गोवा, दमण और दीव (प्रशासन) अधिनियम, 1962
(1962 का अधिनियम संख्यांक 1)
[27 मार्च, 1962]
गोवा, दमण और दीव संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासन
और उससे संबद्ध विषयों का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के तेरहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम गोवा, दमण और दीव (प्रशासन) अधिनियम, 1962 है ।
(2) यह 1962 के मार्च के पांचवें दिन को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “प्रशासक" से संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त गोवा, दमण और दीव का प्रशासक अभिप्रेत है;
(ख) “नियत दिन" से 1961 के दिसम्बर का बीसवां दिन अभिप्रेत है;
(ग) “गोवा, दमण और दीव" से गोवा, दमण और दीव संघ राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है ।
3. लोक सभा में प्रतिनिधित्व-(1) लोक सभा में गोवा, दमण और दीव संघ राज्यक्षेत्र को 2 स्थान आबंटित किए जाएंगे ।
(2) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में,-
(क) धारा 4 में, उपधारा (1) में दादरा और नागर हवेली को" शब्दों के पश्चात् गोवा, दमण और दीव को" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे;
(ख) प्रथम अनुसूची में,-
(i) प्रविष्टि 22 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
23 गोवा, दमण और दीव ............................ 2";
(ii) प्रविष्टि 23 और 24 को क्रमशः प्रविष्टि 24 और 25 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा ।
(3) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) में, धारा 4 में, दादरा और नागर हवेली को" शब्दों के पश्चात् गोवा, दमण और दीव को" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।
4. गोवा, दमण और दीव के संबंध में अधिकारी और कृत्यकारी-समय-समय पर ऐसे अधिकारियों और प्राधिकारियों को नियुक्त करने की केन्द्रीय सरकार की शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो गोवा, दमण और दीव के प्रशासन के लिए आवश्यक हों, ऐसे सभी न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट और अन्य अधिकारी और प्राधिकारी, जो इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व, गोवा, दमण और दीव या उसके किसी भाग के प्रशासन से संबद्ध विधिपूर्ण कृत्यों का प्रयोग करते थे, तब तक ऐसे प्रशासन के संबंध में अपने-अपने कृत्यों का ऐसे प्रारंभ के यथापूर्व रीति में और विस्तार तक, ऐसे परिवर्तित पदनाम से, यदि कोई हो, जैसा सरकार अवधारित करे, प्रयोग करना चालू रखेंगे जब तक ऐसे न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट या अन्य अधिकारी या प्राधिकारी के संबंध में केन्द्रीय सरकार द्वारा, किसी समय, अन्यथा निदेश न दिया गया हो, या जब तक विधि द्वारा अन्य उपबंध न किया गया हो ।
5. विद्यमान विधियों और उनके अनुकूलन का चालू रहना-(1) गोवा, दमण और दीव या उसके किसी भाग में नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त सभी विधियों का उसमें प्रवृत्त रहना तब तक चालू रहेगा जब तक किसी सक्षम विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा वे संशोधित या निरसित न की गई हों ।
(2) किसी संघ राज्यक्षेत्र के रूप में गोवा, दमण और दीव के प्रशासन से संबंधित किसी ऐसी विधि का लागू होना सुकर बनाने के प्रयोजन के लिए और किसी ऐसी विधि के उपबधों को संविधान के उपबन्धों के अनुसार बनाने के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार, नियत दिन से दो वर्ष के भीतर, आदेश द्वारा ऐसे अनुकूलन और उपांतरण कर सकेगी, चाहे वे निरसन या संशोधन के रूप में हों, जैसा कि आवश्यक या समीचीन हो और तदुपरि प्रत्येक ऐसी विधि, इस प्रकार किए गए अनुकूलनों और उपांतरणों के अधीन रहते हुए, प्रभावी होगी ।
6. अधिनियमितियों को गोवा, दमण और दीव को विस्तारित करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे निर्बन्धनों या उपांतरणों के साथ, जैसा वह ठीक समझे, गोवा, दमण और दीव को कोई ऐसी अधिनियमिति विस्तारित कर सकेगी जो ऐसी अधिसूचना की तारीख को किसी राज्य में प्रवृत्त है ।
7. मुम्बई उच्च न्यायालय का गोवा, दमण और दीव पर अधिकारिता का विस्तारण-गोवा, दमण और दीव न्यायिक आयुक्त न्यायालय (उच्च न्यायालय के रूप में घोषणा) अधिनियम, 1964 (1964 का 16) की धारा 8 द्वारा (16-12-1963 से) निरसित ।
8. विधियों के अर्थान्वयन की शक्ति-गोवा, दमण और दीव के सम्बन्ध में किसी विधि का लागू होना सुकर बनाने के प्रयोजन के लिए, कोई भी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी, किसी ऐसी विधि का सार पर प्रभाव डाले बिना ऐसी रीति में अर्थान्वयन कर सकेगा, जैसा न्यायालय या अन्य प्राधिकारी के समक्ष के विषय के उसे अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक या उचित हो ।
9. कतिपय कार्रवाई का विधिमान्यकरण और कतिपय कार्यों के लिए अधिकारियों का परित्राण-(1) नियत दिन को या तत्पश्चात् और इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व गोवा, दमण और दीव में या उसके बारे में प्रशासक या किसी ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा, चाहे वह सिविल का हो या सेना में का हो, या प्रशासक या ऐसे किसी अधिकारी के आदेशों के अधीन कार्य करने वाले किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की गई सभी बातें और की गई सभी कार्रवाइयां (जिनमें कार्यपालक प्राधिकारी के किन्हीं कार्य, कार्यवाहियां, डिक्रियां और दण्डादेश भी हैं), जो सद्भावपूर्वक और इस युक्तियुक्त विश्वास में की गई हैं कि वे गोवा, दमण और दीव की शांति और सुशासन के लिए आवश्यक थीं वैसी ही विधिमान्य और प्रवृत्त होंगी मानो वे विधि के अनुसार की गई थीं ।
(2) प्रशासक या सरकार के किसी अन्य अधिकारी के विरुद्ध, चाहे वह सिविल का हो या सेना में का हो, या प्रशासक के आदेशों के अधीन कार्य करने वाले किसी अन्य व्यक्ति या किसी अन्य अधिकारी के विरुद्ध गोवा, दमण और दीव या उसके किसी भाग में, नियत दिन को या उसके पश्चात् और इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व की गई किसी ऐसी बात या की गई कार्रवाई के लिए या उसके मद्धे या उसके बारे में कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही, चाहे वह सिविल या दाण्डिक हो, जो सद्भावपूर्वक और इस युक्तियुक्त विश्वास में की गई है कि वह गोवा, दमण और दीव की शांति और सुशासन के लिए आवश्यक थी, किसी भी न्यायालय में नहीं लाया जाएगा या नहीं लाई जाएगी :
परन्तु यदि कोई ऐसा वाद या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम के पूर्व संस्थित की गई है, तो ऐसे प्रारम्भ पर उसका उपशमन हो जाएगा ।
10. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में या गोवा, दमण और दीव के प्रशासन के सम्बन्ध में कोई कठिनाई उत्पन्न हो तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा ऐसा कोई अतिरिक्त उपबन्ध कर सकेगी जो इस कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन हो ।
(2) उपधारा (1) के अधीन ऐसा कोई आदेश इस प्रकार बनाया जा सकेगा कि वह नियत दिन से पूर्वतर किसी तारीख से भूतलक्षी न हो ।
11. निरसन और व्यावृत्ति-(1) गोवा, दमण और दीव (प्रशासन) अध्यादेश, 1962 (1962 का 2) एतद्द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होने पर भी, उक्त अध्यादेश द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्तियों में से किसी का प्रयोग करते हुए की गई किसी भी बात या की गई किसी भी कार्रवाई के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में की गई है ।
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