जूट पैकेज सामग्री (वस्तु पैकिंग अनिवार्य प्रयोग)
अधिनियम, 1987
(1987 का अधिनियम संख्यांक 10)
[9 मई, 1987]
कच्चे जूट और जूट पैकेज सामग्री के उत्पादन और ऐसे उत्पादन में लगे
हुए व्यक्तियों के हित में कुछ वस्तुओं के प्रदाय और वितरण
में जूट पैकेज सामग्री के अनिवार्य प्रयोग का
और उनसे संबंधित विषयों का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के अड़तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम जूट पैकेज सामग्री (वस्तु पैकिंग अनिवार्य प्रयोग) अधिनियम, 1987 है ।
(2) इसका विस्तार संम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) वस्तु" से निम्नलिखित अभिप्रेत है,-
(i) कोई आवश्यक वस्तु ;
(ii) किसी अनुसूचित उद्योग द्वारा विनिर्मित या उत्पादित कोई चीज ;
(ख) आवश्यक वस्तु" का वही अर्थ है जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10) में है ;
(ग) जूट पैकेज सामग्री" से जूट, जूट-सूत, जूट डोरी, जूट बोरा कपड़ा, हैसियन कपड़ा, जूट-थैले या कोई अन्य ऐसी पैकेज सामग्री अभिप्रेत है जिसमें भार के आधार पर जूट पचहत्तर प्रतिशत से कम नहीं है ;
(घ) अनुसूचित उद्योग" का वही अर्थ है जो उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951(1951 का 65) में है ;
(ङ) स्थायी सलाहकार समिति" से धारा 4 के अधीन गठित स्थायी सलाहकार समिति अभिप्रेत है ।
3. ऐसी वस्तुओं को विनिर्दिष्ट करने की शक्ति जिनका जूट पैकेज सामग्री में पैक करना अपेक्षित है-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, यदि केन्द्रीय सरकार का, स्थायी सलाहकार समिति द्वारा उसको की गई सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात् यह समाधान हो जाता है कि कच्चे जूट और जूट सामग्री के उत्पादन और उसके उत्पादन में लगे हुए व्यक्तियों के हित में ऐसा करना आवश्यक है तो वह, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, समय-समय पर, यह निदेश दे सकेगी कि ऐसी किसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग या उनमें से इतने प्रतिशत को, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, ऐसी तारीख से ही जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, उसके प्रदाय या वितरण के प्रयोजनों के लिए ऐसी जूट पैकेज सामग्री में पैक किया जाएगा जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए :
परन्तु उस समय तक जब तक कि धारा 4 के अधीन स्थायी सलाहकार समिति गठित नहीं की जाती है, केन्द्रीय सरकार इस उपधारा के अधीन कोई आदेश करने से पूर्व, धारा 4 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट मामलों पर विचार करेगी और इस प्रकार किया गया कोई आदेश उस तारीख से, जिसको स्थायी सलाहकार समिति अपनी सिफारिश करती है, तीन मास के अवसान पर प्रवृत्त नहीं रह जाएगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस आदेश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह आदेश नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु आदेश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
4. स्थायी सलाहकार समिति का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार, किसी ऐसी वस्तु के या वस्तुओं के वर्ग या उनके उस प्रतिशत भाग को अवधारित करने की दृष्टि से जिसकी बाबत जूट पैकेज सामग्री को उनकी पैकिंग में प्रयोग किया जाएगा, एक स्थायी सलाहकार समिति का गठन करेगी जिसमें ऐसे व्यक्ति होंगे जिनको केन्द्रीय सरकार की राय में, उस विषय में सलाह देने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता प्राप्त है ।
(2) स्थायी सलाहकार समिति, निम्नलिखित विषयों पर विचार करने के पश्चात्, केन्द्रीय सरकार को अपनी सिफारिशें उपदर्शित करेगी, अर्थात् :-
(क) जूट सामग्री के प्रयोग का विद्यमान स्तर ;
(ख) उपलब्ध कच्चे जूट की मात्रा ;
(ग) उपलब्ध जूट सामग्री की मात्रा ;
(घ) जूट उद्योग में और कच्चे जूट के उत्पादन में लगे व्यक्तियों के हितों का संरक्षण ;
(ङ) जूट उद्योग के निरन्तर अनुरक्षण की आवश्यकता ;
(च) वस्तुओं की मात्रा जो, उसकी राय में, जूट सामग्री में पैक करने के लिए अपेक्षित होना संभावित है ;
(छ) ऐसे अन्य विषय जो सलाहकार समिति ठीक समझे ।
5. जूट पैकेज सामग्री से भिन्न किसी सामग्री में पैक करने का प्रतिषेध-जहां, किसी वस्तु, वस्तुओं के वर्ग या उसके किसी प्रतिशत भागों को, उनके प्रदाय या वितरण के लिए जूट पैकेज सामग्री में पैक करने की अपेक्षा करने वाला कोई आदेश धारा 3 के अधीन किया गया है, वहां ऐसी वस्तु, वस्तुओं का वर्ग या उसके प्रतिशत भाग का, ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट तारीख से ही, प्रदाय या वितरण तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि उसको उस आदेश के अनुसार पैक नहीं किया जाता है :
परन्तु इस धारा की कोई बात पूर्वोक्त तारीख से तीन मास की अवधि तक ऐसी किसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग या उसके प्रतिशत भाग के प्रदाय या वितरण को लागू नहीं होगी यदि उस तारीख के ठीक पूर्व ऐसी वस्तु, वस्तुओं का वर्ग या उसका प्रतिशत कोई भाग जूट पैकेज सामग्री से भिन्न किसी सामग्री में पैक किया जा रहा था ।
6. जानकारी और नमूने मंगाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, ऐसे किसी व्यक्ति से जिससे धारा 5 के अधीन यह अपेक्षित है कि वह पैक करने के लिए जूट पैकेज सामग्री का उपयोग करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह-
(क) ऐसी किसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग या उसके प्रतिशत ऐसे भाग की बाबत जिसे ऐसे पैक करने की अपेक्षा है, उस सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट, किसी अधिकारी को, ऐसे प्ररूप में और ऐसी अवधि के भीतर ऐसी जानकारी जो उस आदेश में उस सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, प्रस्तुत करे जो उसके कब्जे में है ;
(ख) ऐसे अधिकारी द्वारा ऐसे स्थानों पर और ऐसी अवधि के भीतर जूट पैकेज सामग्री के ऐसे नमूने, जो उस सरकार द्वारा आदेश में, विनिर्दिष्ट किए जाएं, निरीक्षण के लिए प्रस्तुत करे ।
7. प्रवेश और निरीक्षण करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी (जिसे इसमें इसके पश्चात् प्राधिकृत अधिकारी कहा गया है), उचित समय पर ऐसे किसी स्थान, परिसर या यान में प्रवेश कर सकेगा जहां जूट पैकेज सामग्री में पैक की गई किसी वस्तु का प्रदाय या वितरण के लिए भंडारकरण किया गया है या वह रखी गई है, और उसे निरीक्षण के लिए प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकेगा और उससे संबंधित कोई जानकारी मांग सकेगा ।
8. तलाशी लेने और अभिग्रहण करने की शक्ति-(1) यदि प्राधिकृत अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि कोई वस्तु धारा 5 के उल्लंघन में पैक की गई है और वह किसी स्थान, परिसर या यान में छिपाकर रखी गई है तो वह ऐसी वस्तु के लिए ऐसे स्थान, परिसर या यान में प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा ।
(2) यदि उपधारा (1) के अधीन की गई किसी तलाशी के परिणामस्वरूप धारा 5 के उल्लंघन में पैक की गई कोई वस्तु पाई जानी है, तो प्राधिकृत अधिकारी ऐसी वस्तु और किसी अन्य चीज को, जो उसकी राय में, इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही के लिए उपयोगी या सुसंगत होगी, अभिगृहीत कर सकेगा :
परन्तु जहां ऐसी किसी वस्तु या चीज को अभिगृहीत करना साध्य नहीं है वहां प्राधिकृत अधिकारी उस व्यक्ति पर यह आदेश तामील कर सकेगा कि वह प्राधिकृत अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना ऐसी वस्तु या चीज को नहीं हटाएगा, उससे विलग नहीं होगा, या अन्यथा उसका संव्यवहार नहीं करेगा ।
(3) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के तलाशी और अभिग्रहण से संबंधित उपबन्ध, जहां तक हो सके वहां तक, इस धारा के अधीन की गई प्रत्येक तलाशी या अभिग्रहण को लागू होंगे ।
9. धारा 5 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई धारा 5 के उल्लंघन में किसी वस्तु, वस्तु के वर्ग या उसके प्रतिशत किसी भाग को किसी सामग्री में पैक करेगा वह जुर्माने से, जो ऐसी जूट पैकेज सामग्री, जिसका धारा 3 के अधीन किए गए आदेश के अनुसार प्रयोग किया जाना चाहिए था, लागत के दुगुने के बराबर रकम तक हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
10. मिथ्या कथन आदि के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति, जिससे धारा 6 के अधीन किए गए किसी आदेश द्वारा कोई जानकारी या नमूना देने की अपेक्षा की जाती है, ऐसी कोई जानकारी या नमूना देने में असफल रहेगा या ऐसा कोई कथन करेगा या जानकारी देगा जो तात्त्विक विशिष्टियों में मिथ्या है और जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके मिथ्या होने का उसे युक्तियुक्त विश्वास है, या जिसके सही होने का वह विश्वास नहीं करता है, वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
11. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है वहां प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है ; तथा
(ख) किसी फर्म के संबंध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
12. अपराधों का संज्ञेय होना-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन दंडनीय प्रत्येक अपराध संज्ञेय होगा ।
13. प्रत्यायोजित करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य, धारा 3 के अधीन या धारा 16 के अधीन आदेश बनाने या धारा 17 के अधीन नियम बनाने की शक्ति से भिन्न, शक्तियां ऐसे विषयों के संबंध में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं,-
(क) केन्द्रीय सरकार के अधीनस्थ ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा ; या
(ख) राज्य सरकार या राज्य सरकार के अधीनस्थ ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वार,
भी प्रयोग की जा सकेंगी, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए ।
14. केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेश देना-केन्द्रीय सरकार किसी राज्य सरकार को ऐसे निदेश दे सकेगी जो वह इस अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन के बारे में आवश्यक समझे ।
15. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के बारे में कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार अथवा केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी अधिकारी या कर्मचारी या किसी प्राधिकृत अधिकारी के विरुद्ध नहीं होगी ।
16. छूट देने की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि लोकहित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, किसी वस्तु या वस्तुओं के वर्ग का प्रदाय या वितरण करने वाले किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को धारा 3 के अधीन बनाए गए आदेश के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस आदेश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह आदेश नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु आदेश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
17. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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