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अफीम और राजस्व विधि (लागू होना विस्तारण) अधिनियम, 1950 ( Opium And Revenue Laws (Extension Of Application) Act, 1950 )


 

अफीम और राजस्व विधि (लागू होना विस्तारण)

अधिनियम, 1950

(1950 का अधिनियम संख्यांक 33)

[18 अप्रैल, 1950]

भारत के कुछ भागों पर अफीम और राजस्व

विधियों के विस्तारण के लिए

उपबंध करने के लिए

अधिनियम

संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अफीम और राजस्व विधि (लागू होना विस्तारण) अधिनियम,                     1950 है ।

2. भारत के कुछ भागों पर अफीम और राजस्व विधियों का विस्तारण-(1) निम्नलिखित अधिनियम, अर्थात् :-

                (i) अफीम अधिनियम, 1857 (1857 का 13) ;

                (ii) अफीम अधिनियम, 1878 (1878 का 1) ;

(iii) राजस्व वसूली अधिनियम, 1890 (1890 का 1) ;

(iv) सरकारी व्यापार कराधान अधिनियम, 1926 (1926 का 2) ;

(v) अनिष्टकर मादक द्रव्य अधिनियम, 1930 (1930 का 2) ;

(vi) टैक्शेसन आन इनकम (इन्वेस्टीगेशन कमीशन) ऐक्ट, 1947 (1947 का 30) ; और

(viii) कर-संदाय (संपत्ति-अंतरण) अधिनियम, 1949 (1949 का 22),

और उनके अधीन बनाए गए ऐसे सभी नियमों और आदेशों का जो भारत के कुछ भागों में इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रवृत्त हैं, जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय शेष भारत पर विस्तार किया जाता है और वे वहां प्रवृत्त रहेंगे ।

                (2) अनुसूची में विनिर्दिष्ट संशोधन उपर्युक्त अधिनियमों में किए जाएंगे ।

                3. आय-कर अन्वेषण से संबंधित राज्य विधियों में उपांतर-यदि इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व जम्मू-कश्मीर से भिन्न किसी भाग ख राज्य में टैक्शेसन आन इनकम (इन्वेस्टीगेशन कमीशन) ऐक्ट, 1947 (1947 का 30) की तत्स्थानी कोई विधि (जिसे इसमें इसके पश्चात् इस धारा में राज्य विधि" के रूप में निर्दिष्ट किया गया है) प्रवृत्त हैं, तो वह विधि निम्नलिखित उपांतरों सहित प्रवृत्त बनी रहेगी, अर्थात् :-

                (क) कृषि आय से भिन्न आय पर कराधान से संबंधित मामलों की बाबत राज्य आयोग को (उसका नाम चाहे जो भी हो) निर्दिष्ट या उसके समक्ष लंबित सभी मामले केन्द्रीय आयोग को निपटारे के लिए अन्तरित हो जाएंगे :

परन्तु केन्द्रीय आयोग इस धारा के उपबन्धों के अधीन किसी मामले में केवल अंतरण के कारण किसी ऐसे साक्षी को, जिसने उस मामले में साक्ष्य दिया है, पुनः बुलाने या पुनः सुनने के लिए आबद्ध नहीं होगा और जिस आयोग ने मामले का अन्वेषण मूलतः किया था, उस आयोग द्वारा पहले ही लेखबद्ध या उसके समक्ष प्रस्तुत की गई साक्ष्य पर कार्रवाई कर सकेगा ;

 [(ख) खण्ड (क) के अधीन केन्द्रीय आयोग को अंतरित मामलों के निपटारे में, उसे वही शक्तियां होंगी और वह उन्हीं शक्तियों का प्रयोग करेगा, जो उसे टैक्शेसन आन इनकम (इन्वेस्टीगेशन कमीशन) ऐक्ट, 1947 (1947 का 30) के अधीन मामलों के अन्वेषण के लिए हैं और जिनका वह प्रयोग करता है और वह उतनी अवधि के लिए कार्य करने का हकदार होगा, जितनी अवधि के लिए उस अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन हकदार है ;

(खख) त्रावणकोर या त्रावणकोर-कोचीन के मुख्य राजस्व प्राधिकारी द्वारा उस राज्य में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए या तात्पर्यित प्रयोग में दिए गए विनिश्चय के बारे में, चाहे वह इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व का हो या पश्चात् का, यह समझा जाएगा कि वह त्रावणकोर टैक्शेसन आन इनकम (इन्वेस्टीगेशन कमीशन) ऐक्ट, 1124 (1124 का त्रावणकोर अधिनियम सं० 14) की धारा 8 की उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए आय-कर अधिकारी द्वारा दिया गया विनिश्चय है ;]

(ग) कृषि आय से भिन्न किसी आय के संबंध में राज्य विधि में, राज्य सरकार या राज्य आयोग के प्रति किसी निर्देश का, चाहे वह शब्द कुछ भी हो, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या केन्द्रीय आयोग के प्रति निर्देश है ;

(घ) केन्द्रीय आयोग की रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत की जाएगी और केन्द्रीय सरकार लिखित आदेश द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि आय-कर, अधिकर या अतिलाभकर से संबंधित उस राज्य में प्रवृत्त विधि या किसी अन्य विधि के अधीन ऐसी कार्यवाहियां, जैसी वह ठीक समझे, उस व्यक्ति के विरुद्ध की जाएंगी, जिसके विषय में कृषि आय से भिन्न उसकी आय की बाबत वह रिपोर्ट है, और ऐसा निदेश दिए जाने पर, उस राज्य में लागू समुचित विधि के अधीन सभी ऐसी कार्यवाहियां इस प्रकार की जा सकेंगी, मानो ऐसे निदेश उसके अधीन दिए गए हों और कार्यवाहियां उसके अधीन संस्थित की गई हों ;

(ङ) जहां राज्य में प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, निर्धारिती की कृषि आय, उसके द्वारा संदेय कर के अवधारण के प्रयोजन के लिए उसकी कुल आय में सम्मिलित की जानी है, वहां कृषि आय से भिन्न उसकी आय के बारे में संदेय कर उस रकम के बराबर होगा जिसका राज्य में प्रवृत्त समुचित विधि के अधीन संयुक्त निर्धारण किए जाने पर संदेय कर की कुल रकम से वही अनुपात होगा जो उस आय का कृषि आय सहित कुल आय से है :

परन्तु इस प्रयोजन के लिए, राज्य में प्रवृत्त समुचित विधि द्वारा कृषि आय पर कर में अनुज्ञात कमी को हिसाब में नहीं लिया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा में, “केन्द्रीय आयोग" से टैक्शेसन आन इनकम (इन्वेस्टीगेशन कमीशन) ऐक्ट, 1947 (1947 का 30) के अधीन गठित आय-कर अन्वेषण आयोग अभिप्रेत है ।

4. निरसन और व्यावृत्ति-यदि इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व, जम्मू-कश्मीर राज्य से भिन्न किसी भाग ख राज्य में या कूच-बिहार के विलयित क्षेत्र में, धारा 2 में विनिर्दिष्ट किन्हीं अधिनियमों में से टैक्शेसन आन इनकम (इन्वेस्टीगेशन कमीशन) ऐक्ट, 1947 (1947 का 30) से भिन्न किसी अधिनियम की तत्स्थानी विधि प्रवृत्त है, तो वह विधि इस अधिनियम के प्रारम्भ पर निरसित                   हो जाएगी :

परन्तु ऐसा निरसन निम्नलिखित पर प्रभाव नहीं डालेगा :-

                (क) उस विधि का पूर्व प्रवर्तन, या

                (ख) उस विधि के विरुद्ध किए गए किसी अपराध के बारे में उपगत कोई शास्ति, समपहरण या दंड, या

                (ग) ऐसी शास्ति, समपहरण या दंड के बारे में कोई अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार,

और कोई ऐसा अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार संस्थित किया जा सकेगा, चालू रखा जा सकेगा या प्रवृत्त किया जा सकेगा और कोई ऐसी शास्ति, समपहरण या दंड अधिरोपित किया जा सकेगा, मानो वह अधिनियम पारित नहीं किया गया हो :

परन्तु यह और कि उस विधि के किसी उपबंध के अधीन की गई किसी बात या कार्यवाही के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस राज्य पर अब यथाविस्तारित केन्द्रीय अधिनियम के तत्स्थानी उपबंध के अधीन की गई है और तद्नुसार प्रवृत्त बनी रहेगी ।

5. कठिनाइयों का दूर किया जाना-ऐसे अधिनियमों, नियमों या आदेशों के उपबंधों को प्रभावी करने में, जिनका विस्तार भारत के किसी भाग में अब किया गया है जहां वे इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व प्रवृत्त नहीं थे, यदि कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, उस कठिनाई को दूर करने के लिए ऐसा उपबंध कर सकेगी या ऐसे निदेश दे सकेगी जो उसे आवश्यक प्रतीत हों ।

 

 

 

 

 

 

अनुसूची

[धारा 2(2) देखिए]

संशोधित अधिनियमितियां

               

वर्ष

सं०

संक्षिप्त नाम

संशोधन

1

2

3

4

1857

13

अफीम अधिनियम, 1857

(1) उद्देशिका में बंगाल में फोर्ट विलियम प्रेसिडेन्सी में" शब्दों का लोप करें ।

(2) निम्नलिखित को धारा 1 के स्थान में अंतःस्थापित करें, अर्थात् :-

1. संक्षिप्त नाम तथा विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अफीम अधिनियम, 1857 है ।

(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है ।"।

 

1878

1

अफीम अधिनियम, 1878

(1) धारा 1 में इसका विस्तार" से प्रारंभ होने वाले और इस निमित्त निदेश दे" शब्दों के साथ समाप्त होने वाले शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें, अर्थात् :-

इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है ।"। 

(2) धारा 3 में आयात", निर्यात", परिवहन", विक्रय" और विक्रय करने" की परिभाषाओं के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें,                  अर्थात् :-

सीमा-शुल्क सीमान्त" से सागर सीमा-शुल्क अधिनियम, 1878 (1878 का 8) की धारा 3क के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा यथापरिभाषित भारत के सीमा-शुल्क सीमांतों में से कोई अभिप्रेत है ;

आयात" और निर्यात" से क्रमशः किन्हीं सीमा-शुल्क सीमांतों के पार से अन्यथा किसी राज्य में लाना या वहां से बाहर ले जाना अभिप्रेत है ;

परिवहन" से उसी राज्य में एक स्थान से दूसरे स्थान को हटाना अभिप्रेत है ;

विक्रय" के अन्तर्गत सीमा-शुल्क सीमांतों के पार निर्यात के लिए विक्रय नहीं है और विक्रय करने" का अर्थ तद्नुकूल किया जाएगा ।

 

1890

1

राजस्व वसूली अधिनियम, 1890

(1) धारा 1 की उपधारा (2) में भाग ख राज्यों शब्दों और अक्षर के स्थान पर जम्मू और कश्मीर राज्य" शब्द प्रतिस्थापित करें ।

(2) धारा 4 की उपधारा (4) में भाग क राज्य या भाग ग राज्य" शब्दों और अक्षरों के स्थान पर किसी राज्य में जिस पर इस अधिनियम का विस्तार है" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।

 

                                               

1

2

3

4

1926

3

सरकारी व्यापार कराधान अधिनियम, 1926

(1) उद्देशिका में या किसी प्रवेशी राज्य या अन्य देशी राज्य की सरकार" शब्दों का लोप करें ।

(2) धारा 2 में,-

(क) उपधारा (1) में, भाग क राज्यों और भाग ग राज्यों में" शब्दों के स्थान पर भारत में" शब्द प्रतिस्थापित करें ;

(ख) उपधारा (1क) का लोप करें ;

(ग) उपधारा (3) के अंत में निम्नलिखित शब्द जोड़ दे, अर्थात् :-

और स्त्र्भारतऱ् से जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर भारत का राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है" ।

(3) धारा 3 में सम्मिलित होने वाला राज्य या अन्य भारतीय राज्य पर" शब्दों के स्थान पर भाग ख राज्य पर" शब्द और अक्षर प्रतिस्थापित करें ।

 

1930

2

अनिष्टकर मादक द्रव्य अधिनियम, 1930

(1) धारा 1 की उपधारा (2) में भाग ख राज्यों" शब्दों और अक्षर के स्थान पर जम्मू-कश्मीर राज्य" शब्द प्रतिस्थापित करें ।

(2) धारा 39 की उपधारा (1) में, या भाग क राज्य या भाग ग राज्य के विधान-मंडल का कोई अधिनियम" शब्दों और अक्षरों के स्थान पर या किसी राज्य विधान-मंडल का कोई अधिनियम" शब्द प्रतिस्थापित करें ।

 

1947

30

दि टैक्शेसन आन इनकम (इन्वेस्टीगेशन कमीशन) ऐक्ट, 1947

धारा 1 की उपधारा (2) में भाग ख राज्यों" शब्दों और अक्षर के स्थान पर जम्मू-कश्मीर राज्य" शब्द प्रतिस्थापित करें ।

1949

22

कर संदाय (संपत्ति-अंतरण) अधिनियम, 1949

(1) धारा 1 की उपधारा (2) में भाग ख राज्यों" शब्दों और अक्षर के स्थान पर जम्मू-कश्मीर राज्य" शब्द प्रतिस्थापित करें ।

(2) धारा 2 के स्पष्टीकरण में, भाग ख राज्यों" शब्दों और अक्षर के स्थान पर जम्मू-कश्मीर राज्य" शब्द प्रतिस्थापित करें ।

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