सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958
(1958 का अधिनियम संख्यांक 28)
[11 सितम्बर, 1958]
[अरुणाचल प्रदेश, [असम, मणिपुर, [मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा राज्योंट तथा
अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम संघ राज्यक्षेत्रों] के विक्षुब्ध क्षेत्रों में सशस्त्र बलों के
सदस्यों को कुछ विशेष शक्तियां प्रदान करने के लिए
समर्थ बनाने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के नवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 है ।
[(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण 1झ्र्अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, [मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा राज्यों तथा अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम संघ राज्यक्षेत्रों पर है ।]
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “सशस्त्र बल” से भूमि बलों के रूप में क्रियाशील सैनिक बल और वायु बल अभिप्रेत है तथा इसके अन्तर्गत संघ का, इस प्रकार क्रियाशील कोई अन्य सशस्त्र बल भी है;
(ख) “विक्षुब्ध क्षेत्र” से ऐसा कोई क्षेत्र अभिप्रेत है जिसे धारा 3 के अधीन अधिसूचना द्वारा तत्समय विक्षुब्ध क्षेत्र घोषित किया गया है;
(ग) उन सब शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं और वायु सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 45) या सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46) में परिभाषित हैं, वे ही अर्थ होंगे जो उनके उन अधिनियमों में है ।
[3. क्षेत्रों को विक्षुब्ध क्षेत्र घोषित करने की शक्ति-यदि किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, जिस पर इस अधिनियम का विस्तार है, ऐसे राज्य राज्यपाल या संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक या दोनों ही दशाओं में, केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि, यथास्थिति, ऐसे सम्पूर्ण राज्य या संघ राज्यक्षेत्र अथवा उसका कोई भाग ऐसी विक्षुब्ध या खतरनाक स्थिति में है कि सिविल शक्ति की सहायता के लिए सशस्त्र बलों का प्रयोग आवश्यक है तो उस राज्य का राज्यपाल या उस संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक या, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे सम्पूर्ण राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को अथवा उसके किसी भाग को विक्षुब्ध क्षेत्र घोषित कर सकती है ।]
4. सशस्त्र बलों की विशेष शक्तियां-सशस्त्र बलों का कोई आयुक्त आफिसर, वारंट आफिसर, अनायुक्त आफिसर या तत्समान रैंक का कोई अन्य व्यक्ति विक्षुब्ध क्षेत्र में,-
(क) यदि उसकी यह राय है कि ऐसा करना लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है, तो वह ऐसी सम्यक् चेतावनी देने के पश्चात् जैसी वह आवश्यक समझे, ऐसे किसी व्यक्ति पर, जो विक्षुब्ध क्षेत्र में पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के जमाव को अथवा हथियारों या ऐसी वस्तुओं को, जिनका प्रयोग हथियारों के रूप में किया जा सकता है, अथवा अग्न्यायुध, गोलाबारूद या विस्फोटक पदार्थों को लेकर चलने को प्रतिषिद्ध करने वाली तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या आदेश के उल्लंघन में कार्य करता है, गोली चलाकर या उसके प्रति बल का प्रयोग करके उसकी मृत्यु तक कारित कर सकता है;
(ख) यदि उसकी यह राय है कि ऐसा करना आवश्यक है, तो वह किसी भी शस्त्रों के अस्थायी गोदाम को, ऐसे किसी तैयार किए गए या किलेबन्द स्थान या आश्रयस्थल को, जिससे सशस्त्र हमले किए गए हैं या किए जाने संभव है या किए जाने का प्रयत्न किया गया है अथवा ऐसी किसी संरचना को, जिसका प्रयोग सशस्त्र स्वयं सेवकों के प्रशिक्षण शिविर के रूप में या किसी अपराध के लिए अपेक्षित सशस्त्र गैंगों या फरार हुए व्यक्तियों के छिपने के लिए किया गया है, नष्ट कर सकता है;
(ग) ऐसे किसी व्यक्ति को बिना वारंट गिरफ्तार कर सकता है जिसने कोई संज्ञेय अपराध किया है अथवा जिसके बारे में यह युक्तियुक्त संदेय है कि उसने कोई संज्ञेय अपराध किया है या करने वाला है और वह ऐसे बल का प्रयोग कर सकेगा जो ऐसी गिरफ्तारी के लिए आवश्यक है;
(घ) यथापूर्वोक्त कोई गिरफ्तारी करने के लिए या ऐसे किसी व्यक्ति के प्रत्युद्धरण के लिए, जिसकी बाबत यह विश्वास है कि उसे सदोष अवरुद्ध या परिरुद्ध किया गया है या ऐसी किसी सम्पत्ति की, जिसकी बाबत युक्तियुक्ततः यह विश्वास है कि वह चोरी की सम्पत्ति है या किन्हीं शस्त्रों, गोलाबारूद या विस्फोटक पदार्थों की, बरामदगी के लिए जिनकी बाबत यह विश्वास किया जाता है कि वे ऐसे परिसर में विधिविरुद्ध रखे गए हैं, किसी परिसर में बिना वारंट प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा और उस प्रयोजन के लिए ऐसे बल का प्रयोग कर सकेगा जैसा आवश्यक है ।
5. गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों का पुलिस को सौंपा जाना-इस अधिनियम के अधीन गिरफ्तार किए गए और अभिरक्षा में लिए गए व्यक्ति को यथाशीघ्र निकटतम पुलिस स्टेशन के भारसाधक अधिकारी को सौंप दिया जाएगा और उसके साथ ही उन परिस्थितियों की एक रिपोर्ट भी दी जाएगी जिनमें ऐसी गिरफ्तारी की गई है ।
6. अधिनियम के अधीन कार्य करने वाले व्यक्तियों को संरक्षण-इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में की गई की गई तात्पर्यित किसी बात के संबंध में किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई अभियोजन, वाद या विधिक कार्यवाही, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना, संस्थित नहीं की जाएगी ।
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