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प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड अधिनियम, 1995 ( Technology Development Board Act, 1995 )


 

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड अधिनियम, 1995

(1995 का अधिनियम संख्यांक 44)

[16 दिसम्बर, 1995]

देशी प्रौद्योगिकी के विकास और वाणिज्यिक उपयोजन का प्रयत्न करने वाले या

व्यापक घरेलू उपयोजनों के लिए आयातित प्रौद्योगिकी अंगीकार करने वाले

औद्योगिक समुत्थानों और अन्य अभिकरणों को साधारण पूंजी या किसी

अन्य वित्तीय सहायता के संदाय के लिए एक बोर्ड के गठन

का और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक

विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के छियालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड अधिनियम, 1995 है ।

                (2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क)         बोर्ड" से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड अभिप्रेत है;

(ख) अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;

(ग) निधि" से धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन गठित प्रौद्योगिकी विकास और उपयोजन निधि अभिप्रेत है;

(घ) सदस्य" से बोर्ड का कोई सदस्य अभिप्रेत है, जिसके अन्तर्गत अध्यक्ष भी है;

(ङ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(च) सचिव" से धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त बोर्ड का सचिव अभिप्रेत है;

(छ) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु अनुसंधान और विकास उपकर अधिनियम, 1986 (1986 का 32) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में हैं ।

अध्याय 2

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड

3. बोर्ड का गठन और निगमन-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा एक बोर्ड का गठन करेगी जिसका नाम प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड होगा ।

                (2) बोर्ड, पूर्वोक्त नाम का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा, जिसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा या उसके विरुद्ध वाद लाया जाएगा ।

                (3) बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्: -

(क) विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का भारसाधक सचिव, भारत सरकार-पदेन अध्यक्ष;

(ख) विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का भारसाधक सचिव, भारत सरकार-पदेन; 

(ग) वित्त (व्यय) से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का भारसाधक सचिव, भारत सरकार-पदेन;

(घ) रक्षा अनुसंधान और विकास से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का भारसाधक सचिव, भारत सरकार-पदेन;

(ङ) औद्योगिक विकास से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का भारसाधक सचिव, भारत      सरकार-पदेन;

(च) ग्रामीण विकास से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का भारसाधक सचिव, भारत सरकार-पदेन;

(छ) चार से अनधिक उतनी संख्या में व्यक्ति, जो विहित की जाए, जो प्रौद्योगिकी विकास और उपयोजन, बैंककारी और वित्त, उद्योग, कृषि तथा ग्रामीण विकास में अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे; और

(ज) बोर्ड का सचिव-पदेन;

                (4) उपधारा (3) के खंड (छ) में विनिर्दिष्ट सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें ऐसी होंगी जो विहित की जाएं ।

                (5) अध्यक्ष, बोर्ड के अधिवेशनों में अध्यक्षता करने के अतिरिक्त बोर्ड की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो उसे बोर्ड द्वारा प्रत्यायोजित किए जाएं और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो विहित किए जाएं ।

                (6) बोर्ड का कोई कार्य का कार्यावाही केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि-

(क) बोर्ड में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है;

(ख) बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है;

(ग) बोर्ड की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं पड़ता है ।

4. बोर्ड का सचिव और अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी-(1) बोर्ड, सचिव और ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकेगा जो वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्ष निर्वहन के लिए आवश्यक समझे ।

                (2) बोर्ड के सचिव और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें ऐसी होंगी जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं ।

5. बोर्ड की समितियां-(1) बोर्ड, इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों के दक्ष निर्वहन और कृत्यों के पालन के लिए, इस निमित्त बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, उतनी समितियां नियुक्त कर सकेगा, जितनी आवश्यक हों ।

                (2) बोर्ड को यह शक्ति होगी कि वह उतनी संख्या में, जितनी वह ठीक समझे, अन्य व्यक्तियों को, जो बोर्ड के सदस्य नहीं हैं, उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किसी समिति के सदस्यों के रूप में सहयोजित कर ले । इस प्रकार सहयोजित व्यक्तियों को समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने और उसकी कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु मतदान का अधिकार नहीं होगा । 

6. बोर्ड के कृत्य-बोर्ड, -

(क) देशी प्रौद्योगिकी के वाणिज्यिक उपयोजन का प्रयत्न करने वाले या व्यापक घरेलू उपयोजनों के लिए आयातित प्रौद्योगिकी को अंगीकार करने वाले औद्योगिक समुत्थानों और अन्य अभिकरणों के लिए ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं साधारण पूंजी या किसी अन्य वित्तीय सहायता का उपबंध कर सकेगा;

(ख) वाणिज्यिक उपयोजन के लिए देशी प्रौद्योगिकी का विकास करने में या आयातित प्रौद्योगिकी को अंगीकार करने में लगी हुई ऐसी अनुसंधान और विकास संस्थाओं के लिए जो केन्द्रीय सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त हो, वित्तीय सहायता का उपबंध कर सकेगा;

(ग) ऐसे अन्य कृत्यों का पालन कर सकेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे सौंपे जाएं ।

अध्याय 3

वित्तीय सहायता मंजूर करने के लिए आवेदन

7. वित्तीय सहायता आदि मंजूर करने के लिए आवेदन-(1) धारा 6 के अधीन वर्णित प्रयोजनों के लिए वित्तीय सहायता मंजूर करने के लिए आवेदन, बोर्ड को ऐसे प्ररूप में किया जाएगा जो विहित किया जाए ।

                (2) बोर्ड, आवेदन की परीक्षा करने के पश्चात् और ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह आवश्यक समझे, लिखित आदेश द्वारा, या तो वित्तीय सहायता मंजूर करेगा अथवा उसे मंजूर करने से इंकार करेगा:

                परन्तु मंजूर करने से इंकार तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को सुनवाई का अवसर न दे दिया गया हो ।

 

 

अध्याय 4

वित्त, लेखा और संपरीक्षा

8. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा, इस निमित्त विधि द्वारा, किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, बोर्ड को अनुदानों और उधारों के रूप में उतनी धनराशियों का संदाय कर सकेगी जितनी वह सरकार आवश्यक समझे ।

9. प्रौद्योगिकी विकास और उपयोजन निधि-(1) प्रौद्योगिकी विकास और उपयोजन निधि के नाम से एक निधि का गठन किया जाएगा और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे, -

(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 8 के अधीन बोर्ड को दिया गया कोई अनुदान या उधार;

(ख) किसी अन्य स्रोत से बोर्ड को प्राप्त सभी राशियां;

                                (ग) निधि से अनुदत्त रकमों की वसूलियां; और

                                (घ) निधि की रकम के विनिधान से कोई आय ।

                (2) निधि का उपयोग निम्नलिखित का वहन करने के लिए किया जाएगा, -

                                (क) इस अधिनियम के उद्देश्यों और इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत प्रयोजनों के लिए व्यय;

                                (ख) बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य व्यय; और

                                (ग) बोर्ड के इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों का निर्वहन करने में व्यय ।

10. धन की प्राप्तियां और दायित्वों का अंतरण-इस अधिनियम के प्रारंभ से ही, -

(क) अनुसंधान और विकास उपकर अधिनियम, 1986 (1986 का 32) की धारा 5 के अधीन बनाई गई उद्यम पूंजी निधि के खाते में जमा धन, जो भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) की धारा 14 के अधीन विकास बैंक द्वारा स्थापित विकास सहायता निधि का भाग है, बोर्ड को अंतरित और उसमें निहित हो जाएगा;

                                (ख) ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व विकास बैंक को देय सभी धनराशियां बोर्ड को देय समझी जाएंगी;

(ग) ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व, उद्यम पूंजी निधि के प्रयोजनों के लिए या उसके संबंध में विकास बैंक द्वारा, उसके साथ या उसके लिए उपगत सभी ऋण, बाध्यताएं और दायित्व, की गई सभी संविदाएं या करार और किए जाने के लिए वचनबद्ध सभी मामले और बातें बोर्ड द्वारा, उसके साथ या उसके लिए उपगत की गई या किए जाने के लिए वचनबद्ध समझी जाएंगी ।

(घ) ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व विकास बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित या जो संस्थित किए जा सकते थे ऐसे सभी वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियां, बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रह सकेंगी या संस्थित की जा सकेगी ।

11. बजट-बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विहित किया जाए आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट तैयार करेगा जिसमें बोर्ड की प्राक्कलित प्राप्तियां और अन्य व्यय दशाएं जाएंगे और उसे केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।

12. वार्षिक रिपोर्ट-बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विहित किया जाए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।

13. लेखा और संपरीक्षा-(1) बोर्ड, उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जैसा केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामर्श करके विहित करे ।

                (2) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक और इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के लेखे की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के उस संपरीक्षा के संबंध में वे ही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखे की संपरीक्षा के संबंध में होते हैं और उसे विशिष्ट रूप में बहियां, लेखा, संबंधित वाउचर और अन्य दस्तावेज और कागज पेश किए जाने की मांग करने और बोर्ड के किसी भी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

                (3) बोर्ड के लेखे की संपरीक्षा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा प्रतिवर्ष की जाएगी और उस संपरीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय, बोर्ड द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।

                (4) बोर्ड, ऐसी तारीख के पूर्व, जो विहित की जाए, अपने लेखा की संपरीक्षित प्रति, संपरीक्षक की रिपोर्ट के साथ, केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।

14. वार्षिक रिपोर्ट और संपरीक्षक की रिपोर्ट का संसद् के समक्ष रखा जाना-केन्द्रीय सरकार, वार्षिक रिपोर्ट और संपरीक्षक की रिपोर्ट, उसकी प्राप्ति के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

               

अध्याय 5

प्रकीर्ण

15. बोर्ड को विवरणियों का दिया जाना-(1) बोर्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहा कोई औद्योगिक समुत्थान या कोई संस्था, बोर्ड को, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाए, विवरणियां देगा ।

                (2) बोर्ड, इस धारा के अधीन दी गई किसी विवरणी की सत्यता को सत्यापित करने के लिए, किसी अधिकारी को किसी भी समय उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी औद्योगिक समुत्थान या संस्था का निरीक्षण करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा ।

16. केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-(1) इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना बोर्ड, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों और कर्तव्यों के निर्वहन में नीति संबंधी प्रश्नों पर ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा, जो केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, लिखित रूप में देः

                परन्तु यह कि बोर्ड को, इस उपधारा के अधीन कोई निदेश दिए जाने से पहले यथासाध्य, अपने विचार व्यक्त करने का अवसर दिया जाएगा ।

                (2) कोई प्रश्न नीति संबंधी है या नहीं, इस पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।

17. केन्द्रीय सरकार की बोर्ड को अतिष्ठित करने की शक्ित-(1) यदि किसी समय केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि-

(क) कोई बोर्ड, गंभीर आपात के कारण, इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उसके अधीन उस पर अधिरोपित कृत्यों और कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है; या 

(ख) बोर्ड ने केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन जारी किए गए किन्हीं निदेशों के अनुपालन में या इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उसके अधीन अधिरोपित कृत्यों और कर्तव्यों के निर्वहन में बार-बार व्यतिक्रम किया है और ऐसे व्यतिक्रम के फलस्वरूप बोर्ड की वित्तीय स्थिति या बोर्ड के प्रशासन को हानि हुई है; या

(ग) ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनसे लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है, तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इतनी अवधि के लिए जो छह मास से अधिक की न हो जैसी कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, बोर्ड को अतिष्ठित कर सकेगी ।

                (2) उपधारा (1) के अधीन बोर्ड को अतिष्ठित करने वाली अधिसूचना के प्रकाशन पर, -

                                (क) सभी सदस्य, अतिष्ठित किए जाने की तारीख से ऐसे सदस्य के रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे;

(ख) ऐसी सब शक्तियां, कृत्य और कर्तव्यों, जिनका प्रयोग या निर्वहन बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उसके अधीन, किया जा सकता है, तब तक जब तक उपधारा (3) के अधीन बोर्ड का पुनर्गठन नहीं हो जाता, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा जैसे केंद्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे प्रयोग या निर्वहन किया जाएगा; और

(ग) बोर्ड के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन सभी संपत्ति तब तक जब तक उपधारा (3) के अधीन बोर्ड का पुनर्गठन नहीं कर दिया जाता, केन्द्रीय सरकार में निहित रहेगी ।

                (3) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अतिक्रमण काल की समाप्ति पर, केन्द्रीय सरकार, नई नियुक्ति करके बोर्ड का पुनर्गठन कर सकेगी और ऐसी दशा में, ऐसा या ऐसे व्यक्ति, जिसने या जिन्होंने उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन अपने पद रिक्त किए हैं, नियुक्ति के लिए निरर्हित नहीं समझा जाएगा/समझे जाएंगे:

                परन्तु केन्द्रीय सरकार, अतिक्रमण काल की समाप्ति के पूर्व किसी भी समय, इस उपधारा के अधीन कार्रवाई कर सकेगी ।

                (4) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना और इस धारा के अधीन की गई किसी कार्रवाई की और उन परिस्थितियों की, जिनके कारण ऐसी कार्रवाई की गई है की पूरी रिपोर्ट यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखेगी ।

18. प्रत्यायोजन-बोर्ड, लिखित, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, बोर्ड के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य या किसी अधिकारी को ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कृत्यों को (धारा 22 के अधीन शक्तियों को छोड़कर) जो वह आवश्यक समझे, प्रत्योजित कर सकेगा ।

19. बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-बोर्ड के सभी सदस्य और सभी अधिकारी और अन्य कर्मचारी जब वे इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों के अनुसरण में कोई कार्य कर रहे हैं या उनका कार्य करना तात्पर्यित है, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे

20. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या कि जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही सरकार या बोर्ड या उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति के अथवा बोर्ड या ऐसी समिति के किसी सदस्य या उस सरकार के या बोर्ड के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी या उस सरकार या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी

21. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी

                (2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

                                () धारा 3 की उपधारा (3) के खंड () के अधीन बोर्ड के सदस्यों की संख्या;

                                () धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन बोर्ड के सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें;

                                () धारा 3 की उपधारा (5) के अधीन अध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य;

                                () धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन समितियों का गठन;

                                () धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन का प्ररूप;

() वह प्ररूप जिससे और वह समय जब बोर्ड धारा 11 के अधीन अपना बजट और धारा 12 के अधीन अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा

() धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन लेखाओं के वार्षिक विवरण का प्ररूप और वह तारीख जिससे पूर्व लेखाओं की संपरीक्षित प्रति उक्त धारा की उपधारा (4) के अधीन केन्द्रीय सरकार को भेजी जा सकेगी;

() कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए अथवा जिसके संबंध में नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है या किया जाए  

22. विनियम बनाने की बोर्ड की शाक्ति-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों को साधारणतः कार्यान्वित करने के लिए, इस अधिनियम और नियमों से संगत विनियम बना सकेगा

                (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के संबंध में उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -

() धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन बोर्ड के सचिव और अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें;

                                () वे शर्तें, जिनके अधीन बोर्ड द्वारा धारा 6 के खंड () के अधीन साधारण पूंजी का उपबंध किया जा सकेगा;

() वह प्ररूप जिसमें, और वह समय जिस पर, धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन बोर्ड को, विवरणियां दी जा सकेंगी

23. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उस नियम या विनियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

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