दिल्ली विधि (विशेष उपबंध) अधिनियम, 2006
(2006 का अधिनियम संख्यांक 22)
[19 मई, 2006]
दिल्ली के क्षेत्रों के लिए एक वर्ष की अवधि के लिए
विशेष उपबंध करने हेतु और उससे संबंधित
या उसके आनुषंगिक
विषयों के लिए
अधिनियम
यतः प्रवास के कारण जनसंख्या में अद्भुत वृद्धि ने दिल्ली की भूमि और अवसंरचना पर अत्यधिक दबाव बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे विकास हुए हैं जो दिल्ली मास्टर प्लान, 2001 और भवन निर्माण संबंधी उपविधियों के अनुरूप नहीं हैं;
और, वर्ष 2021 के लिए परिदृश्य को तथा शहरी विकास में उभरते हुए नए आयामों को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय सरकार ने दिल्ली के मास्टर प्लान में ऐसे व्यापक उपांतरण करने का प्रस्ताव किया है, जो प्रकाशित किए गए हैं और उनके संबंध में जनता से सुझाव और आक्षेप प्राप्त हुए हैं और मास्टर प्लान, 2021 को अंतिम रूप दिए जाने में कुछ अधिक समय लगने की संभावना है;
और, केन्द्रीय सरकार ने अप्राधिकृत निर्माण और परिसरों के दुरुपयोग के विभिन्न पहलुओं की जांच करने के लिए तथा उनके संबंध में कार्रवाई करने के लिए व्यापक रणनीति का सुझाव देने हेतु एक विशेषज्ञ समिति गठित की है;
और, दिल्ली में गंदी बस्ती के निवासियों के पुनःस्थापन तथा पुनर्वास के लिए एक पुनरीक्षित नीति भी केन्द्रीय सरकार के विचाराधीन है;
और, राष्ट्रीय शहरी पथ विक्रेता नीति के अनुसार दिल्ली में स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा एक रणनीति तैयार किए जाने के लिए प्रस्तावित है;
और, मास्टर प्लान, 2001 तथा भवन निर्माण संबंधी उपविधियों के उपबंधों के अतिक्रमण के लिए कार्रवाई, सरकार द्वारा इस विषय में अंतिम दृष्टिकोण अपनाए जाने के पूर्व, बड़ी संख्या में व्यक्तियों को परिहार्य कठिनाई और अपूरणीय हानि कारित हो रही है;
और, प्रस्तावित मास्टर प्लान, 2021 के निबंधनों के अनुसार व्यवस्थित प्रबंध करने के लिए कुछ समय की आवश्यकता है;
और, यह समीचीन है कि ऐसी कार्रवाइयों के विरुद्ध एक वर्ष की अवधि के लिए, जिसके भीतर ऊपर निर्दिष्ट विभिन्न नीति संबंधी विवाद्यकों को अंतिम रूप दिए जाने की आशा है, दिल्ली की जनता को अस्थायी अनुतोष देने के लिए एक विधि हो;
भारत गणराज्य के सतावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और अवधि-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दिल्ली विधि (विशेष उपबंध) अधिनियम, 2006 है ।
(2) इसका विस्तार दिल्ली पर है ।
(3) यह, इसके प्रारंभ की तारीख से एक वर्ष की समाप्ति पर, सिवाय उन बातों के संबंध में जो ऐसी समाप्ति के पूर्व की गई हैं या करने से रह गई हैं, प्रभाव नहीं रखेगा और ऐसी समाप्ति पर साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6 ऐसे लागू होगी मानो यह अधिनियम उस समय किसी केन्द्रीय अधिनियम द्वारा निरसित किया गया हो ।
2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) भवन निर्माण संबंधी उपविधियां" से भवनों से संबंधित दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 (1957 का 66) की धारा 481 के अधीन बनाई गई उपविधियां या नई दिल्ली में यथा प्रवृत्त, पंजाब नगर निगम अधिनियम, 1911 (1911 का पंजाब अधिनियम 3) की धारा 188, धारा 189 की उपधारा (3) और धारा 190 की उपधारा (1) के अधीन बनाई गई उपविधियां या दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 (1957 का 61) की धारा 57 की उपधारा (1) के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं;
(ख) दिल्ली" से दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 (1957 का 66) की धारा 2 के खंड (11) में यथा परिभाषित, दिल्ली छावनी को छोड़कर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र का संपूर्ण क्षेत्र अभिप्रेत है;
(ग) अधिक्रमण" से आवासीय उपयोग या वाणिज्यिक उपयोग या किसी अन्य उपयोग के लिए अस्थायी, अर्धस्थायी या स्थायी निर्माण के रूप में सरकारी भूमि या सार्वजनिक भूमि का अप्राधिकृत अधिभोग अभिप्रेत है;
(घ) स्थानीय प्राधिकरण" से दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 (1957 का 66) के अधीन स्थापित दिल्ली नगर निगम या नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् अधिनियम, 1994 (1994 का 44) के अधीन स्थापित नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् या दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 (1957 का 61) के अधीन स्थापित दिल्ली विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है, जो अपनी-अपनी अधिकारिता के अधीन क्षेत्रों के संबंध में नियंत्रण का प्रयोग करने के लिए विधिक रूप से हकदार हैं;
(ङ) मास्टर प्लान" से दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 (1957 का 61) के अधीन अधिसूचित दिल्ली मास्टर प्लान, अभिप्रेत है;
(च) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;
(छ) दंडात्मक कार्रवाई" से अप्राधिकृत विकास के विरुद्ध किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा सुसंगत विधि के अधीन की गई कार्रवाई अभिप्रेत है और इसमें परिसर को ढा देना, सील करना और व्यक्तियों या उनके कारबारी स्थापन को, चाहे न्यायालय के आदेशों के अनुसरण में या अन्यथा, विद्यमान स्थान से विस्थापित करना भी सम्मिलित होगा;
(ज) सुसंगत विधि" से निम्नलिखित अभिप्रेत है,-
(i) दिल्ली विकास प्राधिकरण की दशा में, दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 (1957 का 61) ;
(ii) दिल्ली नगर निगम की दशा में, दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 (1957 का 66) ; और
(iii) नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् की दशा में, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् अधिनियम, 1994 (1994 का 44);
(झ) अप्राधिकृत विकास" से मंजूर की गई योजनाओं के उल्लंघन में या योजनाओं की मंजूरी अभिप्राप्त किए बिना या, यथास्थिति, मास्टर प्लान या जोनल प्लान अभिन्यास प्लान के अधीन यथा अनुज्ञात भूमि उपयोग के उल्लंघन में किया गया भूमि का उपयोग या भवन का उपयोग या भवन का निर्माण अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत अधिक्रमण भी है ।
(2) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं, किन्तु दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 (1957 का 61), दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 (1957 का 66) और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् अधिनियम, 1994 (1994 का 44) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उक्त अधिनियमों में है ।
3. प्रवर्तन का प्रास्थगित रखा जाना-(1) किसी सुसंगत विधि या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों, विनियमों या उपविधियों में अतंर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, केद्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की एक वर्ष की अवधि के भीतर नीचे वर्णित प्रवर्गों के संबंध में अप्राधिकृत विकास की समस्या से निपटने के लिए सन्नियमों, नीतिगत मार्गदर्शक सिद्धांतों और साध्य रणनीतियों को अंतिम रूप देने के सभी संभव उपाय करेगी, अर्थात्ः-
(क) मिश्रित भूमि उपयोग, जो मास्टर प्लान के अनुरूप नहीं है;
(ख) मंजूर की गई योजनाओं से परे के निर्माण; और
(ग) गंदी बस्ती तथा झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों तथा फेरी वालों और पथ विक्रेताओं द्वारा अधिक्रमण,
जिससे कि दिल्ली का विकास पोषणीय और योजनाबद्ध रीति से हो ।
(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए और किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यथास्थिति, जो 1 जनवरी, 2006 को थी, उपधारा (1) में वर्णित अप्राधिकृत विकास के प्रवर्गों के संबंध में बनाए रखी जाएगी ।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अप्राधिकृत विकास के प्रवर्गों के विरुद्ध कार्रवाई आरंभ करने के लिए किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा जारी की गई सभी सूचनाएं निलंबित की गई समझी जाएंगी और एक वर्ष की इस अवधि के दौरान कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी ।
(4) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी अन्य उपबंध के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार एक वर्ष की समाप्ति के पूर्व किसी भी समय, यथास्थिति, उपधारा (2) या उपधारा (3) में वर्णित अप्राधिकृत विकास के एक या अधिक प्रवर्गों के संबंध में छूट को, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, वापस ले सकेगी ।
4. इस अधिनियम के उपबंधों का कतिपय मामलों में लागू न होना-इस अधिनियम के प्रवर्तन की अवधि के दौरान, धारा 3 के उपबंधों के अधीन अप्राधिकृत विकास के निम्नलिखित प्रवर्गों के संबंध में कोई अनुतोष उपलब्ध नहीं होगा, अर्थात् :-
(क) 1 जनवरी, 2006 को या उसके पश्चात् अप्राधिकृत रूप से आरंभ किया गया या जारी रखा गया कोई निर्माण;
(ख) 1 जनवरी, 2006 को या उसके पश्चात् दिल्ली मास्टर प्लान, 2001 के उपबंधों के उल्लंघन में आवासीय क्षेत्रों में किसी वाणिज्यिक क्रियाकलाप का आरंभ;
(ग) उन मामलों को छोड़कर, जो धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अंतर्गत आते हैं, सार्वजानिक भूमि पर अधिक्रमण;
(घ) विनिर्दिष्ट सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अपेक्षित भूमि को खाली कराने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित सुसंगत नीतियों के अनुसार गंदी बस्तियों और झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों, तथा फेरी वालों और पथ विक्रेताओं का हटाया जाना ।
5. केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, स्थानीय प्राधिकारियों को ऐसे निदेश जारी कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए वह ठीक समझे और स्थानीय प्राधिकारियों का यह कर्तव्य होगा कि वे ऐसे निदेशों का अनुपालन करें ।
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