विवाहित स्त्री संपत्ति (विस्तारण) अधिनियम, 1959
(1959 का अधिनियम संख्यांक 61)
[24 दिसम्बर, 1959]
विवाहित स्त्री संपत्ति अधिनियम, 1874 को भारत
के उन भागों पर विस्तारित करने का
जिनमें अभी यह प्रवृत्त नहीं है,
उपबंध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के दसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम विवाहित स्त्री संपत्ति (विस्तारण) अधिनियम, 1959 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. धारा 2 का संशोधन-विवाहित स्त्री संपत्ति अधिनियम, 1874 (1874 का 3) की (जिसे इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम कहा गया है) धारा 2 में, इसका विस्तार उन राज्यक्षेत्रों के सिवाय, जो 1 नवम्बर, 1956 के ठीक पूर्व भाग ख राज्यों में समाविष्ट थे, सम्पूर्ण भारत पर है" वाक्य के स्थान पर इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है" रखा जाएगा ।
3. धारा 6 का संशोधन-मूल अधिनियम की धारा 6 की उपधारा (2) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्: -
(2) धारा 2 में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के उपबंध उसमें निर्दिष्ट किसी ऐसी बीमा पालिसी को लागू होंगे जो: -
(क) किसी हिन्दू, मुस्लिम, सिख या जैन द्वारा -
(i) मद्रास में, 1913 के दिसम्बर के इकतीसवें दिन के पश्चात्, अथवा
(ii) किसी अन्य ऐसे राज्यक्षेत्र में जिस पर इस अधिनियम का विस्तार विवाहित स्त्री संपत्ति (विस्तारण) अधिनियम, 1959 के प्रारंभ के ठीक पूर्व था, 1923 के अप्रैल के प्रथम दिन के पश्चात्, अथवा
(iii) किसी ऐसे राज्यक्षेत्र में जिस पर इस अधिनियम का विस्तार विवाहित स्त्री संपत्ति (विस्तारण) अधिनियम, 1959 के प्रारंभ को और उससे होता है, ऐसे प्रारंभ को या उसके पश्चात्, ली जाती है;
(ख) किसी बौद्ध द्वारा किसी ऐसे राज्यक्षेत्र में जिस पर इस अधिनियम का विस्तार विवाहित स्त्री संपत्ति (विस्तारण) अधिनियम, 1959 के प्रारंभ को या उसके पश्चात् होता है, ली जाती है:
परन्तु इसमें की कोई बात किसी ऐसे अधिकार या दायित्व को प्रभावित नहीं करेगी जो -
(i) किसी ऐसे मामले में, जिसको खंड (क) का उपखंड (i) या उपखंड (ii) लागू होता है, 1923 के अप्रैल के प्रथम दिन के पूर्व, अथवा
(ii) किसी ऐसे मामले में, जिसको खंड (क) का उपखंड (iii) या खंड (ख) लागू होता है, विवाहित स्त्री संपत्ति (विस्तारण) अधिनियम, 1959 के प्रारंभ के पूर्व,
किसी सक्षम न्यायालय द्वारा पारित किसी डिक्री के अधीन प्रोद्भूत या उपगत हुआ है ।" ।
4. 1950 के अधिनियम 30 का संशोधन-संघ राज्यक्षेत्र (विधि) अधिनियम, 1950 की अनुसूची के भाग क में से विवाहित स्त्री संपत्ति अधिनियम, 1874 से संबंधित प्रविष्टि का लोप किया जाएगा ।
5. निरसन और व्यावृत्ति-यदि इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व, ऐसे किसी राज्यक्षेत्र पर जिस पर अब मूल अधिनियम को विस्तारित किया गया है, मूल अधिनियम की कोई तत्स्थानी विधि प्रवृत्त है तो वह विधि, इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, ऐसे प्रारंभ पर निरसित हो जाएगी :
परन्तु वह निरसन -
(क) इस प्रकार निरसित किसी विधि के पूर्व प्रवर्तन पर या तद्धीन सम्यक् रूप से की गई या सहन की गई किसी बात पर,
(ख) इस प्रकार निरसित किसी विधि के अधीन अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व पर,
(ग) इस प्रकार निरसित किसी विधि के विरुद्ध किए गए किसी अपराध की बाबत उपगत किसी शास्ति, समपहरण या दंड पर, या
(घ) यथापूर्वोक्त किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दंड के बारे में किसी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार पर,
प्रभाव नहीं डालेगा और ऐसा कोई अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार इस प्रकार संस्थित किया जा सकेगा, चालू रखा जा सकेगा या प्रवर्तित किया जा सकेगा और ऐसी कोई शास्ति, समपहरण या दंड अधिरोपित किया जा सकेगा मानो यह अधिनियम पारित नहीं किया गया हो :
परन्तु यह और कि ऐसी किसी विधि के अधीन की गई कोई बात या कोई कार्रवाई, पूर्ववर्ती परन्तुक के अधीन रहते हुए, मूल अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी, और वह तदनुसार तब तक प्रवृत्त बनी रहेगी जब तक कि वह मूल अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या कार्रवाई द्वारा अतिष्ठित नहीं कर दी जाती हैं ।
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