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भारी पैकेज चिह्नांकन अधिनियम, 1951 ( Marking Of Heavy Packages Act, 1951 )


 

भारी पैकेज चिह्नांकन अधिनियम, 1951

(1951 का अधिनियम संख्यांक 39)

[25 जून, 1951]

समुद्र द्वारा या अन्तर्देशीय जलमार्गों द्वारा परिवहन किए जाने वाले

भारी पैकेजों पर भार चिह्नांकित करने के सम्बन्ध में,

1929 की मई के तीसवें दिन जिनेवा में किए

गए अन्तरराष्ट्रीय कन्वेंशन को

प्रभावशील करने के लिए

अधिनियम

संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारी पैकेज चिह्नांकन अधिनियम, 1951 है ।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) भारी पैकेज" से ऐसा पैकेज या अन्य वस्तु अभिप्रेत है जिसका भार एक मीटरी टन से कम नहीं है और मीटरी टन एक हजार किलोग्राम या 2204.6 मानक पौण्ड या 26.8 मानक मनों के बराबर है;

(ख) अन्तर्देशीय जलमार्ग" से भारत में कोई नहर, नदी, झील या अन्य नाव्य जल अभिप्रेत है ।

3. भारी पैकेजों पर भार चिह्नांकित करने की बाध्यता-भारत में किसी स्थान से समुद्र या अन्तर्देशीय जलमार्ग द्वारा परिवहन के लिए कोई भारी पैकेज परेषित करने वाला प्रत्येक व्यक्ति उस पर स्पष्ट, स्थायी और सहजदृश्य रूप में पैकेजों का सकल भार चिह्नांकित कराएगा:

                परन्तु इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट दशाओं या परिस्थितियों में जहां सही भार अवधारित करना कठिन है वहां केवल लगभग भार इस प्रकार चिह्नांकित किया जा सकेगा ।

 [4. निरीक्षक-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे व्यक्तियों को जिन्हें वह ठीक समझती है इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी और उनमें से प्रत्येक को, एक या अधिक क्षेत्र, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएंगे अथवा उनमें से दो या अधिक को, एक ही क्षेत्र, जो ऐसे विनिर्दिष्ट किया जाएगा, सौंप सकेगी ।

(2) प्रत्येक निरीक्षक भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।

5. निरीक्षकों की शक्तियां-केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त निरीक्षक-

(क) किसी स्थान या जलयान पर इतने सहायकों के साथ जितने वह आवश्यक समझता है, प्रवेश कर सकेगा और उसका निरीक्षण कर सकेगा तथा वहां पाए गए किन्हीं पैकेजों की परीक्षा कर सकेगा;

(ख) यदि ऐसी परीक्षा की जाने पर कोई भारी पैकेज धारा 3 के उपबंधों के अनुसार चिह्नांकित नहीं किया गया पाया जाता है तो निदेश दे सकेगा कि उस पैकेज का समुद्र या अन्तर्देशीय जलमार्ग द्वारा परिवहन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक उसे उन उपबंधों के अनुसार चिह्नांकित नहीं कर दिया जाता:

                परन्तु पूर्वोक्त रूप में कोई निदेश जारी करने के बजाय निरीक्षक पैकेज को धारा 3 के उपबंधों के अनुसार स्वयं चिह्नांकित करा सकेगा; और ऐसे किसी मामले में ऐसे चिह्नांकन के लिए उसके द्वारा उपगत व्यय पैकेज को परिवहन के लिए परेषित करने वाले व्यक्ति से भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल किए जा सकेंगे ।]

6. शास्तियां-(1) यदि कोई व्यक्ति-

                                (क) धारा 3 के उपबंधों का, या

(ख) निरीक्षक द्वारा धारा 5 के खण्ड (ख) के अधीन दिए गए किसी निदेश का,

उल्लंघन करेगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

(2) यदि कोई व्यक्ति निरीक्षक को इस अधिनियम के अधीन उसकी शक्तियों के प्रयोग में जानबूझकर बाधित करेगा तो वह जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

7. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कम्पनी हो वहां वह कम्पनी तथा प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने के और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात ऐसे किसी व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित होता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति से या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-

(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा

(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

8. अपराधों का संज्ञान-(1) प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के न्यायालय से अवर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।

(2) कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का संज्ञान, उस तारीख के, जिसको अपराध का किया जाना अभिकथित है, छह मास के अन्दर निरीक्षक द्वारा किए गए लिखित परिवाद के बिना नहीं करेगा ।

9. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी ऐसी बात के लिए जो इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई है या की जाने के लिए आशयित है, कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी ।

10. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित के लिए उपबंध करने वाले नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी-

(क) भारी पैकेजों को चिह्नांकित करने की रीति, उन्हें पैक करने की रीति और प्रयुक्त किए जाने वाले आवेष्टक की किस्म के बारे में शर्तें ;

(ख) वे दशाएं या परिस्थितियां, जिनमें भारी पैकेजों के सही भार के बदले में उनका लगभग भार चिह्नांकित किया जा सकेगा;

(ग) कोई अन्य विषय जो नियमों द्वारा उपबंधित किया जाना या किया जा सकता है ।

(2) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, संसद् के सदन के समक्ष, उस समय जब वह सत्र में हो, कुल मिलाकर तीस दिन की अवधि के लिए, जो एक सत्र में या दो क्रमवर्ती सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के, जिसमें वह ऐसे रखा गया हो, या ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई उपान्तर करने के लिए सहमत हो जाएं या दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् यथास्थिति, वह नियम ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई भी प्रभाव न होगा; किन्तु इस प्रकार कि ऐसा कोई उपान्तर या बातिलकरण उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा ।

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