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खान अधिनियम, 1952 ( Mines Act, 1952 )


 

खान अधिनियम, 1952

(1952 का अधिनियम संख्यांक 35)

[15 मार्च, 1952]

खानों में और क्षेत्र श्रम के विनियम से संबंधित विधि

का संशोधन और समेकन

करने के लिए

अधिनियम

संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) यह अधिनियम खान अधिनियम, 1952 कहा जा सकेगा ।

(2) इसका विस्तार  *** सम्पूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख या उन तारीखों  को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, और इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के लिए और विभिन्न राज्यों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी, किन्तु 31 दिसम्बर, 1953 के पश्चात् की तारीख नियत न की जा सकेगी ।

2. परिभाषाएं- [(1)] इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

                                 *                                            *                                             *                                             *                            

                                (ख) “वयस्थ" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने अपना अठाहरवां वर्ष पूरा कर लिया है ;

 [(ग) “अभिकर्ता" से, जब कि वह किसी कान के संबंध में प्रयुक्त हुआ है, प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, चाहे वह अभिकर्ता के रूप में नियुक्त किया गया हो या नहीं, अभिप्रेत है, जो स्वामी की ओर से कार्य करते हुए या कार्य करने का तात्पर्य रखते हुए, खान या उसके किसी भाग के प्रबन्ध, नियन्त्रण, पर्यवेक्षण या निदेशन में भाग लेता है ;]

(घ) “मुख्य निरीक्षक" से इस अधिनियम के अधीन नियुक्त किया गया खानों का मुख्य निरीक्षक अभिप्रेत है ;

 [(ङ) “समिति" से धारा 12 के अधीन गठित समिति अभिप्रेत है ;]

(च) “दिन" से मध्यरात्रि को आरम्भ होने वाली चौबीस घण्टों की कालावधि अभिप्रेत है ;

(छ) “जिला मजिस्ट्रेट" से किसी प्रेसिडेंसी नगर में वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उस नगर में इस अधिनियम के अधीन जिला मजिस्ट्रेट के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया गया है ;

 [(ज) वह व्यक्ति खान में “नियोजित" कहा जाता है जो खान के प्रबन्धक के रूप में काम करता है या जो खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा या प्रबन्धक की जानकारी में की गई नियुक्ति के अधीन,-

(i) किसी खनन संक्रिया में (जिसके अन्तर्गत खनिजों की प्रेषण स्थल तक उठाई-धराई और परिवहन तथा बालू एकत्रित करने और खान तक उसका परिवहन करने की सहवर्ती संक्रियाएं भी हैं) ;

(ii) खान के विकास से सम्बन्धित संक्रियाओं या सेवाओं में, जिनके अन्तर्गत उसमें संयंत्र का सन्निर्माण भी है, किन्तु जिनके अन्तर्गत ऐसे भवनों, सड़कों, कूपों और अन्य ऐसे निर्माण संकर्म का सन्निर्माण नहीं आता जो किन्हीं विद्यमान या भावी खनन संक्रियाओं से सीधे संसक्त नहीं हैं ;

(iii) खान में या उसके आस-पास प्रयुक्त मशीनरी के किसी भाग को चलाने, उसकी सफाई करने, उसका अनुरक्षण करने या उसकी मरम्मत करने में ;

(iv) खनिजों के प्रेषण के लिए लदाई की खान के परिसरों के भीतर संक्रियाओं में ;

(v) खान के किसी कार्यालय में ;

(vi) किन्हीं कल्याण, स्वास्थ्य, स्वच्छता या सफाई सेवाओं में, जिनकी व्यवस्था इस अधिनियम के अधीन की जानी अपेक्षित है, खान या खान के परिसरों के भीतर, जिनमें निवासीय क्षेत्र नहीं आता है, पहरे और              निगरानी का ; या 

(vii) किसी भी प्रकार के किसी कार्य में, जो खनन संक्रियाओं के लिए प्रारम्भिक या उनके आनुषंगिक या उनसे संबंधित है,

चाहे मजदूरी पर या मजदूरी के बिना, काम करता है ;]

(झ) “निरीक्षक" से इस अधिनियम के अधीन नियुक्त किया गया खानों का निरीक्षण अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत कोई जिला मजिस्ट्रेट तब आता है जब वह निरीक्षक की किसी ऐसी शक्ति का प्रयोग या किसी ऐसे कर्तव्य का पालन कर रहा हो जिसका प्रयोग या पालन करने के लिए वह इस अधिनियम द्वारा सशक्त किया गया हो ;

 *                                            *                                             *                                             *

 [(ञ) “खान" से कोई ऐसा उत्खात अभिप्रेत है जहां खनिजों की तलाश या अभिप्राप्ति के प्रयोजन के लिए कोई संक्रिया चलाई गई है या चलाई जा रही है और निम्नलिखित इसके अन्तर्गत आते हैं :-

(i) सब बोरिंग, बोर छिद्र और तेल कूप और समनुषंगिक अपरिष्कृत अनुकूलन संयंत्र जिनके अन्तर्गत तेल क्षेत्रों के भीतर खनिज तेल ले जाने वाला पाइप भी है ;

(ii) खान में के या उसके पार्श्वस्थ और खान के सब कूपक, चाहे वे गलाए जा रहे हों या नहीं ;

(iii) अनुखनन के अनुक्रम में सब समतलिकाएं और आगत समतथ ;

(iv) सब विवृत्त खनित ;

(v) खनिजों या अन्य वस्तुओं को खान में लाने या वहां से हटाने या वहां से कचरा हटाने के लिए उपबन्धित सब प्रवहणियां या आकाशी रज्जुमार्ग ;

(vi) खान में के या उसके पार्श्वस्थ और खान के सब एडिट, समतलिकाएं, समपथ, मशीनरी, संकर्म, रेल, ट्रामवे और साइडिंग ;

(vii) खान में या उसके पार्श्वस्थ चलाए जाने वाले सब संरक्षा संकर्म ;

(viii) वे सब कर्मशालाएं और स्टोर जो खान की प्रसीमाओं के अन्दर स्थित हैं और एक ही प्रबन्ध के अधीन हैं और मुख्यतया उस खान से या उसी प्रबन्ध के अधीन की गई खानों से संसक्त प्रयोजनों के लिए ही उपयोग में लाए जाते हैं ;

(ix) उस खान या उसी प्रबन्ध के अधीन की कई खानों के ही या मुख्यता उनके कार्यकरण के प्रयोजनार्थ विद्युत प्रदाय के लिए सभी विद्युत केन्द्र, ट्रांसफार्मर उप-केन्द्र, परिवर्तित केन्द्र, रेक्टीफायर केन्द्र और एक्यूमुलेटर स्टोरेज केन्द्र ;

(x) खान के स्वामी के अन्य अधिभोग में के कोई परिसर जो बालू या खान में उपयोग के लिए अन्य पदार्थ जमा करने अथवा खान का कचरा डालने के लिए तत्समय उपयोग में लाए जा रहे हैं या जिनमें ऐसी बालू, कचरे या अन्य पदार्थ के सम्बन्ध में कोई संक्रियाएं चलाई जा रही हैं ;

(xi) ऐसे परिसर जो खान में हैं या उसके पार्श्वस्थ हैं और खान के हैं और जहां खनिजों या कोक की प्राप्ति, दरेसी या विक्रयार्थ तैयारी की अनुषंगी कोई प्रक्रिया चलाई जा रही है ;]

(ञञ) “खनिज" से वे सब पदार्थ अभिप्रेत हैं जो भूमि से खनन, खोदने, बर्माने, झमाई, जल-प्रथार खनन, खदान-क्रिया या किसी अन्य संक्रिया द्वारा अभिप्राप्त किए जा सकते हैं, और इसके अन्तर्गत खनिज तेल (जिसके अन्तर्गत प्राकृतिक गैस और पैट्रोलियम आते हैं) आते हैं ;

 

 *                                            *                                             *                                             *                             *

(ट) “खान का कार्यालय" से संपृक्त खान के बहिस्थल पर का कोई कार्यालय अभिप्रेत है ;

 [(टट) “विवृत्त खनित" से खदान, अर्थात् कोई ऐसा उत्खात अभिप्रेत है जहां खनिजों की तलाश या अभिप्राप्ति के प्रयोजन के लिए कोई संक्रिया चलाई जाती रही है या चलाई जा रही है और जो न कूपक है न ऐसा उत्खात है जिसका विस्तार उपस्थित भूमि के नीचे है ;]            

(ठ) “स्वामी" से जब कि वह किसी खान के संबंध में प्रयुक्त हुआ है, कोई ऐसा व्यक्ति, जो खान या उसके किसी भाग का अव्यवहित स्वत्वधारी, पट्टेदार या अधिभोगी है, और ऐसी खान की दशा में, जिसका कारबार समापक या रिसीवर द्वारा चलाया जा रहा है, वह समापक या रिसीवर अभिप्रेत है,  ***; किन्तु इसके अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति नहीं आता है, जो उस खान से केवल स्वामिस्व, भाटक या नजराना प्राप्त करता है, या ऐसी खान का स्वत्वधारी मात्र है जो कार्यकरण के लिए किसी पट्टे, अनुदान या अनुज्ञप्ति के अध्यधीन है या केवल मृदा का स्वामी है और उस खान के खनिजों में हितबद्ध नहीं है, किन्तु खान या उसके किसी भाग के कार्यकरण का  [कोई ठेकेदार या उप-पट्टेदार] उसी प्रकार से इस अधिनियम के अध्यधीन होगा मानो वह स्वामी हो, किन्तु इस प्रकार नहीं कि स्वामी को किसी दायित्व से छूट मिल जाए :

(ड) “विहित" से, यथास्थिति, नियमों, विनियमों या उपविधियों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

  [(ढ) “अर्हित चिकित्सा व्यवसायी" से ऐसा चिकित्सा व्यवसायी अभिप्रेत है, जिसके पास भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् अधिनियम, 1956 (1956 का 102) की धारा 2 के खण्ड (ज) में यथापरिभाषित कोई मान्यताप्राप्त आयुर्विज्ञान अर्हता है और जिसका नाम उस धारा के खंड (ट) में यथापरिभाषित राज्य चिकित्सक रजिस्टर में दर्ज है ;]

(ण) “विनियम", नियम" और “उपविधि" से क्रमशः इस अधिनियम के अधीन बनाया गया विनियम, नियम और उपविधि अभिप्रेत है ;

(त) जहां कि एक ही किस्म का काम दिन की विभिन्न कालावधियों के दौरान काम करने वाले व्यक्तियों के दो या अधिक संवर्गों द्वारा किया जाता है वहां ऐसे संवर्गों में से हर एक संवर्ग “टोली" कहलाता है  [और ऐसी कालावधियों में से हर एक कालावधि “पारी" कहलाती है] ;

 [(तत) “रिपोर्ट की जाने योग्य क्षति" से किसी गंभीर शारीरिक क्षति से भिन्न ऐसी क्षति अभिप्रेत है, जिसमें क्षतिग्रस्त व्यक्ति की बहत्तर घण्टे या उससे अधिक की कालावधि के लिए काम से मजबूरी के कारण अनुपस्थिति अन्तर्वलित है या अन्तर्वलित होने की पूर्ण अधिसंभाव्यता है ;]

 [(थ) “गम्भीर शारीरिक क्षति" से कोई ऐसी क्षति अभिप्रेत है जिसमें शरीर के किसी अवयव या हिस्से की या शरीर के किसी अवयव या हिस्से के उपयोग की स्थायी हानि या दृष्टि या श्रवण शक्ति की स्थायी हानि या उसे क्षति या कोई स्थायी शारीरिक असमर्थता या हाथ या पैर की किसी हड्डी का या उसके एक या अधिक जोड़ों का या उसकी किन्हीं अंगुल्यस्थियों की हड्डियों का विभंग अन्तर्वलित है या अन्तर्वलित होने की पूर्ण अधिसंभाव्यता है :

(द) “सप्ताह" से शनिवार की रात्रि को या ऐसी अन्य रात्रि को, जो मुख्य निरीक्षक या किसी निरीक्षक द्वारा किसी विशिष्ट क्षेत्र के लिए लिखित रूप में, अनुमोदित की जाए, मध्य रात्रि को आरम्भ होने वाली सात दिन की कालावधि                  अभिप्रेत है ।]

                 [(2) ऐसे व्यक्ति की बाबत जो खान में या खान के संबंध में काम कर रहा या नियोजित है यह तब कहा जाता है कि वह-

(क) “भूमि के नीचे" काम कर रहा या नियोजित है, जब कि वह-

(i) किसी ऐसे कूपक में काम कर रहा या नियोजित है, जो गलाया जा चुका है या गलाया जा रहा                    है ; अथवा

(ii) किसी ऐसे उत्खात में काम कर रहा या नियोजित है, जिसका विस्तार उपस्थित भूमि के नीचे                  है ; तथा

(ख) “भूमि के ऊपर" काम कर रहा या नियोजित है, जब कि वह किसी विवृत्त खनित में काम कर रहा है या किसी अन्य ऐसी रीति से काम कर रहा है जो खंड (क) में विनिर्दिष्ट नहीं है ।]

 [3. अधिनियम का कतिपय दशाओं में लागू होना-(1)  [धाराओं 7, 8, 9, 40, 45 और 46] में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के सिवाय इस अधिनियम के उपबन्ध-

(क) किसी ऐसी खान या उसके भाग को लागू न होंगे जिसमें उत्खनन केवल पूर्वेक्षण के प्रयोजन के लिए, न कि उपयोग या विक्रय के लिए खनिजों की अभिप्राप्ति के प्रयोजन के लिए, किया जा रहा हो :

परन्तु यह तब जब कि-

(i) ऐसे किसी उत्खनन के सम्बन्ध में किसी एक दिन में बीस से अधिक व्यक्ति नियोजित न हों ;]

(ii) उत्खात के उच्चतम बिन्दु से उसके निम्नतम बिन्दु तक नापी गई उत्खात की गहराई कहीं भी छह मीटर से, या कोयले के लिए उत्खनन की दशा में, पन्द्रह मीटर से, अधिक न हो ; तथा

(iii) ऐसे उत्खान के किसी भी भाग का विस्तार उपरिस्थ भूमि के नीचे न हो ;

(ख) किसी ऐसी खान को लागू न होंगे जो कंकड़, मोरम, लैटेराइट, ढोका, वजरी, शिंगिल, (सांचाबालू, कांचबालू और अन्य खनिज बालूओं को अपर्विजत करते हुए), मामूली बालू (केओलिन, चीनी मिट्टी, श्वेत मृत्तिका, या अग्िनसह मृत्तिका को अपवर्जित करते हुए), मामूली मृत्तिका, इमारती पत्थर  [स्लैटट सड़क-मिट्टी, मिट्टी, मुल्तानी मिट्टी,  3[मार्ल, चाक] और चुनाश्म निकालने में लगी हो :

परन्तु यह तब जब कि-

                (i) खनिजों का विस्तार उपरिस्थ भूमि के नीचे न हो ; अथवा

                (ii) जहां कि वह विवृत्त खनित हो, वहां-

                (क) उत्खात के उच्चतम बिन्दु से उसके निम्नतम बिन्दु तक नापी गई उत्खात की गहराई कहीं भी छह मीटर से अधिक न हो ;

                                (ख) किसी एक दिन नियोजित व्यक्तियों की संख्या पचास से अधिक न हो ; तथा

(ग) उत्खनन के सम्बन्ध में विस्फोटक प्रयुक्त न किए जाते हों ।

(2) यदि केन्द्रीय सरकार का समाधान हो जाए कि किसी खान या उसके किसी भाग या खानों के समूह या वर्ग के सम्बन्ध में विद्यमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, ऐसा करना आवश्यक या वांछनीय है तो वह, उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, शासकीय राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा घोषित कर सकेगी कि इस अधिनियम के उपबन्धों में से कोई ऐसा उपबन्ध, जो उपधारा (1) में उपवर्णित नहीं है, उस खान या उसके भाग को या खानों के समूह या वर्ग को या उसमें नियोजित व्यक्तियों के किसी वर्ग को लागू होगा ।

(3) उपधारा (2) में अन्तर्विष्ट उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के परन्तुक में विनिर्दिष्ट शर्तों में से किसी की पूर्ति उस उपधारा में निर्दिष्ट किसी खान के सम्बन्ध में किसी समय न की जाए, तो इस अधिनियम के वे उपबन्ध, जो उपधारा (1) में उपवर्णित नहीं है, तुरंत लागू हो जाएंगे, और  खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक का यह कर्तव्य होगा कि वह उस पूर्ति न होने की इत्तिला विहित प्राधिकारी को विहित रीति से और विहित समय के अन्दर दे ।]

4. दिन के समय के प्रति निर्देश-इस अधिनियम में वे निर्देश जो दिन के समय के प्रति हैं भारतीय मानक समय के प्रति निर्देश हैं जो ग्रिनविच माध्य समय से साढे पांच घंटे आगे हैं :

परन्तु किसी ऐसे क्षेत्र के लिए, जिसमें मामूली तौर पर भारतीय मानक समय का अनुपालन नहीं होता, केन्द्रीय सरकार-

                (क) उस क्षेत्र को विनिर्दिष्ट करने वाले ;

                (ख) उस स्थानीय माध्य समय को, जो मामूली तौर पर उसमें अनुपालित होता है, परिभाषित करने वाले ; तथा

                (ग) उस क्षेत्र में स्थित सब खानों या उनमें से किसी में उस समय का अनुपालन अनुज्ञात करने वाले, नियम                   बना सकेगी ।

 

 

 

 

 

अध्याय 2

निरीक्षक और प्रमाणकर्ता सर्जन

5. मुख्य निरीक्षक और निरीक्षक-(1) केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे व्यक्ति को, जो विहित अर्हताएं रखता हो, उन सब राज्यक्षेत्रों के लिए, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, खानों का मुख्य निरीक्षक और ऐसे व्यक्तियों को, जो विहित अर्हताएं रखते हों, मुख्य निरीक्षक के अधीनस्थ खानों के निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी ।

(2) कोई भी व्यक्ति, जो भारत में किसी खान या खनन अधिकारों में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः हितबद्ध हो, या हो जाए, मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक नियुक्त नहीं किया जाएगा और न नियुक्त किए जाने के पश्चात् ऐसे पद को धारण किए रहेगा ।

(3) जिला मजिस्ट्रेट निरीक्षक की शक्तियों  का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन केन्द्रीय सरकार के साधारण या विशेष आदेशों  के अध्यधीन रहते हुए कर सकेगा :

परन्तु इस उपधारा में की किसी भी बात से यह न समझा जाएगा कि वह  [धारा 22 या धारा 22कट या धारा 61 द्वारा प्रदत्त शक्तियों में से किसी का प्रयोग करने के लिए किसी जिला मजिस्ट्रेट को सशक्त करती है ।

(4) मुख्य निरीक्षक और सभी निरीक्षक भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अर्थ के अन्दर लोक सेवक समझे जाएंगे ।

 [6. निरीक्षकों के कृत्य-(1) मुख्य निरीक्षक केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से आदेश द्वारा, उस आदेश में नामित किसी निरीक्षक या विनिर्दिष्ट किसी निरीक्षक वर्ग को मुख्य निरीक्षक की इस अधिनियम के अधीन की शक्तियों में से (अपील संबंधी शक्तियों से भिन्न) ऐसी शक्तियों का, जिन्हें वह विनिर्दिष्ट करे, ऐसे निबंधनों या शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जिन्हें अधिरोपित करना वह ठीक समझे, प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा ।

(2) मुख्य निरीक्षक इस अधिनियम के अधीन निरीक्षकों को प्रदत्त किसी शक्ति का प्रयोग, लिखित आदेश द्वारा, उस आदेश में नामित किसी निरीक्षक या विनिर्दिष्ट किसी निरीक्षक वर्ग द्वारा किया जाना, प्रतिषिद्ध या निर्बन्धित कर सकेगा ।

(3) मुख्य निरीक्षक, इस धारा में अन्तर्विष्ट अन्य उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, ऐसे स्थानीय क्षेत्र या क्षेत्रों को, जिनके अन्दर, और खानों के उस समूह या वर्ग की जिसके बारे में, निरीक्षक अपनी-अपनी शक्तियों का प्रयोग करेंगे, घोषित करेगा ।]

7. खानों के निरीक्षकों की शक्तियां-(1) मुख्य निरीक्षक और कोई निरीक्षक-

(क) ऐसी परीक्षा और जांच सकेगा, जैसी वह यह अभिनिश्चित करने के लिए ठीक समझे कि क्या इस अधिनियम के और विनियमों, नियमों और उपविधियों के और तद्धीन किए गए किन्हीं आदेशों के उपबन्धों का अनुपालन किसी खान के बारे में किया जाता है ;               

(ख) ऐसे सहायकों के साथ, यदि कोई हों, जिन्हें वह ठीक समझे, दिन या रात्रि में किसी भी समय किसी खान या उसके भाग में प्रवेश, उसका निरीक्षण और उसकी परीक्षा कर सकेगा :

परन्तु इस खंड द्वारा प्रदत्त शक्ति का ऐसी स्थिति से प्रयोग नहीं किया जाएगा जिससे खान के कार्यकरण में अयुक्तियुक्त अड़चन या बाधा पड़े :

(ग) किसी खान या उसके किसी भाग की स्थिति और दशा, खान के संवातन, खान के संबंध में तत्समय प्रवृत्त उपविधियों की पर्याप्तता, और खान में नियोजित व्यक्तियों के स्वास्थ्य, क्षेम और कल्याण से संसक्त या संबद्ध सब मामलों और बातों की परीक्षा और उनके बारे में जांच कर सकेगा, और चाहे खान की प्रसीमाओं पर, या अन्यत्र किसी व्यक्ति के ऐसे कथन, जिन्हें वह इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे, ले सकेगा ;

(घ) अन्य ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए विनियमों द्वारा विहित की जाएं :

परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई भी व्यक्ति किसी ऐसे प्रश्न का उत्तर देने या कोई ऐसा कथन करने के लिए विवश न किया जाएगा, जिसकी प्रवृत्ति उसे अपराध में फंसाने की हो ।

(2) मुख्य निरीक्षक और कोई निरीक्षक, यदि उनके पास इस धारा के अधीन किसी निरीक्षण, परीक्षा या जांच के परिणामस्वरूप यह विश्वास करने का कारण हो कि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया गया है या किया जा रहा है, किसी स्थान की तलाशी ले सकेगा और खान से सम्बद्ध  [किसी सामग्री या किसी रेखांक, खंडचित्र, रजिस्टर या अन्य अभिलेख को] कब्जे में ले सकेगा और  [दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1973 का 2)] के उपबन्ध, जहां तक लागू हो सकते हों, इस अधिनियम के अधीन किसी तलाशी और अभिग्रहण को ऐसे ही लागू होंगे जैसे वे उस संहिता की  [धारा 94] के अधीन निकाले गए वारंट के प्राधिकार के अधीन की किसी तलाशी या अभिग्रहण को लागू होते हैं ।

8. विशेष आफिसर की प्रवेश करने, मापने आदि की शक्तियां-सरकार की सेवा में का कोई भी व्यक्ति, जिसे मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक ने, लिखित रूप में विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत किया हो, खान के प्रबन्धक को ऐसी सूचना देने के पश्चात् जो तीन दिन से कम की न हो  [किसी खान या उसमें के किसी उत्पाद का सर्वेक्षण, तलमापन] या मापन करने के प्रयोजन के लिए उसमें प्रवेश कर सकेगा और दिन या रात्रि में किसी भी समय खान या उसके किसी भाग 2[या उसमें के किसी उत्पाद] का सर्वेक्षण तलमापन या मापन कर सकेगा :

परन्तु जहां कि मुख्य निरीक्षक या किसी निरीक्षक की राय में कोई आपात विद्यमान हो, वहां वह लिखित आदेश द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति को प्राधिकृत कर  सकेगा कि वह ऐसी कोई सूचना दिए बिना पूर्वोक्त में से किसी प्रयोजन के लिए खान में प्रवेश करें ।

9. निरीक्षकों को दी जाने वाली सुविधाएं-खान का हर स्वामी, अभिकर्ता और प्रबन्धक, मुख्य निरीक्षक और हर निरीक्षक को और धारा 8 के अधीन प्राधिकृत हर व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन कोई प्रवेश, निरीक्षण, सर्वेक्षण, मापन, परीक्षा या जांच करने के लिए सब युक्तियुक्त सुविधाएं देगा ।

 [9क. उपजीविकाजन्य स्वास्थ्य सर्वेक्षण के लिए दी जाने वाली सुविधाएं-(1) मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक या उसके द्वारा इस निमित्त लिखित रूप में प्राधिकृत कोई अन्य प्राधिकारी खान के सामान्य कार्य समय के दौरान किसी भी समय या दिन या रात्रि में किसी भी समय, जब आवश्यक हो, खान के प्रबन्धक को लिखित सूचना देने के पश्चात् खान में क्षेत्र और उपजीविकाजन्य स्वास्थ्य सर्वेक्षण कर सकेगा, और खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक ऐसे निरीक्षक या अधिकारी को सभी आवश्यक सुविधाएं, जिनके अन्तर्गत सर्वेक्षण से संबंधित नमूनों और अन्य आंकड़ों के संग्रहण के लिए तथा सर्वेक्षण के लिए चुने गए, खान में नियोजित किसी व्यक्ति के परिवहन और परीक्षा के लिए समय और मशीनरी की परीक्षा और परख के लिए सुविधाएं भी हैं देगा ।

(2) खान में नियोजित प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो उपधारा (1) के अधीन किसी क्षेम और उपजीविकाजन्य स्वास्थ्य सर्वेक्षण में परीक्षा के लिए चुना गया है, ऐसी परीक्षा के लिए और ऐसे स्थान पर जो आवश्यक हों, स्वयं को प्रस्तुत करेगा और उक्त सर्वेक्षण के सम्बन्ध में अपने काम और स्वास्थ्य के बारे में सब जानकारी देगा ।

(3) खान में नियोजित किसी व्यक्ति द्वारा जो क्षेम और उपजीविकाजन्य स्वास्थ्य सर्वेक्षण में परीक्षा के लिए चुना गया है, व्यतीत किए गए समय को उसके काम के समय में गिना जाएगा, किन्तु इस प्रकार कि किसी अतिकाल का संदाय मजदूरी की मामूली दर से किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, “मजदूरी की मामूली दर" से वह आधारिक मजदूरी तथा कोई महंगाई भत्ता और अधिभूमि भत्ता तथा नकद प्रतिकर अभिप्रेत है जिसके अन्तर्गत खाद्यान्न और खाद्य तेलों के निःशुल्क वितरण के माध्यम से प्रोद्भूत होने वाला ऐसा प्रतिकर, यदि कोई हो, भी है, जिसके लिए खान में नियोजित व्यक्ति तत्समय हकदार हो, किन्तु इसके अन्तर्गत बोनस (उत्पादन के लिए प्रोत्साहन के रूप में दिए जाने वाले बोनस से भिन्न) या कोई ऐसा प्रतिकर नहीं है जो निःशुल्क आवास, कोयले के निःशुल्क प्रदाय चिकित्सा और शैक्षणिक सुविधाओं, बीमारी भत्ता, मिट्टी के तेल के प्रदाय, टोकिरियों, औजारों और वर्दियों जैसी सुख-सुविधाओं की व्यवस्था के माध्यम से प्रोद्भूत होता है ।

(4) ऐसा कोई व्यक्ति जिसकी उपधारा (2) के अधीन परीक्षा की जाने पर, उस कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए चिकित्सकदृष्ट्या अयोग्य पाया जाता है जिस कर्तव्य का निर्वहन वह स्वयं के प्रस्तुत किए जाने के ठीक पहले किसी खान में कर रहा था, स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक के  खर्च पर चिकित्सीय उपचार पाने का हकदार होगा और ऐसे उपचार की अवधि के दौरान उसे पूरी मजदूरी दी जाएगी ।

(5) यदि चिकित्सालय उपचार के पश्चात्, उपधारा (4) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को उस कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए चिकित्सकदृष्ट्या अयोग्य घोषित कर दिया जाता है जिसका निर्वहन वह उक्त परीक्षा के लिए स्वयं के प्रस्तुत किए जाने के ठीक पहले किसी खान में कर रहा था और ऐसी अयोग्यता ऐसे प्रस्तुत होने के पूर्व खान में उसके नियोजन के कारण प्रत्यक्षतः हुई मानी जा सकती है तो स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक ऐसे व्यक्ति को खान में ऐसा आनुकल्पिक नियोजक देंगे जिसके लिए वह चिकित्सकदृष्ट्या                  योग्य है :

 परन्तु जहां ऐसा कोई आनुकल्पिक नियोजन तुरन्त उपलब्ध नहीं है, वहां स्वामी, अभिकर्ता और प्रबन्धक द्वारा ऐसे व्यक्ति को इस निमित्त विहित दरों के अनुसार, अवधारित निर्योग्यता भत्ता दिया जाएगा :

परन्तु यह और कि जहां ऐसा व्यक्ति खान के अपने नियोजन को छोड़ने का विनिश्चय करता है, वहां उसे स्वामी, अभिकर्ता और प्रबन्धक द्वारा इस निमित्त विहित दरों के अनुसार अवधारित एकमुश्त रकम निर्योग्यता प्रतिकर के रूप में संदत्त की जाएगी ।

(6) उपधारा (5) के परन्तुक के अधीन दरों का अवधारण, कर्मचारियों की मासिक मजदूरी, निर्योग्यताओं की प्रकृति और अन्य संबद्ध बातों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा ।]

10. अभिप्राप्त जानकारी की गोपनीयता-(1) किसी खान से संबद्ध रजिस्टरों या अन्य अभिलेखों की सब प्रतियों और उनमें के उद्धरणों और अन्य सब जानकारी को, जो मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक द्वारा या उसकी सहायता करने वाले व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम के अधीन किसी खान के निरीक्षण  [या सर्वेक्षण] के अनुक्रम में अर्जित की गई हो, या धारा 8 1[या धारा 9क] के अधीन प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा तद्धीन अपने कर्तव्य के पालन में अर्जित की गई हो, गोपनीय माना जाएगा और जब तक कि मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक उसका प्रकटन उस खान में या उसके पार्श्वस्थ किसी अन्य खान में नियोजित किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य, क्षेम या कल्याण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक न समझे, वह किसी व्यक्ति या प्राधिकारी को प्रकट नहीं की जाएगी ।

(2) उपधारा (1) की कोई भी बात ऐसी किसी जानकारी के ऐसे प्रकटन को (यदि ऐसे प्रकटन की अपेक्षा की गई हो) लागू न होगी जो निम्नलिखित में से किसी को किया जाए-

                (क) कोई न्यायालय ;

                 [(ख) यथास्थिति, धारा 12 या धारा 24 के अधीन गठित या नियुक्त समिति या जांच न्यायालय ;]

                (ग) पदीय वरिष्ठ या संयुक्त खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक ;

                (घ) कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 (1923 का 8) के अधीन नियुक्त कर्मकार प्रतिकर आयुक्त ;

                 [(ङ) भारतीय खान ब्यूरो का नियंत्रक ;

(च) कोई रजिस्ट्रीकृत या मान्यताप्राप्त व्यवसाय संघ ;

(छ) ऐसा अन्य अधिकारी, प्राधिकारी या संगठन जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए ।]

(3) यदि मुख्य निरीक्षक, या उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई अन्य व्यक्ति, पूर्वोक्त जैसी किसी जानकारी को केन्द्रीय सरकार की सम्मति के बिना इस धारा के उपबन्धों के प्रतिकूल प्रकट करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

(4) कोई भी न्यायालय इस धारा के अधीन के किसी अपराध के विचारण के लिए कार्यवाही केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से करने के सिवाय नहीं केरगा ।

11. प्रमाणकर्ता सर्जन-(1) केन्द्रीय सरकार अर्हित चिकित्सा-व्यवसायियों को, ऐसी स्थानीय सीमाओं के अन्दर या ऐसी खान या खानों के वर्ग या प्रकार के लिए, जिन्हें वह उन्हें क्रमशः समनुदिष्ट करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्रमाणकर्ता सर्जन नियुक्त कर सकेगी ।

(2) ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जैसी केन्द्रीय सरकार अधिरोपित करना ठीक समझे, प्रमाणकर्ता सर्जन किसी भी अर्हित चिकित्सा व्यवसायी को ऐसी कालावधि के लिए, जो प्रमाणकर्ता सर्जन विनिर्दिष्ट करे, इस अधिनियम के अधीन की अपनी सब शक्तियों का या उनमें से किसी का प्रयोग करने के लिए, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से, प्राधिकृत कर सकेगा और यह समझा जाएगा कि प्रमाणकर्ता सर्जन के प्रति निर्देशों के अन्तर्गत प्राधिकृत किए गए अर्हित चिकित्सा व्यवसायी के प्रति निर्देश आते हैं ।

(3) कोई भी व्यक्ति जो खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक हो, या हो जाए या उसमें चलाई जा रही किसी प्रक्रिया या कारबार में या उससे संसक्त किसी पेटेन्ट या मशीनरी में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः हितबद्ध हो या हो जाए या अन्यथा खान के नियोजन में हो, न तो प्रमाणकर्ता सर्जन नियुक्त किया जाएगा और न प्रमाणकर्ता सर्जन की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत किया जाएगा, और न ऐसे नियोजित या प्राधिकृत किए जाने के पश्चात् ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा ।

(4) प्रमाणकर्ता सर्जन ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा, जो निम्नलिखित के संबंध में विहित किए जाएं :-

 *                                            *                                             *                                             *                             *

(ख) खान में, ऐसी संकटपूर्ण उपजीविकाओं या प्रक्रियाओं या प्रक्रियाओं में, जैसी विहित की जाए, लगे हुए व्यक्तियों की परीक्षा ;

(ग) ऐसा चिकित्सीय परीक्षण, जैसा किसी ऐसी खान या खानों के किसी ऐसे वर्ग या प्रकार के लिए विहित किया जाए, जिसमें-

(i) रुग्णता के ऐसे मामले हुए हों, जिनके बारे में यह विश्वास करना युक्तियुक्त हो कि ये खान में चलाई जाने वाली किसी प्रक्रिया की प्रकृति या खान में काम की अन्य परिस्थितियों के कारण हुए हैं ;

                *                                             *                                             *                                             *                             *

 

अध्याय 3

[समितियां

12. समितियां-(1) केन्द्रीय सरकार ऐसी तारीख से जो वह सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक समिति गठित करेगी जो निम्नलिखित से मिलकर बनेगी :-

(क) मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक से भिन्न, सरकार की सेवा में का एक व्यक्ति जो, अध्यक्ष के रूप से कार्य करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाए ;

(ख) खानों का मुख्य निरीक्षक ;

(ग) खनकों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए दो व्यक्ति जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएं ;

(घ) खानों के स्वामियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए दो व्यक्ति जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त                   किए जाएं ;

(ङ) दो अर्हित खनन इंजीनियर जो सीधे खनन उद्योग में नियोजित नहीं हैं और जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएं :

परन्तु खंड (ग) के अधीन नियुक्त किए गए व्यक्तियों में से कम से कम एक कोयला खानों में के कर्मकारों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए और खंड (घ) के अधीन नियुक्त व्यक्तियों में से कम से कम एक कोयला खानों के स्वामियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए होगा ।

(2) उपधारा (1) की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केन्द्रीय सरकार उन राज्यक्षेत्रों के, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, किसी भाग या किसी खान या खानों के समूह से सम्बन्धित विनिर्दिष्ट विषयों के सम्बन्ध में, कार्रवाई करने के लिए एक या अधिक समितियों का गठन कर सकेगी और उनके सदस्यों की नियुक्ति कर सकेगी और उपधारा (1) के उपबन्धों (उसके परन्तुक को छोड़कर) इस उपधारा के अधीन किसी समिति के गठन के लिए वैसे ही लागू होंगे जैसे वे उस उपधारा के अधीन किसी समिति के गठन के लिए लागू होते हैं ।

(3) समिति का कोई कार्य या कार्यवाही मात्र इस कारण से अविधिमान्य नहीं होगी कि उसके सदस्यों में कोई रिक्ति विद्यमान है या उसके गठन में कोई त्रुटि है ।

13. समिति के कृत्य-(1) धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन गठित समिति-

                (क) इस अधिनियम के अधीन नियम और विनियम बनाने के लिए प्रस्थापनाओं पर विचार करेगी और केन्द्रीय सरकार को समुचित सिफारिशें करेगी ;

(ख) ऐसी दुर्घटनाओं या ऐसे अन्य विषयों की, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, समय-समय पर, उसे निर्दिष्ट किए जाएं, जांच करेगी और उन पर रिपोर्ट देगी ; और

(ग) उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए विनियमों, नियमों या उपविधियों के अधीन सूचनाओं या आदेशों के विरुद्ध ऐसी अपीलों या आक्षेपों की, जो इस अधिनियम द्वारा उसे निर्देशित किए जाने के लिए अपेक्षित है या जो विहित किए जाएं, सुनवाई और विनिश्चय करेगी ।

(2) मुख्य निरीक्षक अपने द्वारा किए गए किसी आदेश या जारी की गई किसी सूचना के विरुद्ध किसी अपील या आक्षेप की बाबत समिति की कार्यवाहियों में भाग नहीं लेगा या ऐसी अपील या आक्षेप से संबंधित किसी विषय के संबंध में समिति के सदस्य के रूप में कार्य नहीं करेगा ।

14. समितियों की शक्तियां, आदि-(1) धारा 12 के अधीन गठित समिति इस अधिनियम के अधीन की निरीक्षण की ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगी जिनका प्रयोग करना वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन समझे ।

(2) धारा 12 के अधीन गठित समिति को, अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजनों के लिए वैसी ही शक्तियां होंगी, जो निम्नलिखित विषयों की बाबत किसी वाद का विचारण करते समय, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात् :-

                (क) प्रकटीकरण और निरीक्षण ;

                (ख) किसी व्यक्ति को हाजिर कराना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना ;

                (ग) दस्तावेजों के पेश किए जाने के लिए विवश करना ;

                (घ) ऐसे अन्य विषय जो विहित किए जाएं ।]

15. व्ययों की वसूली-केन्द्रीय सरकार निदेश दे सकेगी कि  [धारा 12 के अधीन गठित समिति] द्वारा संचालित किसी जांच के व्यय संयुक्त खान के स्वामी या अभिकर्ता द्वारा पूर्णतः या भागतः वहन किए जाएंगे, और इस प्रकार संदत्त किए जाने के लिए निर्दिष्ट रकम उस स्थान में, जहां खान स्थित हो या जहां ऐसा स्वामी या अभिकर्ता तत्समय निवास करता हो, अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट से मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक द्वारा आवेदन किए जाने पर, मजिस्ट्रेट की अधिकारिता की सीमाओं के अन्दर की किसी जंगम संपत्ति के, जो ऐसे स्वामी या अभिकर्ता की हो, करस्थम् या विक्रय द्वारा वसूल की जा सकेगी :

परन्तु यह तब जब कि स्वामी या अभिकर्ता ने रकम का संदाय केन्द्रीय सरकार से या खानों के मुख्य निरीक्षक से सूचना की प्राप्ति की तारीख से छह सप्ताह के अन्दर न किया हो ।

अध्याय 4

खनन संक्रियाएं और खानों का प्रबन्ध

16. खनन संक्रियाओं की सूचना का दिया जाना-(1) खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक किसी खनन संक्रिया के प्रारम्भ किए जाने के पूर्व, मुख्य निरीक्षक की, भारतीय खान ब्यूरो के  [नियंत्रक] को और उस जिले के, जिसमें खान स्थित हो, जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे प्ररूप में और खान संबंधी ऐसी विशिष्टियों को, जैसी विहित की जाएं, अन्तर्विष्ट करने वाली लिखित सूचना देगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन गई कोई सूचना इस प्रकार दी जाएगी कि वह संपृक्त व्यक्तियों के पास किसी खनन संक्रिया के प्रारम्भ किए जाने से कम से कम एक मास पूर्व पहुंच जाए ।

 [17. प्रबन्धक-(1) जैसा अन्यथा विहित किया जाए उसे छोड़कर, हर खान एक प्रबन्धक के अधीन होगी जिसकी विहित अर्हताएं होंगी और हर एक खान का स्वामी या अभिकर्ता ऐसी अर्हताएं रखने वाले व्यक्ति को प्रबन्धक नियुक्त करेगा :

परन्तु स्वामी या अभिकर्ता स्वयं को प्रबन्धक नियुक्त कर सकेगा यदि उसके पास विहित अर्हताएं हैं ।

(2) ऐसे अनुदेशों के अधीन रहते हुए, जो उसे खान के स्वामी या अभिकर्ता द्वारा या उसकी ओर से दिए जाएं, प्रबन्धक खान के सम्पूर्ण प्रबन्ध, नियंत्रण, पर्यवेक्षण और निदेशन के लिए उत्तरदायी होगा और ऐसे सब अनुदेश जब स्वामी या अभिकर्ता द्वारा दिए जाएं तो उनकी तुरंत लिखित रूप में पुष्टि की जाएगी ।

(3) आपात की दशा के सिवाय, खान का स्वामी या अभिकर्ता या उसकी ओर से कोई व्यक्ति, खान में नियोजित किसी व्यक्ति को, जो प्रबन्धक के प्रति उत्तरदायी है, ऐसे अनुदेश, जो उसके कानूनी कर्तव्यों की पूर्ति पर प्रभाव डालते हैं, प्रबंधक के माध्यम से ही  देगा, अन्यथा नहीं ।

18. स्वामियों, अभिकर्ताओं और प्रबन्धकों के कर्तव्य और उत्तरदायित्व-(1) हर खान के स्वामी और अभिकर्ता में से प्रत्येक इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए विनियमों, नियमों, उपविधियों और आदेशों के उपबन्धों के अनुपालन के लिए वित्तीय और अन्य उपबन्ध करने के लिए तथा ऐसी अन्य कार्रवाई करने के लिए, जो आवश्यक हो, उत्तरदायी होगा ।

(2) धारा 58 के खंड (घ), खंड (ङ) और खंड (त) के अधीन बनाए गए नियमों में उपबन्धित विषयों की बाबत उत्तरदायित्व का निर्वहन अनन्यतः खान के स्वामी और अभिकर्ता द्वारा और ऐसे व्यक्ति (जो प्रबन्धक से भिन्न है) जिसे स्वामी या अभिकर्ता पूर्वोक्त उपबन्धों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त करे, किया जाएगा ।

(3) यदि उपधारा (2) के अधीन दिए गए किन्हीं अनुदेशों या धारा 17 की उपधारा (3) के अधीन प्रबन्धक की मार्फत से अन्यथा दिए गए किन्हीं अनुदेशों के क्रियान्वित किए जाने के परिणामस्वरूप, इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाए गए विनियमों, नियमों, उपविधियों या आदेशों के उपबन्धों का उल्लंघन होता है, तो ऐसे अनुदेश देने वाला प्रत्येक व्यक्ति भी सम्पृक्त उपबन्धों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार होगा ।

(4) उपधारा (1), उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, हर खान के स्वामी, अभिकर्ता और प्रबन्धक में से प्रत्येक इस बात के लिए उत्तरदायी होगा कि खान के सम्बन्ध में चलाई जा रही सब संक्रियाएं इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए विनियमों, नियमों, उपविधियों और आदेशों के उपबन्धों के अनुसार चलाई जाएं ।

(5) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए विनियमों, नियमों, उपविधियों या आदेशों के उपबन्धों में से, उन उपबन्धों के सिवाय जो किसी व्यक्ति से कोई कार्य या बात करने की या किसी व्यक्ति को कोई कार्य या बात करने से प्रतिषिद्ध करने की विनिर्दिष्ट रूप से अपेक्षा करते हैं, किसी उपबन्ध का किसी भी व्यक्ति द्वारा कोई उल्लंघन होने की दशा में, उस व्यक्ति के अतिरिक्त जिसने उल्लंघन किया है, निम्नलिखित में से प्रत्येक व्यक्ति भी ऐसे उल्लंघन होने का दोषी माना जाएगा, जब तक कि वह यह साबित नहीं कर देता है कि उसने ऐसे उपबन्धों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी और ऐसे उल्लंघन को रोकने के लिए युक्तियुक्त उपाय किए थे :-

(i) वह या वे पदधारी जिनको उल्लंघन किए गए उपबन्धों की बाबत पर्यवेक्षण के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया गया था ;

(ii) खान का प्रबन्धक ;

(iii) खान का स्वामी और अभिकर्ता ;

(iv) वह व्यक्ति, यदि कोई हो, जो उपधारा (2) के अधीन उत्तरदायित्व का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया        गया है :

परन्तु पूर्वोक्त व्यक्तियों में से किसी के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की जा सकेगी, यदि जांच और अन्वेषण किए जाने पर यह प्रतीत होता है कि वह प्रथमदृष्ट्या जिम्मेदार नहीं है ।

(6) इस धारा के अधीन खान के स्वामी या अभिकर्ता के विरुद्ध की गई किसी कर्रवाई में यह कोई प्रतिवाद नहीं होगा कि प्रबन्धक और अन्य पदधारियों को इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार नियुक्त किया गया है या कि उपधारा (2) के अधीन उत्तरदायित्व को वहन करने के लिए किसी व्यक्ति की नियुक्ति की गई है ।]

अध्याय 5

स्वास्थ्य और क्षेम के विषय में उपबन्ध

                19. पीने का जल- [(1) हर खान में, उसमें नियोजित सब व्यक्तियों के लिए सुविधाजनक रूप से स्थित यथोचित स्थानों पर, ठंडे और स्वास्थ्यप्रद पीने के जल के पर्याप्त प्रदाय का उपबन्ध करने और बनाए रखने के लिए प्रभावी इन्तजाम किया जाएगा :

परन्तु भूमि के नीचे नियोजित व्यक्तियों की दशा में मुख्य निरीक्षक यथोचित स्थानों पर पीने के जल का उपबन्ध किए जाने और बनाए रखे जाने के बदले में ऐसे प्रदाय के लिए कोई अन्य प्रभावी इन्तजाम अनुज्ञात कर सकेगा ।]

(2) ऐसे सब स्थान खान में नियोजित व्यक्तियों की बहुसंख्या द्वारा समझी जाने वाली भाषा में पढ़े जाने योग्य अक्षरों में पीने का जल" पद से अंकित किए जाएंगे और ऐसा कोई स्थान किसी धोने के स्थान, मूत्रालय या शौचालय के  [छह मीटर] के अन्दर तब के सिवाय न होगा जबकि इससे कम दूरी मुख्य निरीक्षक द्वारा लिखित रूप में अनुमोदित न कर दी गई हो ।

(3) सब खानों, या खानों की किसी वर्ग या प्रकार के बारे में केन्द्रीय सरकार उपधाराओं (1) और (2) के उपबन्धों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए और पीने के जल के प्रदाय और वितरण की परीक्षा विहित प्राधिकारियों द्वारा की जाने के लिए नियम बना सकेगी ।

20. सफाई-(1) हर खान में विहित प्रकार के शौचालयों और मूत्रालयों का उपबन्ध पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग पर्याप्त संख्या में किया जाएगा जो इस प्रकार स्थित होंगे कि वे खान में नियोजित व्यक्तियों के लिए सब समयों पर सुविधाजनक और पहुंच के अन्दर हों ।

(2) उपधारा (3) के अधीन उपबन्धित सब शौचालय और मूत्रालय पर्याप्त प्रकाशयुक्त और संवातित होंगे और हर समय साफ और स्वच्छता की अवस्था में रखे जाएंगे ।

(3) केन्द्रीय सरकार किसी खान में उपबन्धित किए जाने वाले शौचालयों और मूत्रालयों की संख्या खान में नियोजित पुरुषों और महिलाओं की संख्या के अनुपात में विनिर्दिष्ट कर सकेगी और खानों में स्वच्छता के बारे में ऐसे अन्य मामलों के लिए (जिसके अन्तर्गत खान में नियोजित व्यक्तियों की इस बारे में बाध्यताएं आती हैं) उपबन्ध कर सकेगी जैसे वह इस प्रकार नियोजित व्यक्तियों के स्वास्थ्य के हित में आवश्यक समझे । 

 [21. चिकित्सीय साधन-(1) हर खान में ऐसी अन्तर्वस्तुओं के सज्जित, जैसी विहित की जाएं, प्राथमिक उपचार बक्सों या कबर्डों का उपबन्ध इस प्रकार किया जाएगा और उन्हें इस प्रकार बनाए रखा जाएगा कि काम के सब घण्टों में उन तक आसानी से पहुंच हो सके ।

(2) प्राथमिक उपचार बक्स या कबर्ड या कमरे में विहित अन्तर्वस्तुओं के सिवाय और कुछ भी नहीं रखा जाएगा ।

(3) हर प्राथमिक उपचार बक्स या कबर्ड किसी उत्तरदायित्वपूर्ण व्यक्ति के भारसाधन में रखा जाएगा, जो ऐसे प्राथमिक उपचार में प्रशिक्षित हो, जैसा विहित किया जाए, और जो खान के काम के घंटों में सदा आसानी  से उपलभ्य रहेगा ।

(4) हर खान में उन व्यक्तियों को, जो उस समय जब वे खान में नियोजित हों शारीरिक क्षति से या रोग से ग्रस्त हो जाएं, चिकित्सालयों या औषधालयों तक पहुंचने के लिए ऐसे आसानी से उपयोग्य इन्तजाम किए जाएंगे, जैसे विहित किए जाएं ।

(5) हर खान में, जिसमें डेढ़ सौ से अधिक व्यक्ति नियोजित हों, ऐसे आकार का, ऐसे साज सामान से सज्जित और ऐसे चिकित्सीय और परिचर्या कर्मचारिवृन्द के भारसाधन में, जैसे कि विहित किए जाएं, एक प्राथमिक उपचार कमरा उपबन्धित किया जाएगा, और चालू हालत में रखा जाएगा ।

22. जब कि संकट के ऐसे कारण विद्यमान हों जिनके लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं किया गया है या जब कि व्यक्तियों का नियोजन संकटपूर्ण हो तब निरीक्षक की शक्तियां-(1) यदि किसी ऐसी बात के बारे में जिसके लिए इस अधिनियम द्वारा या या के अधीन कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं किया गया है, मुख्य निरीक्षक को या निरीक्षक को यह प्रतीत हो कि कोई खान या उसका कोई भाग, अथवा खान में की या उससे या उसके नियंत्रण, पर्यवेक्षण, प्रबन्ध या निदेशन से संसक्त कोई बात, वस्तु या पद्धति मानव जीवन या क्षेम के लिए संकटपूर्ण है,  या इतनी त्रुटिपूर्ण है कि उससे यह जोखिम है या उसकी ऐसी प्रवृत्ति है कि किसी व्यक्ति को शारीरिक क्षति हो, तो वह खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक को उसकी लिखित सूचना दे सकेगा, और सूचना में उन विशिष्टियों का कथन करेगा, जिनके बारे में वह खान या उसके भाग को या बात, वस्तु या पद्धति को संकटपूर्ण या त्रुटिपूर्ण समझता हो, और यह अपेक्षा करेगा कि उसे इतने समय के अन्दर और ऐसी रीति से ठीक कर दिया जाए जो वह उस सूचना में विनिर्दिष्ट करे ।

(1क) जहां कि खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक उपधारा (1) के अधीन दी गई सूचना के निबन्धनों का अनुपालन उसमें विनिर्दिष्ट कालावधि के अन्दर करने में असफल रहेगा वहां, यथास्थिति, मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक खान या उसके किसी भाग में या के आसपास किसी ऐसे व्यक्ति का नियोजन लिखित आदेश द्वारा प्रतिषिद्ध कर सकेगा जिसका नियोजन उसकी राय में सूचना के निबन्धनों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए युक्तियुक्ततः आवश्यक न हो ।

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह है कि, यथास्थिति, मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक, खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक को संबोधित लिखित आदेश द्वारा किसी खान या उसके किसी भाग में से स्तंभों या खनिज-खण्डों का निकाला जाना या छांटा जाना प्रतिषिद्ध कर सकेगा, यदि उसकी राय में ऐसी संक्रिया से स्तंभों, या खनिज-खण्डों का बैठ जाना या खनिजों के किसी भाग का समय पूर्व ढह जाना संभाव्य हो या उससे खान का या उसमें नियोजित व्यक्तियों के जीवन या क्षेम का अन्यथा संकटापन्न हो जाना संभाव्य हो, या यदि उसकी राय में खान के जिस भाग में ऐसी संक्रिया अनुध्यात हो उसमें आग लगने या जलप्लावन के विरुद्ध यथायोग्य उपबन्ध उसको मुहरबन्द और अलग करने के लिए उपबन्ध करके और जो क्षेत्र आग या जलप्लावन से प्रभावित हो सकता हो उसे परिमित करने के लिए उपबन्ध करके न किया गया हो ।

(3) यदि मुख्य निरीक्षक या उसके द्वारा लिखित रूप में साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत निरीक्षक की यह राय हो कि किसी खान में या उसके किसी भाग में नियोजित किसी व्यक्ति के जीवन या क्षेम को अर्जेन्ट या आसन्न संकट है, तो वह अपनी राय के कारणों का कथन अन्तर्विष्ट करने वाले लिखित आदेश द्वारा, खान के किसी भाग में या के आसपास किसी ऐसे व्यक्ति का नियोजन, जिसका नियोजन संकट दूर करने के लिए उसकी राय में युक्तियुक्ततः आवश्यक न हो, तब तक के लिए प्रतिषिद्ध कर सकेगा  [जब तक उसका यह समाधान न हो जाए कि वह संकट दूर हो गया है] ।

 [(3क) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिसका नियोजन उपधारा (1क) या उपधारा (3) के अधीन प्रतिषिद्ध है, उस अवधि के लिए जिसके लिए वह यदि प्रतिषेध न होता तो नियोजन में होता, पूर्ण मजदूरी का संदाय पाने का हकदार होगा और स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक उस व्यक्ति को ऐसी पूर्ण मजदूरी के संदाय के लिए जिम्मेदार होगा :

परन्तु स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक ऐसी पूर्ण मजदूरी का संदाय करने के बजाय ऐसे व्यक्ति को उसी मजदूरी पर आनुकल्पिक नियोजन की व्यवस्था कर सकेगा जो ऐसा व्यक्ति उस नियोजन में प्राप्त कर रहा था जिसे प्रतिषिद्ध कर दिया गया था ।]

(4) जहां कि निरीक्षक द्वारा उपधारा (1) के अधीन कोई सूचना दी गई हो, या उसके द्वारा उपधारा (1क), उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन कोई आदेश किया गया हो, वहां खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक, यथास्थिति, सूचना या आदेश की प्राप्ति के पश्चात् दस दिन के अन्दर उसके खिलाफ अपील मुख्य निरीक्षक को कर सकेगा, जो सूचना या आदेश को पुष्ट, उपान्तरित या रद्द                 कर सकेगा ।

(5) उपधारा (1) के अधीन सूचना भेजने वाला या उपधारा (1क) या उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन आदेश करने वाला मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक और उपधारा (4) के अधीन आदेश (जो अपील में किए गए रद्द करने के आदेश से भिन्न हो) करने वाला मुख्य निरीक्षक उसकी रिपोर्ट तत्काल केन्द्रीय सरकार को देगा ।

(6) यदि खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक, मुख्य निरीक्षक द्वारा उपधारा (1) के अधीन भेजी गई सूचना या उपधारा (1क) या उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन मुख्य निरीक्षक द्वारा किए गए आदेश पर आक्षेप करे तो वह, यथास्थिति, आक्षेप अन्तर्विष्ट करने वाली सूचना की या आदेश की प्राप्ति के पश्चात्, या अपील के विनिश्चय की तारीख के पश्चात्, बीस दिन के अन्दर आक्षेप के आधारों का कथन करते हुए, अपना लिखित आक्षेप केन्द्रीय सरकार को भेज सकेगा,  [जो सामान्यतः आक्षेप की प्राप्ति की तारीख से दो मास की अवधि के भीतर उसे एक समिति को निर्देशित कर देगी ।]

(7) उपधारा (1) के अधीन की हर सूचना का या उपधारा (1क), उपधारा (2), उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन के हर आदेश का, जिस पर उपधारा (6) के अधीन आक्षेप किया गया हो, अनुपालन समिति का विनिश्चय खान में प्राप्त होने तक                          किया जाएगा :

परन्तु समिति उपधारा (1) के अधीन की  [सूचना] का प्रवर्तन स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक के आवेदन पर तब तक के लिए निलम्बित कर सकेगी, जब तक आक्षेप पर उसका अपना विनिश्चय न हो जाए ।

(8) इस धारा की कोई भी बात  दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) की धारा 144 के अधीन की मजिस्ट्रेट की शक्तियों पर प्रभाव नहीं डालेगी ।]

 [22क. कुछ दशाओं में नियोजन का प्रतिषेध करने की शक्ति-(1) जहां सुरक्षा से संबंधित किसी बात के बारे में, जिसके लिए इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अभिव्यक्त उपबन्ध किया गया है, खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक ऐसे उपबन्धों का अनुपालन करने में असफल रहता है, वहां मुख्य निरीक्षक यह अपेक्षा करने वाली लिखित सचूना दे सकेगा कि उसका उतने समय के भीतर जो वह सूचना में विनिर्दिष्ट करे, या समय की उतनी बढ़ाई गई अवधि के भीतर, जो वह उसके पश्चात् समय-समय पर, विनिर्दिष्ट करे, अनुपालन किया जाए ।

(2) जहां स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक उपधारा (1) के अधीन दी गई सूचना के निबन्धनों का, यथास्थिति, ऐसी सचूना में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर या उस उपधारा के अधीन विनिर्दिष्ट समय की बढ़ाई गई अवधि के भीतर अनुपालन करने में असफल रहता है वहां मुख्य निरीक्षक खान में या उसके किसी भाग में या उसके आसपास किसी ऐसे व्यक्ति का नियोजन लिखित आदेश द्वारा प्रतिषिद्ध कर सकेगा जिसका नियोजन, उसकी राय में, सूचना के निबन्धनों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए युक्तियुक्त तौर पर आवश्यक न हो ।

(3) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जिसका नियोजन उपधारा (2) के अधीन प्रतिषिद्ध किया जाता है, उस अवधि की पूर्ण मजदूरी का संदाय पाने का हकदार होगा, जिसके लिए वह यदि प्रतिषेध न हुआ होता तो नियोजन में होता, और स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक उस व्यक्ति को ऐसी पूर्ण मजदूरी के संदाय के लिए दायी होगा :

परन्तु स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक, ऐसी पूर्ण मजदूरी देने बजाय, ऐसे व्यक्ति को उसी मजदूरी पर आनुकल्पिक नियोजन दे सकेगा जो ऐसा व्यक्ति उस नियोजन में प्राप्त कर रहा था जो उपधारा (2) के अधीन प्रतिषिद्ध किया गया था ।

(4) धारा 22 की उपधारा (5), उपधारा (6) और उपधारा (7) के उपबन्ध इस धारा की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई किसी सूचना या उपधारा (2) के अधीन किए गए किसी आदेश के सम्बन्ध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस धारा की उपधारा (1) के अधीन सूचना या उपधारा (1क) के अधीन आदेश के संबंध में लागू होते हैं ।]

23. दुर्घटना की सूचना का दिया जाना- [(1) जब किसी खान में या उसके आसपास-

(क) कोई ऐसी दुर्घटना हो जाए जिससे जीवन की हानि या गम्भीर शारीरिक क्षति कारित हुई हो, अथवा

(ख) विस्फोट, ज्वलन, स्वतः तपन या आग लग जाना, या जल या अन्य द्रव-पदार्थ का फूट निकलना या संवेग अन्तर्प्रवेश घटित हो जाए, अथवा

(ग) ज्वलनशील या अपायकर गैसों का अन्तर्वाह घटित हो जाए, अथवा

(घ) जिन रस्सों, जंजीरों या अन्य गियरों से व्यक्ति या सामग्री कूपक या आनति में उतारी या वहां से उठाई जाती है, उनका टूट जाना घटित हो जाए, अथवा

(ङ) किसी कूपक में पिंजर या अन्य प्रवहण-साधन अत्यधिक लपेट तब खा जाए जब व्यक्ति या सामग्री उतारी या उठाई जा रही हो, अथवा

(च) खनित का कोई भाग समय-पर्व ढह जाए, अथवा

(छ) कोई अन्य दुर्घटना, जो विहित की जाए, घटित हो जाए,

तब खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक उस घटना की सूचना ऐसे प्राधिकारी को, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के अन्दर देगा जो विहित किया जाए, और साथ ही साथ वह सूचना की एक प्रति ऐसे स्थान पर, जहां उसका निरीक्षण व्यवसाय संघ के पदधारियों द्वारा किया जा सके, विहित रीति में एक विशेष सूचना पट्टे पर लगाएगा और सुनिश्चित करेगा की वह सूचना ऐसे लगाए जाने की तारीख से कम से कम चौदह दिन तक पट्टे पर लगी रहे ।]

                 [(1क) जब कभी खान में या उसके आसपास कोई ऐसी दुर्घटना हो जाए जिससे किसी व्यक्ति को रिपोर्ट की जाने योग्य कोई क्षति कारित हुई हो, तो खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक ऐसी दुर्घटना को एक रजिस्टर में विहित प्ररूप में प्रविष्ट करेगा और ऐसी प्रविष्टियों की प्रतियां तिमाही में एक बार मुख्य निरीक्षक को दी जाएंगी ।]

                (2) जहां कि उपधारा (1) के अधीन दी गई सूचना ऐसी दुर्घटना के बारे में हो जिससे जीवन की हानि कारित हुई हो, वहां वह प्राधिकारी घटना की जांच सूचना की प्राप्ति के दो मास के अन्दर करेगा, और यदि प्राधिकारी निरीक्षक न हो तो वह निरीक्षक से उक्त कालावधि के अन्दर जांच कराएगा ।

                 [(3) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि उपधारा (1) और उपधारा (1क) में विनिर्दिष्ट दुर्घटनाओं से भिन्न जिन दुर्घटनाओं में ऐसी शारीरिक क्षति कारित होती है जिससे कि क्षतिग्रस्त व्यक्ति की काम से चौबीस घंटों से अधिक की अवधि की मजदूरी के कारण अनुपस्थिति हो जाती है तो वे दुर्घटनाएं विहित प्ररूप में एक रजिस्टर में प्रविष्ट की जाएंगी या, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (1क) के उपबन्धों के अध्यधीन रहेगी ।]

                (4) उपधारा (3) में निर्दिष्ट रजिस्टर में की प्रविष्टियों की एक प्रति खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा  [उस वर्ष से, जिससे वे प्रविष्टियां सम्बद्ध हैं, अगले वर्ष में जनवरी के 20वें दिन या तत्पूर्व] मुख्य निरीक्षक को भेजी जाएंगी ।

                3[(5) जब कभी खान में या उसके आसपास कोई ऐसी दुर्घटना हो जाए जिससे किसी व्यक्ति के जीवन को हानि या उसको गंभीर शारीरिक क्षति कारित हुई हो, तो उस मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक के, जिसको धारा 23 की उपधारा (1) के अधीन दुर्घटना की सूचना का दिया जाना अपेक्षित है, आगमन के पूर्व या उसकी सम्मति के बिना, दुर्घटना स्थल की उलट-पुलट या उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा, जब तक कि ऐसी उलट-पुलट या परिवर्तन आगे किसी दुर्घटना को रोकने के लिए, मृतकों के शवों को हटाने के लिए या किसी व्यक्ति की संकट से रक्षा करने के लिए आवश्यक न हो अथवा जब तक कि दुर्घटना स्थल पर काम के बन्द किए जाने से खान के कार्यकरण में गम्भीर अड़चन न पड़े :

परन्तु जहां मुख्य निरीक्षक या उक्त निरीक्षक दुर्घटना के समय से बहत्तर घंटों के भीतर दुर्घटना का स्थल निरीक्षण करने में असफल रहता है वहां दुर्घटना स्थल पर काम पुनः आरम्भ किया जा सकेगा ।]

24. दुर्घटनाओं के मामलों में जांच-न्यायालय नियुक्त करने की सरकार की शक्ति- [(1) जब कि खान में या उसके आसपास धारा 23 की उपधारा (1) के खंडों में से किसी में निर्दिष्ट प्रकृति की कोई दुर्घटना हो जाए, तब केन्द्रीय सरकार, यदि उसकी यह राय हो कि दुर्घटना के कारणों की और परिस्थितियों की प्ररूपिक जांच होनी चाहिए, ऐसी जांच करने के लिए कोई सक्षम व्यक्ति नियुक्त कर सकेगी, और जांच करने में असेसर के रूप में कार्य करने के लिए विधि का या कोई विशेष ज्ञान रखने वाले एक या अधिक व्यक्तियों को भी नियुक्त कर सकेगी ।]

(2) ऐसी किसी जांच करने के लिए नियुक्त व्यक्ति को साक्षियों को हाजिर कराने और दस्तावेजों और भौतिक पदार्थों  *** को पेश करने के लिए विवश करने के प्रयोजन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन की सिविल न्यायालय की सब शक्तियां प्राप्त होंगी ।

(3) इस धारा के अधीन जांच करने वाला कोई व्यक्ति, इस अधिनियम के अधीन की निरीक्षक की ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा, जिसका प्रयोग करना वह जांच के प्रयोजनों के लिए आवश्यक या समीचीन समझे ।

(4) इस धारा के अधीन जांच करने वाला व्यक्ति दुर्घटना के कारणों और उसकी परिस्थितियों को कथित करने वाली रिपोर्ट किन्हीं ऐसी समुक्तियों को जोड़कर, जिन्हें कि वह या असेसरों में से कोई लिखना आवश्यक समझे, केन्द्रीय सरकार को देगा ।

25. कुछ रोगों की सूचना-(1) जहां कि खान में नियोजित किसी व्यक्ति को कोई  ऐसा रोग लग जाए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा शासकीय राजपत्र में खनन संक्रियाओं से संसक्त रोग के रूप में अधिसूचित किया गया हो, वहां, खान का, यथास्थिति, स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक उसकी सूचना मुख्य निरीक्षक को और ऐसे अन्य प्राधिकारियों को ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के अन्दर भेजेगा, जैसे विहित किए जाएं ।

(2) यदि कोई चिकित्सा-व्यवसायी किसी ऐसे व्यक्ति की देखभाल करे जो किसी खान में नियोजित हो या रहा हो और जो उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित किसी रोग से पीड़ित हो या जिसके बारे में चिकित्सा-व्यवसायी को विश्वास हो कि वह ऐसे रोग से पीड़ित है, तो चिकित्सा-व्यवसायी-

                (क) रोगी का नाम और पता ;

                (ख) वह रोग जिससे रोगी पीड़ित हो या जिससे उसके पीड़ित होने का विश्वास हो ; तथा

                (ग) उस खान का नाम और पता, जिसमें रोगी नियोजित हो या अन्तिम बार नियोजित था,

कथित करने वाली लिखित रिपोर्ट मुख्य निरीक्षक को अविलम्ब भेजेगा ।

                (3) जहां कि उपधारा (2) के अधीन की रिपोर्ट की यह पुष्टि, प्रमाणकर्ता सर्जन के प्रमाणपत्र से या अन्यथा, मुख्य निरीक्षक को समाधानप्रद रूप में हो जाए कि वह व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित रोग से पीड़ित है वहां मुख्य निरीक्षक चिकित्सा-व्यवसायी को उतनी फीस देगा जितनी विहित की जाए और ऐसे संदत्त फीस उस खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक से, जिसमें उस व्यक्ति को रोग लगा हो, भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूलीय होगी ।

                (4) यदि कोई चिकित्सा-व्यवसायी उपधारा (2) के उपबन्धों का अनुपालन करने में असफल रहेगा, तो वह जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

                26. रोग के कारणों के अन्वेषण का निदेश देने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, यदि वह ऐसा करना समीचीन समझे तो, किसी ऐसे मामले की जांच करने के लिए तथा उस पर रिपोर्ट देने को कोई सक्षम व्यक्ति नियुक्त कर सकेगी जिसमें धारा 25 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित कोई रोग, खान में लगा हो या जिसके बारे में संदेह किया जाता हो कि वह खान में लगा है और ऐसी जांच में असेसर के रूप में कार्य करने के लिए विधि का ज्ञान या विशेष ज्ञान रखने वाले एक या अधिक व्यक्तियों को भी नियुक्त                   कर सकेगी ।

                (2) धारा 24 की उपधारा (2) और (3) के उपबंध इस धारा के अधीन की जांच को उसी रीति से लागू होंगे जैसे वे उस धारा के अधीन की किसी जांच को लागू होते हैं ।

27. रिपोर्टों का प्रकाशन-ऐसे समय पर और ऐसी रीति से, जो वह ठीक समझे, केन्द्रीय सरकार समिति द्वारा  [धारा 12] के अधीन भेजी गई किसी रिपोर्ट को या अपने को धारा 26 के अधीन भेजी गई किसी रिपोर्ट या किसी रिपोर्ट के उद्धरणों को, प्रकाशित करा सकेगी, और धारा 24 के अधीन किसी जांच न्यायालय द्वारा भेजी गई हर रिपोर्ट को प्रकाशित कराएगी ।

अध्याय 6

नियोजन के घंटे और उस पर निर्बंधन

28. साप्ताहिक विश्राम-दिन-किसी भी व्यक्ति को खान में किसी एक सप्ताह में छह दिन से अधिक काम नहीं करने दिया जाएगा ।

29. प्रतिकरात्मक विश्राम-दिन-(1) जहां कि धारा 38 के अधीन कार्यवाही के अनुसरण में, अथवा किसी खान को या उसमें नियोजित व्यक्तियों को धारा 28 के उपबन्धों से छूट दिए जाने के फलस्वरूप, कोई व्यक्ति, जो उस खान में नियोजित हो, उन साप्ताहिक विश्राम-दिनों में से किसी से, जिनके लिए धारा 28 में उपबन्ध किया गया है, वंचित किया जाए, वहां उसे उसी मास के अन्दर, जिसमें उसे ऐसे विश्राम-दिन देय थे, या उस मास के अव्यवहित पश्चात् के दो मास के अन्दर, उन विश्राम-दिनों की समान संख्या में, जिनसे वह इस प्रकार वंचित किया गया हो, प्रतिकरात्मक विश्राम-दिन दिए जाएंगे ।

 (2) केन्द्रीय सरकार वह रीति विहित कर सकेगी जिससे वे विश्राम-दिन, जिनके लिए उपधारा (1) में उपबन्ध किया गया है, दिए जाएंगे ।

30. भूमि के ऊपर के काम के घण्टे-(1) किसी सप्ताह में अड़तालीस घण्टे से अधिक या किसी दिन में नौ घण्टे से अधिक काम भूमि के ऊपर नियोजित किसी भी वयस्थ से न तो अपेक्षित किया जाएगा और न उसे करने दिया जाएगा :

 [परन्तु मुख्य निरीक्षक के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन रहते हुए, इस उपधारा में विनिर्दिष्ट दैनिक अधिकतम घण्टों को पारियों में तब्दीली सुकर बनाने के लिए बढ़ाया जा सकेगा ।]

(2) किसी ऐसे वयस्थ के काम की कालावधियां इस प्रकार व्यवस्थित की जाएंगी, कि उसके विश्राम अन्तराल सहित वे किसी भी दिन बारह घण्टे से अधिक विस्तृत न हों और वह कम से कम आधे घण्टे का विश्राम अन्तराल के चुकने के पूर्व निरन्तर पांच घण्टे से अधिक काम न करे :

 [परन्तु मुख्य निरीक्षक, ऐसे कारणों से जो लेखन द्वारा अभिलिखित किए जाएंगे, इस विस्तृति का किसी दिन अधिकतम चौदह घण्टे की कालावधि तक का होना, ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जैसी वह अधिरोपित करना ठीक समझे, अनुज्ञात कर सकेगा ।]

 [(3) दो या अधिक पारियों के व्यक्तियों को एक ही समय भूमि के ऊपर एक ही प्रकार का काम नहीं करने दिया जाएगा :

परन्तु इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए व्यक्तियों के बारे में, केवल इस तथ्य के कारण कि उनके विश्राम अन्तराल उन्हें भिन्न समयों पर मिलते हैं यह न समझा जाएगा कि वे विभिन्न पारियों के हैं ।]

 [31. भूमि के नीचे के काम के घंटे-(1) खान में भूमि के नीचे नियोजित किसी भी वयस्थ को किसी सप्ताह में अड़तालीस घण्टे से अधिक या किसी दिन में आठ घण्टे से अधिक काम नहीं करने दिया जाएगा :

परन्तु मुख्य निरीक्षक के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन रहते हुए, इस उपधारा में विनिर्दिष्ट दैनिक अधिकतम घण्टों को पारियों में तब्दीली सुकर बनाने के लिए बढ़ाया जा सकेगा ।

(2) खान में भूमि के नीचे कोई भी काम ऐसे व्यवस्थित पारी-पद्धति से चलाने के सिवाय न चलाया जाएगा कि हर एक पारी में काम की कालावधि उपधारा (1) में बताए गए दैनिक अधिकतम घंटों से अधिक विस्तृत न हो ।

(3) खान में नियोजित किसी व्यक्ति को भूमि के नीचे के खान के किसी भाग में काम की उन कालावधियों के दौरान उपस्थित रहने देने के सिवाय उपस्थित न रहने दिया जाएगा जो धारा 48 की उपधारा (4) के अधीन रखे जाने वाले रजिस्टर में उसके बारे में दर्शित हों ।]

 [32. रात्रि की पारी-जहां कि खान में नियोजित व्यक्ति ऐसी पारी में काम करे जिसका विस्तार मध्यरात्रि के पश्चात् तक        हो वहां-

(क) धारा 28 और धारा 29 के प्रयोजनों के लिए, उसके मामले में साप्ताहिक विश्राम-दिन से उसकी पारी के अन्त होने पर आरम्भ होने वाली निरन्तर 24 घण्टों की कालावधि अभिप्रेत होगी ;

(ख) उसकी पारी का अन्त होने पर आरम्भ होने वाली चौबीस घण्टों की कालावधि उसके लिए अगला दिन समझी जाएगी और मध्यरात्रि के पश्चात् जितने घण्टे उसने काम किया हो, वे पूर्ववर्ती दिन में गिने जाएंगे ।]

33. अतिकाल के लिए अतिरिक्त मजदूरी- [(1) जहां कि खान में कोई व्यक्ति भूमि के ऊपर किसी दिन नौ घण्टे से अधिक या भूमि के नीचे किसी दिन आठ घण्टे से अधिक काम करे, या चाहे भूमि के ऊपर या नीचे किसी सप्ताह में अड़तालीस घण्टे से अधिक काम करे, वहां ऐसे अतिकालिक काम के लिए वह अपनी मजदूरी की मामूली दर से दुगुनी दर पर मजदूरी पाने का हकदार होगा, और अतिकालिक काम की कालावधि की गणना दैनिक या साप्ताहिक आधार पर, जो भी उसके लिए अधिक अनुकूल हो, की जाएगी ।]

 [(2) जहां खान में नियोजित किसी व्यक्ति को मात्रानुपाती दर से संदाय किया जाना हो वहां, कालानुपाती दर को उन दिनों के, जिनको उसके उस सप्ताह के, जिसमें अतिकाल काम किया गया है, ठीक पूर्ववर्ती सप्ताह के दौरान वास्तव में काम किया था, किसी अतिकाल को छोड़कर, उसके पूर्णकालिक उपार्जनों के दैनिक औसत के बराबर माना जाएगा और ऐसी कालानुपाती दर ऐसे व्यक्ति की मजदूरी की मामूली दर मानी जाएगी :

परन्तु यदि ऐसे व्यक्ति ने पूर्ववर्ती सप्ताह में उसी या समान काम पर कार्य नहीं किया है, तो कालानुपाती दर, अतिकाल को छोड़कर, उन दिनों की जिनको उसने उसी सप्ताह में काम किया है, औसत या किसी पूर्ववर्ती सप्ताह में उसके उपार्जनों की दैनिक औसत, इनमें से जो भी उच्चतर हो, उस पर आधारित होगी ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “मजदूरी की मामूली दर" का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 9क की उपधारा (3) के स्पष्टीकरण में है ।]

(4) इस धारा के उपबन्धों का अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार खान में रखे जाने वाले रजिस्टर विहित कर सकेगी ।

 [34. कतिपय व्यक्तियों के नियोजन का प्रतिषेध-कोई भी व्यक्ति, जो पूर्ववर्ती बारह घन्टे के अन्दर किसी अन्य खान में पहले ही काम करता रहा हो, खान में काम करने के लिए न तो अपेक्षित किया जाएगा, न उसे खान में काम करने दिया जाएगा ।]

 [35. अतिकालिक काम सहित दैनिक काम के घंटों का निर्बन्धन-धारा 39 के खण्ड (क) और खण्ड (ङ) में आने वाले मामलों में के सिवाय, किसी भी दिन अतिकाल सहित, दस घंटे से अधिक खान में काम न तो खान में नियोजित किसी भी व्यक्ति से अपेक्षित किया जाएगा न उसे करने दिया जाएगा ।]

36. काम के घंटों के विषय में सूचनाएं-(1) हर खान का प्रबन्धक खान में काम के प्रारम्भ और बन्द होने का समय और यदि टोली पद्धति द्वारा काम प्रस्थापित हो तो हर एक टोली के काम के प्रारम्भ और बन्द होने का समय कथित करने वाली सूचना, विहित प्ररूप में, खान के कार्यालय के बाहर लगवाएगा ।

(2) उस खान की दशा में, जिसमें खनन संक्रियाएं इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् प्रारंभ हों, उपधारा (1) में निर्दिष्ट सूचना काम के प्रारम्भ होने के कम से कम सात दिन पूर्व लगाई जाएगी ।

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट सूचना में, भूमि के ऊपर नियोजित व्यक्तियों के काम के प्रारम्भ का समय और विश्राम अन्तराल भी कथित होंगे और उसकी एक प्रति मुख्य निरीक्षक को, यदि वह ऐसी अपेक्षा करे तो, भेजी जाएगी ।

(4) जहां कि साधारणतः खान में या किसी टोली के काम के प्रारम्भ या बन्द होने के लिए नियत समय में या भूमि के ऊपर नियोजित व्यक्तियों के लिए नियत विश्राम अन्तरालों में कोई तब्दीली करने की प्रस्थापना हो, वहां विहित प्ररूप में एक संशोधित सूचना उस तब्दीली के किए जाने के सात से अन्यून दिन पूर्व खान के कार्यालय के बाहर लगाई जाएगी और ऐसी सूचना की एक प्रति ऐसी तब्दीली के सात से अन्यून दिन पू्र्व मुख्य निरीक्षक को भेजी जाएगी ।

(5) किसी भी व्यक्ति को उपधारा (1) द्वारा अपेक्षित सूचना के अनुसार काम करने से अन्यथा खान में काम नहीं करने दिया जाएगा ।

37. पर्यवेक्षक कर्मचारिवृन्द-धारा 28, धारा 30, धारा 31, धारा 34 या  [धारा 36 की उपधारा (5)] की कोई भी बात उन व्यक्तियों को लागू न होगी जिनकी बाबत नियम द्वारा यह परिभाषित किया जाए कि वे पर्यवेक्षण या प्रबन्ध का पद धारण किए हुए हैं या गोपनीयता की हैसियत में नियोजित हैं ।

38. नियोजन संबंधी उपबन्धों से छूट-(1) उस आपात की दशा में, जिसमें खान या उसमें नियोजित व्यक्तियों के क्षेम के लिए गम्भीर जोखिम अन्तर्वलित हो, या वास्तविक या आशंकित किसी दुर्घटना की दशा में, या किसी दैवीकृत की दशा में या खान की मशीनरी, संयंत्र या उपस्कर के ठप्प हो जाने के परिणामस्वरूप ऐसी मशीनरी, संयंत्र या उपस्कर पर किए जाने वाले किसी अर्जेन्ट काम की दशा में प्रबन्धक, धारा 22  [या धारा 22क] के उपबन्धों के अध्यधीन और धारा 39 के अधीन के नियमों के अनुसार, व्यक्तियों को धारा 28, धारा 30, धारा 31 या धारा 34 या 1[धारा 36 की उपधारा (5)] के उल्लंघन में ऐसे काम में नियोजन की अनुज्ञा दे सकेगा जो खान या उसमें नियोजित व्यक्तियों के क्षेम का संरक्षण करने के लिए आवश्यक हो :

परन्तु मशीनरी, संयंत्र या उपस्कर पर इस धारा के अधीन किए जाने वाले किसी अर्जेन्ट काम की दशा में, प्रबन्धक इस धारा द्वारा अनुज्ञात कोई कार्रवाई कर सकेगा, यद्यपि उसके किए जाने से  [खनिज] उत्पादन आनुषंगिक रूप से प्रभावित होता हो, किन्तु इस प्रकार की गई कार्रवाई उन सीमाओं के बाहर न की जाएगी जो खान के मामूली कार्यकरण में गम्भीर हस्तक्षेप का परिवर्जन करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक हो ।

(2) हर वह दशा, जिसमें उपधारा (1) के अधीन प्रबन्धक द्वारा कार्रवाई की गई हो तत्सम्बद्ध परिस्थितियों के साथ अभिलिखित की जाएगी और उसकी रिपोर्ट मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक को भी दी जाएगी ।

 [39. छूट देने वाले नियम बनाने की शक्ति- [केन्द्रीय सरकार] निम्नलिखित व्यक्तियों के लिए धारा 28, धारा 30, धारा 31, धारा 34, या धारा 36 की उपधारा (5) के उपबन्धों से ऐसे विस्तार तक, ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जैसी विनिर्दिष्ट की जाए, छूट का उपबन्ध करने वाले नियम बना सकेगी-

(क) ऐसी खान में जिसमें ऐसे आपात की आशंका हो जिसमें खान के या उसमें नियोजित व्यक्तियों के क्षेम की गम्भीर जोखिम अन्तर्वलित हो, नियोजित सब व्यक्ति या उनमें से कोई ;

(ख) किसी वास्तविक या आशंकित दुर्घटना की दशा में, इस प्रकार नियोजित सब व्यक्ति या उनमें से कोई ;

(ग) किसी तैयारी की प्रकृति के या पूरक प्रकृति के ऐसे काम में, जो खान के मामूली कार्यकरण में गम्भीर हस्तक्षेप का परिवर्जन करने के प्रयोजन के लिए अवश्य चलाया जाना चाहिए, लगे हुए सब व्यक्ति या उनमें से कोई ;

(घ) अर्जेन्ट मरम्मतों में लगे हुए सब व्यक्ति या उनमें से कोई ;

(ङ) किसी ऐसे काम में, जो कि तकनीकी कारणों से निरन्तर चालू रखा जाना चाहिए, नियोजित सब व्यक्ति या उनमें से कोई ।]

 [40. अठारह वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों का नियोजन-(1) खान (संशोधन) अधिनियम, 1983 के प्रारम्भ के पश्चात् अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को किसी खान या उसके भाग में काम करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए  भी, शिक्षुओं और अन्य प्रशिक्षुओं को, जो सोलह वर्ष से कम आयु के नहीं हैं, किसी खान या उसके भाग में प्रबन्धक द्वारा समुचित पर्यवेक्षण के अधीन काम करने के लिए अनुज्ञात किया जा सकेगा :

परन्तु शिक्षुओं से भिन्न प्रशिक्षुओं की दशा में, उनको काम करना अनुज्ञात करने से पूर्व मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक का पूर्व अनुमोदन अभिप्राप्त करना आवश्यक होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा और धारा 43 में, “शिक्षु" से शिक्षु अधिनियम, 1961 (1961 का 52) की धारा 2 के खण्ड (क) में यथापरिभाषित शिक्षु अभिप्रेत है ।]

41. [योग्यता प्रमाणपत्र ।]-खान (संशोधन) अधिनियम, 1983 की धारा 23 द्वारा (31-5-1984 से) निरसित ।

42. [कुमारों को अनुदत्त योग्यता प्रमाणपत्रों का प्रभाव ।]-खान (संशोधन) अधिनियम, 1983 (1983 का 42) की धारा 23 द्वारा (31-5-1984 से) निरसित ।

 [43. चिकित्सीय परीक्षा की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) जहां किसी निरीक्षक की यह राय हो कि शिक्षु या अन्य प्रशिक्षु से अन्यथा खान में नियोजित कोई व्यक्ति वयस्थ नहीं है अथवा खान में शिक्षु या अन्य प्रशिक्षु के रूप में नियोजित कोई व्यक्ति या तो सोलह वर्ष से कम आयु का है या वह काम करने के योग्य नहीं रह गया है, वहां निरीक्षक खान के प्रबन्धक पर यह अपेक्षा करने वाली सूचना की तामील कर सकेगा कि ऐसे व्यक्ति की परीक्षा किसी प्रमाणकर्ता सर्जन द्वारा की जाए और निरीक्षक ऐसा निदेश दे तो ऐसा व्यक्ति तब तक किसी खान में काम करने के लिए नियोजित या अनुज्ञात नहीं किया जाएगा जब तक इस प्रकार उसकी परीक्षा न हो गई हो और यह प्रमाणित न कर दिया गया हो कि वह वयस्थ है या यदि ऐसा व्यक्ति शिक्षु या प्रशिक्षु है तो वह सोलह वर्ष से कम आयु का नहीं है और काम करने के योग्य है ।

(2) उपधारा (1) के अधीन निर्देश पर प्रमाणकर्ता सर्जन द्वारा दिया गया हर प्रमाणपत्र उसमें कथित बातों का, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, निश्चायक साक्ष्य होगा ।]

44. [उन कुमारों के लिए काम के घंटे, जो वयस्कों के रूप में काम के लिए योग्य प्रमाणित नहीं किए गए ।]-खान (संशोधन) अधिनियम, 1983 (1984 का 42) की धारा 25 द्वारा (31-5-1984 से) निरसित ।

 [45. खान में अठारह वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों की उपस्थिति का प्रतिषेध-धारा 40 की उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, ऐसी तारीख के पश्चात् जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को भूमि के ऊपर खान के किसी ऐसे भाग में, जहां किसी खनन संक्रिया से संसक्त या आनुषंगिक कोई संक्रिया चलाई जा रही हो, उपस्थित नहीं रहने दिया जाएगा ।]

 [46. स्त्रियों का नियोजन-(1) किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई भी स्त्री-

(क) खान के किसी ऐसे भाग में जो भूमि के नीचे हो ;

(ख) किसी खान में भूमि के ऊपर, 6 बजे पूर्वाह्न और 7 बजे अपराह्न के बीच के सिवाय,

नियोजित नहीं की जाएगी ।]

(2) खान में भूमि के ऊपर नियोजित हर स्त्री को, किसी एक दिन नियोजन का पर्यवसान होने और नियोजन की अगली कालावधि का प्रारम्भ होने के बीच कम से कम ग्यारह घन्टों का अन्तराल दिया जाएगा ।

(3) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार किसी खान या किसी वर्ग या प्रकार की खानों के बारे में भूमि के ऊपर स्त्रियों के नियोजन के घंटों में फेरफार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा कर सकेगी, किन्तु इस प्रकार की किसी स्त्री का 10 बजे अपराह्न और 5 बजे पूर्वाह्न के बीच कोई भी नियोजन तद्द्वारा अनुज्ञात न हो ।]

47. [आयु के बारे में विवाद ।]-खान (संशोधन) अधिनियम, 1959 (1959 का 62) की धारा 28 द्वारा निरसित । 

48. नियोजित व्यक्तियों का रजिस्टर- [(1) हर खान के लिए उस खान में नियोजित सब व्यक्तियों का एक रजिस्टर, विहित प्ररूप और स्थान में रखा जाएगा जिसमें ऐसे हर एक व्यक्ति के बारे में निम्नलिखित बातें दर्शित होंगी-

(क) कर्मचारी का नाम, यथास्थिति, उसके पिता या पति के नाम सहित, और ऐसी अन्य विशिष्टियां, जैसी उसकी पहचान के प्रयोजनों के लिए आवश्यक हों ;

(ख) कर्मचारी की आयु और लिंग ;

(ग) नियोजन की प्रकृति (वह नियोजन भूमि के ऊपर है या भूमि के नीचे, और यदि भूमि के ऊपर है तो वह विवृत्त खनितों में है या अन्यथा) और उसके प्रारम्भ की तारीख ;

 *                                            *                                             *                                             *

(ङ) अन्य ऐसी विशिष्टियां जो विहित की जाएं,

और सुसंगत प्रविष्टियां संपृक्त व्यक्यित के हस्ताक्षर या अंगूठे के चिह्न द्वारा अधिप्रमाणित की जाएगी ।]

                (2) उपधारा (1) द्वारा विहित रजिस्टर में की प्रविष्टियां ऐसी होंगी कि उनके अनुसार काम करने वाले कर्मकार इस अध्याय के उपबन्धों में से किसी के उल्लंघन में काम न करते होंगे ।

                (3) कोई व्यक्ति खान में तब तक नियोजित न किया जाएगा जब तक उसके बारे में उपधारा (1) द्वारा अपेक्षित विशिष्टियां रजिस्टर में अधिलिखित न कर ली गई हों और कोई भी व्यक्ति रजिस्टर में अपने बारे में दर्शित काम की कालावधियों के दौरान नियोजित किए जाने के सिवाय नियोजित नहीं किया जाएगा ।

                 [(4) जिस खान को केन्द्रीय सरकार ने साधारण या विशेष आदेश द्वारा किसी विशेष कारण से, जो अभिलिखित किया जाएगा, छूट दी हो उससे भिन्न हर खान के लिए पृथक् रजिस्टर विहित प्ररूप और स्थान में रखे जाएंगे, जिनमें हर व्यक्ति के बारे में जो                   खान में-

(क) भूमि के नीचे ;

(ख) विवृत्त खनितों में भूमि के ऊपर,

(ग) अन्य दशाओं में भूमि के ऊपर,

नियोजित हो, निम्नलिखित बातें दर्शित होंगी-

(i) कर्मचारी का नाम ;

(ii) उसके नियोजन का वर्ग या किस्म ;

(iii) जहां कि काम टोली-पद्धति से चलाया जाता हो वहां, जिस पारी का वह है वह पारी और उस पारी               के घन्टे ।]

(5) भूमि के नीचे नियोजित व्यक्तियों के उपधारा (4) में निर्दिष्ट रजिस्टर में किसी भी क्षण ऐसे हर व्यक्ति का नाम दर्शित होगा जो तब खान में भूमि के नीचे उपस्थित हो ।

 [(6) कोई व्यक्ति किसी विवृत्त खनित या भूमि के नीचे किसी खनित में तब के सिवाय प्रवेश नहीं कर सकेगा, जब कि ऐसा करने के लिए वह प्रबन्धक द्वारा अनुज्ञात किया गया हो अथवा इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन प्राधिकृत हो ।]

अध्याय 7

मजदूरी सहित छुट्टी

 [49. अध्याय का लागू होना-इस अध्याय के उपबन्ध ऐसे प्रवर्तित नहीं होंगे कि उनका किसी ऐसे अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े जिसका कि खान में नियोजित कोई व्यक्ति किसी अन्य विधि के अधीन या किसी अधिनिर्णय, करार या सेवा-संविदा के निबन्धनों के अधीन हकदार हो :

 [परन्तु यदि ऐसा अधिनिर्णय, करार या सेवा-संविदा इस अध्याय में उपबन्धित से दीर्घतर मजदूरी सहित वार्षिक छुट्टी का उपबन्ध करती हो तो छुट्टी की वह मात्रा जिसके लिए नियोजित व्यक्ति हकदार होगा, ऐसे अधिनिर्णय, करार या सेवा-संविदा के अनुसार होगी, किन्तु छुट्टी ऐसे विषयों की बाबत जो ऐसे अधिनिर्णय, करार या सेवा-संविदा में उपबन्धित नहीं है, धारा 50 से लेकर धारा 56 तक के (जिसमें ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं) उपबन्धों के अनुसार विनियमित होगी ।]

50. छुट्टी की परिभाषा-साप्ताहिक विश्राम-दिन अथवा उत्सवों के लिए या अन्य ऐसे ही अवसरों के लिए अवकाश-दिन इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए छुट्टी के अन्तर्गत नहीं आते हैं, चाहे वे छुट्टी की कालावधि के दौरान हों या उसके ठीक पहले या ठीक                  पीछे हों ।

51. कलेन्डर वर्ष की परिभाषा-इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए “कलेन्डर वर्ष" से किसी वर्ष में जनवरी के प्रथम दिन से आरम्भ होने वाली बारह मास की कालावधि अभिप्रेत होगी ।

52. मजदूरी सहित वार्षिक छुट्टी-(1) खान में नियोजित हर व्यक्ति को, जिसने उसमें एक कलेन्डर वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो, पश्चात्वर्ती कलेन्डर वर्ष के दौरान मजदूरी सहित छुट्टी अनुज्ञात की जाएगी, जिसकी गणना-

(क) भूमि के नीचे नियोजित व्यक्ति की दशा में उसके द्वारा किए गए काम के हर  [पन्द्रह दिनट के लिए एक दिन की दर से की जाएगी ; तथा

(ख) किसी अन्य दशा में, उसके द्वारा किए गए काम के हर बीस दिन के लिए एक दिन की दर से की जाएगी ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट एक कलेन्डर वर्ष की सेवा-

(क) खान में भूमि के नीचे नियोजित व्यक्ति की दशा में पूरी कर ली गई समझी जाएगी यदि कलेन्डर वर्ष के दौरान खान में उसकी हाजिरियां एक सौ नब्बे से कम न हों ; तथा

(ख) किसी अन्य व्यक्ति की दशा में पूरी कर ली गई समझी जाएगी यदि कलेन्डर वर्ष के दौरान खान में उसकी हाजिरियां दो सौ चालीस से कम न हों ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए यह है कि-

(क) करार या संविदा द्वारा या स्थायी आदेश के अधीन यथा अनुज्ञेय कामबंदी के दिनों को ;

(ख) स्त्री कर्मचारी की दशा में, बारह सप्ताह से अनधिक कितने ही दिन की प्रसूति छुटटी को ; तथा

(ग) उस वर्ष से जिसमें छुट्टी का उपभोग किया जाए पूर्ववर्ती वर्ष में उपार्जित छुट्टी को,

हाजिरी की संगणना के प्रयोजन के लिए ऐसे दिन समझा जाएगा जिनमें कर्मचारी ने खान में काम किया है किन्तु वह इन दिनों के लिए छुट्टी उपार्जित नहीं करेगा ।

(3) जिस व्यक्ति की सेवा जनवरी के प्रथम दिन को प्रारम्भ न होकर अन्यथा आरम्भ होती है, वह-

(क) खान में भूमि के नीचे नियोजित व्यक्ति की दशा में, तब जब कि वह कलेन्डर वर्ष के शेष भाग के दौरान के कुल दिनों के आधों से अन्यून दिनों में हाजिर रहा हो ; तथा

(ख) किसी अन्य दशा में, तब जब कि वह कलेन्डर वर्ष के शेष भाग के दौरान के कुल दिनों के दो-तिहाई से अन्यून दिनों में हाजिर रहा हो,

पश्चात्वर्ती कलेन्डर वर्ष में मजदूरी सहित छुट्टी उस दर से पाने का हकदार होगा, जो उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट है ।

(4) किसी व्यक्ति द्वारा न ली गई वह छुट्टी जिसका वह उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किसी एक कलेन्डर वर्ष में हकदार हो उस छुट्टी में जोड़ दी जाएगी जो कि उत्तरवर्ती कलेन्डर वर्ष के दौरान उस उपधारा के अधीन उसे अनुज्ञेय हो :

परन्तु उन छुट्टी के दिनों की कुल संख्या, जो ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा संचित की जा सकेगी, किसी भी एक समय कुल तीस दिन से अधिक न होगी :

परन्तु यह और भी कि ऐसा वह व्यक्ति जिसने मजदूरी सहित छुट्टी के लिए आवेदन किया हो, किन्तु उसे उपधारा (6) के अनुसार ऐसी छुट्टी न दी गई हो, किसी सीमा के बिना, अनुपभुक्त छुट्टी के अग्रनयन का हकदार होगा ।

(5) ऐसा कोई व्यक्ति उपधारा (1), उपधारा (2) और उपधारा (4) के अधीन उस समय अपने को अनुज्ञेय सारी छुट्टी या उसका कोई भाग लेने के लिए खान के प्रबन्धक से उस दिन से पंद्रह दिन से अन्यून दिन पहले लिखित आवेदन कर सकेगा जिस दिन वह अपनी छुट्टी आरम्भ करना चाहता हो :

परन्तु किसी एक कलेन्डर वर्ष के दौरान तीन बार से अधिक छुट्टी न ली जा सकेगी ।

(6) उपधारा (5) के उपबन्धों के अनुसार ऐसी छुट्टी के लिए किया गया आवेदन तब के सिवाय नामंजूर नहीं किया जाएगा, जब कि छुट्टी अनुदत्त करने के लिए सशक्त प्राधिकारी की यह राय हो कि परिस्थिति की आवश्यकताओं के कारण छुट्टी नामंजूर की जानी चाहिए ।]

(7) यदि खान में नियोजित व्यक्ति अपनी मजदूरी सहित छुट्टी जो उसे शेष हो बीमारी की कालावधि के लिए लेना चाहता हो तो, चाहे उसने छुट्टी के लिए आवेदन उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट समय के अन्दर न भी किया हो तो भी उसे वह छुट्टी अनुदत्त                              की जाएगी ।

(8) यदि खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक खान में नियोजित व्यक्ति के नियोजन का पर्यवसान उस व्यक्ति द्वारा अपनी वह कुल छुटटी ले ली जाने के पूर्व कर दे, जिसका वह अपने नियोजन के पर्यवसान के दिन तक हकदार हो, या यदि उस व्यक्ति ने ऐसी छुट्टी के लिए आवेदन किया हो और ऐसी छुट्टी अनुदत्त न हुई हो और वह व्यक्ति अपना नियोजन, छुट्टी लेने से पूर्व छोड़ दे, तो खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक न ली गई छुट्टी के बारे में धारा 53 के अधीन संदेय रकम उसे संदत्त करेगा और ऐसा संदाय वहां जहां कि व्यक्ति के नियोजन का पर्यवसान स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा किया जाए ऐसे पर्यवसान के पश्चात् के दूसरे कार्य-दिवस के अवसान के पूर्व, और जहां कि व्यक्ति अपना नियोजन स्वयं छोड़ दे वहां अगले वेतन-दिवस को या उसके पूर्व किया जाएगा ।

(9) खान में नियोजित व्यक्ति की अनुपभुक्त छुट्टी उसके नियोजन के पर्यवसान के पूर्व दिए जाने के लिए अपेक्षित किसी सूचना की कालावधि की संगणना करने में विचार में नहीं ली जाएगी ।

 [(10) जहां खान में नियोजित कोई व्यक्ति सेवा से उन्मोचित या पदच्युत किया जाता है अथवा वह अपना नियोजन छोड़ता है या अधिवर्षिता प्राप्त करता है, अथवा सेवा में रहते हुए उसकी मृत्यु हो जाती है, तो, यथास्थिति, वह या उसके वारिस या उसका नाम-निर्देशिती उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दर से परिकलित उसको देय छुट्टी के स्थान पर मजदूरी पाने का हकदार होगा, यदि-

(क) भूमि के नीचे किसी खान में नियोजित व्यक्ति की दशा में, वह अपने नियोजन की तारीख से लेकर अपने उन्मोचन या पदच्युति की तारीख तक या नियोजन छोड़ने या अधिवर्षिता या मृत्यु की तारीख तक, दिनों की कुल संख्या के कम से कम आधे दिनों तक उपस्थिति रहा है ; और

(ख) किसी अन्य दशा में, वह अपने नियोजन की तारीख से लेकर अपने उन्मोचन या पदच्युति या नियोजन छोड़ने या अधिवर्षिता या मृत्यु की तारीख तक, दिनों की कुल संख्या के कम से कम दो-तिहाई दिनों तक उपस्थित रहा है,

और ऐसी मजदूरी का संदाय खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा धारा 53 में विनिर्दिष्ट दर से, जहां उस व्यक्ति को सेवा से उन्मोचित या पदच्युत कर दिया जाता है अथवा वह नियोजन छोड़ देता है या अधिवर्षिता प्राप्त कर लेता है वहां, यथास्थिति, ऐसे उन्मोचन, पदच्युति, नियोजन छोड़ने या अधिवर्षिता के पश्चात् दूसरे कार्य दिन की समाप्ति के पूर्व और जहां नियोजित व्यक्ति की, सेवा में रहते हुए, मृत्यु हो जाती है, वहां उसकी मृत्यु के दो मास की अवधि के भीतर किया जाएगा ।]

                स्पष्टीकरण- [उपधारा (1), उपधारा (3) और उपधारा (10)] के प्रयोजनों के लिए आधे दिन या इससे अधिक की छुट्टी के भिन्न को एक पूरा दिन माना जाएगा और आधे दिन से कम वाला भिन्न छोड़ दिया जाएगा ।

                53. छुट्टी की कालावधि के दौरान मजदूरी-उस छुट्टी के लिए, जो खान में नियोजित व्यक्ति को धारा 52 के अधीन अनुज्ञात हो, उसे संदाय ऐसी दर से किया जाएगा जो उसकी छुट्टी के अव्यवतिह पूर्ववर्ती मास के उन दिनों की बाबत, जिनमें वह नियोजित रहा हो, कुल पूर्णकालिक उपार्जनों के उस दैनिक औसत के बराबर हो जो उन उपार्जनों में से किसी अतिकालिक मजदूरी और बोनस को अपवर्जित करके, किन्तु उनमें मंहगाई भत्ते और नकद प्रतिकर को, जिसके अन्तर्गत खाद्यान्नों और अन्य वस्तुओं के बिना मूल्य वितरण से प्रोदभावी ऐसा कोई प्रतिकर (यदि कोई हो), जिसके हकदार खान में काम करने वाले व्यक्ति तत्समय हों, आता है, सम्मिलित                     करके आए :

                परन्तु यदि ऐसे कोई औसत उपार्जन उपलब्ध न हों, तो औसत की संगणना उसी मास के लिए वैसे ही नियोजित सब व्यक्तियों के कुल पूर्णकालिक उपार्जनों के दैनिक औसत के आधार पर की जाएगी ।

54. कतिपय दशाओं में अग्रिम संदाय-खान में नियोजित उस व्यक्ति को, जिसे चार से अन्यून दिन की छुट्टी अनुज्ञात की गई हो, अनुज्ञात छुट्टी की कालावधि के लिए शोध्य मजदूरी उसकी छुट्टी आरम्भ होने से पहले दे दी जाएगी ।

55. असंदत्त मजदूरी की वसूली का ढंग-खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा इस अध्याय के अधीन संदत्त किए जाने के लिए अपेक्षित, किन्तु उसके द्वारा असंदत्त कोई रकम मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) के उपबन्धों के अधीन विलंबित मजदूरी के रूप में वसूलीय होगी ।

56. खानों को छूट की शक्ति-जहां कि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाए कि किसी खान में नियोजित व्यक्तियों को लागू होने वाले छुट्टी के नियम ऐसी प्रसुविधाओं का उपबन्ध करते हैं, जो उसकी राय में उन प्रसुविधाओं से कम अनुकूल नहीं हैं जिनके लिए यह अध्याय उपबन्ध करता है, वहां वह उस खान को इस अध्याय के सब या किन्हीं उपबन्धों से छूट लिखित आदेश द्वारा और ऐसी शर्तों के अध्यधीन जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, दे सकेगी ।]

अध्याय 8

विनियम, नियम और उपविधियां

57. विनियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित सब प्रयोजनों या उनमें से किसी के लिए ऐसे विनियम  जो इस अधिनियम से संगत हो, शासकीय राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा बना सकेगी, अर्थात् :-

                (क) वे अर्हताएं विहित करना जो मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए अपेक्षित हो ;

                (ख) इस अधिनियम के अधीन खानों के निरीक्षण के सम्बन्ध में मुख्य निरीक्षक और निरीक्षकों के कर्तव्यों और शक्तियों को विहित और विनियमित करना ;

(ग) खानों के स्वामियों, अभिकर्ताओं और प्रबन्धकों के और उनके अधीन कार्य करने वाले व्यक्तियों के कर्तव्य विहित करना और खानों के  [अभिकर्ताओं और प्रबन्धकों और उनके अधीन कार्य करने वाले व्यक्तियों की अर्हताएं (जिसके अन्तर्गत आयु आती है)] विहित करना ;

(घ) खानों के प्रबन्धकों और उनके अधीन कार्य करने वाले अन्य व्यक्तियों को अपने कर्तव्यों का पालन दक्षतापूर्वक करने के लिए समर्थ बनाने के लिए सुविधाएं उपबन्धित की जाने की अपेक्षा करना ;

(ङ) खानों के प्रबन्धकों और उनके अधीन कार्य करने वाले व्यक्तियों की अर्हताएं परीक्षा द्वारा या अन्यथा अभिनिश्चित करने की रीति को और सक्षमता प्रमाणपत्रों के अनुदत्त और नवीकृत किए जाने को विनियमित करना ;

(च) ऐसी परीक्षाओं और ऐसे प्रमाणपत्रों के अनुदान तथा नवीकरण के बारे में दी जाने वाली फीसें, यदि कोई हों, नियत करना ;

(छ) उन परिस्थितियों को जिनमें, और उन शर्तों को जिसके अध्यधीन रहते हुए एक से अधिक खानों का एक ही प्रबन्धक के अधीन रहना या किसी खान या किन्हीं खानों का विहित अर्हताएं न रखने वाले प्रबन्धक के अधीन रहना विधिपूर्ण होगा, अवधारित करना ;

 [(ज) इस अधिनियम के अधीन की जाने वाली जांचों के लिए, जिनके अन्तर्गत इस अधिनियम के अधीन प्रमाणपत्र  धारण करने वाले किसी व्यक्ति के अवचार या अक्षमता से संबद्ध कोई जांच आती है, उपबन्ध करना और ऐसे किसी प्रमाणपत्र के निलम्बन और रद्द किए जाने के लिए उपबन्ध करना और जहां भी आवश्यक हो वहां यह उपबन्ध करना कि जांच करने के लिए नियुक्त किए गए व्यक्ति को साक्षियों को हाजिर कराने और दस्तावेजों और भौतिक पदार्थों को पेश कराने के प्रयोजन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन की सिविल न्यायालय की सब शक्तियां प्राप्त होंगी ;]

(झ) भारतीय विस्फोटक अधिनियम, 1884 (1884 का 4) और तद्धीन बनाए गए किन्हीं नियमों के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए विस्फोटकों का भंडारकरण, प्रवहण और उपयोग विनियमित करना ;

 [(ञ)  *** स्त्रियों का खानों में, या खानों के किसी वर्ग में या ऐसे विशिष्ट प्रकारों के श्रम में, जिनमें ऐसे व्यक्तियों के जीवन, क्षेम या स्वास्थ्य के लिए खतरा रहता है, नियोजन प्रतिषिद्ध, निर्बन्धित या विनियमित करना और ऐसे व्यक्ति द्वारा एक बार में वहन किए जा सकने वाले बोझ के भार को परिसीमित करना ;]

(ट) खान में नियोजित व्यक्तियों के क्षेम, उनमें उनके प्रवेश करने और वहां से उनके निकलने के साधनों के लिए और उन कूपकों या निकासों की संख्या के लिए जो उपबंध किए जाने हैं और कूपकों, गर्तों, निकासों, पथ्याओं और अवतलनों पर बाड़ लगाई जाने के लिए उपबन्ध करना :

(ठ) खान के स्वामी से संदाय पाने वाले और खान के स्वामी या प्रबन्धक के प्रति सीधे उत्तरदायी व्यक्तियों से भिन्न किसी व्यक्ति का खान में प्रबन्धक के रूप में या किसी अन्य विनिर्दिष्ट हैसियत में नियोजन प्रतिषिद्ध करना :

 [(ड) स्तम्भों या खनिज खण्डों के स्थान निश्चित करने, अनुरक्षण और निकाले या छांटे जाने तथा एक खान और दूसरी खान के बीच पर्याप्त रोधों के अनुरक्षण सहित, खानों में सड़कों और काम के स्थलों की सुरक्षा के लिए उपबन्ध करना :

(ढ) खान में खनिजों और मुहबन्द अग्िन-क्षेत्रों का निरीक्षण और सागर के या किसी सरोवर या नदी या किसी अन्य भूपृष्ठीय जलराशि के, चाहे वह प्राकृतिक हो चाहे कृत्रिम, या किसी लोक सड़क या निर्माण के समीप खनितों विषयक निबन्धन और किन्हीं खनितों में पानी भर जाने, या आग लग जाने या उनके समय-पूर्व ढह जाने के विरुद्ध सम्यक् पूर्वावधानी बरती जाने की अपेक्षा करना ;]

(ण) खान के संवातन का और धूल, अग्िन और ज्वलनशील तथा अपायकर गैसों के विषय में की जाने वाली कार्रवाई का, जिसके अन्तर्गत स्वतःदहन भूमि के नीचे की अग्िन और कोयले की धूल के विरुद्ध पूर्वावधानी आती है, उपबन्ध करना ;

 [(त) खानों में विद्युत के जनन, भण्डारकरण, रूपान्तरण, पारेषण और उपयोग की, भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 (1910 का 9) और तद्धीन बनाए गए किन्हीं नियमों के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, विनियमित करना और खानों में के सब विद्युत उपकरणों, विद्युत तारों और उनमें की सब अन्य मशीनरी और संयंत्र की देखभाल और उपयोग के विनियमन के लिए उपबन्ध करना ;]

(थ)  [खानों में मशीनरी का उपयोग विनियमित करना, ऐसी मशीनरी पर या उसके आसपास और कर्षण-मार्गों पर नियोजित व्यक्तियों के क्षेम के लिए उपबन्ध करनाट और भूमि  के नीचे कुछ वर्गों के चलित्रों का प्रयोग निर्बन्धित करना ;

(द) खानों में उचित प्रकाश के लिए उपबन्ध करना और उनमें निरापद और लैम्पों का प्रयोग विनियमित करना और जिस खान में निरापद लैम्प प्रयोग में लाए जाते हों उसमें प्रवेश करने वाले व्यक्तियों की तलाशी लेना ;

(ध) खानों में  [ज्वलनशील गैस या धूल के] विस्फोटकों या ज्वलनों या पानी के फूट निकलने या संचित होने के विरुद्ध और उनसे उद्भूत खतरे के विरुद्ध उपबन्ध करना और ऐसी परिस्थितियों में खनिजों के निकाले जाने का प्रतिषेध, निर्बन्धन या विनियमन करना, जिनसे यह सम्भाव्यता हो कि उसके परिणामस्वरूप खानों में 1[खनित] समय-पूर्व ढह जाएं या यह कि उसके परिणामस्वरूप खानों में 1[खनितों] का ढह जाना या जल का फूट निकलना या ज्वलन घटित होगा या गुरुतर हो जाएगा ;

(न)  [धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (छ) के अधीन दुर्घटनाओं के प्रकार विहित करना और दुर्घटनाओं और खतरनाक घटनाओं की सूचनाओं का और खनिज उत्पाद, नियोजित व्यक्तियों तथा विनियमों द्वारा उपबन्धित अन्य बातों की सूचनाओं, रिपोर्टों और विवरणियों का खानों के स्वामियों, अभिकर्ताओं और प्रबन्धकों द्वारा दिया जाना विहित करनाट और ऐसी सूचनाओं, विवरणियों और रिपोर्टों के प्ररूप, वे व्यक्ति और प्राधिकारी, जिन्हें वे दी जानी हैं, वे विशिष्टियां जो उनमें अन्तर्विष्ट होनी हैं और वह समय, जिसके अन्दर वे निवेदिन की जानी हैं, विहित करना;

 [(प)  [खानों के स्वामियों, अभिकर्ताओं और प्रबन्धकों से खानों के लिए नियत सीमाएं रखने की अपेक्षा करना, उनसे संसक्त रेखांक और खंडचित्र तथा स्थलीय टिप्पण, जो उनके द्वारा रखे जाने हैं, विहित करना] और वह रीति जिससे और वे स्थान जिनमें ऐसे रेखांक, खण्डचित्र और स्थलीय टिप्पण अभिलेख के प्रयोजन के लिए रखे जाने हैं, विहित करना और उनकी प्रतियों का मुख्य निरीक्षक को निवेदित किया जाना; और उनसे यह अपेक्षा करना कि वे नए सर्वेक्षण करें और नए रेखांक बनाएं, और अननुपालन की दशा में, किसी अन्य अभिकरण के माध्यम से सर्वेक्षण कराना और रेखांक तैयार कराना और उनके व्ययों की वसूली उसी रीति से करना, जिससे भू-राजस्व की बकाया होती है ;]

(फ)  [स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के प्रयोजन के लिएट खानों में या उनके आसपास दुर्घटनाओं या आकस्मिक विस्फोटों या ज्वलनों के घटित होने पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया विनियमित करना ;

(ब) खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा धारा 16 के अधीन दी जाने वाली सूचना का प्ररूप और उसमें अन्तर्विष्ट होने वाली विशिष्टियां विहित करना ;

(भ) वह सूचना विहित करना जो किसी ऐसे स्थान पर, जो भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) के उपबन्धों के अध्यधीन की किसी रेल के या,  [यथास्थिति, किन्हीं ऐसी लोक सड़कों या अन्य संकर्मों के, जो सरकार द्वारा या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अनुरक्षित हों]  [पैंतालीस मीटर] के अन्दर का हो, खनन संक्रियाएं प्रारम्भ करने या उस तक विस्तारित करने के पूर्व खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा दी जानी हैं ;

(म) किसी खान के बारे में, उस दशा में जबकि खनितों में काम बन्द कर दिया गया हो, सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी या भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) में यथापरिभाषित किसी रेल कम्पनी में निहित सम्पत्ति की क्षति से संरक्षा ;

 [(मम) खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक से यह अपेक्षा करना कि खान के बन्द किए जाने के पूर्व संरक्षा-संकर्म सन्निर्मित करे और अननुपालन की दशा में, ऐसे संकर्म किसी अन्य अभिकरण द्वारा निष्पादित कराना, और ऐसे स्वामी से उनके व्ययों की वसूली उसी रीति से करना जिससे भू-राजस्व की बकाया की होती है ;]

(य) किसी खान या खान के भाग या किसी खदान, आनति, कूपक, गर्त या निकास में, चाहे उसका कार्यकरण हो रहा हो या नहीं, या किसी खतरनाक या प्रतिषिद्ध क्षेत्र, अवतलन, कर्षण, ट्राम लाइन या पथ्या पर, जहां जनता के संरक्षण के लिए बाड़ लगाना आवश्यक हो, बाड़ लगाई जाने की अपेक्षा करना ;

(यय) कोई अन्य बात, जो विहित की जानी है या विहित की जाए ।

58. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार निम्निलिखित सब प्रयोजनों या उनमें से किसी के लिए ऐसे नियम, जो इस अधिनियम से संगत हों, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी, अर्थात् :--

 [(क) समिति के सदस्यों की पदावधि और उनकी सेवा की अन्य शर्तों का तथा रिक्तियां भरने की रीति का उपबन्ध कराना और अपना कारबार चलाने के लिए समिति द्वारा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया विनियमित करना ;

(ख) धारा 23 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट रजिस्टर का प्ररूप विहित करना ;

(ग) धारा 24 के अधीन जांच न्यायालयों की नियुक्ति के लिए उपबन्ध करना, ऐसे न्यायालयों की प्रक्रिया और शक्तियां विनियमित करना, ऐसे न्यायालयों के सदस्यों को यात्रा-भत्तों का संदाय करना और संयुक्त खान के प्रबन्धक, स्वामी या अभिकर्ता से उक्त न्यायलयों के व्ययों की,  [जिनके अन्तर्गत जांच से संसक्त कोई अन्य व्यय आते हैं],  [उसी रीति से जैसे भू-राजस्व की बकाया वसूल की जाती है] वसूली करना ;

2[(गग) खानों में नियोजित व्यक्तियों की ओर से, तकनीकी विशेषज्ञ द्वारा (जो प्रास्थिति में ओवरमैन से कम नहीं है) खानों के निरीक्षण के लिए, उसके लिए दी जाने वाली सुविधाओं के लिए वह आवृति जिस पर और वह रीति जिसमें ऐसे निरीक्षण किए जाएंगे और वह रीति जिसमें ऐसे निरीक्षणों की रिपोर्ट दी जाएंगी, उपबन्ध करना ;]

(घ) जिन खानों में कोई स्त्रियां नियोजित हों या पूर्ववर्ती बारह मास में किसी दिन नियोजित रहीं हों उनमें ऐसी स्त्रियों के छह वर्ष से कम आयु वाले बालकों के उपयोग के लिए आरक्षित किए जाने वाले समुचित कमरे बनाए रखने की अपेक्षा करना और या तो साधारणतः या खान में नियोजित स्त्रियों की संख्या के प्रति विशिष्ट निर्देश से, ऐसे कमरों की संख्या और स्तरमान और उन सुख-सुविधाओं की, जो उनमें उपबन्धित की जानी हैं और उस पर्यवेक्षण की, जो उनमें किया जाना है, प्रकृति और विस्तार विहित करना ;

(ङ) खानों में नियोजित पुरुषों के उपयोग के लिए फुहारयुक्त स्नान स्थान और लॉकर कक्ष, और जिन खानों में स्त्रियां नियोजित हों उनमें स्त्रियों के उपयोग के लिए वैसे ही पृथक् स्थान और कक्ष, गर्तमुखों पर या उनके आसपास बनाए रखे जाने की अपेक्षा करना और या तो साधारणतः या खान में मामूली तौर पर नियोजित पुरुषों और स्त्रियों की संख्या के प्रति विशिष्ट निर्देश से, ऐसे स्थानों और कक्षों की संख्याएं और स्तरमान विहित करना ;

(च) खानों में स्वच्छता का जो स्तरमान बनाए रखना है उसे खानों में उपबन्धित किए जाने वाले शौचालयों और मूत्रालयों का आनुपातिक मान विहित करना और  *** पेय जल के प्रदाय के लिए किया जाने वाला उपबन्ध ;

1[(चच) चिकित्सीय साधित्रों और सुख-सुविधाओं के प्रदाय और बनाए रखे जाने के लिए उपबन्ध करना, और प्राथमिक उपचार बक्सों और कपबोर्डों की अन्तर्वस्तुएं और संख्याएं, प्राथमिक उपचार के काम में प्रशिक्षण, प्राथमिक उपचार कमरों के आकार और उपस्कर और उनके भारसाधक कर्मचारिवृन्द और क्षतिग्रस्त व्यक्तियों को चिकित्सालयों या औषधालयों को प्रवहण करने के लिए इंतजाम विहित करना ;

(चचच) उन व्यक्तियों को जो खानों में पर्यवेक्षण या प्रबन्ध के पदों से भिन्न पदों पर नियोजित हैं या नियोजित किए जाने हैं, व्यावहारिक शिक्षण दिए जाने या प्रशिक्षित किए जाने की अपेक्षा करना और ऐसे शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए स्कीमें विहित करना;]

(छ) खान में मादक पेयों या औषधियों को कब्जे में रखने को या उनके उपभोग को और मत्तता की हालत में किसी व्यक्ति के उनमें प्रवेश या उपस्थिति को प्रतिषिद्ध करना ;

(ज) धारा 36 के अधीन अपेक्षित सूचनाओं के प्ररूप विहित करना और यह अपेक्षा करना कि ऐसी सूचनाएं विनिर्दिष्ट भाषाओं में भी लगाई जाएं ;

(झ) उन व्यक्तियों को परिभाषित करना जिनकी बाबत धारा 37 के प्रयोजन के लिए यह समझा जाएगा कि वे पर्यवेक्षण या प्रबन्ध के पद धारण किए हुए हैं या किसी गोपनीयता की हैसियत में नियोजित हैं ;

(ञ) उन व्यक्तियों या व्यक्तियों के किसी वर्ग का खानों में नियोजन प्रतिषिद्ध करना, जिनकी बाबत किसी अर्हित चिकित्सा-व्यवसायी द्वारा यह प्रमाणित न किया गया हो कि उन्होंने अपना पंद्रहवां वर्ष पूरा कर लिया है और वह रीति और वे परिस्थितियां, जिनमें ऐसे प्रमाणपत्र अनुदत्त और प्रतिसंहृत किए जा सकेंगे, विहित करना ;

 *                                            *                                             *                                             *                        *

1[(टट) खानों में नियोजित या नियोजन चाहने वाले व्यक्तियों से यह अपेक्षा करना कि वे अपने को चिकित्सीय परीक्षा के लिए प्रस्तुत करें और खान में किसी व्यक्ति का नियोजन किए जाने का आत्यंतिक प्रतिषेध या किसी विशिष्ट हैसियत में या विशिष्ट काम में किए जाने का प्रतिषेध चिकित्सीय आधारों पर करना ;]

 [(ठ) धारा 48 द्वारा अपेक्षित रजिस्टरों के प्ररूप और अध्याय 7 के प्रयोजनों के लिए रजिस्टर रखा जाना और उनके प्ररूप विहित करना ;]

(ड) इस अधिनियम को और विनियमों और नियमों की संक्षिप्तियां और वह भाषा जिसमें, संक्षिप्तियां और उपविधियां धारा 61 और 62 में अपेक्षित रूप से लगाई जाएंगी, विहित करना ;

(ढ) यह अपेक्षा करना कि जिन बातों के लिए नियम बनाए गए हैं उनसे संबद्ध सूचनाएं, विवरणियां और रिपोर्टें खानों के स्वामी, अभिकर्ता और प्रबन्धक दें और ऐसी सूचनाओं, विवरणियों और रिपोर्टों के प्ररूप, वे व्यक्ति और प्राधिकारी जिन्हें वे दी जानी हैं, वे विशिष्टियां जो उनमें अन्तर्विष्ट होनी हैं और वे समय जिनके अन्दर वे निवेदित की जानी हैं,              विहित करना ;

(ण) जिन खानों में  *** पचास से अधिक व्यक्ति मामूली तौर पर नियोजित रहते हैं उनमें भोजन करने के लिए यथायोग्य और उपयुक्त ऐसे आश्रयों के, जिनमें पीने के पानी का उपबन्ध भी हो, उपबन्धित किए जाने और बनाए रखे जाने की अपेक्षा करना ;

(त) मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किसी ऐसी खान में, जिसमें दो सौ पचास से अधिक व्यक्ति मामूली तौर पर नियोजित रहते हैं, ऐसे व्यक्तियों के उपयोग के लिए कोई कैंटीन या कैंटीनें उपबन्धित की जाने और बनाए रखी जाने की अपेक्षा करना ;

(थ) हर ऐसी खान में जिसमें पांच सौ या अधिक व्यक्ति मामूली तौर पर नियोजित रहते हैं, इतनी संख्या में कल्याण आफिसर नियोजित किए जाने की अपेक्षा करना, जितनी विनिर्दिष्ट की जाए, और ऐसे कल्याण आफिसरों की अर्हताएं और सेवा के निबन्धन और शर्तें और उनके द्वारा पालनीय कर्तव्य विहित करना ;

 [(द) विनिर्दिष्ट खानों या विनिर्दिष्ट खानों के समूहों के लिए या किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र की सब खानों के लिए बचाव स्टेशनों की स्थापना की जाने की अपेक्षा करना और यह विहित करना कि ऐसे स्टेशन कैसे और किसके द्वारा स्थापित                    किए जाएंगे ;

(ध) बचाव स्टेशनों के प्रबन्ध के लिए उपबन्ध करना ;

(धक) बचाव ब्रिगेडों का गठन करने वाले व्यक्तियों की शारीरिक योग्यता के मानकों और अन्य अर्हताओं के लिए उपबन्ध करना ;

(धख) बचाव ब्रिगेडों का गठन करने वाले व्यक्तियों का निवास-स्थान विहित करना ;]

(न)  *** बचाव स्टेशनों की स्थिति, उपस्कर, नियंत्रण, अनुरक्षण और कृत्य विहित करना ;

 [(प) खंड (द) के अधीन विनिर्दिष्ट खानों में उत्पादित और वहां से प्रेषित कोक और कोयले पर (पच्चीस पैसे प्रति टन से अनधिक दर से) उत्पाद-शुल्क के उद्गहण और संग्रहण के लिए, ऐसी खानों के लिए बचाव स्टेशन निधि का सृजन करने के लिए, भारत की संचित निधि में जमा किए गए ऐसे उपकर के आगमों में से, उन धनराशियों के, जो केन्द्रीय सरकार संसद् द्वारा, विधि द्वारा इस निमित्त सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात् उपबन्धित करे, ऐसी निधि में जमा किए जाने के लिए, उस रीति के लिए जिसमें ऐसी निधि में से धन का उपयोग किया जाएगा, और ऐसी निधि के प्रशासन के लिए                   उपबन्ध करना ;

(फ) बचाव ब्रिगेड़ों के बनाव, प्रशिक्षण, संरचना और कर्तव्यों के लिए  *** ; और साधारणतः खानों में बचाव कार्य के संचालन के लिए उपबन्ध करना  *** ;

 [(फफ) विनिर्दिष्ट खानों या विनिर्दिष्ट खानों के समूह के लिए सुरक्षा समितियों के गठन के लिए या सुरक्षा की अभिवृद्धि करने के लिए किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में सभी खानों के लिए और ऐसी सुरक्षा समितियों की संरचना, उनके गठन और कत्यों की रीति अधिकथित करने के लिए उपबन्ध करना ; तथा]

(ब) साधारणतः किसी ऐसे मामले के लिए उपबन्ध करना जिनके लिए इस अधिनियम या विनियमों द्वारा उपबन्ध न किया गया हो और जिसके लिए उपबन्ध इस अधिनियम को प्रभावी करने के लिए अपेक्षित हो *

59. विनियमों और नियमों का पूर्व प्रकाशन-(1) धारा 57 और 58 द्वारा प्रदत्त विनियम और नियम बनाने की शक्ति इस शर्त के अध्यधीन हैं कि ये विनियम और नियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाए जाएंगे

(2) जो तारीख साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 23 के खंड (3) के अनुसार उस तारीख के रूप में विनिर्दिष्ट की जानी है, जिसके पश्चात् कि बनाए जाने के लिए प्रस्थापित विनियमों या नियमों के प्रारूप पर विचार किया जाएगा, वह उस तारीख से तीन मास से कम की होगी, जिसको प्रस्थापित विनियमों या नियमों का प्रारूप साधारण जानकारी के लिए प्रकाशित किया जाए ।

 

 *                                            *                                             *                                             *

 [(4) कोई भी विनियम या नियम तब तक नहीं बनाया जाएगा जब तक कि उस विनियम या नियम का प्रारूप धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन गठित समिति को निर्देशित न कर दिया गया हो, और जब तक उस समिति को उसके बनाए जाने की समीचीनता और उसके उपबन्धों की उपयुक्तता की बाबत रिपोर्ट देने का युक्तियुक्त अवसर न मिल गया हो ।]

(5) विनियम और नियम शासकीय राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे और ऐसे प्रकाशित किए जाने पर ऐसे प्रभाव रखेंगे मानो वे इस अधिनियम में अधिनिमित हों ।

(6) उपधारा (1), उपधारा (2) और उपधारा (4) के उपबन्ध उस अवसर को लागू न होंगे जिस पर धारा 58 के खंड (घ) या खंड (ङ) में निर्देशित नियम सर्वप्रथम बनाए जाएं ।

 *                                            *                                             *                                             *

60. पूर्व प्रकाशन के बिना विनियम बनाने की शक्ति-यदि केन्द्रीय सरकार का समाधान हो जाए कि आशंकित खतरे का निवारण करने या खतरा पैदा करने की संभाव्यता रखने वाली स्थितियों का शीघ्र उपचार करने के लिए यह आवश्यक है कि ऐसे विनियम बनाने में वह विलम्ब न होने दिया जाए जो ऐसे प्रकाशन और निर्देशन से होगा तो धारा 57  *** के अधीन विनियम, धारा 59 की उपधारा (1), उपधारा (2) और उपधारा  [(4)] में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, पूर्व प्रकाशन और  [धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन गठित समिति] को  *** निर्देशन के बिना बनाए जा सकेंगे :

परन्तु इस प्रकार बनाए गए विनियम  [समिति की जानकारी के लिए भेजे जाएंगे औरट बनाए जाने से  [एक वर्ष] से अधिक के लिए प्रवृत्त नहीं रहेंगे ।

61. उपविधियां-(1) खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक  [उस खान में किसी विशेष मशीनरी के उपयोग या कार्यकरण की किसी विशेष पद्धति को अपनाए जाने के शास्ति करने के लिए] इस अधिनियम या किन्हीं तत्समय प्रवृत्त विनियमों या नियमों से असंगत न होने वाली ऐसी उपविधियों का प्रारूप, जैसी कि ऐसा स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक उस खान में दुर्घटनाओं का निवारण करने के लिए और उसमें नियोजित व्यक्तियों के क्षेम, सुविधा और अनुशासन हेतु उपबन्ध करने के लिए आवश्यक समझे, तैयार कर सकेगा और मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक को निवेदित कर सकेगा और यदि ऐसा करने की उससे अपेक्षा मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक द्वारा की जाए तो तैयार करेगा और निवेदित करेगा ।

(2) यदि ऐसा कोई स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक-

(क) मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक द्वारा ऐसा करने की उससे अपेक्षा की जाने के पश्चात् दो मास के अन्दर उपविधियों का प्रारूप निवेदित करने में असफल रहे, अथवा

(ख) उपविधियों का ऐसा प्रारूप निवेदित करे, जो मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक की राय में पर्याप्त न हो,

तो मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक-

(i) ऐसी उपविधियों का प्रारूप प्रस्थापित कर सकेगा, जो उसे पर्याप्त प्रतीत हों, अथवा

(ii) स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा जो प्रारूप उसे निवेदित किया गया हो, उसमें ऐसे संशोधन प्रस्थापित कर सकेगा, जिनसे उसकी राय में वह पर्याप्त हो जाएगा और ऐसी प्रारूप-उपविधियां या प्रारूप-संशोधन, यथास्थिति, स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक के पास विचार के लिए भेजेगा ।

(3) यदि उस तारीख से जिसको कोई प्रारूप-उपविधियां या प्रारूप-संशोधन मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक ने स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक के पास उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन भेजे हों, दो मास की कालावधि के अन्दर मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक और स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक उपधारा (1) के अधीन बनाई जाने वाली उपविधियों के निबन्धनों के विषय में परस्पर सहमत होने में असमर्थ रहे तो मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक प्रारूप-उपविधियों को परिनिर्धारण के लिए  [धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन गठित समिति को,] निर्देशित करेगा ।

(4) (क) जबकि ऐसी प्ररूप-उपविधियों पर अभिकर्ता या प्रबन्धक और मुख्य निरीक्षक सहमत हो गए हों या जबकि उनके सहमत होने में असमर्थ होने पर वे  [धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन गठित समिति को] द्वारा परिनिर्धारित कर दी गई हों, तब मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक द्वारा प्रारूप-उपविधियों की एक प्रति केन्द्रीय सरकार को अनुमोदनार्थ भेजी जाएगी ।

(ख) केन्द्रीय सरकार प्रारूप-उपविधियों में ऐसा उपांतरण कर सकेगी, जैसा वह ठीक समझे ।

(ग) इससे पूर्व कि केन्द्रीय सरकार प्रारूप-उपविधियों का अनुमोदन, चाहे उपांतरों के सहित या उनके बिना करे, उपविधियां बनाने की प्रस्थापना की और उस स्थान की, जहां प्रारूप-उपविधियों की प्रतियां अभिप्राप्त की जा सकेंगी और उस समय की (जो तीस दिन से कम का न होगा) इसके अन्दर कि प्रभावित व्यक्तियों के द्वारा या उनकी ओर से प्रारूप-उपविधियों के प्रति किया गया कोई आक्षेप केन्द्रीय सरकार को भेजा जाना चाहिए, सूचना ऐसी रीति से, जैसी केन्द्रीय सरकार प्रभावित व्यक्तियों की जानकारी देने के लिए उपयुक्ततम समझे, प्रकाशित की जाएगी ।

(घ) हर आक्षेप लिखित होगा और उसमें-

                (i) आक्षेप के विशिष्ट आधार, तथा

                (ii) चाहे गए लोप, परिवर्धन या उपान्तर,

कथित होंगे ।

(ङ) उन व्यक्तियों के द्वारा या उनकी ओर से, जिनकी बाबत केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत हो कि वे तद्द्वारा प्रभावित व्यक्ति हैं, अपेक्षित समय के अन्दर किए गए आक्षेप पर वह सरकार विचार करेगी और उपविधियों पर या तो उस रूप में, जिसमें वे प्रकाशित की गई थीं, या उनमें ऐसे संशोधन करके, जिन्हें वह ठीक समझे, अनुमोदित कर सकेगी ।

(5) केन्द्रीय सरकार द्वारा इस प्रकार अनुमोदित हो जाने पर उपविधियां इस प्रकार प्रभावी होंगी मानो वे इस अधिनियम में अधिनियमित हों, और खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक, उन उपविधियों की एक प्रति अंग्रेजी में और ऐसी अन्य भाषा या भाषाओं में, जैसी विहित की जाएं, खान में या उसके आसपास किसी ऐसे सहजदृश्य स्थान पर लगवाएगा जहां वे उपविधियां नियोजित व्यक्तियों द्वारा सुविधापूर्वक पढ़ी या देखी जा सकें ; और जितनी बार वे विरूपित हो जाएं, मिट जाएं, या नष्ट हो जाएं, उतनी बार युक्तियुक्त शीघ्रता के साथ उन्हें नए सिरे से लगवाएगा ।

(6) केन्द्रीय सरकार इस प्रकार निर्मित किसी उपविधि को लिखित आदेश द्वारा पूर्णतः या भागतः विखंडित कर सकेगी, और तदुपरि ऐसी उपविधि तद्नुसार प्रभावहीन हो जाएगी ।

 [61क. विनियमों, नियमों और उपविधियों का संसद् के समक्ष रखा जाना-धारा 57 के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम, धारा 58 के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और धारा 61 के अधीन बनाई गई प्रत्येक उपविधि, बनाई जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा या रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्रा में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों में अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम, नियम या उपविधि में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा या होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम, नियम या उपविधि नहीं बनाया या बनायी जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा या हो जाएगी । किन्तु यथास्थिति, विनियमों, नियमों या उपविधियों के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रष्भाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]

62. अधिनियम, विनियमों आदि की संक्षिप्तियां लगवाना-हर खान में या उसके आसपास अंग्रेजी में और ऐसी अन्य भाषा या भाषाओं में, जो विहित की जाएं, अधिनियम की और विनियमों और नियमों की विहित संक्षिप्तियां लगाई रखी जाएंगी ।

अध्याय 9

शास्तियां और प्रक्रिया

                63. बाधा डालना-(1) जो कोई मुख्य निरीक्षक, निरीक्षक या धारा 8 के अधीन प्राधिकृत किसी व्यक्ति के इस अधिनियम के अधीन के उसके अपने कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालेगा या मुख्य निरीक्षक, निरीक्षक या ऐसे व्यक्ति को, किसी खान के सम्बन्ध में इस अधिनियम के द्वारा या अधीन प्राधिकृत कोई प्रवेश, निरीक्षण, परीक्षा या जांच करने के लिए कोई युक्तियुक्त सुविधा देने से इन्कार करेगा या देने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

                (2) जो कोई इस अधिनियम के अनुसरण में रखे गए किन्हीं रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों को मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक की मांग पर पेश करने से इन्कार करेगा अथवा किसी ऐसे निरीक्षण आफिसर के समक्ष, जो इस अधिनियम के अधीन के अपने कर्तव्यों के अनुसरण में कार्य कर रहा है, उपसंजात होने या उसके द्वारा परीक्षा की जाने से किसी व्यक्ति को निवारित करेगा या निवारित करने का प्रयत्न करेगा या कोई ऐसा कार्य करेगा जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि उससे उसका इस प्रकार निवारित होना संभाव्य है वह जुर्माने से, जो तीन सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

                64. अभिलेखों का मिथ्याकरण, आदि-जो कोई-

(क) इस अधिनियम के अधीन अनुदत्त किसी प्रमाणपत्र का या प्रमाणपत्र की किसी कार्यालय प्रति का कूटकरण करेगा, या जानते हुए उसमें मिथ्या कथन करेगा ; अथवा

                                (ख) जानते हुए ऐसे किसी कूटकृत्य या मिथ्या प्रमाणपत्र को असली के रूप में उपयोग में लाएगा ; अथवा

                (ग) कोई मिथ्या घोषणा, कथन या साक्ष्य, यह जानते हुए कि वह मिथ्या है, अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए इस अधिनियम के अधीन प्रमाणपत्र अभिप्राप्त करने या प्रमाणपत्र का नवीकरण कराने या खान में नियोजन अभिप्राप्त करने के प्रयोजनार्थ करेगा या बनाएगा या पेश करेगा या उपयोग में लाएगा ; अथवा

 [(घ) किसी ऐसे रेखांक, खंडचित्र, रजिस्टर या अभिलेख का मिथ्याकरण करेगा जिसका रखा जाना इस अधिनियम के द्वारा या अधीन अपेक्षित हो या ऐसा मिथ्या रेखांक, खंडचित्र, रजिस्टर या अभिलेख, उसे मिथ्या जानते हुए, किसी प्राधिकारी के समक्ष पेश करेगा ; अथवा]

(ङ) कोई ऐसा रेखांक, विवरणी, सूचना, अभिलेख या रिपोर्ट बनाएगा, देगा या परिदत्त करेगा, जिसमें ऐसा कथन, प्रविष्टि या ब्यौरा अन्तर्विष्ट हो जो उसकी सर्वोत्तम जानकारी या विश्वास के अनुसार सही न हो,

वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो  [एक हजार रुपए] तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

                65. मिथ्या योग्यता प्रमाणपत्रों का उपयोग-जो कोई  [धारा 43] के अधीन अन्य व्यक्ति को अनुदत्त किसी प्रमाणपत्र का, उस धारा के अधीन अपने को योग्यता-प्रमाणपत्र के रूप में, जानते हुए, उपयोग करेगा या उपयोग करने का प्रयत्न करेगा या उस धारा के अधीन अपने को योग्यता-प्रमाणपत्र अनुदत्त किए जाने पर जानते हुए अन्य व्यक्ति को उसका उपयोग करने देगा या उपयोग करने का प्रयत्न करने देगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो  [दो सौ] रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

                66. रेखांक आदि देने का लोप-कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के द्वारा या अधीन बनाए जाने या दिए जाने के लिए अपेक्षित कोई रेखांक,  [खंडचित्र], विवरणी, सूचना, रजिस्टर, अभिलेख या रिपोर्ट विहित प्ररूप में या विहित रीति से या विहित समय पर या के भीतर बनाने या देने का लोप किए बिना युक्तियुक्त कारण के, जिसे साबित करने का भार उस पर होगा, करेगा, जुर्माने से, जो  [एक हजार] रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

                67. श्रमिकों के नियोजन विषयक उपबन्धों का उल्लंघन-जो कोई, उसके सिवाय जैसा कि धारा 38 द्वारा अनुज्ञात है, इस अधिनियम के या किसी विनियम, नियम या उपविधि के या तद्धीन किए गए किसी आदेश के किसी ऐसे उपबन्ध का, उल्लंघन करेगा जो खान में या उसके आसपास व्यक्तियों के नियोजन या उनकी उपस्थिति को प्रतिषिद्ध, निर्बन्धित या विनियमित करता हो, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो  [एक हजार] रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से  *** दंडनीय  होगा ।

                 [68. अठारह वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के नियोजन के लिए शास्ति-यदि अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को धारा 40 के उल्लंघन में किसी खान में नियोजित किया जाता है तो ऐसी खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक ऐसे जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।]

                69. प्रबन्धक नियुक्त करने में असफलता-धारा 17 के उपबन्धों के उल्लंघन में जो कोई प्रबन्धक नियुक्त करने में असफल रहेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो  [दो हजार पांच सौ] रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से  *** दण्डनीय होगा ।

               

70. दुर्घटनाओं की सूचना-(1) धारा 23 की उपधारा (1) के उपबन्ध के उल्लंघन में जो कोई किसी दुर्घटना की सूचना देने में या उस सूचना की प्रति उस उपधारा में निर्दिष्ट विशेष सूचनापट्ट पर लगाने में और विनिर्दिष्ट कालावधि के लिए वहां रखने में असफल रहेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्नीय होगा ।

                (2) केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 23 की उपधारा (3) के अधीन दिए गए निदेश के उल्लंघन में जो कोई किसी दुर्घटना को विहित रजिस्टर में अभिलिखित करने में, या उसकी सूचना देने में असफल रहेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, तो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

                71. कतिपय मामलों में स्वामी आदि का मुख्य निरीक्षक को रिपोर्ट देना-जहां कि खान के, यथास्थिति, स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक ने खान में या उसके आसपास नियोजित किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही इस अधिनियम के अधीन के किसी अपराध के बारे में की हो वहां वह न्यायालय के निर्णय या आदेश की तारीख से इक्कीस दिन के अन्दर, उसके परिणाम की रिपोर्ट मुख्य निरीक्षक को देगा ।

                72. खान में नियोजित व्यक्तियों की बाध्यता-खान में नियोजित कोई भी व्यक्ति-

(क) खान में नियोजित व्यक्तियों का स्वास्थ्य, क्षेम या कल्याण सुनिश्चित करने के प्रयोजनार्थ खान में उपबन्धित किसी साधित्र, सुविधा या अन्य चीज में जानबूझकर हस्तक्षेप या उसका जानबूझकर दुरुपयोग न करेगा ;

(ख) जानबूझकर और युक्तियुक्त कारण के बिना कोई ऐसी बात न करेगा जिससे स्वयं उसके या अन्यों के संकटापन्न होने की संभाव्यता हो ;

(ग) खान में नियोजित व्यक्तियों का स्वास्थ्य या क्षेम सुनिश्चित करने के प्रयोजनार्थ उसमें उपबन्धित किसी साधित्र या अन्य चीज को उपयोग में लाने की जानबूझकर उपेक्षा नहीं करेगा ।

                 [72क. कुछ विनियमों के उल्लंघन के लिए विशेष उपबन्ध-जो कोई धारा 57 के खण्ड (घ), खण्ड (झ), खण्ड (ड), खण्ड (ढ), खण्ड (ण), खण्ड (त), खण्ड (द), खण्ड (ध) और खण्ड (प) में विनिर्दिष्ट बातों से संबद्ध किसी विनियम के, या किसी उपविधि के, या तद्धीन किए गए किसी आदेश के किसी उपबन्ध का उल्लंघन करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

72ख. धारा 22 के अधीन आदेशों के उल्लंघन के लिए विशेष उपबन्ध-जो कोई धारा 22 की उपधारा (1क), उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन  [या धारा 22क की उपधारा (2) के अधीन] निकाले गए आदेश के उल्लंघन में खान का कार्यकरण चालू रखेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने से भी, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा :

2[परन्तु न्यायालय के निर्णय में लेखबद्ध किए जाने वाले तत्प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारणों के अभाव में ऐसा जुर्माना, खंड (क) में निर्दिष्ट उल्लंघन की दशा में, तीन हजार रुपए से कम नहीं होगा ।]

72ग. विधि के ऐसे उल्लंघन के लिए जिसके खतरनाक परिणाम होते हैं, विशेष उपबन्ध-(1) जो कोई इस अधिनियम के या किसी विनियम, नियम या उपविधि के या तद्धीन किए गए [धारा 22 की उपधारा (1क) या उपधारा (2) या उपधारा (3)  [या धारा 22क की उपधारा (2)] के अधीन किए गए आदेश से भिन्न] किसी आदेश के किसी उपबन्ध का उल्लंघन करेगा, वह-

(क) यदि ऐसे उल्लंघन के परिणामस्वरूप जीवन की हानि हो तो, कारावास से, जो दो वर्ष तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ; या

(ख) यदि ऐसे उल्लंघन के परिणामस्वरूप गम्भीर शारीरिक क्षति हो तो, कारावास से, जो एक वर्ष तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो तीन हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ; अथवा

(ग) यदि ऐसे उल्लंघन से खान में नियोजित व्यक्तियों को, या खान में या उसके आसपास के अन्य व्यक्तियों को क्षति या खतरा कारित हो तो, कारवास से, जो तीन मास तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा :

6[परन्तु न्यायालय के निर्णय में लेखबद्ध किए जाने वाले तत्प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारणों के अभाव में ऐसा जुर्माना, खण्ड (क) में निर्दिष्ट उल्लंघन की दशा में, तीन हजार रुपए से कम नहीं होगा ।]

(2) जहां कि कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन दोषसिद्ध किए गए जाने पर फिर उसके अधीन दोषसिद्ध किया जाए, वहां वह उपधारा (1) द्वारा उपबन्धित दंड के दुगुने दंड से दण्डनीय होगा ।

(3) इस धारा के अधीन पारित जुर्माने का दंडादेश आरोपित करने वाला अथवा अपील या पुनरीक्षण में या अन्यथा उसकी पुष्टि करने वाला न्यायालय, निर्णय पारित करते समय आदेश दे सकेगा कि वसूल किया गया संपूर्ण जुर्माना या उसका कोई भाग क्षतिग्रस्त व्यक्ति को, या उसकी मृत्यु की दशा में उसके विधिक प्रतिनिधि को, प्रतिकर के रूप में दिया जाए :

परन्तु यदि जुर्माना ऐसे मामले में आरोपित किया जाए, जो अपीलनीय हो तो अपील उपस्थित किए जाने के लिए अनुज्ञात कालावधि के बीत जाने के पहले या यदि अपील उपस्थित की गई हो तो अपील के विनिश्चय से पहले, ऐसा कोई भी संदाय नहीं किया जाएगा ।

73. आदेशों की अवज्ञा के लिए साधारण उपबन्ध-जो कोई इस अधिनियम के या किसी विनियम, नियम या उपविधि के या तद्धीन किए गए किसी आदेश के किसी ऐसे उपबन्ध का उल्लंघन करेगा, जिसके उल्लंघन के लिए एतस्मिनपूर्व कोई शास्ति उपबन्धित नहीं है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।

74. पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् वर्धित शास्ति-यदि कोई व्यक्ति, जो (धाराओं 72ख और 72ग से भिन्न) पूर्वगामी उपबन्धों में से किसी के अधीन दंडनीय किसी अपराध का दोषसिद्ध किया जा चुका हो, पूर्व दोषसिद्धि के दो वर्ष के अन्दर किए गए और उसी उपबन्ध का उल्लंघन अन्तर्वलित करने वाले किसी अपराध के लिए पुनः दोषसिद्ध किया जाए, तो वह हर एक पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि के लिए उस दंड के दुगुने दण्ड से दण्डनीय होगा, जिससे वह ऐसे उपबन्ध के प्रथम उल्लंघन के लिए दंडनीय होता ।]

75. स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक का अभियोजन-इस अधिनियम के अधीन के किसी अपराध के लिए किसी स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक के विरुद्ध कोई भी अभियोजन, मुख्य निरीक्षक की या जिला मजिस्ट्रेट की या मुख्य निरीक्षक के लिखित साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत निरीक्षक की प्रेरणा पर संस्थित किए जाने के सिवाय संस्थित नहीं किया जाएगा :

 [परन्तु मुख्य निरीक्षक या जिला मजिस्ट्रेट या इस प्रकार प्राधिकृत निरीक्षक ऐसा अभियोजन संस्थित करने से पूर्व अपना यह समाधान करेगा कि स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक ऐसे अपराध के किए जाने को रोकने में सभी सम्यक् तत्परता बरतने में असफल रहा था :]

 [परन्तु यह और कि] किसी खान में तकनीकी निदेशन और प्रबन्ध के अनुक्रम में किए गए किसी अपराध के बारे में जिला मजिस्ट्रेट किसी स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक के विरुद्ध कोई अभियोजन मुख्य निरीक्षक के पू्र्व अनुमोदन से संस्थित करने के सिवाय संस्थित नहीं करेगा ।

 [76. कतिपय मामलों में स्वामी का अवधारण-जहां कि खान का स्वामी कोई फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम हो वहां उसके सब भागीदार या सदस्य या उनमें से कोई, अथवा जहां कि खान का स्वामी कम्पनी हो वहां उसके सब निदेशक या उनमें से कोई, अथवा जहां कि खान का स्वामी सरकार या कोई स्थानीय प्राधिकारी हो वहां, यथास्थिति, ऐसी सरकार या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा खान के कामकाज का प्रबन्ध करने के लिए प्राधिकृत सब आफिसर या व्यक्ति या उनमें से कोई ऐसे किसी अपराध के लिए, जिसके लिए खान का स्वामी दंडनीय हो, इस अधिनियम के अधीन अभियोजित और दंडित किया जा सकेगा :

 [परन्तु जहां किसी फर्म, संगम या कम्पनी ने, मुख्य निरीक्षक को लिखित रूप में यह सूचना दे दी है कि उसने-

(क) फर्म की दशा में, उसके किसी भागीदार या प्रबन्धक को ;

(ख) संगम की दशा में, उसके किसी सदस्य या प्रबन्धक को ;

(ग) कम्पनी की दशा में, उसके किसी निदेशक या प्रबन्धक को,

जो प्रत्येक मामले में किसी ऐसे स्थान में जिस पर इस अधिनियम का विस्तार है, निवासी है ; और जो प्रत्येक मामले में या तो वास्तव में ऐसी फर्म, संगम या कम्पनी के प्रबन्ध का भारसाधक है, या उसमें अधिकांश शेयर धारण करता है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए खान के स्वामी के उत्तरदायित्व को ग्रहण करने के लिए, नामनिर्देशित कर दिया है वहां, यथास्थिति, ऐसा भागीदार, सदस्य, निदेशक या प्रबन्धक, जब तक वह ऐसा निवासी बना रहता है और पूर्वोक्त रूप में भारसाधक है या अधिकांश शेयरों को धारण करता है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए खान का स्वामी समझा जाएगा, जब तक कि उसके नामनिर्देशन को रद्द करने वाली या यह कथन करने वाली कोई लिखित सूचना की वह, यथास्थिति, भागीदारी, सदस्य, निदेशक या प्रबन्धक नहीं रहा है, मुख्य निरीक्षक को प्राप्त नहीं हो जाती है ।

स्पष्टीकरण-जहां किसी फर्म, संगम या कम्पनी के विभिन्न स्थापन या शाखाएं हैं अथवा उसके किसी स्थापन या शाखा में विभिन्न एकक हैं, वहां विभिन्न स्थापनों या शाखाओं या एककों के संबंध में इस परन्तुक के अधीन विभिन्न व्यक्तियों को नामनिर्देशित किया जा सकेगा और इस प्रकार नामनिर्देशित व्यक्ति, केवल उस स्थापन, शाखा या एकक के सम्बन्ध में, जिसके सम्बन्ध में उसे नामनिर्देशित किया गया है, खान का स्वामी समझा जाएगा ।]

77. स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक को दायित्व से कतिपय दशाओं में छूट-जहां कि खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक, जो इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त हो, यह अभिकथन करे कि वास्तविक अपराधी अन्य व्यक्ति है वहां वह अपने द्वारा इस निमित्त किए गए परिवाद पर  [और वास्तविक अपराधी का ज्ञात पता देने पर] और अभियोजक को ऐसा करने के अपने आशय की तीन से अन्यून पूर्ण दिन की लिखित सूचना देने पर इस बात का हकदार होगा कि वह अन्य व्यक्ति उस तारीख को, जो मामले की सुनवाई के लिए नियत हो, न्यायालय के समक्ष लाया जाए, और यदि अपराध का किया जाना साबित हो जाने के पश्चात् खान का, यथास्थिति, स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक न्यायालय को समाधान प्रदान करने वाले रूप में साबित कर दे कि-

                (क) इस अधिनियम के सुसंगत उपबन्धों का निष्पादन कराने के लिए उसने सम्यक् तत्पता बरती है, तथा

                (ख) उस अन्य व्यक्ति ने प्रश्नगत अपराध को उसके ज्ञान, सम्मति या मौनानुकूलता के बिना किया है,

तो उक्त अन्य व्यक्ति उस अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाएगा और उसी प्रकार के दण्ड से ऐसे दंडनीय होगा मानो वह खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक हो और, यथास्थिति, स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक दोषमुक्त कर दिया जाएगा :

                परन्तु-

(क) यथास्थिति, खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक की शपथ पर परीक्षा की जा सकेगी, और उसके और किसी अन्य साक्षी के, जिसे वह अपने समर्थन में बुलाए, साक्ष्य की, उस व्यक्ति के द्वारा या की ओर से, जिसकी बाबत वह अभिकथित करता हो कि वह वास्तविक अपराधी है, और अभियोजक द्वारा प्रतिपरीक्षा की जा सकेगी ;

(ख) यदि वह व्यक्ति जिसका वास्तविक अपराधी होना अभिकथित हो, उस तारीख को जो मामले की सुनवाई के लिए नियत हो, न्यायालय के समक्ष सम्यक् तत्परता बरती जाने पर भी न लाया जा सके, तो न्यायालय उसकी सुनवाई समय-समय पर, स्थगित कर देगा, किन्तु इस प्रकार कि ऐसे स्थगनों की कुल कालावधि तीन मास से अधिक न हो, और यदि उक्त कालावधि के अन्त तक भी वह व्यक्ति, जिसका वास्तविक अपराधी होना अभिकथित हो, न्यायालय के समक्ष न लाया जा सके तो न्यायालय, यथास्थिति, स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक के विरुद्ध मामले की सुनवाई के लिए अग्रसर होगा ।

                78. न्यायालय की आदेश करने की शक्ति-(1) जहां कि खान का स्वमी, अभिकर्ता या प्रबन्धक इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाए, वहां न्यायालय उसे कोई दंड अधिनिर्णीत करने के अतिरिक्त, लिखित आदेश द्वारा उससे, आदेश में विनिर्दिष्ट कालावधि के अन्दर (जिसे न्यायालय इस निमित्त किए गए आवेदन पर, समय-समय पर विस्तारित कर सकेगा), ऐसे उपाय करने की अपेक्षा कर सकेगा जो उन बातों का उपचार करने के लिए, जिनके बारे में अपराध किया गया था, ऐसे विनिर्दिष्ट किए जाएं ।

                (2) जहां कि उपधारा (1) के अधीन आदेश दिया जाए, वहां, यथास्थिति, खान का स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक, उस कालावधि या विस्तारित कालावधि के, यदि कोई हो, दौरान अपराध के चालू रहने के विषय में इस अधिनियम के अधीन दंडनीय नहीं होगा, किन्तु यदि न्यायालय के आदेश का पूर्ण अनुपालन ऐसी कालावधि या विस्तारित कालावधि के अवसान पर न हो गया हो, तो यथास्थिति, स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अतिरिक्त अपराध किया है और वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो ऐसे अवसान के पश्चात् हर एक ऐसे दिन के लिए जिसमें कि आदेश का अनुपालन न हुआ हो, एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

                79. अभियोजनों की परिसीमा-कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं करेगा जब तक कि उसका परिवाद-

(i) उस तारीख से, जिसकी बाबत यह अभिकथित हो कि अपराध उस तारीख को किया गया, छह मास के                  अन्दर,  अथवा

(ii) उस तारीख से, जिसको कि अभिकथित अपराध का किया जाना निरीक्षक के ज्ञान में आया, छह मास के                अन्दर, अथवा

 [(ii) किसी ऐसे मामले में, जिसमें अभियुक्त लोक सेवक है या था और तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन अपराध का संज्ञान करने के लिए केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी आवश्यक है, उस तारीख के जिसको ऐसी मंजूरी मुख्य निरीक्षक को प्राप्त होती है, तीन मास के अन्दर, अथवा]

(iii) किसी ऐसे मामले में जिसमें जांच न्यायालय केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 24 के अधीन नियुक्त किया गया हो, उस धारा की उपधारा (4) में विनिर्दिष्ट रिपोर्ट के प्रकाशन की तारीख के पश्चात्  [एक वर्षट के अन्दर,

इनमें से जो भी बाद में हो, न किया गया हो ।

                 [स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-

(क) चालू रहने वाले अपराध की दशा में, परिसीमा की संगणना उस समय के हर क्षण के प्रति निर्देश से की जाएगी जिसके दौरान अपराध चालू रहे ;

(ख) जहां कि कोई कार्य करने के लिए समय इस अधिनियम के अधीन विस्तारित किया गया हो वहां परिसीमा की संगणना उस विस्तारित कालावधि के अवसान से की जाएगी ।]

80. अपराधों का संज्ञान- [महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट] के न्यायालय से अवर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी ऐसे अपराध का, जिसकी बाबत यह अभिकथित हो कि वह खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक द्वारा किया गया है, या किसी ऐसे अपराध का, जो इस अधिनियम द्वारा कारावास से दंडनीय बनाया गया है, विचारण नहीं करेगा ।

80क. [जुर्माने के बारे में विशेष उपबंध ।]-खान (संशोधन) अधिनियम, 1983 (1983 का 42) की धारा 44 द्वारा (31-5-1984 से) निरसित ।

81. कतिपय मामलों में अभियोजन के बजाय खान बोर्ड या समिति को निर्देश-(1) यदि मुख्य निरीक्षक या जिला मजिस्ट्रेट या किसी निरीक्षक की प्रेरणा पर इस अधिनियम के अधीन संस्थित किसी मामले का विचारण करने वाले न्यायालय की यह राय हो कि यह मामला ऐसा है जो, अभियोजन के बजाय,  *** समिति को निर्देशित किया जाना चाहिए, तो वह दांडिक कार्यवाहियों को रोक सकेगा और इस दृष्टि से कि ऐसा निर्देशन किया जाए, उस विषय की रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन रिपोर्ट प्राप्त होने पर केन्द्रीय सरकार मामला 2*** समिति को निर्देशित कर सकेगी या विचारण में अग्रसर होने के लिए न्यायालय को निर्देश दे सकेगी ।

अध्याय 10

प्रकीर्ण

82. इस प्रश्न का विनिश्चय कि क्या खान इस अधिनियम के अधीन है-यदि कोई प्रश्न उठे, कि क्या  [खान का और उसमें का या उसका पार्श्वस्थ कोई उत्खान या खनित या परिसर, जिस पर खनिज या कोक प्राप्त करने, दरेसी करने या विक्रय के लिए तैयार करने की सहायक कोई प्रक्रिया चलाई जा रही है,] इस अधिनियम के अर्थ के अन्दर खान है, तो केन्द्रीय सरकार उस प्रश्न का विनिश्चय कर सकेगी, और केन्द्रीय सरकार के सचिव द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र इस प्रश्न पर निश्चायक होगा ।

83. अधिनियम के प्रवर्तन से छूट देने की शक्ति- [(1)] केन्द्रीय सरकार किसी स्थानीय क्षेत्र या किसी खान को या खानों के किसी समूह या वर्ग को या खान के किसी भाग को या व्यक्तियों के किसी वर्ग को,  [इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए विनियमों, नियमों या उपविधियों के सब उपबन्धों के या उनमें से किसी के] प्रवर्तन से छूट शासकीय राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा या तो अत्यंतिकतः या किन्हीं विनिर्दिष्ट शर्तों के अध्यधीन दे सकेगी :

पंरन्तु किसी स्थनीय क्षेत्र या खान या खानों के समूह या वर्ग को,  [धारा 40 और धारा 45] के उपबन्धों से छूट तब तक नहीं दी जाएगी, जब तक उसे इस अधिनियम के अन्य सब उपबन्धों के प्रवर्तन से भी छूट न दे दी जाए ।]

 [(2) केन्द्रीय सरकार मुख्य निरीक्षक या किसी अन्य प्राधिकारी को साधारण या विशेष आदेश द्वारा, ऐसे निर्बन्धनों के अध्यधीन जिन्हें अधिरोपित करना वह ठीक समझे प्राधिकृत कर सकेगी कि वह किसी खान या उसके किसी भाग को  [विनियमों, नियमों या उपविधियों] के उपबन्धों में से किसी के प्रवर्तन से किन्हीं विनिर्दिष्ट शर्तों के अध्यधीन तब छूट दे दे, जब कि मुख्य निरीक्षक या ऐसे अधिकारी की राय हो कि खान या उसके भाग में परिस्थितियां ऐसी हैं कि उनके कारण ऐसे उपबन्ध का अनुपालन अनावश्यक या अव्यवहार्य हो जाता है ।]

84. आदेशों को परिवर्तित या विखण्डित करने की शक्ति- [(1)] केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन दिया गया कोई आदेश उलट सकेगी या उपान्तरित कर सकेगी ।

 [(2) मुख्य निरीक्षक लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, इस अधिनियम के अधीन या किसी विनियम, नियम या उपविधि के अधीन अपने द्वारा पारित किसी आदेश को उलट सकेगा या उसे उपांतरित कर सकेगा ।

(3) खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कोई आदेश इस धारा के अधीन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि ऐसे स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक को अभ्यावेदन करने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।]

85. सरकार की खानों को अधिनियम का लागू होना-यह अधिनियम सरकार की खानों को  [भी] लागू होगा ।

 [85क. सूचना आदि देने के लिए अपेक्षित व्यक्ति ऐसा करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होंगे-हर व्यक्ति, जो किसी अधिकारी को कोई सूचना या इत्तिला इस अधिनियम के अधीन देने के लिए अपेक्षित है, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 176 के अर्थ के अन्दर ऐसा करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होगा ।]

 [85ख. विवरणियों, सूचनाओं आदि पर हस्ताक्षर करना-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी विनियम, नियम, उपविधि या किसी आदेश के उपबन्धों के सम्बन्ध में किसी खान के स्वामी द्वारा या उसकी ओर से दी जाने के लिए अपेक्षित सभी विवरणियों और सूचनाओं पर या भेजी जाने वाली सूचनाओं पर खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबंधक द्वारा या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसे स्वामी द्वारा मुख्तारनामे द्वारा इस निमित्त शक्ति प्रत्यायोजित की गई है, हस्ताक्षर किए जाएंगे ।

85ग. सुविधाओं और जन सुविधाओं के लिए फीस या प्रभार का वसूल किया जाना-खान में नियोजित किसी व्यक्ति से सुरक्षात्मक प्रबन्धों या दी जाने वाली सुविधाओं या इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन प्रदाय किए जाने वाले किसी उपस्कर या साधित्रों की बाबत कोई फीस या प्रभार वसूल नहीं किया जाएगा ।]

86. 1948 के अधिनियम 63 के कतिपय उपबधों का खानों को लागू होना-केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगी कि कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63), के अध्याय 3 और 4 के उपबन्ध ऐसे अपवादों और निर्बन्धनों के अध्यधीन रहते हुए, जैसे उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, सब खानों और उनकी प्रसीमाओं को लागू होंगे ।

87. सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के लिए परित्राण-कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।

88. [1923 के अधिनियम 4 का निरसन]-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1957 (1957 का 36) की धारा 2 और पहली अनुसूची द्वारा निरसित ।

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