Saturday, 02, May, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

दिल्ली विद्यालय शिक्षा अधिनियम, 1973 ( Delhi School Education Act, 1973 )


 

दिल्ली विद्यालय शिक्षा अधिनियम, 1973

(1973 का अधिनियम संख्यांक 18)

[9 अप्रैल, 1973]

दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र में विद्यालय शिक्षा की अधिक अच्छी व्यवस्था

और विकास के लिए और उससे सम्बद्ध या अनुषंगी मामलों

के लिए उपबन्ध करने के लिए

 अधिनियम

                भारत गणराज्य के चौबीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दिल्ली विद्यालय शिक्षा अधिनियम, 1973 है ।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र पर है । 

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो प्रशासक, अधिसूचना द्वारा नियत करे और इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकती हैं, और इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के सम्बन्ध में इस अधिनियम के प्रारम्भ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस तारीख के प्रति निर्देश है जिसको वह उपबन्ध प्रवृत्त होगा ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) प्रशासक" से संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक अभिप्रेत है; 

(ख) सलाहकार बोर्ड" से धारा 22 में निर्दिष्ट बोर्ड अभिप्रेत है; 

(ग) सहायता" से केन्द्रीय सरकार, प्रशासक, स्थानीय प्राधिकारी या केन्द्रीय सरकार, प्रशासक या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अभिहित किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय को दी गई सहायता अभिप्रेत है;

(घ) सहायता पाने वाला विद्यालय" से वह मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार, प्रशासक या स्थानीय प्राधिकारी या केन्द्रीय सरकार, प्रशासक या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अभिहित किसी अन्य प्राधिकारी से चलाने के लिए अनुदान के रूप में सहायता प्राप्त कर रहा है; 

(ङ) समुचित प्राधिकारी" से अभिप्रेत है-

(i) केन्द्रीय सरकार द्वारा अभिहित या प्रायोजित प्राधिकारी द्वारा मान्यताप्राप्त या मान्यता दिए जाने वाले विद्यालय की दशा में, वह प्राधिकारी;

(ii) दिल्ली प्रशासन द्वारा मान्यताप्राप्त या मान्यता दिए जाने वाले विद्यालय की दशा में, प्रशासक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी;

(iii) दिल्ली नगर निगम द्वारा मान्यताप्राप्त या मान्यता दिए जाने वाले विद्यालय की दशा में, दिल्ली नगर निगम; 

(iv) किसी अन्य विद्यालय की दशा में, प्रशासक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी; 

(च) दिल्ली" से दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है; 

(छ) निदेशक" से दिल्ली का शिक्षा निदेशक अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत इस अधिनियम के अधीन निदेशक के सभी या किन्हीं कृत्यों को करने के लिए उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी भी है;

(ज) कर्मचारी" से कोई अध्यापक अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत मान्यताप्राप्त विद्यालय में काम करने वाला प्रत्येक कर्मचारी है;

(झ) विद्यमान कर्मचारी" से विद्यमान विद्यालय का ऐसा कर्मचारी अभिप्रेत है जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले ऐसे विद्यालय में नियोजित है, और इसके अन्तर्गत ऐसा कर्मचारी भी है जो ऐसे विद्यालय में 2 सितम्बर, 1972 के ठीक पूर्ववर्ती बारह मास से अन्यून कालावधि के लिए नियोजित था; 

(ञ) विद्यमान विद्यालय" से इस अधिनियम के प्रारम्भ पर विद्यमान मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय अभिप्रेत है;

(ट) विद्यालय का प्रधान" से मान्यताप्राप्त विद्यालय का मुख्य शैक्षणिक अधिकारी अभिप्रेत है, चाहे वह जिस नाम से सम्बोधित किया जाए; 

(ठ) स्थानीय प्राधिकारी" से अभिप्रेत है-

(i) दिल्ली नगर निगम की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी क्षेत्र के सम्बन्ध में, दिल्ली नगर निगम;

(ii) नई दिल्ली नगरपालिका की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी क्षेत्र के सम्बन्ध में, नई दिल्ली नगरपालिका; 

(iii) दिल्ली छावनी बोर्ड की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी क्षेत्र के सम्बन्ध में, दिल्ली छावनी बोर्ड;

(ङ) किसी विद्यालय के सम्बन्ध में प्रबन्धक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, चाहे वह जिस नाम से सम्बोधित किया जाए, जिसे, यथास्थिति, उस तारीख को जिस तारीख को यह अधिनियम प्रवृत्त हुआ है या धारा 5 के अधीन बनाई गई प्रबन्ध की स्कीम के अधीन उस विद्यालय के कार्यकलाप का प्रबन्ध सौंपा गया है;

(ढ) प्रबन्ध समिति" से उन व्यष्टियों का निकाय अभिप्रेत है, जिन्हें किसी मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय का प्रबन्ध सौंपा गया है;

(ण) अल्पसंख्यक विद्यालय" से संविधान के अनुच्छेद 30 के खण्ड (1) के अधीन विद्यालय स्थापित और प्रशासित करने का अधिकार रखने वाले किसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और प्रशासित विद्यालय अभिप्रेत है; 

(त) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है; 

(थ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है; 

(द) प्राइवेट विद्यालय" से वह विद्यालय अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार, प्रशासक, स्थानीय प्राधिकारी या केन्द्रीय सरकार, प्रशासक या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अभिहित या प्रायोजित किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा नहीं चलाया जाता है; 

(ध) सार्वजनिक परीक्षा" से केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, भारतीय विद्यालय प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद् या किसी अन्य ऐसे बोर्ड द्वारा संचालित परीक्षा अभिप्रेत है, जो इसके पश्चात् इस प्रयोजन के लिए स्थापित किया जाए और जिसे प्रशासक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा मान्यता प्रदान की गई हो; 

(न) मान्यताप्राप्त विद्यालय" से समुचित प्राधिकारी द्वारा मान्यताप्राप्त विद्यालय अभिप्रेत है; 

(प) विद्यालय" के अन्तर्गत पूर्व-प्राथमिक, प्राथमिक, मध्यवर्ती और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हैं और इसके अन्तर्गत कोई अन्य ऐसी संस्था भी है जो शिक्षा प्रदान करती है या उपाधि के स्तर के नीचे का प्रशिक्षण देती है किन्तु इसके अन्तर्गत ऐसी संस्था नहीं है जो तकनीकी शिक्षा देती है; 

(फ) विद्यालय समिति" से विद्यालय के स्वामित्व या कब्जे की सभी स्थावर और जंगम सम्पत्ति और ऐसी सम्पत्ति में या से उद्भूत होने वाले अन्य सभी अधिकार और हित अभिप्रेत हैं, और इसके अन्तर्गत भूमि, भवन और उसके अनुलग्नक, खेल के मैदान, छात्रावास, फर्नीचर, पुस्तकें, साधित्र, मानचित्र, उपस्कर, पात्र, नकदी, आरक्षित निधियां, विनिधान और बैंक जमा है;

(ब) अध्यापक" के अन्तर्गत विद्यालय का प्रधान भी है; 

(भ) सहायता न पाले वाला अल्पसंख्यक विद्यालय" से मान्यताप्राप्त ऐसा अल्पसंख्यक विद्यालय अभिप्रेत है जिसे कोई भी सहायता प्राप्त नहीं है । 

अध्याय 2

विद्यालयों की स्थापना, मान्यता, उनका प्रबन्ध और उनको सहायता

3. प्रशासक की, विद्यालयों में शिक्षा को विनियमित करने की शक्ति-(1) प्रशासक दिल्ली के सभी विद्यालयों में इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार शिक्षा को विनियमित कर सकता है ।

(2) प्रशासक इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबंधों का अनुपालन करते हुए दिल्ली में कोई भी विद्यालय स्थापित कर सकता है और चला सकता है या किसी भी व्यक्ति या स्थानीय प्राधिकारी को दिल्ली में कोई विद्यालय स्थापित करने या चलाने की अनुज्ञा दे सकता है । 

(3) इस अधिनियम के प्रारम्भ से ही और संविधान के अनुच्छेद 30 के खण्ड (1) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, दिल्ली में किसी नए विद्यालय की स्थापना या किसी विद्यमान विद्यालय में उच्चतर कक्षा का खोलना या किसी विद्यमान कक्षा का बन्द करना इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अधीन होगा और किसी ऐसे विद्यालय या उच्चतर कक्षा को जो इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार स्थापित या खोली नहीं गई है, समुचित प्राधिकारी द्वारा मान्यता न दी जाएगी ।  

4. विद्यालयों को मान्यता-(1) समुचित प्राधिकारी विहित प्ररूप में और विहित रीति से उसे किए गए आवेदन पर, किसी प्राइवेट विद्यालय को मान्यता दे सकता है; 

परन्तु किसी विद्यालय को मान्यता नहीं दी जाएगी, जब तक कि-

(क) उसके पास अपना वित्तीय स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए तथा अपने कर्मचारियों को वेतन और भत्ते का नियमित संदाय करने के लिए पर्याप्त निधि नहीं है; 

(ख) उसके पास धारा 5 द्वारा यथा अपेक्षित प्रबन्ध की सम्यक्तःः अनुमोदित स्कीम नहीं है;

(ग) उसके पास, अन्य बातों के साथ-साथ, उसमें आने वाले विद्यार्थियों की संख्या, आयु और लिंग को ध्यान में रखते हुए स्थान और स्वच्छता सम्बन्धी उपयुक्त या पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं;

(घ) उसमें अनुमोदित पाठ्यक्रम और अच्छे शिक्षण की व्यवस्था नहीं है;

(ङ) उसमें विहित अर्हता वाले अध्यापक नहीं हैं; और

(च) उसके पास शारीरिक शिक्षा, पुस्तकालय सेवा, प्रयोगशाला कार्य, कर्मशाला अभ्यास या पाठ्यक्रमेत्तर गतिविधियों के लिए विहित सुविधाएं नहीं हैं ।

                (2) विद्यालय की मान्यता के लिए प्रत्येक आवेदन समुचित प्राधिकारी द्वारा ग्रहण किया जाएगा और उस पर उसके द्वारा विचार किया जाएगा और आवेदन की प्राप्ति की तारीख से चार मास की अवधि के भीतर आवेदक को उस पर किए गए विनिश्चय की सूचना दी जाएगी; और जहां मान्यता नहीं दी जाती है वहां, उक्त कालावधि के भीतर आवेदक को ऐसी मान्यता न दिए जाने के कारण भी संसूचित किए जाएंगे । 

(3) जहां किसी विद्यालय को मान्यता देने से इंकार किया जाता है वहां ऐसे इंकार से व्यथित कोई व्यक्ति, उसे ऐसे इंकार की संसूचना की तारीख से तीस दिन के भीतर, ऐसे इंकार के विरुद्ध विहित रीति से, विहित प्राधिकारी से अपील कर सकता है, और विहित प्राधिकारी का उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा :

परन्तु यदि विहित प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी तीस दिन की उक्त कालावधि के भीतर अपील प्रस्तुत करने में पर्याप्त कारण से निवारित हुआ था तो वह उक्त कालावधि को साठ दिन की अतिरिक्त कालावधि के लिए बढ़ा सकेगा किन्तु ऐसा करने के कारण उसके द्वारा लेखबद्ध किए जाएंगे । 

(4) जहां किसी विद्यालय की प्रबन्ध समिति कपट से, दुर्व्यपदेशन से या महत्वपूर्ण विशिष्टियां छिपाकर मान्यता प्राप्त करती हैं, या जहां मान्यता प्राप्त करने के पश्चात् विद्यालय उपधारा (1) के परन्तुक में विनिर्दिष्ट शर्तों में से किसी का अनुपालन करते रहने में असफल रहता है वहां, मान्यता देने वाला प्राधिकारी, विद्यालय की प्रबन्ध समिति को प्रस्थापित कार्यवाही के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर देने के पश्चात् उपधारा (1) के अधीन ऐसे विद्यालय को दी गई मान्यता वापस ले सकता है । 

(5) उपधारा (1) के अधीन दी गई मान्यता के कारण किसी विद्यालय को सहायता प्राप्त करने का हक नहीं होगा । 

(6) प्रत्येक विद्यमान विद्यालय के बारे में यह समझा जाएगा कि उसे इस धारा के अधीन मान्यता दी गई है और वह इस अधिनियम के उपबंधों और तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन होगा :

परन्तु जहां ऐसा कोई विद्यालय उपधारा (1) के परन्तुक में विनिर्दिष्ट शर्तों में  से किसी शर्त को पूरा नहीं करता है वहां, विहित प्राधिकारी विद्यालय से विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर ऐसी शर्तों को और ऐसी अन्य शर्तों को जो विहित की जाएं, पूरा करने की अपेक्षा कर सकता है और यदि ऐसी कोई शर्त पूरी नहीं की जाती है तो ऐसे विद्यालय की मान्यता वापस ली जा सकती है । 

(7) प्रत्येक विद्यालय, जिसकी मान्यता उपधारा (4) या उपधारा (6) के अधीन वापस ली जाती है, विहित प्राधिकारी से अपील कर सकता है और विहित प्राधिकारी अपील के प्रस्तुत किए जाने की तारीख से छह मास के भीतर अपील को ऐसी रीति में निपटाएगा जो विहित की जाए, और यदि अपील उस कालावधि के भीतर नहीं निपटाई जाती है तो मान्यता वापस लेने का आदेश छह मास की उक्त कालावधि के अवसान पर, रद्द हो जाएगा । 

(8) उपधारा (3) या उपधारा (7) के अधीन की गई अपील सुनने के पश्चात्, विहित प्राधिकारी, अपीलार्थी को सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात्, अपील किए गए आदेश की पुष्टि कर सकता है, उसे उपान्तरित कर सकता है, या उसे उलट सकता है । 

5. प्रबन्ध की स्कीम-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या ऐसी अन्य विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक मान्यताप्राप्त विद्यालय की प्रबन्ध समिति इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार और समुचित प्राधिकारी के पूर्वानुमोदन से, ऐसे विद्यालय के प्रबन्ध के लिए एक स्कीम बनाएगी :

परन्तु ऐसे मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय की दशा में जो कोई सहायता नहीं प्राप्त करता है, प्रबन्ध की स्कीम ऐसे परिवर्तनों और उपान्तरों के साथ लागू होगी जो विहित किए जाएं :

परन्तु यह और कि इस उपधारा का उतना भाग जिसका सम्बन्ध समुचित प्राधिकारी के पूर्वानुमोदन से है, सहायता न पाने वाले किसी अल्पसंख्यक विद्यालय के लिए किसी प्रबन्ध स्कीम को लागू न होगा ।

 (2) उपधारा (1) के अधीन बनाई गई स्कीम में जोड़ने, परिवर्तन करने या उपान्तर करने के लिए ऐसी ही रीति में स्कीम बनाई जा सकती है । 

6. मान्यताप्राप्त विद्यालयों को सहायता-(1) केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा, विधि द्वारा इस निमित्त सम्यक्तः विनियोजन किए जाने के पश्चात् और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, प्रशासक को ऐसे मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालयों को, जो किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा मान्यता दिए गए प्राथमिक विद्यालय न हों, सहायता के वितरण के लिए, ऐसी धनराशि दे सकती है जो वह सरकार आवश्यक समझे:

परन्तु कोई विद्यमान विद्यालय, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व, सहायता प्राप्त करता था तब तक ऐसी सहायता के चालू रहने के लिए पात्र नहीं होगा जब तक वह ऐसी कालावधि के भीतर जो निदेशक द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, धारा 4 की उपधारा (1) के परन्तुक में विनिर्दिष्ट शर्तों का अनुपालन नहीं करता है ।   

(2) सहायता देने के लिए सक्षम प्राधिकारी इस निमित्त विहित शर्तों में से किसी के अतिक्रमण के लिए सहायता बन्द कर सकता है, घटा सकता है या निलम्बित कर सकता है ।

(3) सहायता विद्यालय के खर्च के ऐसे भाग के बराबर हो सकती है जो विहित किया जाए ।

(4) विद्यालय के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और भविष्य-निधि के लिए दी गई सहायता से किसी अन्य प्रयोजन के लिए कोई संदाय नहीं किया जाएगा ।

(5) ऐसे विद्यालय को कोई सहायता नहीं दी जाएगी जिसका प्रबन्ध धारा 20 के अधीन ले लिया गया है ।

(6) ऐसा विद्यालय जिसे मान्यता नहीं मिली है कोई भी सहायता या कोई फायदा प्राप्त करने का पात्र नहीं होगा जो प्रशासक या प्रशासक के किसी अभिकरण द्वारा प्राइवेट विद्यालयों को उपलभ्य किया गया है ।

अध्याय 3

विद्यालय की सम्पत्ति

7. विद्यालय की सम्पत्ति-(1) प्रत्येक सहायता पाने वाले विद्यालय का प्रबन्ध-मण्डल सहायता दिए जाने के समय प्रारम्भ में और उसके बाद प्रतिवर्ष समुचित प्राधिकारी को एक विवरण देगा जिसमें, ऐसी विशिष्टियों सहित जो विहित की जाएं, विद्यालय की सम्पत्ति की एक सूची देगा । 

(2) तत्समय-प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, किसी सहायता पाने वाले विद्यालय की स्थावर या जंगम सम्पत्ति का जो नियमों में विनिर्दिष्ट सम्पत्ति नहीं है कोई अन्तरण, बन्धक या पट्टा, समुचित प्राधिकारी की पूर्वानुज्ञा के बिना नहीं किया जाएगा :

परन्तु जहां समुचित प्राधिकारी ऐसी अनुज्ञा के लिए आवेदन को इस निमित्त आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के भीतर नहीं निपटाता है या निपटाने में असफल रहता है वहां साठ दिन की उक्त कालावधि की समाप्ति पर यह समझा जाएगा कि अनुज्ञा दे दी गई है । 

(3) कोई व्यक्ति जो उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञा के देने या इंकार करने से व्यथित है, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के अन्दर, जो विहित किया जाए, ऐसी अनुज्ञा देने या उसके इंकार के विरुद्ध प्रशासक से अपील कर सकता है और उस पर प्रशासक का विनिश्चय अन्तिम होगा । 

(4) यथास्थिति, उपधारा (2) के उपबन्धों के या प्रशासक के विनिश्चय के उल्लंघन में किया गया कोई संव्यवहार शून्य होगा । 

अध्याय 4

मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालयों के कर्मचारियों की सेवा के निबन्धन और शर्तें

8. मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालयों के कर्मचारियों की सेवा के निबन्धन और शर्तें-(1) प्रशासक मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालयों के कर्मचारियों की भर्ती के लिए न्यूनतम अर्हताओं और सेवा की शर्तों को विनियमित करने वाले नियम बना सकता है :

परन्तु इस अधिनियम के प्रारम्भ पर किसी विद्यमान विद्यालय द्वारा नियोजित कर्मचारी का वेतन तथा छुट्टी, निवर्तन-आयु और पेंशन की बाबत अधिकार ऐसे कर्मचारी के लिए अहितकर रीति से परिवर्तित नहीं किए जाएंगे :

परन्तु यह और कि ऐसा प्रत्येक कर्मचारी सेवा की उन शर्तों और निबन्धनों के लिए अपना विकल्प देने का हकदार होगा जो इस अधिनियम के प्रारम्भ ठीक पहले उसे लागू थे । 

(2) ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए जो इस निमित्त बनाए जाएं, किसी मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय का कोई भी कर्मचारी निदेशक के पूर्वानुमोदन के बिना पदच्युत नहीं किया जाएगा, हटाया नहीं जाएगा या अवनत नहीं किया जाएगा और न ही उसकी सेवा अन्यथा समाप्त की जाएगी । 

(3) किसी मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय का कोई कर्मचारी जो पदच्युत किया गया है, हटाया गया है या अवनत किया गया है, ऐसे पदच्युत किए जाने, हटाए जाने या अवनत किए जाने के आदेश की संसूचना की तारीख से तीन मास के भीतर, ऐसे आदेश के विरुद्ध धारा 11 के अधीन गठित अधिकरण को अपील कर सकता है ।

(4) जहां किसी मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय की प्रबन्ध समिति अपने कर्मचारियों में से किसी को निलम्बित करना चाहती है वहां निदेशक को ऐसे आशय की संसूचना दी जाएगी और ऐसा कोई निलम्बन निदेशक के पूर्वानुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा :

परन्तु प्रबन्ध समिति किसी कर्मचारी को तुरन्त और निदेशक के पूर्वानुमोदन के बिना निलम्बित कर सकती है यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसा तुरन्त निलंबन कर्मचारी के, धारा 9 के अधीन विहित आचरण संहिता के अर्थान्तर्गत, घोर अवचार के कारण आवश्यक है :

परन्तु यह और कि ऐसा तुरन्त निलंबन, निलंबन की तारीख से पन्द्रह दिन की कालावधि से अधिक के लिए तब तक प्रवृत्त नहीं रहेगा जब तक कि उक्त कालावधि के समाप्त होने के पूर्व निदेशक को उसकी संसूचना न दे दी गई हो और उसने उसका अनुमोदन न कर दिया हो ।

(5) जहां निदेशक को किसी कर्मचारी को निलम्बित करने या तुरन्त निलम्बन के आशय की संसूचना दी जाती है वहां यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसे निलम्बन के लिए पर्याप्त और उचित आधार हैं तो वह, ऐसे निलम्बन को अपना अनुमोदन दे सकता है ।

9. कर्मचारियों का आचरण संहिता द्वारा शासित होना-किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय का प्रत्येक कर्मचारी ऐसी आचरण संहिता द्वारा शासित होगा जो विहित की जाए और ऐसी आचरण संहिता के किसी उपबन्ध का अतिक्रमण करने पर कर्मचारी के विरुद्ध ऐसी अनुशासनिक कार्रवाई की जा सकती है जो विहित की जाए । 

10. कर्मचारियों के वेतन-(1) किसी मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय के कर्मचारियों के वेतनमान और भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन, उपदान, भविष्य-निधि और अन्य विहित प्रसुविधाएं उनसे कम नहीं होंगी जो समुचित प्राधिकारी द्वारा चलाए जा रहे विद्यालय के तत्सम प्रास्थिति वाले कर्मचारियों की हैं :

परन्तु जहां किसी मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय के कर्मचारियों के वेतनमान और भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन, उपदान, भविष्य-निधि और अन्य विहित प्रसुविधाएं उनसे कम हों, जो समुचित प्राधिकारी द्वारा चलाए जा रहे विद्यालयों के तत्सम प्रास्थिति वाले कर्मचारियों की हैं वहां समुचित प्राधिकारी ऐसे विद्यालय की प्रबन्ध समिति को लिखित निदेश देगा कि वह उन्हें समुचित प्राधिकारी द्वारा चालित विद्यालयों के तत्सम प्रास्थिति वाले कर्मचारियों के स्तर पर ला दे :

                परन्तु यह और कि ऐसे निदेश के अनुपालन में असफलता को किसी विद्यमान विद्यालय की मान्यता को चालू रखने के लिए शर्तों का अननुपालन समझा जाएगा और तदनुसार धारा 4 के उपबन्ध लागू होंगे ।

(2) सहायता पाने वाले प्रत्येक विद्यालय की प्रबन्ध समिति, प्रत्येक मास, वेतन और भत्तों, चिकित्सा सुविधाओं, पेंशन, उपदान, भविष्य-निधि और अन्य विहित प्रसुविधाओं के लेखे अपना अंश प्रशासक के पास जमा करेगी और प्रशासक सहायता पाने वाले विद्यालयों के कर्मचारियों को वेतन और भत्ते प्रत्येक मास के प्रथम सप्ताह में संवितरित करेगा या संवितरित कराएगा ।

11. अधिकरण-(1) प्रशासक अधिसूचना द्वारा एक अधिकरण गठित करेगा जो दिल्ली विद्यालय अधिकरण" के नाम से ज्ञात होगा और जिसमें एक व्यक्ति होगा :

परन्तु कोई भी व्यक्ति इस प्रकार तभी नियुक्त होगा जब उसने जिला न्यायाधीश के रूप में पद या कोई समतुल्य न्यायिक पद धारण किया हो । 

(2) यदि अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के पद में अस्थायी अनुपस्थिति से भिन्न कोई रिक्ति होती है तो प्रशासक किसी अन्य व्यक्ति को उस रिक्ति को भरने के लिए इस धारा के उपबन्धों के अनुसार नियुक्त करेगा और कार्यवाही उस प्रक्रम से जब रिक्ति भरी जाती है आगे चालू रखी जा सकेगी ।

(3) प्रशासक अधिकरण को ऐसे कर्मचारिवृन्द उपलभ्य करेगा जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन में आवश्यक हों । 

(4) अधिकरण के सम्बन्ध में उपगत सभी खर्चे भारत की संचित निधि में से किए जाएंगे ।

(5) अधिकरण को अपने कृत्यों के निर्वहन से उत्पन्न होने वाले सभी विषयों में, जिनके अन्तर्गत वह स्थान है, या वे स्थान हैं जहां वह अपनी बैठकें करेगा, अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी ।

(6) अधिकरण को इस अधिनियम के अधीन की गई किसी अपील के निपटाने के प्रयोजन के लिए वे ही शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) द्वारा अपील न्यायालय में निहित हैं और ऐसे आदेश के प्रवर्तन को, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, ऐसे निबंधनों पर, जैसे वह उचित समझे, रोकने की शक्ति भी होगी । 

12. अध्याय का सहायता पाले वाले अल्पसंख्यक विद्यालयों को लागू होना-इस अध्याय की कोई बात सहायता न पाने वाले अल्पसंख्यक विद्यालय को लागू न होगी ।  

अध्याय 5

सहायता पाने वाले अल्पसंख्यक विद्यालयों को लागू होने वाले उपबन्ध

 13. भर्ती के लिए न्यूनतम अर्हताएं विहित करने की शक्ति-प्रशासक सहायता न पाने वाले अल्पसंख्यक विद्यालयों के कर्मचारियों की भर्ती के लिए न्यूनतम अर्हताएं और उसके ढंग को विनियमित करने वाले नियम बना सकेगा:

                परन्तु किसी अर्हता में ऐसा परिवर्तन नहीं किया जाएगा जिससे किसी सहायता न पाने वाले अल्पसंख्यक विद्यालय के किसी विद्यमान कर्मचारी का अहित हो ।  

14. आचरण संहिता विहित करने की शक्ति-किसी सहायता न पाने वाले अल्पसंख्यक विद्यालय का प्रत्येक कर्मचारी ऐसी आचरण संहिता द्वारा शासित होगा जो विहित की जाए । 

15. सेवा-संविदा-(1) प्रत्येक सहायता न पाने वाले अल्यसंख्यक विद्यालय की प्रबन्ध समिति ऐसे विद्यालय के प्रत्येक कर्मचारी के साथ लिखित रूप में सेवा-संविदा करेगी:

परन्तु यदि इस अधिनियम के प्रारम्भ पर किसी सहायता न पाने वाले अल्पसंख्यक विद्यालय के किसी विद्यमान कर्मचारी के सम्बन्ध में कोई लिखित सेवा-संविदा नहीं है तो ऐसे विद्यालय की प्रबन्ध समिति ऐसे प्रारम्भ से तीन मास की कालावधि के भीतर ऐसी संविदा करेगी:

परन्तु यह और कि पूर्वगामी परन्तुक में निर्दिष्ट कोई संविदा किसी विद्यमान कर्मचारी और विद्यालय के बीच, इस अधिनियम के प्रारम्भ पर अस्तित्वशील किसी संविदा के निबन्धन में ऐसा परिवर्तन नहीं करेगी जिससे उस कर्मचारी का अहित हो । 

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक सेवा-संविदा की एक प्रति सम्बद्ध सहायता न पाने वाले अल्पसंख्यक विद्यालय की प्रबन्ध समिति द्वारा प्रशासक को भेजी जाएगी जो ऐसी प्रति को पाकर उसे ऐसी रीति से रजिस्टर करेगा जो विहित की जाए । 

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक सेवा-संविदा में निम्नलिखित बातों के लिए उपबन्ध होगा, अर्थात्: -

(क) कर्मचारी की सेवा के निबन्धन और शर्तें जिनके अन्तर्गत वह वेतनमान और अन्य भत्ते भी हैं जिनका वह हकदार होगा; 

(ख) अनुपस्थिति-छुट्टी, निवर्तन-आयु, पेंशन और उपदान या पेंशन और उपदान के बदले अभिदायी भविष्य-निधि तथा चिकित्सा और अन्य प्रसुविधाएं, जिनका कर्मचारी हकदार होगा; 

(ग) शास्तियां, जो किसी आचरण संहिता के अतिक्रमण या कर्मचारी द्वारा की गई संविदा के किसी निबन्धन के भंग के लिए उस कर्मचारी पर अधिरोपित की जा सकती हैं; 

(घ) वह रीति जिससे कर्मचारी के सम्बन्ध में अनुशासनिक कार्यवाही चलाई जाएगी और वह प्रक्रिया जिसका अनुसरण किसी कर्मचारी को पदच्युत करने, सेवा से हटाने या पंक्तिच्युत करने से पूर्व किया जाएगा; 

(ङ) कर्मचारी और प्रबन्ध समिति के बीच निम्नलिखित के सम्बन्ध में संविदा के किसी भंग से उत्पन्न होने वाले किसी विवाद का माध्यस्थम्, अर्थात्: -

(i) वेतनमान और अन्य भत्ते; 

(ii) अनुपस्थिति-छुट्टी, निवर्तन-आयु, पेंशन, उपदान, भविष्य-निधि, चिकित्सा और अन्य प्रसुविधाएं; 

(iii) ऐसी कोई अनुशासनिक कार्यवाही जिसका परिणाम कर्मचारी को पदच्युत करना, सेवा से उसे हटाना या उसे पंक्तिच्युत करना हो; 

(च) अन्य कोई बात जो प्रबन्ध समिति की राय में ऐसी संविदा में विनिर्दिष्ट होनी चाहिए या की जा सकती है । 

अध्याय 6

विद्यालयों में प्रवेश और फीस

16. मान्यताप्राप्त विद्यालयों में प्रवेश-(1) ऐसे बालक को जिसने पांच वर्ष की आयु पूरी नहीं की है किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय में कक्षा 1 या समतुल्य कक्षा में अथवा कक्षा 1 से उच्चतर किसी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा ।

(2) ऐसे छात्र को जो किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय में कक्षा 1 से उच्चतर किसी कक्षा में पहली बार प्रवेश पाना चाहता है, उस कक्षा में प्रवेश नहीं दिया जाएगा यदि उसकी आयु में से उस कक्षा और कक्षा 1 या समतुल्य कक्षा की बीच प्रसामान्य विद्यालय अध्ययन के वर्षों की संख्या को घटाने से उसकी आयु पांच वर्ष से कम होती हो ।

(3) किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय में या उसकी किसी कक्षा में प्रवेश इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा विनियमित होगा । 

17. फीस और अन्य प्रभार-(1) प्रत्येक सहायता पाने वाला विद्यालय निदेशक द्वारा विनिर्दिष्ट फीस, प्रभार या अन्य संदाय के सिवाय कोई फीस उद्गृहीत नहीं करेगा या कोई अन्य प्रभार संगृहीत नहीं करेगा और न कोई अन्य संदाय प्राप्त करेगा । 

(2) प्रत्येक सहायता पाने वाला विद्यालय जिसकी फीस या अन्य प्रभारों की दरें भिन्न हैं या जिसकी निधियां भिन्न हैं, ऐसी फीस उद्गृहीत करने या ऐसे प्रभार संगृहीत करने या ऐसी निधियां सृजित करने से पूर्व विहित प्राधिकारी का पूर्वानुमोदन प्राप्त करेगा । 

(3) प्रत्येक मान्यताप्राप्त, विद्यालय का प्रबन्धक प्रत्येक शिक्षा सत्र के प्रारम्भ से पूर्व निदेशक के पास आगामी शिक्षा सत्र के दौरान ऐसे विद्यालय द्वारा उद्गृहीत की जाने वाली फीस का पूरा विवरण फाइल करेगा और निदेशक के पूर्वानुमोदन के सिवाय ऐसा कोई विद्यालय उस शिक्षा सत्र के दौरान, उक्त विवरण में उसके प्रबन्धक द्वारा विनिर्दिष्ट फीस से अधिक कोई फीस प्रभारित नहीं करेगा । 

18. विद्यालय निधि-(1) प्रत्येक सहायता पाने वाले विद्यालय में विद्यालय निधि" के नाम से ज्ञात एक निधि होगी और उसके खाते में, -

(क) प्रशासक द्वारा दी गई सहायता,

(ख) फीस, प्रभारों या अन्य संदायों के रूप में विद्यालय को प्रोद्भूत होने वाली आय, 

(ग) कोई अन्य अभिदाय, विन्यास और वैसी ही राशियां,

जमा की जाएंगी । 

(2) विद्यालय निधि और सभी अन्य निधियों का, जिसके अन्तर्गत प्रशासक के अनुमोदन से स्थापित विद्यार्थी निधि भी है, लेखा जोखा और संचालन इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार होगा । 

(3) प्रत्येक सहायता न पाने वाले मान्यताप्राप्त विद्यालय में सहायता न पाने वाले मान्यताप्राप्त विद्यालय की निधि" के नाम से ज्ञात एक निधि होगी, और उसके खाते में, - 

(क) फीस, 

(ख) कोई प्रभार और संदाय, जो विद्यालय द्वारा अन्य विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए वसूल किए जाएं, तथा

(ग) कोई अन्य अभिदाय, विन्यास, दान और वैसी ही राशियों,

के रूप में विद्यालय को प्रोद्भूत होने वाली आय जमा की जाएगी ।  

(4) (क) सहायता न पाने वाले विद्यालयों द्वारा फीस के रूप में व्युत्पन्न आय केवल ऐसे शैक्षणिक प्रयोजनों के लिए, जो विहित किए जाएं, उपयोग में लाई जाएगी; और 

(ख) वसूल किए गए प्रभार और संदाय तथा विद्यालय द्वारा प्राप्त किए गए सभी अन्य अभिदाय, विन्यास और दान केवल उस विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए उपयोग में लाए जाएंगे जिसके लिए वे वसूल और प्राप्त किए गए थे । 

(5) प्रत्येक मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय की प्रबन्ध समिति प्रत्येक वर्ष निदेशक के पास ऐसी सम्यक्तःः संपरीक्षित वित्तीय और अन्य विवरणियां, जो विहित की जाएं, फाइल करेगी और ऐसी प्रत्येक विवरणी ऐसे प्राधिकारी द्वारा, जो विहित किया जाए, संपरीक्षित की जाएगी । 

19. सम्बद्ध किया जाना-(1) किसी सार्वजनिक परीक्षा के प्रयोजन के लिए प्रत्येक मान्यताप्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ऐसी परीक्षा का संचालन करने के लिए एक या अधिक बोर्ड या परिषद् से सम्बद्ध किया जाएगा और वह बोर्ड या परिषद् द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करेगा । 

(2) मान्यताप्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र ऐसी सार्वजनिक परीक्षाओं या ऐसे अन्य प्रकार के मूल्यांकन के लिए तैयार और प्रस्तुत किए जाएंगे जो ऐसे विद्यालयों के छात्रों के लिए आयोजित की जाएं या किया जाए । 

(3) प्रत्येक मान्यताप्राप्त मध्यवर्ती विद्यालय के छात्र ऐसी सार्वजनिक परीक्षा के लिए तैयार और प्रस्तुत किए जाएंगे जो शिक्षा निदेशालय, दिल्ली द्वारा ऐसे विद्यालयों के छात्रों के लिए आयोजित की जाए । 

(4) मान्यताप्राप्त प्राथमिक विद्यालय के प्रत्येक छात्र को उस सार्वजनिक परीक्षा के लिए तैयार और प्रस्तुत किया जाएगा जो किसी ऐसे स्थानीय प्राधिकारी द्वारा आयोजित की जाए जो ऐसे विद्यालयों के छात्रों के लिए ऐसी परीक्षा आयोजित करने के लिए सक्षम हो । 

अध्याय 7

विद्यालयों का प्रबन्ध ग्रहण

20. विद्यालयों का प्रबन्ध ग्रहण-(1) जब कभी प्रशासक का यह समाधान हो जाता है कि किसी विद्यालय की, चाहे वह मान्यताप्राप्त हो या नहीं, प्रबन्ध समिति या प्रबन्धक ने इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के द्वारा या उसके अधीन उस पर अधिरोपित कर्तव्यों में से किसी कर्तव्य का पालन करने में उपेक्षा की है और यह कि विद्यालय की शिक्षा के हितों में यह समीचीन है कि ऐसे विद्यालय का प्रबन्ध ग्रहण कर लिया जाए तो वह ऐसे विद्यालय की प्रबन्ध समिति या प्रबन्ध को प्रस्तावित कार्यवाही के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर देने के पश्चात् ऐसे विद्यालय का प्रबन्ध ऐसी सीमित कालावधि के लिए, जो तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी, ग्रहण कर सकेगा :

परन्तु जहां किसी विद्यालय का प्रबन्ध तीन वर्ष या कम कालावधि के लिए ग्रहण कर लिया गया है वहां यदि प्रशासक की यह राय है कि उस विद्यालय के उचित प्रबन्ध को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह समीचीन है कि ऐसा प्रबन्ध उक्त सीमित कालावधि के अवसान के पश्चात् प्रवृत्त बना रहना चाहिए तो वह समय-समय पर ऐसे प्रबन्ध की एक समय में, एक वर्ष से अनधिक की ऐसी कालावधि के लिए, जो वह ठीक समझे, जारी रखने के लिए निदेश जारी कर सकेगा किन्तु वह कुल कालावधि जिसके लिए ऐसा प्रबन्ध ग्रहण किया गया है किसी भी दशा में पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी ।

(2) जब कभी उपधारा (1) के अधीन किसी विद्यालय का प्रबन्ध ग्रहण कर लिया जाता है तो ऐसे प्रबन्ध ग्रहण के ठीक पूर्व ऐसे विद्यालय के प्रबन्ध का भारसाधक प्रत्येक व्यक्ति विद्यालय की सम्पत्ति का कब्जा, प्रशासक को या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी को, परिदत्त करेगा । 

(3) इस धारा के अधीन किसी विद्यालय का प्रबन्ध ग्रहण करने के पश्चात् प्रशासक उस विद्यालय का प्रबन्ध, निदेशक अथवा निदेशक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति (जिसे इसमें इसके पश्चात् प्राधिकृत अधिकारी" कहा गया है) की मार्फत करने की व्यवस्था कर सकता है । 

(4) जहां किसी विद्यालय का प्रबन्ध उपधारा (1) के अधीन ग्रहण कर लिया गया है वहां ऐसे विद्यालय की प्रबन्ध समिति या प्रबन्धक, प्रबन्ध ग्रहण की तारीख से तीन मास के भीतर प्रशासक से अपील कर सकेगा जो प्रबन्ध समिति या प्रबन्धक द्वारा किए गए अभ्यावेदन पर विचार करने के पश्चात् ऐसे आदेश पारित कर सकेगा, जैसे वह ठीक समझे, जिनके अन्तर्गत प्रबन्ध के प्रत्यावर्तन का आदेश या उस कालावधि के घटाए जाने का आदेश है जिसके दौरान ऐसे विद्यालय का प्रबन्ध प्रशासक में निहित बना रहेगा । 

(5) जहां किसी विद्यालय का प्रबन्ध इस धारा के अधीन ग्रहण कर लिया गया है वहां प्रशासक उस विद्यालय के भवन के लिए ऐसा भाटक, जो देय हो, जैसा कि ऐसे विद्यालय के प्रबन्ध ग्रहण से ठीक पूर्व प्रबन्ध समिति या प्रबन्धक द्वारा संदत्त किया जा रहा था, ऐसे व्यक्ति को संदत्त करेगा जो उसे पाने का हकदार है ।

(6) ऐसी कालावधि के दौरान जिसमें कोई विद्यालय प्राधिकृत अधिकारी के प्रबन्ध के अधीन रहता है,-

(क) उस विद्यालय के उन कर्मचारियों की जो उस तारीख से जिसको प्रबन्ध ग्रहण किया गया था, ठीक पूर्व नियोजन में थे, प्रशासक द्वारा अनुमोदितक की शर्तों को उनको अहितकर रूप में परिवर्तित न किया जाएगा; 

(ख) वे सभी शैक्षणिक सुविधाएं जो वह विद्यालय ऐसे प्रबन्ध ग्रहण से ठीक पहले प्रदान कर रहा था प्रदत्त की जाती रहेंगी; 

(ग) विद्यालय निधि, विद्यार्थी निधि और प्रबन्ध निधि तथा कोई अन्य विद्यमान निधि विद्यालय के प्रयोजनों के लिए व्यय की जाने के लिए प्राधिकृत अधिकारी को उपलभ्य बनी रहेगी; और 

(घ) ऐसे विद्यालय की प्रबन्ध समिति के किसी अधिवेशन में पारित किसी संकल्प को तब तक प्रभावी नहीं किया जाएगा जब तक कि प्रशासक उसका अनुमोदन न कर दे ।

21. अल्पसंख्यक विद्यालयों को धारा 20 का लागू होना-धारा 20 की कोई बात किसी अल्पसंख्यक विद्यालय को लागू नहीं होगी । 

अध्याय 8

प्रकीर्ण

22. दिल्ली विद्यालय शिक्षा सलाहकार बोर्ड-(1) दिल्ली में शिक्षा सम्बन्धी नीति विषयक मामलों पर प्रशासक को सलाह देने के प्रयोजन से दिल्ली विद्यालय शिक्षा सलाहकार बोर्ड" के नाम से ज्ञात एक विद्यालय शिक्षा सलाहकार बोर्ड होगा । 

(2) सलाहकार बोर्ड का गठन प्रशासक द्वारा किया जाएगा जो एक अध्यक्ष और चौदह अन्य सदस्यों से, जो प्रशासक द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे, मिलकर बनेगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन गठित सलाहकार बोर्ड के अन्तर्गत निम्नलिखित भी हैं- 

(क) मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालयों के प्रधान; 

(ख) मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालयों के अध्यापकों के संगठनों के प्रतिनिधि; 

(ग) मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालयों के प्रबन्धक; 

(घ) मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालयों के छात्रों के माता-पिता या संरक्षकों के प्रतिनिधि; और 

(ङ) प्रतिष्ठित शिक्षाविद् । 

(4) सलाहकार बोर्ड स्वयं अपनी प्रक्रिया का विनियमन करेगा ।

(5) बोर्ड के प्रत्येक सदस्य की पदावधि और उसको देय यात्रा और अन्य भत्ते वे होंगे जो विहित किए जाएं । 

23. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) प्रशासक इस अधिनियम के अधीन अपनी सब शक्तियों, कर्तव्यों और कृत्यों का या उनमें से किसी का प्रत्यायोजन निदेशक या किसी अन्य अधिकारी को कर सकेगा । 

(2) प्रत्येक व्यक्ति जिसे उपधारा (1) के अधीन कोई शक्ति प्रत्यायोजित की जाती है उस शक्ति का प्रयोग उसी प्रकार से और उसी प्रभाव से कर सकेगा मानो उसे ऐसी शक्ति इस अधिनियम द्वारा सीधे, न की प्रत्यायोजन के रूप में, प्रदत्त की गई है । 

24. विद्यालयों का निरीक्षण-(1) प्रत्येक मान्यताप्राप्त विद्यालय का निरीक्षण हर वित्तीय वर्ष में कम से कम एक बार ऐसी रीति से किया जाएगा जो विहित की जाए । 

(2) निदेशक किसी विद्यालय के कार्यकरण के ऐसे पहलुओं के, जो समय-समय पर उसके द्वारा आवश्यक समझे जाएं, विशेष निरीक्षण का भी इन्तजाम कर सकता है । 

(3) निदेशक प्रबन्धक को ऐसे निदेश दे सकता है जिसमें प्रबन्धक से यह अपेक्षा की जाए कि वह निरीक्षण के समय या अन्यथा विद्यालय के कार्यकरण में पाई गई किसी त्रुटि या कमी को दूर करे । 

(4) यदि प्रबन्धक उपधारा (3) के अधीन दिए गए किसी निदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है तो निदेशक प्रबन्धक द्वारा दिए गए किसी स्पष्टीकरण या रिपोर्ट पर, यदि कोई हो, विचार करने के पश्चात् ऐसी कार्रवाई कर सकता है जो वह ठीक समझे और इसके अन्तर्गत- 

(क) सहायता का बन्द किया जाना; 

(ख) मान्यता का वापस लिया जाना; या 

(ग) धारा 20 के अधीन अल्पसंख्यक विद्यालय से भिन्न किसी विद्यालय का प्रबन्ध ग्रहण करना,

आता है । 

25. सिविल न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन-किसी भी सिविल न्यायालय को ऐसे विषय की बाबत अधिकारिता न होगी, जिसके संबंध में प्रशासक या निदेशक या प्रशासक या निदेशक द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य व्यक्ति या इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन नियुक्त या विनिर्दिष्ट कोई अन्य अधिकारी या प्राधिकारी किसी शक्ति का प्रयोग करने के लिए इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन सशक्त है और किसी ऐसी बात की बाबत जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन की जाती है या किए जाने के लिए आशयित है, किसी सिविल न्यायालय द्वारा व्यादेश न दिया जाएगा । 

26. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही प्रशासक, निदेशक अथवा प्रशासक या निदेशक द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी । 

27. दंड के लिए प्रबन्धक का दायित्व-यदि किसी मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय का प्रबन्धक-

(क) अधिकरण द्वारा किए गए किन्हीं आदेशों का किसी युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना पालन करने का लोप करता है या पालन करने में असफल रहता है, अथवा 

(ख) धारा 19 के उपबंधों का अनुपालन किए बिना किसी छात्र को किसी सार्वजनिक परीक्षा में प्रस्तुत करता है, अथवा 

(ग) धारा 20 की उपधारा (2) के अधीन प्रशासक या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी को किसी विद्यालय की सम्पत्ति का परिदान करने में लोप करता है या असफल रहता है,

तो वह कारावास से जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । 

28. नियम बनाने की शक्ति-(1) प्रशासक, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से और पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन, अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए, नियम बना सकेगा ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित बातों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -

(क) वह रीति जिससे प्रशासक द्वारा दिल्ली में शिक्षा को विनियमित किया जा सकता है; 

(ख) वे शर्तें जिनका अनुपालन करने की प्रत्येक विद्यमान विद्यालय से अपेक्षा की जाएगी;   

(ग) नए विद्यालय की स्थापना या किसी विद्यमान विद्यालय में उच्चतर कक्षा का खोलना या किसी विद्यमान कक्षा का बन्द करना; 

(घ) वह प्ररूप और रीति जिससे किसी विद्यालय को मान्यता देने के लिए आवेदन किया जाएगा; 

(ङ) वे सुविधाएं जिनकी व्यवस्था मान्यताप्राप्त करने के लिए किसी विद्यालय द्वारा की जाएंगी; 

(च) वह रीति जिससे और वह प्राधिकारी जिसको मान्यता देने से इंकार या उसके वापस लिए जाने के विरुद्ध अपील की जाएगी; 

(छ) कर्मचारियों की सेवा की निम्नतम अर्हताएं और उनकी भर्ती का ढंग तथा सेवा के निबंधन और शर्तें; 

(ज) वे प्राधिकारी जो इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के प्रयोजनों के लिए विनिर्दिष्ट किए जाएंगे;

(झ) विशिष्टियां, जो प्रबन्ध की किसी स्कीम में अन्तर्विष्ट होंगी और वह रीति जिससे ऐसी स्कीम बनाई जाएगी; 

(ञ) वे परिवर्तन और संशोधन जो किसी ऐसे मान्यताप्राप्त विद्यालय के, जो किसी प्रकार की सहायता प्राप्त नहीं करता है, प्रबन्ध की स्कीम में किए जा सकेंगे; 

(ट) वे शर्तें जिनके अधीन मान्यताप्राप्त विद्यालयों को सहायता दी जा सकती है और जिनके अतिक्रमण करने पर सहायता रोकी जा सकती है, कम की जा सकती है या निलंबित की जा सकती है; 

(ठ) किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय के व्यय का वह भाग जो सहायता द्वारा पूरा किया जाएगा; 

(ड) विद्यालय की सम्पत्ति की वे विशिष्टियां जो समुचित अधिकारी को दी जानी चाहिएं; 

(ढ) वह प्ररूप जिसमें और वह समय जिसके दौरान, किसी विद्यालय की सम्पत्ति के अंतरण, बंधक या धारणाधिकार के सम्बन्ध में किए गए किसी आदेश के विरुद्ध अपील, प्रशासक से की जाएगी; 

(ण) कर्मचारियों के लिए आचरण संहिता और उसके अतिक्रमण के लिए की जाने वाली कार्रवाई;

(त) प्रसुविधाएं, जो मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय के कर्मचारियों को दी जानी चाहिएं;  

(थ) किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय में प्रवेश; 

(द) वे फीसें और अन्य प्रभार जो सहायता पाने वाले विद्यालयों द्वारा संगृहीत किए जाएंगे; 

(ध) मान्यताप्राप्त विद्यालयों के निरीक्षण की रीति; 

(न) सलाहकार बोर्ड के सदस्यों की पदावधि, उनको देय यात्रा तथा अन्य भत्ते; 

(प) मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालयों की प्रबन्ध समिति द्वारा वित्तीय और अन्य विवरणियों का फाइल किया जाना तथा वह प्राधिकारी जिसके द्वारा ऐसी विवरणियों की संपरीक्षा की जाएगी; 

(फ) वे शैक्षणिक प्रयोजन जिनके लिए सहायता न पाने वाले मान्यताप्राप्त विद्यालयों द्वारा फीस के रूप में व्युत्पन्न आय, खर्च की जाएगी; 

(ब) विद्यालय निधियों तथा किसी मान्यताप्राप्त प्राइवेट विद्यालय की अन्य निधियों का लेखाजोखा रखने और उनके संचालन की रीति; 

(भ) इस अधिनियम के अधीन कोई अपील करने के लिए फीस, जो एक रुपए से अनधिक होगी; 

(म) कोई अन्य बात जो इस अधिनियम के अधीन विहित की जानी है या की जा सकती है ।

(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा । 

29. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार ऐसे आदेश द्वारा जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकती हैः

परन्तु ऐसा कोई भी आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की कालावधि के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

-----------------

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : Smt. Nirmala Devi Bam Memorial International Moot Court Competition

 
 
Latestlaws Newsletter