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पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 ( Petroleum Act, 1934 )


 

पेट्रोलियम अधिनियम, 1934

(1934 का अधिनियम संख्यांक 30)

[6 सितम्बर, 1934]

पेट्रोलियम  *** के आयात, परिवहन, भण्डारकरण, उत्पादन, परिष्करण

तथा सम्मिश्रण से संबंधित विधि का समेकन और

संशोधन करने के लिए

अधिनियम

यह समीचीन है कि पेट्रोलियम 2*** के आयात, परिवहन, भण्डारकरण, उत्पादन, परिष्करण तथा सम्मिश्रण से संबंधित विधि का समेकन और संशोधन किया जाए,

अतः इसके द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है :

प्रारम्भिक

                1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 है ।

                 [(2) इसका विस्तार  *** सम्पूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख  को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं­-इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ में विरुद्ध न हो,

(क) “पेट्रोलियम" से कोई द्रव हाइड्रोकार्बन या हाइड्रोकार्बन का मिश्रण और कोई ज्वलनशील मिश्रण (द्रव, विस्कासी या ठोस), जिसमें कोई द्रव हाइड्रोकार्बन हो, अभिप्रेत है ;

 [(ख) “पेट्रोलियम वर्ग क" से ऐसा पेट्रोलियम अभिप्रेत है जिसका प्रज्वलन ताप तेईस डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे है ;

(खख) “पेट्रोलियम वर्ग ख" से ऐसा पेट्रोलियम अभिप्रेत है जिसका प्रज्वलन ताप तेईस डिग्री सेंटीग्रेड और उससे ऊपर किन्तु पैंसठ डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे है ;

(खखख) “पेट्रोलियम वर्ग ग" से ऐसा पेट्रोलियम अभिप्रेत है जिसका प्रज्वलन ताप पैंसठ डिग्री सेंटीग्रेड और उससे ऊपर किन्तु तिरानवे डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे है ; ]

(ग) किसी पेट्रोलियम के  [“प्रज्वलन ताप"] से अध्याय 2 के और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अनुसार अवधारित किया गया ऐसा निम्नतम तापमान अभिप्रेत है जिस पर वह ऐसी वाष्प पैदा करता है जिसे यदि ज्वलित किया जाए तो क्षणिक प्रज्वलन पैदा होगा ;

 [(घ) “पेट्रोलियम का परिवहन करना" से भारत में एक स्थान से दूसरे स्थान को पेट्रोलियम का ले जाना अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत भारत में एक स्थान से दूसरे स्थान को, उस राज्यक्षेत्र के आर-पार जो भारत का भाग नहीं है ; ले जाना भी है ; ]

(ङ) पेट्रोलियम का “आयत करना" से उसे परिवहन के अनुक्रम से भिन्न भूमि, समुद्र या वायु मार्ग द्वारा  [भारत] में लाना अभिप्रेत है ;

(च) “पेट्रोलियम का भण्डारकरण" से उसे किसी एक स्थान पर रखना अभिप्रेत है, किन्तु इसके अन्तर्गत परिवहन के मामूली अनुक्रम में होने वाला निरोध नहीं है ;

(छ) “मोटर प्रवहण" से भूमि, जल या वायु मार्ग द्वारा मनुष्यों, पशुओं या वस्तुओं के प्रवहण के लिए कोई ऐसा        यान, जलयान या वायुयान अभिप्रेत है जिसमें गतिदायी शक्ति के उत्पादन के लिए पेट्रोलियम का प्रयोग किया जाता है ;

(ज) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ।

 ।                                   ।                                               ।                                         ।                                        ।

अध्याय 1

पेट्रोलियम पर नियंत्रण

                3. पेट्रोलियम का आयात, परिवहन और भण्डारकरण-(1) कोई भी किसी पेट्रोलियम का आयात, परिवहन या भण्डारकरण धारा 4 के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार ही करेगा, अन्यथा नहीं ।

                (2) कोई भी  [पेट्रोलियम वर्ग क] का आयात और कोई भी किसी पेट्रोलियम का परिवहन या भंडारकरण इस प्रयोजनार्थ किसी ऐसी अनुज्ञप्ति की, जिसे धारा 4 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा अभिप्राप्त करने की उससे अपेक्षा की जाए, शर्तों के अनुसार ही करेगा, अन्यथा नहीं करेगा ।

                4. पेट्रोलियम के आयात, परिवहन और भण्डारकरण के लिए नियम-केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित के लिए नियम बना सकेगी

(क) ऐसे स्थान विहित करना जहां पेट्रोलियम का आयात किया जा सकेगा और अन्यत्र इसका आयात प्रतिषिद्ध करना ;

                                (ख) पेट्रोलियम का आयात विनियमित करना ;

                (ग) वह अवधि विहित करना जिसके भीतर  [पेट्रोलियम वर्ग क] के आयात हेतु अनुज्ञप्तियों के लिए आवेदन किया जाएगा और ऐसे 3[पेट्रोलियम वर्ग क] का, जिसकी अनुज्ञप्ति की बाबत विहित अवधि के भीतर आवेदन नहीं किया गया था जिसे इंकार कर दिया गया है और जिसका निर्यात नहीं किया गया है, समपहरण द्वारा या अन्यथा व्ययन का उपबंध करना ;

                                (घ) पेट्रोलियम का परिवहन विनियमित करना ;

                (ङ) ऐसे सभी पात्रों और पाइप लाइनों की प्रकृति और दशा का विनिर्देश करना जिसमें पेट्रोलियम का परिवहन किया जा सकेगा ;

(च) वे स्थान विनियमित करना जिन पर और वे शर्तें विहित करना जिनके अधीन पेट्रोलियम का भण्डारकरण किया जा सकेगा ;

(छ) ऐसे सभी पात्रों की प्रकृति, स्थिति और दशा का विनिर्देश करना जिसमें पेट्रोलियम का भण्डारकरण किया जा सकेगा,

(ज) [पेट्रोलियम वर्ग क] के आयात के लिए और किसी पेट्रोलियम के परिवहन या भण्डारकरण के लिए अनुज्ञप्तियों का प्ररूप और शर्तें, वह रीति जिसमें ऐसी अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन किए जाएंगे, वे प्राधिकारी जो ऐसी अनुज्ञप्तियां दे सकेंगे और वह फीस जो ऐसी अनुज्ञप्तियों के लिए प्रभारित की जा सकेगी, विहित करना ; 

(झ) किसी वर्ग के मामलों में यह अवधारित करना कि क्या पेट्रोलियम के परिवहन के लिए अनुज्ञप्ति परेषक, परेषिती या वाहक द्वारा अभिप्राप्त की जाएगी ;

(ञ) पेट्रोलियम के आयात, परिवहन और भण्डारकरण के लिए या ऐसे प्रयोजनों में से किसी दो के लिए संयुक्त अनुज्ञप्तियां दिए जाने का उपबंध करना ;

(ट) वह अनुपात विहित करना जिसमें कोई विनिर्दिष्ट विषैला पदार्थ पेट्रोलियम में मिलाया जा सकेगा और ऐसे पेट्रोलियम के आयात, परिवहन या भंडारकरण को प्रतिषिद्ध करना जिसमें किसी विनिर्दिष्ट विषैले पदार्थ का अनुपात                       अधिक हो ; और

(ठ) साधारणतः किसी ऐसे विषय के बारे में उपबंध करना जो उसकी राय में पेट्रोलियम के आयात, परिवहन और भंडारकरण पर समुचित नियंत्रण के लिए समीचीन है  [जिसके अन्तर्गत पेट्रोलियम के आयात, परिवहन और भण्डारकरण के संबंध में की गई किसी सेवा के लिए फीस प्रभारित करना भी है ।]

5. पेट्रोलियम का उत्पादन, परिष्करण और सम्मिश्रण-(1) कोई भी व्यक्ति पेट्रोलियम का उत्पादन, परिष्करण या सम्मिश्रण उपधारा (2) के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार ही करेगा, अन्यथा नहीं ।

(2) केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित के लिए नियम बना सकेगी-

(क) वे शर्तें विहित करना जिनके अधीन पेट्रोलियम उत्पादित, परिष्कृत या सम्मिश्रित किया जा सकेगा ; और

(ख) पेट्रोलियम का ऐसे स्थानों में जहां उसका उत्पादन, परिष्करण का सम्मिश्रण किया जाता है, हटाया जाना विनियमित करना और  [पेट्रोलियम वर्ग क] को छोड़कर किसी भी पेट्रोलियम के, जो विहित परख को पूरा नहीं करता है, उसमें भण्डारकरण को और उससे हटाए जाने को निवारित करना ।

                 ।                                             ।                                              ।                                              ।                                            ।              6. पेट्रोलियम वर्ग के पात्र पर चेतावनी दर्शित किया जाना-ऐसे सभी पात्र पर जिसमें  [पेट्रोलियम वर्ग क] हो एक स्टाम्पित, समुद्भृत, पेंट की हुई या मुद्रित चेतावनी या तो स्वयं पात्र पर होगी या जहां वह अव्यवहारिक है वहां उससे निकट संप्रदर्शित होगी जिसमे “पेट्रोल" या “मोटर स्प्रिट" शब्द या पेट्रोलियम की खतरनाक प्रकृति की समतुल्य चेतावनी सहजदृश्य लिपि में प्रदर्शित की            जाएगी :

                परन्तु यह धारा निम्नलिखित को लागू नहीं होगी :-

(क) अच्छी तरह से डाट लगा हुआ  [10 लीटर] क्षमता से कम का ऐसा कांच, पत्थर या धातु का पात्र                          जिसमें 4[पेट्रोलियम वर्ग क] है और जो विक्रय के लिए नहीं है ; या

(ख) ऐसा टैंक जो मोटर वाहन में समादिष्ट या अन्तर दहज इंजन से संलग्न है और जिसमें मोटर वाहन या इंजन के लिए गतिदायी शक्ति पैदा करने के लिए प्रयोग किए जाने के लिए आशयित पेट्रोलियम है ; या

(ग) पेट्रोलियम के परिवहन के लिए पाइप लाइन ; या

(घ) कोई टैंक जो पूर्णतया भूमिगत है ; या

(ङ) ऐसे वर्ग के पात्र जिनको केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस धारा के प्रवर्तन से छूट दे ।

                 [7. पेट्रोलियम वर्ग ख या पेट्रोलियम वर्ग ग का सीमित मात्रा में परिवहन या भंडारकरण करने के लिए किसी अनुज्ञप्ति का आवश्यक न होना-इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, किसी व्यक्ति को निम्नलिखित के परिवहन या भंडारकरण के लिए कोई अनुज्ञप्ति प्राप्त करना आवश्यक नहीं है

(i) पेट्रोलियम वर्ग ख, यदि किसी एक स्थान पर उसके कब्जे में की कुल मात्रा दो हजार पांच सौ लीटर से अधिक नहीं है और उसमें से कोई भी एक हजार लीटर क्षमता से अधिक के पात्र नहीं हैं ; या

(ii) पेट्रोलियम वर्ग ग, यदि किसी एक स्थान पर उसके कब्जे में की कुल मात्रा पैंतालीस हजार लीटर से अधिक नहीं है और ऐसे पेट्रोलियम का परिवहन या भंडारकरण धारा 4 के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार किया जाता है ।

8. पेट्रोलियम वर्ग का अल्प मात्रा में आयात, परिवहन या भंडारकरण करने के लिए किसी भी अनुज्ञप्ति का आवश्यक होना-(1) इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, किसी व्यक्ति को पेट्रोलियम वर्ग क के, जो विक्रय के लिए आशयित नहीं                     है, आयात, परिवहन या भण्डारकरण करने के लिए कोई अनुज्ञप्ति अधिग्रहण करना आवश्यक नहीं है यदि उसके कब्जे में की कुल मात्रा तीस लीटर से अधिक नहीं है ।

(2) इस धारा के अधीन अनुज्ञप्ति के बिना कब्जे में रखा गया पेट्रोलियम वर्ग क कांच, पत्थर या धातु के अच्छी तरह डाट लगे हुए ऐसे पात्रों में रखा जाएगा जिसकी क्षमता कांच या पत्थर के पात्रों की दशा में एक लीटर से अधिक या धातु के पात्रों की दशा में बीस लीटर से अधिक नहीं होगी ।]

9. मोटर वाहनों और स्थायी इंजनों के लिए छूट-(1) किसी मोटर वाहन के स्वामी से, जो ऐसे वाहन के रजिस्ट्रीकरण और अनुज्ञापन से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी विधि की अपेक्षाओं का पालन करता है, और उसके चालक या पायलट से और किसी स्थायी अन्तर दहन इंजन के स्वामी से -

(क) वाहन में समाविष्ट या अन्तर दहन इंजन से संलगन किसी ईंधन टैंक में रखे किसी पेट्रोलियम के                       आयात, परिवहन या भंडारकरण के लिए; या

(ख) खण्ड (क) के अधीन कब्जे में रखी गई किसी मात्रा के अतिरिक्त  [एक सौ लीटरट से अनधिक मात्रा                       में  [पेट्रोलियम वर्ग क] के परिवहन या भंडारकरण के लिए,

अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी :

परन्तु यह तब जब कि पेट्रोलियम मोटर वाहन या इंजन के लिए गतिदायी शक्ति पैदा करने के लिए आशयित है :

                 [परन्तु यह और कि 2[पेट्रोलियम वर्ग क] की कुल मात्रा, जिसका खण्ड (क) के अधीन अनुज्ञप्ति के बिना भंडारकरण किया जा सकेगा, इस बात के होते हुए भी कि ऐसे स्वामी के कब्जे में मोटर वाहन या इंजन है 1[एक सौ लीटर] से अधिक नहीं होगी ।]

                (2) उपधारा (1) 3[के खण्ड (ख)] के अधीन अनुज्ञप्ति के बिना परिवहन या भंडारकरण किया गया 2[पेट्रोलियम वर्ग क] धारा 8 की उपधारा (2) में यथा उपबंधित रूप में रखा जाएगा और यदि वह मात्रा में  [तीस लीटर] से अधिक है तो उसका एक ऐसे अलग स्थान में भंडारकरण किया जाएगा जिसका किसी ऐसे वाहन से जहां कोई व्यक्ति निवास करता है या काम करता है या किसी ऐसे कक्ष से जहां व्यक्तियों का जमाव होता है, संपर्क नहीं है ।

                10. वाहक के रूप में कार्य करने वाले रेल प्रशासन द्वारा किसी अनुज्ञप्ति की आवश्यकता नहीं है-इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) की धारा 3 में यथा परिभाषित रेल प्रशासन को वाहक की अपनी हैसियत में अपने कब्जे में के किसी पेट्रोलियम के आयात या परिवहन के लिए कोई अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है ।

                 [11. भारी तेलों को छूट-इस अध्याय की कोई भी बात किसी ऐसे पेट्रोलियम पर लागू नहीं होगी जिसका प्रज्वलन ताप तिरानवे डिग्री संटीग्रेड के नीचे नहीं है ।]

                12. छूट देने की साधारण शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी पेट्रोलियम को इस अध्याय के सभी या किन्हीं उपबन्धों से छूट दे सकेगी ।

                13. स्थानों का निरीक्षण-(1) केन्द्रीय सरकार किसी अधिकारी को नाम से या पद के आधार पर किसी ऐेसे स्थान में, जहां पेट्रोलियम का आयात, भंडारकरण, उत्पादन, परिष्करण या सम्मिश्रिण किया जा रहा है या परिवहन के अधीन है प्रवेश करने के लिए, और पेट्रोलियम के संबंध में प्रयुक्त सभी पात्रों, संयंत्रों और साधित्रों का यह सुनिश्चित करने के लिए कि क्या वे इस अध्याय और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अनुसार है निरीक्षण करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी ।

                (2) केन्द्रीय सरकार इस धारा के अधीन प्राधिकृत अधिकारियों की प्रक्रिया को विनियमित करने वाले नियम बना सकेगी ।

अध्याय 2

पेट्रोलियम का परीक्षण

                14. पेट्रोलियम का निरीक्षण और नमूने लेना-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी अधिकारी को नाम से या पद के आधार पर किसी ऐसे स्थान में जहां पेट्रोलियम का आयात, परिवहन, भंडारकरण, उत्पादन, परिष्करण या सम्मिश्रण किया जा रहा है, प्रवेश करने के लिए और उसमें पाए गए किसी पेट्रोलियम का निरीक्षण करने के लिए और परीक्षण करने के लिए उनके नमूने लेने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी ।

                (2) केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित के लिए नियम बना सकेगी :

                                (क) परीक्षण के लिए पेट्रोलियम के नमूने लेने का विनियमन करना ;

                (ख) ऐसे मामले अवधारित करना जिनमें लिए गए नमूने के मूल्य के लिए संदाय किया जाएगा और संदाय का                   ढंग ; और

                                (ग) साधारणतः इस धारा के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने वाले अधिकारियों की प्रक्रिया का विनियमन करना ।

               

15. मानक परीक्षण साधित्र-(1) पेट्रोलियम का  [प्रज्वलन ताप] अवधारित करने के लिए मानक साधित्र केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त नियुक्त किए जाने वाले किसी अधिकारी के पास जमा किया जाएगा ।

                (2) ऐसे साधित्रों पर “मानक परीक्षण साधित्र" शब्द उत्कीर्ण किए जाएंगे और वे धारा 21 के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार समय-समय पर सत्यापित और शुद्ध किए जाएंगे और जब आवश्यक हो तब उनके स्थान पर नए साधित्र रखे जाएंगे ।

                (3) मानक परीक्षण साधित्र, विहित फीस का संदाय किए जाने पर, उसका निरीक्षण करने की वांछा रखने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा निरीक्षण किए जाने के लिए सभी युक्तियुक्त समयों पर खुला रहेगा ।

                16. अन्य परीक्षण साधित्रों का प्रमाणन-(1) धारा 15 के अधीन नियुक्त अधिकारी, विहित फीस, यदि कोई हो, का संदाय किए जाने पर, पेट्रोलियम का  [प्रज्वलन ताप] अवधारित करने की साधित्र की तुलना, जो उसे इस प्रयोजन के लिए प्रस्तुत किया                      जाए, मानक परीक्षण साधित्र से करेगा । 

                (2) यदि किसी साधित्र के बारे में वह यह पाता है कि विहित सीमाओं के भीतर वह मानक परीक्षण साधित्रों के अनुरूप है तो अधिकारी ऐसे साधित्र पर विशेष संख्यांक और तुलना की तारीख उत्कीर्ण करेगा और इसकी बाबत एक प्रमाणपत्र विहित प्ररूप में देगा जिसमें यह प्रमाणित किया जाएगा कि उक्त तारीख को साधित्र की तुलना मानक परीक्षण साधित्र से की गई थी और वह विहित सीमाओं के भीतर उसके अनुरूप पाया गया था तथा उसमें साधित्र के साथ किए गए परीक्षणों में की जाने वाली किन्हीं शुद्धियों को भी विनिर्दिष्ट किया जाएगा ।

                (3) इस धारा के अधीन दिया गया प्रमाणपत्र ऐसी अवधि के लिए विधिमान्य होगा जो विहित की जाए ।

                (4) इस धारा के अधीन दिया गया प्रमाणपत्र उस अवधि के दौरान जिसके लिए वह विधिमान्य है उसमें कथित किए विषय पर, जब तक कि उसके प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, सबूत होगा ।

                (5) अधिकारी इस धारा के अधीन अपने द्वारा दिए गए सभी प्रमाणपत्रों का विहित प्ररूप में एक रजिस्टर रखेगा ।

                17. परीक्षण अधिकारी-केन्द्रीय सरकार किसी अधिकारी को नाम से या पद के आधार पर किसी ऐसे पेट्रोलियम का, जिसके नमूने इस अधिनियम के अधीन लिए गए हैं या जो किसी व्यक्ति द्वारा परीक्षण किए जाने के लिए उसको प्रस्तुत किए गए हैं परीक्षण करने के लिए और ऐसे परीक्षणों के परिणामों के प्रमाणपत्र देने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी ।

                18. परीक्षण की रीति-इस अधिनियम के अधीन किए गए पेट्रोलियम के सभी परीक्षण ऐसे परीक्षण साधित्रों से किए जाएंगे जिनकी बाबत धारा 16 के अधीन विधिमान्य प्रमाणपत्र है और उसी प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट किसी शुद्धता का ध्यान उसमें रखा जाएगा और वे धारा 21 के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार किए जाएंगे ।

                19. परीक्षण प्रमाणपत्र- [(1) परीक्षण अधिकारी पेट्रोलियम के नमूनों का परीक्षण करने के पश्चात् विहित प्ररूप में एक प्रमाणपत्र तैयार करेगा जिसमें यह कथन किया जाएगा कि क्या वह पेट्रोलियम वर्ग क या पेट्रोलियम वर्ग ख या पेट्रोलियम वर्ग ग है और यदि वह पेट्रोलियम वर्ग ख या पेट्रोलियम वर्ग ग है तो पेट्रोलियम का प्रज्वलन ताप क्या है । ]

                (2) परीक्षण अधिकारी संबंधित व्यक्ति को उसके निवेदन पर, प्रमाणपत्र की एक प्रमाणित प्रति विहित फीस का संदाय करने पर देगा और ऐसी प्रमाणित प्रति मूल प्रमाणपत्र की अन्तर्वस्तु के सबूत के रूप में न्यायालय में पेश की जा सकेगी ।

                 [(3) इस धारा के अधीन दिया गया प्रमाणपत्र किन्हीं ऐसी कार्यवाहियों में जो इस अधिनियम के अधीन ऐसे पेट्रोलियम की बाबत की जाए जिनसे नमूने लिए गए थे साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होगा और जब तक उसके प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, इस बात का कि वह पेट्रोलियम, पेट्रोलियम वर्ग क या पेट्रोलियम वर्ग ख या पेट्रोलियम वर्ग ग है और यदि वह पेट्रोलियम वर्ग ख या पेट्रोलियम वर्ग ग है तो उसके प्रज्वलन ताप का निश्चायक सबूत होगा ।]

                20. पुनः परीक्षण की अपेक्षा करने का अधिकार-(1) किसी पेट्रोलियम का स्वामी या उसका अभिकर्ता, जो किसी पेट्रोलियम के परीक्षण के परिणाम से असंतुष्ट है, उस तारीख से जिसको उसने परीक्षण के परिणाम की संसूचना  प्राप्त की है, सात दिन के भीतर धारा 14 के अधीन सशक्त अधिकारी को पेट्रोलियम के नए नमूने लेने और उनका परीक्षण कराने के लिए आवेदन कर सकेगा ।

                (2) ऐसे आवेदन पर और विहित फीस का संदाय करने पर पेट्रोलियम के नए नमूने ऐसे स्वामी या अभिकर्ता या उसके द्वारा प्रतिनियुक्त व्यक्ति की उपस्थिति में किए जाएंगे और उनका परीक्षण ऐसे स्वामी या अभिकर्ता या उसके द्वारा प्रतिनियुक्त व्यक्ति की उपस्थिति में किया जाएगा ।

                (3) यदि ऐसे पुनः परीक्षण पर यह प्रतीत होता है कि मूल परीक्षण गलत था तो परीक्षण अधिकारी धारा 19 के अधीन दिए गए मूल प्रमाणपत्र को रद्द कर देगा, एक नया प्रमाणपत्र देगा और पेट्रोलियम के स्वामी या उसके अभिकर्ता को उसकी एक प्रमाणित प्रति निःशुल्क देगा ।

                21. परीक्षणों की बाबत नियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित के लिए नियम बना सकेगी-

                                (क) मानक परीक्षण साधित्र का विनिर्देशन, सत्यापन, शुद्धिकरण और प्रतिस्थापन ;

                                (ख) मानक परीक्षण साधित्रों के निरीक्षण के लिए फीस विहित करना ;

                                (ग) मानक परीक्षण साधित्रों से परीक्षण साधित्रों की तुलना करने में प्रक्रिया का विनियमन ;

                (घ) इस प्रकार तुलना किए गए परीक्षण साधित्रों की बाबत दिए जाने वाले प्रमाणपत्र का प्ररूप और वह अवधि विहित करना जिसके लिए ऐसे प्रमाणपत्र विधिमान्य होंगे ;

                                (ङ) ऐसे प्रमाणपत्रों के रजिस्टर का प्ररूप विहित करना ;

                                (च) परीक्षण साधित्रों की तुलना मानक परीक्षण साधित्रों से करने के लिए फीस विहित करना ;

                (छ) पेट्रोलियम के परीक्षण करने में परीक्षण अधिकारियों की प्रक्रिया विनियमित करना, जहां एक ही पेट्रोलियम के अनेक नमूनों का परीक्षण किया जाता है वहां परिणामों के औसत निकालने का उपबंध करना और मानक तापमानों से ऐसी विविधता जो अनुज्ञात की जा सके विहित करना ;

(ज) पेट्रोलियम के परीक्षण प्रमाणपत्रों का प्ररूप और वह फीस विहित करना जो उसके लिए प्रभारित की                       जा सकेगी ;

(झ) जहां नमूनों के परीक्षण के परिणामों से, परीक्षण के अधीन किसी लाट में पेट्रोलियम की क्वालिटी की एकरूपता के बारे में कोई संदेह पैदा होता है वहां लाट का उपलाटों में विभाजन का और ऐसी प्रत्येक उपलाट के नमूनों के चयन और परीक्षण का तथा उन नमूनों के परीक्षणों के परिणामों के अनुसार परिणामों का औसत निकालने का उपबंध करना ;

(ञ) धारा 20 के अधीन पुनः परीक्षण के लिए फीस विहित करना और जहां मूल परीक्षण गलत था वहां उनके प्रतिदाय के लिए उपबंध करना ; और

(ट) साधारणतः, पेट्रोलियम के परीक्षण से संबंधित कर्तव्यों का पालन करने वाले सभी अधिकारियों की प्रक्रिया विनियमित करना और ऐसे परीक्षणों से आनुषंगिक किसी विषय का उपबंध करना ।

                22. विस्कासी या ठोस प्रकार के पेट्रोलियम का परीक्षण करने के लिए विशेष नियम-केन्द्रीय सरकार ऐसे किसी प्रकार के पेट्रोलियम के परीक्षण के लिए, जो विस्कासी या ठोस है या जिसमें तलछट या प्रगाढन संघटक है, विशेष रूप से उपबंध करने वाले नियम भी बना सकेगी और ऐसे नियम इस अध्याय या धारा 21 के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों में से किसी को उपांतरित या उसकी अनुपूर्ति कर सकेंगे जिससे उन्हें ऐसे परीक्षणों की विशेष आवश्यकताओं के अनुकूल बनाया जा सके ।

अध्याय 3

शास्तियां और प्रक्रिया

                23. इस अधिनियम के अधीन अपराधों के लिए साधारण शास्ति-जो कोई-

(क) अध्याय 1 या उसके अधीन बनाए गए नियमों के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन करते हुए किसी पेट्रोलियम का आयात, परिवहन, भण्डारकरण, उत्पादन, परिष्करण या सम्मिश्रण करेगा, या

                                (ख) धारा 4 या धारा 5 के अधीन बनाए गए किसी नियम का उल्लंघन करेगा, या

                                 [(ग) धारा 4 के अधीन जारी की गई अनुज्ञप्ति का धारक है या कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे ऐसी अनुज्ञप्ति के धारक द्वारा किसी ऐसे स्थान का जहां पेट्रोलियम का आयात या भण्डारकरण किया जा रहा है या वह परिवहन के अधीन है, तत्समय नियंत्रक या भारसाधक बनाया गया है ऐसा होते हुए ऐसी अनुज्ञप्ति की किसी शर्त का उल्लंघन करेगा या ऐसी अनुज्ञप्ति की किसी शर्त का उल्लंघन होने देगा, या]

(घ) तत्समय किसी ऐसे स्थान का नियंत्रक या भारसाधक होते हुए, जहां पेट्रोलियम का आयात, भण्डारकरण, उत्पादन, परिष्करण, सम्मिश्रण किया जा रहा है या वह परिवहन के अधीन है ; धारा 13 के अधीन प्राधिकृत किसी अधिकारी को ऐसे पेट्रोलियम के संबंध में ऐसे स्थान में प्रयुक्त किसी पात्र, संयंत्र या साधित्र को दर्शित करने से इंकार या उपेक्षा करेगा या निरीक्षण के दौरान ऐसे अधिकारी को किसी अन्य रीति से बाधा पंहुचाएगा या उसे युक्तियुक्त सहायता देने में असफल रहेगा, या

(ङ) तत्समय किसी ऐसे स्थान का नियंत्रक या भारसाधक होते हुए, जहां पेट्रोलियम का आयात, परिवहन, भण्डारकरण, उत्पादन, परिष्करण या सम्मिश्रण किया जा रहा है, धारा 14 के अधीन प्राधिकृत किसी अधिकारी को ऐसे किसी स्थान में कोई पेट्रोलियम दिखाने में या उसे ऐसे पेट्रोलियम के निरीक्षण के लिए ऐसी सहायता देने में जिसकी वह अपेक्षा करे, इंकार या उपेक्षा करेगा अथवा उसे पेट्रोलियम के नमूने लेने की अनुमति देने से इंकार करेगा, या

(च) धारा 27 के अधीन किसी दुर्घटना की सूचना देने की अपेक्षा किए जाने पर, उस धारा द्वारा इस प्रकार अपेक्षित सूचना देने में असफल रहेगा,

तो वह  [सादे कारावास से जो एक मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से] दंडनीय होगा ।

                (2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किए जाने पर उस उपधारा के अधीन दंडनीय किसी अपराध का पुनः दोषी है तो वह प्रत्येक ऐसे पश्चात्वर्ती अपराध के लिए 1[सादे कारावास से जो तीन मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,] दंडनीय होगा ।

                24. पेट्रोलियम और पात्रों का समपहरण-(1) जिस किसी मामले में, धारा 23 की उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) या खण्ड (ग) के अधीन कोई अपराध किया गया है, उसे सिद्धदोष करने वाला मजिस्ट्रेट यह निदेश दे सकेगा कि-

                                (क) वह पेट्रोलियम जिसकी बाबत अपराध किया गया है, या

                (ख) जहां अपराधी को उस मात्रा में जिसका आयात, परिवहन, भण्डारकरण करने के लिए उसे अनुज्ञा दी गई है अधिक पेट्रोलियम का, यथास्थिति, आयात, परिवहन या भण्डारकरण करने के लिए दोषसिद्ध किया जाता है वहां वह पूरा पेट्रोलियम जिसकी बाबत अपराध किया गया है,

उन पात्रों सहित जिसमें वह रखा हुआ है, समपहृत कर लिया जाए ।

                (2) इस शक्ति का प्रयोग उच्च न्यायालय द्वारा अपनी अपीली या पुनरीक्षण शक्तियों का प्रयोग करने में किया जाएगा ।

                25. अधिकारिता-इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध प्रेसिडेंसी नगरों में प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट द्वारा और अन्यत्र प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा या ऐसे द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा जिसे  [केन्द्रीय सरकार] इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत करे                       विचारणीय होंगे ।

                26. प्रवेश करने और तलाशी लेने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी अधिकारी को नाम से या उसके पद के आधार पर, किसी ऐसे स्थान में जहां उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार से अन्यथा किसी पेट्रोलियम का आयात, परिवहन, भंडारकरण, उत्पादन, परिष्करण या सम्मिश्रण किया जा रहा है, प्रवेश करने और उसकी तलाशी लेने के लिए और ऐसे किसी या सभी पेट्रोलियम को जिसकी बाबत उसकी राय में इस अधिनियम के अधीन अपराध किया गया है, अभिगृहीत करने, निरुद्ध करने या हटाने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी ।

                (2) तलाशी से संबंधित  [दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2)] के उपबन्ध, जहां तक वे लागू होते हैं, इस धारा के अधीन प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा तलाशियों को लागू होंगे ।

                (3) केन्द्रीय सरकार इस धारा के अधीन प्राधिकृत अधिकारियों की शक्तियों का प्रयोग करने में उनकी प्रक्रिया विनियमित करने वाले नियम बना सकेगी तथापि वह उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए होगा ।

                 [27. पेट्रोलियम से हुई दुर्घटना की सूचना-जब कभी किसी ऐसे स्थान में जिसमें पेट्रोलियम परिष्कृत, सम्मिश्रित या रखा जाता है या ऐसी किसी गाड़ी या जलयान में जिसमें किसी पेट्रोलियम का वहन किया जाता है या जिस पर या जिससे पेट्रोलियम लादा या उतारा जाता है या उनके आस-पास या उनके संबंध में पेट्रोलियम या पेट्रोलियम वाष्प के ज्वलन के परिणामस्वरूप विस्फोट या आग लगने से कोई दुर्घटना हो जाती है जिसमें मानव जीवन की हानि या शारीरिक क्षति या व्यक्ति या संपत्ति को गंभीर क्षति या इस प्रकार की हानि होती है जिसमें प्रथामिकतः ऐसी हानि या क्षति होती है तो, यथास्थिति, स्थान का अधिभोगी या पेट्रोलियम का तत्समय भारसाधक व्यक्ति या गाड़ी का भारसाधक व्यक्ति या यान मास्टर ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति से जो विहित की जाए, उसकी और मानव जीवन की हुई हानि या व्यक्ति या संपत्ति की क्षति की, यदि कोई हो, सूचना निकटतम मजिस्ट्रेट या निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी या  [मुख्य विस्फोटक नियंत्रक] को देगा ।]

                28. पेट्रोलियम से हुई गंभीर दुर्घटनाओं के बारे में जांच-(1)  [दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (1974 का 2)] की धारा 176 में वर्णित जांच,  [जब तक कि परिस्थितियों को कारोनर्स ऐक्ट, 1871 (1871 का 4)] की धारा 8 लागू न हो ऐसे सभी मामलों में की जाएगी जहां किसी व्यक्ति की मृत्यु ऐसी दुर्घटना से हुई है जिसके बारे में मजिस्ट्रेट के पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह पेट्रोलियम या पेट्रोलियम वाष्प के ज्वलन के परिणामस्वरूप हुई थी ।

(2) मृत्यु समीक्षा करने के लिए कोई सशक्त मजिस्ट्रेट ऐसी दुर्घटना के कारणों के बारे में जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह पेट्रोलियम या पेट्रोलियम वाष्प के ज्वलन के परिणामस्वरूप हुई थी उक्त धारा के अधीन जांच कर सकेगा यदि ऐसी दुर्घटना में व्यक्ति या संपत्ति की कोई गंभीर क्षति हुई है, यद्यपि उसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है ।

(3)  [उपधारा (2)] के प्रयोजनों के लिए पुलिस आयुक्त  ***  *** मृत्यु समीक्षा करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट समझा जाएगा ।

(4) इस धारा के अनुसरण में की गई सभी जांचों के  [और ऐसे मामलों में, जिसका उपधारा (1) में निर्देश है, कारोनर द्वारा की गई किसी जांच काट परिणाम, यथाशीघ्र  [केन्द्रीय सरकारट  [मुख्य विस्फोटक-नियंत्रकट 4[और राज्य सरकारट को भेजा जाएगा ।]

अध्याय 4

अनुपूरक

                29. नियमों से संबंधित उपबन्ध-(1) इस अधिनियम के अधीन कोई नियम बनाने में केन्द्रीय सरकार -

(क) ऐसे नियमों के आनुषंगिक किसी विषय के लिए, जिसके लिए उसकी राय में पेट्रोलियम के आयात, परिवहन, भंडारकरण, उत्पादन, परिष्करण या सम्मिश्रण से पैदा होने वाले खतरे से लोक सुरक्षा का संरक्षण करना आवश्यक है, उपबन्ध कर सकेगी ; और

                                (ख) किसी राज्य या स्थान की विशेष परिस्थितियों के लिए विशेष उपबन्ध कर सकेगी ।

                (2) इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त नियम बनाने की प्रत्येक शक्ति पूर्व प्रकाशन की शर्तों के अधीन है ।

                (3) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए सभी नियम राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे  *** ।

                 [(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]

                30. [अन्य पदार्थों पर अधिनियम को लागू करने की शक्ति ।] -ज्वलनशील पदार्थ अधिनियम, 1952 (1952 का 20) की धारा 7 द्वारा निरसित ।

31. पेट्रोलियम पर स्थानीय प्राधिकारियों की शक्तियों को सीमित करने की शक्ति - जहां कोई अधिनियमिति पेट्रोलियम के परिवहन या भंडारकरण की बाबत स्थानीय प्राधिकारी को कोई शक्ति प्रदान करती है वहां केन्द्रीय सरकार राजपत्र में                        अधिसूचना द्वारा :

                (क) ऐसी अधिनियमिति के प्रवर्तन को सीमित कर सकेगी, या

                (ख) ऐसी शक्तियों के प्रयोग को, ऐसी रीति में,  [जिसे] वह ठीक समझे निर्बंधित कर सकेगी ।

32. [निरसन] - निरसन अधिनियम, 1938 (1938 का 1) की धारा 2 और अनुसूची द्वारा निरसित ।

अनुसूची-[निरसित अधिनियमितियां]-निरसन अधिनियम, 1938 (1938 का 1) की धारा 2 और अनुसूची द्वारा         निरसित ।

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