आंध्र प्रदेश विधान परिषद् अधिनियम, 2005
(2006 का अधिनियम संख्यांक 1)
[11 जनवरी, 2006]
आन्ध्र प्रदेश राज्य के लिए विधान परिषद् के सृजन तथा
उसके अनुपूरक, आनुषंगिक और पारिणामिक
विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के छप्पनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम आन्ध्र प्रदेश विधान परिषद् अधिनियम, 2005 है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, प्रत्येक शब्द और पद का, जो इसमें प्रयुक्त है और परिभाषित नहीं है किन्तु लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में परिभाषित है, वही अर्थ होगा जो, उस अधिनियम में है ।
3. आन्ध्र प्रदेश के लिए विधान परिषद् का सृजन-(1) ऐसी तारीख से, जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा नियत करे, आन्ध्र प्रदेश राज्य के लिए एक विधान परिषद् होगी, और उस तारीख से ही, अनुच्छेद 168 के खंड (1) के उपखंड (क) में, बिहार" शब्द के पूर्व आन्ध्र प्रदेश" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।
(2) उक्त परिषद् में 90 स्थान होंगे, जिनमें से-
(क) अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (क), उपखंड (ख) और उपखंड (ग) में निर्दिष्ट निर्वाचक मण्डलों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की संख्या क्रमशः 31, 8 और 8 होगी ;
(ख) उक्त खंड के उपखंड (घ) के उपबंधों के अनुसार आन्ध्र प्रदेश विधान सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की संख्या 31 होगी ; और
(ग) उस खंड के उपखंड (ङ) के उपबंधों के अनुसार आन्ध्र प्रदेश के राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित व्यक्तियों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की संख्या 12 होगी ।
(3) राष्ट्रपति, इस अधिनियम के प्रांरभ के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, निर्वाचन आयोग से परामर्श करने के पश्चात्, आदेश द्वारा, निम्नलिखित का अवधारण करेंगे-
(क) वे निर्वाचन-क्षेत्र, जिनमें आन्ध्र प्रदेश राज्य को अनुच्छेद 171 के खंड 3 के उपखंड (क), उपखंड (ख) और उपखंड (ग) में से प्रत्येक उपखंड के अधीन उक्त परिषद् के निर्वाचनों के प्रयोजन के लिए विभाजित किया जाएगा ;
(ख) प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र का विस्तार ; और
(ग) प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र के लिए आबंटित किए जाने वाले स्थानों की संख्या ।
(4) ऐसे अवधारण के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, इस अधिनियम, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) के उपबंधों के अनुसार उक्त परिषद् का गठन करने के लिए उपाय किए जाएंगे ।
4. 1950 के अधिनियम 43 की तृतीय अनुसूची और चतुर्थ अनुसूची का संशोधन-लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में-
(क) तृतीय अनुसूची में, बिहार से संबंधित प्रविष्टि सं० 2 से पहले, निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्
1. आन्ध्र प्रदेश 90 31 8 8 31 12 " ;
(ख) चतुर्थ अनुसूची में, बिहार" शीर्षक से पहले, निम्नलिखित शीर्षक और प्रविष्टियां अन्तःस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
आन्ध्र प्रदेश
1. नगर निगम ।
2. नगरपालिकाएं ।
3. नगर पंचायतें ।
4. छावनी बोर्ड ।
5. जिला प्रजा परिषदें ।
6. मंडल प्रजा परिषदें ।" ।
5. 1951 के अधिनियम 43 की धारा 15क का संशोधन-लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 15क में, विधान परिषद् अधिनियम, 1957 (1957 का 37) के अधीन" शब्दों और अंकों के स्थान पर, आन्ध्र प्रदेश विधान परिषद् अधिनियम, 2005 के अधीन" शब्द और अंक रखे जाएंगे ।
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