श्रमजीवी पत्रकार (मजदूरी दर नियतन) अधिनियम, 1958
(1958 का अधिनियम संख्यांक 29)
झ्र्16 सितम्बर, 1958ट
श्रमजीवी पत्रकारों के समबन्ध में मजदूरी की दरें नियत
करने तथा तत्संसक्त विषयों का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के नवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :द्भद्भ
1. संक्षिप्त नामद्भद्भयह अधिनियम श्रमजीवी पत्रकार (मजदूरी दर नियतन) अधिनियम, 1958 कहा जा सकेगा ।
2. परिभाषाएंद्भद्भइस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,द्भद्भ
(क) समितिञ्ज् से धारा 3 के अधीन गठित समिति अभिप्रेत है;
(ख) विहितञ्ज् से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ग) मजदूरी बोर्डञ्ज् से श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम के अधीन भारत सरकार के श्रम मंत्रालय की तारीख 2 मई, 1956 की अधिसूचना संख्यांक एस.आर.ओ. 1075 द्वारा गठित मजदूरी बोर्ड अभिप्रेत है;
(घ) मजदूरी बोर्ड विनिश्चयञ्ज् से तारीख 11 मई, 1957 के भारत के असाधारण राजपत्र, के भाग 2, खण्ड 3, में प्रकाशित मजदूरी बोर्ड के विनिश्चय अभिप्रेत हैं;
(ङ) मजदूरीञ्ज् से औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) में यथा परिभाषित मजदूरी अभिप्रेत है;
(च) श्रमजीवी पत्रकार अधिनियमञ्ज् से श्रमजीवी पत्रकार (सेवा की शर्तें) और प्रकीर्ण उपबन्ध अधिनियम, 1955 (1955 का 45) अभिप्रेत है;
(छ) इस अधिनियम में प्रयुक्त किन्तु अपरिभाषित और श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम में परिभाषित शब्दों और पदों के वे ही अर्थ होंगे जो उन्हें उस अधिनियम में क्रमशः समनुदिष्ट किए गए हैं ।
3. समिति का गठनद्भद्भ(1) इस प्रयोजन से कि केन्द्रीय सरकार इस बात के लिए समर्थ हो जाए कि वह उच्चतम न्यायालय द्वारा मजदूरी बोर्ड विनिश्चय के बारे में तारीख 19 मार्च, 1958 को किए गए निर्णय को और अन्य सब सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, श्रमजीवी पत्रकारों के सम्बन्ध में मजदूरी की दरें नियत करे, केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक समिति गठित करेगी जो निम्नलिखित व्यक्तियों से मिलकर बनेगी, अर्थात् :द्भद्भ
(त्) विधि मंत्रालय का संयुक्त-सचिव की पंक्ति से नीचे का न होने वाला, केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित एक आफिसर, जो समिति का अध्यक्ष होगा,
(त्त्) गृह, श्रम और नियोजन तथा सूचना और प्रसारण मंत्रालयों में से हर एक के आफिसरों में से केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित तीन व्यक्ति,
(त्त्त्) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित एक चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट ।
(2) यदि किसी कारण से, समिति के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य के पद में, अस्थायी अनुपस्थिति के कारण की रिक्ति से भिन्न, रिक्ति होती है तो उक्त रिक्ति को भरने के लिए केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुसार किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगी और समिति के समक्ष जांच उस प्रक्रम से चालू रखी जा सकेगी, जिस तक जांच उस समय पहुंच चुकी थी जब उक्त रिक्ति हुई थी ।
(3) केन्द्रीय सरकार, समिति के लिए एक सचिव नियुक्त कर सकेगी और समिति के लिए ऐसे अन्य कर्मचारिवृन्द का उपबन्ध कर सकेगी जैसा कि आवश्यक हो ।
(4) सचिव अनुसचिवीय या अन्य प्रकृति के ऐेसे कृत्यों का पालन करेगा जैसे समिति या उसका अध्यक्ष उसे समनुदिष्ट या प्रत्यायोजित करे ।
4. समिति के कृत्यद्भद्भ(1) समिति, ऐसी रीति में, जैसी वह ठीक समझे, प्रकाशित सूचना द्वारा समाचारपत्रीय स्थापनों और श्रमजीवी पत्रकारों से तथा मजदूरी बोर्ड विनिश्चय में, हितबद्ध अन्य व्यक्तियों से अपेक्षा करेगी कि वे मजदूरी बोर्ड विनिश्चय और मजदूरी की उन दरों के सम्बन्ध में जो इस अधिनियम के अधीन श्रमजीवी पत्रकारों के बारे में नियत की जा सकती हैं, ऐसे अभ्यावेदन करें जैसे वह ठीक समझे ।
(2) ऐसा हर अभ्यावेदन लिखित होगा और तीस दिन से अधिक की ऐसी कालावधि के अन्दर किया जाएगा जैसी समिति सूचना में विनिर्दिष्ट करे और उसमें निम्नलिखित कथित होंगेद्भद्भ
(क) मजदूरी बोर्ड विनिश्चय के विरुद्ध आक्षेप के, यदि कोई हो, विनिर्दिष्ट आधार,
(ख) मजदूरी की वे दरें जो अभ्यावेदन करने वाले व्यक्ति की राय में उनका संदाय करने के नियोजक की सामर्थ्य का या अन्य ऐसी परिस्थितियों का, जो अभ्यावेदन करने वाले व्यक्ति को अपने अभ्यावेदन के सम्बन्ध में सुसंगत प्रतीत हों, ध्यान रखते हुए युक्तियुक्त होंगी,
(ग) वे परिवर्तन या उपान्तर यदि कोई हों, जो अभ्यावेदन करने वाले व्यक्ति की राय में मजदूरी बोर्ड विनिश्चय में किए जाने चाहिएं और उनके लिए कारण ।
(3) समिति, पूर्वोक्त अभ्यावेदनों पर, यदि कोई हों, विचार करेगी और मजदूरी बोर्ड के समक्ष रखी गई सामग्री की और ऐसी अतिरिक्त सामग्री की, जो तत्पश्चात् इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा अभिप्राप्त कर ली गई है या उसे उपलब्ध कर दी गई है, परीक्षा करने के पश्चात् श्रमजीवी पत्रकारों के बारे में मजदूरी की दरों को, चाहे मजदूरी बोर्ड विनिश्चय में उपान्तर करते हुए या अन्यथा, नियत करने के लिए केन्द्रीय सरकार से ऐसी सिफारिशें करेगी जैसी वह ठीक समझे और ऐसी कोई सिफारिश चाहे भविष्यलक्षी चाहे भूतलक्षी रूप से वह तारीख विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिससे मजदूरी की वे दरें प्रभावशील होनी चाहिएं ।
(4) केन्द्रीय सरकार से सिफारिशें करने में, समिति श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (1) में उपवर्णित सब विषयों का ध्यान रखेगी ।
(5) समिति, यदि वह ठीक समझे, तो समाचारपत्रीय स्थापनों के समूहों या वर्गों पर चाहे प्रादेशिक वर्गीकरण के आधार पर चाहे किसी अन्य आधार पर अलग-अलग विचार कर सकेगी और समय-समय पर, ऐसे हर समूह या वर्ग के सम्बन्ध में सिफारिशें कर सकेगी ।
5. समिति की शक्तियांद्भद्भ(1) उपधारा (2) में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए समिति उन सब शक्तियों का या उनमें से किन्हीं का प्रयोग कर सकेगी जिनका प्रयोग औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) के अधीन गठित औद्योगिक अधिकरण अपने को निर्देशित औद्योगिक विवाद के न्यायनिर्णयन के लिए करता है और उसे इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों में, यदि कोई हों, अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए अपनी प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी ।
(2) समिति से किए गए अभ्यावेदन और साक्ष्य के रूप में उसे दी गई दस्तावेजें, मामले में हितबद्ध व्यक्ति द्वारा, ऐसी फीस के संदाय पर जैसी विहित की जाए, निरीक्षण के लिए खुली रहेंगी ।
(3) यदि किसी जांच के अनुक्रम में समिति को यह प्रतीत होता है, कि किन्हीं लेखाओं या दस्तोवजों की परीक्षा करना या किसी व्यक्ति से कथन अभिप्राप्त करना आवश्यक है, तो समिति केन्द्रीय सरकार के किसी आफिसर को (जिसे एतस्मिन्पश्चात् प्राधिकृत आफिसर कहा गया है) उस निमित्त प्राधिकृत कर सकेगी और वह प्राधिकृत आफिसर समिति के निदेशों के अध्यधीन रहते हुए, यदि कोई हों, उन लेखाओं या दस्तावेजों की परीक्षा करेगा या उस व्यक्ति से कथन अभिप्राप्त करेगा ।
(4) प्राधिकृत आफिसर, समिति के निदेशों के अध्यधीन रहते हुए, यदि कोई हों, उन सब या उनमें से किन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जिनका प्रयोग औद्योगिक अधिकरण, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 11 की उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन कर सकता है ।
(5) इण्डियन इन्कम-टैक्स ऐक्ट, 1922 (1922 का 11) की धारा 54 की उपधारा (1) में या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि के किसी तत्सम उपबन्ध में की कोई भी बात जो कर उद्गृहीत करने से सम्बन्धित हो, उनमें निर्दिष्ट विशिष्टियों में से किसी के भी उस प्रकटीकरण को लागू नहीं होगी, जो प्राधिकृत आफिसर द्वारा समिति को की गई किसी रिपोर्ट में किया गया है ।
(6) प्राधिकृत आफिसर द्वारा अपनी शक्तियों के प्रयोग में अभिप्राप्त कोई भी सूचना, और उसके द्वारा की गई कोई भी रिपोर्ट इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, गोपनीय मानी जाएगी किन्तु इस उपधारा में की गई कोई भी बात, ऐसी किसी सूचना या रिपोर्ट के ऐसे प्रकटीकरणों को लागू नहीं होगी जो केन्द्रीय सरकार को या किसी न्यायालय को इस अधिनियम के निष्पादन से सम्बन्धित किसी मामले में किया गया है ।
(7) प्राधिकृत आफिसर भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ के अन्दर लोक सेवक समझा जाएगा ।
6. समिति की सिफारिशों को प्रवर्तित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्तिद्भद्भ(1) समिति की सिफारिशों की प्राप्ति के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र केन्द्रीय सरकार, सिफारिशों के निबन्धनों के अनुसार ऐसे उपान्तरों के अध्यधीन, यदि कोई हों, जैसे वह ठीक समझे आदेश करेगी और वे उपान्तर ऐसे होंगे जो केन्द्रीय सरकार की राय में सिफारिशों के स्वरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं करते ।
(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी केन्द्रीय सरकार, यदि वह ठीक समझेद्भद्भ
(क) सिफारिशों में ऐसे उपान्तर कर सकेगी जैसे वह ठीक समझे और वे उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकार के उपान्तर नहीं होंगे :
परन्तु ऐसे उपान्तर करने से पूर्व केन्द्रीय सरकार उन सब व्यक्तियों को जिन पर उनका प्रभाव पड़ना सम्भाव्य हो, ऐसी रीति में, जैसी विहित की जाए, सूचना दिलवाएगी और उन अभ्यावेदनों पर विचार करेगी जो वे लिखित रूप में इस निमित्त करें, अथवा
(ख) सिफारिशों या उनके किसी भाग को समिति को निर्देशित कर सकेगी, जिस दशा में केन्द्रीय सरकार उसकी अतिरिक्त सिफारिशों पर विचार करेगी और या तो सिफारिशों के निबन्धनों के अनुसार या उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकार के ऐसे उपान्तरों सहित, जैसे वह ठीक समझे, आदेश करेगी ।
(3) केन्द्रीय सरकार द्वारा किया गया आदेश हर समिति के उस आदेश से सम्बद्ध सिफारिशों के साथ शासकीय राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा और वह आदेश प्रकाशन की तारीख को या भविष्यलक्षी अथवा भूतलक्षी रूप से ऐसी तारीख को, जैसी आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, प्रवर्तन में आएगा ।
7. श्रमजीवी पत्रकार आदेश में विनिर्दिष्ट मजदूरी की दर से अन्यून मजदूरी पाने के हकदार होंगेद्भद्भधारा 11 में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए यह है कि केन्द्रीय सरकार के आदेश के प्रवर्तन में आने पर हर श्रमजीवी पत्रकार इस बात का हकदार होगा कि उसे उसके अपने नियोजक द्वारा उस दर पर मजदूरी दी जाए जो आदेश में विनिर्दिष्ट मजदूरी की दर से किसी भी दशा में कम नहीं होगी ।
8. झ्र्केन्द्रीय सरकार के आदेश का पुनर्विलोकन ।टद्भद्भश्रमजीवी पत्रकार (संशोधन) अधिनियम, 1962 की धारा 10 द्वारा (15-1-1963 से) निरसित ।
9. श्रमजीवी पत्रकारों को शोध्य धन की वसूलीद्भद्भ(1) जहां कि किसी नियोजक से श्रमजीवी पत्रकार को इस अधिनियम के अधीन कोई रकम शोध्य है वहां झ्र्श्रमजीवी पत्रकार स्वयं या इस निमित्त लिखित रूप में उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य व्यक्ति या श्रमजीवी पत्रकार की मृत्यु हो जाने की दशा में उसके कुटुम्ब का कोई भी सदस्यट उसको शोध्य धन की वसूली के लिए वसूली के किसी ढंग पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राज्य सरकार से आवेदन कर सकेगा और यदि राज्य सरकार का या ऐसे प्राधिकारी का, जिसे राज्य सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, समाधान हो जाता है कि कोई धन ऐसे शोध्य है तो वह उस रकम के लिए एक प्रमाणपत्र कलेक्टर के नाम देगा और कलेक्टर उस रकम को उसी रीति में वसूल करने के लिए अग्रसर होगा जिसमें भू-राजस्व की बकाया वसूल की जाती है ।
झ्र्(2) अपने नियोजक से किसी श्रमजीवी पत्रकार को इस अधिनियम के अधीन शोध्य रकम की बाबत यदि कोई प्रश्न उद्भूत होता है तो राज्य सरकार, स्वप्रेरणा से या अपने से आवेदन किए जाने पर उस प्रश्न को औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) के अधीन या उस राज्य में प्रवृत्त औद्योगिक विवादों के अन्वेषण और परिनिर्धारण से सम्बद्ध किसी तत्सम विधि के अधीन उस द्वारा गठित किसी श्रम न्यायालय को निर्देशित कर सकेगी और उक्त अधिनियम या विधि उस श्रम न्यायालय के सम्बन्ध में ऐसे प्रभावी होगी मानो ऐसा निर्देशित प्रश्न उस अधिनियम या विधि के अधीन न्यायनिर्णयन के लिए उस श्रम न्यायालय को निर्देशित विषय था ।ट
(3) श्रम न्यायालय का विनिश्चय उस द्वारा उस राज्य सरकार को भेजा जाएगा जिसने निर्देश किया था और ऐसी रकम जिसे श्रम न्यायालय ने शोध्य पाया है उपधारा (1) में उपबन्धित रीति से वसूल की जा सकेगी ।
10. समिति के आदेशों, पत्रों आदि का अधिप्रमाणीकरणद्भद्भसभी सूचनाएं, पत्र, प्राधिकरण, आदेश या अन्य दस्तावेजें जो समिति द्वारा इस अधिनियम के अधीन निकाली जानी, बनाई जानी, या किए जाने हैं, उसके अध्यक्ष या सचिव द्वारा या समिति द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य ऑफिसर द्वारा अधिप्रमाणीकृत की जा सकेंगी और ऐसे अधिप्रमाणीकृत सूचना, पत्र, प्राधिकरण, आदेश या अन्य दस्तावेज की बाबत यही उपधारणा की जाएगी कि उसे समिति ने सम्यक् रूप से निकाला, बनाया या किया था ।
11. इस अधिनियम का श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम पर प्रभावद्भद्भ(1) श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम की धाराएं 8, 10, 11, 12 और 13 समिति के सम्बन्ध में कोई प्रभाव नहीं रखेंगी ।
(2) इस अधिनियम के उपबन्ध पूर्व या पश्चात् किए गए किसी अधिनिर्णय, करार या सेवा संविदा के निबन्धनों में तद्संगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे :
परन्तु जहां कि कोई श्रमजीवी पत्रकार ऐसे किसी अधिनिर्णय, करार या सेवा संविदा के अधीन या अन्यथा, किसी विषय में ऐसी प्रसुविधाओं का हकदार है जो उसके लिए उनसे अधिक अनुकूल हैं जिनका वह इस अधिनियम के अधीन हकदार हो तो वह श्रमजीवी पत्रकार उस विषय के सम्बन्ध में उन अधिक अनुकूल प्रसुविधाओं का इस बात के होते हुए भी हकदार बना रहेगा कि वह अन्य विषयों के सम्बन्ध में प्रसुविधाएं इस अधिनियम के अधीन प्राप्त करता है ।
(3) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी श्रमजीवी पत्रकार को किसी विषय के सम्बन्ध में अपने को ऐसे अधिकार या विेशेषाधिकार जो उनसे जिनके लिए वह इस अधिनियम के अधीन हकदार हो अधिक अनुकूल है, अनुदत्त करने के लिए, नियोजक के साथ कोई करार करने से प्रवारित करती है ।
12. रिक्तियों इत्यादि से समिति की कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होनाद्भद्भसमिति का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल इसी कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि उसके सदस्यों में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है ।
झ्र्12क. शास्तियांद्भद्भ(1) कोई भी नियोजक जो धारा 7 के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा, जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(2) जो कोई उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध का सिद्धदोष ठहराए जाने पर उसी उपधारा के अधीन अपराध के लिए पुनःसिद्धदोष ठहराया जाएगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(3) जहां कि कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है, वहां हर व्यक्ति जो ऐसे अपराध के किए जाने के समय कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए भारसाधक और उस कम्पनी के प्रति उत्तरदायी था और साथ-साथ वह कम्पनी भी उस अपराध की दोषी समझी जाएगी और अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने के दायित्व के अधीन होगी और तद्नुसार दण्डनीय होगी :
परन्तु इस उपधारा में अन्तर्विष्ट कोई भी बात किसी व्यक्ति को इस धारा में उपबन्धित किसी दण्ड के दायित्व के अधीन नहीं करेगी यदि वह यह साबित कर देता है कि ऐसा अपराध उसके ज्ञान के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता का प्रयोग किया था ।
(4) उपधारा (3) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी जहां कि इस धारा के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया जाता है और यह साबित कर दिया जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य आफिसर की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उसकी ओर से हुई किसी घोर उपेक्षा के फलस्वरूप किया गया माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य आफिसर भी अपराध का दोषी समझा जाएगा और अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने के दायित्व के अधीन होगा और तद्नुसार दण्डनीय होगा ।
(5) इस धारा के प्रयोजनों के लिएद्भद्भ
(क) कम्पनीञ्ज् से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम आता है; तथा
(ख) फर्म के सम्बन्ध में निेदेशकञ्ज् से फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।ट
13. नियम बनाने की शक्तिद्भद्भ(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए नियम शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतः और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे :द्भद्भ
(क) वह रीति जिसमें सूचनाएं इस अधिनियम के अधीन प्रकाशित की जा सकेंगी;
(ख) वह प्रक्रिया जिसका अनुसरण समिति द्वारा इस अधिनियम के अधीन की अपनी शक्तियों का प्रयोग करने में किया जाना है;
(ग) समिति की वे शक्तियां और कृत्य जो उसके किसी भी सदस्य को प्रत्यायोजित की जा सकेंगी;
(घ) वह फीस जो समिति को दी गई दस्तावेजों के निरीक्षण के लिए संदत्त की जानी है ।
झ्र्(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जव वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोकत आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।ट
14. झ्र्निरसन तथा व्यावृत्तिटश्न्निरसन तथा संशोधन अधिनियम, 1960 (1960 का 58) की धारा 2 तथा अनुसची 1 द्वारा निरसित ।

