भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (कर्मचारी सेवा शर्त अवधारण) अधिनियम, 1988
(1988 का अधिनियम संख्यांक 44)
[3 सितंबर, 1988]
भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों और कर्मचारियों की
सेवा की शर्तों का अवधारण करने के लिए केंद्रीय सरकार को
सशक्त करने और उससे संबंधित
विषयों के लिए
अधिनियम
भारत पेट्रोलियम कारपोरशन लिमिटेड के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों को अन्य पब्लिक सेक्टर कंपनियों के कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवा की शर्तों के समतुल्य बनाने के प्रयोजन के लिए केंद्रीय सरकार को उक्त निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों का अवधारण करने के लिए सशक्त करना आवश्यक है ;
भारत गणराज्य के उनतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (कर्मचारी सेवा शर्त अवधारण) अधिनियम, 1988 है ।
(2) यह 2 जुलाई, 1988 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) बर्मा शैल" से बर्मा शैल आयल स्टोरेल एंड डिस्ट्रीब्यूटिंग कंपनी आफ इंडिया लिमिटेड, जैसी कि वह बर्मा शैल (भारत में उपक्रमों का अर्जन) अधिनियम, 1976 (1976 का 2) के अधीन नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान थी, अभिप्रेत है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 591 के अर्थ में विदेशी कंपनी है ;
(ख) बर्मा शैल रिफाइनरीज" से बर्मा शैल रिफाइनरीज लिमिटेड, जैसी कि वह सरकारी कंपनी हो जाने के ठीक पूर्व विद्यमान थी, अभिप्रेत है जो भारतीय कंपनी अधिनियम, 1913 (1913 का 7) के अधीन रजिस्ट्रीकृत कंपनी है ;
(ग) निगम" से भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड अभिप्रेत है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथापरिभाषित सरकारी कंपनी है ;
(घ) निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों" के अंतर्गत निम्नलिखित हैं,-
(i) ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जो बर्मा शैल रिफाइनरीज की सेवा में थे और जो उस कंपनी के सरकारी कंपनी हो जाने के पश्चात् उसकी सेवा में बने रहे हैं ; और
(ii) ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जो बर्मा शैल की सेवा में थे और जिनकी सेवाएं बर्मा शैल (भारत में उपक्रमों का अर्जन) अधिनियम, 1976 (1976 का 2) की धारा 9 द्वारा निगम को अंतरित कर दी गई थीं ;
(ङ) पब्लिक सेक्टर कंपनी" से किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित कोई निगम या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथापरिभाषित कोई सरकारी कंपनी अभिप्रेत है ।
3. अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों का अवधारण करने के लिए स्कीम बनाने की केंद्रीय सरकार की शक्ति- (1) जहां केंद्रीय सराकर का यह समाधान हो जाता है कि निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों को अन्य पब्लिक सेक्टर कंपनियों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों के समतुल्य बनाने के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है वहां वह औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) में या किसी अन्य विधि में या तत्समय प्रवृत्त किसी करार, परिनिर्धारण, अधिनिर्णय या अन्य लिखत में किसी बात के होते हुए भी, और किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के होते हुए भी, निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों का अवधारण करने के प्रयोजन के लिए एक या अधिक स्कीम बना सकती है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई स्कीम बनाते समय, केंद्रीय सरकार के लिए यह सक्षम होगा कि वह किसी ऐसी स्कीम के प्रारंभ के पश्चात् ऐसी उपलब्धियों और अन्य फायदों को बनाए रखने के लिए उपबंध करे जो, बर्मा शैल रिफाइनरीज के सरकारी कंपनी हो जाने के ठीक पूर्व या बर्मा शैल (भारत में उपक्रमों का अर्जन) अधिनियम, 1976 (1976 का 2) के अधीन नियत दिन के ठीक पूर्व, धारा 2 के खंड (घ) के उपखंड (i) या उपखंड (ii) में निर्दिष्ट निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को संदेय थे या जिन्हें पाने के लिए वे हकदार थे ।
(3) केंद्रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन बनाई गई किसी स्कीम का संशोधन करने या उसमें परिवर्तन करने के लिए स्कीम बना सकती है ।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन कोई स्कीम बनाने की शक्ति में निम्नलिखित सम्मिलित हैं, अर्थात् :-
(क) ऐसी किसी स्कीम या उसके किसी उपबंध को भूतलक्षी प्रभाव देने की शक्ति ; और
(ख) इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व प्रवृत्त, निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों का अवधारण करने वाले किन्हीं विद्यमान उपबंधों का, परिवर्धन, परिवर्तन या निरसन के रूप में, संशोधन करने की शक्ति ।
(5) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन बनाई गई प्रत्येक स्कीम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस स्कीम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह स्कीम नहीं बनाई जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगी । किंतु स्कीम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
4. निरसन और व्यावृत्ति-(1) भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (कर्मचारियों की सेवा की शर्तों का अवधारण) अध्यादेश, 1988 (1988 का अध्यादेश संख्यांक 6) निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
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