्दिष्ट रकम शास्ति के रूप में अधिरोपित क्यों न की जाए और ऐसी आवास वित्त संस्था को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर भी दिया जाएगा ।
(3) इस धारा के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा अधिरोपित कोई शास्ति, उस तारीख से, जिसको राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा धनराशि के संदाय की मांग करते हुए जारी की गई सूचना की आवास वित्त संस्था पर तामील की जाती है, तीस दिन की अवधि के भीतर संदेय होगी और आवास वित्त संस्था के, ऐसी अवधि के भीतर उस धनराशि का संदाय करने में, असफल रहने की दशा में, उस क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाले प्रधान सिविल न्यायालय द्वारा दिए गए निदेश पर जहां आवास वित्त संस्था का रजिस्ट्रीकृत कार्यालय या प्रधान कार्यालय स्थित है, शास्ति उद्गृहीत की जा सकेगी :
परन्तु प्रधान सिविल न्यायालय द्वारा ऐसा कोई निदेश इस निमित्त प्राधिकृत राष्ट्रीय आवास बैंक के किसी अधिकारी द्वारा किए गए आवेदन पर ही दिया जाएगा अन्यथा नहीं ।
(4) उपधारा (3) के अधीन निदेश जारी करने वाला न्यायालय, आवास वित्त संस्था द्वारा संदेय धनराशि को विनिर्दिष्ट करने वाला एक प्रमाणपत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाणपत्र उसी रीति से प्रवर्तनीय होगा, मानो वह किसी सिविल वाद में न्यायालय द्वारा दी गई डिक्री हो ।
(5) ऐसे किसी उल्लंघन या व्यतिक्रम के संबंध में जिसकी बाबत इस धारा के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा कोई शास्ति अधिरोपित की गई है, किसी आवास वित्त संस्था के विरुद्ध कोई भी परिवाद किसी न्यायालय में फाइल नहीं किया जाएगा ।
(6) जहां धारा 49 में निर्दिष्ट प्रकृति के उल्लंघन या व्यतिक्रम की बाबत निर्दिष्ट किसी न्यायालय में आवास वित्त संस्था के विरुद्ध कोई परिवाद फाइल किया गया है, वहां उस आवास वित्त संस्था के विरुद्ध शास्ति अधिरोपित करने के लिए कोई कार्यवाही इस धारा के अधीन नहीं की जाएगी ।]
53. बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891 का राष्ट्रीय आवास बैंक को लागू होना-बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891 (1891 का 18) राष्ट्रीय आवास बैंक के संबंध में वैसे ही लागू होगा मानो वह उस अधिनियम की धारा 2 में यथापरिभाषित बैंक हो ।
54. राष्ट्रीय आवास बैंक का समापन-कंपनियों के परिसमापन से संबंधित विधि का कोई उपबंध राष्ट्रीय आवास बैंक को लागू नहीं होगा और राष्ट्रीय आवास बैंक का समापन केंद्रीय सरकार के आदेश द्वारा ऐसी रीति से, जो वह निर्दिष्ट करे, किया जाएगा अन्यथा नहीं ।
[54क. नियम बनाने की शक्ति-(1) केंद्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्: -
(क) धारा 36घ की उपधारा (1) के अधीन वसूली अधिकारी के रूप में नियुक्ति के लिए अर्हताएं;
(ख) धारा 36ङ की उपधारा (3) के अधीन अपील अधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें;
(ग) धारा 36ढ के अधीन अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारियों के वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें; और
(घ) धारा 36त की उपधारा (3) के अधीन अपील अधिकरण के पीठासीन अधिकारियों के कदाचार या उनकी असमर्थता के अन्वेषण के लिए प्रक्रिया ।]
55. विनियम बनाने की बोर्ड की शक्ति-(1) बोर्ड, रिजर्व बैंक के पूर्व अनुमोदन से और केंद्रीय सरकार से परामर्श करके, अधिसूचना द्वारा ऐसे सभी विषयों के लिए जिनके लिए इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए उपबंध करना आवश्यक या समीचीन है, उपबंध करने के लिए ऐसे विनियम बना सकेगा, जो इस अधिनियम से असंगत न हों ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) वह फीस और भत्ते जो निदेशकों को धारा 7 की उपधारा (5) के अधीन बोर्ड या उसकी समितियों के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए दिए जा सकेंगे;
[(कक) वह रीति जिसमें धारा 6 की उपधारा (1) के खंड (गक) के अधीन निदेशक निर्वाचित किए जाएंगे;]
(ख) वह समय जब और वह स्थान जहां बोर्ड का अधिवेशन होगा और प्रक्रिया के वे नियम जो कामकाज करने के संबंध में धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन अपनाए जा सकेंगे;
(ग) कार्यपालिका समिति का गठन करने वाले सदस्यों की संख्या, वे कृत्य जिनका वह निर्वहन कर सकेगी और वह समय और स्थान जहां ऐसे अधिवेशन किए जा सकेंगे तथा प्रक्रिया के वे नियम जो कामकाज करने के संबंध में धारा 12 के अधीन अपनाए जा सकेंगे;
(घ) धारा 15 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन बंधपत्रों और डिबेंचरों के पुरोधरण और मोचन की रीति और निबंधन;
(ङ) वह रीति जिससे, और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, राष्ट्रीय आवास बैंक धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन विदेशी मुद्रा में उधार ले सकेगा;
(च) वह प्ररूप जिसमें धारा 32 के अधीन कोई विवरण, जानकारी, आदि प्रस्तुत किए जाएंगे;
1[(चक) धारा 36ङ के अधीन किए जाने वाले आवेदन का प्ररूप और ऐसे आवेदन के साथ उपाबद्ध किए जाने वाले दस्तावेज;
(चख) वह प्ररूप जिसमें धारा 36च की उपधारा (1) के अधीन उधार लेने वाले पर मांग की सूचना का तामील किया जाना अपेक्षित है;
(चग) वह रीति जिसमें धारा 36छ की उपधारा (2) के अधीन संपत्ति अंतरित की जाएगी;
(चघ) वह प्ररूप जिसमें धारा 36ध के अधीन अपील अधिकरण को अपील फाइल की जा सकती है और ऐसी अपील के साथ जमा किए जाने के लिए अपेक्षित फीस की रकम;]
(छ) धारा 37 की उपधारा (2) के अधीन सृजित की जाने वाली विशेष निधि, आरक्षित निधि और अन्य निधियां;
(ज) वह प्ररूप और रीति जिसमें धारा 38 की उपधारा (1) के अधीन तुलनपत्र और लेखे तैयार किए या रखे जाएंगे;
(झ) धारा 43 के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक के अधिकारियों और अन्य कर्मचारिवृंद के कर्तव्य और आचरण, वेतन, भत्ते और सेवा की शर्तें;
(ञ) धारा 43 के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक के अधिकारियों और अन्य कर्मचारिवृंद के सदस्यों के फायदे के लिए भविष्य निधि और किसी अन्य निधि की स्थापना और अनुरक्षण;
1[(ञक) वह रीति जिसमें धारा 47क की उपधारा (1) के अधीन नामनिर्देशन किया जा सकेगा; और]
(ट) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जा सकेगा ।
(3) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाया जाने वाला कोई विनियम राष्ट्रीय आवास बैंक की स्थापना की तारीख से तीन मास के अवसान के पूर्व रिजर्व बैंक द्वारा केंद्रीय सरकार से परामर्श करके बनाया जा सकेगा और इस प्रकार बनाए गए किसी विनियम को बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए परिवर्तित या विखंडित कर सकेगा ।
(4) इस धारा द्वारा प्रदत्त विनियम बनाने की शक्ति के अंतर्गत विनियमों या उनमें से किसी को ऐसी तारीख से, जो इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से पूर्वतर न हो, भूतलक्षी प्रभाव देने की शक्ति भी है किंतु किसी विनियम को भूतलक्षी प्रभाव इस प्रकार नहीं दिया जाएगा, जिससे ऐसे किसी व्यक्ति के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो जिसे ऐसा विनियम लागू हो सकता है ।
(5) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक [नियम, विनियम [या स्कीम]] बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस 2[नियम, विनियम 3[या स्कीम]] में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं, तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह 2[नियम, विनियम, 3[या स्कीम]] नहीं बनाया जाना चाहिए, तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु 2[नियम, विनियम 3[या स्कीम]] के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
। । । । । । ।
57. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केंद्रीय सरकार, ऐसे आदेश द्वारा जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, उक्त कठिनाई को दूर कर सकेगी:
परंतु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से तीन वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
पहली अनुसूची
[धारा 44(2) देखिए]
विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणा
मैं, ...................................... घोषणा करता हूं कि मैं राष्ट्रीय आवास बैंक के (यथास्थिति) निदेशक, ............... समिति के सदस्य, लेखापरीक्षक, सलाहकार, अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रूप में मुझ से अपेक्षित और उक्त राष्ट्रीय आवास बैंक में या उसके संबंध में मेरे द्वारा धारण किए गए पद या ओहदे से उचित रूप से संबद्ध कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक, सच्चाई से और अपनी पूर्ण कुशलता और योग्यता से निष्पादन और पालन करूंगा ।
मैं यह भी घोषणा करता हूं कि मैं राष्ट्रीय आवास बैंक के कार्यों से या उक्त राष्ट्रीय आवास बैंक से संव्यवहार करने वाले किसी व्यक्ति के कार्यों से संबद्ध कोई जानकारी ऐसे किसी व्यक्ति को, जो उसका विधिक रूप से हकदार नहीं है, संसूचित नहीं करूंगा और न संसूचित होने दूंगा, तथा ऐसे किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय आवास बैंक के या उसके कब्जे में तथा उक्त राष्ट्रीय आवास बैंक के कारबार से या उक्त राष्ट्रीय आवास बैंक से संव्यवहार करने वाले किसी व्यक्ति के कारबार से संबद्ध किन्हीं बहियों या दस्तावेजों का निरीक्षण नहीं करने दूंगा और न उसकी उन तक पहुंच होने दूंगा ।
मेरे समक्ष हस्ताक्षर किए । (हस्ताक्षर)
। । । । । । ।
[तीसरी अनुसूची
(धारा 16क देखिए)
राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 की धारा 16क में निर्दिष्ट घोषणा
स्थान:
तारीख:
मैं/हम ................. यह घोषणा करता हूं/करते हैं कि मुझे/हमें मेरे/हमारे अनुरोध पर राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा मंजूर की गई सहायता के प्रतिफलस्वरूप जैसा कि इसके साथ उपाबंध में विनिर्दिष्ट है, मैं/हम इस बात से सहमत हूं/हैं कि उक्त उपाबंध में विनिर्दिष्ट स्थावर संपत्ति उक्त सहायता के लिए प्रतिभूति होगी और मैं/हम आगे इस बात पर भी सहमत हूं/हैं कि ऊपर वर्णित सहायता से संबंधित शोध्य, घोषणा किए जाने की तारीख से ही उक्त स्थावर संपत्ति पर प्रभार होंगे ।
1. उधार लेने वाले
द्वारा हस्ताक्षरित एंव परिदत्त
.....................................
2. प्रतिभू द्वारा
हस्ताक्षरित एंव परिदत्त
.....................................
उपाबंध
i. सहायता का ब्यौरा
ii. स्थावर संपत्ति की विशिष्टियां ।]
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