Friday, 24, Apr, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 ( Central Industrial Security Force Act, 1968 )


 

केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968

(1968 का अधिनियम संख्यांक 50)

[2 दिसम्बर, 1968]

[केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व वाले औद्योगिक उपक्रमों, कतिपय अन्य औद्योगिक उपक्रमों, ऐसे सभी

औद्योगिक उपक्रमों के कर्मचारियों के अधिक अच्छे संरक्षण और सुरक्षा के लिए संघ

के सशस्त्र बल के गठन और विनियमन का तथा प्राइवेट सेक्टर के

औद्योगिक स्थापनों को तकनीकी परामर्शी सेवाएं

उपबल्ध कराने का और उससे संबंधित

विषयों का उपबंध करने के

लिए अधिनियम]

भारत गणराज्य के उन्नीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) यह अधिनियम केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 कहा जा सकेगा।

(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख  को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

 [(क) “महानिदेशक" से धारा 4 के अधीन नियुक्त बल का महानिदेशक अभिप्रेत है ;

(कक) “भर्ती किया गया बल-सदस्य" से कोई अधीनस्थ बल अधिकारी, अवर अधिकारी या किसी अवर अधिकारी के रैंक से निम्नतर रैंक का कोई अन्य सदस्य अभिप्रत है ;

(कख) “बल" से धारा 3 के अधीन गठित केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अभिप्रेत है ;

(कग) “बल-अभिरक्षा" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार किसी बल-सदस्य की गिरफ्तारी या उसका परिरोध अभिप्रेत है ;]

(ख) “औद्योगिक उपक्रम" से किसी अनुसूचित उद्योग से संबद्ध कोई उपक्रम अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत किसी अन्य ऐसे उद्योग या किसी ऐसे व्यापार, कारबार या सेवा में लगा हुआ उपक्रम भी है जिसे संसद् विधि द्वारा विनियमित करे ;

(ग) “पब्लिक सेक्टर का औद्योगिक उपक्रम" से ऐसा औद्योगिक उपक्रम अभिप्रेत है, जो -

(i) कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथापरिभाषित किसी सरकारी कम्पनी            के, अथवा 

(ii) किसी केन्द्रीय, प्रान्तीय या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी ऐसे निगम के, जो सरकार द्वारा नियंत्रित या प्रबंधित है,

            स्वामित्व में है या उसके द्वारा नियंत्रित या प्रबंधित है ;

 [(गक) “औद्योगिक स्थापन" से कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 3 के अधीन यथापरिभाषित कोई औद्योगिक उपक्रम या कोई कंपनी या भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 9) की धारा 59 के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई फर्म अभिप्रेत है, जो किसी उद्योग, या किसी व्यापार, कारबार या सेवा में लगी हुई है ;]

 [(गख) “संयुक्त उद्यम" से केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्राइवेट औद्योगिक उपक्रम के साथ संयुक्त रूप से चलाया गया उद्यम अभिप्रेत है ;]

 ।          ।           ।           ।           ।           ।

 (ङ) किसी औद्योगिक उपक्रम के सम्बन्ध में प्रबन्ध निदेशक" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है (चाहे वह प्रबन्ध अभिकर्ता, महाप्रबन्धक, प्रबन्धक या मुख्य कार्यपालक अधिकारी या किसी भी अन्य नाम से ज्ञात हो) जो उस उपक्रम के कारबार पर नियंत्रण रखता है ;

(च) “बल-सदस्य" से इस अधिनियम के अधीन बल में नियुक्त  [व्यक्ति अभिप्रेत है] ;

(छ) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

 [(छक) प्राइवेट औद्योगिक उपक्रम" से केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या पब्लिक सेक्टर में किसी औद्योगिक उपक्रम से भिन्न किसी व्यक्ति के स्वामित्वाधीन, नियंत्रणाधीन या प्रबंधनाधीन कोई उद्योग अभिप्रेत है ;]

(ज) “अनुसूचित उद्योग" से उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की प्रथम अनुसूची में वर्णित वस्तुओं के विनिर्माण या उत्पादन में लगा हुआ कोई उद्योग अभिप्रेत है ;

 [(जक) “अधीनस्थ अधिकारी" से निरीक्षक, उपनिरीक्षक या सहायक उपनिरीक्षक के रूप में बल में नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति अभिप्रेत है ;]

(झ) “पर्यवेक्षक अधिकारी" से धारा 4 के अधीन नियुक्त अधिकारियों में से कोई अभिप्रेत है, और इसके अन्तर्गत बल के पर्यवेक्षक के रूप में केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त कोई अन्य अधिकारी भी है ;

[(ञ) “अवर अधिकारी" से हैड कांस्टेबल, लांस या लांस नायक के रूप में बल में नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति अभिप्रेत है ।]

       [(2) इस अधिनियम में किसी ऐसी विधि के प्रति जो किसी क्षेत्र में प्रवृत्त नहीं है, किसी निर्देश का, उस क्षेत्र के प्रबन्ध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में प्रवृत्त किसी तत्स्थानी विधि के प्रति, यदि कोई हो, निर्देश है ।]

3. बल का गठन-(1)  [केन्द्रीय सरकार, संयुक्त उद्यम या प्राइवेट औद्योगिक उपक्रम केट स्वामित्व के औद्योगिक उपक्रमों के अधिक अच्छे संरक्षण और सुरक्षा के लिए  [तथा ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करने के लिए जो उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा सौंपे जाएंट वह सरकार  [संघ का सशस्त्र बलट गठित करेगी और रखेगी जो केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल कहलाएगा ।]

(2) बल ऐसी रीति से गठित किया जाएगा, उसमें उतने [पर्यवेक्षक अधिकारी, अधीनस्थ अधिकारी, अवर अधिकारी और अन्य भर्ती किए गए सदस्यट होंगे और उन्हें ऐसा वेतन और अन्य पारिश्रमिक मिलेगा, जो विहित किया जाए ।

 [4. पर्यवेक्षक अधिकारियों की नियुक्ति और शक्तियां- [(1) केन्द्रीय सरकार, किसी व्यक्ति को बल का महानिदेशक और ऐसे अन्य पर्यवेक्षक अधिकारियों को, जो वह आवश्यक समझे, नियुक्ति कर सकेगी ।]

(2) इस प्रकार नियुक्त किए गए 8[महानिदेशकट और प्रत्येक अन्य पर्यवेक्षक अधिकारी की ऐसी शक्तियां और प्राधिकार होंगे जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उपबन्धित हों और वह उनका प्रयोग कर सकेगा ।

5. बल-सदस्यों की नियुक्ति- [भर्ती किए गए बल-सदस्यों की नियुक्ति करने की शक्ति महानिदेशक को होगीट जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार उस शक्ति का प्रयोग करेगा :

परन्तु इस धारा के अधीन नियुक्ति करने की शक्ति का प्रयोग ऐसे अन्य पर्यवेक्षक अधिकारी द्वारा भी किया जा सकेगा जिसे केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ।

6. बल-सदस्यों के प्रमाणपत्र- [(1) भर्ती किए गए प्रत्येक बल सदस्य को उसकी नियुक्ति पर, अनुसूची में विनिर्दिष्ट प्ररूप में, महानिदेशक की या अन्य ऐसे पर्यवेक्षक अधिकारी की, जिसे महानिदेशक इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, मुद्रा से अंकित एक प्रमाणपत्र मिलेगा, जिसके आधार पर, उस व्यक्ति में जो ऐसा प्रमाणपत्र धारण करता है, भर्ती किए गए बल सदस्य की शक्तियां निहित होंगी ।]

(2) जब कभी ऐसे प्रमाणपत्र में नामित व्यक्ति किसी कारण से 11[भर्ती किया गया बल का सदस्यट नहीं रह जाता तब वह प्रमाणपत्र प्रभावहीन हो जाएगा ।

7. बल का अधीक्षण और प्रशासन- [(1) बल का अधीक्षण केन्द्रीय सरकार में निहित होगा और उसके तथा इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए बल का समादेशन, पर्यवेक्षण और प्रशासन महानिदेशक में निहित होगा ।]

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों के अध्यधीन यह है कि ऐसी स्थानीय सीमाओं के भीतर, जो विहित की जाएं, बल का प्रशासन इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्घों के अनुसार  [ऐसे अन्य पर्यवेक्षक अधिकारियों द्वारा, जो आवश्यक        समझे जाएंट किया जाएगा, और प्रत्येक पर्यवेक्षक अधिकारी, जिसे औद्योगिक उपक्रम  [संयुक्त उद्यम या प्राइवेट औद्योगिक उपक्रमट के संरक्षण और सुरक्षा का भारसाधक बनाया गया हो, ऐसे किन्हीं निदेशों के अध्यधीन रहते हुए, जो  [केन्द्रीय सरकार या महानिरीक्षकट द्वारा इस निमित्त दिए जाएं, उस उपक्रम के प्रबन्ध निदेशक के साधारण पर्यवेक्षण, निदेशन और नियन्त्रण के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन  करेगा ।

8. बल-सदस्यों की पदच्युति, उनका हटाया जाना, आदि-संविधान के अनुच्छेद 311 के उपबन्धों तथा ऐसे नियमों के अध्यधीन रहते हुए जो केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन बनाए, कोई भी पर्यवेक्षक अधिकारी-

(i) किसी ऐसे बल-सदस्यों को, जिसके बारे में वह समझे कि वह  [भर्ती किए गए बल-सदस्यट अपने कर्तव्य के निर्वहन में शिथिलता या उपेक्षा करता है या अपने कर्तव्य के निर्वहन के लिए अयोग्य है,  [पदच्युत कर सकेगा या हटा सकेगाट  [अनिवार्य सेवा-निवृत्ति का आदेश दे सकेगाट या पंक्ति से अवनत कर सकेगा, अथवा

(ii) किसी ऐसे 5[भर्ती किए गए बल-सदस्यट को, जो अपने कर्तव्य का निर्वहन असावधानी से या उपेक्षापूर्वक करे, या अपने किसी कार्य से अपने को अपने कर्तव्य के निर्वहन के लिए अयोग्य बना ले, निम्नलिखित दण्डों में से एक या अधिक दण्ड दे सकेगा, अर्थात् :-

(क) सात दिन के वेतन से अनधिक रकम तक जुर्माना या वेतनमान घटाना ;

(ख) कवायद, अतिरिक्त गारद, फटीग या अन्य ड्यूटी ;

(ग) सम्मान के किसी पद से हटाया जाना या किसी विशेष उपलब्धि से वंचित किया जाना ;

[(घ) संचयी प्रभाव सहित या इसके बिना वेतन वृद्धि रोकना ;

(ङ) प्रोन्नति रोकना ; 

(च) परिनिन्दा ।]

9. अपील और पुनरीक्षण-(1) धारा 8 के अधीन किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई 5[भर्ती किया गया बल-सदस्यट उस तारीख से, जिसको उसे आदेश संसूचित किया जाए, तीस दिन के भीतर उस आदेश के विरुद्ध अपील ऐसे प्राधिकारी को कर सकेगा, जो विहित किया जाए और  [उपधारा (2क), उपधारा (2ख) और उपधारा (3) के अध्यधीन रहते हुए,] उस पर उक्त प्राधिकारी का विनिश्चय अन्तिम होगा :

परन्तु यदि विहित प्राधिकारी का समाधान हो जाए कि अपीलार्थी समय के अन्दर अपील फाइल करने से पर्याप्त कारण से निवारित हो गया था तो वह तीस दिन की उक्त कालावधि के अवसान के पश्चात् अपील ग्रहण कर सकेगा ।

(2) विहित प्राधिकारी अपील निपटाने में ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा जो विहित की जाए । 

 [(2क) उपधारा (1) के अधीन अपील में पारित किए गए किसी आदेश से व्यथित बल का भर्ती किया गया कोई सदस्य, उस तारीख से, जिसको आदेश उसे संसूचित किया जाता है, छह मास की अवधि के भीतर उस आदेश के विरुद्ध ऐसे प्राधिकारी को, जो विहित किया जाए, पुनरीक्षण अर्जी प्रस्तुत कर सकेगा और पुनरीक्षण अर्जी को निपटाने में उक्त प्राधिकारी ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा, जो विहित की जाए ।

(2ख) वह प्राधिकारी, जिसे इस उपधारा के प्रयोजन के लिए विहित किया जाए, बल के भर्ती किए गए किसी व्यथित सदस्य द्वारा प्रस्तुत की गई पुनरीक्षण अर्जी पर या स्वप्रेरणा से, विहित अवधि के भीतर, धारा 8 या उपधारा (2) या उपधारा (2क) के अधीन किसी कार्यवाही के अभिलेख मांग सकेगा, और ऐसा प्राधिकारी विहित रीति से जांच करने के पश्चात् और इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन करते हुए, उस पर ऐसा आदेश पारित कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।]

(3) केन्द्रीय सरकार,  [धारा 8, इस धारा की उपधारा (2), उपधारा (2क) या उपधारा (2ख) के अधीनट की जाने वाली किसी कार्यवाही का अभिलेख मंगा सकेगी और उसकी परीक्षा कर सकेगी और ऐसी जांच कर सकेगी या करा सकेगी और इस अधिनियम के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए उस पर ऐसे आदेश कर सकेगी जो वह ठीक समझे :

परन्तु उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन कोई वर्धित शास्ति अधिरोपित करने वाला आदेश तब तक न किया जाएगा जब तक उस आदेश से प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया जाए । 

10. बल-सदस्यों के कर्तव्य-प्रत्येक  ॥। बल-सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह-

(क) अपने वरिष्ठ प्राधिकारी द्वारा उसे विधिपूर्वक दिए गए सभी आदेशों का तत्परतापूर्वक पालन और          निष्पादन करे ;

(ख) अपनी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर स्थित केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व के औद्योगिक उपक्रमों का और अन्य ऐसे संस्थापनों का भी संरक्षण और बचाव करे जिन्हें वह सरकार उन उपक्रमों में काम चलाने के लिए अत्यावश्यक विनिर्दिष्ट करे :

परन्तु किसी ऐसे संस्थापन को, जो केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में न हो, इस प्रकार विनिर्दिष्ट करने के पूर्व केन्द्रीय सरकार उस राज्य सरकार की सम्मति अभिप्राप्त करेगी जिसमें ऐसा संस्थापन स्थित हो ;

(ग)  [किसी संयुक्त उद्यम, प्राइवेट औद्योगिक उपक्रम और अन्य ऐसे औद्योगिक उपक्रमोंट और संस्थापनों का संरक्षण और बचाव करे, जिनके संरक्षण और सुरक्षा के लिए वह धारा 14 के अधीन तैनात किया गया है ;

 [(घ) खंड (ख) और खंड (ग) में निर्दिष्ट औद्योगिक उपक्रमों और संस्थापनों के कर्मचारियों का संरक्षण और           बचाव करे ;

(ङ) खंड (ख) और खंड (ग) में निर्दिष्ट औद्योगिक उपक्रमों और संस्थापनों तथा खंड (घ) में निर्दिष्ट कर्मचारियों के अधिक अच्छे संरक्षण और सुरक्षा के साधक कोई अन्य कार्य करे ;]

 [(च) धारा 14क के अधीन किसी प्राइवेट सेक्टर के औद्योगिक स्थापनों की सुरक्षा से सम्बन्धित तकनीकी परामर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना ;

(छ) सरकार के स्वामित्व वाले या उसके द्वारा निधि उपलब्ध कराए गए संगठनों और संगठनों के कर्मचारियों का संरक्षण और सुरक्षा करना, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे सौंपे जाएं ;

[(ज) भारत के भीतर और बाहर किसी ऐसे कर्तव्य का पालन करे जो केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, उसे सौंपे ।]

11. वारंट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति- [(1) कोई बल-सदस्य किसी मजिस्ट्रेट के किसी आदेश के बिना और किसी वारंट के बिना निम्नलिखित व्यक्तियों को गिरफ्तार कर सकेगा,-

 [(i) किसी ऐसे व्यक्ति को जो धारा 10 के खंड (घ) में निर्दिष्ट किसी कर्मचारी को, या उसको, या किसी अन्य बल-सदस्य को, यथास्थिति, ऐसे कर्मचारी के रूप में अपने कर्तव्य के निवर्हन में या ऐसे सदस्य के रूप में अपने कर्तव्य के निष्पादन में, या ऐसे सदस्य के रूप में अपने कर्तव्य का निवर्हन करने से उसे निवारित करने या भयोपरत करने के आशय से, या ऐसे सदस्य के रूप में उसके द्वारा अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की गई या की जाने के लिए प्रयतित किसी बात के परिणामस्वरूप स्वेच्छया उपहति कारित करता है या स्वेच्छया उपहति कारित करने का प्रयत्न करता है, या सदोष अवरुद्ध करता है या सदोष अवरुद्ध करने का प्रयत्न करता है, या हमला करता है, या हमला करने की धमकी देता है, या आपराधिक बल का प्रयोग करता है या प्रयोग करने की धमकी देता है या प्रयोग करने का प्रयत्न करता है ;]

 (ii) किसी ऐसे व्यक्ति को जो किसी अपराध से सम्बद्ध रहा है या जिसके विरुद्ध ऐसे सम्बद्ध रहने का समुचित संदेह है या जो ऐसी परिस्थतियों में अपनी उपस्थिति को छिपाने के लिए पूर्वावधानियां बरतता पाया जाए जिससे यह विश्वास करने का कारण उत्पन्न हो कि वह ऐसी पूर्वावधानियां ऐसा संज्ञेय अपराध करने के लिए बरत रहा है, जो धारा 10 के खण्ड (ख) और खण्ड (ग) में निर्दिष्ट किसी औद्योगिक उपक्रम की या उसके परिसर में की सम्पत्ति या उन खण्डों में निर्दिष्ट अन्य संस्थापनों की या उनके परिसरों में की सम्पत्ति से सम्बन्धित है ;

(iii) किसी ऐसे व्यक्ति को जो ऐसा संज्ञेय अपराध करता है या करने का प्रयत्न करता है जिसमें धारा 10 के खण्ड (ख) और खण्ड (ग) में निर्दिष्ट किसी उपक्रम या संस्थापनों से सम्बन्धित किसी काम को करने में संलग्न किसी व्यक्ति के जीवन के लिए  ॥। खतरा अन्तर्वलित है या अन्तर्वलित होने की सम्भावना है ट ।

(2) यदि कोई व्यक्ति धारा 10 के खण्ड (ख) और (ग) में निर्दिष्ट किसी औद्योगिक उपक्रम के परिसर में अतिचार करता हुआ पाया जाए तो उसे, किन्हीं अन्य ऐसी कार्यवाहियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जो उसके विरुद्धकी जा सकती हों, किसी  ॥।         बल-सदस्य द्वारा ऐसे परिसर से हटाया जा सकेगा ।  

12. वारंट के बिना तलाशी लेने की शक्ति-(1) जब कभी किसी  ॥। किसी ऐसे बल-सदस्य के पास जो विहित पंक्ति से नीचे का न हो, यह विश्वास करने का कारण हो कि धारा 11 में यथानिर्दिष्ट कोई अपराध किया गया है या किया जा रहा है और अपराधी को निकल भागने या अपराध का साक्ष्य छिपाने का अवसर दिए बिना तलाशी का वारंट अभिप्राप्त नहीं किया जा सकता तब वह तत्काल अपराधी को निरुद्ध कर सकेगा और उसकी और उसके माल-असबाब की तलाशी ले सकेगा, और, यदि वह उचित समझे तो, किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि उसने अपराध किया है ।

(2)  [दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2)ट के अधीन तलाशियों के सम्बन्ध में उस संहिता के उपबन्ध इस धारा के अधीन तलाशियों को यावत्शक्य लागू होंगे ।

13. गिरफ्तारी के पश्चात् अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया-इस अधिनियम के अधीन गिरफ्तारी करने वाला कोई 3॥। बल-सदस्य इस प्रकार गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को, अनावश्यक विलम्ब के बिना, किसी पुलिस आफिसर के हवाले कर देगा, अथवा, पुलिस आफिसर की अनुपस्थिति में, उस व्यक्ति को निकटतम पुलिस थाने ले जाएगा या भिजवाएगा और साथ ही यह भी रिपोर्ट करेगा कि गिरफ्तारी किन परिस्थितियों में की गई ।

14. पब्लिक सेक्टर  [संयुक्त उद्यम या प्राइवेट सेक्टरट के औद्योगिक उपक्रमों में बल की तैनाती-(1) किन्हीं ऐसे साधारण निदेशों के अध्यधीन रहते हुए जो केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए जाएं, किसी पब्लिक सेक्टर 5[संयुक्त उद्यम या प्राइवेट सेक्टरट के औद्योगिक उपक्रम के संबद्ध प्रबंध निदेशक से इस निमित्त प्रार्थना प्राप्त होने पर, जिसमें उसकी आवश्यकता दर्शित की गई हो, 4[महानिदेशकट के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह उस औद्योगिक उपक्रम और उससे संलग्न किन्हीं संस्थापनों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए उतने ॥। बल-सदस्य तैनात करे जितने 4[महानिदेशकट आवश्यक समझे और इस प्रकार तैनात ॥। बल-सदस्य प्रबन्ध निदेशक के भारसाधन में रहेंगे :

परन्तु किसी ऐसे उपक्रम की दशा में जो-

      (i) किसी ऐसी सरकारी कम्पनी के, जिसकी सदस्य केन्द्रीय सरकार न हो,

(ii) प्रांतीय या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम के,

स्वामित्व, नियंत्रण या प्रबन्ध में हो, ऐसी कोई प्रार्थना तब तक ग्रहण न की जाएगी जब तक वह उस राज्य की सम्मति से न की गई हो जिसमें वह उपक्रम स्थित हो ।

(2) यदि [महानिदेशक] की यह राय हो कि उपधारा (1) के अधीन किसी औद्योगिक उपक्रम के सम्बन्ध में ॥। बल-सदस्यों के नियोजन को आवश्यक बनाने वाली परिस्थितियां विद्यमान नहीं रह गई हैं, या किसी अन्य कारण से वैसा करना आवश्यक है तो, वह, उस औद्योगिक उपक्रम के प्रबन्ध निदेशक को इत्तिला देने के पश्चात् उस प्रकार तैनात ॥। बल-सदस्यों को वापस ले सकेगा :

परन्तु प्रबन्ध निदेशक, [महानिदेशक] को  [तीन मास की लिखित सूचना] देकर, यह अपेक्षा कर सकेगा कि इस प्रकार नियोजित ॥। बल-सदस्य वापस ले लिए जाएं, और प्रबन्ध निदेशक, ऐसी सूचना की समाप्ति की तारीख से या उससे पहले की ऐसी तारीख से, जिसको बल इस प्रकार वापस लिया जाए, भारसाधन से मुक्त कर दिया जाएगा ।  

(3) तैनाती की कालावधि के दौरान अपने कृत्यों का निर्वहन करते समय प्रत्येक ॥। बल-सदस्य, उन्हीं शक्तियों का प्रयोग करता रहेगा और उन्हीं उत्तरदायित्वों, अनुशासन और शास्तियों के अध्यधीन रहेगा जो उसे इस अधिनियम के अधीन उस दशा में लागू होतीं जब वह केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व के किसी औद्योगिक उपक्रम के सम्बन्ध में उन कृत्यों का निर्वहन करता होता । 

 [14क. औद्योगिक स्थापनों को तकनीकी परामर्शी सेवा-(1) किन्हीं ऐसे साधारण निदेशों के अध्यधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए जाएं, प्राइवेट सेक्टर के किसी औद्योगिक स्थापन के प्रबंध निदेशक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति से प्रार्थना प्राप्त होने पर महानिदेशक के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसे औद्योगिक स्थापनों को सुरक्षा के संबंध में तकनीकी परामर्शी सेवाएं ऐसी रीति से और ऐसी फीस के संदाय पर जो विहित की जाएं, उपलब्ध कराने के लिए बल के सदस्यों को निदेश दे ।

(2) उपधारा (1) के अधीन प्राप्त की गई फीस भारत की संचित निधि में जमा की जाएगी ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी औद्योगिक स्थापन के संबंध में, प्रबंध निदेशक" पद से अभिप्रेत है, वह व्यक्ति जिसका स्थापन के कार्यकलाप पर नियंत्रण है (चाहे उसे महाप्रबंधक, प्रबंधक, मुख्य कार्यपालक अधिकारी या किसी फर्म का भागीदार कहा जाए या किसी अन्य नाम से जाना जाए) ।]

15. बल-अधिकारियों और बल-सदस्यों का सदा कर्तव्यारूढ़ समझा जाना और उनका भारत में कहीं भी नियोजित किया        जा सकना-(1) इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए प्रत्येक  ॥। बल-सदस्य सदा कर्तव्यारूढ़ समझा जाएगा और भारत के भीतर         [या बाहर] किसी भी स्थान पर किसी भी समय नियोजित किया जा सकेगा ।

(2) धारा 14 में उपबन्धित के सिवाय, कोई भी ॥। बल-सदस्य इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों से भिन्न किसी नियोजन या पद पर अपने को नहीं लगाएगा ।

 [15क. संगम आदि बनाने के अधिकार की बाबत निर्बन्धन-(1) कोई बल-सदस्य केन्द्रीय सरकार की या विहित प्राधिकारी की पूर्व लिखित मंजूरी के बिना, -

(क) किसी व्यवसाय संघ, श्रम संघ, राजनैतिक संगम या किन्हीं व्यवसाय संघों, श्रम संघों या राजनैतिक संगमों के किसी वर्ग का सदस्य नहीं होगा या उसके साथ किसी रूप में सहयोजित नहीं होगा ; या

(ख) किसी ऐसी अन्य सोसाइटी, संस्था, संगम या संगठन का जो बल के भागरूप में मान्यताप्राप्त नहीं है, अथवा जो मात्र सामाजिक, मनोरंजन सम्बन्धी या धार्मिक प्रकार का नहीं है, सदस्य नहीं होगा या उसके साथ किसी भी रीति से सहयुक्त नहीं होगा ; या

(ग) समाचार पत्रों से सम्पर्क नहीं करेगा या कोई पुस्तक, पत्र या अन्य दस्तावेज प्रकाशित नहीं करेगा या प्रकाशित नहीं कराएगा, सिवाय वहां के जहां ऐसा सम्पर्क या प्रकाशन उसके कर्तव्यों के सद्भाविक निर्वहन में है अथवा वह मात्र साहित्यिक, कलात्मक अथवा वैज्ञानिक प्रकार का अथवा एक विहित प्रकृति का है ।

स्पष्टीकरण-यदि इस बारे में कोई प्रश्न पैदा होता है कि क्या कोई सोसाइटी, संस्था, संगम या संगठन इस उपधारा के खण्ड (ख) के अधीन मात्र सामाजिक, मनोरंजन सम्बन्धी या धार्मिक प्रकृति का है, तो उस पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चिय अन्तिम होगा ।

(2) कोई बल-सदस्य किन्हीं राजनैतिक प्रयोजनों के लिए या किन्हीं ऐसे अन्य प्रयोजनों के लिए, जो विहित किए जाएं, व्यक्तियों के किसी निकाय द्वारा संगठित किसी प्रदर्शन में भाग नहीं लेगा या उसकी किसी बैठक को सम्बोधित नहीं करेगा या उसमें भाग नहीं लेगा ।]

16. निलम्बन के दौरान बल-सदस्यों के उत्तरदायित्व-बल-सदस्य की बल-सदस्यता, पद से उसके निलम्बन के कारण समाप्त नहीं होगी और उस कालावधि के दौरान वह उन्हीं उत्तरदायित्वों, अनुशासन और शास्तियों के अध्यधीन होगा जिनके अध्यधीन वह कर्तव्यारूढ़ होने की दशा में, होता ।

17. बल-सदस्य न रह गए व्यक्तियों द्वारा प्रमाणपत्र, आयुध आदि का अभ्यर्पण-(1) प्रत्येक व्यक्ति जो किसी कारणवश  [भर्ती किया गया बल सदस्यट न रह जाए, अपना नियुक्ति-प्रमाणपत्र, आयुध, साजसज्जा, वस्त्र तथा अन्य वस्तुएं, जो उसे 4[भर्ती किया गया बल सदस्यट के रूप में कर्तव्यों का पालन करने के लिए दी गई हों, किसी ऐसे पर्यवेक्षक अधिकारी को तत्काल अभ्यर्पित कर देगा जो उन्हें प्राप्त करने के लिए सशक्त हो । 

(2) कोई व्यक्ति, जो अपने को दिया गया नियुक्ति-प्रमाणपत्र या आयुध, साजसज्जा, वस्त्र और अन्य वस्तुएं उपधारा (1) की अपेक्षानुसार अभ्यर्पित करने की जानबूझकर उपेक्षा करेगा या अभ्यर्पित करने से इन्कार करेगा, दोषसिद्धि पर, कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

(3) इस धारा की कोई बात किसी ऐसी वस्तु को लागू नहीं समझी जाएगी, जो  [महानिदेशकट के आदेशों के अधीन, उस व्यक्ति की, जिसे वह दी गई, सम्पत्ति हो गई हो ।

18. कर्तव्य की उपेक्षा, आदि के लिए शास्तियां- [(1) धारा 8 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना प्रत्येक बल-सदस्य, जो कर्तव्य के किसी अतिक्रमण का, या किसी नियम या विनियम या किसी पर्यपेक्षक अधिकारी द्वारा किए गए किसी विधिपूर्ण आदेश को जानबूझकर भंग करने या उसकी जानबूझकर उपेक्षा करने का दोषी होगा, या जो अपने पद के कर्तव्यों से अपने को अनुज्ञा के बिना हटा लेगा या जो छुट्टी लेकर अनुपस्थित होने पर, उस छु्ट्टी की समाप्ति पर समुचित कारण के बिना अपनी ड्यूटी पर न आएगा या जो बल-सदस्य के रूप में अपने कर्तव्य से भिन्न किसी नियोजन में अपने को बिना प्राधिकार के लगाएगा या जो कायरता का दोषी होगा, उसे बल-अभिरक्षा में ले लिया जाएगा और दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष की तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा ।  

(2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी इस धारा के अधीन दण्डनीय कोई अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होगा ।

(2क) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी केन्द्रीय सरकार भर्ती किए गए किसी बल-सदस्य द्वारा किए गए और इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध की अथवा बल के किसी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य बल-सदस्य के या उसकी सम्पत्ति के विरुद्ध किए गए किसी अपराध की जांच या उसका विचारण करने के प्रयोजन के लिए कमांडेंट में किसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट की शक्तियां विनिहित कर सकेगी :

परन्तु-

(i) जब अपराधी छुट्टी पर हो, अथवा ड्यूटी से अनुपस्थित हो ; या

(ii) जब अपराध भर्ती किए गए बल-सदस्य के रूप में अपराधी के कर्तव्यों से सम्बन्धित न हो ; या

(iii) जब वह अपराध छोटा हो, भले ही वह अपराध भर्ती किए गए बल के सदस्य के रूप में अपराधी के कर्तव्यों से सम्बन्धित हो ; या

(iv) जब ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, कमांडेंट के लिए, जिसमें मजिस्ट्रेट की शक्तियां विनिहित हैं, अपराध की जांच या उसका विचारण करना साध्य न हो,

तब उस अपराध को, यदि वह विहित प्राधिकारी जिसकी अधिकारिता की सीमाओं के भीतर अपराध किया गया है, ऐसी अपेक्षा करे, जांच या उसका विचारण उस मामले में अधिकारिता रखने वाले मामूली दंड न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा ।]

(3) इस धारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी बल-सदस्य को किसी विधि द्वारा दण्डनीय बनाए गए किसी अपराध के लिए उस विधि के अधीन अभियोजित किए जाने से अथवा ऐसी किसी विधि के अधीन किसी ऐसे दण्ड या शास्ति का, जो ऐसे अपराध के लिए इस धारा द्वारा उपबन्धित शास्ति या दण्ड से भिन्न या कठोरतर हो, भागी होने से निवारित करती है :

परन्तु कोई व्यक्ति एक ही अपराध के लिए दो बार दण्डित नहीं किया जाएगा ।

19. 1922 के अधिनियम 22 का बल-अधिकारियों और बल-सदस्यों को लागू होना-पुलिस (अप्रीति उद्दीपन) अधिनियम, 1922  ॥। बल-सदस्यों को उसी प्रकार लागू होगा जैसे वह पुलिस के सदस्यों को लागू होता है ।

20. कतिपय अधिनियमों का बल-सदस्यों को लागू न होना-मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) या औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) या औद्योगिक विवादों के अन्वेषण और परिनिर्धारण के सम्बन्ध में किसी राज्य में प्रवृत्त किसी तत्स्थानी विधि की कोई बात बल-सदस्यों को लागू न होगी ।

21. बल-अधिकारियों और बल-सदस्यों के कार्यों के लिए परित्राण-(1) किसी ॥। बल-सदस्य द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए किसी कार्य के लिए उसके विरुद्ध किए गए किसी वाद या कार्यवाही में उसके लिए यह अभिवचन करना विधिपूर्ण होगा कि ऐसा कार्य उसने सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के अधीन किया था । 

(2) ऐसे किसी अभिवाक् को उस कार्य को करने का निदेश देने वाला आदेश पेश करके साबित किया जा सकेगा, और यदि वह इस प्रकार साबित हो जाता है तो, आदेश करने वाले प्राधिकारी की अधिकारिता में कोई त्रुटि होते हुए भी, ॥। बल-सदस्य अपने द्वारा इस प्रकार किए गए कार्य के संबंध में किसी भी दायित्व से उन्मोचित कर दिया जाएगा । 

(3) किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोई विधिक कार्यवाही, चाहे वह सिविल हो या दाण्डिक, जो इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के किसी उपबन्ध द्वारा या उसके अनुसरण में प्रदत्त शक्तियों के अधीन किए गए या किए जाने के लिए आशयित किसी कार्य के लिए किसी ॥। बल-सदस्य के विरुद्ध विधिपूर्वक की जा सकती हो, उस कार्य के, जिसके सम्बन्ध में परिवाद किया जाए किए जाने के तीन मास के भीतर ही प्रारम्भ की जाएगी, अन्यथा नहीं; और ऐसी कार्यवाही और उसके कारण की लिखित सूचना, संबद्ध व्यक्ति और उसके पर्यवेक्षक अधिकारी को ऐसी कार्यवाही के प्रारम्भ से कम से कम एक मास पूर्व दी जाएगी ।

22. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतः और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे :-

(क)  ॥। बल-सदस्यों के वर्गों, पंक्तियों, ग्रेडों, वेतन और पारिश्रमिक का तथा बल में उनकी सेवा की शर्तों         का विनियमन ;

(ख) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन कोई कृत्य करने के लिए प्राधिकृत ॥। बल-सदस्यों की शक्तियों और कर्तव्यों का विनियमन ;

(ग) ॥। बल-सदस्यों के लिए सेवा की कालावधि नियत करना ;

(घ) बल-सदस्यों को दिए जाने वाले आयुध, साजसज्जा, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का प्रकार और उनकी मात्रा विहित करना ;

(ङ) बल-सदस्यों के निवास-स्थान विहित करना ;

(च) बल के प्रशासन से संबद्ध किसी प्रयोजन के लिए किसी निधि की संस्थापना, तथा उसका प्रबन्ध और  विनियमन ;

(छ) दण्डों का विनियमन और वे प्राधिकारी विहित करना जिन्हें दण्ड के, अथवा जुर्माने या अन्य दंड के परिहार के आदेशों से अपीलें की जाएंगी और ऐसी अपीलों को निपटाने के लिए अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ;

 [(छछ) इस अधिनियम के अधीन बल अभिरक्षा से सम्बन्धित विषयों का, जिनके अन्तर्गत व्यक्तियों को ऐसी अभिरक्षा में लेने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया भी है, विनियमन ;

(छछछ) इस अधिनियम के अधीन अपराधों से संबंधित मामलों को निपटाने से सम्बन्धित विषयों का विनियमन और उन स्थानों को, जिनमें इस अधिनियम के अधीन दोषसिद्ध व्यक्तियों को परिरुद्ध किया जा सकेगा, विनिर्दिष्ट करना ;]

 [(छछछछ) धारा 9 की उपधारा (2क) के अधीन प्राधिकारी और पुनरीक्षण अर्जी के निपटाने में ऐसे प्राधिकारी द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया विहित करना :

(छछछछछ) धारा 9 की उपधारा (2ख) के अधीन प्राधिकारी, वह अवधि जिसके भीतर ऐसा प्राधिकारी अभिलेख मांग सकेगा और वह रीति जिसमें ऐसा प्राधिकारी जांच कर सकेगा, विहित करना ;]

(ज) वे निबन्धन और शर्तें जिनके अध्यधीन रहते हुए ॥। बल-सदस्यों को धारा 14 के अधीन तैनात किया जा सकता है, और उसके लिए प्रभार ;  ॥। 

[(जज) वह रीति जिससे और वह फीस जिसके संदाय पर धारा 14क की उपधारा (1) के अधीन तकनीकी परामर्शी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ; और]

(झ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए 2[या जिसके संबंध में इस अधिनियम के अधीन नियम बनाया जाना अपेक्षित है ।]

 [(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा, यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व, दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।] 

अनुसूची

(धारा 6 देखिए)

      कख को केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 के अधीन केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा  [बल का भर्ती किया गया सदस्यट नियुक्त किया गया है और उसमें 6[बल के भर्ती किए गए सदस्यट की शक्तियां, कृत्य और विशेषाधिकार निहित किए गए हैं ।

______

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : IDRC

 

LatestLaws Partner Event : IJJ

 
 
Latestlaws Newsletter