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भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989 ( Small Industries Development Bank Of India Act, 1989 )


 

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989

(1989 का अधिनियम संख्यांक 39)

[25 अक्तूबर, 1989]

लघु सेक्टर में उद्योग के संप्रवर्तन, वित्तपोषण और विकास के लिए तथा लघु सेक्टर में उद्योग के संप्रवर्तन, वित्तपोषण या विकास में लगी

संस्थाओं के कृत्यों का समन्वय करने के लिए प्रधान वित्तीय

संस्था के रूप में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक

की स्थापना करने के लिए और उससे

संबंधित या उसके आनुषंगिक

विषयों के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के चालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989 है ।

(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है । 

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) बोर्ड" से धारा 5 में निर्दिष्ट भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक का निदेशक बोर्ड अभिप्रेत है ;

 [(ख) अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक" से धारा 6 की उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अभिप्रेत है;]

(ग) न्यायालय" से वह उच्च न्यायालय अभिप्रेत है जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर,-

(i) प्रतिवादी या प्रत्यर्थी का, या जहां एक से अधिक प्रतिवादी या प्रत्यर्थी हैं वहां उनमें से किसी एक का, इस अधिनियम के अधीन उसके विरुद्ध किसी विधिक कार्यवाही के प्रारंभ के समय- 

(1) रजिस्ट्रीकृत कार्यालय है, या 

(2) वह अपना संपूर्ण या आंशिक कारबार चलाता है, अथवा 

(ii) ऐसी विधिक कार्यवाहियों के लिए वादहेतुक पूर्णतः या भागतः उद्भूत हुआ है ; 

(घ) विकास बैंक" से भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अभिप्रेत है;

(ङ) निदेशक" से धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन नामनिर्दिष्ट निदेशक अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत 1[अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक तथा पूर्णकालिक निदेशक] भी है ; 

(च) निर्यात" से लघु सेक्टर में किसी औद्योगिक समुत्थान के उत्पादों या सेवाओं का भारत से निर्यात अभिप्रेत है ;  

 [(चक) साधारण बीमा निगम" से साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 9 के अधीन गठित भारतीय साधारण बीमा निगम अभिप्रेत है;]

(छ) आयात" से अभिप्रेत है भारत में लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान के प्रयोग के लिए सेवाओं या माल का आयात, जिसके अंतर्गत ठोस, द्रव या गैसीय स्थिति में सभी सामग्री, वस्तुएं और चीजें तथा सभी प्रकार की ऊर्जा भी है ; 

 [(ज) लघु सेक्टर का औद्योगिक समुत्थान" से निम्नलिखित में लगा हुआ या लगने वाला कोई समुत्थान अभिप्रेत है,-

(i) माल का विनिर्माण, परिरक्षण या प्रसंस्करण ;

(ii) पोत परिवहन ; 

(iii) खनन, जिसके अंतर्गत खानों का विकास भी है ; 

(iv) होटल उद्योग ; 

(v) सड़क या जलमार्ग द्वारा या वायुयान या रज्जुमार्ग या लिफ्ट द्वारा यात्रियों या माल का परिवहन ; 

(vi) विद्युत या किसी अन्य रूप की ऊर्जा का उत्पादन, भंडारण या वितरण ;

(vii) किसी प्रकार की मशीनरी या उपस्कर या यानों या जलयानों या मोटरबोटों या ट्रेलरों या ट्रैक्टरों का अनुरक्षण, मरम्मत, परीक्षण या सर्विसिंग ;

(viii) मशीनरी या शक्ति की सहायता से किसी वस्तु का समंजन करना, मरम्मत करना या पैक करना ; 

(ix) किसी औद्योगिक क्षेत्र या किसी औद्योगिक संपदा की स्थापना करना या उसका विकास करना ;

(x) मछली पकड़ना या मछली पकड़ने या उसके अनुरक्षण के लिए तट की सुविधाएं उपलब्ध करना ;

(xi) औद्योगिक उन्नति के संवर्धन के लिए विशेष या तकनीकी जानकारी या अन्य सेवाएं प्रदान करना ;

(xii) उद्योग के लिए इंजीनियरी, तकनीकी, वित्त, प्रबंध, विपणन या अन्य सेवाएं या सुविधाएं प्रदान करना ;

(xiii) सेवा उद्योग जैसे किसी वस्तु के उपयोग, विक्रय परिवहन, परिदान या व्ययन की दृष्टि से उस वस्तु या पदार्थ को परिवर्तित करना, अलंकृत करना, पालिश करना, तैयार करना, तेल लगाना, सफाई करना, स्वच्छ करना या अन्य प्रकार से उसके साथ व्यवहार करना या उसे अनुकूल बनाना ; 

(xiv) चिकित्सा, स्वास्थ्य या अन्य सहायक सेवाएं प्रदान करना ;

(xv) सूचना, प्रौद्योगिकी, दूरसंचार या इलैक्ट्रानिक से संबंधित सेवाएं प्रदान करना ;

(xvi) जलयानों, पोतों और वायुयानों सहित औद्योगिक संयंत्रों, उपस्करों, मशीनरी या अन्य आस्तियों को पट्टे पर देना, उपपट्टे पर देना या अवक्रय पर देना ;

(xvii) कोई अन्य क्रियाकलाप जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए इस निमित्त विनिर्दिष्ट करना ; या

(xviii) किसी संकल्पना, प्रौद्योगिकी, डिजाइन, प्रसंस्करण या उत्पाद का अनुसंधान और विकास चाहे वह पूर्वोक्त विषयों में से किसी के संबंध में हो अथवा नहीं, जिसके अंतर्गत उपखंड (xvii) के अधीन कोई क्रियाकलाप या कोई अन्य विषय भी है और जो उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की धारा 11ख के अधीन लघु उपक्रम समझा जाता है । 

स्पष्टीकरण-माल का प्रसंस्करण" पद के अंतर्गत किसी पदार्थ के साथ मानवीय, यांत्रिकी, रासायनिक, वैद्युत या कोई अन्य वैसी ही संक्रिया करके कोई वस्तु उत्पादित करने, तैयार करने या बनाने के लिए कोई कला या प्रक्रिया भी है ;]

 [(जक) जीवन बीमा निगम" से जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 31) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय जीवन बीमा निगम अभिप्रेत है;]

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।             

 (ञ) राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम" से कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन रजिस्ट्रीकृत राष्ट्रीय लद्यु उद्योग निगम लिमिटेड अभिप्रेत है ;

(ट) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ; 

(ठ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ; 

 [(ठक) पब्लिक सेक्टर बैंक" से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) में यथापरिभाषित समनुषंगी बैंक, बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 3 के अधीन गठित तत्स्थानी नया बैंक अभिप्रेत है;]

 [(ठख) रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है ; 

(ठग) अनुसूचित बैंक" से तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की दूसरी अनुसूची में सम्मिलित कोई बैंक अभिप्रेत है ;]

(ड) लघु उद्योग बैंक" से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अभिप्रेत है ; 

(ढ) राज्य लघु उद्योग निगम" से किसी राज्य में लघु उद्योगों के लिए कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन रजिस्ट्रीकृत राज्य निगम अभिप्रेत है ;

(ण) राज्य वित्तीय निगम" से राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) की धारा 3 या धारा 3क के अधीन स्थापित वित्तीय निगम या उसकी धारा 46 के अधीन अधिसूचित संस्था अभिप्रेत है ;

(त) राज्य औद्योगिक विकास निगम" से किसी राज्य में उद्योगों के विकास के लिए कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन रजिस्ट्रीकृत राज्य निगम अभिप्रेत है ; 

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।

अध्याय 2

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक की स्थापना और उसकी पूंजी

3. भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक की स्थापना और उसका निगमन-(1) उस तारीख से जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के नाम से ज्ञात एक निगम की स्थापना की जाएगी ।

(2) लघु उद्योग बैंक शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा और, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उसे संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उस नाम से वह वाद ला सकेगा या उस पर वाद लाया जा सकेगा ।

(3) लघु उद्योग बैंक का प्रधान कार्यालय लखनऊ में या ऐसे अन्य स्थान पर होगा जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे । 

(4) लघु उद्योग बैंक भारत में या उसके बाहर किसी स्थान पर कार्यालय, शाखाएं या अभिकरण स्थापित करेगा ।

 [4. प्राधिकृत पूंजी-लघु उद्योग बैंक की प्राधिकृत पूंजी एक खरब रुपए होगी जो प्रत्येक दस रुपए के पचहत्तर करोड़ पूर्णतः समादत्त साधारण अंशों में और प्रत्येक दस रुपए के पच्चीस करोड़ पूर्णतः समादत्त मोचनीय अधिमानी शेयरों में विभाजित होगी :

परन्तु यह कि केन्द्रीय सरकार, बोर्ड की सिफारिश पर, अधिसूचना द्वारा, प्राधिकृत पूंजी की रकम को दो खरब रुपयों से अनधिक सीमा तक बढ़ा सकेगी जिसमें साधारण शेयरों और मोचनीय अधिमानी शेयरों की ऐसी संख्या होगी जो वह ठीक समझे । 

4क. साधारण शेयरों का मोचनीय अधिमानी शेयरों में संपरिवर्तन-(1) केन्द्रीय सरकार, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (संशोधन) अधिनियम, 2000 के प्रारंभ के पश्चात् किसी भी समय, अधिसूचना द्वारा, विकास बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंकों, साधारण बीमा निगम, जीवन बीमा निगम और केंद्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं द्वारा धारित साधारण शेयरों को, ऐसी संख्या में जो पच्चीस करोड़ से अधिक नहीं होगी, जैसा भी वह विनिश्चित करे, मोचनीय अधिमानी शेयरों में संपरिवर्तित कर सकेगी :

परन्तु यह कि ऐसे संपरिवर्तन से किसी भी दशा में, विकास बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंकों, साधारण बीमा निगम, जीवन बीमा निगम और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं द्वारा धारित संकलित साधारण शेयरों को इक्यावन प्रतिशत से कम नहीं किया जाएगा ।  

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट मोचनीय अधिमानी शेयरों- 

(क) लाभांश की वह दर नियत होगी जो केन्द्रीय सरकार ऐसे संपरिवर्तन के समय विनिर्दिष्ट करे ; और 

(ख) ऐसे शेयर न तो अंतरणीय होंगे और न ही उन पर मत देने का कोई अधिकार होगा । 

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट मोचनीय अधिमानी शेयरों को लघु उद्योग बैंक द्वारा ऐसे संपरिवर्तन की तारीख से तीन वर्ष के भीतर ऐसी किस्तों में और रीति से, जो बोर्ड अवधारित करे, मोचित किया जाएगा । 

4ख. पूंजी का अंतरण-ऐसी तारीख को जिसे केन्द्रीय सरकार विकास बैंक के परामर्श से, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे,  (जिसे इसमें इसके पश्चात् विनिर्दिष्ट तारीख" कहा गया है) लघु उद्योग बैंक की निर्गमित पूंजी के इक्यावन प्रतिशत से अन्यून जो विकास बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट तारीख से ठीक पहले की तारीख को प्रतिश्रुत की गई है, पब्लिक सेक्टर बैंकों, साधारण बीमा निगम, जीवन बीमा निगम और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं को ऐसे अनुपात में, ऐसी रीति से और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो उस सरकार द्वारा अवधारित की जाएं, अंतरित हो जाएगी और उनमें निहित हो जाएगी । 

4ग. पुरोधृत पंजी-(1) लघु उद्योग विकास बैंक की भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (संशोधन) अधिनियम, 2000 के प्रारंभ से ठीक पहले की चार अरब पचास करोड़ रुपए की पुरोधृत पूंजी, ऐसे प्रारंभ पर प्रत्येक दस रुपए के पैंतालीस करोड़ साधारण शेयरों में विभाजित होगी । 

(2) बोर्ड, समय-समय पर, लघु उद्योग बैंक की पुरोधृत साधारण शेयर पूंजी या मोचनीय अधिमानी शेयर पूंजी को ऐसे व्यक्तियों को शेयर आबंटित करके और निबंधनों और शर्तों पर जो बोर्ड अवधारित करे, बढ़ा सकेगा :

परंतु पुरोधृत साधारण पूंजी में कोई वृद्धि ऐसी रीति से नहीं की जाएगी जिससे कि विकास बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंकों, साधारण बीमा निगम, जीवन बीमा निगम और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं द्वारा धारित पूंजी किसी भी समय लघु उद्योग बैंक की संकलित पुरोधृत साधारण शेयर पूंजी का इक्यावन प्रतिशत से कम धारित करे ।   

4घ. शेयर पूंजी को घटाना-(1) लघु उद्योग बैंक, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, शेयरधारकों के सारधण अधिवेशन में पारित संकल्प द्वारा, अपनी शेयर पूंजी को किसी रीति से घटा सकेगा । 

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, शेयर पूंजी को निम्नलिखित रीति से घटाया जा सकेगा,-

(क) असमादत्त शेयर पूंजी के सम्बन्ध में अपने किन्हीं साधारण शेयरों पर दायित्व को निर्वापित या कम करके ; 

(ख) अपने किन्हीं साधारण शेयरों में से किसी पर दायित्व को या तो निर्वापित या कम करके या ऐसा किए बिना ऐसी किसी समादत्त शेयर पूंजी को रद्द करके जो नष्ट हो गई हैं या उपलब्ध आस्तियां बिना प्रतिनिधित्व की हैं; या 

(ग) अपने किन्हीं साधारण शेयरों पर दायित्व को या तो निर्वापित या कम करके या ऐसा किए बिना ऐसी किसी समादत्त शेयर पूंजी को चुका करके जो लघु उद्योग बैंक की आवश्यकता से अधिक है । 

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी साधारण अधिवेशन में, शेयर पूंजी को कम करने का कोई संकल्प मत देने के लिए हकदार शेयरधारकों द्वारा स्वयं मत देकर या जहां परोक्षी अनुज्ञात है वहां परोक्षी द्वारा, मत देकर पारित किया जाएगा और संकल्प के पक्ष में दिए गए मत उन मतों से, यदि कोर्इ हों, संख्या में तीन गुना से कम नहीं होंगे जो इस प्रकार हकदार और मत दे रहे शेयरधारकों द्वारा संकल्प के विरुद्ध दिए गए हों । 

4ङ. मत देने के अधिकार पर निर्बंधन-लघु उद्योग बैंक का प्रत्येक शेयरधारक, जो साधारण शेयर धारण कर रहा है, प्रत्येक संकल्प पर ऐसे शेयरों की बाबत मत देने का अधिकार होगा और किसी मतदान में उसके मत देने का अधिकार लघु उद्योग बैंक की समादत्त साधारण शेयर पूंजी में उसके शेयर के अनुपात में होगा: 

परन्तु, तथापि, कोई विकास बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंक, साधारण बीमा निगम, जीवन बीमा निगम और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं से भिन्न कोई शेयरधारक पुरोधृत साधारण शेयरपूंजी के दस प्रतिशत से अधिक उसके द्वारा धारित किन्हीं साधारण शेयरों की बाबत मताधिकार का प्रयोग करने का हकदार नहीं होगा । 

5. प्रबंध-(1) लघु उद्योग बैंक के मामलों और कारबार का साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबंध एक निदेशक बोर्ड में निहित होगा, जो उन सब शक्तियों का प्रयोग तथा वे सब कार्य और बातें कर सकेगा जिनका लघु उद्योग बैंक द्वारा प्रयोग किया जा सकता है और जो इस अधिनियम द्वारा साधारण अधिवेशन में लघु उद्योग बैंक द्वारा किए जाने के लिए अभिव्यक्त रूप से निदेशित या अपेक्षित नहीं की गई है । 

(2) बोर्ड यह निदेश दे सकेगा कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य कोई शक्ति ऐसे मामलों में और ऐसी शर्तों के अध्यधीन, यदि कोई हो, जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशकों द्वारा भी प्रयोक्तव्य होंगी ।

(3) इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, अपने कृत्यों के निर्वहन में बोर्ड, लोकहित का सम्यक् ध्यान रखते हुए, कारबार के सिद्धांतों के अनुसार कार्य करेगा ।

6. बोर्ड का गठन-(1) बोर्ड निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात्: -

(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक; 

(ख) केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए गए दो पूर्णकालिक निदेशक; 

(ग) दो निदेशक जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए गए पदधारी होंगे;

(घ) विकास बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंक, साधारण बीमा निगम, जीवन बीमा निगम और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं द्वारा विहित रीति में नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले तीन निदेशक; 

(ङ) तीन निदेशक जो केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे जिसके अन्तर्गत राज्य वित्तीय निगमों के पदाधारियों में से एक निदेशक भी है, जो विज्ञान, प्रौद्योगिक, अर्थशास्त्र, उद्योग, बैंककारी, औद्योगिक सहकारिता, विधि, औद्योगिक वित्त, विनिधान, लेखाकर्म, विपणन या किसी ऐसे अन्य विषय का विशेष ज्ञान या उनका वृत्तिक अनुभव रखते हों, केन्द्रीय सरकार की राय में जिसका विशेष ज्ञान या वृत्तिक अनुभव लघु उद्योग बैंक के लिए उपयोगी होगा; 

(च) विकास बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंक, साधारण बीमा निगम, जीवन बीमा निगम और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं से भिन्न शेयरधारकों द्वारा जिनके नाम उस अधिवेशन की तारीख से नब्बे दिन पूर्व जिसमें ऐसा निर्वाचन निम्नलिखित आधार पर होता है, लघु उद्योग बैंक के शेरयधारकों के रजिस्टर में प्रविष्ट है, विहित रीति से निर्वाचित ऐसी संख्या में, जो चार से अधिक न हो निदेशक, अर्थात्: - 

(i) जहां ऐसे शेयरधारकों की पुरोधृत साधारण शेयर पूंजी की कुल रकम कुल पुरोधृत साधारण शेयर पूंजी का दस प्रतिशत या उससे कम है दो निदेशक; 

(ii) जहां ऐसे शेयरधारकों की पुरोधृत साधारण शेयर पूंजी की कुल रकम कुल पुरोधृत साधारण शेयर पूंजी का दस प्रतिशत से अधिक है किन्तु पच्चीस प्रतिशत से कम है तीन निदेशक; और

(iii) जहां ऐसे शेयरधारकों की पुरोधृत साधारण अंश पूंजी की कुल रकम कुल पुरोधृत साधारण शेयर पूंजी के पच्चीस प्रतिशत या उससे अधिक है चार निदेशक:

                परंतु यदि विकास बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंक, साधारण बीमा निगम, जीवन बीमा निगम और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं से भिन्न शेयरधारकों को पुरोधृत की गई साधारण शेयर पूंजी की धृति का प्रतिशत चार निदेशकों के निर्वाचन को अनुज्ञात नहीं करता है या निर्वाचित निदेशकों द्वारा भार ग्रहण किए जाने तक, बोर्ड किसी भी समय, चार से अनधिक उतने निदेशक ऐसे व्यक्तियों में से सहयोजित कर सकेगा जिनके पास विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अर्थशास्त्र, उद्योग, बैंककारी, औद्योगिक सहकारिता, विधि, औद्योगिक वित्त, विनिधान, लेखाकर्म, विपणन या किसी अन्य विषय का विशेष ज्ञान है या उनका वृत्तिक अनुभव है, और ऐसा विशेष ज्ञान या वृत्तिक अनुभव, बोर्ड की राय में, लघु उद्योग बैंक के लिए उसके कृत्यों को कार्यान्वित करने के लिए उपयोगी होगा, जो निर्वाचित निदेशकों द्वारा भार ग्रहण करने तक पद धारण करेंगे और उतनी ही संख्या में ऐसे सहयोजित निदेशक सहयोजन के क्रम में निवृत्त हो जाएंगे ।

(2) अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक तथा पूर्णकालिक निदेशक ऐसी अवधि के लिए जो पांच वर्ष से अधिक की नहीं होगी, जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, पद धारण करेंगे और इस प्रकार नियुक्त कोई व्यक्ति पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होगा ।

(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार को, यथास्थिति, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक को उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पूर्व किसी भी समय लिखित में तीन मास से अन्यून की सूचना देकर या ऐसी सूचना के बदले में तीन महीने का वेतन और भत्ते देकर उनकी पदावधि को पर्यवसित करने का अधिकार होगा; और, यथास्थिति, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक को भी केन्द्रीय सरकार को लिखित में तीन मास से अन्यून की सूचना देकर उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पूर्व किसी समय अपना पद त्याग करने का अधिकार होगा । 

(4) अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक तथा पूर्णकालिक निदेशक ऐसे वेतन और भत्ते प्राप्त करेंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित किए जाएं ।

(5) केन्द्रीय सरकार किसी भी समय, यथास्थिति, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक को पद से हटा सकेगी:

परंतु इस उपधारा के अधीन किसी व्यक्ति को उसके पद से तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि उसे उसके हटाए जाने के विरुद्ध कारण बताने का अवसर न दे दिया गया हो । 

(6) उपधारा (1) के खंड (ग), खंड (घ) और खंड (ङ) के अधीन नामनिर्दिष्ट प्रत्येक निदेशक उस प्राधिकारी के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा जिसने उसको नामनिर्दिष्ट किया है । 

(7) उपधारा (6) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, -

(क) उपधारा (1) के खंड (ग), खंड (घ) और खंड (ङ) के अधीन नामनिर्दिष्ट प्रत्येक निदेशक, तीन वर्ष से अनधिक उतनी अवधि के लिए, जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या उसे नामनिर्दिष्ट करने वाले प्राधिकारी इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे और उसके पश्चात् उसके उत्ताराधिकारी द्वारा पद ग्रहण करने तक, पद धारण करेगा और पुनः नामनिर्देशन के लिए पात्र होगा:

परंतु ऐसा कोई निदेशक लगातार छह वर्ष से अधिक की अवधि के लिए पद धारण नहीं करेगा; और 

(ख) उपधारा (1) के खंड (च) के अधीन निर्वाचित प्रत्येक निदेशक, तीन वर्ष के लिए और उसके पश्चात् उसके उत्तराधिकारी द्वारा पद ग्रहण करने तक पद धारण करेगा और पुनः निर्वाचन का पात्र होगा:

पंरतु ऐसा कोई निदेशक लगातार छह वर्ष से अधिक की अवधि के लिए पद धारण नहीं करेगा । 

(8) विकास बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंकों, साधारण बीमा निगम, जीवन बीमा निगम और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं से भिन्न शेयरधारक, उस रीति से जो विहित की जाए निदेशक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, ऐसे शेयरधारकों के मतों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा, जो ऐसे शेयरधारकों द्वारा धारित शेयर पूंजी के योग के आधे से  कम धारण न करते हों, उपधारा (1) के खंड (च) के अधीन निर्वाचित किसी निदेशक को हटा सकेंगे और इस प्रकार हुई रिक्ति को भरने के लिए उसके स्थान पर अन्य निदेशक निर्वाचित कर सकेंगे ; 

(9) (i) बोर्ड का अधिवेशन प्रत्येक तीन मास में कम से कम एक बार होगा और प्रत्येक वर्ष कम से कम चार अधिवेशन होंगे और अधिवेशन ऐसे स्थानों पर हो सकेंगे, जो विहित किए जाएं । 

(ii) बोर्ड के प्रत्येक अधिवेशन की सूचना लिखित में भारत में तत्समय उपस्थित प्रत्येक निदेशक को और प्रत्येक अन्य निदेशक को भारत में उसके सामान्य पते पर दी जाएगी ।

(10) इस अध्याय में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अध्यधीन, बोर्ड के अधिवेशन ऐसे समयों और स्थानों पर होंगे और वह अपने कारबार के संव्यवहार के संबंध में, जिसके अंतर्गत संकल्पों के अंगीकार की रीति भी है, प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा, जो विहित किए जाएं ।

(11) यदि किसी कारण से, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, बोर्ड के अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ हों तो, इस निमित्त अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक द्वारा नामनिर्दिष्ट कोई अन्य निदेशक और ऐसे नामनिर्देशन के अभाव में कोई निदेशक जो उपस्थित निदेशकों द्वारा उनमें से निर्वाचित किया जाए, अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा ।

(12) ऐसे सभी प्रश्न, जो बोर्ड के किसी अधिवेशन में उठने वाले सभी प्रश्नों का विनिश्चय उपस्थित और मत देने वाले निदेशकों के बहुमत से विनिश्चित किए जाएंगे और मत बराबर होने की दशा में, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक या उसकी अनुपस्थिति में, अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का निर्णायक मत होगा ।

(13) उपधारा (12) में यथाउपबंधित के सिवाय, बोर्ड के प्रत्येक निदेशक को मत देने का अधिकार होगा ।]

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

 [8. निदेशकों की निरर्हताएं-कोई भी व्यक्ति धारा 6 की उपधारा (1) के खंड (च) के अधीन निदेशक निर्वाचित किए जाने के लिए पात्र नहीं होगा, यदि- 

(क) उसके बारे में सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय का यह निष्कर्ष है कि वह विकृतचित्त का है और ऐसा निष्कर्ष प्रवर्तन में है; 

(ख) वह अनुन्मोचित दिवालिया है;

(ग) उसने दिवालिया न्यायनिर्णीत किए जाने के लिए आवेदन किया है और उसका आवेदन लंबित है; 

(घ) वह किसी ऐसे अपराध के लिए किसी न्यायालय द्वारा जिसमें नैतिक अधमता अंतर्ग्रस्त है और उसकी बाबत कम से कम छह मास के कारावास से दंडादिष्ट किया गया है और उक्त दंडादेश की समाप्ति की तारीख से पांच वर्ष की अवधि व्यतीत नहीं हुई है; या 

(ङ) उसने उसके द्वारा चाहे अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से, धारित भारतीय लघु उद्योग बैंक के शेयरों की बाबत किसी मांग का संदाय नहीं किया है और मांग के संदाय के लिए नियत अंतिम दिन से छह मास व्यतीत हो गए हैं । 

9. निदेशकों द्वारा पद रिक्त किया जाना और उनके द्वारा पदत्याग-(1) किसी निदेशक का पद रिक्त हो जाएगा, यदि-

(क) वह धारा 8 में वर्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो जाता है; 

(ख) अपने हस्ताक्षर से लिखित सूचना देकर अपने पद से त्यागपत्र दे देता है और त्यागपत्र स्वीकार कर लिया जाता है; 

(ग) बोर्ड के लगातार तीन अधिवेशनों में बोर्ड से अनुपस्थित रहने की मंजूरी प्राप्त किए बिना अनुपस्थित रहता है । 

(2) उपधारा (1) के खंड (क) में किसी बात के होते हुए भी, उस खंड में निर्दिष्ट निरर्हताएं- 

(क) न्यायनिर्णयन, दंडादेश या आदेश की तारीख से तीस दिन तक; 

(ख) जहां किसी न्यायनिर्णयन, दंडादेश या ऐसी किसी दोषसिद्धि, जिसका परिणाम दंडादेश हो या आदेश के विरुद्ध पूर्वोक्त तीस दिन के भीतर कोई अपील की जाती है या अर्जी दी जाती है, वहां उस तारीख से, जिसको ऐसी अपील या अर्जी निपटाई जाती है, सात दिन की समाप्ति तक; या 

(ग) जहां पूर्वोक्त सात दिन के भीतर उक्त न्यायनिर्णयन, दंडादेश, दोषसिद्धि या आदेश की बाबत कोई और अपील की जाती है या अर्जी प्रस्तुत की गई है और उस अपील या अर्जी, यदि अनुज्ञात की जाती है और उसका परिणाम निरर्हता के हटाए जाने का होगा, तो तब तक जब तक कि ऐसी और अपील या अर्जी का निपटारा नहीं कर दिया जाता है, प्रभावी नहीं होगी ।]

                 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

 [12. कार्यपालिका समिति और अन्य समितियां-बोर्ड एक कार्यपालिका समिति का गठन करेगा, जो अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, पूर्णकालिक निदेशक और उतने अन्य निदेशकों से मिलकर बनेगी जितने वह ठीक समझे ।

(2) कार्यापालिका समिति, ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगी, जो विहित किए जाएं या बोर्ड द्वारा धारा 34 में अंतर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उसे प्रत्यायोजित किए जाएं । 

(3) बोर्ड, चाहे पूर्णतः निदेशकों से या पूर्णतः अन्य व्यक्तियों से या भगतः निदेशकों से या भागतः अन्य व्यक्तियों से मिलकर बनने वाली ऐसी अन्य समितियां, ऐसे प्रयोजन या प्रयोजनों के लिए, जो वह ठीक समझे, गठित कर सकेगा ।

(4) इस धारा के अधीन गठित कार्यपालिका समिति या किसी अन्य समिति के अधिवेशन ऐसे समय और ऐसे स्थानों पर होंगे और वह अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगी, जो विहित किए जाएं । 

12क. समितियों के निदेशकों और सदस्यों की फीसें और भत्ते-निदेशकों और समिति के सदस्यों को बोर्ड या इस अधिनियम के अनुसरण में गठित किसी समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए और लघु उद्योग बैंक के किसी अन्य कार्य को करने के लिए ऐसी फीस और भत्ते संदत्त किए जाएंगे, जो विहित किए जाएं:

परंतु अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशकों या ऐसे किसी अन्य निदेशक को, जो सरकार का पदधारी है, कोई फीस संदेय नहीं होगी ।]

अध्याय 4

लघु उद्योग बैंक का कारबार

13. लघु उद्योग बैंक का कारबार-लघु उद्योग बैंक, लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थानों के संप्रवर्तन, वित्तपोषण और विकास के लिए प्रधान वित्तीय संस्था के रूप में कृत्य करेगा और लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थानों के संप्रवर्तन, वित्तपोषण और विकास में लगी संस्थाओं के कृत्यों का समन्वय भी करेगा और निम्नलिखित कारबार में से कोई कारबार चला सकेगा और कर सकेगा, अर्थात्: -

 [(i) किसी राज्य वित्तीय निगम, राज्य औद्योगिक विकास निगम, राज्य लघु उद्योग निगम, अनुसूचित बैंक, राज्य सहकारी बैंक या ऐसी अन्य वित्तीय संस्थाओं को, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त अनुमोदित किया जाए, ऐसे निगम, बैंक या संस्था या राज्य वित्तीय निगम या राज्य लघु औद्योगिक विकास निगम द्वारा लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थानों को अनुदत्त, जो पच्चीस वर्ष से अनधिक की अवधि के भीतर प्रतिसंदेय हों, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो वह अधिरोपित करना ठीक समझे, पुनर्वित्तपूर्ति के रूप में उधारा और अग्रिम अनुदत्त करना;]

(ii) लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थानों द्वारा या लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान द्वारा विनिर्मित उत्पाद का विक्रय करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा रचे गए, लिखे गए, प्रतिगृहीत किए गए या पृष्ठांकित किए गए विनिमयपत्रों और वचनपत्रों का प्रतिग्रहण करना, मित्ती काटे पर भुगतान करना या पुनः भुगतान करना; 

(iii) ऐसे किसी राज्य वित्तीय निगम, राज्य औद्योगिक विकास निगम, राज्य लघु उद्योग निगम, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम या [इस निमित्त बोर्ड द्वारा अनुमोदित ऐसी अन्य वित्तीय संस्थाओं को स्टाकों, शेयरों, बंधपत्रों या डिबेंचरों के लिए अभिदाय करना या उन्हें क्रय करना;

(iv) किसी राज्य वित्तीय निगम, राज्य औद्योगिक विकास निगम, राज्य लघु उद्योग निगम, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम या 1[इस निमित्त बोर्ड द्वारा अनुमोदित ऐसी अन्य वित्तीय संस्थाओं को,] बद्ध-प्रत्यय या उधार और अग्रिम अनुदत्त करना; 

(v) लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान को उधार और अग्रिम अनुदत्त करना अथवा किसी ऐसे समुत्थान के स्टाकों, शेयरों, बंधपत्रों या डिबेंचरों के लिए अभिदाय करना या उन्हें क्रय करना या उनकी पुरोधृति की हमीदारी करना;

परंतु इस खंड की किसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह किसी लघु उद्योग बैंक को लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान को ऐसे उधार या अग्रिम अनुदत्त करने से अथवा उसके ऐसे डिबेंचरों के लिए अभिदाय करने से प्रवारित करती है जिनकी बकाया रकम लघु उद्योग बैंक के विकल्प पर उस अवधि में, जिसके भीतर वह उधार, अग्रिम या डिबेंचर प्रतिसंदेय हैं, उस समुत्थान के स्टाकों या शेयरों में संप्रवर्तनीय है ।

स्पष्टीकरण-इस खंड में, किसी उधार या अग्रिम के संबंध में प्रयुक्त जिनकी बकाया रकम" पद से अभिप्रेत होगा, मूलधन, ऐसे उधार या अग्रिम पर संदेय ब्याज और अन्य प्रभार जो उस समय हो जब उन रकमों को स्टाकों या शेयरों में संप्रवर्तित करना ईप्सित है;  

(vi) निम्नलिखित को उधार और अग्रिम अनुदत्त करना-  

(क) निर्यात करने वाला कोई व्यक्ति; या 

(ख) निर्यात के संबंध में भारत के बाहर कोई व्यक्ति, या 

(ग) लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान द्वारा भारत के बाहर टर्न-की परियोजनाओं के निष्पादन   के लिए; 

(vii) किसी अनुसूचित बैंक या किसी अन्य बैंक या 1[इस निमित्त बोर्ड द्वारा अनुमोदित ऐसी अन्य वित्तीय संस्थाओं को] निर्यात के प्रयोजनों के लिए उनके द्वारा अनुदत्त उधार और अग्रिम की पुनर्वित्तपूर्ति के रूप में उधार और अग्रिम अनुदत्त करना;

(viii) निर्यात या आयात से संबंधित संव्यवहारों से उद्भूत विनिमयपत्रों या वचनपत्रों को भारत में या उसके बाहर प्रतिगृहीत करना, संगृहीत करना, मित्तिकाटे पर उनका भुगतान या पुनः भुगतान करना, क्रय करना, विक्रय करना या परक्रामण करना और ऐसे विनिमयपत्रों या वचनपत्रों पर भारत में या उसके बाहर उधार तथा अग्रिम अनुदत्त करना;

(ix) प्रत्यय-पत्रों को अनुदत्त करना, खोलना, निर्गमित करना, पुष्ट करना या पृष्ठांकित करना और उनके अधीन लिखे गए विनिमयपत्रों या अन्य दस्तावेजों का परक्रामण या संग्रहण करना;

(x) किसी विदेशी राज्य की सरकार या भारत के बारह किसी वित्तीय संस्था या किसी व्यक्ति को निर्यात या आयात के प्रयोजन के लिए बद्ध-प्रत्यय अनुदत्त करना;

(xi) लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान द्वारा या उसके लिए मशीनरी, उपस्कर या अन्य आस्तियों का, जिनके अन्तर्गत यान, पोत और वायुयान भी हैं, पट्टे, उपपट्टे या भाड़ाक्रय के आधार पर भारत से निर्यात या भारत में आयात का वित्तपोषण करना;

(xii)  विदेशी मुद्रा का क्रय या विक्रय करना या उसमें ऐसे अन्य व्यौहार करना जो लघु उद्योग बैंक के कृत्यों का निवर्हन करने के लिए आवश्यक हों;

(xiii) भारत में या उसके बाहर किसी बैंक में कोई खाता खोलना या भारत में या उसके बाहर किसी बैंक या अन्य संस्था के साथ कोई अभिकरण ठहराव करना या उसके अभिकर्ता या संपर्की के रूप में कार्य करना;

(xiv) उसके द्वारा अनुदत्त उधार और अग्रिम से संबंधित किसी लिखत को लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान को सप्रतिफल अंतरित करना; 

(xv) किसी व्यक्ति को, लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान में विनिधान के प्रयोजनों के लिए उधार और अग्रिम अनुदत्त करना;

(xvi) लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान द्वारा केंद्रीय सरकार के अनुमोदन से भारत के बाहर किसी देश में किसी बैंक, वित्तीय संस्था या अन्य उधारदाता अभिकरण से लिए गए उधारों की या उसके साथ हुए प्रत्यय ठहरावों की विदेशी मुद्रा में प्रत्याभूति देना; 

(xvii) लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान द्वारा देय आस्थगित संदायों की प्रत्याभूति देना;

(xviii) निम्नलिखित की प्रत्याभूति देना-

(क) लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थानों द्वारा लिए गए उधार जो लोक बाजार से लिए गए हैं, या 

(ख) लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान द्वारा किसी अनुसूचित बैंक या राज्य सहकारी बैंक या राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक निगम या [इस निमित्त बोर्ड द्वारा अनुमोदित ऐसी अन्य वित्तीय संस्थाओं से,] लिए गए उधार;

(xix) किसी अनुसूचित बैंक या राज्य सहकारी बैंक या राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक विकास निगम या राज्य लघु उद्योग निगम या 1[इस निमित्त बोर्ड द्वारा अनुमोदित ऐसी अन्य वित्तीय संस्थाओं को,] ऐसी बाध्यताओं की प्रत्याभूति देना जो लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान के स्टाकों, शेयरों, बंधपत्रों या डिबेंचरों के पुरोधरण की हामीदारी से या उसके संबंध में उद्भूत हुई हैं;

(xx) लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान को फैक्टर सेवाएं प्रदान करना;

(xxi) तकनीकी और वित्तीय परामर्श, वाणिज्य बैंककारी और विस्तारी सेवाएं प्रदान करना;

(xxii) लघु सेक्टर के उद्योग के संप्रवर्तन के लिए क्रियाकलाप करना, जिसके अंतर्गत उद्यमकर्ता संबंधी विकास कार्यक्रम, कच्ची सामग्री का क्रय, ऐसे क्रियाकलापों में लगे अभिकरणों का विपणन-समर्थन और संप्रवर्तन या उनको वित्तीय समर्थन करना भी है;

(xxiii) 1[केंद्रीय सरकार] के अनुमोदन से उपक्रमों का अर्जन करना, जिसके अन्तर्गत ऐसे किसी संस्था का, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में लघु सेक्टर के उद्योग का संप्रवर्तन या विकास करना है, कारबार, आस्तियां और दायित्व भी हैं, या ऐसे संप्रवर्तन या विकास के लिए वित्तीय सहायता अनुदत्त करना;

(xxiv) लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान को किन्हीं जंगम या स्थावर आस्तियों को पट्टे, उपपट्टे पर देना या भाड़े या भाड़ाक्रय पर देना;

(xxv) लघु सेक्टर के उद्योग के विकास के संबंध में विपणन या विनिधान का मूल्यांकन करने या उनमें व्यवहार करने के लिए अनुसंधान और सर्वेक्षण तथा तकनीकी-आर्थिक अध्ययन करना और चलाना;

(xxvi) लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान के संप्रवर्तन, प्रबंध या विस्तारण के लिए लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान या किसी व्यक्ति को तकनीकी, विधिक, विपणन और प्रशासनिक सहायता प्रदान करना;

(xxvii) लघु सेक्टर के उद्योगों की योजना बनाना, उनका संप्रवर्तन और विकास करना;

(xxviii) कंपनियों, समनुषंगियों, सोसाइटियों, न्यासों या ऐसे अन्य व्यक्तियों के संगम का, जो वह ठीक समझे, संप्रवर्तन, निर्माण या संचालन करना या संप्रवर्तन, निर्माण या संचालन करने में सहायता करना;

(xxix) निम्नलिखित के अभिकर्ता के रूप में कार्य करना-

(क) केंद्रीय सरकार या रिजर्व बैंक या विकास बैंक; या 

(ख) ऐसी अन्य सरकार या व्यक्ति जिसे 1[बोर्ड] प्राधिकृत करे; 

(xxx)  अन्य प्रकार का कोई ऐसा कारबार करना जो केद्रीय सरकार, 1[बोर्ड] की सिफारिश पर, प्राधिकृत करे; 

(xxxi) साधारणतया ऐसे अन्य कार्य और बातें करना जो इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उसकी शक्तियों के प्रयोग या कर्तव्यों के निर्वहन के, जिसके अंतर्गत उसकी किन्हीं आस्तियों का विक्रय या अंतरण भी है, आनुषंगिक या पारिणामिक हों ।

(2) लघु उद्योग बैंक, उपधारा (1) में उल्लिखित किसी सेवा के प्रतिफलस्वरूप ऐसा कमीशन, दलाली, ब्याज, पारिश्रमिक या फीस प्राप्त कर सकेगा जो करार पाई जाए । 

(3) लघु उद्योग बैंक, स्वयं अपने बंधपत्रों या डिबेंचरों की प्रतिभूति पर, कोई उधार या अग्रिम या अन्य वित्तीय सौकर्य अनुदत्त नहीं करेगा ।

14. केंद्रीय सरकार द्वारा उधार दिया जाना-केंद्रीय सरकार, इस निमित्त संसद् की विधि द्वारा विनियोग के पश्चात् लघु उद्योग बैंक को- 

(क) ऐसी रकम का, और ऐसी किस्तों में तथा ऐसी अन्य रीति से प्रतिसंदेय, जो केंद्रीय सरकार द्वारा अवधारित की जाए, ब्याज रहित ऋण दे सकेगी; और 

(ख) ऋण के रूप में ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जैसी करार पाई जाएं, अतिरिक्त धनराशि दे सकेगी:

                परंतु केंद्रीय सरकार, लघु उद्योग बैंक द्वारा उससे अनुरोध किए जाने पर, किस्तों की संख्या बढ़ा सकेगी या किसी किस्त की रकम में परिवर्तन कर सकेगी या उस तारीख में फेरफार कर सकेगी जिसको कोई किस्त खंड (क) के अधीन संदेय है । 

15. लघु उद्योग बैंक द्वारा उधार लिया जाना और निक्षेपों का प्रतिग्रहण-(1) लघु उद्योग बैंक, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निष्पादन करने के प्रयोजन के लिए, -

(क) केंद्रीय सरकार की प्रत्याभूति सहित या उसके बिना बंधपत्र और डिबेंचर पुरोधृत कर सकेगा और उनका विक्रय कर सकेगा;

(ख) रिजर्व बैंक से-

(i) ऐसे स्टाकों, निधियों और प्रतिभूतियों की (जो स्थावर संपत्ति से भिन्न है) प्रतिभूति पर, जिनमें न्यास धन विनिहित करने के लिए कोई न्यासी भारत में तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा प्राधिकृत है, धन उधार ले सकेगा जो मांगे जाने पर, या इस प्रकार धन उधार लिए जाने की तारीख से नब्बे दिन से अनधिक की नियत अवधि के अवसान पर, प्रतिसंदेय होगा; 

(ii) ऐसे विनिमयपत्रों या वचनपत्रों पर धन उधार ले सकेगा जो सदभावी वाणिज्यिक या व्यापारिक संव्यवहारों में लिखे जाएं, जिन पर दो या अधिक मान्य हस्ताक्षर हों और जो उधार लिए जाने की तारीख से पांच वर्ष के भीतर परिपक्व होते हों;  

(iii) भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 46ग के अधीन स्थापित राष्ट्रीय औद्योगिक प्रत्यय (दीर्घकालिक प्रवर्तन) निधि में से, उस धारा में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों में से किसी के लिए धन उधार ले सकेगा; 

(ग) विकास बैंक या ऐसे अन्य प्राधिकरण, संगठन या संस्था से धन उधार ले सकेगा जो [बोर्ड] द्वारा साधारणतया विशेषतया अनुमोदित की जाए; 

(घ) ऐसी अवधि की समाप्ति के पश्चात् प्रतिसंदेय निक्षेपों का, ऐसे निबंधनों पर प्रतिग्रहण कर सकेगा जो 1[बोर्ड] द्वारा साधारणतया या विशेषतया अनुमोदित किए जाएं । 

(2) केंद्रीय सरकार, लघु उद्योग बैंक द्वारा उससे अनुरोध किए जाने पर, मूलधन के प्रतिसदाय और ऐसी दर से, जो वह सरकार नियत करे, ब्याज के संदाय के बारे में उस बैंक द्वारा पुरोधृत बंधपत्रों और डिबेंचरों की प्रत्याभूति दे सकेगी । 

 [16. विनिधान-लघु उद्योग बैंक, लघु उद्योग विकास सहायता निधि या लघु उद्योग साधारण निधि या किसी अन्य निधि या खाते में उपलब्ध ऐसी रकमों का, जो तत्समय कारबार के संव्यवहार के लिए अपेक्षित नहीं हैं, ऐसी रीति से, जो बोर्ड द्वारा अनुमोदित की जाए, विनिधान (चाहे बैंक निक्षेपों के रूप में या अन्यथा) कर सकेगा ।]

17. अधिकार अंतरित करने की शक्ति-लघु उद्योग बैंक द्वारा अनुदत्त किसी उधार अग्रिम अथवा वसूल की जा सकने वाली किसी रकम के सबंध में उसके अधिकार और हित (जिसके अंतर्गत उनके आनुषंगिक अन्य अधिकार भी हैं) किसी लिखत को निष्पादित या जारी करके या पृष्ठाकंन द्वारा किसी लिखत का अंतरण करके या ऐसी किसी अन्य रीति से, लघु उद्योग बैंक द्वारा पूर्णतः या भागतः अंतरित किए जा सकेंगे जिससे ऐसे उपधार या अग्रिम से संबंधित अधिकार या हित विधिपूर्वक अंतरित किए जा सकेंगे और लघु उद्योग बैंक, ऐसे अंतरण के होते हुए  भी, अंतरिती के लिए न्यासी के रूप में कार्य कर सकेगा । 

18. अधिकार अर्जित करने की शक्ति-लघु उद्योग बैंक को कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4क में यथापरिभाषित किसी लोक वित्तीय संस्था द्वारा अनुदत्त किसी उधार या अग्रिम वसूल की जा सकने वाली किसी रकम के संबंध में उसके अधिकार और हित (जिनके अंतर्गत उनके आनुषंगिक अन्य अधिकार भी हैं) किसी लिखत को निष्पादित या जारी करके या किसी लिखत का अंतरण करके या किसी अन्य रीति से, पूर्णतः या भागतः अंतरण या समनुदेशन द्वारा अर्जित करने का अधिकार होगा । 

19. विदेशी करेंसी में उधार-(1) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) में या विदेशी मुद्रा से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति में किसी बात के होते हुए भी, लघु उद्योग बैंक इस अधिनियम के अधीन उधार और अग्रिम अनुदत्त करने के प्रयोजन के लिए किसी विदेश में किसी बैंक या वित्तीय संस्था से या अन्यथा केंद्रीय सरकार की ॥। पूर्व सम्मति से विदेशी करेंसी उधार ले सकेगा ।

(2) केंद्रीय सरकार, जहां आवश्यक हो, लघु उद्योग बैंक द्वारा उपधारा (1) के अधीन लिए गए किसी उधार को या उसके किसी भाग को मूलधन के प्रतिसंदाय के लिए और ब्याज तथा अन्य आनुषंगिक प्रभारों के संदाय के बारे में प्रत्याभूत कर सकेगी । 

(3) उपधारा (1) के अधीन उधार ली गई विदेशी करेंसी में से लघु उद्योग बैंक द्वारा अनुदत्त सभी उधार और अग्रिम उनके अनुदान के समय विद्यमान विनिमय दर के अनुसार संगणित भारतीय करेंसी के समतुल्य विदेशी करेंसी में अभिव्यक्त किए जाएंगे और उनके अधीन शोध्य रकम, ऐसे उधार या अग्रिम के प्रतिसंदाय के समय विद्यमान विनिमय दर के अनुसार संगणित समतुल्य भारतीय करेंसी में प्रतिसंदेय होगी ।

(4) जब तक कि केंद्रीय सरकार द्वारा अन्यथा उपबंधित न किया जाए, इस अधिनियम के अधीन उधार और अग्रिम अनुदत्त करने के प्रयोजन के लिए उपधारा (1) के अधीन विदेशी करेंसी के उधार लेने के संबंध में या उधार देने वाले संबंधित विदेशी अभिकरण को उसके प्रतिसंदाय के संबंध में विनिमय दर में किसी उतार-चढा़व के कारण- 

(क) उस अवधि के, जिसके भीतर वह उधार या अग्रिम लघु उद्योग सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान द्वारा प्रतिसंदेय है अथवा उस समुत्थान द्वारा उसके वास्तविक प्रतिसंदाय की अवधि के, इनमें से जो भी अधिक हो, दौरान प्रोद्भूत होने वाली किसी हानि या लाभ की प्रतिपूर्ति या संदाय, यथास्थिति, ऐसे उधार और अग्रिम के प्राप्तिकर्ताओं द्वारा या उनको किया जाएगा; 

(ख) खंड (क) में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् प्रोद्भूत होने वाली-

(i) कोई हानि या लाभ विदेशी विनिमय की दर से बाजार के सामान्य उतार-चढा़व के बारे में लघु उद्योग बैंक द्वारा वहन किया जाएगा; 

(ii) किसी हानि या लाभ की प्रतिपूर्ति या संदाय, विदेशी विनिमय में बाजार के सामान्य उतार-चढ़ाव से भिन्न उतार-चढ़ाव के बारे में, यथास्थिति, केंद्रीय सरकार द्वारा या उसको किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-यदि इस बारे में कोई प्रश्न उठता है कि यथापूर्वोक्त कोई उतार-चढ़ाव सामान्य बाजार उतार-चढ़ाव है या नहीं तो उसका विनिश्चय केंद्रीय सरकार करेगी और उस पर उसका विनिश्चय अंतिम होगा ।

20. लघु उद्योग बैंक को अनुदान, संदान आदि-लघु उद्योग बैंक, सरकार या किसी अन्य स्रोत से दान, अनुदान, संदान, उपकृति या अन्य धन प्राप्त कर सकेगा ।  

[अध्याय 4

शेयर

20क. शेयरों की निर्बाध अंतरणीयता-(1) उपधारा (2) में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, लघु उद्योग बैंक के साधारण शेयर निर्बाध रूप से अंतरणीय होंगे ।

(2) उपधारा (1) की कोई बात, विकास बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंकों, साधारण बीमा निगम, जीवन बीमा निगम और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अन्य संस्थाओं को लघु उद्योग बैंक में, उनके द्वारा धारित किन्हीं शेयरों का अंतरण करने का तब हकदार नहीं बनाएगी, यदि ऐसे अंतरण का परिणाम यह होता हो कि उनके द्वारा धारित साधारण शेयर लघु उद्योग बैंक की निर्गमित साधारण शेयर पूंजी के इक्यावन प्रतिशत से कम रह जाए । 

20ख. शेयरधारकों का रजिस्टर-(1) लघु उद्योग बैंक, अपने प्रधान कार्यालय में एक या अधिक बहियों में, एक रजिस्टर रखेगा और जहां तक उपलब्ध हो उसमें निम्नलिखित विशिष्टियां प्रविष्ट करेगा, अर्थात्: -

(i) शेयरधारकों के नाम, पते और व्यवसाय, यदि कोई हों, और प्रत्येक शेयर जिसमें प्रत्येक शेयर को उसकी द्योतक संख्या देकर अलग-अलग दिखाया गया हो, धारक द्वारा धारित शेयरों का ब्यौरा;

(ii) वह तारीख, जिसको प्रत्येक व्यक्ति को शेयरधारक के रूप में दर्ज किया गया है;

(iii) वह तारीख, जिसको कोई व्यक्ति शेयरधारक नहीं रह जाता है;

(iv) ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो विहित की जाएं:

                परंतु इस उपधारा की कोई बात निक्षेपागार अधिनियम, 1996 (1996 का 22) के अधीन किसी निक्षेपागार में धारित शेयरों को लागू नहीं होगी । 

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, लघु उद्योग बैंक ऐसे रक्षेपायों के अधीन रहते हुए जो विहित किए जाएं, कम्प्यूटर फ्लापियों, डिस्केटों, कम्पैक्ट डिस्क या किसी अन्य इलेक्ट्रानिक प्ररूप में शेयरधारकों का रजिस्टर रखता है तो यही विधिपूर्ण होगा । 

(3) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) में किसी बात के होते हुए भी, शेयरधारकों के रजिस्टर की कोई प्रति या उससे उद्धरण, जिसे लघु उद्योग बैंक को इस निमित्त प्राधिकृत किया गया हो कोई वास्तविक प्रमाणित प्रति होगी किसी अधिकारी के हस्ताक्षर द्वारा सही प्रति के रूप में प्रमाणित किया गया है, सभी विधिक कार्यवाहियों में, साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होगी ।

(4) निक्षेपागार अधिनियम, 1996 (1996 का 22) की धारा 11 के अधीन किसी निक्षेपागार द्वारा रखा गया फायदग्राही स्वामियों का रजिस्टर, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए शेयरधारकों का रजिस्टर समझा जाएगा ।

20ग. शेयरधारकों के रजिस्टर में न्यास का प्रविष्ट किया जाना-धारा 20ख में किसी बात के होते हुए भी, किसी न्यास की कोई सूचना, चाहे वह अभिव्यक्त हो या विवक्षित या आन्वयिक, शेयरधारकों के रजिस्टर में प्रविष्ट नहीं की जाएगी या न ही लघु उद्योग बैंक द्वारा प्राप्त किए जाने योग्य होगी:

परंतु इस धारा की कोई बात, किसी फायदाग्राही स्वामी के निमित्त किसी रजिस्ट्रीकृत स्वामी के रूप में उसके द्वारा धारित शेयरों की बाबत किसी निक्षेपक को लागू नहीं होगी ।  

स्पष्टीकरण-धारा 20ख और इस धारा के प्रयोजनों के लिए, फायदाग्राही स्वामी", निपेक्षागार" और =रजिस्ट्रीकृत स्वामी" पदों के क्रमशः वही अर्थ होंगे जो उनके लिए निक्षेपागार अधिनियम, 1996 (1996 का 22) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (क), (ङ) और (ञ) में हैं ।

20घ. बोर्ड का शेयरों के अंतरण का रजिस्ट्रीकरण करने से इंकार करने का अधिकार-(1) बोर्ड, अन्तरिती के नाम में किन्हीं शेयरों के अन्तरण को रजिस्टर करने से निम्नलिखित आधारों में से किसी एक या अधिक आधारों में से किसी एक या अधिक आधार पर ही इन्कार कर सकेगा, और किसी अन्य आधार पर नहीं, अर्थात्: -

(क) शेयरों का अंतरण इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए विनियमों या किसी अन्य विधि के उपबंधों के उल्लंघन में हैं; 

(ख) शेयरों का अंतरण, बोर्ड की राय में, लघु उद्योग बैंक के हितों पर या लोकहित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है; 

(ग) शेयरों का अंतरण, किसी न्यायालय, अधिकरण या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी अन्य प्राधिकारी आदेश द्वारा प्रतिषिद्ध है । 

(2) बोर्ड, उस तारीख से दो मास के अवसान के पूर्व जिसको लघु उद्योग बैंक के शेयरों के अंतरण की लिखत ऐसे अंतरण के रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजन के लिए उसके पास, प्रस्तुत की जाती है, इस बारे में न केवल सद्भाविक रूप से अपनी राय कायम करेगा कि ऐसे रजिस्ट्रीकरण करने से इंकार उपधारा (1) में निर्दिष्ट आधारों में से किसी आधार पर नहीं किया जाना चाहिए या करने से इंकार कर दिया जाना चाहिए, अपितु- 

(क) यदि उसने यह राय कायम कर ली है कि ऐसे रजिस्ट्रीकरण से इस प्रकार इन्कार नहीं किया जाना चाहिए, तो वह ऐसा रजिस्ट्रीकरण करेगा; और

(ख) यदि उसने यह राय कायम कर ली है कि ऐसे रजिस्ट्रीकरण से उपधारा (1) में उल्लिखित आधारों में से किसी आधार पर इन्कार कर दिया जाना चाहिए तथा, अंतरक और अंतरिती को उसको लिखित में सूचना देगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन बोर्ड के इन्कार आदेश के विरुद्ध कोई अपील केन्द्रीय सरकार की होगी और ऐसी अपील फाइल करने और उसकी सुनवाई की प्रक्रिया, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार होगी । 

20ङ. शेयरों का भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के अधीन प्रतिभूति होना-भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, लघु उद्योग बैंक के शेयर उक्त अधिनियम की धारा 20 में प्रगणित प्रतिभूतियों में सम्मिलित किया गया समझा जाएगा । 

अध्याय 4

अधिवेशन और कार्यवाहियां

20वार्षिक साधारण अधिवेशन-(1) लघु उद्योग बैंक प्रत्येक वर्ष, किन्हीं अन्य अधिवेशनों के अतिरिक्त, अपने वार्षिक साधारण अधिवेशन के रूप में एक साधारण अधिवेशन आयोजित करेगा और उसके बुलाए जाने की सूचनाओं में उस अधिवेशन को उस रूप में विनिर्दिष्ट करेगा और एक वार्षिक साधारण अधिवेशन और आगामी अधिवेशन की तारीख के बीच, पंद्रह मास से अधिक की अवधि का नहीं होगा:

परंतु लघु उद्योग बैंक उस तारीख से, जिसको वह प्रतिश्रुति के लिए पहली बार शेयर आबंटित करता है, छह मास की अवधि के भीतर पहला वार्षिक साधारण अधिवेशन आयोजित कर सकेगा:

परंतु यह और कि केन्द्रीय सरकार, ऐसी अवधि को, जिसके भीतर, कोई वार्षिक साधारण अधिवेशन आयोजित किया जाएगा, तीन मास से अनधिक के लिए बढ़ा सकेगी ।

(2) प्रत्येक वार्षिक साधारण अधिवेशन कामकाज के समय के भीतर ऐसे दिन बुलाया जाएगा, जिस दिन, लोक अवकाश दिन न हो और उसे या तो प्रधान कार्यालय में या उस नगर या शहर के भीतर किसी अन्य स्थान पर जिसमें प्रधान कार्यालय स्थित है आयोजित किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए लोक अवकाश दिन" से परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का 26) के अर्थान्तर्गत कोई लोक अवकाश दिन अभिप्रेत है:

परंतु किसी अधिवेशन के सम्बन्ध में रविवार को ऐसा अवकाश दिन नहीं समझा जाएगा:

परंतु यह और कि केन्द्रीय सरकार द्वारा लोक अवकाश दिन के रूप में घोषित किसी अधिवेशन के सम्बन्ध में अवकाश दिन नहीं समझा जाएगा जब तक कि उस घोषणा को ऐसे अधिवेशन बुलाने की सूचना के जारी होने से पूर्व अधिसूचित न कर दिया गया हो । 

20छ. वार्षिक साधारण अधिवेशन में चर्चा किए जाने के लिए विषय और प्रक्रिया-(1) वार्षिक साधारण अधिवेशन में उपस्थित शेयरधारक, निम्नलिखित के बारे में चर्चा करने और उन्हें अंगीकार करने के हकदार होंगे, -

(क) उस तारीख तक जिसको लघु उद्योग बैंक के लेखे बंद और संतुलित किए जाते हैं, बनाया गया उसका तुलन-पत्र और लाभ और हानि लेखा; 

(ख) लेखाओं के अन्तर्गत आने वाली अवधि के लिए लघु उद्योग बैंक के कार्यकरण की रिपोर्ट; 

(ग) तुलन-पत्र और लेखाओं के संबंध में संपरीक्षक की रिपोर्ट;

(घ) लाभांश की घोषणा और आरक्षितियों के पूंजीकरण के लिए प्रस्ताव;  

(ङ) धारा 30 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट संपरीक्षकों की नियुक्ति ।

(2) किसी वार्षिक साधारण अधिवेशन में उपस्थित शेयरधारक ऐसे अधिवेशनों में लाए जाने वाले किसी अन्य विषय की बाबत भी इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार चर्चा कर सकेंगे ।

(3) निम्नलिखित से संबंधित विषय वे होंगे जो विहित किए जाएं, अर्थात्: -

(क) वह रीति जिसमें वार्षिक साधारण अधिवेशन या अन्य अधिवेशन इस अधिनियम के अधीन आयोजित किए जाते हैं और वह प्रक्रिया जिसका उनमें अनुसरण किया जाएगा; 

(ख) वह रीति जिससे मताधिकार का प्रयोग किया जा सकेगा और संकल्प पारित किए जा सकेंगे; और 

(ग) ऐसे अधिवेशनों में कारबार के संचालन की प्रक्रिया और संबंधित विषय ।]

अध्याय 5

लघु उद्योग विकास सहायता निधि

21. लघु उद्योग विकास सहायता निधि-(1) लघु उद्योग बैंक, ऐसी तारीख से, जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे, एक विशेष निधि स्थापित करेगा और बनाए रखेगा, जिसका नाम लघु उद्योग विकास सहायता निधि होगा ।

(2) लघु उद्योग बैंक, किसी भी समय लघु उद्योग विकास सहायता निधि के भागस्वरूप, ऐसे प्रयोजन या प्रयोजनों के लिए, जो केंद्रीय सरकार द्वारा, [बोर्ड] की सिफारिशों पर, अनुमोदित किए जाएं, कोई निधि स्थापित कर सकेगा या कोई ऐसी अन्य निधि स्थापित कर सकेगा जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन अपेक्षित हो । 

22. लघु उद्योग विकास सहायता निधि में जमा किया जाना-लघु उद्योग विकास सहायता निधि में निम्नलिखित जमा किए जाएंगे-

(क) उस निधि के प्रयोजन के लिए सरकार से या किसी अन्य स्रोत से उधार, दान, अनुदान, संदान, उपकृति के रूप में या अन्यथा प्राप्त की गई सभी रकमें;

(ख) उस निधि से अनुदत्त उधार, अग्रिम या अन्य सुविधाओं की बाबत प्रतिसंदाय या वसूली; 

(ग) उस निधि में से किए गए विनिधानों से आय या लाभ; और 

(घ) धारा 23 के उपबंधों के अनुसार उस निधि के उपयोजन के कारण ब्याज के रूप में या अन्यथा उस निधि को प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली आय । 

23. लघु उद्योग विकास सहायता निधि का उपयोग-लघु उद्योग बैंक, लघु उद्योग विकास सहायता निधि में से कोई रकम ऐसे प्रयोजनों के लिए जो केंद्रीय सरकार [बोर्ड] की सिफारिश पर, विनिर्दिष्ट करे, संवितरित या व्यय कर सकेगा । 

24. लघु उद्योग विकास सहायता निधि में से विकलन-(1) लघु उद्योग विकास सहायता निधि में से निम्नलिखित को विकलित किया जाएगा, अर्थात्: -

(क) ऐसी रकमें, जो धारा 23 के अधीन समय-समय पर संवितरित या व्यय की जाएं;

(ख) ऐसी रकमें, जो उस निधि के प्रयोजन के लिए प्राप्त उधारों की बाबत दायित्वों के निर्वहन के लिए अपेक्षित हों; 

(ग) उस निधि में से किए गए विनिधान के कारण उद्भूत होने वाली कोई हानि; और

(घ) उस निधि के प्रशासन और उपयोजन से या उनके संबंध में उद्भूत होने वाला ऐसा व्यय, जो बोर्ड द्वारा अवधारित किया जाए ।  

(2) उपधारा (1) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई रकम लघु उद्योग विकास सहायता निधि में से विकलित नहीं की जाएगी । 

25. लघु उद्योग विकास सहायता निधि के लेखे और संपरीक्षा-(1) लघु उद्योग विकास सहायता निधि का तुलनपत्र और लेखा ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से तैयार किए जाएंगे जो विहित की जाएं । 

(2) बोर्ड, लघु उद्योग विकास सहायता निधि की बहियों और लेखाओं को प्रत्येक वर्ष 31 मार्च या ऐसी अन्य तारीख को, जो [बोर्ड] विनिर्दिष्ट करे, बंद और संतुलित कराएगा । 

1[(3) लघु उद्योग विकास सहायता निधि की संपरीक्षा धारा 30 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त संपरीक्षकों द्वारा की जाएगी, जो उस पर पृथक् रिपोर्ट देंगे ।] 

(4) धारा 30 की उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4) के उपबंध, लघु उद्योग विकास सहायता निधि की संपरीक्षा के सबंधं में, जहां तक हो सके, लागू होंगे । 

(5) लघु उद्योग बैंक, केंद्रीय सरकार । । । को तुलनपत्र और लेखाओं की प्रति, और साथ ही संपरीक्षकों की रिपोर्ट की प्रति तथा सुसंगत वर्ष के दौरान उस निधि की संक्रिया की रिपोर्ट की प्रति, लघु उद्योग विकास सहायता निधि के लेखाओं के बंद और संतुलित किए जाने की तारीख से चार मास के भीतर देगा और केंद्रीय सरकार, अपने द्वारा उनके प्राप्त किए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

26. लघु उद्योग विकास सहायता निधि का समापन-लघु उद्योग विकास सहायता निधि, केंद्रीय सरकार के आदेश से और ऐसी रीति से ही, जो वह सरकार । । । निर्दिष्ट करे, बंद या परिसमापित की जाएगी ।

अध्याय 6

लघु उद्योग साधारण निधि, लेखे और संपरीक्षा

27. लघु उद्योग साधारण निधि-लघु उद्योग बैंक की वे सब प्राप्तियां जो उनसे भिन्न हों जिन्हें इस अधिनियम के अधीन लघु उद्योग विकास सहायता निधि में जमा किया जाना है, एक निधि में जमा की जाएंगी जिसका नाम लघु उद्योग साधारण निधि होगा और लघु उद्योग बैंक द्वारा किए गए ऐसे सभी संदाय, जो उनसे भिन्न हैं जिन्हें लघु उद्योग विकास सहायता निधि में विकलित किया जाना है, लघु उद्योग साधारण निधि में से किए जाएंगे ।

28. लेखाओं और तुलनपत्र का तैयार किया जाना-(1) लघु उद्योग बैंक का तुलनपत्र और लेखा ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी रीति से तैयार किए जाएंगे जो विहित की जाएं ।

(2) बोर्ड, लघु उद्योग बैंक की बहियों और लेखाओं को प्रत्येक वर्ष 31 मार्च या ऐसी अन्य तारीख को, जो [बोर्ड] विनिर्दिष्ट करे, बंद और संतुलित कराएगा ।

29. लघु उद्योग साधारण निधि को प्रोद्भूत होने वाले लाभों का व्ययन-(1) लघु उद्योग बैंक एक आरक्षित निधि की स्थापना कर सकेगा जिसमें लघु उद्योग साधारण निधि को प्रोद्भूत होने वाले वार्षिक लाभों में से ऐसी राशियां, जो वह बैंक ठीक समझे, अंतरित की जा सकेंगी ।

 [(2) डूबंत और शंकास्पद ऋणों, आस्तियों के अवक्षयण और उन सब बातों के लिए, जिनके लिए उपबंध आवश्यक या समीचीन हो या जिनके लिए उपबंध बैंककारों द्वारा प्रायः किए जाते हैं और उपधारा (1) में निर्दिष्ट आरक्षित निधि के लिए उपबंध करने के पश्चात् तथा लाभों में से एक भाग को ऐसी अन्य आरक्षितियों या निधियों में अंतरित करने के पश्चात् जो समुचित समझा जाए, बोर्ड अपने शुद्ध लाभों में से लाभांश घोषित कर सकेगा ।] 

30. संपरीक्षा- [(1) लघु उद्योग बैंक के लेखाओं की संपरीक्षा कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) धारा 226 की उपधारा (1) के अधीन संपरीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए सम्यक् रूप से अर्हित संपरीक्षकों द्वारा की जाएगी जो शेयरधारकों के साधारण अधिवेशन में लघु उद्योग बैंक रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित संपरीक्षकों के पैनल में से ऐसी अवधि के लिए और ऐसे पारिश्रमिक पर नियुक्त किए जाएंगे जो रिजर्व बैंक नियत करे ।]

(2) संपरीक्षकों को लघु उद्योग बैंक के वार्षिक तुलनपत्र की एक प्रति दी जाएगी और उनका यह कर्तव्य होगा कि वे उसकी और साथ ही उससे संबंधित लेखाओं तथा वाउचरों की परीक्षा करें और उन्हें लघु उद्योग बैंक द्वारा रखी गई सभी बहियों की सूची परिदत्त की जाएगी और सभी उचित समयों पर लघु उद्योग बैंक की बहियों, लेखाओं, वाउचरों और अन्य दस्तावेजों तक उनकी पहुंच होगी ।

(3) संपरीक्षक, ऐसे लेखाओं के संबंध में लघु उद्योग बैंक के किसी निदेशक या अधिकारी या अन्य कर्मचारी की परीक्षा कर सकेंगे और वे इस बात के हकदार होंगे कि वे बोर्ड से या लघु उद्योग बैंक के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों से ऐसी जानकारी और स्पष्टीकरण की अपेक्षा करें, जो वे अपने कर्तव्यों के पालन के लिए आवश्यक समझें । 

(4) संपरीक्षक, अपने द्वारा परीक्षित वार्षिक तुलनपत्र और लेखाओं पर रिपोर्ट लघु उद्योग बैंक को देंगे और ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट में वे यह कथन करेंगे कि क्या उनकी राय में तुलनपत्र पूर्ण और सही तुलनपत्र है जिसमें सभी आवश्यक विशिष्टियां हैं और वह ऐसे उचित रूप से लिखा गया है जिसमें लघु उद्योग बैंक के कार्यकलापों की स्थिति का सच्चा और सही रूप प्रदर्शित होता है और यदि उन्होंने बोर्ड से या लघु उद्योग बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी से कोई स्पष्टीकरण या जानकारी मांगी थी तो क्या वह दी गई है और क्या वह समाधानप्रद है ।

(5) लघु उद्योग बैंक, केंद्रीय सरकार । । । को अपने तुलनपत्र और लेखाओं की प्रति, और साथ ही संपरीक्षकों की रिपोर्ट की एक प्रति और सुसंगत वर्ष के दौरान लघु उद्योग बैंक के कार्यकरण की रिपोर्ट, वार्षिक लेखाओं के बंद और संतुलित किए जाने की तारीख से चार मास के भीतर देगा तथा केंद्रीय सरकार, उन्हें प्राप्त किए जाने के पश्चात्, यथा शीघ्र, उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।  

31. व्यावृत्ति-धारा 25 की उपधारा (4) में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, इस अध्याय की कोई बात लघु उद्योग विकास सहायता निधि को लागू नहीं होगी ।

अध्याय 7

विकास बैंक के कारबार के भाग का अंतरण

32. विकास बैंक के कारबार के भाग का अंतरण-(1) ऐसी तारीख को, जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे, लघु उद्योग विकास बैंक, निधि और राष्ट्रीय साधारण शेयर निधि (जिसे इसमें इसके पश्चात् इस धारा में निधि" कहा गया है) से संबंधित विकास बैंक के कारबार, आस्तियां और दायित्व, अधिकार, हित, विशेषाधिकार और बाध्यताएं लघु उद्योग निधि को अंतरित और उसमें निहित हो जाएंगी । 

स्पष्टीकरण-लघु उद्योग विकास निधि" और राष्ट्रीय साधारण निधि" से इस उपधारा में नियत तारीख के ठीक पूर्व दिन को विकास बैंक की बहियों और लेखाओं में यथा निर्दिष्ट लघु उद्योग विकास निधि और राष्ट्रीय साधारण शेयर निधि अभिप्रेत है । 

(2) उपधारा (1) के अधीन लघु उद्योग बैंक को निधियों को अंतरित और उसमें निहित किए जाने के लिए वह बैंक विकास बैंक को ऐसी रकम, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो विकास बैंक अवधारित करे, संदत्त करेगा । 

(3) सभी संविदाएं, विलेख, बंधपत्र, करार, मुख्तारनामे, विधिक प्रतिनिधित्व के अनुदान और किसी भी प्रकार की अन्य लिखतें, जिनका संबंध निधियों से है और जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख के ठीक पूर्व विद्यमान या प्रभावशील हैं और जिनमें विकास बैंक एक पक्षकार है या जो विकास बैंक के पक्ष में हैं, - 

(क) यदि वे अनन्य रूप से निधियों से संबंधित हैं, तो लघु उद्योग बैंक के विरुद्ध या उसके पक्ष में पूर्ण प्रवृत्त और प्रभावशील होंगी और उन्हें पूर्णतः और प्रभावी रूप से वैसे ही प्रवर्तित और उनकी बाबत वैसी ही कार्रवाई की जा सकेगी मानो उनमें विकास बैंक की बजाय लघु उद्योग बैंक पक्षकार था या मानो वे लघु उद्योग बैंक के पक्ष में जारी की गई थी; और 

(ख) यदि वे केवल निधियों से ही संबंधित नहीं हैं किंतु विकास बैंक के किन्हीं अन्य कारबार या कृत्य से भी संबंधित हैं, तो विकास बैंक और लघु उद्योग बैंक, दोनों ही के पक्ष में या उनके विरुद्ध पूर्ण प्रवृत्त और प्रभावशील होंगी और उन्हें पूर्णतः और प्रभावशील रूप से वैसे ही प्रवर्तित किया जा सकेगा और उनकी बाबत वैसी ही कार्रवाई की जा सकेगी मानो विकास बैंक के अतिरिक्त लघु उद्योग बैंक भी उनमें एक पक्षकार था या मानो वे विकास बैंक और लघु उद्योग बैंक दोनों के पक्ष में जारी की गई थी । 

(4) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट तारीख को निधियों से संबंधित किसी भी प्रकार का कोई वाद, अपील या अन्य विधिक कार्यवाही लंबित है तो वह विकास बैंक के कारबार का लघु उद्योग बैंक को अंतरित किए जाने या इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के कारण न तो उपशमित, न ही बंद या किसी रूप में प्रतिकूलतः प्रभावित होगी, किंतु वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, - 

(क) जहां वह निधियों से अनन्य रूप से संबंधित है, वहां लघु उद्योग बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकेगी, अभियोजित की जा सकेगी और प्रवर्तित की जा सकेगी; और  

(ख) जहां वह निधियों से ही नहीं किंतु विकास बैंक के किन्हीं अन्य कारबार या कृत्यों से भी संबंधित है, वहां विकास बैंक और लघु उद्योग बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध या, यदि केंद्रीय सरकार, लिखित आदेश द्वारा, ऐसा निदेश करे तो, उनमें से एक के द्वारा या उसके विरुद्ध जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, चालू रखी जा सकेगी, अभियोजित की जा सकेगी या प्रवर्तित की जा सकेगी । 

(5) यदि इस बारे में कोई प्रश्न उठता है कि क्या उपधारा (3) में निर्दिष्ट कोई संविदा, विलेख, बंधपत्र, करार, मुख्तारनामा, विधिक प्रतिनिधित्व के अनुदान या अन्य लिखत या उपधारा (4) में निर्दिष्ट कोई वाद, अपील या अन्य विधिक कार्यवाही निधियों से संबंधित है या अनन्य रूप से संबंधित है तो उसे विनिश्चय के लिए विकास बैंक को निर्दिष्ट किया जाएगा और उस पर विकास बैंक का विनिश्चय अंतिम होगा । 

(6) इस धारा के उपबंध, भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) या किसी अन्य विधि या उक्त अधिनियम या अन्य विधि के आधार पर बल रखने वाली किसी लिखत में किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।  

अध्याय 8

प्रकीर्ण

33. लघु उद्योग बैंक के कर्मचारिवृंद-(1) लघु उद्योग बैंक उतने अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त कर सकेगा जितने वह अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक या वांछनीय समझे और वह उनकी नियुक्ति तथा सेवा के निबंधन और शर्तें अवधारित कर सकेगा ।

(2) विकास बैंक, नियत दिन से छह मास की समाप्ति के पूर्व, किसी भी समय, लोकहित में, अपने कर्मचारिवृंद के ऐसे सदस्यों को लघु उद्योग बैंक को प्रतिनियुक्ति पर अंतरित कर सकेगा जिन्हें विकास बैंक लघु उद्योग बैंक के कृत्यों के लिए सुसंगत या उपयुक्त समझता है, किंतु ऐसे सदस्य उतनी अवधि तक और पारिश्रमिक, छुट्टी, भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति या अन्य सेवांत प्रसुविधाओं को बाबत सेवा के उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर पद धारण करेंगे जिन पर उन्होंने पद धारण किया होता यदि लघु उद्योग बैंक स्थापित न किया गया होता और वे ऐसा तब तक करते रहेंगे जब तक विकास बैंक या तो स्वप्रेरणा से या लघु उद्योग बैंक के अनुरोध पर कर्मचारिवृंद के ऐसे सदस्य को अपनी सेवा में बुला नहीं लेता :

परंतु इस प्रकार अंतरित कर्मचारिवृंद का प्रत्येक सदस्य नियत दिन से नौ मास की अवधि की समाप्ति से पूर्व उस आशय के लिखित विकल्प का प्रयोग करके विकास बैंक में वापस जाने का चयन कर सकेगा और ऐसे विकल्प का प्रयोग किए जाने पर, विकास बैंक, नियत दिन से अठारह मास की अधिक की समाप्ति से पूर्व कर्मचारिवृंद के ऐसे सदस्य को वापस ले लेगा और वह उस अवधि के लिए लघु उद्योग बैंक में प्रतिनियुक्ति पर समझा जाएगा जिस अवधि के दौरान वह लघु उद्योग बैंक के कर्मचारिवृंद का सदस्य रहा था ।

(3) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, लघु उद्योग बैंक द्वारा कर्मचारिवृंद के किसी सदस्य का इस धारा के अधीन अपनी नियमित सेवा में आमेलन ऐसे कर्मचारी को उस अधिनियम या अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर के लिए हकदार नहीं बनाएगा और कोई ऐसा दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, नियत दिन" से धारा 3 के अधीन लघु उद्योग बैंक की स्थापना की तारीख अभिप्रेत है ।  

34. शक्तियों का प्रत्यायोजन-बोर्ड, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, किसी निदेशक को या धारा 12 के अधीन गठित किसी समिति को या लघु उद्योग बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को, ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के, यदि कोई हैं, अधीन रहते हुए, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसे शक्तियां और कर्तव्य, जो वह आवश्यक समझे, प्रत्यायोजित कर सकेगा । 

35. विवरणियां-लद्यु उद्योग बैंक, [केंद्रीय सरकार और रिजर्व बैंक] को, समय-समय पर, ऐसी विवरणियां देगा जिनकी वे अपेक्षा करें । 

36. विश्वसनीयता और गोपनीयता के संबंध में बाध्यताएं-(1) लघु उद्योग बैंक, इस अधिनियम या किसी अन्य विधि द्वारा जैसा अन्यथा अपेक्षित है उसके सिवाय, अपने घटकों या उनके कार्यकलापों से संबंधित कोई जानकारी तभी प्रकट करेगा जब परिस्थितियां ऐसी हों जिनमें विधि या बैंककारों को रूढ़िगत पद्धतियों और प्रथाओं के अनुसार लघु उद्योग बैंक के लिए ऐसी जानकारी प्रकट करना आवश्यक या समुचित हो । 

(2) लघु उद्योग बैंक, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के प्रयोजन के लिए, केंद्रीय सरकार, रिजर्व बैंक, विकास बैंक, राज्य बैंक, किसी अनुषंगी बैंक, राष्ट्रीकृत बैंक या किसी अन्य अनुसूचित बैंक, राज्य सहकारी बैंक, राज्य वित्तीय निगम, राज्य औद्योगिक विकास निगम, राज्य लघु उद्योग निगम या राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम या ऐसी अन्य संस्थाओं से या उनको,  [जिन्हें बोर्ड विनिर्दिष्ट करे,] प्रत्यय विषयक जानकारी या अन्य जानकारी, जो वह उस प्रयोजन के लिए उपयुक्त समझे, ऐसी रीति से और ऐसे समयों पर, जो वह ठीक समझे, संगृहीत कर सकेगा या दे सकेगा । 

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, प्रत्यय विषयक जानकारी" पद का वही अर्थ है जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45क के खंड (ग) में है किन्तु यह इस उपान्तरण के अधीन रहते हुए होगा कि उसमें निर्दिष्ट बैंककारी कंपनी" से इस उपधारा में निर्दिष्ट कोई बैंक, निगम या अन्य संस्था अभिप्रेत होगी । 

(3) लघु उद्योग बैंक । । । का प्रत्येक निदेशक, किसी समिति का प्रत्येक सदस्य, संपरीक्षक, अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जिसकी सेवाओं का उपयोग इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन लघु उद्योग बैंक द्वारा किया जाता है, अपना कार्यभार ग्रहण करने के पूर्व, इस अधिनियम की पहली अनुसूची में दिए गए प्ररूप में विश्वसनीयता और गोपनीयता की घोषणा करेगा । 

37. नियुक्ति में त्रुटियों के कारण कार्य, आदि का अविधिमान्य होना-(1) बोर्ड का या लघु उद्योग बैंक का किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि, यथास्थिति, बोर्ड या समिति में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है ।

(2) निदेशक के रूप मे सद्भावपूर्वक कार्य करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कोई कार्य केवल इस आधार पर अविधिमान्य नहीं समझा जाएगा कि वह निदेशक होने के लिए निरर्हित था या उसकी नियुक्ति में कोई अन्य त्रुटि थी । 

 [37क. विश्वास में धारित रकमें और प्रतिभूतियां-(1) लघु उद्योग बैंक द्वारा पुनर्वित्तपोषित ऋणों और अग्रिमों के पूर्णतः या भागतः प्रतिसंदाय या वसूली में उधार लेने वाली संस्था द्वारा प्राप्त किन्हीं धनराशियों के बारे में, लघु उद्योग बैंक द्वारा अनुदत्त सौकर्य या शेष बकायों की सीमा तक, यह समझा जाएगा कि वह उधार लेने वाली संस्था द्वारा विश्वास में लघु उद्योग बैंक के लिए प्राप्ती की गई है और तद्नुसार ऐसी संस्था द्वारा लघु उद्योग बैंक को लघु उद्योग बैंक द्वारा नियत की गई प्रतिसंदाय अनुसूची के अनुसार संदत्त की जाएगी । 

(2) जहां उधार लेने वाली संस्था को कोई सौकर्य अनुदत्त किया गया है वहां ऐसी उधार लेने वाली संस्था द्वारा ऐसे किसी संव्यवहार के मद्दे जिसकी बाबत लघु उद्योग बैंक द्वारा ऐसा सौकर्य अनुदत्त किया गया है, धारित सभी प्रतिभूतियां या ऐसी सभी प्रतिभूतियां, जो उसके द्वारा धारित की जाएं, ऐसी संस्था द्वारा लघु उद्योग बैंक के लिए विश्वास में धारित की जाएंगी ।]

38. व्यतिक्रम की दशा में लघु उद्योग बैंक के अधिकार-(1) जहां लघु सेक्टर का ऐसा कोई औद्योगिक समुत्थान, जो किसी करार के अधीन लघु उद्योग बैंक के प्रति किसी दायित्व के अधीन है, किसी उधार या अग्रिम या उसकी किसी किस्त के प्रतिसंदाय में या लघु उद्योग बैंक द्वारा दी गई किसी प्रत्याभूति के संबंध में अपनी बाध्यताओं को पूरा करने में कोई व्यतिक्रम करता है या लघु उद्योग बैंक से किए गए अपने करार के निबंधनों का अनुपालन करने में अन्यथा असफल रहता है, वहां लघु उद्योग बैंक को लघु सेक्टर के उस औद्योगिक समुत्थान का प्रबन्ध या कब्जा या दोनों ग्रहण करने का अधिकार होगा और साथ ही उसे यह भी अधिकार होगा कि वह लघु उद्योग बैंक के पास गिरवी, बंधक रखी गई, आड्मान की गई या उसे समनुदेशित की गई संपत्ति का पट्टे या विक्रय के रूप में अंतरण करे । 

(2) लघु उद्योग बैंक द्वारा उपधारा (1) के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए किए गए संपत्ति के किसी अंतरण में, अंतरित संपत्ति में या उसके संबंध में सभी अधिकार अंतरिती में इस प्रकार निहित हो जाएंगे मानो वह अंतरण ऐसी संपत्ति के स्वामी द्वारा किया गया हो । 

(3) लघु उद्योग बैंक को अपने द्वारा धारित प्रतिभूति के भागरूप माल से, पूर्णतः या भागतः विनिर्मित या उत्पादित माल के संबंध में वही अधिकार और शक्तियां होंगी जो उसे मूल माल के संबंध में थी ।

(4) जहां उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई है, वहां सभी खर्चे, प्रभार और व्यय, जो लघु उद्योग बैंक की राय में उसके द्वारा उसके आनुषंगिक रूप में उचित रूप से उपगत किए गए हैं, उस लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान से वसूलीय होंगे और वह धन, जो उसके द्वारा प्राप्त किया जाता है, तत्प्रतिकूल किसी संविदा के अभाव में, उसके द्वारा न्यास के रूप में धारित किया जा सकेगा जो प्रथमतः ऐसे खर्चों, प्रभारों और व्ययों के संदाय में और द्वितीयतः लघु उद्योग बैंक को शोध्य ऋण के उन्मोचन में उपयोजित किया जाएगा और ऐसे प्राप्त धन का अवशिष्ट उसके हकदार व्यक्ति को, उसके अधिकारों और हितों के अनुसार, संदत्त किया जाएगा । 

(5) जहां लघु उद्योग बैंक उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान का प्रबन्ध ग्रहण कर लेता है या कब्जा ले लेता है वहां लघु उद्योग बैंक को, समुत्थान द्वारा या उसके विरुद्ध वादों के प्रयोजनों के लिए, उस समुत्थान का स्वामी समझा जाएगा और वह समुत्थान के नाम से वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।  

39. मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट की सहायता लेने की शक्ति-(1) जहां धारा 38 द्वारा प्रदत्त किसी शक्ति के अनुसरण में किसी संपत्ति, चीजबस्त या अनुयोज्य दावों का विक्रय किया गया है या उन्हें पट्टे पर दिया गया है वहां लघु उद्योग बैंक या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य व्यक्ति, ऐसी किसी संपत्ति, चीजबस्त या अनुजोज्य दावों को अभिरक्षा या नियंत्रण में लेने के प्रयोजन के लिए ऐसे मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट का, जिसकी अधिकारिता के भीतर कोई संपत्ति, चीजबस्त, अनुयोज्य दावे, लेखाबही या उनसे संबंधित अन्य दस्तावेजें स्थित हों या पाए जाएं, उनका कब्जा लेने के लिए लिखित रूप में अनुरोध कर सकेगा और मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट, अपने को ऐसा अनुरोध किए जाने पर,-

(क) ऐसी संपत्ति, चीजबस्त, अनुयोज्य दावों या लेखाबहियों या उनसे संबंधित अन्य दस्तावेजों का कब्जा लेगा; और 

(ख) उन्हें, यथास्थिति, लघु उद्योग बैंक या ऐसे अन्य व्यक्ति को अग्रेषित करेगा । 

(2) मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (1) के उपबन्धों का अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए, ऐसे कदम उठा सकेगा या उठवाएगा और ऐसा बल प्रयोग कर सकेगा या कराएगा जो उसकी राय में आवश्यक है ।

(3) मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा इस धारा के अनुसरण में किया गया कोई कार्य किसी न्यायालय में या किसी प्राधिकारी के समक्ष प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।

40. करार पाई गई अवधि से पूर्व प्रतिसंदाय की मांग करने की शक्ति-किसी करार में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, लघु उद्योग बैंक, लिखित सूचना द्वारा लघु सेक्टर के किसी ऐसे औद्योगिक समुत्थान से, जिसको उसने कोई उधार या अग्रिम अनुदत्त किया है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह लघु उद्योग बैंक के प्रति तत्काल अपने दायित्वों का पूर्णतः निर्वहन करे, -

(क) यदि बोर्ड को यह प्रतीत होता है कि उधार या अग्रिम के लिए आवेदन में किसी तात्त्विक विशिष्ट में मिथ्या या भ्रामक जानकारी दी गई थी; या

(ख) यदि लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान उधार या अग्रिम के विषय में लघु उद्योग बैंक के साथ अपनी संविदा के निबंधनों का अनुपालन करने में असफल हो गया है; या 

(ग) यदि इस बात की युक्तियुक्त आशंका है कि लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान अपने ऋणों का संदाय करने में असमर्थ है या उसके संबंध में समापन के लिए कार्यवाहियां प्रारंभ की जा सकती हैं; या

(घ) यदि उधार या अग्रिम के लिए प्रतिभूति के रूप में लघु उद्योग बैंक को गिरवी, बंधक रखी गई, आड्मान की गई या समनुदेशित की गई सपत्ति का लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान द्वारा लघु उद्योग बैंक के समाधानप्रद रूप में बीमा नहीं कराया गया है और वह बीमाकृत नहीं रखी गई है, या उसके मूल्य का ऐसी सीमा तक अवक्षयण हो जाता है कि बोर्ड की राय में, बोर्ड के समाधानप्रद रूप में और प्रतिभूति दी जाए तथा ऐसी प्रतिभूति नहीं दी गई है; या

(ङ) यदि बोर्ड को अनुज्ञा के बिना किसी मशीनरी, संयंत्र या अन्य उपस्कर को, चाहे वह प्रतिभूति का भाग हो या अन्यथा, लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान के परिसर से प्रतिस्थापित किए बिना हटाया जाता है; या

                                (च) यदि किसी भी कारण से लघु उद्योग बैंक के हितों का संरक्षण करने के लिए आवश्यक है । 

41. लघु उद्योग बैंक द्वारा दावों को प्रवर्तित कराने के लिए विशेष उपबंध-(1) जहां लघु सेक्टर का कोई औद्योगिक समुत्थान, किसी करार के भंग में, किसी उधार या अग्रिम या उसकी किस्त के प्रतिसंदाय में अथवा लघु उद्योग बैंक द्वारा दी गई किसी प्रत्याभूति के संबंध में अपनी बाध्यताओं को पूरा करने में कोई व्यतिक्रम करता है या उस बैंक के साथ अपने करार के निबंधनों का अनुपालन करने में अन्यथा असफल रहता है, या जहां लघु उद्योग बैंक, लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान से धारा 40 के अधीन किसी उधार या अग्रिम का प्रतिसंदाय करने की अपेक्षा करता है और वह औद्योगिक समुत्थान ऐसा प्रतिसंदाय करने में असफल हो जाता है, वहां इस अधिनियम की धारा 38 और संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 (1882 का 4) की धारा 69 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना इस निमित्त उस बैंक द्वारा साधारणतया या विशेष रूप से प्राधिकृत उस बैंक का कोई अधिकारी न्यायालय को निम्नलिखित किसी एक या अधिक अनुतोषों के लिए आवेदन कर सकेगा, अर्थात् :- 

(क) उधार या अग्रिम के लिए प्रतिभूति के रूप में उस बैंक को समनुदेशित की गई, भारित की गई, आड्मान की गई, बंधक या गिरवी रखी गई संपत्ति के विक्रय के आदेश के लिए; या 

(ख) किसी प्रतिभूति के दायित्व को प्रवर्तित करने के लिए; या 

(ग) लघु उद्योग बैंक की अनुज्ञा के बिना ऐसे औद्योगिक समुत्थान के परिसर में से अपनी मशीनरी, संयंत्र या उपस्कर को अंतरित करने या हटाने से, जहां ऐसे अंतरण या हटाए जाने की आशंका है, लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान को अवरुद्ध करने वाले अंतरिम व्यादेश के लिए । 

(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन में, लघु उद्योग बैंक के प्रति लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान के दायित्व की प्रकृति और विस्तार, वह आधार जिस पर किया गया है और ऐसी अन्य विशिष्टियां जो ऐसे अनुतोष को प्राप्त करने के लिए आवश्यक हों, जिसके लिए प्रार्थना की गई है, कथित की जाएंगी । 

(3) जहां आवेदन उपधारा (1) के खंड (क) और खंड (ग) में उल्लिखित अनुतोषों के लिए है, वहां न्यायालय प्रतिभूति को, या लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान की उतनी संपत्ति को, जिसे उसके प्राक्कलन में विक्रय करके, लघु उद्योग बैंक के प्रति ऐसे औद्योगिक समुत्थान के परादेय दायित्व के मूल्य के बराबर रकम और इस धारा  के अधीन उस औद्योगिक समुत्थान को अपनी मशीनरी, संयंत्र या उपस्कर अंतरित करने या हटाने से अवरुद्ध करने वाला अंतरिम व्यादेश सहित या उसके बिना कार्यवाही के खर्चे वसूल किए जाते, कुर्क करने वाला अंतरिम आदेश पारित करेगा । 

(4) जहां आवेदन उपधारा (1) के खंड (ख) में उल्लिखित अनुतोष के लिए है वहां न्यायालय ऐसी सूचना जारी करेगा जिसमें प्रतिभू से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह ऐसी तारीख को जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाएगी; इस बारे में हेतुक दर्शित करे कि दायित्व को क्यों नहीं प्रवर्तित किया जाए । 

(5) यदि न्यायालय उपधारा (3) के अधीन कोई आदेश पारित करने या उपधारा (4) के अधीन सूचना जारी करने के पूर्व ठीक समझे तो वह आवेदन करने वाले अधिकारी की परीक्षा कर सकेगा । 

(6) न्यायालय, उपधारा (3) के अधीन आदेश पारित करने के समय, लघु सेक्टर के औद्योगिक समुत्थान को या कुर्क किए गए प्रतिभूति के स्वामी को आदेश, आवेदन और न्यायालय द्वारा अभिलिखित साक्ष्य, यदि कोई है, की प्रतियों सहित ऐसी सूचना जारी करेगा जिसमें ऐसे औद्योगिक समुत्थान या स्वामी से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह ऐसी तारीख को जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाएगी, इस बारे में हेतुक दर्शित करे कि कुर्की के अंतरिम आदेश को क्यों नहीं आत्यंतिक कर दिया जाए या व्यादेश की क्यों नहीं पुष्टि कर दी जाए ।

(7) यदि उपधारा (4) के अधीन सूचना में निर्दिष्ट तारीख को या उसके पूर्व कोई हेतुक दर्शित नहीं किया जाता है, तो न्यायालय प्रतिभू के दायित्व के प्रवर्तन के लिए तत्काल आदेश करेगा । 

(8) यदि उपधारा (6) के अधीन सूचना में विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पूर्व कोई हेतुक दर्शित नहीं किया जाता है तो न्यायालय अंतरिम आदेश को तत्काल आत्यंतिक करेगा और कुर्क की गई संपत्ति के विक्रय का निदेश देगा या व्यादेश की पुष्टि करेगा । 

(9) यदि हेतुक दर्शित किया जाता है तो न्यायालय, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) में अंतर्विष्ट उपबंधों, जहां तक वे उपबंध उसको लागू हों, के अनुसार लघु उद्योग बैंक के दावे का अन्वेषण करने के लिए अग्रसर होगा । 

(10) उपधारा (9) के अधीन अन्वेषण करने के पश्चात्, न्यायालय, -

(क) कुर्की के आदेश की पुष्टि कर सकेगा और कुर्क की गई संपत्ति के विक्रय का निदेश दे सकेगा; 

(ख) कुर्की के आदेश को परिवर्तित कर सकेगा जिससे कि संपत्ति का कोई भाग कुर्की से निर्मुक्त हो जाए और कुर्क की गई संपत्ति के शेष भाग के विक्रय का निदेश दे सकेगा;

(ग) संपत्ति को कुर्की से निमुक्त कर सकेगा; 

(घ) व्यादेश की पुष्टि कर सकेगा या समाप्त कर सकेगा; या

(ङ) प्रतिभू के दायित्व के प्रवर्तन का निदेश दे सकेगा या इस निमित्त किए गए दावे को नामंजूर कर सकेगा:

परंतु खंड (ग) के अधीन आदेश करते समय या खंड (ङ) के अधीन प्रतिभू का दायित्व प्रवर्तित करने के लिए दावे को नामंजूर करने वाला आदेश करते समय, न्यायालय ऐसे अतिरिक्त आदेश कर सकेगा जो वह लघु उद्योग बैंक के हितों का संरक्षण करने के लिए आवश्यक समझे और कार्यवाहियों के खर्च का प्रभाजन ऐसी रीति से कर सकेगा जो वह ठीक समझे:

परंतु यह और कि जब तक लघु उद्योग बैंक, न्यायालय को यह सूचित नहीं कर देता है कि वह किसी संपत्ति को किसी कुर्की से निर्मुक्त करने वाले या प्रतिभू के दायित्व को प्रवर्तित करने के लिए दावे को नामंजूर करने वाले आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं करेगा, तब तक ऐसे आदेश को उस समय तक प्रभावी नहीं किया जाएगा जब तक उपधारा (12) के अधीन नियत ऐसी अवधि समाप्त नहीं हो जाती है जिसके भीतर अपील की जा सकेगी, या यदि अपील की जाती है तो, जब तक यह न्यायालय, जो उक्त न्यायालय के विनिश्चयों के विरुद्ध अपील की सुनवाई करने के लिए सशक्त है, अन्यथा निदेश नहीं देता है और जब तक अपील का निपटारा नहीं कर दिया जाता है ।

(11) इस धारा के अधीन संपत्ति की कुर्की या उसके विक्रय के आदेश को, किसी डिक्री के निष्पादन में संपत्ति की कुर्की या विक्रय के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) में उपबंधित रीति से, जहां तक साध्य हो, इस प्रकार प्रभावी किया जाएगा मानो लघु उद्योग बैंक डिक्री धारक हो । 

(12) उपधारा (7), उपधारा (8) या उपधारा (10) के अधीन किसी आदेश द्वारा व्यथित कोई पक्षकार, आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर, ऐसे न्यायालय को अपील कर सकेगा जो ऐसे न्यायालय के, जिसने आदेश पारित किया है, विनिश्चयों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करने के लिए सशक्त है, और ऐसी अपील पर न्यायालय पक्षकारों की सुनवाई करने के पश्चात् ऐसे आदेश पारित कर सकेगा जो वह उचित समझे । 

(13) जहां लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान की बाबत समापन के लिए कार्यवाहियां उपधारा (1) के अधीन आवेदन किए जाने के पूर्व आरंभ की गई हैं; वहां इस धारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह लघु उद्योग बैंक को ऐसे औद्योगिक समुत्थान के अन्य लेनदारों की अपेक्षा ऐसा अधिमान देती है जो किसी अन्य विधि द्वारा उसे प्रदत्त नहीं किया गया है । 

(14) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के अधीन अंतरिम व्यादेश अनुदत्त करने के लिए सक्षम किसी न्यायालय को रिसीवर नियुक्त करने और उसकी आनुषंगिक सभी अन्य शक्तियों का प्रयोग करने की शक्ति भी है । 

42. लघु उद्योग बैंक की अभिलेखों तक पहुंच होना-(1) लघु उद्योग बैंक की, ऐसी किसी संस्था के, जो लघु उद्योग बैंक से कोई प्रत्यय सुविधाएं लेना चाहता है, सभी अभिलेखों तक और ऐसे किसी व्यक्ति के, जो ऐसी संस्था से कोई प्रत्यय सुविधाएं लेना चाहता है, ऐसे सभी अभिलेखों तक अबाध पहुंच होगी जिनका परिशीलन लघु उद्योग बैंक को ऐसी संस्था को वित्त या अन्य सहायता का उपबंध करने के संबंध में या उधार देने वाली संस्था द्वारा किसी व्यक्ति को दिए गए किसी उधार या अग्रिम की पुनर्वित्तपूर्ति के संबंध में आवश्यक प्रतीत हो ।

(2) लघु उद्योग बैंक, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी संस्था या व्यक्ति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस उपधारा में निर्दिष्ट किसी अभिलेख की प्रतियां उसे दे और, यथास्थिति, वह संस्था या व्यक्ति ऐसी अपेक्षा का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगा । 

43. उधार या अग्रिम की विधिमान्यता को प्रश्नगत किया जाना-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, लघु उद्योग बैंक द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में दिए गए किसी उधार या अग्रिम की विधिमान्यता केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि पूर्वोक्त ऐसी अन्य विधि की या किसी संकल्प, संविदा, ज्ञापन, संगम अनुच्छेद या अन्य लिखत की अपेक्षाओं का अनुपालन नहीं किया गया है:

परतु इस धारा की कोई बात किसी कंपनी या सहकारी सोसाइटी द्वारा अभिप्राप्त किसी उधार या अग्रिम को वहां विधिमान्य नहीं बनाएगी जहां ऐसी कंपनी या सहकारी सोसाइटी अपने ज्ञापन द्वारा उधार या अग्रिम अभिप्राप्त करने के लिए सशक्त नहीं है ।

44. निदेशकों की क्षतिपूर्ति-(1) लघु उद्योग बैंक, प्रत्येक निदेशक को, ऐसी हानियों और व्ययों के सिवाय जो उसके द्वारा जानबूझकर किए गए कार्य या व्यतिक्रम के कारण हुए हों, ऐसी सभी हानियों और व्ययों के लिए क्षतिपूर्ति करेगा जो उसके द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में या उसके संबंध में उपगत किए जाते हैं ।

(2) कोई निदेशक, लघु उद्योग बैंक के किसी अन्य निदेशक के प्रति अथवा किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के प्रति या लघु उद्योग बैंक की ओर से अर्जित की गई या ली गई किसी संपत्ति या प्रतिभूति के मूल्य या हक की किसी अपर्याप्तता या कमी अथवा किसी ऋणी या लघु उद्योग बैंक के प्रति बाध्यता के अधीन किसी व्यक्ति के दिवालियापन या सदोष कार्य अथवा अपने पद के कर्तव्यों के निष्पादन में या उसके संबंध में सद्भावपूर्वक की गई किसी बात के परिणामस्वरूप लघु उद्योग बैंक को होने वाली किसी हानि या व्यय के लिए उत्तरदायी नहीं होगा ।

45. इस अधिनियम के अधीन गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के या किसी अन्य विधि के या विधि का बल रखने वाले किसी उपबंध के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुई या हो सकने वाली किसी हानि या नुकसान के लिए कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही लघु उद्योग बैंक, उस बैंक के  [अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, पूर्णकालिक निदेशक] या किसी निदेशक या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी अथवा इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कृत्यों के निर्वहन के लिए उस बैंक द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी । 

46. जमाकर्ताओं या बंधपत्रों या अन्य प्रतिभूतियों के धारकों द्वारा नामनिर्देशन-(1) किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, जहां लघु उद्योग बैंक के पास रखी गई किन्हीं जमाराशियों, निर्गमित किए गए बंधपत्रों या अन्य प्रतिभूतियों की बाबत कोई नामनिर्देशन विहित रीति से किया जाता है, वहां ऐसी जमाराशियों, बंधपत्रों या अन्य प्रतिभूतियों पर देय रकम, जमाकर्ता, या उसके धारक की मृत्यु पर, ऐसी जमाराशियों, बंधपत्रों या अन्य प्रतिभूतियों के संबंध में किसी अन्य व्यक्ति के किसी अधिकार, हक, हित या दावे के अधीन रहते हुए नामनिर्देशिती में  निहित होगी या उसको संदेय होगी । 

(2) लघु उद्योग बैंक द्वारा उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार कोई संदाय, ऐसी जमाराशियों, बंधपत्रों या प्रतिभूतियों की बाबत उसके दायित्वों का समस्त उन्मोचत होगा ।   

47. निदेशकों की नियुक्ति के विषय में लघु उद्योग बैंक के साथ ठहराव का अभिभावी होना-(1) जहां लघु उद्योग बैंक द्वारा लघु सेक्टर के किसी औद्योगिक समुत्थान के साथ किए गए किसी ठहराव में ऐसे औद्योगिक समुत्थान के एक या अधिक निदेशकों की लघु उद्योग बैंक द्वारा नियुक्ति के लिए उपबंध किया गया है, वहां ऐसा उपबंध और उसके अनुसरण में की गई निदेशकों की नियुक्ति कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या उस औद्योगिक समुत्थान से संबंधित ज्ञापन, संगम-अनुच्छेद या किसी अन्य लिखत में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी विधिमान्य और प्रभावशील होगी और शेयर अर्हता, आयु-सीमा, निदेशकों के पदों को संख्या, पद से निदेशकों के हटाए जाने से संबंधित कोई उपबंध और पूर्वोक्त ऐसी किसी विधि या लिखत में अंतर्विष्ट ऐसी ही अन्य शर्तें यथापूर्वोक्त ठहराव के अनुसरण में लघु उद्योग बैंक द्वारा नियुक्त किसी निदेशक को लागू नहीं होंगी ।     

(2) यथापूर्वोक्त नियुक्त कोई निदेशक-

(क) लघु उद्योग बैंक के प्रसादपर्यन्त पदधारण करेगा और लघु उद्योग बैंक के लिखित रूप में आदेश द्वारा हटाया जा सकेगा या उसके स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति रखा जा सकेगा;

(ख) निदेशक होने के कारण ही या निदेशक के रूप में अपने कर्तव्यों के निर्वहन में सद्भावपूर्वक किए गए किसी कार्य या लोप या उससे संबंधित किसी बात के लिए कोई बाध्यता या दायित्व उपगत नहीं करेगा;

(ग) चक्रानुक्रम से सेवानिवृत्त होने के दायित्व के अधीन नहीं होगा और ऐसे सेवानिवृत्त होने के दायित्वाधीन निदेशकों की संख्या की संगणना करने में उसकी गिनती नहीं की जाएगी । 

48. 1891 के अधिनियम संख्यांक 18 का लघु उद्योग बैंक के संबंध में लागू होना-बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891, लघु उद्योग बैंक के संबंध में इस प्रकार लागू होगा मानो वह उस अधिनियम की धारा 2 में यथापरिभाषित बैंक हो ।

49. 1949 के अधिनियम संख्यांक 10 का लघु उद्योग बैंक को लागू होना-बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 34क और धारा 36कघ को छोड़कर उसकी कोई बात लघु उद्योग बैंक को लागू नहीं होगी । 

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

51. लघु उद्योग बैंक का समापन-कंपनियों या निगमों के परिसमापन से संबंधित विधि का कोई उपबंध लघु उद्योग बैंक को लागू नहीं होगा और उस बैंक का समापन, केंद्रीय सरकार के आदेश से ही और ऐसी रीति से, जो वह निर्दिष्ट करे, किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

 [51क. केन्द्रीय सरकार द्वारा नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी । 

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -

(i) धारा 20घ की उपधारा (3) के अधीन बोर्ड द्वारा शेयरों के अंतरण को रजिस्टर करने से इंकार करने के विरुद्ध अपील फाइल करने और उसकी सुनवाई किए जाने के लिए प्रक्रिया; और 

(ii) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित किया जाना है या विहित किया जा सकेगा ।]

52. विनियम बनाने की शक्ति-बोर्ड, । । । ऐसे सभी विषयों के लिए, जिनके लिए इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए, उपबंध करना आवश्यक या समीचीन है, उपबंध करने के लिए ऐसे विनियम, अधिनियम द्वारा, बना सकेगा जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों । 

 (2) विशिष्टता और पूर्वगामी शक्ति की व्याकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्: -

 [(क) धारा 6 की उपधारा (8) के अधीन निदेशक को हटाना; 

(क) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के अधिवेशन के स्थान और ऐसे अधिवेशन में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया जिसके अंतर्गत कारबार के संव्यवहार के लिए आवश्यक गणपूर्ति और धारा 6 के अधीन संकल्प अंगीकार करने की रीति भी है; 

(कख) धारा 12 की उपधारा (2) के अधीन कार्यकारी समिति द्वारा निर्वहन किए जाने वाले कृत्य; 

(कग) कार्यकारी समिति के अधिवेशन के स्थान और धारा 12 की उपधारा (4) के अधीन ऐसे अधिवेशनों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया; 

(कघ) जो धारा 12क के अधीन कार्यकारी समिति के निदेशकों और सदस्यों को संदत्त किए जा सकने वाली ऐसी फीस और भत्ते;

(कङ) धारा 20ख की उपधारा (1) के खंड (iv) के अधीन शेयरधारकों के रजिस्टर में विहित की जाने वाली प्रविष्टियां; 

(कच) धारा 20ख की उपधारा (2) के अधीन शेयरधारकों के रजिस्टर को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाने के संबंध     में प्रक्रिया; 

(कछ) धारा 20छ की उपधारा (3) के अधीन वार्षिक साधारण अधिवेशन से संबंधित विषय; 

(ख) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे धारा 25 की उपधारा (1) के अधीन लघु उद्योग विकास सहायता निधि और धारा 28 की उपधारा (1) के अधीन लघु उद्योग बैंक के तलुन पत्र तथा लेखे तैयार किए जाएंगे;

(ग) वह रीति जिससे धारा 46 की उपधारा (1) के निबंधनों के अनुसार नामनिर्देशन किए जा सकेंगे; 

(घ) साधारणतया लघु उद्योग बैंक के कार्यकलापों का दक्षतापूर्ण सचालन; 

(ङ) कोई अन्य विषय जिसे विहित किया जाना है या किया जाए । 

 [(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, और बोर्ड द्वारा बनाया गया प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभावी हो जाएगा किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभावी होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]  

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

54. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केद्रीय सरकार, विकास बैंक के परामर्श से, उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए, आदेश द्वारा, ऐसी कोई बात कर सकेगी जो ऐसे उपबंधों से अंसगत न हो:

परंतु ऐसा कोई आदेश उस तारीख से जिसको इस अधिनियम को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, तीन वर्ष के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

2।                            ।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

पहली अनुसूची

[धारा 36(3) देखिए]

विश्वसनीयता और गोपनीयता की घोषणा

मैं, ............................................ घोषणा करता हूं कि मैं ऐसे कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक, सच्चाई से तथा अपने सर्वोत्तम कौशल और योग्यता से निष्पादन और पालन करूंगा जिसका मुझसे भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के (यथास्थिति) निदेशक, ................................... समिति के सदस्य, संपरीक्षक, अधिकारी, अन्य कर्मचारी के रूप में किया जाना अपेक्षित है और जो उक्त बैंक में या उसके संबंध में मेरे द्वारा धारित पद या ओहदे से उचित रूप से संबंधित है ।

मैं यह भी घोषणा करता हूं कि मैं भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के कार्यकलापों से या उक्त बैंक के साथ व्यवहार करने वाले किसी व्यक्ति के कार्यकलापों से संबंधित कोई जानकारी ऐसे किसी व्यक्ति को, जो उसका विधिक रूप से हकदार नहीं है, संसूचित नहीं करूंगा और संसूचित नहीं होने दूंगा तथा ऐसे व्यक्ति को उक्त बैंक की या उसके कब्जे में की तथा उक्त बैंक के कारबार से या उक्त बैंक के साथ व्यवहार करने वाले व्यक्ति के कारबार से संबंधित किन्हीं बहियों या दस्तावेजों का निरीक्षण नहीं करने दूंगा और उसकी उन तक पहुंच नहीं होने दूंगा ।

(हस्ताक्षर)

                मेरे समक्ष हस्ताक्षरित ।

                 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

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