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दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 ( Delhi Police Act, 1978 )


 

दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978

(1978 का अधिनियम संख्यांक 34)

[27 अगस्त, 1978]

दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र में पुलिस के विनियमन से सम्बन्धित

विधि का संशोधन और समेकन

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के उनतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 है

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र पर है

(3) यह 1 जुलाई, 1978 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो,-

() प्रशासक" से संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त दिल्ली का प्रशासक अभिप्रेत है ;

() ढोर" से अन्तर्गत हाथी, ऊंट, घोड़े, गधे, खच्चर, भेड़ें, बकरियां, और सुअर हैं ;

() इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन किसी शक्ति के प्रयोग या किसी कर्तव्य के पालन के प्रति निर्देश से प्रयुक्त सक्षम प्राधिकारी" से, धारा 6 के अधीन नियुक्त पुलिस आयुक्त या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विशेषतः सशक्त किया गया कोई अन्य पुलिस अधिकारी अभिप्रेत है ;

() कांस्टेबल" से निम्नतम श्रेणी का कोई पुलिस अधिकारी अभिप्रेत है ;

() निगम" से दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 (1957 का 66) के अधीन गठित दिल्ली नगर निगम  अभिप्रेत है ;

() दिल्ली" से दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है ;

() दिल्ली पुलिस" या पुलिस बल" से धारा 3 में निर्दिष्ट पुलिस बल अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत हैं-

(i) ऐसे सभी व्यक्ति जिन्हें धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन विशेष पुलिस अधिकारियों के रूप में और धारा 18 के अधीन अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों के रूप में नियुक्त किया गया है ; और

(ii) ऐसे सभी अन्य व्यक्ति चाहे उनका जो भी नाम हो, जो दिल्ली के किसी भाग में किसी पुलिस कृत्य का पालन करते हैं ;

() भोजनालय" से कोई ऐसा स्थान अभिप्रेत है जो सार्वजनिक प्रवेश के लिए है और जहां किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो ऐसे स्थान का स्वामी है या जिसका उसमें कोई हित है या जो उसका प्रबन्ध करता है, उस परिसर पर उपभोग के लिए, किसी प्रकार के खाद्य या पेय का प्रदाय किया जाता है और इसके अन्तर्गत हैं,-

(i) कोई जलपान कक्ष, बोर्डिंग हाउस, या काफी हाउस ; या

(ii) ऐसी कोई दुकान जहां उस दुकान में या उसके निकट उपभोग के लिए, जनता को किसी प्रकार का खाद्य या पेय प्रदाय किया जाता है,

किन्तु इसके अन्तर्गत कोई सार्वजनिक मनोरंजन का स्थान नहीं है ;

() नगरपालिका" से दिल्ली में या उसके किसी भाग में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित की गई नई दिल्ली नगरपालिका, छावनी बोर्ड या निगम से भिन्न कोई अन्य नगरपालिका निकाय अभिप्रेत है ;

() स्थान" के अन्तर्गत है-

(i) कोई भवन, तम्बू, बूथ या अन्य परिनिर्माण, चाहे वह स्थायी हो या अस्थायी ; और

(ii) कोई क्षेत्र, चाहे वह खुला हो या घिरा हुआ हो ;

() सार्वजनिक आमोद का स्थान" से ऐसा कोई स्थान अभिप्रेत है जहां संगीत, गायन, नृत्य या खेल या कोई अन्य आमोद, मनोविनोद या मनोरंजन या उसे चलाने के साधनों की व्यवस्था की जाती है और जो या तो धन के संदाय पर या इस आशय से सार्वजनिक प्रवेश के लिए है कि उसमें प्रवेश करने वाले व्यक्तियों से धन संग्रह किया जा सके, और इसके अन्तर्गत घुड़दौड़ का मैदान, सरकस, नाट्यशाला, संगीत कक्ष, बिलियर्ड या बेगटल कक्ष, व्यायामशाला, पटेबाजी का स्कूल, तैरने का तालाब या नृत्य कक्ष है ;

() सार्वजनिक मनोरंजन का स्थान" से अभिप्रेत है वासगृह, भोजन और वासगृह या निवास-होस्टल, और इसके अन्तर्गत है कोई भोजनालय या अन्य ऐसा स्थान जिसमें या जिसके निकट जनता को उपभोग के लिए किसी प्रकार की शराब या मादक ओषधि का प्रदाय किया जाता है (जैसे मधुशाला या कोई दुकान जहां बीयर, स्पिरिट, अर्क, ताड़ी, गांजा, भांग या अफीम प्रदाय की जाती है) ;

() पुलिस अधिकारीसे दिल्ली पुलिस कोई सदस्य अभिप्रेत है ;

() विहित" से नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

() सार्वजनिक स्थान" से कोई ऐसा स्थान अभिप्रेत है जहां जनता की पहुंच साधिकार या अन्यथा हो सकती है, और इसके अन्तर्गत हैं-

(i) कोई सार्वजनिक भवन या स्मारक और उसका प्रसीमाएं ; और

(ii) ऐसा कोई स्थान जिस तक जल निकालने, धुलाई करने या नहाने या आमोद-प्रमोद के प्रयोजनों के लिए जनता की पहुंच हो सकती है ;

() विनियम" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं ;

() नियम" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम अभिप्रेत हैं ;

() मार्ग" के अन्तर्गत कोई ऐसा राजमार्ग, पुल, सेतु के ऊपर रास्ता, उतार या महराब या कोई सड़क, गली, पैदलपथ, चौक, मैदान, वीथि या पथ है, जिस पर जनता जा सकती है, चाहे वह आम रास्ता हो या नहीं ;

() अधीनस्थ पंक्ति" से पुलिस बल के ऐसे सदस्य अभिप्रेत हैं जो निरीक्षक की पंक्ति के या उससे नीचे के हैं ;

() यान" से कोई गाड़ी, बैलगाड़ी, वैन, बोझा ढ़ोने की भारी नीची गाड़ी, ट्रक, हथगाड़ी या किसी भी वर्णन की अन्य सवारी अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत कोई साइकिल, तीन पहिए वाली साइकिल, रिक्शा, मोटर यान, जलयान या कोई विमान भी है

अध्याय 2

पुलिस बल का संगठन, अधीक्षण और नियंत्रण

3. सम्पूर्ण दिल्ली के लिए एक पुलिस बल-सम्पूर्ण दिल्ली के लिए एक पुलिस बल होगा और पुलिस बल के सभी अधिकारियों और अधीनस्थ पंक्ति के कर्मचारियों को बल की किसी भी शाखा में जिसके अन्तर्गत दिल्ली सशस्त्र पुलिस भी है, तैनात किया जा सकेगा

4. पुलिस बल का अधीक्षण प्रशासक में निहित होना-सम्पूर्ण दिल्ली में दिल्ली पुलिस का अधीक्षण प्रशासक में निहित होगा तथा वही उसका प्रयोग कर सकेगा और पुलिस बल के किसी सदस्य पर किसी अधिकारी द्वारा प्रयोग किए जाने वाले नियंत्रण, निदेशन या पर्यवेक्षण का प्रयोग ऐसे अधीक्षण के अधीन होगा

5. पुलिस बल का गठन-इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए,-

() दिल्ली पुलिस की विभिन्न पंक्तियों में उतने व्यक्ति होंगे और उनका ऐसा संगठन होगा तथा ऐसी शक्तियां, कृत्य और कर्तव्य होंगे जो प्रशासक, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, अवधारित करे ; और

() दिल्ली पुलिस में भर्ती, और उसके सदस्यों का वेतन, भत्ते तथा सेवा की अन्य सभी शर्तें ऐसी होंगी जो विहित की जाएं :

परन्तु खण्ड () की कोई भी बात भारतीय पुलिस सेवा या दिल्ली, अंदमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा के सदस्यों की भर्ती, उनके वेतन, भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तों को लागू नहीं होगी

6. पुलिस आयुक्त-प्रशासक दिल्ली में पुलिस बल के निदेशन और पर्यवेक्षण के लिए, एक पुलिस आयुक्त नियुक्त करेगा आयुक्त ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन करेगा और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन विनिर्दिष्ट किए गए हैं

7. पुलिस अपर आयुक्त-(1) प्रशासक इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक या अधिक पुलिस अपर आयुक्त नियुक्त कर सकेगा

                (2) पुलिस अपर आयुक्त,-

() पुलिस आयुक्त की शक्तियों के प्रयोग और उसके कर्तव्यों के पालन में उसकी सहायता ऐसी रीति से और ऐसे विस्तार तक करेगा जो प्रशासक साधारण या विशेष आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, और

() पुलिस आयुक्त की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन, ऐसी स्थानीय सीमाओं के भीतर करेगा जो प्रशासक, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे

8. पुलिस उप आयुक्त, पुलिस अपर उप आयुक्त और पुलिस सहायक आयुक्त-(1) प्रशासक इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक या अधिक पुलिस उप आयुक्त या पुलिस अपर उप आयुक्त या पुलिस सहायक आयुक्त नियुक्त कर सकेगा

                (2) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना और प्रशासक द्वारा इस निमित्त किए गए साधारण या विशेष आदेशों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक पुलिस उप आयुक्त या पुलिस अपर उप आयुक्त या पुलिस सहायक आयुक्त, पुलिस आयुक्त के आदेशों के अधीन, पुलिस आयुक्त की ऐसी शक्तियों का (विनियम बनाने की शक्ति को छोड़कर) प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन, ऐसी स्थानीय सीमाओं के भीतर करेगा जो ऐसे आदेशों में विनिर्दिष्ट की जाएं

9. पुलिस प्रशिक्षण संस्थाओं के प्रधानाचार्यों की नियुक्ति-(1) () प्रशासक किसी पुलिस अधिकारी को, जो पुलिस उप आयुक्त की पंक्ति से नीचे का नहीं है, दिल्ली के पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के प्रधानाचार्य के रूप में नियुक्त करेगा

() पुलिस आयुक्त, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के प्रधानाचार्य को ऐसी शक्तियां और कर्तव्य सौंप सकेगा जो वह उस स्कूल के उचित कार्यकरण के लिए ठीक समझे

 (2) () प्रशासक दिल्ली के लिए एक पुलिस प्रशिक्षण कालेज स्थापित कर सकेगा और ऐसे कालेज के प्रधानाचार्य के रूप में समुचित पंक्ति के किसी पुलिस अधिकारी को नियुक्त कर सकेगा

() पुलिस आयुक्त, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, पुलिस प्रशिक्षण कालेज के प्रधानाचार्य को ऐसी शक्तियां और कर्तव्य सौंप सकेगा जो वह उस कालेज के उचित प्रशासन के लिए ठीक समझे

10. पुलिस जिलों, पुलिस उपखंडों और पुलिस थानों का गठन-प्रशासक के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, पुलिस आयुक्त-

() दिल्ली के भीतर पुलिस जिले गठित करेगा ;

() ऐसे पुलिस जिलों का पुलिस उपखंडों में विभाजन करेगा और ऐसे प्रत्येक उपखंड में कितने पुलिस थाने होंगे, यह विनिर्दिष्ट करेगा ; और

() ऐसे पुलिस जिलों, पुलिस उपखंडों और पुलिस थानों की सीमाएं और विस्तार परिनिश्चित करेगा

11. पुलिस जिलों, पुलिस उपखंडों और पुलिस थानों के भारसाधक अधिकारी-(1) प्रत्येक पुलिस जिला एक पुलिस उप आयुक्त के भारसाधन में होगा उसके कर्तव्यों के पालन में उसकी सहायता करने के लिए एक या अधिक पुलिस अपर उप आयुक्त हो सकेंगे

(2) प्रत्येक पुलिस उपखंड एक पुलिस सहायक आयुक्त के तथा प्रत्येक पुलिस थाना एक पुलिस निरीक्षक के भारसाधन में होगा

12. अधीनस्थ पंक्तियों में नियुक्ति-ऐसे साधारण या विशेष लिखित आदेशों के अधीन रहते हुए, जो प्रशासक इस निमित्त करे,-

() पुलिस निरीक्षकों की नियुक्ति पुलिस अपर आयुक्त कर सकेगा ; और

() पुलिस उप-निरीक्षकों और अधीनस्थ पंक्ति के अन्य अधिकारियों की नियुक्ति, पुलिस उप आयुक्त, पुलिस अपर उप आयुक्त, पुलिस प्रशिक्षण कालेज या पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के प्रधानाचार्य या समान पंक्ति के किसी अन्य पुलिस अधिकारी द्वारा की जा सकेगी

13. नियुक्ति का प्रमाणपत्र-(1) निरीक्षक और उससे निचली पंक्ति का प्रत्येक पुलिस अधिकारी, अभ्यावेशन पर, नियुक्ति का एक प्रमाणपत्र प्राप्त करेगा

                (2) उक्त प्रमाणपत्र ऐसे अधिकारी की मुद्रा लगाकर ऐसे प्ररूप में जारी किया जाएगा जो प्रशासक किसी साधारण या विशेष आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे

                (3) जब नियुक्ति के प्रमाणपत्र में नामित व्यक्ति किसी समय दिल्ली पुलिस में नहीं रह जाता है तो नियुक्ति का प्रमाणपत्र बातिल और शून्य हो जाएगा या वह ऐसी अवधि के दौरान अप्रवर्तनशील रहेगा जिसमें ऐसा व्यक्ति दिल्ली पुलिस से निलम्बित रहता है

14. पुलिस अधिकारी के निलम्बन का प्रभाव-किसी पुलिस अधिकारी में निहित शक्तियां, कृत्य और विशेषाधिकार, पद से उसके निलम्बित रहने के दौरान, निलम्बित रहेंगे :

परन्तु ऐसे निलम्बन के होते हुए भी, ऐसा व्यक्ति पुलिस अधिकारी ही बना रहेगा और उन्हीं प्राधिकारियों के नियंत्रण के अधीन बना रहेगा जिनके अधीन वह उस दशा में होता यदि वह निलम्बित नहीं किया गया होता

15. पुलिस आयुक्त की साधारण शक्तियां-पुलिस आयुक्त आयुधों, ड्रिल, व्यायाम, व्यक्तियों और घटनाओं पर नजर रखने, पारस्परिक संबंधों, कर्तव्य-वितरण, विधियों, आदेशों और कार्यवाहियों की रीतियों के अध्ययन से सम्बन्धित सभी विषयों तथा कार्यपालन ब्यौरे से या उसके अधीन पुलिस बल द्वारा अपने कर्तव्यों के पालन से सम्बन्धित सभी विषयों का निदेशन और विनियमन करेगा

16. पुलिस आयुक्त की पुलिस लेखा सम्बन्धी विषयों का अन्वेषण और विनियमन करने के शक्ति-पुलिस आयुक्त को, दिल्ली पुलिस से सम्बन्धित लेखा के सभी विषयों के अन्वेषण और विनियमन का प्राधिकार होगा और सभी सम्बद्ध व्यक्ति ऐसे अन्वेषण करने में उसे समुचित सहायता और सुविधाएं देने तथा अन्वेषण के परिणामस्वरूप किए जाने वाले उसके आदेशों का पालन करने के लिए आबद्ध होंगे

17. विशेष पुलिस अधिकारी-(1) पुलिस आयुक्त, किसी भी समय, लिखित आदेश द्वारा, जिस पर उसके हस्ताक्षर और अपनी मुद्रा होगी, कम से कम अठारह वर्ष की आयु के किसी भी हृष्ट-पुष्ट पुरुष को, जिसे वह ठीक समझे, किसी ऐसे अवसर पर पुलिस बल की सहायता करने के लिए विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकेगा, जब किसी क्षेत्र में कोई बलवा होने या गंभीर परिशान्ति-विक्षोभ की आशंका के लिए उसके पास कारण है और उसकी यह राय है कि ऐसे क्षेत्र के भीतर निवास करने वाले व्यक्तियों के संरक्षण और सम्पत्ति की सुरक्षा के लिए साधारण पुलिस बल पर्याप्त नहीं है

(2) पुलिस आयुक्त इस धारा के अधीन नियुक्त विशेष पुलिस अधिकारियों के नाम ऐसी रीति से प्रकाशित करेगा जो विहित की जाए

(3) कोई व्यक्ति जो किसी व्यक्ति की ऐसे विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में नियुक्ति पर आक्षेप करता है, ऐसी नियुक्ति से पन्द्रह दिन के भीतर पुलिस आयुक्त को ऐसे आक्षेप के कारण भेज सकेगा और आयुक्त ऐसा आक्षेप स्वीकार कर सकेगा और ऐसे अधिकारी की नियुक्ति रद्द कर सकेगा या आक्षेप करने वाले व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, आक्षेप को नामंजूर कर सकेगा

(4) इस धारा के अधीन नियुक्त प्रत्येक विशेष पुलिस अधिकारी, नियुक्त हो जाने पर,-

() ऐसे प्ररूप में नियुक्ति का प्रमाणपत्र प्राप्त करेगा जो इस निमित्त प्रशासक द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ;

() उसकी वही शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां होंगी और वह उन्हीं कर्तव्यों का पालन करेगा तथा उन्हीं प्राधिकारियों के अधीन होगा जैसे कि साधारण पुलिस अधिकारी होता है

18. अतिरिक्त पुलिस अधिकारी-जहां धारा 38, धारा 39 या धारा 40 के अधीन अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की अपेक्षा है वहां पुलिस आयुक्त इतने अतिरिक्त पुलिस अधिकारी नियुक्त कर सकेगा जितने वह आवश्यक समझे और ऐसा प्रत्येक अतिरिक्त पुलिस अधिकारी, नियुक्त हो जाने पर,-

() ऐसे प्ररूप में नियुक्ति का प्रमाणपत्र प्राप्त करेगा जो इस निमित्त प्रशासक द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ;

() उसकी वही शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां होंगी और वह पुलिस अधिकारी के उन्हीं कर्तव्यों का पालन करेगा जो प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट रूप से वर्णित हों ; और

() उन्हीं प्राधिकारियों के अधीन होगा जिनके अधीन उसी या समान पंक्ति या श्रेणी का साधारण पुलिस अधिकारी होता है

अध्याय 3

दिल्ली पुलिस का विनियमन, नियंत्रण और अनुशासन

19. पुलिस प्रशासन के लिए विनियम बनाना-प्रशासक के आदेशों के अधीन रहते हुए, पुलिस आयुक्त निम्नलिखित के सम्बन्ध में ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि से असंगत नहीं हैं, अर्थात् :-

() अपने अधीनस्थों द्वारा पुलिस बल के निरीक्षण का विनियमन ;

() पुलिस को दिए जाने वाले आयुधों, साज-सज्जा, वस्त्रों और अन्य आवश्यक वस्तुओं के प्रकार और परिमाण   का अवधारण ;

() पुलिस बल के सदस्यों के निवास स्थानों का विहित किया जाना ;

() पुलिस-प्रशासन से संबंधित किसी प्रयोजन के लिए, किसी पुलिस निधि की स्थापना, प्रबन्ध और विनियमन ;

() पुलिस के वितरण, संचलनों और अवस्थिति का विनियमन ;

() सभी पंक्तियों और श्रेणियों के पुलिस अधिकारियों को कर्तव्यों का सौंपा जाना, और वह रीति तथा वे शर्तें विहित करना जिसमें तथा जिनके अधीन रहते हुए वे अपनी-अपनी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन करेंगे ;

() पुलिस द्वारा आसूचना और जानकारी के संग्रहण और उसकी संसूचना देने का विनियमन ;

() साधारणतया पुलिस को दक्ष बनाना और उसके कर्तव्यों के दुरुपयोग या उपेक्षा को रोकना ;

20. पुलिस आयुक्त विवरणियां मंगा सकेगा-पुलिस आयुक्त, अपराध रोकने और उसका पता लगाने, व्यवस्था बनाए रखने और अपने अधीनस्थों के कर्तव्यों के पालन से सम्बद्ध किसी विषय की बाबत ऐसी विवरणियां, रिपोर्टें और विवरण मंगा सकेगा जो ऐसे अधीनस्थ उसे प्रस्तुत कर सकते हों

21. दंड देने की शक्तियां-(1) संविधान के अनुच्छेद 311 और नियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, पुलिस आयुक्त, पुलिस अपर आयुक्त, पुलिस उप आयुक्त, पुलिस अपर उप आयुक्त, पुलिस प्रशिक्षण कालेज या पुलिस प्रशिक्षण स्कूल का प्रधानाचार्य या समान पंक्ति का कोई अन्य अधिकारी, अधीनस्थ पंक्ति के किसी पुलिस अधिकारी को निम्नलिखित में से कोई भी दंड दे सकेगा, अर्थात् :-

                                () पदच्युति ;

                                () सेवा से हटाना ;

                                () अवनति ;

                                () अनुमोदित सेवा या समपहरण ;

                                () वेतन में कमी ;

                                () वेतनवृद्धि रोकना ; और

                                () जुर्माना, जो एक मास के वेतन से अधिक नहीं होगा

                (2) नियमों के अधीन रहते हुए,-

() उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई पुलिस अधिकारी, अधीनस्थ पंक्ति के किसी पुलिस अधिकारी को परिनिन्दा का दंड दे सकेगा ;

() पुलिस सहायक आयुक्त, पुलिस उप निरीक्षकों की या उससे निचली पंक्ति के पुलिस अधिकारियों को परिनिन्दा का दंड दे सकेगा ;

() निरीक्षक की या उसके ऊपर की पंक्ति का कोई पुलिस अधिकारी कांस्टेबलों को अधिक से अधिक पन्द्रह दिन का ड्रिल-दंड या फटीग-ड्यूटी या कोई अन्य दंडस्वरूप-ड्यूटी दे सकेगा

                (3) उपधारा (1) या उपधारा (2) की कोई बात किसी पुलिस अधिकारी के ऐसे किसी अपराध के लिए जो उसने किया है, अभियोजित और दण्डित किए जाने के दायित्व पर कोई प्रभाव नहीं डालेगी

                (4) पुलिस आयुक्त, पुलिस अपर आयुक्त, पुलिस उप आयुक्त, पुलिस अपर उप आयुक्त, पुलिस प्रशिक्षण कालेज या पुलिस प्रशिक्षण स्कूल का प्रधानाचार्य, पुलिस सहायक आयुक्त या समान पंक्ति का कोई अन्य पुलिस अधिकारी अधीनस्थ पंक्ति के किसी पुलिस अधिकारी को, जिसके बारे में यह युक्तियुक्त संदेह है कि वह अवचार का दोषी है, ऐसे अवचार के लिए अन्वेषण या जांच के लम्बित रहने तक, निलम्बित कर सकेगा

                (5) पुलिस निरीक्षक, पुलिस उप निरीक्षक की पंक्ति से नीचे की पंक्ति के किसी पुलिस अधिकारी को, जिसके बारे में यह युक्तियुक्त संदेह है कि वह अवचार का दोषी है, ऐसे अवचार के लिए अन्वेषण या जांच के लम्बित रहने तक, निलम्बित कर सकेगा

22. दंड देने में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया-यदि कोई अधिकारी पदच्युति, सेवा से हटाने, अवनति, सेवा के समपहरण, वेतन में कमी, वेतनवृद्धियां रोकने या जुर्माने के दंड का आदेश करता है तो वह नियमों के अनुसार आदेश को उसके कारणों सहित, लेखबद्ध करेगा या लेखबद्ध कराएगा

23. दंडादेशों के विरुद्ध अपील-किसी पुलिस अधिकारी के विरुद्ध धारा 21 या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन पारित किए गए दंडादेश [जो उस धारा की उपधारा (2) के खण्ड () के अधीन दण्डादेश नहीं हैंट के विरुद्ध अपील,-

                                () जहां आदेश पुलिस आयुक्त ने पारित किया है, प्रशासक को ;

                                () जहां आदेश किसी पुलिस अपर आयुक्त ने पारित किया है, पुलिस आयुक्त को ;

() जहां आदेश पुलिस उप आयुक्त, पुलिस अपर उप आयुक्त, पुलिस प्रशिक्षण कालेज या स्कूल के प्रधानाचार्य, पुलिस सहायक आयुक्त या समान पंक्ति के किसी अन्य अधिकारी ने पारित किया है, पुलिस अपर आयुक्त को की जाएगी

24. पुलिस अधिकारी सदैव ड्यूटी पर समझे जाएंगे और उन्हें दिल्ली के किसी भी भाग में नियोजित किया जा सकेगा-प्रत्येक पुलिस अधिकारी, जो अवकाश पर या निलम्बनाधीन नहीं है, इस अधिनियम के सभी प्रयोजनों के लिए सदैव ड्यूटी पर समझा जाएगा और दिल्ली के किसी भी भाग में ड्यूटी के लिए आबंटित किसी पुलिस अधिकारी को या कितने ही पुलिस अधिकारियों या उनके दस्तों को, यदि पुलिस आयुक्त ऐसा निदेश करे तो, किसी भी समय, दिल्ली के किसी अन्य भाग में पुलिस ड्यूटी देने के लिए तब तक के लिए नियोजित किया जा सकता है जब तक कि उस पुलिस अधिकारी या उतने पुलिस अधिकारियों या उनके दस्तों की सेवाएं दिल्ली के ऐसे अन्य भाग में अपेक्षित हैं

25. किन परिस्थितियों में अधीनस्थ पंक्ति का पुलिस अधिकारी पदत्याग कर सकता है-(1) अधीनस्थ पंक्ति के पुलिस अधिकारी का त्यागपत्र वही अधिकारी स्वीकार कर सकता है जो ऐसे अधीनस्थ पंक्ति के अधिकारियों को नियुक्त करने के लिए सशक्त है (नियुक्त करने के लिए इस प्रकार सशक्त अधिकारी को इस धारा में इसके आगे नियुक्ति प्राधिकारी कहा गया है)

                (2) अधीनस्थ पंक्ति का पुलिस अधिकारी, जो पुलिस सेवा से पदत्याग करना चाहता है, लिखित रूप में उस आशय की सूचना, नियुक्ति प्राधिकारियों को देगा और उसे ड्यूटी से अलग होने की अनुज्ञा तब तक नहीं दी जाएगी जब तक कि नियुक्ति प्राधिकारी उसे पदत्याग करने की अनुज्ञा नहीं दे देता और उसके त्यागपत्र देने के पश्चात् दो मास नहीं बीत जाते :

                परन्तु नियुक्ति प्राधिकारी, स्वविवेकानुसार, प्रधान कांस्टेबल या कांस्टेबल को ड्यूटी से अलग होने की अनुज्ञा, ऐसी सूचना के बदले में उसके द्वारा दो मास का वेतन सरकारी खाते में जमा करने पर, दे सकता है

                (3) प्रधान कांस्टेबल या कांस्टेबल को, जिसने किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए सेवा करने का करार किया है, उस अवधि की समाप्ति के पूर्व पदत्याग करने की अनुज्ञा नहीं दी जा सकेगी

                (4) पुलिस निरीक्षकों, पुलिस उप निरीक्षकों या पुलिस सहायक उप निरीक्षकों को, जिनकी नियुक्ति के लिए किसी पुलिस प्रशिक्षण कालेज या पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में प्रशिक्षण होता है, सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने की तारीख से तीन वर्ष के भीतर पदत्याग करने की अनुज्ञा नहीं दी जा सकेगी

                (5) अधीनस्थ पंक्ति के किसी पुलिस अधिकारी को, जिसका त्यागपत्र नियुक्ति प्राधिकारी ने स्वीकार कर लिया है, ड्यूटी से अलग होने की अनुज्ञा तब तक नहीं दी जाएगी जब तक कि वह सरकार या किसी पुलिस निधि को ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में उसके द्वारा शोध्य सभी ऋण, पूर्ण रूप से चुका नहीं देता और अपना नियुक्ति प्रमाणपत्र, आयुध, साज-सज्जा, वर्दी और सभी अन्य सरकारी सम्पत्ति, जो उसके कब्जे में है, अभ्यर्पित नहीं कर देता तथा सभी सरकारी धन और सम्पत्ति का, जिसके लिए वह जिम्मेदार है, पूर्ण लेखा नहीं दे देता

                (6) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, यदि अधीनस्थ पंक्ति का कोई पुलिस अधिकारी चिकित्सीय आधार पर अपना त्यागपत्र देता है और पुलिस शल्यचिकित्सक द्वारा या प्रशासक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करता है, जिसमें उसे किसी रोग या मानसिक अथवा शारीरिक असमर्थता के कारण पुलिस में आगे सेवा करने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है तो सरकार या किसी पुलिस निधि को ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में उसके द्वारा शोध्य कोई ऋण उसके द्वारा चुका दिए जाने पर या उसके संदाय के लिए सन्तोषप्रद रूप में प्रतिभूति दे दी जाने पर नियुक्ति प्राधिकारी उसे ड्यूटी से अलग होने के लिए तुरन्त अनुज्ञा दे देगा :

                परन्तु उसको ड्यूटी से अलग होने देने से पूर्व वह नियुक्ति प्रमाणपत्र, आयुध, साज-सज्जा, वर्दी और अन्य सभी सरकारी सम्पत्ति, जो उसके कब्जे में है, तुरन्त लौटा देगा

(7) यदि अधीनस्थ पंक्ति का ऐसा कोई पुलिस अधिकारी इस धारा के उल्लंघन में पदत्याग करता है या अपने पद की ड्यूटी से अलग हो जाता है तो नियुक्ति प्राधिकारी के आदेशों पर, किसी ऐसी शास्ति के अतिरिक्त जिससे वह धारा 22 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन दण्डनीय है, उसे शोध्य उसका सभी बकाया वेतन समपहृत किया जा सकेगा

                (8) पूर्वोक्त रूप में दिल्ली पुलिस की सेवा छोड़ने पर प्रत्येक पुलिस अधिकारी को नियुक्ति प्राधिकारी, ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, एक सेवोन्मुक्ति प्रमाणपत्र देगा

26. पुलिस अधिकारी रह जाने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रमाणपत्र, आयुधों, आदि का परिदान-(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो किसी कारण पुलिस अधिकारी नहीं रह जाता है, अपना नियुक्ति प्रमाणपत्र और आयुध, साज-सज्जा, वस्त्र और अन्य उपसाधन, जो उसे उसके पद से सम्बन्धित कर्तव्यों के पालन और कृत्यों के निर्वहन के लिए दिए गए हैं, पुलिस आयुक्त, पुलिस अपर आयुक्त, पुलिस उप आयुक्त, पुलिस प्रशिक्षण कालेज या पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के प्रधानाचार्य, पुलिस अपर उप आयुक्त या समान पंक्ति के ऐसे किसी अन्य अधिकारी द्वारा, जिसके अधीनस्थ ऐसा पुलिस अधिकारी है, उक्त वस्तुएं प्राप्त करने के लिए सशक्त किसी अधिकारी को तुरन्त  परिदत्त करेगा

(2) () कोई महानगर मजिस्ट्रेट और विशेष कारणों से, जो उस समय लेखबद्ध किए जाएंगे, पुलिस आयुक्त, पुलिस अपर आयुक्त या पुलिस प्रशिक्षण कालेज या पुलिस प्रशिक्षण स्कूल का प्रधानाचार्य या पुलिस उप आयुक्त, पुलिस अपर उप आयुक्त या कोई पुलिस सहायक आयुक्त, किसी प्रमाणपत्र, आयुधों, साज-सज्जा, वस्त्र या अन्य उपसाधनों की बाबत, जिनका उपधारा (1) के अधीन परिदान नहीं किया गया है, तलाशी के लिए और वे जहां भी पाए जाएं, उनके अभिग्रहण के लिए, वारण्ट जारी कर सकेगा

() इस प्रकार जारी किया गया प्रत्येक वारण्ट किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या यदि वारण्ट जारी करने वाला महानगर मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी निदेश दे तो किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, ऐसी रीति से निष्पादित किया जाएगा मानो वह दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के अधीन जारी किया गया तलाशी के लिए वारण्ट हो

(3) इस धारा की कोई बात किसी ऐसी वस्तु के संबंध में लागू नहीं होगी जो पुलिस आयुक्त के आदेशों के अधीन, उस व्यक्ति की सम्पत्ति हो गई है जिसे वह दी गई थी

27.  पुलिस अधिकारियों के लिए दिए गए परिसरों का अधिभोग और उन्हें खाली करने की जिम्मेदारी-(1) किसी ऐसे परिसर का अधिभोगी पुलिस अधिकारी, जो पुलिस आयुक्त द्वारा उसे उसके निवास के लिए दिया गया है,-

() ऐसे निबन्धनों और शर्तों के अधीन रहते हुए उसे अधिभोग में रखेगा जो पुलिस आयुक्त, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ; और

() उस परिसर को, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, पुलिस अधिकारी रह जाने पर अथवा जब कभी पुलिस आयुक्त या प्रशासक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह आवश्यक या समीचीन समझते हुए उससे ऐसी अपेक्षा करे तो खाली कर देगा

                (2) यदि कोई व्यक्ति जो उपधारा (1) के अधीन किसी परिसर को खाली करने के लिए आबद्ध है या जिससे खाली करने की अपेक्षा की गई है, ऐसा करने में असफल रहता है तो प्रशासक या प्रशासक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी, ऐसे व्यक्ति को परिसर खाली करने का आदेश दे सकता है और किसी पुलिस अधिकारी को ऐसे परिसर पर ऐसी सहायता के साथ जो आवश्यक हो, प्रवेश करने और वहां पर पाए गए किसी व्यक्ति को वहां से हटाने तथा ऐसे परिसर का कब्जा लेने तथा निदेश में विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति को उसका कब्जा परिदत्त करने का निदेश दे सकता है

अध्याय 4

पुलिस विनियम

28. सार्वजनिक स्थानों आदि में यातायात का विनियमन करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विनियम बनाने की   शक्ति-(1) पुलिस आयुक्त निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी का उपबन्ध करने के लिए विनियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगा, अर्थात् :-

() रेल स्टेशनों के बाहर और ऐसे अन्य स्थानों पर जहां यात्री पहुंचते हैं, यात्रियों के सामान की ढुलाई के वास्ते नियोजन के लिए स्वयं को प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों को अनुज्ञप्ति देना और उन्हें नियंत्रित करना तथा ऐसे नियोजित व्यक्तियों के श्रम के लिए प्रभार मान नियत करना तथा उनके लागू किए जाने का उपबन्ध करना ;

() जनता को खतरे, बाधा या असुविधा से बचाने के लिए, मार्गों, और अन्य सार्वजनिक स्थानों में सभी प्रकार के यातायात का और ऐसे व्यक्तियों द्वारा जो सवारी पर हैं, यान चला रहे हैं, साइकिल पर हैं, पैदल चल रहे हैं या ढोरों को ले जा रहे हैं या उनके साथ हैं, मार्गों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के उपयोग का विनियमन करना ;

() उन शर्तों का, जिनके अधीन यान, मार्गों पर या सार्वजनिक स्थानों पर खड़े रह सकते हैं और यानों या ढोरों के लिए विराम स्थलों के रूप में उनके उपयोग का विनियमन करना ;

() मार्गों पर यानों में उपयोग में लाई जाने वाली बत्तियों की संख्या और स्थिति तथा उनके उपयोग का समय विनिर्दिष्ट करना ;

() विज्ञापन के प्रयोजन के लिए किसी ऐसे चिह्न, युक्ति या रूपण के लगाए जाने, प्रदर्शित किए जाने, चिपकाए जाने या उन्हें बनाए रखने के लिए अनुज्ञप्ति देना, उसे नियंत्रित या प्रतिषिद्ध करना, जो आकाश की पृष्ठभूमि में किसी मार्ग पर किसी स्थल से दृष्टिगोचर होता है और किसी भूमि, भवन या संरचना पर इतनी ऊंचाई पर खड़ा किया या खड़ा रखा जाता है जितनी आसपास के यातायात को और इस बात को ध्यान में रखते हुए, कि उस ऊंचाई पर ऐसे चिह्न, युक्ति या रूपण से ऐसे यातायात का कहां तक ध्यान बंट सकता है या उसमें बाधा पड़ सकती है, विनियम में विनिर्दिष्ट की जाए ;

() दिन का वह समय विनिर्दिष्ट करना जिसके दौरान मार्गों पर या कुछ विनिर्दिष्ट मार्गों पर, यथास्थिति, ढोर नहीं हांके जाएंगे, या केवल ऐसे विनियमों के अनुसार ही हांके जाएंगे ;

() किसी मार्ग पर या उससे होकर किसी हाथी या जंगली अथवा खतरनाक जीवजन्तु को ले जाने, उसके हांके जाने, संचालन या ले जाए जाने का विनियमन करना ;

() मार्गों से होकर टिम्बर, पाड़ के खम्बों, सीढ़ियों, लोहे के गर्डरों, शहतीरों या छड़ों, बायलरों या अन्य दुर्वह वस्तुओं के ले जाए जाने की रीति और ढंग का तथा ऐसे ले जाए जाने के लिए मार्गों तथा समय का विनियमन करना और उन पर नियंत्रण रखना ;

() गनपाउडर या किसी अन्य विस्फोटक पदार्थ के लिए अनुज्ञप्ति देना, उस पर नियंत्रण रखना या आसपास के निवासियों या यात्रियों को होने वाली बाधा, असुविधा, क्षोभ, जोखिम, खतरे या नुकसान को रोकने के उद्देश्यों से मार्गों और सार्वजनिक स्थानों में उनके ले जाए जाने का प्रतिषेध करना ;

() कुछ विनिर्दिष्ट मार्गों से होकर और विनिर्दिष्ट घंटों के दौरान के सिवाय तथा ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त विहित की जाएं, किसी मार्ग में ऐसे व्यक्तियों या जीवजन्तुओं के अरक्षित छोड़े जाने को या उनके आवागमन को, प्रतिषिद्ध करना जो सांसर्गिक या संक्रामक रोगों से ग्रस्त हैं, तथा जीवजन्तुओं के लोथों या ऐसे लोथों के भागों अथवा मनुष्यों के शवों के अभिदर्शित किए या ले जाए जाने को प्रतिषिद्ध करना ;

() दिन का ऐसा समय विनिर्दिष्ट करना जिसके दौरान मैला या घृणोत्पादक सामग्री या चीजों को, कुछ मार्गों में स्थित गृहों या भवनों से नहीं निकाला या उनमें नहीं ले जाया जाएगा, अथवा ऐसे विनियमों के अनुसार ही निश्चित मार्गों से ले जाया जा सकेगा ;

() जीवजन्तुओं के वध के लिए, लोथों या खालों की सफाई के लिए, अपायकर, या घृणोत्पादक सामग्री के रखे जाने के लिए तथा मलमूत्र त्यागने के लिए स्थानों को पृथक् करना ;

() मनुष्यों या जीवजन्तुओं से सम्बन्धित महामारी या संक्रामक रोग के विद्यमान होने या उसकी आशंका होने की दशाओं में, रोग को या उसके फैलने को रोकने की दृष्टि से, प्रशासक द्वारा निर्दिष्ट या अनुमोदित रूप में, परिसर के अधिभोगी और निवासियों द्वारा उसकी सफाई और विसंक्रमण और ऐसे व्यक्तियों या जीवजन्तुओं का पृथक्करण तथा प्रबन्ध, जो रोगग्रस्त हैं या जिनके बारे में यह अनुमान है कि वे रोगग्रस्त हैं ;

() किसी स्रोत, प्रदाय या जल के आधान के उपयोग को पूर्णतः या कुछ प्रयोजनों के लिए बन्द करने या उपयोग में लाने का निदेश देना या उसका उपयोग कुछ प्रयोजनों तक ही सीमित करना और उसके या उसमें जन के प्रदूषण के विरुद्ध उपबन्ध करना ;

() मार्गों पर या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर उनके निकट गाने-बजाने, ढोल बजाने, घंटा या अन्य वाद्ययंत्र बजाने और हार्न या शोर पैदा करने वाले कोई वाद्ययंत्र बजाने या उनसे ध्वनि निकालने को अनुज्ञापित करना, नियंत्रित करना या आसपास के निवासियों या यात्रियों को बाधा, असुविध, क्षोभ, जोखिम, खतरे या नुकसान से बचाने के लिए उनका प्रतिषेध करना ;

() मार्गों में या उनसे होकर जाने वाले जमावों और जुलूसों में भाग लेने वाले व्यक्तियों के आचरण या व्यवहार या कार्यों को विनियमित करना और जुलूसों की दशा में, ऐसे मार्ग विनिर्दिष्ट करना जिससे होकर, तथा ऐसा क्रम विहित करना जिनमें और ऐसे समय विनिर्दिष्ट करना जब, जुलूस निकल सकते हैं ;

() मार्ग में या उसके किसी भाग के आरपार इस प्रकार किसी रस्सी के लटकाए जाने या खम्बे के लगाए जाने या किसी प्रक्षेप या संरचना के निर्मित किए जाने को प्रतिषिद्ध करना कि उससे यातायात में अथवा प्रकाश और वायु के अबाध रूप से उपलब्ध होने में बाधा पड़े ;

() किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में निर्माण-सामग्री या अन्य वस्तुओं के रखे जाने या किसी घोड़े या अन्य जीवजन्तु के बांधे जाने या निरुद्ध किए जाने को तब प्रतिषिद्ध करना जब वह ऐसे विनियमों के अनुसार नहीं है ;

() निम्नलिखित के लिए अनुज्ञप्ति देना, उन्हें नियंत्रित करना या आसपास के निवासियों या यात्रियों को बाधा, असुविधा, क्षोभ, जोखिम, खतरे या नुकसान से बचाने के लिए निम्नलिखित का प्रतिषेध करना, अर्थात् :-

(i) ऐसे व्यक्तियों द्वारा मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर तथा उनसे लगे भवनों के बाहरी भागों पर रोशनी करना, जो उस निमित्त सम्यक्तः प्राधिकृत, सरकार या निगम के सेवकों या अन्य नगरपालिका के अधिकारियों से भिन्न हैं, या

(ii) मार्गों या सार्वजनिक स्थानों में या उनके निकट, चट्टान तोड़ना या खुदाई करना, या

(iii) किसी सार्वजनिक स्थान में या उसके निकट या किसी सार्वजनिक मनोरंजन के किसी स्थान में लाउडस्पीकर का उपयोग करना ;

() जीर्ण-शीर्ण भवनों से या किसी अन्य कारण से उत्पन्न होने वाले खतरे की दशाओं में, कुछ मार्गों या स्थानों को, ऐसे अपवादों के साथ जो उचित प्रतीत हो, अस्थायी रूप में बन्द करना ;

() भवनों, चबूतरों और अन्य संरचनाओं के ऐसे सन्निर्माण, मरम्मत और गिराने से, जिससे कि यात्रियों, पड़ोसियों या जनता को खतरा उत्पन्न हो सकता है शरीर या सम्पत्ति को होने वाली क्षति से उसकी संरक्षा करना ;

() इस निमित्त बनाए गए विनियमों के अनुसार के सिवाय, किसी मार्ग में या उस पर या मार्ग या भवन के पचास फुट के अन्दर किसी घासफूस या अन्य सामग्री को आग लगाने या उसे जलाने या उत्सवाग्नि जलाने या मनमाने रूप में अग्न्यायुध या हवाई बन्दूक चलाने या आतिशबाजी छोड़ने या फैंकने या कण्डील या राकेट छोड़ने का प्रतिषेध करना या रोशनी करने के लिए कोई बत्तियां या अन्य युक्तियां लगाने के प्रयोजन के लिए मार्ग में किसी ओर या मार्ग में एक ओर से दूसरी ओर तक कोई खम्बा या अन्य वस्तु लगाने का प्रतिषेध करना ;

() ऐसे समय का, जिसके दौरान तथा ऐसी रीति का जिसमें शवों के निपटारे के किसी स्थान, किसी धर्मशाला, ग्रामद्वार या लोक समागम के अन्य स्थान का उपयोग किया जा सकता है, ऐसे विनियमन करना जिससे कि उसके फायदों और जगह का उपयोग समान और समुचित रूप में हो सके और उन व्यक्तियों के आचरण की सुव्यवस्थित रखना जो उक्त स्थानों में आते-जाते हैं ;

() (i) सार्वजनिक आमोद या मनोरंजन के स्थानों के लिए अनुज्ञप्ति देना या उन पर नियंत्रण रखना ;

(ii) आसपास के निवासियों या यात्रियों को होने वाली बाधा, असुविधि, क्षोभ, जोखिम, खतरे या नुकसान को रोकने के लिए, सार्वजनिक आमोद या सार्वजनिक मनोरंजन या जमाव के स्थानों के रखे जाने का प्रतिषेध करना ; और

(iii) सार्वजनिक आमोद या सार्वजनिक मनोरंजन या जमाव के स्थानों में प्रवेश करने और उनसे बाहर निकलने के साधनों को विनियमित करना और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और उन स्थानों में अव्यवस्था रोकने के लिए उपबन्ध करना ;

() (i) लोक व्यवस्था, शिष्टता या नैतिकता के हित में या जनसाधारण के हित में, सार्वजनिक आमोद के लिए संगीत, नृतया या स्वांग या नाट्य या अन्य अभिनयों के लिए, जिनके अन्तर्गत मेले भी हैं (ऐसे अपवादों को छोड़कर जो ऐसे विनियमों में विनिर्दिष्ट किए जाएं) अनुज्ञापन देना या उन पर नियंत्रण रखना ;

(ii) लोक व्यवस्था, शिष्टता या नैतिकता के हित में या जनसाधारण के हित में कलाकारों के नियोजन तथा ऐसे अभिनयों में कलाकारों और दर्शकों के आचरण का विनियमन करना ;

(iii) ऐसे अभिनयों और उनसे संबंधित आलेखों की, यदि कोई हों, सम्पूर्ण दिल्ली के लिए या संबंधित क्षेत्र के लिए, प्रशासक द्वारा उस प्रयोजन के लिए नियुक्त किसी बोर्ड द्वारा या पुलिस आयुक्त द्वारा गठित किसी सलाहकार समिति द्वारा, पूर्व संवीक्षा और उनके लिए, शर्तों सहित, यदि कोई हों, उपयुक्तता प्रमाणपत्र का दिया जाना (बोर्ड या सलाहकार समिति के सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें, यथास्थिति, प्रशासक या आयुक्त की राय में, साहित्य, नाट्य कला और अन्य ऐसे विषयों का, जो ऐसी संवीक्षा के लिए सुसंगत हैं, ज्ञान या अनुभव है) ; बोर्ड या सलाहकार समिति के आदेश या विनिश्चय के विरुद्ध अपील प्राधिकारी से अपील का, उसकी नियुक्ति या गठन का, उसकी प्रक्रिया तथा उससे अनुषंगी अन्य विषयों का उपबन्ध करना तथा ऐसे अभिनयों या आलेखों की संवीक्षा के लिए ऐसे प्रमाणपत्र अभिप्राप्त करने के लिए आवेदनों के लिए तथा उनकी द्वितीय प्रतियां जारी करने के लिए और ऐसी अपीलों के संबंध में प्रभारित की जाने वाली फीस (चाहे वह न्यायालय फीस स्टाम्पों के रूप में हो या अन्यथा) के लिए उपबन्ध करना तथा किसी राज्य द्वारा उपयुक्तता प्रमाणपत्र-प्राप्त ऐसे किन्हीं अभिनयों और उससे संबंधित आलेखों को इस धारा से छूट दी जाएगी ;

(iv) उस समय का, जिसके दौरान और उन स्थानों का जिनमें ऐसे अभिनय किए जा सकेंगे, विनियमन करना ;

() सार्वजनिक आमोद के किसी स्थान में प्रवेश के लिए किसी टिकट या पास को, चाहे उसका जो भी नाम हो, विक्रय का विनियमन या प्रतिषेध करना

(यक) भोजनालयों का रजिस्ट्रीकरण करना, जिसके अन्तर्गत प्रत्येक मामले में, रजिस्ट्री का प्रमाणपत्र देना भी है ; ऐसे प्रमाणपत्र को, भोजनालय चलाने के लिए इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित और अभिप्राप्त की गई लिखित अनुज्ञा समझा जाएगा और ऐसे रजिस्ट्रीकरण का विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर वार्षिक नवीकरण ;

(यख) वह प्रक्रिया विहित करना जिसके अनुसार, इस अधिनियम के अधीन कोई अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा अभिप्राप्त करने के लिए आशयित या अपेक्षित होने पर, उसके लिए आवेदन किया जाना चाहिए और ऐसी किसी अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा के लिए प्रभारित की जाने वाली फीस नियत करना :

परन्तु इस धारा की कोई भी बात और उसके अधीन बनाए गए किसी विनियम के अधीन दी गई कोई भी अनुज्ञप्ति या रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र किसी व्यक्ति को किसी ऐसे मद्य या मादक ओषधि का आयात्, निर्यात, परिवहन, विनिर्माण या विक्रय करने या कब्जे में रखने के लिए प्राधिकृत नहीं करेगा, जिसके बारे में मद्य निषेध से संबंधित  तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन कोई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र, पास या प्राधिकरण अपेक्षित है

                (2) उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन विनियम बनाने की शक्ति प्रशासक के नियंत्रण के अधीन होगी और उस उपधारा के अन्य खण्डों के अधीन विनियम बनाने की शक्ति प्रशासक की पूर्व मंजूरी के अधीन होगी

                (3) इस धारा के अधीन विनियम बनाने की शक्ति इस शर्त के अधीन होगी कि विनियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात् ही बनाए जाएंगे और साधारण खण्ड अधिनियम, 1897(1897 का 10) की धारा 23 के प्रयोजनों के लिए, ऐसे विनियम नियम समझे जाएंगे, और इस धारा के अधीन बनाए गए प्रत्येक विनियम को, उसकी प्रतियां उससे प्रभावित क्षेत्र में, यथास्थिति, उस भवन, संरचना, संकर्म या स्थान के निकट जिसे वह विशेषतः संबंधित है सहजदृश्य स्थानों पर चिपकाकर या डोंडी पिटवाकर या हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी अथवा इनमें से दो या अधिक भाषाओं के ऐसे स्थानीय समाचारपत्रों में, जो पुलिस आयुक्त ठीक समझे, उसका विज्ञापन देकर, या इनमें से दो या अधिक साधनों द्वारा या ऐसे किसी अन्य साधन द्वारा, जो वह उपयुक्त समझे, प्रकाशित किया जाएगा :

परन्तु यदि पुलिस आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण यह आवश्यक है कि ऐसे विनियम को तुरन्त प्रवृत्त किया जाना चाहिए तो ऐसा कोई विनियम पूर्व प्रकाशन के बिना ही बनाया जा सकेगा

(4) यदि इस धारा के अधीन बनाया गया कोई विनियम ऐसे किसी विषय के बारे में है जिसके संबंध में निगम या किसी अन्य नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण की किसी विधि, नियम या उपविधि में लोक स्वास्थ्य, सुविधा या परिक्षेत्र की सुरक्षा से संबंधित कोई उपबन्ध है तो विनियम ऐसी विधि, नियम या उपविधि के अधीन होगा

29. जनता को निदेश देने की शक्ति- पुलिस आयुक्त और उसके आदेशों के, यदि उसने कोई किए हैं, अधीन रहते हुए, प्रत्येक पुलिस अधिकारी, जो निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का नहीं है, अवसर के अनुसार समय-समय पर, किन्तु इस प्रकार नहीं कि उससे धारा 28 के अधीन बनाए गए किसी विनियम का या उस धारा की उपधारा (4) में निर्दिष्ट किसी विधि, नियम या उपविधि का उल्लंघन हो, ऐसे सभी आदेश मौखिक या लिखित रूप में दे सकेगा जो निम्नलिखित के लिए आवश्यक हैं, अर्थात् :-

() मार्गों पर या उनसे लगे स्थलों पर जुलूसों या जमावों में सम्मिलित व्यक्तियों के आचरण और व्यवहार या कार्यों के निदेशन के लिए ;

() ऐसे मार्ग, जिनसे होकर तथा ऐसे समय जब, कोई ऐसे जुलूस निकल सकते हैं या नहीं निकलेंगे, विनिर्दिष्ट करने के लिए ;

() (i) सभी जुलूसों और जमावों के अवसर पर ;

(ii) उपासना के समय उपासना के सभी स्थलों के आसपास ; और

(iii) ऐसे सभी मामलों में जब कोई मार्ग या सार्वजनिक स्थान या लोक समागम का स्थान भीड़ से भर जाए या जिसमें बाधा पड़ना सम्भव है बाधाओं को रोकना ;

() सभी मार्गों पर और उनमें और सार्वजनिक स्नान करने, धुलाई करने के स्थलों, मेलों, मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, गिरजाघरों और लोक समागम या सार्वजनिक उपासना के अन्य सभी स्थानों पर और उनमें व्यवस्था कायम रखना ;

() किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में और उसके निकट संगीत, गायन, नगाड़ा या ढोल बजाने और अन्य वाद्ययंत्र बजाने और हार्न या अन्य शोर पैदा करने वाले वाद्ययंत्रों के बजाए जाने को विनियमित और नियंत्रित करना ;

() निवासीय क्षेत्रों, मार्गों या किन्हीं सार्वजनिक स्थानों या सार्वजनिक आमोद या सार्वजनिक मनोरंजन के किसी स्थान में लाउडस्पीकरों के प्रयोग को विनियमित और नियंत्रित करना ; या

() ऐसे समुचित आदेश जारी करना, जो इस धारा के अधीन किए गए किसी आदेश के परिणामस्वरूप या उसे अग्रसर करने के लिए हैं

30. अव्यवस्था रोकने के लिए कुछ कार्यों का प्रतिषेध करने की शक्ति-(1) पुलिस आयुक्त, लोक शान्ति या लोक सुरक्षा बनाए रखने के लिए, जब कभी और ऐसे समय के लिए जो वह आवश्यक समझे, अधिसूचना द्वारा, जो सार्वजनिक रूप से प्रख्यापित की जाएगी या व्यष्टियों को सम्बोधित की जाएगी, संपूर्ण दिल्ली या उसके किसी भाग के सम्बन्ध में निम्नलिखित कार्यों का प्रतिषेध कर सकता है, अर्थात् :-

() आयुध, गदा, तलवार, भाला, सोंटा, बन्दूक, छुरा, छड़ी या लाठी या कोई अन्य ऐसी वस्तु लेकर चलना जो शारीरिक हिंसा कारित करने के लिए उपयोग में लाई जा सकती है ;

() किसी संक्षारक पदार्थ या विस्फोटक को लेकर चलना ;

() पत्थरों या अन्य प्रक्षेपकों या उपकरणों या प्रक्षेपकों को छोड़ने या फैंकने के अन्य साधनों को लेकर चलना, उन्हें जमा करना या उन्हें तैयार करना

() व्यक्तियों या शवों को प्रदर्शित करना ;

() सार्वजनिक रूप से चिल्लाना, गायन या वादन ; या

() उत्तेजक भाषण करना, अंग-विक्षेपों का प्रयोग या स्वांग और चित्रों, प्रतीकों, प्लेकार्डों या किसी अन्य ऐसे विषय या वस्तु की तैयारी, प्रदर्शन या प्रसार, जो पुलिस आयुक्त की राय में, शिष्टता या नैतिकता को ठेस पहुंचाती है अथवा राज्य की सुरक्षा को क्षति पहुंचाती है

(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के खण्ड () में निर्दिष्ट किसी वस्तु से सज्िजत होकर जाता है या उस उपधारा के अधीन किसी प्रतिषेध के उल्लंघन में कोई संक्षारक पदार्थ या विस्फोटक या प्रक्षेपक या उपकरण लेकर चलता है तो वह वस्तु, संक्षारक पदार्थ या विस्फोटक या प्रक्षेपक किसी पुलिस अधिकारी द्वारा अभिगृहीत किया जा सकेगा

(3) पुलिस आयुक्त, सार्वजनिक रूप में प्रख्यापित अधिसूचना द्वारा, ऐसे किसी जमाव या जुलूस को कभी भी और तब तक के लिए प्रतिषिद्ध कर सकेगा जब तक वह ऐसा करना लोक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक समझता है

(4) उपधारा (3) के अधीन प्रख्यापित कोई अधिसूचना ऐसे प्रख्यापन से पन्द्रह दिन से अधिक प्रवृत्त नहीं रहेगी :

                परन्तु यदि प्रशासक लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसा करना आवश्यक समझता है तो वह, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगा कि ऐसी अधिसूचना उस तारीख से, जिसको वह ऐसा आदेश दिए जाने की दशा में, समाप्त हो जाती, अधिक से अधिक छह मास तक की ऐसी अतिरिक्त अवधि तक प्रवृत्त बनी रहेगी जो वह उक्त आदेश में विनिर्दिष्ट करे

31. सार्वजनिक आमोद या सार्वजनिक जमाव या सभा के स्थानों पर अव्यवस्था आदि को रोकने के लिए पुलिस द्वारा प्रबन्ध किया जाना-(1) गम्भीर अव्यवस्था या विधि के भंग को या उन व्यक्तियों को होने वाले प्रकट और आसन्न खतरे को रोकने के प्रयोजन के लिए, जो किसी सार्वजनिक आमोद के स्थान पर या किसी जमाव या सभा में जिसमें जनता आंमत्रित है अथवा जो जनता के लिए खुला है, जमा हुए हैं, सहायक उप निरीक्षक और उससे उच्च पंक्ति का कोई पुलिस अधिकारी जो सार्वजनिक आमोद के स्थान, या ऐसे जमाव या ऐसी सभा में उपस्थित है, ऐसे नियमों, विनियमों और आदेशों के अधीन रहते हुए जो विधितः बनाए जाएं, ऐसे आमोद स्थान या ऐसे जमाव या सभा में जनता के प्रवेश के ढंग के सम्बन्ध में और वहां कार्यवाहियों का शान्तिपूर्ण और विधिपूर्ण रीति से संचालन सुनिश्चित करने के लिए तथा लोक सुरक्षा बनाए रखने के लिए ऐसे उचित निदेश दे सकेगा जो वह आवश्यक समझे तथा ऐसे प्रत्येक उचित निदेश का अनुपालन करने के लिए सभी व्यक्ति आबद्ध होंगे

                (2) प्रत्येक पुलिस अधिकारी की, उपधारा (1) के उपबन्धों और उसके अधीन किए गए किसी निदेश को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए सार्वजनिक आमोद, जमाव या सभा के प्रत्येक स्थान पर, अबाध पहुंच होगी

32. संगीत, ध्वनि या शोर के चलते रहने को प्रतिषिद्ध आदि करने की शक्ति-(1) यदि किसी पुलिस थाने के भारसाधक पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट से या उसके द्वारा प्राप्त की गई किसी अन्य जानकारी से पुलिस आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि जनता या किसी ऐसे व्यक्ति को, जो आसपास की किसी सम्पत्ति में रह रहा है या जिसके अधिभोग में ऐसी सम्पत्ति है, होने वाले किसी क्षोभ, विघ्न, असुविधा या क्षति को या ऐसे क्षोभ, विघ्न, असुविधा या क्षति के जोखिम को, रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक है तो वह निम्नलिखित बातों को, अर्थात् :-

() किसी मार्ग, खुले स्थान या किसी अन्य परिसर में-

(i) गायन या वाद्य संगीत के आपतन या  उसके चलते रहने को ; अथवा

(ii) ऐसे किसी उपकरण, साधित्र या यंत्र या युक्ति को, जिससे ध्वनि या पुनर्ध्वनि निकल सकती है, बजाकर, पीटकर, झंकारकर, फूंककर या किसी भी अन्य रीति से उसके प्रयोग से निकलने वाली ध्वनि के आपतन या उसके चलते रहने को ; अथवा

(iii) किसी संगीत सम्बन्धी ध्वनि या अन्य ध्वनि को इतने प्रबल या ऊंचे स्वर में जिससे अन्य लोगों को विघ्न हो, प्रवर्धित करने के लिए लाउडस्पीकर या अन्य उपकरण के प्रयोग के आपतन या उसके चलते रहने को ; अथवा

() किसी परिसर में कोई व्यापार, उप-व्यवसाय या ऐसी संक्रिया करने को, जिससे शोर उत्पन्न होता है,

रोकने, प्रतिषिद्ध, नियंत्रित या विनियमित करने के लिए लिखित आदेश द्वारा किसी व्यक्ति को ऐसे निदेश दे सकेगा जो वह आवश्यक समझे :

                परन्तु खण्ड () के अधीन किसी व्यक्ति को कोई निदेश तब तक नहीं दिए जाएंगे जब तक कि उस विषय में उसे सुनवाई का अवसर नहीं दे दिया जाता

                (2) पुलिस आयुक्त या तो स्वप्रेरणा से या उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश से व्यथित किसी व्यक्ति के आवेदन पर, ऐसे किसी आदेश को विखण्डित, उपान्तरित या परिवर्तित कर सकेगा :

                परन्तु ऐसे किसी आवेदन का निपटारा करने से पूर्व पुलिस आयुक्त आवेदक को अपने  समक्ष या तो स्वयं या काउन्सेल द्वारा उपस्थित होने और आदेश के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा तथा यदि वह ऐसे आवेदन को पूर्णतः या भागतः नामंजूर करता है तो ऐसी नामंजूरी के कारण अभिलिखित करेगा

                33. बलवे आदि को रोकने के लिए आदेश जारी करना-(1) किसी बलवे या गम्भीर रूप से शान्ति-भंग होने को रोकने के लिए या उसे दबाने के लिए, पुलिस आयुक्त किसी भी भवन या अन्य स्थान को अस्थायी रूप से बन्द कर सकेगा या उसे अपने कब्जे में ले सकेगा और उसमें सभी या किसी भी व्यक्ति को जाने से रोक सकेगा अथवा केवल ऐसे व्यक्तियों को ऐसे निबन्धनों पर उस तक पहुंचने की अनुज्ञा दे सकेगा जिन्हें वह समीचीन समझे ; तथा सभी सम्बन्धित व्यक्ति ऐसे आदेशों के अनुसार आचरण करने के लिए आबद्ध होंगे जो पुलिस आयुक्त इस धारा के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग में करे और अधिसूचित करे

                (2) यदि ऐसे भवन या स्थान के विधिपूर्ण अधिभोगी को उपधारा (1) के अधीन की गई कार्रवाई के कारण कोई हानि या क्षति उठानी पड़ती है तो वह ऐसी कार्रवाई की जाने की तारीख से एक मास के भीतर सक्षम प्राधिकारी को उसके लिए आवेदन करके, ऐसी हानि या क्षति के लिए उचित प्रतिकर पाने का हकदार होगा, किन्तु तब नहीं जब ऐसी कार्रवाई, ऐसे भवन या स्थान का ऐसा प्रयोग किए जाने के कारण या ऐसा प्रयोग किए जाने के आशय के कारण या उस तक पहुंच-प्राप्त व्यक्तियों के अवचार के कारण ऐसे सक्षम प्राधिकारी की राय में, आवश्यक हो गई थी

                (3) यदि उपधारा (2) के अधीन देय प्रतिकर की रकम या ऐसे व्यक्ति के बारे में जिसे ऐसी रकम देय होगी, कोई विवाद उत्पन्न होता है कि वह मामला सक्षम प्राधिकारी द्वारा जिला कलक्टर को निर्देशित किया जाएगा और उसके बारे में कलक्टर का विनिश्चय अन्तिम होगा

34. धार्मिक या समारोही संप्रदर्शन आदि में व्यवस्था बनाए रखना आदि-(1) यदि किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में हो रहे या होने के लिए आशयित किसी धार्मिक या समारोही या मूर्त संप्रदर्शन अथवा प्रदर्शन या संगठित जमाव की दशा में, जिसके बारे में या जिसके संचालन या जिसमें भाग लेने के बारे में, सक्षम प्राधिकारी को यह प्रतीत होता है कि कोई ऐसा विवाद या प्रतिविरोध विद्यमान है जिससे शान्ति में गम्भीर विघ्न पड़ना सम्भाव्य है तो सक्षम प्राधिकारी सम्बन्धित व्यक्तियों के पारस्परिक तथा जनता के प्रति आचरण के बारे में ऐसे आदेश कर सकेगा जो वह हितबद्ध पक्षकारों और व्यक्तियों के स्पष्ट विधिक अधिकारों और किसी स्थापित रूढ़ि को ध्यान में रखते हुए उन परिस्थितियों में आवश्यक और उचित समझे, तथा सभी सम्बन्धित व्यक्ति ऐसे आदेशों का पालन करेंगे

                (2) ऐसा प्रत्येक आदेश ऐसे परिक्षेत्र या स्थान में प्रकाशित किया जाएगा जिसमें उसे प्रवृत्त होना है

                (3) उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश अधिकारिता रखने वाले किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री, व्यादेश या आदेश के अधीन होगा और यदि ऐसा आदेश करने वाले सक्षम प्राधिकारी को यह प्रतीत कराया जाता है कि ऐसा आदेश ऐसे न्यायालय के निर्णय, डिक्री, व्यादेश या आदेश से असंगत है तो ऐसा आदेश विखण्डित या परिवर्तित कर दिया जाएगा

35. मेलों आदि में महामारी को रोकने के लिए पुलिस आयुक्त द्वारा विशेष उपायों का किया जाना-(1) जब कभी पुलिस आयुक्त को यह प्रतीत होता है कि दिल्ली में किसी स्थान पर (तीर्थ यात्रा, मेले या अन्य ऐसे किसी अवसर पर, बड़ी संख्या में व्यक्तियों के जमा होने के कारण या जमा होने की सम्भावना के कारण) कोई महामारी उत्पन्न हो गई है या उत्पन्न होने की सम्भावना है तो वह उस निगम या नगरपालिका के परामर्श से, जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर ऐसा स्थान स्थित है, ऐसे विशेष उपाय कर सकेगा और उस स्थान के निवासियों या वहां उपस्थित या आने जाने वाले व्यक्तियों द्वारा अनुपालन किए जाने के लिए लोक सूचना द्वारा ऐसे विनियम विहित कर सकेगा जो वह, ऐसे रोग के उत्पन्न होने या फैलने को रोकने के लिए आवश्यक समझे

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट जमाव के स्थान पर या उसके आसपास सफाई और व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन्तजाम की बाबत पुलिस आयुक्त द्वारा उपगत व्यय संबंधित निगम या नगरपालिका से वसूल किए जा सकेंगे

36. मार्ग या अन्य सार्वजनिक स्थान को लोक प्रयोजनों के लिए आरक्षित करने की शक्ति और मार्गों मे रोधक खड़े करने के लिए प्राधिकृत करने की शक्ति-(1) पुलिस आयुक्त, लोक सूचना द्वारा, किसी मार्ग या अन्य सार्वजनिक स्थान को किसी सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अस्थायी रूप से आरक्षित कर सकेगा और व्यक्तियों को ऐसे आरक्षित क्षेत्र में, ऐसी शर्तों पर के सिवाय, जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, प्रवेश करने से प्रतिषिद्ध कर सकेगा

                (2) जब कभी पुलिस आयुक्त की यह राय हो कि ऐसी कार्रवाई करना आवश्यक है तो वह-

() ऐसे पुलिस अधिकारी को, जिसे वह ठीक समझे, किसी मार्ग में उस पर से होकर जाने वाले यानों को अस्थायी रूप में रोकने के प्रयोजन के लिए रोधक इस प्रकार खड़े करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा जिससे कि उसका इस बाबत समाधान हो जाए कि तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उपबन्धों का ऐसे किसी यान के सम्बन्ध में या ऐसे किसी यान के चालक या भारसाधक व्यक्ति द्वारा, उल्लंघन नहीं हुआ है ; और

() ऐसे रोधकों के प्रयोग को विनियमित करने के लिए ऐसे आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे

37. पृथक् रखे गए स्थानों से भिन्न स्थानों पर शवों के निपटारे का प्रतिषेध करने के लिए विनियम बनाने की शक्ति-(1) पुलिस आयुक्त, पृथक् रखे गए स्थानों से भिन्न स्थानों पर शवों के निपटारे का, चाहे वह जलाकर हो या गाड़कर या अन्यथा, प्रतिषेध करने के लिए, समय-समय पर, विनियम बना सकेगा :

परन्तु ऐसे कोई विनियम किसी ऐसे क्षेत्र के संबंध में नहीं बनाए जाएंगे जिसके लिए ऐसे स्थान पृथक् नहीं रखे गए हैं :

परन्तु यह और कि पुलिस आयुक्त या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी, किसी व्यक्ति द्वारा अपने को आवेदन किए जाने पर, उस व्यक्ति को किसी मृत व्यक्ति के शव का, पृथक् रखे गए स्थान से भिन्न किसी स्थान पर, निपटारा करने की अनुज्ञा, स्वविवेकानुसार, उस दशा में दे सकेगा जब उसकी राय में ऐसे निपटारे से यातायात में बाधा पड़ने या लोक शान्ति विक्षुब्ध होने की संभावना नहीं है या वह किसी अन्य कारण से आक्षेपणीय नहीं है

                (2) उपधारा (1) के अधीन बनाए गए विनियमों में विभिन्न संप्रदायों या संप्रदायों के वर्गों के शवों के निपटारे के लिए पृथक् रखे गए स्थान विनिर्दिष्ट किए जाएंगे

(3) ऐसे सभी विनियम साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 23 के प्रयोजन के लिए नियम समझे जाएंगे और पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन होंगे और उस धारा की उपधारा (3) के अधीन विनिर्दिष्ट की जाने वाली तारीख, उस तारीख से दो मास से अधिक पूर्व की नहीं होगी जिसको प्रस्थापित विनियमों का प्रारूप प्रकाशित किया जाता है

अध्याय 5

लोक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा बनाए रखने के लिए विशेष उपाय

38. शांति कायम रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस का नियोजन-(1) पुलिस आयुक्त, किसी व्यक्ति के आवेदन पर, परिशांति कायम रखने, व्यवस्था बनाए रखने या किसी विशिष्ट वर्ग या वर्गों के अपराधों की बाबत इस अधिनियम अथवा किसी अन्य विधि के उपबन्धों में से किसी को प्रवर्तित करने या पुलिस पर अधिरोपित किन्हीं अन्य कर्तव्यों के दिल्ली में किसी स्थान पर पालन के लिए किसी भी अतिरिक्त संख्या में पुलिस प्रतिनियुक्त कर सकेगा

(2) ऐसी अतिरिक्त पुलिस का नियोजन, आवेदन करने वाले व्यक्ति के खर्च पर (जिसका अवधारण इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार पुलिस आयुक्त द्वारा किया जाएगा) किया जाएगा, किन्तु वह पुलिस प्राधिकारियों के आदेशों के अधीन होगी और ऐसी अवधि के लिए नियोजित की जाएगी जो पुलिस आयुक्त उचित समझे

                (3) यदि वह व्यक्ति, जिसके आवेदन पर ऐसी अतिरिक्त पुलिस नियोजित की जाती है, उक्त पुलिस के वापस लिए जाने के लिए किसी भी समय पुलिस आयुक्त से कोई लिखित अध्यपेक्षा करता है तो वह व्यक्ति पुलिस आयुक्त द्वारा अवधारित ऐसी अवधि की समाप्ति पर जो ऐसी अध्यपेक्षा की जाने की तारीख से एक सप्ताह से अधिक की नहीं होगी, उसके खर्च से अवमुक्त कर दिया जाएगा

(4) जहां खर्च के रूप में दी जाने वाली राशि के बारे में कोई विवाद है वहां पुलिस आयुक्त व्यथित पक्षकार द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर, मामले को जिला कलक्टर को निर्देशित करेगा जिसका उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा

39. लोक शान्ति को विशेष खतरे की दशाओं में अतिरिक्त पुलिस का नियोजन-(1) यदि प्रशासक की यह राय है कि दिल्ली के किसी क्षेत्र में विक्षोभ है या खतरे की स्थिति है या उसके निवासियों या ऐसे निवासियों के किसी विशिष्ट भाग या वर्ग के आचरण के कारण यह समीचीन हो गया है कि उस क्षेत्र में अस्थायी रूप में अतिरिक्त पुलिस नियोजित की जाए, तो प्रशासक, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा प्रयोग ऐसा क्षेत्र (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् विक्षुब्ध क्षेत्र" कहा गया है) जिसमें, तथा ऐसी अवधि जिसके लिए, अतिरिक्त पुलिस नियोजित की जाएगी, विनिर्दिष्ट कर सकेगा और ऐसा होने पर पुलिस आयुक्त विक्षुब्ध क्षेत्र में इतने अतिरिक्त पुलिस अधिकारी प्रतिनियुक्त करेगा जितने वह आवश्यक समझे

परन्तु यदि प्रशासक की यह राय है कि जनता के हित में ऐसा करना आवश्यक है तो वह इस प्रकार विनिर्दिष्ट अवधि को समय-समय पर बढ़ा सकेगा

                (2) उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी की जाने पर प्रशासक, जिला कलक्टर या प्रशासक द्वारा विनिर्दिष्ट किसी अन्य प्राधिकारी से अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसी अतिरिक्त पुलिस का खर्च, पूर्णतः या भागतः, या तो साधारणतया उन सभी व्यक्तियों से वसूल करे जो विक्षुब्ध क्षेत्र के निवासी हैं या विशिष्टतः ऐसे व्यक्तियों के किसी विशिष्ट भाग या वर्ग से और ऐसे अनुपात में, वसूल करे जो प्रशासक निदिष्ट करे

                (3) प्रशासक के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह, लिखित आदेश द्वारा और पर्याप्त कारणों से, किसी व्यक्ति को ऐसी अतिरिक्त पुलिस के खचे के किसी भी भाग को वहन करने के दायित्व से छूट प्रदान कर दे

स्पष्टीकरण-इस धारा में और धारा 41 में, किसी विक्षुब्ध क्षेत्र के बारे में प्रयुक्त निवासी" शब्द के अन्तर्गत ऐसे व्यक्ति हैं जो स्वयं या अपने अभिकर्ताओं अथवा सेवकों द्वारा ऐसे क्षेत्र के भीतर भूमि या अन्य स्थावर सम्पत्ति के अधिभोगी या धारक हैं और ऐसे भू-स्वामी हैं जो इस बात के होते हुए भी कि वे वस्तुतः वहां निवास नहीं करते हैं, स्वयं या अपने अभिकर्ताओं या सेवकों द्वारा ऐसे क्षेत्र में भूमि के धारकों या अधिभोगियों से भाटक वसूल करते हैं

40. बड़े संकर्म पर और कर्मचारियों के व्यवहार के संबंध में आशंका होने पर अतिरिक्त पुलिस का नियोजन-(1) जब कभी प्रशासक या किसी सक्षम प्राधिकारी को यह प्रतीत होता है कि-

() किसी बड़े संकर्म से जो चलाया जा रहा है या किसी सार्वजनिक आमोद से जो किसी स्थान में संचालित किया जा रहा है, यातायात में अड़चन पड़ने या बड़ी संख्या में जनता के आकर्षित होने की सम्भावना है ; या

() किसी रेल, नहर या अन्य लोक संकर्म, या किसी विनिर्माणशाला या अन्य वाणिज्यिक समुत्थान में या उस पर, जिसका किसी स्थान पर निर्माण या प्रचालन किया जा रहा है, नियोजित व्यक्तियों के व्यवहार या व्यवहार की युक्तियुक्त आशंका से ऐसे स्थान पर अतिरिक्त पुलिस का नियोजन आवश्यक हो गया है,

तो, यथास्थिति, प्रशासक या सक्षम प्राधिकारी उक्त स्थान पर, इतनी अतिरिक्त पुलिस उतनी अवधि के लिए प्रतिनियुक्त कर सकेगा जितनी प्रशासक या सक्षम प्राधिकारी को ऐसी अतिरिक्त पुलिस के नियोजन को जारी रखने के लिए आवश्यक प्रतीत हो

(2) ऐसी अतिरिक्त पुलिस ऐसे व्यक्ति के खर्च पर नियोजित की जाएगी जिसके द्वारा ऐसे संकर्म, सार्वजनिक आमोद, विनिर्माणशाला या समुत्थान का निर्माण किया जा रहा है, उसका संचालन किया जा रहा है या वह चलाया जा रहा है और उक्त व्यक्ति उसका खर्च, यथास्थिति, प्रशासक या सक्षम प्राधिकारी द्वारा समय-समय पर अपेक्षित दरों से देगा

41. विधिविरुद्ध जमाव द्वारा कारित क्षति के लिए प्रतिकर किस प्रकार वसूलीय होगा-(1) जब किसी विधिविरुद्ध जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में की गई किसी बात के कारण, किसी सम्पत्ति को कोई हानि या नुकसान पहुंचता है या किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है या उन्हें घोर उपहति होती है तो प्रशासक, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसा क्षेत्र (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् विक्षुब्ध क्षेत्र" कहा गया है) जिसमें और ऐसी तारीख, जिसको या ऐसी अवधि जिसके दौरान, उसकी राय में, ऐसा विधिविरुद्ध जमाव किया गया था, विनिर्दिष्ट कर सकेगा

                (2) उपधारा (1) के अधीन कोई अधिसूचना जारी कर दी जाने पर, जिला कलक्टर, ऐसी जांच के पश्चात्, जैसी वह ठीक समझे, ऐसे प्रतिकर की रकम अवधारित कर सकेगा जो उसकी राय में पूर्वोक्त हानि या नुकसान या मृत्यु या घोर उपहति के सम्बन्ध में किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को दी जानी चाहिए

(3) प्रतिकर की रकम इस धारा के अधीन अधिरोपित जुर्माना मानी जाएगी और वह विक्षुब्ध क्षेत्र के निवासियों द्वारा संदेय होगी

                (4) जिला कलक्टर के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह लिखित आदेश द्वारा और पर्याप्त कारणों से, किसी व्यक्ति को प्रतिकर की रकम के किसी भी भाग का संदाय करने के दायित्व से छूट दे दे

42. अतिरिक्त पुलिस के प्रतिनियोजन के खर्च या धारा 41 के अधीन प्रतिकर के बारे में विवाद-अतिरिक्त पुलिस के प्रतिनियोजन के बारे में धारा 39 या धारा 40 के अधीन संदेय खर्च या धारा 41 के अधीन अवधारित प्रतिकर के बारे में या उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों या व्यक्तियों के किसी प्रभाग या वर्ग के बारे में, जिसके द्वारा या जिस अनुपात में ऐसा खर्च या प्रतिकर दिया जाना चाहिए, किसी विवाद की दशा में, मामला व्यथित पक्षकार द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर, कलक्टर द्वारा या, यथास्थिति, प्रशासक या सक्षम प्राधिकारी द्वारा, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट को निर्देशित किया जाएगा जिसका उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा

43. धारा 38, 39, 40 या 41 के अधीन संदेय रकम की वसूली-धारा 38, धारा 39, धारा 40 या धारा 41 के अधीन संदेय कोई रकम उसी प्रकार वसूल की जाएगी मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो

44. कलक्टर प्रतिकर अधिनिर्णीत करेगा-(1) धारा 38, धारा 39, धारा 40 या धारा 41 के अधीन संदेय रकमें वसूल होने पर सरकार के खाते में जमा की जाएंगी

(2) जिला कलक्टर, धारा 41 के अधीन संदेय प्रतिकर के रूप में अपने द्वारा वसूल की गई रकमों में से ऐसी रकम का जिसे वह उचित और न्यायसंगत समझता है, किसी व्यक्ति को, जिसे विधिविरुद्ध जमाव के सामान्य उद्देश्य के अग्रसर किए जाने में की गई किसी बात के कारण, सम्पत्ति को हानि या नुकसान पहुंचा है या घोर उपहति हुई है या ऐसे किसी व्यक्ति के जिसकी मृत्यु हो गई, विधिक वारिसों को, प्रतिकर के रूप में संदाय करेगा

                (3) इस धारा के अधीन कोई प्रतिकर तभी दिया जाएगा जब उसके लिए दावा धारा 41 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिसूचना की तारीख से पैंतालीस दिन के भीतर कर दिया जाता है और जिला कलक्टर का यह समाधान हो जाता है कि दावेदार, जहां दावा उस व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे हानि, नुकसान या घोर उपहति हुई है या मृतक, जहां दावा ऐसे मृतक के विधिक वारिसों द्वारा किया गया है, उस घटना के सम्बन्ध में दोषमुक्त रहा है जिससे हानि, नुकसान, घोर उपहति या मृत्यु हुई है

                (4) किसी व्यक्ति को उपधारा (2) के अधीन संदेय प्रतिकर किसी भी प्रकार समनुदेशित या भारित या कुर्क नहीं किया जा सकेगा या विधि के प्रवर्तन द्वारा उसके हकदार व्यक्ति से अन्यथा किसी व्यक्ति को संक्रांत नहीं हो सकेगा और ही किसी दावे को उसके विरुद्ध मुजरा किया जाएगा

                (5) किसी ऐसी हानि, नुकसान या घोर उपहति के बारे में कोई सिविल वाद नहीं चलाया जा सकेगा जिसके लिए इस धारा के अधीन प्रतिकर दिया जा चुका है

45. धारा 39 और धारा 41 के अधीन संदेय रकमों की वसूली-धारा 43 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, धारा 39 या धारा 41 के अधीन संदेय सब रकमें दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 421 और धारा 422 में उपबन्धित रीति से ऐसे वसूल की जा सकेंगी मानो ऐसी प्रत्येक रकम न्यायालय द्वारा अपराधी पर अधिरोपित जुर्माना हो

46. व्यक्तियों के गिरोहों और निकायों का बिखेरना-जब कभी पुलिस आयुक्त को यह प्रतीत होता है कि दिल्ली के किसी भाग में व्यक्तियों के किसी गिरोह या निकाय के डेरा डालने से या उसकी गतिविधियों से किसी व्यक्ति के शरीर या सम्पत्ति को कोई खतरा उत्पन्न हो रहा है या वे ऐसे खतरे के लिए प्रकल्पित हैं अथवा यह संत्रास या युक्तियुक्त संदेह उत्पन्न हो रहा है या वे ऐसा संत्रास या संदेह उत्पन्न करने के लिए प्रकल्पित हैं, कि व्यक्तियों के ऐसे गिरोह या निकाय या उसके सदस्यों की विधिविरुद्ध परिकल्पनाएं हैं तो पुलिस आयुक्त, आदेश द्वारा, जो ऐसे व्यक्तियों को सम्बोधित किया जाएगा जो व्यक्तियों के ऐसे गिरोह या निकाय के नेता या प्रमुख प्रतीत होते हैं, और जो घोषणा या डोंडी पिटवाकर या अन्य ऐसे रूप में, जो पुलिस आयुक्त ठीक समझे, प्रकाशित किया जाएगा, व्यक्तियों के ऐसे गिरोह या निकाय के सदस्य को यह निदेश दे सकेगा कि वे-

() ऐसा आचरण करें जो हिंसा और संत्रास रोकने के लिए आवश्यक प्रतीत हो ; या

() इतने समय के भीतर, जो पुलिस आयुक्त विनिर्दिष्ट करे, बिखर जाएं और दिल्ली की सीमाओं या उसके किसी भाग से परे हट जाएं और, यथास्थिति, दिल्ली या उसके ऐसे किसी भाग में प्रवेश करें जिससे हट जाने का उन्हें निदेश दिया गया था

47. ऐसे व्यक्तियों का हटाया जाना जो अपराध करने ही वाले हैं-जब कभी पुलिस आयुक्त को यह प्रतीत होता है कि-

() किसी व्यक्ति की गतिविधियों या कार्यों से किसी व्यक्ति के शरीर या सम्पत्ति को कोई संत्रास, खतरा या हानि उत्पन्न हो रही है या वे ऐसे संत्रास, खतरे या हानि पहुंचाने के लिए प्रकल्पित हैं ; या

() यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार हैं कि ऐसा व्यक्ति ऐसा कोई अपराध करने में, जिसमें बल या हिंसा अन्तर्ग्रस्त है या ऐसा अपराध करने में, जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 12, अध्याय 16, अध्याय 17 या अध्याय 22 के अधीन अथवा उस संहिता की धारा 290 या धारा 489 से धारा 489 तक (जिनमें ये दोनों धाराएं भी हैं) के अधीन दंडनीय है, या ऐसे किसी अपराध का दुष्प्रेरण करने में लगा है या लगने वाला है ; या

() ऐसा व्यक्ति-

(i) इतना दुःसाहसिक और खतरनाक है कि उसका दिल्ली या उसके किसी भाग में मुक्त रहना समाज के लिए परिसंकटमय है ; या

(ii) हिंसात्मक कार्यों या बल प्रदर्शन द्वारा अन्य व्यक्तियों को अभ्यासतः अभित्रस्त करता हुआ पाया गया है ; या

(iii) अभ्यासतः दंगा या शांतिभंग या बलवा करता है या अभ्यासतः बलपूर्वक चन्दा संग्रह करता है या अपने लिए अथवा अन्य व्यक्तियों के लिए अवैध आर्थिक अभिलाभ के लिए व्यक्तियों को धमकी देता है ; या

(iv) अभ्यासतः स्त्रियों और लड़कियों पर अशिष्ट फबतियां कसता है या इशारे करके उन्हें तंग करता है,

और पुलिस आयुक्त की राय में, अपने शरीर या सम्पत्ति की सुरक्षा के बारे में किसी आशंका के कारण, साक्षी सार्वजनिक रूप से उनके विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए आगे आने के लिए इच्छुक नहीं है, तो पुलिस आयुक्त, लिखित आदेश द्वारा, जो उस व्यक्ति पर सम्यक्तः तामील किया जाएगा अथवा डोंडी पिटवाकर या अन्य ऐसे रूप में, जो वह ठीक समझे, ऐसे व्यक्ति को निदेश दे सकेगा कि वह ऐसा आचरण करे जैसा हिंसा और संत्रास रोकने के लिए आवश्यक प्रतीत होता है, या दिल्ली या उसके किसी भाग से परे, ऐसे मार्ग से होकर और इतने समय के भीतर, हट जाए, जो पुलिस आयुक्त विनिर्दिष्ट करे और, यथास्थिति, दिल्ली या उसके किसी ऐसे भाग में, जिससे हट जाने का उसे निदेश दिया गया था, प्रवेश करे या वापस लौटे

                स्पष्टीकरण-किसी व्यक्ति के बारे में, जो इस धारा के अधीन कोई कार्रवाई प्रारम्भ की जाने के ठीक पूर्ववर्ती एक वर्ष की अवधि के दौरान, इस धारा में निर्दिष्ट कार्यों में से किसी कार्य को कम से कम तीन बार करता हुआ पाया गया है या उसमें सम्मिलित रहा है, यह समझा जाएगा कि उसने वह कार्य अभ्यासतः किया है

48. कुछ अपराधों के लिए सिद्धदोष व्यक्तियों का हटाया जाना-यदि कोई व्यक्ति,-

() भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 12, अध्याय 16 या अध्याय 17 के अधीन किसी अपराध के लिए ; या 

() दिल्ली सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1955 (1955 का दिल्ली अधिनियम संख्यांक 9) की धारा 3 या धारा 4 के अधीन या उस अधिनियम की धारा 12 के अधीन जहां तक कि वह सट्टा द्यूत के बारे में है, या उस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध (जिसके अन्तर्गत उस अधिनियम की धारा 12 भी है जहां तक कि वह सट्टा द्यूत से सम्बन्धित नहीं है) के अधीन दो या अधिक बार किसी अपराध के लिए ; या

() स्त्री तथा लड़की अनैतिक व्यापार दमन अधिनियम, 1956 (1956 का 104) के अधीन किसी अपराध के     लिए ; या

() आयुध अधिनियम, 1959 (1959 का 54) की धारा 25, धारा 26, धारा 27, धारा 28 या धारा 29 के अधीन किसी अपराध के लिए ; या

() सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 135 के अधीन किसी अपराध के  लिए ; या

() दिल्ली में यथाप्रवृत्त पंजाब एक्साइज ऐक्ट, 1955 (1955 का पंजाब अधिनियम संख्यांक 18) की धारा 61, धारा 63 या धारा 66 के अधीन किसी अपराध के लिए ; या

() निम्नलिखित अधिनियमों के अधीन, अर्थात् :-

(i) अफीम अधिनियम, 1878 (1878 का 1) ; या

(ii) अनिष्टकर मादक द्रव्य अधिनियम, 1930 (1930 का 2) ; या

(iii) ओषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (1940 का 23) ; या

(iv) दिल्ली में यथाप्रवृत्त बाम्बे प्रिवेन्शन आफ बेगिंग ऐक्ट, 1959 (1960 का मुम्बई अधिनियम संख्यांक 10) की धारा 11, के अधीन किसी अपराध के लिए दो या उससे अधिक बार ; या

() इस अधिनियम की धारा 105 या धारा 107 के अधीन किसी अपराध के लिए तीन या उससे अधिक बार,

सिद्धदोष ठहराया जाता है तो यदि पुलिस आयुक्त के पास यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसे व्यक्ति का, इस धारा में निर्दिष्ट अपराधों में से किसी के किए जाने में पुनः लगना सम्भाव्य है, तो वह ऐसे व्यक्ति को, लिखित आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगा कि वह ऐसे किसी मार्ग से और इतने समय के भीतर जो पुलिस आयुक्त विनिर्दिष्ट करे, दिल्ली की सीमाओं या उसके किसी भाग से परे हट जाए और, यथास्थिति, दिल्ली या उसके ऐसे किसी भाग में, जिससे उसे हट जाने का निदेश दिया गया था, प्रवेश करे या वापस लौटे

49. धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन आदेशों के प्रवर्तन की अवधि-दिल्ली या उसके किसी भाग में प्रवेश करने की बाबत धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन किया गया कोई निदेश, ऐसी अवधि के लिए होगा जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए और किसी भी दशा में यह अवधि ऐसा निदेश दिए जाने की तारीख से दो वर्ष से अधिक की नहीं होगी

50. धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन आदेश पारित करने से पूर्व सनुवाई का अवसर दिया जाना-(1) किसी व्यक्ति के विरुद्ध धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन कोई आदेश किए जाने के पूर्व, पुलिस आयुक्त, लिखित सूचना द्वारा, उसे उसके विरुद्ध तात्त्विक अभिकथनों की साधारण प्रकृति की जानकारी देगा और उसे उनके बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए युक्तियुक्त अवसर प्रदान करेगा

(2) यदि ऐसा व्यक्ति किसी साक्षी की, जिसे वह पेश करेगा, परीक्षा के लिए आवेदन करता है तो यदि पुलिस आयुक्त की किन्हीं कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह राय नहीं है कि ऐसा आवेदन तंग करने या विलम्ब करने के प्रयोजन से किया गया है, तो ऐसा आवेदन मंजूर कर सकेगा और ऐसे साक्षी की परीक्षा कर सकेगा

(3) ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किया गया कोई लिखित स्पष्टीकरण मामले के अभिलेख के साथ फाइल कर लिया जाएगा

(4) ऐसा व्यक्ति पुलिस आयुक्त के समक्ष हो रही कार्यवाही में काउन्सेल द्वारा अपना प्रतिनिधत्व कराने का हकदार होगा

                (5) () पुलिस आयुक्त किसी ऐसे व्यक्ति की हाजिरी सुनिश्चित करने के प्रयोजन से, जिसकी विरुद्ध धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन कोई आदेश किए जाने का प्रस्ताव है, ऐसे व्यक्ति से लिखित आदेश द्वारा अपने समक्ष उपस्थित होने की अपेक्षा कर सकेगा और जांच के दौरान हाजिर रहने के लिए, प्रतिभुओं सहित या उनके बिना, एक प्रतिभूति बन्धपत्र प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकेगा

() दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 119 से धारा 124 तक (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं) के उपबन्ध, जहां तक सम्भव हो, प्रतिभूति बन्धपत्र प्रस्तुत करने के लिए खण्ड () के अधीन आदेश के सम्बन्ध में लागू होंगे

(6) पूर्वगामी उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना पुलिस आयुक्त उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति को सूचना जारी करते समय, उसकी गिरफ्तारी के लिए वारण्ट जारी कर सकेगा और दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 70 से धारा 89 तक (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं) के उपबन्ध, जहां तक सम्भव हो, ऐसे वारण्ट के सम्बन्ध में लागू होंगे

(7) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 445, धारा 446, धारा 447 या धारा 448 के उपबन्ध, जहां तक सम्भव हो, इस धारा के अधीन निष्पादित सभी बन्धपत्रों को लागू होंगे

51. धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन आदेशों के विरुद्ध अपील-(1) कोई व्यक्ति जो धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन किसी आदेश से व्यथित है ऐसे आदेश की उस पर तामील की तारीख से तीस दिन के भीतर, प्रशासक को आदेश के विरुद्ध अपील कर सकेगा

                (2) इस धारा के अधीन अपील, ज्ञापन के रूप में दो प्रतियों में की जाएगी ; उसमें उन आक्षेपों के आधारों का संक्षेप में वर्णन किया जाएगा जिन पर उस आदेश के विरुद्ध अपील की जा रही है और अपील के साथ ऐसा आदेश या उसकी प्रमाणित प्रति संलग्न की जाएगी

                (3) ऐसी अपील प्राप्त होने पर प्रशासक अपीलार्थी को, स्वयं या काउन्सेल की मार्फत, सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने तथा ऐसी आगे जांच, यदि कोई हो, करने के पश्चात्, जो वह आवश्यक समझे, उस आदेश को जिसके विरुद्ध अपील की गई है, पुष्ट, परिवर्तित, रद्द या अपास्त कर सकेगा :

                परन्तु, जब तक कि प्रशासक अन्यथा निदेश नहीं देता है, वह आदेश जिसके विरुद्ध अपील की गई है, अपील या निपटारा होने तक, प्रवृत्त रहेगा

                (4) प्रशासक इस धारा के अधीन अपील का निपटारा, उसकी प्राप्ति की तारीख से तीन मास की अवधि के भीतर करने का पूरा प्रयास करेगा

                (5) इस धारा के अधीन अपील के लिए उपबन्धित तीस दिन की अवधि की संगणना करने में उस आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने में लगे समय को अपवर्जित कर दिया जाएगा जिसके विरुद्ध अपील की गई है

52. कुछ मामलों में आदेश का अन्तिम होना-धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन पुलिस आयुक्त द्वारा या धारा 51 के अधीन प्रशासक द्वारा पारित किए गए आदेश पर किसी न्यायालय में निम्नलिखित आधार पर ही आक्षेप किया जा सकेगा अन्यथा नहीं, अर्थात् :-

() यथास्थिति, पुलिस आयुक्त या प्रशासक ने, यथास्थिति, धारा 50 की उपधारा (1), उपधारा (2) या     उपधारा (4) अथवा धारा 51 में अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण नहीं किया है ; या

() यथास्थिति, पुलिस आयुक्त या प्रशासक के समक्ष ऐसी कोई सामग्री नहीं थी जिस पर वह अपना आदेश आधारित कर सकता ; या

() धारा 47 के अधीन किए गए किसी आदेश या उसके विरुद्ध धारा 51 के अधीन प्रशासक को की गई अपील में किए गए आदेश के मामले में यदि, यथास्थिति, पुलिस आयुक्त या प्रशासक की यह राय नहीं थी कि साक्षी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध, जिसके विरुद्ध ऐसा आदेश किया गया है, सार्वजनिक रूप से साक्ष्य देने के लिए आगे आने के लिए रजामन्द नहीं थे

53. किसी व्यक्ति द्वारा सम्बन्धित क्षेत्र छोड़ने में असफल रहने पर और वहां से हटाए जाने के पश्चात् उसमें प्रवेश करने की दशा में प्रक्रिया-यदि कोई व्यक्ति, जिसको धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन दिल्ली या उसके किसी भाग से हट जाने के लिए कोई निदेश जारी किया गया है,-

() निदेश किए गए रूप में हटने में असफल रहता है ; या

() इस प्रकार हट जाने के पश्चात्, धारा 54 की अधीन पुलिस आयुक्त की लिखित अनुज्ञा के बिना, दिल्ली या उसके किसी भाग में, ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर, प्रवेश करता है,

तो पुलिस आयुक्त उसे गिरफ्तार करा सकेगा और उसे दिल्ली या उसके किसी भाग से परे किसी ऐसे स्थान पर, जो पुलिस आयुक्त प्रत्येक मामले में विनिर्दिष्ट करे, पुलिस अभिरक्षा में हटवा सकेगा

54. प्रवेश करने की अस्थायी अनुज्ञा और ऐसी अनुज्ञा की शर्तों का अनुपालन करने के परिणाम-(1) पुलिस आयुक्त या इस निमित्त प्रशासक द्वारा विशिष्टतः सशक्त कोई अन्य पुलिस अधिकारी लिखित आदेश द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध     धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन कोई आदेश किया गया है, अनुज्ञा दे सकेगा कि वह दिल्ली या उसके किसी ऐसे भाग में, जहां से हट जाने का उसे निदेश दिया गया था, ऐसी अस्थायी अवधि के लिए और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, लौट सकता है और अधिरोपित शर्तों के सम्यक् अनुपालन के लिए उससे अपेक्षा कर सकेगा कि वह प्रतिभुओं सहित या उनके बिना कोई बन्धपत्र निष्पादित करे

                (2) पुलिस आयुक्त किसी भी समय ऐसी अनुज्ञा को प्रतिसंहृत कर सकेगा

                (3) ऐसा व्यक्ति, जो ऐसी अनुज्ञा से दिल्ली या उसके किसी भाग में वापस आता है, अधिरोपित शर्तों का अनुपालन करेगा और जिस अस्थायी अवधि के लिए लौटने की उसे अनुज्ञा दी गई थी, उसके अवसान पर, या ऐसी अस्थायी अवधि के अवसान से पूर्व ऐसी अनुज्ञा के प्रतिसंहृत कर लिए जाने पर, यथास्थिति, दिल्ली या उसके किसी भाग से हट जाएगा और धारा 46, धारा 47 या     धारा 48 के अधीन किए गए मूल आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि के अनवसित भाग के भीतर, नई अनुज्ञा के बिना वहां नहीं लौटेगा

(4) यदि ऐसा व्यक्ति अधिरोपित शर्तों में से किसी का अनुपालन करने में या तद्नुसार स्वयं को हटाने में असफल रहेगा या इस प्रकार हट जाने के पश्चात्, यथास्थिति, दिल्ली या उसके किसी भाग में, किसी नई अनुज्ञा के बिना प्रवेश करेगा या लौटेगा तो पुलिस आयुक्त उसे गिरफ्तार करा सकेगा और उसे दिल्ली या उसके किसी भाग से परे किसी ऐसे स्थान को जो पुलिस आयुक्त प्रत्येक मामले में विनिर्दिष्ट करे, पुलिस अभिरक्षा में हटवा सकेगा

55. ऐसे व्यक्तियों के, जिनके विरुद्ध धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन आदेश किया गया है, माप और फोटो आदि लेना-प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिसके विरुद्ध इस अधिनियम की धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन कोई आदेश किया गया है, पुलिस आयुक्त द्वारा अपेक्षा की जाने पर, किसी पुलिस अधिकारी को विहित रीति से अपने माप और फोटो लेने देगा

56. माप आदि लिए जाने का प्रतिरोध-(1) यदि कोई पूर्वोक्त व्यक्ति, जिससे यह अपेक्षा की जाती है वह अपने माप या फोटो लेने दे, इस प्रकार माप या फोटो लिए जाने का प्रतिरोध करता है या उससे इंकार करता है तो यह विधिपूर्ण होगा कि माप या फोटों लि जाने को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएं

                (2) इस अधिनियम के अधीन लिए जाने वाले माप या फोटो का प्रतिरोध या उससे इंकार करने को भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 1860 के अधीन अपराध समझा जाएगा

                (3) जहां धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन किया गया आदेश अपील में अपास्त कर दिया जाता है वहां इस धारा के अधीन लिए गए सभी माप या (नेगेटिवों सहित) फोटो नष्ट कर दिए जाएंगे या उस व्यक्ति को सौंप दिए जाएंगे जिसके विरुद्ध ऐसा आदेश दिया गया था

57. सशस्त्र बलों की वर्दी के सदृश पोशाक आदि के प्रयोग पर पाबन्दी-(1) यदि प्रशासक का समाधान हो जाता है कि किसी निकाय या संगम या संगठन के किसी सदस्य द्वारा सार्वजनिक रूप में ऐसी किसी पोशाक या परिधान की किसी वस्तु के पहने जाने से, जो संघ के सशस्त्र बलों के सदस्य द्वारा या किसी पुलिस बल या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन गठित किसी बल के सदस्य द्वारा पहनी जाने के लिए अपेक्षित किसी वर्दी के सदृश है, राज्य की सुरक्षा या लोक व्यवस्था के बनाए रखने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है तो वह, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, ऐसे निकाय या संगम या संगठन के किसी सदस्य द्वारा ऐसी किसी पोशाक या परिधान की वस्तु के सार्वजनिक रूप से पहले जाने या संप्रदर्शन को प्रतिषिद्ध या निर्बन्धित कर सकेगा

                (2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक साधारण या विशेष आदेश धारा 142 के अधीन लोक सूचना के प्रकाशन के लिए विहित रीति से, प्रकाशित किया जाएगा

                स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, कोई पोशाक या परिधान की वस्तु तब सार्वजनिक रूप से पहनी गई या संप्रदर्शित की गई समझी जाएगी जब वह ऐसे स्थान में पहनी जाती है या संप्रदर्शित की जाती है, जहां जनता पहुंच सकती है

58. रक्षा समितियों का गठन-(1) किसी परिक्षेत्र में व्यक्तियों के संरक्षण, सम्पत्ति की सुरक्षा और लोक सुरक्षा के लिए, पुलिस आयुक्त विहित रीति में ऐसे स्वयंसेवी निकाय गठित कर सकेगा (जिन्हें इस धारा में इसके पश्चात रक्षा समिति" कहा गया है)

                (2) पुलिस आयुक्त या किसी रक्षा समिति का कोई अधिकारी किसी भी समय अपने अधीनस्थ किसी भी अधिकारी को या किसी रक्षा समिति के किसी सदस्य को प्रशिक्षण के लिए या इस अधिनियम के अधीन उन्हें सौंपे गए कर्तव्यों के निर्वहन के लिए बुला सकेगा

                (3) रक्षा समिति का प्रत्येक अधिकारी या सदस्य-

() नियुक्त होने पर, इस निमित्त प्रशासक द्वारा विनिर्दिष्ट या अनुमोदित प्ररूप में एक प्रमाणपत्र प्राप्त करेगा ; और

() ड्यूटी देने के लिए बुलाए जाने के समय उसे वे ही शक्तियां, विशेषाधिकार और संरक्षण प्राप्त होंगे जो इस अधिनियम के अधीन नियुक्त पुलिस अधिकारी में निहित होते हैं

(4) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी रक्षा समिति का कोई अधिकारी या सदस्य-

() दिल्ली महानगर परिषद् या दिल्ली नगर निगम, या

() किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण,के सदस्य के रूप में चुने जाने या सदस्य होने के लिए, इस कारण कि वह किसी ऐसी समिति का अधिकारी या सदस्य है, निरर्हित नहीं होगा

अध्याय 6

पुलिस अधिकारियों के कार्यपालन कर्तव्य और शक्तियां

59. अधिनियम के उपबन्धों को प्रवर्तित करने का पुलिस अधिकारी का कर्तव्य-(1) प्रत्येक पुलिस अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम या आदेश के उपबंधों का अनुपालन सुनिश्चित करे और उस प्रयोजन के लिए ऐसा पुलिस अधिकारी-

() ऐसे व्यक्तियों को चेतावनी दे सकेगा, जो अनभिज्ञता के कारण इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम या आदेश के किसी उपबन्ध का अनुपालन करने में असफल रहते हैं ;

() किसी ऐसे व्यक्ति से, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम या आदेश के किसी उपबन्ध के प्रतिकूल कार्य कर रहा है या करने वाला है, अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसा कार्य करने से विरत रहे ;

() उपधारा (2) और (3) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, ऐसे किसी व्यक्ति को, जो उस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम या आदेश के किसी उपबन्ध का उल्लंघन कर रहा है, तब गिरफ्तार कर सकेगा जब ऐसा उल्लंघन इस अधिनियम के अधीन कोई दण्डनीय अपराध है ; और

() ऐसी किसी वस्तु का, जिसका प्रयोग इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम या आदेश के उपबन्धों के ऐसे उल्लंघन में किया गया है या किया जाने वाला है, तब अभिग्रहण कर सकेगा जब कि ऐसा उल्लंघन इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध है

(2) कोई पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन, किसी महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए किसी वारण्ट के बिना, तब तक गिरफ्तार नहीं करेगा जब तक कि,-

() ऐसे व्यक्ति ने धारा 28 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन बनाए गए किसी विनियम का उल्लंघन नहीं किया हो ;

() ऐसे व्यक्ति ने धारा 29, धारा 30 की उपधारा (1) या उपधारा (2), धारा 32, धारा 47 या धारा 48 या धारा 57 की उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश या अधिसूचना का उल्लंघन नहीं किया हो ;

() ऐसा व्यक्ति ऐसे पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में ऐसा अपराध नहीं करता है जो धारा 33 और धारा 34 के अधीन किए गए किसी आदेश के उल्लंघन के सम्बन्ध में, धारा 97, धारा 108 की उपधारा (1), धारा 110 के खण्ड (), () या () या धारा 113 की उपधारा (2) के अधीन दण्डनीय है ;

() ऐसे व्यक्ति ने किसी निवासगृह, प्राइवेट परिसर या उससे संलग्न किसी अन्य भूमि या जमीन के संबंध में धारा 100 के अधीन दण्डनीय कोई अपराध नहीं किया है या उसकी बाबत युक्तियुक्त रूप से यह संदेह नहीं है कि उसने ऐसा अपराध किया है :

परन्तु यह तब जब वह व्यक्ति, जिसके कब्जे या भारसाधन में ऐसा निवासगृह, प्राइवेट परिसर या भूमि या जमीन है, ऐसे अपराध के किए जाने की शिकायत करे ;

() ऐसे व्यक्ति ने धारा 101, धारा 102 या धारा 113 की उपधारा (2) के खण्ड () के अधीन दण्डनीय अपराध नहीं किया है या उसकी बाबत युक्तियुक्त रूप से यह संदेह नहीं है कि उसने ऐसा कोई अपराध किया है ;

() ऐसा व्यक्ति, किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में उसकी उपस्थिति में ऐसा कोई असंज्ञेय अपराध नहीं करता है जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के अधीन दण्डनीय है, यदि ऐसा व्यक्ति,-

(i) पुलिस अधिकारी द्वारा चेतावनी दी जाने के पश्चात् भी ऐसा अपराध करता रहता है ; या

(ii) अपेक्षा की जाने पर पुलिस अधिकारी के साथ किसी पुलिस थाने जाने से इंकार करता है

                (3) पुलिस आयुक्त या पुलिस आयुक्त द्वारा इस निमित्त विशिष्टतः सशक्त किया गया कोई अन्य पुलिस अधिकारी, किसी महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए किसी वारण्ट के बिना ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा, जिसने धारा 92 के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया है

60. पुलिस अधिकारी के अन्य कर्तव्य-प्रत्येक पुलिस अधिकारी के निम्नलिखित कर्तव्य होंगे, अर्थात् :-

() सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसे विधिपूर्वक जारी किए गए प्रत्येक समन को तत्परतापूर्वक तामील करना और प्रत्येक वारण्ट या अन्य आदेश का पालन और निष्पादन करना तथा अपने वरिष्ठ के सभी विधिपूर्ण समादेशों का अनुपालन करना ;

() संज्ञेय अपराधों के किए जाने या ऐसे अपराधों के किए जाने की परिकल्पनाओं के बारे में अपने संपूर्ण सामर्थ्य के अनुसार, आसूचना प्राप्त करना तथा ऐसी जानकारी देना और विधि तथा अपने वरिष्ठों के आदेशों से संगत ऐसे अन्य कदम उठाना जो अपराधियों को न्यायोचित दण्ड दिलाने के लिए या संज्ञेय और उसकी दृष्टि में, असंज्ञेय अपराधों के किए जाने को रोकने के लिए सर्वोत्तम समझे जाते हैं ;

() लोक न्यूसेंसों के किए जाने को अपने सम्पूर्ण सामर्थ्य के अनुसार रोकना ;

() ऐसे सभी व्यक्तियों को बिना अनुचित विलम्ब के पकड़ना जिन्हे पकड़ने के लिए वह विधि द्वारा प्राधिकृत है और जिनके पकड़े जाने के लिए पर्याप्त कारण है ;

() किसी अन्य पुलिस अधिकारी की, उसके द्वारा अपेक्षा की जाने पर या आवश्यकता पड़ने पर, उसके कर्तव्य के निर्वहन में, ऐसी रीतियों से सहायता करना, जो सहायता पाने वाले अधिकारी के लिए विधिपूर्ण और उचित है ;

() लोक शान्ति के भंग को रोकना ;

() निःशक्त या असहाय व्यक्तियों की मार्गों में अपनी शक्तिभर सहायता करना ;

() ऐसे मत्त व्यक्तियों और स्वच्छन्द पागलों को अपने भारसाधान में लेना जो खतरनाक या अपनी देखभाल करने में असमर्थ प्रतीत होते हैं ;

() गिरफ्तार किए गए या अभिरक्षा में लिए गए ऐसेट किसी व्यक्ति के लिए आवश्यक सहायता प्राप्त कराने के लिए तुरन्त उपाय करना, जो आहत या रोगी है और ऐसे व्यक्ति को पहरे में रखते या उसे लाते ले जाते समय उसकी दशा को सम्यक्तः ध्यान में रखना ;

() ऐसे प्रत्येक व्यक्ति के उचित भोजन और आश्रय की व्यवस्था करना जो गिरफ्तार है या अभिरक्षा में है ;

() तलाशी लेने में अनावश्यक रूप से रूखा होना और अनावश्यक क्षोभ पहुंचाना ;

() स्त्रियों और बच्चों से व्यवहार करने में शिष्टता और समुचित भद्रता का पूरी तरह ध्यान रखना ;

() अग्नि से होने वाली किसी हानि या नुकसान को रोकने के लिए अपना भरपूर प्रयास करना ;

() जनता को किसी दुर्घटना या खतरे से बचाने के लिए अपना भरपूर प्रयास करना ;

() मार्गों में यायायात को विनियमित और नियंत्रित करना, उसमें पड़ने वाली बाधाओं को रोकना और मार्गों में या उनके निकट जनता द्वारा अनुपालन किए जाने के लिए, इस अधिनियम या किसी अन्य प्रवृत्त विधि के अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम या आदेश के उल्लंघन को अपने संपूर्ण सामर्थ्य के अनुसार रोकना ;

() मार्गों में और स्नान और धुलाई करने के सार्वजनिक स्थानों, मेलों, मन्दिरों और लोक समागम के अन्य सभी स्थानों पर और उनके भीतर तथा सार्वजनिक पूजा के स्थानों के आसपास व्यवस्था बनाए रखना ;

() स्नान और धुलाई करने के सार्वजनिक स्थानों और लोक समागम के सभी अन्य स्थानों तक पहुंच को विनियमित करना तथा वहां अधिक भीड़ होने देना और ऐसे किसी स्थान पर जनता द्वारा अनुपालन किए जाने के लिए विधिपूर्वक बनाए गए किसी विनियम या दिए गए आदेश के उल्लंघन को अपने संपूर्ण सामर्थ्य के अनुसार रोकना ; और

() ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करना जो तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा उस पर अधिरोपित किए जाएं

61. लोक समागम के स्थानों में प्रवेश करने की शक्ति-इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों, विनियमों और आदेशों में उपबन्धों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक पुलिस अधिकारी धारा 59 या धारा 60 में निर्दिष्ट कर्तव्यों में से किसी के पालन के प्रयोजन के लिए, लोक समागम के ऐसे किसी स्थान में बिना वारण्ट प्रवेश कर सकेगा और उसका निरीक्षण कर सकेगा जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसका उपयोग मादक पेयों या स्वापक पदार्थों का भण्डारण करने, विक्रय करने या उपभोग करने के स्थान के रूप में किया जा रहा है या बुरे और अव्यवस्था फैलाने वाले व्यक्तियों के समागम-स्थान के रूप में किया जा रहा है

62. मार्ग आदि में संदिग्ध व्यक्तियों की तलाशी लेने की शक्ति-जब किसी मार्ग या लोक समागम के स्थान में, किसी व्यक्ति के कब्जे में ऐसी कोई वस्तु या उसके होने का संदेह है जिसकी बाबत किसी पुलिस अधिकारी को सद्भावपूर्वक या संदेह है कि वह चुराई गई सम्पत्ति है, तो ऐसा पुलिस अधिकारी ऐसे व्यक्ति की तलाशी ले सकेगा और उसके कब्जे में पाई गई किसी वस्तु के सम्बन्ध में लेखा-जोखा देने की अपेक्षा कर सकेगा और यदि कब्जा रखने वाले व्यक्ति द्वारा दिया गया लेखा-जोखा सुस्पष्टतः मिथ्या है या संदेहजनक है तो वह ऐसी वस्तु को उसका कब्जा रखने वाले व्यक्ति को विहित प्ररूप में रसीद देने के पश्चात् निरुद्ध रख सकेगा और तथ्यों की रिपोर्ट महानगर मजिस्ट्रेट को दे सकेगा जो उस पर दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 457, धारा 458 और धारा 459 के उपबन्धों के अनुसार कार्यवाही करेगा

63. पुलिस के आपात कर्तव्य-(1) प्रशासक, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी विनिर्दिष्ट सेवा को समुदाय के लिए आवश्यक सेवा घोषित कर सकेगा

                (2) उपधारा (1) के अधीन की गई घोषणा प्रथम बार में एक मास तक ही प्रवृत्त रहेगी किन्तु ऐसी अवधि को वैसी ही अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर, विस्तारित किया जा सकेगा

                (3) उपधारा (1) के अधीन घोषणा कर दी जाने पर और जब तक वह प्रवृत्त रहती है, तब तक प्रत्येक पुलिस अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह घोषणा में विनिर्दिष्ट सेवा के सम्बन्ध में किसी नियोजन के बारे में किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिए गए किसी आदेश का पालन करे

64. किसी अधीनस्थ पुलिस अधिकारी पर अधिरोपित कर्तव्यों का वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा स्वयं निर्वहन-कांस्टेबल की पंक्ति से वरिष्ठ पंक्ति का कोई पुलिस अधिकारी ऐसे किसी कर्तव्य का पालन कर सकेगा जो विधि द्वारा या किसी विधिपूर्ण आदेश द्वारा उसके अधीनस्थ किसी अधिकारी को सौंपा गया है और ऐसे अधीनस्थ पर अधिरोपित कर्तव्य के मामले में, जब कभी किसी वरिष्ठ अधिकारी को, विधि को अधिक पूर्ण या सुविधाजनक प्रभाव देने या उसके किसी अतिलंघन से बचने के लिए ऐसा करना आवश्यक या समीचीन प्रतीत होता है तो वह अपने स्वयं के कार्य द्वारा या ऐसे अधीनस्थ के किसी कार्य में या अपने समादेश या प्राधिकार के अधीन विधिपूर्वक कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के कार्य द्वारा उसमें सहायता दे सकेगा, उसकी अनुपूर्ति कर सकेगा, उसे अतिष्ठित कर सकेगा या उसे रोक सकेगा

65. पुलिस अधिकारियों के उचित निदेशों का अनुपालन करने के लिए व्यक्तियों का आबद्ध होना-(1) सभी व्यक्ति किसी पुलिस अधिकारी के ऐसे उचित निदेशों का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होंगे जो किसी पुलिस अधिकारी द्वारा इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों के निर्वहन में दिए जाते हैं

                (2) जहां कोई व्यक्ति उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी निदेश का अनुपालन करने का प्रतिरोध करता है, उससे इंकार करता है या उसके अनुपालन में असफल रहता है वहां पुलिस अधिकारी अन्य किसी ऐसी कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो वह इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन कर सकता है, ऐसे व्यक्ति को हटा कर या तो उसे महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर सकेगा या तुच्छ मामलों में, जब वह स्थिति नहीं रह गई है जिसमें उसे हटाना आवश्यक था, उसे छोड़ सकेगा

परन्तु इस प्रकार हटाया गया व्यक्ति, सभी दशाओं में, ऐसे हटाए जाने के चौबीस घंटे के भीतर, यथास्थिति, महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा या छोड़ दिया जाएगा

अध्याय 7

बिना दावे वाली सम्पत्ति के बारे में शक्तियां

66. बिना दावे वाली सम्पत्ति का पुलिस द्वारा भारसाधन में लेना-(1) प्रत्येक पुलिस अधिकारी का कर्तव्य होगा कि वह निम्नलिखित को अपने स्थायी भारसाधान में ले ले, अर्थात् :-

() ऐसी सभी सम्पत्ति को, जो उसे मिली है या उसे सौंपी गई है और जिसका कोई दावेदार नहीं है ; और

() ऐसी सभी सम्पत्ति को, जो किसी लोक मार्ग में पड़ी पाई गई है और ऐसी सम्पत्ति का स्वामी या भारसाधक, उसे हटाने का निदेश किए जाने पर, ऐसा करने से इंकार करता है या ऐसा करने में असफल रहता है

(2) सम्पत्ति को उपधारा (1) के अधीन अपने भारसाधन में लेने वाला पुलिस अधिकारी, पुलिस आयुक्त को उस सम्पत्ति की एक तालिका देगा

67. धारा 66 के अधीन भारसाधन में ली गई सम्पत्ति के व्ययन की प्रक्रिया-(1) जहां कोई सम्पत्ति धारा 66 की उपधारा (1) के अधीन भारसाधन में ली गई है वहां पुलिस आयुक्त उन वस्तुओं को विनिर्दिष्ट करते हुए, जिनसे मिलकर ऐसी सम्पत्ति बनी है, एक उद्घोषणा जारी करेगा जिसके द्वारा वह यह अपेक्षा करेगा कि ऐसा कोई व्यक्ति, जिसका उस पर दावा हो सकता है, उसके समक्ष या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी के समक्ष ऐसी उद्घोषणा की तारीख से छह मास के भीतर, उपसंजात होकर अपना दावा सिद्ध करे

                (2) यदि कोई सम्पत्ति या उसका कोई भाग शीघ्र और प्रकृत्या क्षयशील है या वह पशुधन है या वह सम्पत्ति पचास रुपए से कम मूल्य की लगती है तो पुलिस आयुक्त के आदेशों के अधीन उसका, नीलाम द्वारा, तुरन्त विक्रय किया जा सकेगा और ऐसे विक्रय के शुद्ध आगम के संबंध में उसी रीति में कार्यवाही की जाएगी जो उक्त सम्पत्ति के व्ययन के लिए इसमें इसके पश्चात् उपबन्धित है

                (3) जहां किसी व्यक्ति से, जिसका सम्पत्ति पर दावा है, उपधारा (1) के अधीन उद्घोषणा द्वारा, पुलिस आयुक्त द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी के समक्ष हाजिर होने और अपना दावा सिद्ध करने की अपेक्षा की जाती है, वहां ऐसा अधिकारी, अपने समक्ष की कार्यवाहियों का अभिलेख उन पर अपने निष्कर्षों सहित, पुलिस आयुक्त को भेजेगा

68. हकदार व्यक्ति को सम्पत्ति का परिदान-(1) यदि पुलिस आयुक्त का, धारा 67 की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट सम्पत्ति पर कब्जे या उसके प्रशासन के लिए किसी दावेदार के हक के बारे में समाधान हो जाता है तो वह यह आदेश करेगा कि ऐसी सम्पत्ति, उसके अधिग्रहण या निरोध पर, दिल्ली पुलिस द्वारा उपगत व्ययों को काट कर या उनका संदाय कर दिए जाने पर, ऐसे व्यक्ति को परिदत्त कर दी जाए

                (2) पुलिस आयुक्त, स्वविवेकानुसार, उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश करने से पूर्व, ऐसे व्यक्ति से, जिसे उक्त सम्पत्ति परिदत्त की जानी है, ऐसी प्रतिभूति ले सकेगा जैसी वह उचित समझे और इसमें इसके पूर्व उल्लिखित कोई बात, ऐसे किसी व्यक्ति से जिसे ऐसी सम्पत्ति ऐसे आदेश के अनुसरण में परिदत्त की गई है, सम्पूर्ण सम्पत्ति या उसका कोई भाग वसूल करने के किसी व्यक्ति के अधिकार पर कोई प्रभाव नहीं डालेगी

69. दावा किए जाने पर सम्पत्ति का सरकार के व्ययनाधीन होना-(1) यदि उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर कोई भी व्यक्ति ऐसी सम्पत्ति की बाबत अपना दावा सिद्ध नहीं करता है तो ऐसी सम्पत्ति या उसके ऐसे किसी भाग का, जो धारा 67 की उपधारा (2) के अधीन पहले ही विक्रय नहीं किया गया है, पुलिस आयुक्त के आदेशों के अधीन, नीलाम द्वारा विक्रय किया जा सकेगा और उसके आगम सरकार के खाते में जमा किए जाएंगे

                (2) यदि उपधारा (1) के अधीन सरकार के खाते में जमा किए गए किन्हीं आगमों के बारे में कोई दावा किया जाता है और यदि ऐसा दावा विहित प्राधिकारी के समाधानप्रद रूप में, पूर्णतः या किसी सीमा तक सिद्ध कर दिया जाता है तो प्रशासक दावेदार को, विहित प्राधिकारी द्वारा इस निमित्त अवधारित रकम संदत्त करेगा

                (3) उपधारा (2) के अधीन किए जा सकने वाले दावों का स्वरूप और रीति और ऐसे दावों की बाबत की जाने वाली कार्यवाही की प्रक्रिया तथा उनसे संबंधित सभी अन्य विषय ऐसे होंगे जो विहित किए जाएं

अध्याय 8

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अधीन शक्तियों के प्रयोग के संबंध में विशेष उपबंध

70. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अधीन जिला मजिस्ट्रेटों तथा कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए पुलिस आयुक्त और कुछ अन्य अधिकारियों को प्राधिकृत करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं,-

() पुलिस आयुक्त को, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के ऐसे उपबंधों के अधीन जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, दिल्ली के बारे में, कार्यपालक मजिस्ट्रेट तथा जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग तथा पालन करने के लिए सशक्त कर सकेगी ;

() पुलिस आयुक्त के अधीनस्थ किसी अधिकारी को (जो सहायक पुलिस आयुक्त की पंक्ति से नीचे का अधिकारी नहीं है), उक्त संहिता के ऐसे उपबंधों के अधीन, जो अधिसूचना में विनिदिष्ट किए जाएं, दिल्ली के ऐसे क्षेत्रों के बारे में जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग तथा पालन करने के लिए सशक्त कर सकेगी

(2) पुलिस आयुक्त का अधीनस्थ प्रत्येक अधिकारी, ऐसी किन्हीं शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग तथा पालन में, जिनके प्रयोग और पालन के लिए उसे उपधारा (1)  के अधीन सशक्त किया गया है, पुलिस आयुक्त के साधारण नियंत्रण के अधीन उसी रीति से और उसी विस्तार तक रहेगा जैसे कि उक्त संहिता की धारा 20 के अधीन नियुक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट उस धारा के अधीन नियुक्त जिला मजिस्ट्रेट के साधारण नियंत्रण के अधीन होता है

                (3) पुलिस आयुक्त और उसका कोई अधीनस्थ अधिकारी, ऐसी किन्हीं शक्तियों तथा कर्तव्यों के प्रयोग तथा पालन में जिनके प्रयोग तथा पालन के लिए उसे उपधारा (1) के अधीन सशक्त किया गया है, उक्त संहिता की धारा 20 के अधीन नियुक्त जिला मजिस्ट्रेट के साधारण नियंत्रण के अधीन नहीं होगा

                (4) उक्त संहिता में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के उपबंध प्रभावी होंगे

71. धारा 70 के अधीन अधिसूचनाओं का संसद् के समक्ष रखा जाना-केन्द्रीय सरकार द्वारा, धारा 70 के अधीन बनाई गई प्रत्येक अधिसूचना, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस अधिसचूना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं या दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह अधिसूचना नहीं बनाई जानी चाहिए, तो तत्पश्चात्, यथास्थिति, वह अधिसूचना ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभावी होगी या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, किन्तु अधिसूचना के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

                                                                                                                                                                                   

अध्याय 9

पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 के अधीन विशेष शक्तियां

73. 1960 के अधिनियम संख्यांक 59 के अधीन अपराधों के बारे में शक्तियां-(1) यदि किसी पशु के संबंध में, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 की उपधारा (1) या धारा 12 के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया गया है, या यह संदेह करने के लिए कोई युक्तियुक्त आधार है कि ऐसा कोई अपराध किया गया है तो कोई पुलिस अधिकारी-

() पशु को महानगर मजिस्ट्रेट के पास ले जा सकेगा ; या

() यदि अभियुक्त व्यक्ति ऐसी अपेक्षा करता है तो पशु को प्रशासक द्वारा इस निमित्त, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट किए गए किसी पशु चिकित्सा अधिकारी के पास ले जा सकेगा :

परन्तु पुलिस अधिकारी पशु को किसी पशु चिकित्सा अधिकारी के पास ले जाने की बजाय पशु को निरुद्ध रखे जाने के लिए किसी औषधालय में या प्रशासक द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, अनुमोदित किसी उपयुक्त स्थान में ले जा सकेगा और तब पशु को वहां तब तक निरुद्ध रखा जाएगा जब तक कि उसे किसी महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं कर दिया  जाता है ; या

() पशु को, उक्त अधिनियम की धारा 35 की उपधारा (2) के अधीन किसी मजिस्ट्रेट का निदेश होने तक उपचार के लिए और निरुद्ध रखे जाने के लिए उक्त धारा के अधीन नियत किसी रुग्णालय में ले जा सकेगा ; या

() यदि पशु की शारीरिक स्थिति ऐसी है कि उसे किसी पशु चिकित्सा अधिकारी या किसी महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष नहीं ले जाया जा सकता है तो वह दो या अधिक सम्मानित व्यक्तियों की उपस्थिति में, पशु की स्थिति के बारे में, एक ऐसी रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें ऐसे घावों, फोड़ों, अस्थि-भंगों, खरोंचों या क्षति के अन्य चिह्नों का वर्णन किया जाएगा जो ऐसे पशु के शरीर पर पाए जाएं :

परन्तु पुलिस अधिकारी पशु को निरुद्ध रखे जाने के लिए किसी औषधालय में या प्रशासक द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, अनुमोदित किसी उपयुक्त स्थान में ले जा सकेगा और तब पशु को वहां तब तक निरुद्ध रखा जाएगा जब तक कि उसे किसी महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं कर दिया जाता है

(2) जहां किसी पशु को उपधारा (1) के अधीन किसी औषधालय या रुग्णालय या किसी अन्य स्थान में निरुद्ध किया जाता है वहां पशु को किसी महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष कम से कम विलंब करते हुए पेश किया जाएगा और किसी भी दशा में ऐसे विलंब की अवधि उस तारीख से तीन दिन से अधिक की नहीं होगी जिसको उसे ऐसे निरुद्ध किया गया था

74. महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसे व्यक्ति को पशु का वापस किया जाना जिसके कब्जे से उसे लिया गया था-यदि पशु को धारा 73 के अधीन किसी महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष लाया जाता है तो मजिस्ट्रेट यह निदेश दे सकेगा कि पशु ऐसे व्यक्ति को, जिसके कब्जे से वह पशु लिया गया था, उसके द्वारा महानगर मजिस्ट्रेट के समाधानप्रद रूप में यह प्रतिभूति दी जाने पर कि वह अपेक्षा की जाने पर ऐसे पशु को पेश करने के लिए स्वयं आबद्ध है, लौटा दिया जाए अथवा यह निदेश दे सकेगा कि पशु को उपचार और देखरेख के लिए रुग्णालय में भेज दिया जाए और उसे वहां पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 (1960 का 59) की धारा 35 में उपबन्धित रूप में निरुद्ध रखा जाए अथवा पशु के व्ययन या अभिरक्षा या पेश किए जाने के बारे में ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह   ठीक समझे

75. पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा पशु की परीक्षा-धारा 73 के अधीन जिस पशु-चिकित्सा अधिकारी के समक्ष पशु को लाया जाता है वह शीघ्रातिशीघ्र उसकी परीक्षा करेगा और ऐसी परीक्षा की एक रिपोर्ट तैयार करेगा तथा उसकी एक प्रति अभियुक्त व्यक्ति को, यदि वह उसके लिए आवेदन करता है तो, निःशुल्क दी जाएगी

76. 1960 के अधिनियम संख्यांक 59 के अधीन पशुओं के संबंध में कार्रवाई की जाना-यदि किसी महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष पशु के पेश किए जाने से पूर्व, धारा 73 के अधीन, कोई पुलिस अधिकारी पशु को निरुद्ध रखे जाने के लिए किसी औषधालय या रुग्णालय या किसी अन्य स्थान में ले जाता है अथवा कोई महानगर मजिस्ट्रेट रुग्णालय में उसके और निरुद्ध रखे जाने का निदेश देता है तो किसी औषधालय, रुग्णालय या किसी अन्य उपयुक्त स्थान में पशु को निरुद्ध रखे जाने के संबंध में (जिसके अन्तर्गत पशु के परिवहन, भरणपोषण और उपचार का खर्च भी है), पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 35 की उपधारा (3) से (7) तक की उपधाराएं (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं) यथासंभव, लागू होंगी

77. पुलिस अधिकारी की किसी पशु की पीठ से जीन या सामान उतारने की शक्ति-यदि किसी पुलिस अधिकारी को सद्भावपूर्वक यह संदेह है कि किसी कार्य या श्रम में लगाया गया कोई पशु किसी घाव के कारण इस प्रकार लगाए जाने के उपयुक्त नहीं है तो वह ऐसे पशु के भारसाधक व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा कि वह यह अभिनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए कि ऐसा कोई घाव है या नहीं, ऐसे पशु से जीन या सामान उतार ले और यदि कोई व्यक्ति ऐसा करने से इंकार करता है तो ऐसा पुलिस अधिकारी ऐसे पशु से जीन या सामान स्वयं उतार सकेगा या उतरवा सकेगा

78. 1960 के अधिनियम संख्यांक 59 के अधीन कुछ अपराधों के मामले में बिना वारण्ट गिरफ्तारी-कोई पुलिस अधिकारी किसी मजिस्ट्रेट के वारण्ट के बिना ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा जो उसकी उपस्थिति में, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 की उपधारा (1) के खण्ड () से () तक (जिनके अन्तर्गत ये दोनों खण्ड भी हैं) के अधीन दण्डनीय कोई अपराध करता है

79. इस अध्याय के उपबन्धों का 1960 के अधिनियम संख्यांक 59 के उपबन्धों के अतिरिक्त होना-इस अध्याय के उपबन्ध, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 के उपबन्धों के अतिरिक्त होंगे, कि उनके अल्पीकरण में

अध्याय 10

अपराध और दण्ड

80. सड़क के नियमों की अवहेलना-कोई भी व्यक्ति-

() किसी मार्ग पर कोई यान चलाते समय (विचलन के लिए वास्तविक आवश्यकता या किसी पर्याप्त कारण के अभाव में), ऐसे मार्ग की बाईं ओर ही चलेगा और उसी दिशा में जाने वाले किसी अन्य यान से आगे निकलते समय, ऐसे यान की दाहिनी ओर से ही निकलेगा ; या

() किसी जीवजन्तु या यान को, उसकी देखभाल और निरापद होने की पर्याप्त व्यवस्था किए बिना किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में नहीं छोड़ेगा

81. जीवजन्तु द्वारा बाधा डालना या रिष्टि-कोई भी व्यक्ति-

(i) किसी जीवजन्तु या यान के चलाने में, उसका प्रबन्ध करने में, उसके साथ बर्ताव करने में या उसकी देखरेख करने में दुर्व्यवहार, उपेक्षा या दुरुपयोग द्वारा ; या

(ii) किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान से होकर काष्ठ या लट्ठों या किन्हीं अन्य दुर्वह वस्तुओं से लदे यान या जीवजन्तु को, इस निमित्त बनाए गए किसी विनियम के विरुद्ध, चलाकर,

किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में कोई बाधा, नुकसान, क्षति, खतरा, संत्रास या रिष्टि उत्पन्न नहीं करेगा

82. किराए पर देने या विक्रय करने आदि के लिए जीवजन्तुओं को अभिदर्शित करना-कोई भी व्यक्ति, ऐसे समयों और स्थानों पर के सिवाय जो सक्षम प्राधिकारी अनुज्ञात करे, किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में किसी जीवजन्तु या यान को किराए पर देने या विक्रय करने के लिए अभिदर्शित नहीं करेगा, किसी फर्नीचर या यान की सफाई नहीं करेगा या किसी घोड़े या अन्य जीवजन्तु की सफाई या खरहरा नहीं करेगा या किसी घोड़े या अन्य जीवजन्तु को प्रशिक्षण नहीं देगा या नहीं सधाएगा या कोई यान या उसका कोई भाग नहीं बनाएगा या (उस दशा को छोड़कर, जब किसी दुर्घटना के कारण उसी स्थान पर मरम्मत करना अपरिहार्य है) किसी यान या उसके किसी भाग की मरम्मत नहीं करेगा या उसमें ऐसा कोई विनिर्माण या संक्रिया नहीं करेगा जो यातायात के लिए गम्भीर रूप में बाधा है या आसपास के निवासियों या जनता के लिए गम्भीर क्षोभ उत्पन्न करती है

83. किसी मार्ग में कोई बाधा डालना-कोई भी व्यक्ति, किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में,-

() लदाई या उतराई करने के लिए या यात्रियों को चढ़ाने या उतारने के लिए, किसी जीवजन्तु या यान को उतने समय से अधिक, जितना उस प्रयोजन के लिए आवश्यक है, रहने देकर या खड़ा रखकर ; या

() किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में किसी यान को खड़ा छोड़कर या कोई ढोर बांधकर ; या

() किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान के किसी भाग को यानों या ढोरों के ठहरने के स्थान के रूप में प्रयोग करके ; या

() किसी मार्ग में या उस पर कोई पेटी, गांठ, पैकेज या अन्य किन्हीं वस्तुओं को, चाहे वे जो भी हों, अयुक्तियुक्त समय के लिए या किसी विनियम के विरुद्ध, छोड़कर ; या

() किसी वस्तु को विक्रय के लिए अभिदर्शित करके या किसी स्टाल, बूथ, बोर्ड, पीपे या टोकरी में, या उस पर या किसी भी अन्य रूप में, किसी वस्तु को विक्रय के लिए अभिदर्शित करके, बाधा नहीं डालेगा

84. पैदल पथ में बाधा डालना-कोई भी व्यक्ति किसी पैदल पथ पर किसी जीवजन्तु या बच्चागाड़ी से भिन्न किसी यान को तो हांकेगा, उस पर चढ़ेगा, उस पर माल लादेगा, उसे ढकेलेगा, उसे छोड़ेगा और किसी जीवजन्तु को वहां इस प्रकार बांधेगा कि वह ऐसे पैदल पथ के आरपार या उस पर खड़ा हो सके

85. अभिनयों द्वारा बाधा डालना और क्षोभ उत्पन्न करना-कोई भी व्यक्ति, पुलिस आयुक्त द्वारा बनाए गए किसी विनियम के उल्लंघन में,-

() कोई स्वांग, संगीत या इसी प्रकार के अन्य अभिनयों का प्रदर्शन नहीं करेगा, जिससे भीड़ आकर्षित हो सकती   है ; या

() किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में बहुत बड़े विज्ञापन, चित्र, आकृतियां या प्रतीक नहीं ले जाएगा या नहीं रखेगा, जिससे यात्रियों को बाधा या आसपास के निवासियों को क्षोभ हो

86. किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में या उसके निकट कोई घृणोत्पादक कार्य करना-कोई भी व्यक्ति किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में या उसके निकट और उससे देखे जा सकने वाले स्थान में किसी जीवजन्तु का वध, किसी लोथ या खाल की धुलाई अथवा स्नान या अपने शरीर की सफाई, इस प्रयोजन के लिए पृथक् किए गए स्थान पर के सिवाय, इस प्रकार नहीं करेगा कि उससे आसपास के निवासियों या आने-जाने वाले व्यक्तियों को क्षोभ हो

87. घोड़े आदि को खुला छोड़ना और हिंसक कुत्तों को स्वच्छन्द छोड़ना-कोई भी व्यक्ति, किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में,-

() उपेक्षापूर्वक किसी घोड़े या अन्य जीवजन्तु को इस प्रकार खुला नहीं छोड़ेगा कि उससे खतरा, क्षति, संत्रास या क्षोभ हो ; या

() किसी हिंस्र कुत्ते को, मुसका के बिना, स्वच्छन्द नहीं छोड़ेगा ; या

() किसी कुत्ते या अन्य जीवजन्तु को, किसी व्यक्ति या घोड़े या अन्य जीवजन्तु पर हमला करने, उसे परेशानी में डालने या भयभीत करने के लिए तो छोड़ेगा और उकसाएगा

88. स्नान या धुलाई करने के लिए पृथक् किए गए स्थानों से भिन्न स्थानों पर स्नान या धुलाई करना-कोई भी व्यक्ति किसी ऐसे सार्वजनिक कुएं, तालाब या जलाशय में या उसके किनारे, स्नान या धुलाई नहीं करेगा, जो ऐसे प्रयोजन के लिए किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पृथक् नहीं किया गया है और किसी ऐसे सरोवर, पोखर, कुल्या, नदी के किसी भाग, सरिता, नाले या जल प्रदाय के अन्य स्रोत या साधन में या उसके किनारे, जिसमें ऐसा स्नान या धुलाई करना किसी सक्षम प्राधिकारी के आदेश से निषिद्ध है, स्नान या धुलाई करेगा

89. सार्वजनिक कुओं आदि में जल को अपवित्र करना-कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक कुएं, तालाब, जलाशय, सरोवर, पोखर, कुल्या या नदी के किसी भाग, सरिता, नाले या जल प्रदाय के अन्य स्रोत या साधन के जल को इस प्रकार तो दूषित करेगा और कराएगा कि सक्षम प्राधिकारी के आदेश द्वारा जिस प्रयोजन के लिए वह पृथक् किया गया है उसके लिए वह कम उपयुक्त हो जाए

90. स्नान करने वालों को बाधा पहुंचाना-कोई भी व्यक्ति, स्नान करने के प्रयोजन के लिए धारा 88 के अधीन सक्षम प्राधिकारी के आदेश द्वारा पृथक् किए गए किसी स्थान पर स्नान करने वाले किसी व्यक्ति को, जानबूझकर अतिक्रमण द्वारा या ऐसे स्थान को ऐसे किसी प्रयोजन के लिए जिसके लिए वह इस प्रकार पृथक् नहीं किया गया है, प्रयोग द्वारा बाधित या तंग नहीं करेगा

 91. सार्वजनिक स्थान पर अशिष्ट व्यवहार करना-कोई भी व्यक्ति अपने शरीर को जानबूझकर और अशिष्ट रूप से, किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान या लोक समागम के स्थान में या जहां तक दृष्टि पड़ सकती है, ऐसी रीति से कि उसे किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान या लोक समागम के स्थान से, चाहे वह किसी घर या भवन के अन्दर से हो या अन्यथा, देखा जा सकता है, उच्छन्न नहीं करेगा, या किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान या लोक समागम के किसी स्थान में या किसी कार्यालय, पुलिस थाने या स्टेशन हाऊस में अशिष्ट भाषा का प्रयोग नहीं करेगा या अशिष्ट, बलवात्मक अथवा उच्छृंखल व्यवहार नहीं करेगा

92. मार्ग में यात्रियों को बाधित या क्षुब्ध करना-कोई भी व्यक्ति, किसी यात्री को किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में जानबूझकर तो धक्का देगा, दबाएगा, ढकेलेगा और बाधित करेगा और हिंसक गतिविधियां, धमकी भरे अंगविक्षेपों, स्वैरितापूर्ण वैयक्तिक क्षोभ, चीखने या चिल्लाने द्वारा जानबूझकर घोड़ों या ढोरों को डराकर या अन्यथा लोक शान्ति या व्यवस्था में बाधा नहीं डालेगा

93. शान्ति भंग करने के आशय से दुर्व्यवहार करना-कोई भी व्यक्ति किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में धमकी भरे,   गाली-गलोच वाले या अपमानजनक ऐसे शब्दों का प्रयोग या व्यवहार नहीं करेगा जिनका शान्ति भंग करने का आशय है या जिनसे शान्ति भंग हो सकती है

94. पंतग आदि उड़ाने पर प्रतिषेध-कोई भी व्यक्ति इस प्रकार पतंग या कोई अन्य वस्तु नहीं उड़ाएगा कि उससे व्यक्तियों, जीवजन्तुओं या संपत्ति को खतरा, क्षति या संत्रास उत्पन्न हो

95. मार्ग आदि में या उसके निकट न्यूसेन्स करना-कोई भी व्यक्ति किसी मार्ग, सार्वजनिक स्थान या लोक समागम के किसी स्थान में या उसके निकट-

() मलमूत्र त्याग कर न्यूसेन्स नहीं करेगा ; या

() सात वर्ष से कम आयु के बालक को, जो उसकी देखरेख और अभिरक्षा में है, पूर्वोक्त रूप में न्यूसेन्स नहीं करने देगा ; या

() थूक कर या कोई धूल, राख, कूड़ा-कर्कट या कचरा फैंक कर किसी आने-जाने वाले व्यक्ति को क्षुब्ध नहीं करेगा

96. सार्वजनिक भवन में लगी सूचना की अवहेलना-कोई भी व्यक्ति किसी न्यायालय, पुलिस थाने, पुलिस कार्यालय, सरकार के अधिभोग वाले भवन या किसी स्थानीय निकाय के अधिभोग वाले भवन में, ऐसे स्थान के भारसाधक सक्षम प्राधिकारी द्वारा निकाली गई और ऐसे न्यायालय, पुलिस थाने, पुलिस कार्यालय या भवन पर प्रदर्शित किसी सूचना के उल्लंघन में तो धूम्रपान करेगा और थूकेगा

97. धारा 80 से धारा 96 तक के अधीन अपराधों के लिए शास्तियां-कोई व्यक्ति जो धारा 80 से धारा 96 (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं) तक के उपबन्धों में से किसी का उल्लंघन करेगा, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा या ऐसे जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम की दशा में, कारावास से, जिसकी अवधि आठ दिन से अधिक की नहीं होगी, दंडित   किया जाएगा

98. ढोरों आदि को परिरोध में रखने में असफल रहने के लिए शास्ति-(1) जो कोई किन्हीं ढोरों को, जो उसकी सम्पत्ति हैं या उसके भारसाधन में हैं, किसी मार्ग पर भटकने देगा या किसी प्राइवेट या सार्वजनिक सम्पत्ति पर अतिचार करने देगा वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर,-

() प्रथम अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो तीन सौ रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडित किया जाएगा ; और

() द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडित किया जाएगा

                (2) उपधारा (1) के अधीन अपराध का विचारण करने वाला महानगर मजिस्ट्रेट आदेश कर सकेगा कि-

() अभियुक्त, किसी व्यक्ति को ऐसे किसी नुकसान के लिए जिसकी बाबत यह साबित हो गया है कि वह अभियुक्त के नियंत्रणाधीन ढोर द्वारा ऐसे व्यक्ति की भूमि पर अतिचार के कारण उसकी सम्पत्ति या भूमि की उपज को हुआ है, दो सौ पचास रुपए तक के ऐसे प्रतिकर का संदाय करे जो ऐसा मजिस्ट्रेट उचित समझे ; और

() जिस ढोर के कारण अपराध हुआ है वह सरकार को समपहृत हो जाएगा

(3) उपधारा (2) के अधीन अधिनिर्णीत किसी प्रतिकर की वसूली उसी प्रकार की जा सकेगी मानो वह इस धारा के अधीन अधिरोपित जुर्माना हो

(4) प्रत्येक पुलिस अधिकारी का यह कर्तव्य होगा और किसी भी अन्य व्यक्ति के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसे किसी ढोर का, जो किसी मार्ग में भटकता हुआ पाया जाता है या किसी प्राइवेट या सार्वजनिक सम्पत्ति पर अतिचार करता हुआ पाया जाता है, अभिग्रहण कर ले और उसे किसी कांजी हाऊस में परिरोध के लिए ले जाए

                (5) जुर्माने की वसूली के विधि द्वारा उपबन्धित अन्य किन्हीं साधनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस धारा के अधीन अधिरोपित किसी जुर्माने की वसूली ऐसे किसी या सभी ढोरों के विक्रय द्वारा की जा सकेगी जिनके कारण अपराध हुआ है, चाहे ऐसे ढोर अपराध के लिए सिद्धदोष व्यक्ति की सम्पत्ति हों या केवल अपराध के किए जाने के समय उसके भारसाधन में थे

(6) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन दण्डनीय अपराध संज्ञेय होगा

99. जीवजन्तुओं के प्रति क्रूरता के लिए दंड-जो कोई किसी स्थान पर किसी जीवजन्तु को क्रूरतापूर्वक पीटेगा, अंकुश लगाएगा, उससे अधिक कार्य कराएगा, उसके साथ दुर्व्यवहार करेगा या उसे यातना देगा या क्रूरतापूर्वक पिटवाएगा, अंकुश लगवाएगा, अधिक कार्य कराएगा या उसके प्रति दुर्व्यवहार कराएगा या यातना दिलवाएगा, वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा

100. जानबूझकर अतिचार करना-जो कोई, किसी समाधानप्रद प्रतिहेतु के बिना, किसी निवासगृह या परिसर या उससे संलग्न किसी भूमि या मैदान में या उस पर या किसी ऐसे मैदान, भवन, स्मारक या सन्निर्माण पर, जो सरकार का है या जिसका सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है या किसी यान पर जानबूझकर प्रवेश करेगा या उसमें या उस पर बना रहेगा वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, चाहे उससे कोई वास्तविक नुकसान हुआ हो या नहीं, कारावास से, जिसकी अवधि सात दिन तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा

101. मिथ्या अग्नि चेतावनी देना या अग्नि चेतावनी यंत्र को नुकसान पहुंचाना-जो कोई जानबूझकर सरकार के या निगम के या किसी नगरपालिका के अग्निशामक दल को या उसके किसी अधिकारी या फायरमैन को, मार्ग अग्नि चेतावनी यंत्र, कथन, संदेश द्वारा या अन्यथा कोई मिथ्या अग्नि चेतावनी देगा या दिलवाएगा या ऐसी मिथ्या चेतावनी देने के आशय से, जानबूझकर मार्ग अग्नि चेतावनी यंत्र के शीशे को तोडे़गा या अन्यथा उसे नुकसान पहुंचाएगा वह, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा

102. सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच संदेहजनक परिस्थितियों में पाया जाना-जो कोई सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच-

() कोई अपराध करने के आशय से किसी खतरनाक उपकरण से लैस पाया जाएगा ; या

() कोई अपराध करने के आशय से मुंह ढके हुए या अन्यथा भेष बदले हुए पाया जाएगा ; या

() किसी निवासगृह या अन्य भवन में या किसी यान पर सवार पाया जाएगा और वहां अपनी उपस्थिति के लिए कोई समाधानप्रद लेखा-जोखा नहीं दे सकेगा ; या

() कुख्यात चोर होते हुए, किसी मार्ग, यार्ड या अन्य स्थान पर लेटा हुआ या घूमता-फिरता पाया जाएगा और अपने बारे में कोई समाधानप्रद लेखा-जोखा नहीं दे सकेगा ; या

() किसी विधिपूर्ण प्रतिहेतु के बिना (ऐसे प्रतिहेतु के सबूत का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा) ऐसी दशा में पाया जाएगा कि उसके कब्जे में गृहभेदन का कोई उपकरण है,

वह, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा

103. ऐसी सम्पत्ति का कब्जे में होना जिसकी बाबत कोई समाधानप्रद लेखा-जोखा नहीं दिया जा सकता है-जो कोई अपने कब्जे में ऐसी कोई वस्तु जिसके बारे में यह विश्वास करने के लिए कारण है कि वह चोरी की सम्पत्ति है या कपटपूर्वक अभिप्राप्त की गई सम्पत्ति है, रखेगा या किसी रीति में उसे हस्तान्तरित करेगा या विक्रय अथवा पणयम के लिए प्रस्थापित करेगा और ऐसे कब्जे का   लेखा-जोखा देने में या महानगर मजिस्ट्रेट के समाधानप्रद रूप में कार्य करने में असफल रहेगा वह, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा

104. ऐसी सम्पत्ति को, जिसकी बाबत यह संदेह है कि वह चोरी की है, पुलिस के कब्जे में देने या निविदत्त करने में     पणयम-दलालों आदि द्वारा लोप-यदि ऐसे किसी व्यक्ति के, जो पणयम-दलाल, पुरानी सम्पत्ति का व्यापारी या धातुकर्मी है या जिसकी बाबत यह विश्वास करने के लिए पुलिस आयुक्त के पास उचित कारण है कि वह ऐसा व्यक्ति है, और जिसे किसी पुलिस अधिकारी से किसी ऐसी सम्पत्ति के सम्बन्ध में, जिसके बारे में यह संदेह है कि वह भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 410 में उल्लिखित किसी अपराध द्वारा या ऐसे किसी अपराध द्वारा जो उक्त संहिता की धारा 417, धारा 418, धारा 419 या धारा 420 के अधीन दंडनीय है, अन्तरित की गई है, लिखित या मुद्रित रूप में जानकारी मिलने पर उसके कब्जे में ऐसी जानकारी में उल्लिखित वर्णन की कोई सम्पत्ति पाई जाती है या ऐसी जानकारी प्राप्त होने के पश्चात् कब्जे में आती है या उसके समक्ष विक्रय, पणयम, विनिमय के रूप में या अभिरक्षा, परिवर्तन के लिए या अन्यथा किसी भी अन्य रूप में ऐसी किसी सम्पत्ति की बाबत कोई प्रस्थापना है तो यदि,-

(i) वह ऐसे कब्जे या प्रस्थापना की पुलिस आयुक्त को या किसी पुलिस थाने में तुरन्त जानकारी नहीं देगा और उस व्यक्ति का, जिससे कब्जा या प्रस्थापना प्राप्त हुई थी, नाम और पता अभिनिश्चित करने के लिए सभी उचित उपाय नहीं करेगा और उनकी पूर्वोक्त जैसी जानकारी नहीं देगा, या

(ii) सम्पत्ति, सामान्यतः पहने जाने वाले परिधान की कोई वस्तु या कोई अन्य चीज है और वह, दी गई उक्त लिखित या मुद्रित जानकारी के आधार पर पहचानी जा सकने वाली तथा ऐसी जानकारी मिलने के पश्चात् किसी भी रूप में छिपाई गई सम्पत्ति नहीं है,

तो सिद्धदोष ठहराए जाने पर वह, उसके कब्जे में पाई गई या उसे प्रस्थापित सम्पत्ति की प्रत्येक वस्तु के सम्बन्ध में जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा

105. धारा 104 में निर्दिष्ट सम्पत्ति को पिघलाना, आदि-जो कोई, धारा 104 में निर्दिष्ट जानकारी मिलने पर, पुलिस की पूर्व अनुज्ञा के बिना, ऐसी किसी सम्पत्ति को जो उस धारा में विनिर्दिष्ट है, परिवर्तित करेगा, पिघलाएगा, विरूपित करेगा, या संजोकर रखेगा या परिवर्तित कराएगा, पिघलवाएगा, विरूपित कराएगा या संजोकर रखवाएगा अथवा परिवर्तित होने देगा, पिघलने देगा, विरूपित होने देगा या संजोकर रखने देगा, वह यह सिद्ध हो जाने पर कि भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 410 के अर्थ में वह चोरी की सम्पत्ति है या ऐसी सम्पत्ति है जिसके सम्बन्ध में उक्त संहिता की धारा 417, धारा 418, धारा 419 या धारा 420 के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया गया है, कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा

106. बालक से गिरवी रखाना-जो कोई ऐसे किसी बालक से, जो चौदह वर्ष से अधिक की आयु का प्रतीत नहीं होता है, कोई वस्तु, ऐसे बालक को उधार दी गई, अग्रिम दी गई या परिदत्त की गई किसी धनराशि के लिए पणयम, गिरवी या प्रतिभूति के रूप में लेगा या वस्तु के स्वामी की जानकारी और सम्मति के बिना, ऐसे बालक से कोई भी वस्तु क्रय करेगा, वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा

107. सार्वजनिक आमोद आदि के स्थानों पर उच्छृंखल आचरण होने देना-जो कोई, सार्वजनिक आमोद या सार्वजनिक मनोरंजन के किसी स्थान का पालक होते हुए, ऐसे स्थान में मत्त होने या अन्य उच्छृंखल व्यवहार करने या किसी भी प्रकार के द्यूत खेलने की जानबूझकर अनुज्ञा देगा या उसे होने देगा, वह, सिद्धदोष ठहराए जाने पर जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा

108. खेलों में छल करना और मार्ग में द्यूत खेलना-(1) जो कोई ताश, पासा या अन्य खेल खेलने में या बाजी या पंदयम में भाग लेने में या खेलने वालों के पक्ष में या उनके हाथ पर बाजी लगाने में या किसी खेल या क्रीड़ा, विनोद या अभ्यास के होने पर पंदयम में, किसी कपट या विधिविरुद्ध युक्ति या किसी अनाचार द्वारा किसी व्यक्ति से अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के लिए कोई धनराशि या मूल्यवान वस्तु जीतेगा, उसकी बाबत यह समझा जाएगा कि उसने भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की        धारा 415 के अर्थ में छल का अपराध किया है और वह तद्नुसार दण्ड का भागी होगा

                (2) जो कोई, द्यूत खेलने या पंदयम के प्रयोजन से किसी मार्ग में किन्हीं अन्य व्यक्तियों के साथ जमा होगा या किसी जमाव में सम्मिलित होगा वह, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा या सम्यक् भर्त्सना के पश्चात् छोड़ा जा सकेगा

109. धारा 27 के अधीन आदेश की अवज्ञा के लिए शास्ति-जो कोई धारा 27 के अधीन किसी ऐसे आदेश का, जिसके द्वारा उससे कोई परिसर खाली करने की अपेक्षा की गई है, उल्लंघन, अवज्ञा या विरोध करेगा या उसके अनुपालन में असफल रहेगा वह, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा

110. धारा 28 के अधीन विनियमों आदि के उल्लंघन के लिए शास्ति-धारा 112 में जैसा उपबन्धित है उसके सिवाय, जो कोई धारा 28 के अधीन बनाए गए किसी विनियम या ऐसे विनियम के अधीन जारी की गई किसी अनुज्ञप्ति की किसी शर्त का उल्लंघन करेगा या उल्लंघन करने का दुष्प्रेरण करेगा, वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर,-

() यदि वह विनियम धारा 28 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन बनाया गया है और उसके द्वारा किसी माल के, किसी मार्ग या उसके किसी भाग में विक्रय या विक्रय के लिए ऐसे अभिदर्शित किए जाने का जिससे यातायात में बाधा पड़ती है या जनता को असुविधा होती है, प्रतिषेध किया गया है तो,-

(i) प्रथम अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, और

(ii) किसी पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, और जुर्मान से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा ;

() यदि विनियम धारा 28 की उपधारा (1) के खण्ड (), (), () या (), खण्ड () के उपखण्ड (i) और (ii) या खण्ड () के अधीन बनाया गया है तो कारावास से, जिसकी अवधि आठ दिन तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से ;

() यदि विनियम धारा 28 की उपधारा (1) के खण्ड () या () के अधीन बनाया गया है तो जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा ; और

() यदि विनियम धारा 28 की उपधारा (1) के किसी खण्ड के अधीन बनाया गया है और उसके उल्लंघन के लिए इस धारा के खण्ड (), () या () के अधीन किसी शास्ति का उपबन्ध नहीं किया गया है तो जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा,दण्डित किया जाएगा

111. सार्वजनिक आमोद या मनोरंजन के स्थान के अनुज्ञप्तिधारी का अपने सेवकों के कार्यों के लिए दायित्व-इस अधिनियम के अधीन सार्वजनिक आमोद या मनोरंजन के किसी स्थान के सम्बन्ध में किसी अनुज्ञप्ति का धारक और साथ ही वास्वविक अपराधी भी, धारा 110 के अधीन किसी ऐसे अपराध के लिए, जो उसकी ओर से उसकी अभिव्यक्त या विवक्षित अनुज्ञा से कार्य करते हुए उसके किसी सेवक या अन्य अभिकर्ता ने किया है, उसी प्रकार जिम्मेदार होगा मानो वह अपराध स्वयं उसने किया हो, जब तक कि वह यह साबित नहीं कर देता कि उसने ऐसे अपराध के किए जाने को रोकने के लिए सभी सम्यक् और उचित पूर्वावधानियां बरती थीं

112. सार्वजनिक मनोरंजन के स्थान के संबंध में अनुज्ञप्ति या भोजनालय के संबंध में रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र अभिप्राप्त करने या विहित अवधि के भीतर ऐसी अनुज्ञप्ति या प्रमाणपत्र का नवीकरण कराने के लिए शास्ति-(1) जो कोई सार्वजनिक मनोरंजन के किसी स्थान के संबंध में इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति या किसी भोजनालय के संबंध में उसके अधीन रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र अभिप्राप्त करने में या विहित अवधि के भीतर, यथास्थिति, ऐसी अनुज्ञप्ति या प्रमाणपत्र का नवीकरण कराने में असफल रहेगा वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा

(2) ऐसे किसी अपराध का विचारण करने वाला कोई न्यायालय यह निदेश भी देगा कि सार्वजनिक मनोरंजन का स्थान या भोजनालय, जिसके संबंध में अपराध किया गया है, चलाने वाला व्यक्ति ऐसे स्थान या भोजनालय को उस समय तक बन्द रखे जब तक कि वह उसके संबंध में, यथास्थिति, अनुज्ञप्ति या नई अनुज्ञप्ति, या रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र या रजिस्ट्रीकरण का नया प्रमाणपत्र अभिप्राप्त नहीं कर लेता और तब ऐसा व्यक्ति ऐसे निदेश का तत्काल अनुपालन करेगा

(3) यदि कोई व्यक्ति ऐसे किसी निदेश का अनुपालन करने में असफल रहेगा तो वह, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा  

(4) उपधारा (3) के अधीन की गई किसी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना न्यायालय के निदेश के अनुपालन में ऐसे व्यक्ति के असफल रहने पर, पुलिस आयुक्त के लिखित आदेश द्वारा प्राधिकृत कोई पुलिस अधिकारी, ऐसे कदम उठा सकेगा या उठवा सकेगा और ऐसा बल प्रयोग कर सकेगा या करवा सकेगा जो, ऐसे अधिकारी की राय में, न्यायालय के निदेश का अनुपालन कराने के लिए आवश्यक है   

113. धारा 29, 30, 31, 32, 33 और 34 के अधीन आदेशों आदि के उल्लंघन के लिए शास्तियां-(1) जो कोई धारा 29 के अधीन किसी पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए किसी आदेश का उल्लंघन, अवज्ञा या विरोध करेगा या उसका अनुपालन करने में असफल रहेगा वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा

                (2) जो कोई धारा 30, धारा 32, धारा 33 या धारा 34 के अधीन निकाली गई किसी अधिसूचना या किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा या उसके उल्लंघन का दुष्प्रेरण करेगा वह, सिद्धदोष ठहराए जाने पर,-

() यदि उक्त अधिसूचना या आदेश धारा 30 की उपधारा (1) या धारा 33 या धारा 34 के अधीन किया गया है तो कारावास से, जिसकी अवधि चार मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा :

परन्तु न्यायालय पर्याप्त और समुचित कारणों के होने पर, जो निर्णय में अभिलिखित किए जाएंगे, चार मास की अवधि से कम का कारावास भी अधिरोपित कर सकेगा ;

() यदि उक्त आदेश धारा 30 की उपधारा (2) के अधीन किया गया है तो कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ;

() यदि उक्त अधिसूचना धारा 30 की उपधारा (3) के अधीन निकाली गई है तो जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा ; या

() यदि उक्त आदेश धारा 32 के अधीन किया गया है तो कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्मान से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा

                (3) जो कोई धारा 31 के अधीन किसी पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए किसी निदेश का विरोध करेगा या उसका अनुपालन करने में असफल रहेगा वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा

114. धारा 35, 36 और 37 के अधीन बनाए गए विनियमों आदि के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई धारा 35, धारा 36 या धारा 37 के अधीन बनाए गए किसी विनियम, सूचना या आदेश का उल्लंघन करेगा या उसके उल्लंघन का दुष्प्रेरण करेगा वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा

115. धारा 46, 47 या 48 के अधीन दिए गए निदेशों के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन जारी किए गए किसी निदेश का विरोध करेगा या उसका अनुपालन करने में असफल रहेगा या ऐसे किसी निदेश का विरोध या अनुपालन करने में असफल रहने का दुष्प्रेरण करेगा, वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, किन्तु जो चार मास से कम की नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा :

                परन्तु न्यायालय निर्णय में उल्लिखित किन्हीं पर्याप्त और विशेष कारणों से, चार मास की अवधि से कम का दण्डादेश भी अधिरोपित कर सकेगा

116. किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे क्षेत्र में, जिससे हट जाने का उसे निदेश दिया गया है, अनुज्ञा के बिना प्रवेश या अस्थायी रूप में वापस आने की अनुज्ञा मिलने पर वहां अधिक समय तक ठहर जाने के लिए शास्ित-धारा 53 में उपबन्धित परिस्थितियों में और रीति से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने और उसे हटाने की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो कोई व्यक्ति-

() धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन उसे जारी किए गए किसी निदेश के उल्लंघन में, यथास्थिति, दिल्ली या उसके किसी भाग में, जिससे हट जाने का उसे निदेश दिया गया था, अनुज्ञा के बिना प्रवेश करेगा या वापस आएगा ; या

() धारा 54 की उपधारा (1) के अधीन दी गई अनुज्ञा से दिल्ली या उसके किसी भाग में प्रवेश करेगा या वापस आएगा, किन्तु उसके उपबन्धों के प्रतिकूल, ऐसी अस्थायी अवधि के अवसान पर, जिसके लिए उसे प्रवेश करने या वापस आने की अनुज्ञा दी गई थी, या ऐसी अनुज्ञा के पहले ही प्रतिसंहृत कर लिए जाने पर, या ऐसी अस्थायी अवधि के अवसान पर स्वयं को हटा लेने पर या ऐसी अनुज्ञा प्रतिसंहृत कर ली जाने पर किसी नई अनुज्ञा के बिना, वहां प्रवेश करेगा या वापस आएगा,

वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, किन्तु जो छह मास से कम की नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा :

                परन्तु न्यायालय, निर्णय में उल्लिखित किन्हीं पर्याप्त और विशेष कारणों से, छह मास की अवधि से कम का कारावास का दण्डादेश भी अधिरोपित कर सकेगा

117. धारा 57 के अधीन आदेशों के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई धारा 57 के अधीन किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा, वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा

118. धारा 59 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन दिए गए निदेश का विरोध करने या उसका पालन करने के लिए शास्ति-जो कोई किसी पुलिस अधिकारी द्वारा धारा 59 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन की गई किसी उचित अध्यपेक्षा का विरोध करेगा या उसका तुरन्त अनुपालन करने में असफल रहेगा या उसके विरोध का या उसे अनुपालन में असफल रहने का दुष्प्रेरण करेगा वह, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, किन्तु जो चार मास से कम की नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा :

                परन्तु न्यायालय, निर्णय में उल्लिखित किए जाने वाले पर्याप्त और विशेष कारणों से, चार मास की अवधि से कम का कारावास का दण्डादेश अधिरोपित कर सकेगा

119. धारा 65 के अधीन निदेशों के उल्लंघन के लिए शास्ित-जो कोई धारा 65 के अधीन किसी पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए किसी निदेश का विरोध करेगा या उसका अनुपालन करने में असफल रहेगा अथवा ऐसे निदेश का विरोध करने या उसका अनुपालन करने में असफल रहने का दुष्प्रेरण करेगा वह, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा

120. खतरनाक तमाशा-(1) कोई भी व्यक्ति, पुलिस आयुक्त की पूर्व अनुज्ञा के बिना, और ऐसी किन्हीं शर्तों के अनुसार के सिवाय, जिनके अधीन ऐसी अनुज्ञा दी गई है, ऐसे किसी स्थान में, जहां व्यक्तियों का जमाव होना सम्भाव्य है, ऐसा कोई तमाशा नहीं करेगा जिसमें या जिसके दौरान वह स्वयं को भूमि के नीचे गाड़ देता है या किसी कमरे, आधान या अन्य वस्तु में इस प्रकार बन्द कर लेता है कि उसके पास वायु कतई नहीं जा सकती है और इतने समय के लिए बन्द किए रहता है कि वहां दम घुटने के कारण सामान्यतः मृत्यु हो सकती है

(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा या उल्लंघन करने का प्रयत्न करेगा जो वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा

(3) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन दण्डनीय अपराध संज्ञेय होगा

121. विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में सेवा करने में उपेक्षा करना या उससे इंकार करना-(1) जो कोई व्यक्ति धारा 17 के अधीन विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में नियुक्त होने पर किसी पर्याप्त हेतुक के बिना उस हैसियत में सेवा करने में या किसी विधिपूर्ण आदेश या निदेश का, जो उसे ऐसे विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में अपने कर्तव्यों के पालन के लिए दिया जाए, पालन करने में उपेक्षा करेगा या उससे इंकार करेगा, वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा

                (2) ऐसे दण्ड से, ऐसे किसी विशेष पुलिस अधिकारी की नियुक्ति का प्रमाणपत्र स्वतः रद्द हो जाएगा

122. मिथ्या कथन आदि करने तथा पुलिस अधिकारियों के अवचार के लिए शास्ति-() जो कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी के रूप में नियोजन प्राप्त करने के लिए या उससे निर्मुक्ति के लिए कोई मिथ्या कथन करेगा या मिथ्या दस्तावेज का उपयोग करेगा    वह, या

                () कोई पुलिस अधिकारी, जो-

(i) कायरता का दोषी है ; या

(ii)  अधीनस्थ पंक्ति का पुलिस अधिकारी होते हुए, धारा 25 के उल्लंघन में अपने पद से त्यागपत्र दे देता है या उस पद के कर्तव्यों से स्वयं को अलग कर लेता है ; या

(iii) विधि या किसी नियम या विनियम या किसी आदेश के किसी उपबन्ध को, जिसका पालन या अनुपालन करने के लिए वह आबद्ध है, जानबूझकर भंग करने या उसकी उपेक्षा का दोषी है ; या

(iv) ऐसे कर्तव्य के किसी अतिक्रमण का दोषी है जिसके लिए किसी अन्य प्रवृत्त विधि द्वारा अभिव्यक्त रूप में कोई दण्ड विहित नहीं किया गया है,

सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों सें, दण्डित किया जाएगा

स्पष्टीकरण-यदि कोई पुलिस अधिकारी छुट्टी पर होने के कारण अनुपस्थित रहने के पश्चात् किसी उचित प्रतिहेतु के बिना ऐसी छुट्टी के अवसान पर ड्यूटी के लिए हाजिर होने में असफल रहेगा, तो खण्ड () के उपखण्ड (ii) के प्रयोजन के लिए यह समझा जाएगा कि उसने धारा 25 के अर्थ में अपने पद के कर्तव्यों से स्वयं को अलग कर लिया है

123. नियुक्ति का प्रमाणपत्र या अन्य वस्तु का परिदान करने में असफल रहने के लिए शास्ति-कोई पुलिस अधिकारी जो धारा 26 की उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुसार अपनी नियुक्ति या अपने पद का प्रमाणपत्र या कोई अन्य वस्तु परिदत्त करने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा या परिदत्त करने से इंकार करेगा, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा

124. पुलिस अधिकारी द्वारा तंग करने के उद्देश्य से किया गया प्रवेश, तलाशी, गिरफ्तारी आदि-कोई पुलिस अधिकारी, जो-

() किसी विधिपूर्ण प्राधिकार या उचित प्रतिहेतु के बिना किसी भवन, जलयान, तम्बू या स्थान में प्रवेश करेगा या उसकी तलाशी लेगा या उसमें प्रवेश या उसकी तलाशी कराएगा ; या

() तंग करने की दृष्टि से और अनावश्यक रूप में किसी व्यक्ति की सम्पत्ति का अभिग्रहण करेगा ; या

() किसी व्यक्ति को, तंग करने की दृष्टि से या अनावश्यक रूप में निरुद्ध करेगा, उसकी तलाशी लेगा या उसे गिरफ्तार करेगा ; या

() अपनी अभिरक्षा में के किसी व्यक्ति के प्रति कोई अनावश्यक शारीरिक हिंसा करेगा ; या

() कोई ऐसी धमकी या वचन देगा जो विधिसम्मत नहीं है,

सिद्धदोष ठहराए जाने पर, ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा

125. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को भेजने में तंग करने के उद्देश्य से किए गए विलम्ब के लिए शास्ति-कोई पुलिस अधिकारी जो गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के समक्ष या किसी अन्य ऐसे प्राधिकारी के समक्ष, जिसके समक्ष, ऐसे व्यक्ति को भेजने के लिए वह विधि द्वारा आबद्ध है, भेजने में, तंग करने की दृष्टि से और अनावश्यक रूप में विलम्ब करेगा, सिद्धदोष ठहराए जाने पर, कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा

126. पुलिस की वर्दी के अप्राधिकृत प्रयोग के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति, जो दिल्ली पुलिस का सदस्य नहीं है, ऐसे अधिकारी की अनुज्ञा के बिना, जिसे प्रशासक ने उस निमित्त साधारणतया या विशेष आदेश द्वारा प्राधिकृत किया है, दिल्ली पुलिस की वर्दी पहनेगा या ऐसी कोई पोशाक पहनेगा जो उस वर्दी जैसी लगती है या जिसमें उस वर्दी के कोई सुभिन्न चिह्न हैं, तो वह सिद्धदोष ठहराए जाने पर, जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा

127. बिना प्राधिकार के शस्त्र लेकर चलने के बारे में विनियम बनाने की शक्ति-(1) पुलिस आयुक्त, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनियम बनाकर उपबंध कर सकेगा कि कोई व्यक्ति, जो संघ के सशस्त्र बलों का सदस्य नहीं है और ऐसी हैसियत में या किसी पुलिस अधिकारी के रूप में कार्य नहीं कर रहा है, किसी मार्ग या सार्वजनिक स्थान में किसी तलवार, भाले, डण्डे, बन्दूक या अन्य आक्रामक शस्त्र या किसी विस्फोटक या संक्षारक पदार्थ से सज्जित होकर तब तक नहीं चलेगा जब तक उसे ऐसे प्राधिकारी द्वारा, जो इन विनियमों में विनिर्दिष्ट किया जाए, उसके लिए प्राधिकृत नहीं कर दिया जाता

                (2) उपधारा (1) के अधीन बनाए गए किसी नियम द्वारा यह उपबंध किया जा सकेगा कि जो व्यक्ति ऐसे विनियम के उल्लंघन में सायुध चलेगा, वह किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा निरायुध किए जाने के लिए दायी होगा और इस प्रकार अभिगृहीत शस्त्र या पदार्थ सरकार को समपहृत हो जाएगा, जब तक कि दो मास के भीतर ऐसे जुर्माने का, जो पांच सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, जो कि पुलिस आयुक्त अधिरोपित करे, संदाय करके उसका मोचन नहीं करा लिया जाता

128. इस अधिनियम के विरुद्ध कुछ अपराधों का अभियोजन दिल्ली पुलिस के विवेकाधीन होना-प्रशासक या पुलिस आयुक्त द्वारा बनाए गए किसी नियम, विनियम या आदेश के पालन के सिवाय, दिल्ली पुलिस के लिए यह बाध्यकर नहीं होगा कि वह धारा 97, धारा 104, धारा 113 की उपधारा (1), धारा 114, धारा 119, या धारा 121 के अधीन दण्डनीय ऐसे अपराध के लिए अभियोजन करे जिससे कोई गम्भीर रिष्टि नहीं हुई है और जो चेतावनी दी जाने पर तुरन्त बन्द कर दिया गया है

129. कुछ मामलों का संक्षिप्त निपटारा-(1) धारा 97 या धारा 110 के खण्ड (), () या () के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञान करने वाला न्यायालय, अभियुक्त व्यक्ति पर तामील किए जाने वाले समन पर यह कथन कर सकेगा कि वह, आरोप की सुनवाई से पूर्व की किसी विनिर्दिष्ट तारीख तक, रजिस्ट्रीकृत पत्र द्वारा आरोप के लिए दोषी होने का अभिवचन कर सकता है और   धारा 97 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के मामले में एक सौ रुपए तक और किसी अन्य मामले में पचास रुपए तक की ऐसी कोई राशि भेज सकता है जो न्यायालय विनिर्दिष्ट करे

                (2) जब कोई अभियुक्त व्यक्ति दोषी होने का अभिवचन करता है और समन में उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट राशि भेज देता है तो उसके विरुद्ध अपराध के सम्बन्ध में आगे कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी

130. अन्य अधिनियमितियों के अधीन अपराधों के लिए अभियोजन पर कोई प्रभाव पड़ना- दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 300 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी व्यक्ति को, किसी ऐसी बात के लिए, जो इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय है, किसी अन्य विधि के अधीन अभियोजित और दण्डित किए जाने से या किसी ऐसी बात के लिए, जो किसी अन्य विधि के अधीन दण्डनीय है, इस अधिनियम के अधीन अभियोजित और दण्डित किए जाने से रोकती है

131. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है वहां प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :

                परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबन्धित किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी

                (2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकरी की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-

() कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है ; तथा

() फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है

अध्याय 11

प्रकीर्ण

132. फीसों, इनामों आदि का व्ययन-इस अधिनियम के अधीन अनुदत्त अनुज्ञप्तियों या अनुज्ञाओं के लिए संदत्त सभी फीसें और पुलिस अधिकारियों द्वारा आदेशिकाओं की तामील के लिए संदत्त सभी राशियां और ऐसे सभी इनाम, समपहरण तथा शास्तियां या उनके ऐसे भाग, जो पुलिस अधिकारियों को, इत्तिला देने वाले व्यक्तियों के रूप में, विधि द्वारा देय हैं, वहां तक के सिवाय जहां तक कि ऐसी कोर्ट फीसें या राशियां तत्समय प्रवृत्त किसी अधिनियमिति के उपबन्धों के अधीन किसी स्थानीय प्राधिकारी की हैं, सरकार के खाते में जमा की जाएंगी :

परन्तु प्रशासक की मंजूरी से या उस निमित्त प्रशासक द्वारा बनाए गए किसी नियम के अधीन ऐसे किसी इनाम, समपहरण या शास्ित की संपूर्ण रकम या उसका कोई भाग विशेष सेवाओं के लिए, किसी पुलिस अधिकारी को संदत्त किया जा सकता है या दो या अधिक पुलिस अधिकारियों के बीच विभाजित किया जा सकता है

133. आदेशों और अधिसूचनाओं को साबित करने का ढंग-प्रशासक या पुलिस आयुक्त या किसी अन्य पुलिस अधिकारी द्वारा, इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के अधीन प्रकाशित या जारी किया गया कोई आदेश या अधिसूचना और उसे सम्यक् प्रकाशन या जारी किए जाने को, राजपत्र में प्रकाशित उसकी प्रति प्रस्तुत करके या उसकी ऐसी प्रतिलिपि प्रस्तुत करके साबित किया जा सकेगा जिस पर, यथास्थिति, प्रशासक, पुलिस आयुक्त या अन्य पुलिस अधिकारी ने हस्ताक्षर करके यह प्रमाणित किया है कि वह उस मूल की सही प्रतिलिपि है जो इस अधिनियम के उन उपबन्धों के अनुसार प्रकाशित या जारी किया गया है जो उसे लागू होते हैं

134. किसी प्ररूपिक त्रुटि या प्रक्रिया में किसी अनियमितता के कारण कोई नियम, विनियम या आदेश अविधिमान्य नहीं होंगे-इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के किसी उपबन्ध के अधीन या सारतः उसके अनुपालन में बनाया गया या प्रकाशित किया गया कोई नियम, विनियम, आदेश, निदेश, न्यायनिर्णयन, जांच या अधिसूचना और किया गया कोई कार्य केवल इस कारण अवैध, शून्य, अविधिमान्य या अपर्याप्त नहीं समझा जाएगा कि उसमें कोई प्ररूपिक त्रुटि है या उसकी प्रक्रिया में कोई अनियमितता है

135. धारा 46, 47 या 48 के अधीन जारी किए गए आदेश के उल्लंघन के लिए अभियोजनों में उपधारणा-तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन किए गए किसी आदेश के उल्लंघन के लिए किसी अपराध की बाबत किसी अभियोजन में आदेश की अधिप्रमाणित प्रति प्रस्तुत कर दी जाने पर, जब तक अभियुक्त द्वारा तत्प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है, यह उपधारणा की जाएगी कि-

() आदेश, इस अधिनियम के अधीन आदेश करने के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया गया था ;

() आदेश करने वाले प्राधिकारी का यह समाधान हो गया था कि जिन आधारों पर या जिस प्रयोजन के लिए वह किया गया है वे विद्यमान थे और ऐसा आदेश करना आवश्यक था ; और

() आदेश अन्यथा विधिमान्य है और इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुरूप है

136. रिक्त पदों के भारसाधक अधिकारी या उत्तरवर्ती शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सक्षम होंगे-जब कभी पुलिस आयुक्त, पुलिस अपर आयुक्त या किसी अन्य पुलिस अधिकारी का पद रिक्त हो जाने के परिणामस्वरूप कोई अधिकारी ऐसे पुलिस आयुक्त, पुलिस अपर आयुक्त या अन्य पुलिस अधिकारी के पद का भार धारण करता है, अथवा उस पद का, अस्थायी रूप में या स्थायी रूप में, उत्तरवर्ती होता है तो ऐसा पुलिस अधिकारी उन सभी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सक्षम होगा और ऐसे सभी कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए सक्षम होगा जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन क्रमशः, यथास्थिति, पुलिस आयुक्त, पुलिस अपर आयुक्त या अन्य पुलिस अधिकारी को प्रदत्त या उस पर अधिरोपित किए गए हैं

137. धारा 54 की उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा लिखे गए बन्धपत्र का समपहरण-यदि कोई व्यक्ति जिसे   धारा 54 की उपधारा (1) के अधीन ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करने या लौटने की अनुज्ञा दी गई है जिससे हट जाने का उसे निदेश दिया गया था, उस उपधारा के अधीन अथवा उसके द्वारा उसके अधीन निष्पादित किए गए बन्धपत्र द्वारा अधिरोपित किसी शर्त का अनुपालन करने में असफल रहता है तो उसका बन्धपत्र समपहृत कर लिया जाएगा और उसके द्वारा आबद्ध कोई व्यक्ति उसके लिए शास्ति का संदाय करेगा या इस बाबत न्यायालय के समाधानप्रद रूप में हेतुक दर्शित करेगा कि ऐसी शास्ति क्यों संदत्त की जाए

138. कर्तव्य के अनुसरण में सद्भावपूर्वक किए गए किसी कार्य के लिए किसी पुलिस अधिकारी का किसी शास्ति या नुकसान के लिए जिम्मेदार होना-कोई पुलिस अधिकारी, इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम या दिए गए किसी आदेश या निदेश के किसी उपबन्ध द्वारा उस पर अधिरोपित किसी कर्तव्य या प्रदत्त किसी प्राधिकार के अनुसरण में उसके द्वारा सद्भावपूर्वक किए गए या अनुसरण में किए गए तात्पर्यित किसी कार्य के कारण, किसी शास्ति या किसी नुकसानी के संदाय के लिए दायी नहीं होगा

139. दृश्यमान प्राधिकार से जारी किए गए किसी नियम, आदेश या निदेश को सद्भावपूर्वक प्रभावी करने के कारण पूर्वोक्त रूप में किसी लोक सेवक का जिम्मेदार होना-कोई लोक सेवक या व्यक्ति जिसे सम्यक्तः नियुक्त या प्राधिकृत किया गया है-

() प्रशासक द्वारा या इस अधिनियम के अधीन उस निमित्त सशक्त किए गए किसी व्यक्ति द्वारा दृश्यमान प्राधिकार से जारी किए गए किसी आदेश या निदेश को ; या

() इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम को, सद्भावपूर्वक प्रभावी करने के कारण, किसी शास्ति के लिए या किसी नुकसानी का संदाय करने के लिए दायी नहीं होगा

स्पष्टीकरण-इस धारा में लोक सेवक" पद का वही अर्थ होगा जो उसका भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 में है 

140. वादों और अभियोजनों का वर्जन-(1) किसी पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति द्वारा कर्तव्य या प्राधिकार के आभास में या ऐसे किसी कर्तव्य या प्राधिकार के आधिक्य में किए गए किसी कार्य से हुए अभिकथित अपराध के या ऐसे दोष के किसी मामले में, जिसकी बाबत यह अभिकथन किया गया है कि वह ऐसे पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति द्वारा किया गया है या जिसमें न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि अपराध या दोष, यदि किया गया है तो पूर्वोक्त प्रकृति का है, अभियोजन या वाद ग्रहण नहीं किया जाएगा और यदि वह परिवादित कार्य की तारीख से तीन मास से अधिक समय पश्चात् संस्थित किया जाता है तो वह खारिज कर दिया जाएगा :

परन्तु यदि पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध ऐसा कोई अभियोजन अपराध की तारीख से एक वर्ष के अन्दर, प्रशासक की पूर्व मंजूरी से संस्थित किया जाता है तो वह न्यायालय द्वारा ग्रहण किया जा सकेगा

(2) यथापूर्वोक्त किसी दोष के कारण आशयित वाद के मामले में, वाद लाने का आशय रखने वाला व्यक्ति अभिकथित दोष को आशयित वादकर्ता को कम से कम एक मास की सूचना देगा, जिसमें परिवादित दोष का पर्याप्त वर्णन किया जाएगा और यदि वह संस्थित करने से पूर्व ऐसी कोई सूचना नहीं दी गई है तो वाद खारिज कर दिया जाएगा

                (3) वादपत्र में यह उल्लेख किया जाएगा कि प्रतिवादी पर यथापूर्वोक्त सूचना की तामील कर दी गई है उसमें ऐसी तामील की तारीख का भी उल्लेख किया जाएगा तथा यह कथन भी किया जाएगा कि क्या प्रतिवादी ने अभितुष्टि का कोई प्रस्ताव किया है, और यदि किया है तो वह प्रस्ताव क्या है उक्त सूचना की एक प्रति वादपत्र के साथ लगाई जाएगी और वादी द्वारा उस पर यह घोषणा पृष्ठांकित की जाएगी या उसके साथ यह घोषणा लगाई जाएगी कि सूचना किस समय तथा किस रीति से तामील की गई है

141. अनुज्ञप्तियों और लिखित अनुज्ञाओं में शर्तों आदि का विनिर्दिष्ट किया जाना और उन पर हस्ताक्षर-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन दी गई अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा में वह अवधि और परिक्षेत्र जिसके लिए और वे शर्तें तथा निर्बन्धन जिनके अधीन वह दी गई है, विनिर्दिष्ट किए जाएंगे और वह सक्षम प्राधिकारी के हस्ताक्षर से दी जाएगी

                (2) यदि इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति को कोई अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा दी जाती है और वह उसकी किसी शर्त या निर्बन्धन का अतिलंघन या अपवंचन करता है या यदि ऐसा व्यक्ति ऐसे किसी मामले की बाबत, जिससे ऐसी अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा संबंधित है, किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी ऐसी अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा का, किसी भी समय निलम्बन या प्रतिसंहरण कर सकेगा

                (3) ऐसी किसी अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा के निलम्बित या प्रतिसंहृत कर दिए जाने पर या उस अवधि के अवसान पर, जिसके लिए वह दी गई थी, उन व्यक्तियों के बारे में जिन्हें वह दी गई थी, इस अधिनियम के सभी प्रयोजनों के लिए तब तक यही समझा जाएगा कि उसके पास कोई अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा नहीं है, जब तक कि, यथास्थिति, उसका निलम्बन या प्रतिसंहरण करने वाला आदेश रद्द नहीं कर दिया जाता या ऐसी अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा का नवीकरण नहीं कर दिया जाता

                (4) प्रत्येक व्यक्ति, जिसे ऐसी कोई अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा दी गई है, उसके प्रवृत्त रहने के दौरान, किसी पुलिस अधिकारी द्वारा अपेक्षा की जाने पर, उसे सभी उचित समयों पर, प्रस्तुत करेगा

                स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसे व्यक्ति की ओर से, जिसे अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा दी गई है, कार्य करने वाले किसी सेवक या अन्य अभिकर्ता के ऐसे किसी अतिलंघन या अपवंचन को या उसकी दोषसिद्धि को, यथास्थिति, उस व्यक्ति का अतिलंघन या अपवंचन अथवा दोषसिद्धि माना जाएगा जिसे ऐसी अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा दी गई है

142. सार्वजनिक सूचनाएं किस प्रकार दी जाएंगी-इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के अधीन सार्वजनिक रूप में प्रख्यापित की जा सकने वाली कोई अधिसूचना, दी जाने के लिए अपेक्षित कोई सार्वजनिक सूचना, सार्वजनिक रूप में अधिसूचित किए जाने के लिए अपेक्षित कोई आदेश अथवा जारी की जाने के लिए अपेक्षित कोई उद्घोषणा लिखित रूप में होगी और उस पर सक्षम प्राधिकारी के हस्ताक्षर होंगे तथा उसका प्रचार, उससे प्रभावित होने वाले परिक्षेत्र में, सहजदृश्य सार्वजनिक स्थानों में उसकी प्रतियां चिपका कर या डोंडी पिटवाकर उद्घोषणा द्वारा या हिन्दी, उर्दू और अग्रेंजी के ऐसे स्थानीय समाचारपत्रों में जो सक्षम प्राधिकारी ठीक समझे, उसका विज्ञापन देकर या इन साधनों में से किन्हीं दो या अधिक साधनों द्वारा और किन्हीं अन्य ऐसे साधनों द्वारा जो सक्षम प्राधिकारी उपयुक्त समझे, किया जाएगा

143. सक्षम प्राधिकारी की सम्मति आदि, हस्ताक्षर सहित उसके लेख द्वारा साबित की जा सकेगी-जब कभी इस अधिनियम के अधीन, किसी बात का किया जाना या किए जाने में लोप या किसी बात की विधिमान्यता, सक्षम प्राधिकारी की सम्मति, अनुमोदन, घोषणा, राय या समाधान पर आश्रित है, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित कोई लिखित दस्तावेज, जिसका तात्पर्य ऐसी सम्मति, अनुमोदन, घोषणा, राय या समाधान व्यक्त या उपवर्णित करना है, उसका पर्याप्त साक्ष्य होगी

144. सूचनाओं आदि पर हस्ताक्षर की मुद्रा लगाई जा सकेगी-प्रत्येक अनुज्ञप्ति, लिखित अनुज्ञा, सूचना या अन्य दस्तावेज, जो समन या वारण्ट या तलाशी वारण्ट नहीं है, और जिस पर इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम द्वारा पुलिस आयुक्त के हस्ताक्षर होना अपेक्षित हैं, समुचित रूप में हस्ताक्षरित समझी जाएगी, यदि उस पर उसके हस्ताक्षर की अनुलिपि-मुद्रा लगी होगी

145. हितबद्ध व्यक्तियों द्वारा कोई नियम या आदेश बातिल कराया, उलटवाया या परिवर्तित कराया जा सकेगा-(1) यदि इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त किसी प्राधिकार के अधीन प्रशासक कोई नियम बना कर या आदेश देकर जनता से या किसी विशिष्ट वर्ग के व्यक्तियों से यह अपेक्षा करता है कि वे ऐसे नियम या आदेश में वर्णित रीति से कोई कर्तव्य या कार्य करे या स्वयं वैसा आचरण या व्यवस्था करे या अपने नियंत्रणाधीन व्यक्तियों से वैसा आचरण या व्यवस्था कराए तो किसी हितबद्ध व्यक्ति के लिए यह सक्षम होगा कि वह प्रशासक को अभ्यावेदन करके पूर्वोक्त नियम या आदेश को इस आधार पर कि वह विधिविरुद्ध, अन्यायपूर्ण या अनुचित है, बातिल करा ले, उलटवा ले या परिवर्तित करा ले

                (2) यथापूर्वोक्त आवेदन किए जाने और उसके पूर्णतः या भागतः नामंजूर कर दिए जाने के पश्चात् या ऐसे आवेदन का उत्तर दिए बिना चार मास बीत जाने या प्रशासक द्वारा उस पर विनिश्चय प्रकाशित कर दिए जाने के पश्चात्, ऐसा व्यक्ति, जो हितबद्ध है और यह समझता है कि ऐसा नियम या आदेश विधि के प्रतिकूल है, प्रशासक के विरुद्ध आरम्भिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय में कोई वाद यह घोषणा की जाने के लिए संस्थित करने के लिए सक्षम होगा कि वह नियम या आदेश पूर्णतः या भागतः विधिविरुद्ध है

                (3) जब उपधारा (2) के अधीन संस्थित किसी वाद में या उसके विरुद्ध की गई अपील में, न्यायालय किसी नियम या आदेश को विधिविरुद्ध न्यायनिर्णीत करता है तब ऐसा नियम या आदेश बातिल हो जाएगा या इस प्रकार परिवर्तित हो जाएगा कि वह विधि के अनुरूप हो जाए

146. अन्य अधिनियमों के अधीन पुलिस आयुक्त की शक्तियां-(1) पुलिस आयुक्त ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे सभी कृत्यों का निर्वहन करेगा जिनका प्रयोग या निर्वहन, अनुसूची 1 में उल्लिखित अधिनियमों तथा उनके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन, किसी जिला मजिस्ट्रेट द्वारा किया जा सकता है

                (2) पुलिस आयुक्त, प्रशासक के साधारण या विशेष आदेशों के अनुसार, किसी पुलिस अपर आयुक्त, पुलिस उप आयुक्त या पुलिस अपर उप आयुक्त को, पुलिस आयुक्त की उपधारा (1) में उल्लिखित किसी भी शक्ति के प्रयोग या किसी भी कृत्य के निर्वहन के लिए प्राधिकृत कर सकेगा

(3) सराय अधिनियम, 1867 (1867 का 22) के अधीन जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियों का प्रयोग या कृत्यों का निर्वहन प्रशासक या ऐसे अधिकारी द्वारा किया जाएगा जिसे प्रशासक, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त प्राधिकृत करे

147. नियम बनाने की शक्ति-(1) प्रशासक, इस अधिनियम के प्रयोजनों के कार्यान्वयन के लिए नियम बना सकेगा

                (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी विषय के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-

() धारा 5 के खण्ड () के अधीन दिल्ली पुलिस में भर्ती और उसके सदस्यों का वेतन, भत्ते तथा सेवा की अन्य   सब शर्तें ;

() धारा 17 के अधीन नियुक्त किए गए विशेष पुलिस अधिकारियों के नामों को पुलिस आयुक्त द्वारा उस धारा की उपधारा (2) के अधीन, प्रकाशित करने की रीति ;

() अधीनस्थ पंक्ति के किसी पुलिस अधिकारी को धारा 21 की उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट दण्डों में से कोई दण्ड अधिनिर्णीत करना ;

() धारा 22 के अधीन दण्ड अधिनिर्णीत करने की प्रक्रिया ;

() धारा 25 की उपधारा (8) के अधीन सेवोन्मुक्ति प्रमाणपत्र का प्ररूप ;

() धारा 38 की उपधारा (2) के अधीन अतिरिक्त पुलिस के नियोजन के खर्च का अवधारण ;

() धारा 55 के अधीन ऐसे व्यक्ति के माप और फोटो लेने की रीति जिसके विरुद्ध धारा 46, धारा 47 या धारा 48 के अधीन कोई आदेश किया गया है ;

() धारा 58 की उपधारा (1) के अधीन रक्षा समितियां गठित करने की रीति ;

() धारा 62 के अधीन निरुद्ध की गई किसी वस्तु के संबंध में दी जाने वाली रसीद का प्ररूप ;

() वह प्राधिकारी, जिसके समाधानप्रद रूप में दावे, धारा 69 की उपधारा (2) के अधीन सिद्ध किए जाएंगे और वह प्ररूप तथा वह रीति जिसमें दावे उस उपधारा के अधीन किए जा सकेंगे, ऐसे दावों की बाबत की जाने वाली कार्यवाही की प्रक्रिया तथा उस धारा की उपधारा (3) के अधीन उससे सम्बद्ध सभी अन्य बातें ;

() धारा 132 के परन्तुक के अधीन, कोई सम्पूर्ण इनाम, समपहरण या शास्ति या उसका कोई भाग किसी पुलिस अधिकारी को संदत्त करना या दो या अधिक पुलिस अधिकारियों के बीच उसे विभाजित करना ;

() कोई अन्य विषय जिसे इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित या उपबंधित किया जाना है या किया जाए

148. नियमों और विनियमों का राजपत्र में अधिसूचित किया जाना और नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-(1) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बनाया जाएगा

                (2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में या दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम, दिल्ली महानगर परिषद् के समक्ष भी रखा जाएगा

149. कुछ अधिनियमितियों के प्रवर्तन की समाप्ति और व्यावृत्ति-(1) इस अधिनियम के प्रारम्भ पर, अनुसूची 2 में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियां दिल्ली में प्रवृत्त नहीं रह जाएंगी :परन्तु-

(i) ऐसी किसी अधिनियमिति के अधीन बनाए गए सभी नियम और स्थायी आदेश (जिनके अन्तर्गत दिल्ली में यथाप्रवृत्त पंजाब पुलिस नियम भी हैं), की गई नियुक्तियां, प्रदत्त की गई शक्तियां, किए गए या पारित आदेश, जारी किए गए निदेश और प्रमाणपत्र, दी गई सम्मति, अनुज्ञापत्र, अनुज्ञा या अनुज्ञप्ति, जारी या तामील किए गए समन या वारण्ट, गिरफ्तार या निरुद्ध किए गए जमानत अथवा बन्धपत्र पर उन्मोचित किए गए व्यक्ति, जारी किए गए तलाशी वारण्ट, समपहृत बंधपत्र और उपगत शास्तियां, जहां तक कि वे इस अधिनियम से संगत हैं, क्रमशः इस अधिनियम के अधीन बनाए गए, की गई, प्रदत्त की गई, किए गए या पारित किए गए, दी गई, जारी किए गए, तामील किए गए, गिरफ्तार किए गए, निरुद्ध किए गए, उन्मोचित किए गए समपहृत किए गए और उपगत किए गए समझे जाएंगे ;

(ii) किसी अधिनियमिति में, इस प्रकार प्रवृत्त रहने वाली अधिनियमितियों के किसी उपबन्ध के प्रति किए गए सभी निर्देश, दिल्ली के सम्बन्ध में, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के प्रति किए गए निर्देश समझे जाएंगे

(2) अनुसूची 2 में विनिर्दिष्ट किसी अधिनियमिति के प्रवर्तन की, उपधारा (1) के अधीन समाप्ति का,-

() इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व उसके अधीन की गई या करने दी गई किसी बात की विधिमान्यता, अविधिमान्यता, प्रभाव या परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ;

() ऐसे प्रारम्भ के पूर्व, ऐसी अधिनियमिति के अधीन पहले ही अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ;

() ऐसे प्रारम्भ के पूर्व, ऐसी अधिनियमिति के अधीन किसी कार्य के संबंध में उपगत या लगाई गई किसी शास्ति, समपहरण या दण्ड पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ;

() ऐसे अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दण्ड के संबंध में किसी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ; या

() उसके अधीन किसी ऐसी विधिक कार्यवाही पर जो ऐसे प्रारम्भ के ठीक पूर्व किसी न्यायालय में या किसी अधिकारी के समक्ष लम्बित हो या ऐसी कार्यवाही के अनुक्रम में की गई या करने दी गई किसी बात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और ऐसी किसी कार्यवाही या ऐसी कार्यवाही से उत्पन्न हुई किसी अपील या पुनरीक्षण संबंधी कार्यवाही को, धारा 150 में यथा अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबन्धित के सिवाय, यथास्थिति, उसी रूप में संस्थित किया जाएगा, चालू रखा जाएगा या निपटाया जाएगा मानो यह अधिनियम अधिनियमित ही नहीं हुआ था

150. इस अधिनियम के प्रारम्भ होने से ठीक पूर्व दिल्ली में कार्य करने वाले पुलिस बल को इस अधिनियम के अधीन गठित पुलिस बल समझा जाएगा-धारा 149 में अन्तर्विष्ट उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना,-

() इस अधिनियम के प्रारम्भ से ठीक पूर्व दिल्ली में कार्य करने वाला पुलिस बल (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् विद्यमान पुलिस बल कहा गया है), ऐसे प्रारम्भ पर, इस अधिनियम के अधीन गठित पुलिस बल समझा जाएगा और ऐसे प्रारम्भ से ठीक पूर्व, अनुसूची 3 के स्तम्भ (1) में उल्लिखित पद धारण करने वाले विद्यमान पुलिस बल के प्रत्येक सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह ऐसे प्रारम्भ पर, उस अनुसूची के स्तम्भ (2) की तत्स्थानी प्रविष्टि में उल्लिखित पद पर नियुक्त किया गया है ;

() इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व, विद्यमान पुलिस बल के किसी पुलिस अधिकारी के समक्ष लम्बित सभी कार्यवाहियां (जिनके अन्तर्गत अन्वेषण के तौर पर की जा रही कार्यवाहियां भी है), ऐसे प्रारम्भ पर, उसके समक्ष उस पद के धारक की हैसियत में लम्बित कार्यवाहियां समझी जाएंगी जिस पर वह खण्ड () के अधीन नियुक्त समझा गया है और उन्हें तद्नुसार निपटाया जाएगा ;

() जहां इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व, किसी जिला मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा किसी विधि के अधीन प्रयोग की जा सकने वाली कोई शक्ति या निर्वहन किया जा सकने वाला कोई कृत्य, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन पुलिस आयुक्त या किसी अन्य पुलिस अधिकारी को प्रदत्त किया गया है वहां ऐसी शक्ति के प्रयोग या ऐसे कृत्य के निर्वहन से उत्पन्न होने वाली या उससे सम्बन्धित सभी कार्यवाहियां, जो ऐसे प्रदान से ठीक पूर्व, यथास्थिति, जिला मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष लम्बित हैं, ऐसी शक्ति या कृत्य के पुलिस आयुक्त या अन्य पुलिस अधिकारी को प्रदत्त किए जाने पर, यथास्थिति, पुलिस आयुक्त या अन्य पुलिस अधिकारी को अन्तरित हो जाएंगी, और जिस अधिकारी को ऐसी कार्यवाहियां अन्तरित हो गई हैं वह उनमें कार्यवाही या तो नए सिरे से करेगा या उस प्रक्रम से करेगा जिस पर ऐसी कार्यवाहियां उसे अन्तरित हुई हैं

151. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति-(1) यदि अनुसूची 2 में उल्लिखित अधिनियमितियों के उपबन्धों से उक्त उपबन्धों को संक्रमण के परिणामस्वरूप, इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे उपबन्ध कर सकेगी जो उसे ऐसी कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों :

परन्तु ऐसी कोई अधिसूचना इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष के अवसान के पश्चात् जारी नहीं की जाएगी

                (2) इस धारा के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, जारी की जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी

152. निरसन और व्यावृत्ति-(1) दिल्ली पुलिस अध्यादेश, 1978 (1978 का 2) इसके द्वारा निरसित किया जाता है

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई भी बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी

अनुसूची 1

[धारा 146(1) देखिए]

भाग 1

केन्द्रीय अधिनियम

1. प्रेस और पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1867

2. भारतीय विस्फोटक अधिनियम, 1884

3. भारतीय पागलपन अधिनियम, 1912

4. विष अधिनियम, 1919

5. पुलिस (द्रोह-उद्दीपन) अधिनियम, 1922

6. चलचित्र अधिनियम, 1952

7. स्त्री तथा लड़की अनैतिक व्यापार दमन अधिनियम, 1956

8. आयुध अधिनियम, 1959

9. पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960

भाग 2

दिल्ली अधिनियम और दिल्ली पर विस्तारित अधिनियम

1. मद्रास रेस्ट्रिक्शन आफ हैबीच्युअल आफैन्डर्स ऐक्ट, 1948, जिस रूप में वह दिल्ली में प्रवृत्त है

2. पंजाब सिक्योरिटी आफ स्टेट ऐक्ट, 1953, जिस रूप में वह दिल्ली में प्रवृत्त है

3. मद्रास ड्रेमेटिक पर्फामैन्सेज ऐक्ट, 1954, जिस रूप में वह दिल्ली में प्रवृत्त है

4. दिल्ली सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1955

5. बाम्बे प्रिवेन्शन आफ बैगिंग ऐक्ट, 1959, जिस रूप में वह दिल्ली में प्रवृत्त है

अनुसूची 2

(धारा 149 देखिए)

वर्ष

संख्यांक

संक्षिप्त नाम

1861

5

पुलिस अधिनियम, 1861

1872

4

पंजाब विधि अधिनियम, 1872 की धारा  40, जिस रूप में वह दिल्ली में प्रवृत्त है

1951

22

बाम्बे पुलिस ऐक्ट, 1951 के उपबन्ध, जिस रूप में वे दिल्ली में प्रवृत्त हैं

अनुसूची 3

(धारा 150 देखिए)

दिल्ली पुलिस के अधिकारी का पदनाम

वे पद जिन पर दिल्ली पुलिस के अधिकारी नियुक्त किए गए समझे जाएंगे

 

(1)

(2)

1.

पुलिस महानिरीक्षक

पुलिस आयुक्त

2.

पुलिस उप महानिरीक्षक

पुलिस अपर आयुक्त

3.

पुलिस अधीक्षक

पुलिस उप आयुक्त

4.

पुलिस सहायक महानिरीक्षक

पुलिस उप आयुक्त

5.

पुलिस अपर अधीक्षक

पुलिस अपर उप आयुक्त

6.

पुलिस सहायक अधीक्षक

पुलिस सहायक आयुक्त

7.

पुलिस उप अधीक्षक

पुलिस सहायक आयुक्त

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