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रेल (सशस्त्र-बल-सदस्य-नियोजन) अधिनियम, 1965 ( Railways (Employment of Members of the Armed Forces) Act, 1965 )


 

रेल (सशस्त्र-बल-सदस्य-नियोजन) अधिनियम, 1965

(1965 का अधिनियम संख्यांक 40)

[3 दिसम्बर, 1965]

रेलों के कार्यकरण और प्रबंध में संघ के

सशस्त्र बलों के सदस्यों के नियोजन

से सम्बन्धित कतिपय उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के सोलहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) यह अधिनियम रेल (सशस्त्र-बल-सदस्य-नियोजन) अधिनियम, 1965 कहा जा सकेगा  

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है  

2. निर्वचन-इस अधिनियम में प्रयुक्त और भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) में परिभाषित शब्दों और पदों के वही अर्थ होंगे, जो उन्हें उस अधिनियम में क्रमशः समनुदिष्ट हैं  

3. किसी रेल की सेवा के संसंग में किसी रेल प्रशासन की सहायता करने के लिए संघ के सशस्त्र बलों के सदस्यों का नियोजन-(1) जब संघ के सशस्त्र बलों के किसी सदस्य को किसी रेल सेवा के संसंग में किसी रेल प्रशासन की सहायता के लिए नियोजित किया जाता है, तब, चाहे ऐसा नियोजन इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व का था या पश्चात् का हो-

() भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) के या तद्धीन बनाए गए नियमों के किसी भी ऐसे उपबन्ध का, जो किसी रेल सेवक को रेलों के कार्यकरण, उपयोग, प्रबंध और अनुरक्षण के संसंग में कोई शक्ति, प्रास्थिति या उन्मुक्ति प्रदत्त करता हो, अथवा उस पर कोई कर्तव्य या दायित्व अधिरोपित करता हो, अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह संघ के सशस्त्र बलों के ऐसे सदस्य को, जब वह ऐसे नियोजित हो, यथास्थिति, वही शक्ति, प्रास्थिति या उन्मुक्ति प्रदत्त करता है, अथवा वहीं कर्तव्य या दायित्व उस पर अधिरोपित करता है

() किसी रेल सेवक के अतिरिक्त या उसके स्थान पर संघ के सशस्त्र बलों के किसी सदस्य का नियोजन किसी भी ऐसे दायित्व पर प्रभाव नहीं डालेगा जो, यदि ऐसा सदस्य रेल सेवक होता, तो रेल प्रशासन से संलग्न होता  

(2) उपधारा (1) की किसी भी बात का अर्थ यह नहीं लगाया जाएगा कि वह संघ के सशस्त्र बलों के उन सदस्यों को, जो किसी रेल प्रशासन की सहायता के लिए नियोजित किए गए हों, भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) के अध्याय 6 के उपबन्धों को लागू करती है या संघ के सशस्त्र बलों के सदस्यों के शासन, नियन्त्रण और अनुशासन को विनियमित करने वाली विधि के किसी भी उपबन्ध का अल्पीकरण करती है  

4. किसी रेल के कार्यकरण में रेल प्रशासन के स्थान पर संघ के सशस्त्र बलों के सदस्यों का नियोजन-यदि किसी भी समय रेल का या किसी रेल के किसी विनिर्दिष्ट प्रभाग या अनुभाग का सम्पूर्ण कार्यकरण, प्रबन्ध और अनुरक्षण संघ के सशस्त्र बलों द्वारा ग्रहण कर लिया जाए, तो केन्द्रीय सरकार ऐसे ग्रहण के तथ्य को शासकीय राजपत्र में अधिसूचित कर सकेगी और तदुपरि, जब तक ऐसा ग्रहण बना रहेगा, तब तक भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890  का 9) का उस रेल को या उस रेल के सम्पृक्त प्रभाग या अनुभाग को लागू होना बन्द रहेगा

5. निरसन तथा व्यावृत्ति-(1) रेल (सशस्त्र-बल-सदस्य-नियोजन) अध्यादेश, 1965 (1965 का अध्यादेश सं० 4) एतद्द्वारा निरसित किया जाता है  

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई भी बात या कार्यवाही इस अधिनियम के अधीन ऐसे की गई समझी जाएगी, मानो यह अधिनियम सितम्बर, 1965 के 29वें दिन को प्रारम्भ हुआ था

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