जनगणना अधिनियम, 1948
(1948 का अधिनियम संख्यांक 37)
[3 सितम्बर, 1948]
जनगणना करने के सम्बन्ध में कतिपय
विषयों के लिए उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत *** या उसके किसी भाग में, जब कभी आवश्यक या वांछनीय हो, जनगणना करने के लिए उपबन्ध करना और ऐसी जनगणना करने के सम्बन्ध में कतिपय विषयों के लिए उपबन्ध करना समीचीन है ;
अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियम किया जाता है : -
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम जनगणना अधिनियमित, 1948 है ।
[(2) इसका विस्तार *** सम्पूर्ण भारत पर है ।]
[2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से, अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) “परिसर" से कोई भूमि, भवन या किसी भवन का भाग अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत कोई झोपड़ी, शैड या अन्य संरचना या उसका कोई भाग है ;
(ख) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ग) “यान" से कोई ऐसा यान अभिप्रेत है, जो सड़क परिवहन के प्रयोजन के लिए उपयोग किया जाता है या उपयोग किए जाने योग्य है चाहे वह यांत्रिक शक्ति द्वारा या अन्यथा नोदित हो ।
2क. ऐसी अधिनियमितियों के संबंध में अर्थान्वयन का नियम जिनका विस्तार जम्मू-कश्मीर पर नहीं हैइस अधिनियम में भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का 45), भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) या दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के प्रति किसी निर्देश का अर्थ, जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में यह लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में प्रवृत्त तत्स्थानी अधिनियम के प्रति निर्देश है ।]
3. केन्द्रीय सरकार द्वारा जनगणना का किया जाना-केन्द्रीय सरकार, उन समस्त राज्यक्षेत्रों में या उनके किसी भाग में जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, जब कभी वह ऐसा करना आवश्यक या वांछनीय समझे, जनगणना करने के अपने आशय की घोषणा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, कर सकेगी, और तदुपरि जनगणना की जाएगी ।
4. जनगणना कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार उस सम्पूर्ण क्षेत्र में जिसमें जनगणना का किया जाना आशयित हो, जनगणना करने के सम्बन्ध में पर्यवेक्षण करने के लिए जनगणना आयुक्त की, और विभिन्न राज्यों में जनगणना करने के संबंध में पर्यवेक्षण करने के लिए [जनगणना-कार्य निदेशकों] की, नियुक्ति कर सकेगी ।
(2) राज्य सरकार, कुछ व्यक्तियों को किसी विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र में जनगणना करने, या उसमें सहायता देने, या उसके संबंध में पर्यवेक्षण करने के लिए [ऐसे पदाभिधान वाले, जो वह सरकार आवश्यक समझे,] जनगणना अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकेगी और ऐसे व्यक्ति, जब इस प्रकार नियुक्त कर दिए जाएं, तब, तद्नुसार सेवा करने के लिए आबद्ध होंगे ।
(3) इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित यह लिखित घोषणा कि कोई व्यक्ति किसी स्थानीय क्षेत्र के लिए जनगणना अधिकारी सम्यक् रूप से नियुक्त कर दिया गया है, ऐसी नियुक्ति का निश्चायक सबूत होगी ।
(4) राज्य सरकार उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति करने की शक्ति ऐसे प्राधिकारी को, जिसे वह ठीक समझे, प्रत्यायोजित कर सकेगी ।
[4क. प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी के कर्मचारिवृन्द का जनगणना करने के लिए उपलब्ध कराया जाना-किसी राज्य का प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी केन्द्रीय सरकार के या उस सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी प्राधिकारी के लिखित आदेश द्वारा, जब इस प्रकार निर्दिष्ट किया जाए, किसी जनगणना कार्य निदेशक को ऐसे कर्मचारिवृन्द उपलब्ध कराएगा, जो जनगणना करने के संबंध में, किन्हीं कर्तव्यों के पालन के लिए आवश्यक हों ।]
5. लोक सेवकों के रूप में जनगणना प्राधिकारियों की प्रास्थिति-जनगणना आयुक्त, सभी [जनगणना-कार्य निदेशक] और सभी जनगणना अधिकारी भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे ।
6. कतिपय दशाओं में जनगणना अधिकारियों के कर्तव्यों का निर्वहन-(1) जहां जिला मजिस्ट्रेट या ऐसा प्राधिकारी जिसे राज्य सरकार इस निमित्त नियुक्त करे, लिखित आदेश द्वारा, ऐसा निदेश देता है वहां :
(क) भारत की नौसेना, सेना या वायुसेना से सम्बद्ध किसी व्यक्ति-निकाय का अथवा भारत के किसी युद्ध पोत का समावेश करने वाला प्रत्येक आफिसर,
(ख) किसी जलयान का भारसाधन या नियंत्रण करने वाला (पाइलट या बन्दरगाह-मास्टर को छोड़कर) प्रत्येक व्यक्ति,
(ग) पागलखाने, अस्पताल, श्रमसदन, कारागार, सुधारालय या हवालात का या किसी लोक, खैराती, धार्मिक या शिक्षा संस्था का भारसाधन करने वाला प्रत्येक व्यक्ति,
(घ) किसी सराय, होटल, छात्रावास, वासगृह, उत्प्रवास डिपो या क्लब का प्रत्येक मालिक, सचिव या प्रबन्धक,
(ङ) रेल या किसी वाणिज्यिक अथवा औद्योगिक स्थापन का प्रत्येक प्रबन्धक या अधिकारी, और
(च) ऐसी स्थावर सम्पत्ति का, जिसमें जनगणना करने के समय कोई व्यक्ति रह रहे हों, प्रत्येक, अधिभोगी,
उन व्यक्तियों के सम्बन्ध में, जो जनगणना करने के समय उसके समादेश या भारसाधन के अधीन हैं या जो उसके गृह में सहवासी हैं या जो ऐसी स्थावर सम्पत्ति पर विद्यमान हैं या जो उसके अधीन नियोजित हैं, जनगणना अधिकारी के ऐसे कर्तव्यों का, जैसे आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, पालन करेगा ।
(2) जनगणना अधिकारियों से सम्बद्ध इस अधिनियम के सभी उपबन्ध, यावत्शक्य, सभी व्यक्तियों को, इस धारा के अधीन ऐसे कर्तव्यों का पालन करते समय लागू होंगे और यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे कर्तव्य का, जिसका पालन करने के लिए उसे इस धारा के अधीन निदिष्ट किया जाता है, पालन करने से इन्कार करता है या उसकी अपेक्षा करता है तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 187 के अधीन अपराध किया है ।
7. कतिपय व्यक्तियों से सहायता देने की अपेक्षा करने की शक्ति-जिला मजिस्ट्रेट, या कोई ऐसा प्राधिकारी, जिसे राज्य सरकार इस निमित्त किसी स्थानीय क्षेत्र के लिए नियुक्त करे, ऐसे लिखित आदेश द्वारा जो, यथास्थिति, उसके जिले में या ऐसे स्थानीय क्षेत्र में सर्वत्र प्रभावी होगा, यह अपेक्षा कर सकेगा कि
(क) सभी भू-स्वामी तथा उसके अधिभोगी, भूधृति धारक और कृषक तथा भू-राजस्व के समनुदेशिती, या उनके अभिकर्ता,
(ख) जिला, नगरपालिक, पंचायत तथा अन्य स्थानीय प्राधिकरणों के सभी सदस्य और ऐसे प्राधिकरणों के अधिकारी तथा सेवक, और
(ग) किसी कारखाने, फर्म या स्थापन के सभी अधिकारी और कर्मचारिवृन्द,
उसे उन व्यक्तियों की जनगणना करने के सम्बन्ध में, जो जनगणना करने के समय, यथास्थिति, ऐसे स्वामियों, अधिभोगियों, भूधृति धारकों, कृषकों और समनुदेशितियों की भूमि पर है, या जो कारखानों, फर्मों तथा अन्य स्थापनों के परिसरों में है अथवा जो ऐसे क्षेत्रों में हैं जिनके लिए ऐसे स्थानीय प्राधिकरणों की स्थापना की गई है, ऐसी सहायता दें जैसी आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, और वे व्यक्ति जिनको इस धारा के अधीन आदेश दिया जाए उसका पालन करने के लिए आबद्ध होंगे और वे ऐसे आदेश के अनुसरण में कार्य करते समय-भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे ।
[7क. जनगणना करने के लिए परिसरों, यानों, आदि का अधिग्रहण-यदि केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि जनगणना करने के संबंध में,
(क) किन्हीं परिसरों की आवश्यकता है या आवश्यकता होनी संभाव्य है ; या
(ख) किसी यान, जलयान या जीवजन्तु की आवश्यकता है या आवश्यकता होनी संभाव्य है,
तो वह सरकार, ऐसे परिसर, अथवा, यथास्थिति, यान, जलयान या जीवजन्तु का अधिग्रहण, लिखित आदेश द्वारा, कर सकेगी और ऐसे अतिरिक्त आदेश कर सकेगी जो अधिग्रहण के संबंध में उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों ।
(2) अधिग्रहण उस व्यक्ति को संबोधित लिखित आदेश द्वारा किया जाएगा जिसके बारे में केन्द्रीय सरकार यह समझती है कि वह उस संपत्ति का स्वामी है या उस पर कब्जा रखने वाला व्यक्ति है और ऐेसे आदेश की उस व्यक्ति पर विहित रीति से तामील की जाएगी जिसको वह संबोधित किया गया है ।
(3) जब कभी कोई संपत्ति उपधारा (1) के अधीन अधिगृहीत की जाती है तब ऐसे अधिग्रहण की अवधि उस अवधि से अधिक नहीं होगी जिसके लिए ऐसी संपत्ति उस उपधारा में उल्लिखित किसी प्रयोजन के लिए अपेक्षित है ।
7ख. प्रतिकर का संदाय-(1) जब कभी केन्द्रीय सरकार किसी परिसर का धारा 7क के अनुसरण में अधिग्रहण करती है तब हितबद्ध व्यक्तियों को ऐसे प्रतिकर का संदाय किया जाएगा जिसकी रकम का अवधारण निम्नलिखित पर विचार करके किया जाएगा, अर्थात् : -
(i) परिसर की बाबत संदेय किराया या यदि कोई किराया इस प्रकार संदेय नहीं है तो उस परिक्षेत्र में वैसे ही परिसरों के लिए संदेय किराया :
(ii) यदि हितबद्ध व्यक्ति को परिसर के अधिग्रहण के परिणामस्वरूप अपने निवास स्थान या कारबार के स्थान को बदलने के लिए विवश किया जाता है तो ऐसे बदलने के आनुषंगिक युक्तियुक्त व्यय (यदि कोई हो) :
परंतु जहां इस प्रकार अवधारित प्रतिकर की रकम से व्यथित कोई हितबद्ध व्यक्ति, केन्द्रीय सरकार को विहित समय के भीतर आवेदन करता है कि वह मामला मध्यस्थ को निर्देशित कर दिया जाए वहां संदत्त किए जाने वाले प्रतिकर की रकम वह होगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त मध्यस्थ अवधारित करे :
परंतु यह और कि जहां प्रतिकर प्राप्त करने के हक के बारे में या प्रतिकर की रकम के प्रभाजन के बारे में कोई विवाद है वहां वह केन्द्रीय सरकार द्वारा उस मध्यस्थ को अवधारण के लिए निर्देशित किया जाएगा जिसे उस सरकार ने इस निमित्त नियुक्त किया है और उसका अवधारण ऐसे मध्यस्थ के विनिश्चय के अनुसार किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा में, “हितबद्ध व्यक्ति" पद से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके पास धारा 7क के अधीन अधिगृहीत परिसर के अधिग्रहण के ठीक पूर्व वास्तविक कब्जा था या जहां किसी व्यक्ति के पास ऐसा वास्तविक कब्जा नहीं था वहां ऐसे परिसर का स्वामी अभिप्रेत है ।
(2) जब कभी केन्द्रीय सरकार किसी यान, जलयान या जीवजन्तु का धारा 7क के अनुसरण में अधिग्रहण करती है तब उसके स्वामी को ऐसे प्रतिकर का संदाय किया जाएगा जिसकी रकम का अवधारण केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे यान, जलयान या जीवजन्तु को भाड़े पर लेने के लिए उस परिक्षेत्र में विद्यमान किराए या दरों के आधार पर किया जाएगा :
परन्तु जहां इस प्रकार अवधारित प्रतिकर की रकम से व्यथित ऐसे यान, जलयान या जीवजन्तु का स्वामी, केन्द्रीय सरकार को विहित समय के भीतर आवेदन करता है कि वह मामला मध्यस्थ को निर्देशित कर दिया जाए वहां संदत्त की जाने वाली प्रतिकर की रकम वह होगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त मध्यस्थ अवधारित करे :
परंतु यह और कि जहां अधिग्रहण के ठीक पूर्व यान या जलयान अवक्रय करार के आधार पर स्वामी से भिन्न किसी व्यक्ति के कब्जे में था वहां इस उपधारा के अधीन अधिग्रहण की बाबत संदेय कुल प्रतिकर के रूप में अवधारित रकम का, उस व्यक्ति और स्वामी के बीच ऐसी रीति से जिसके लिए वे सहमत हों, और ऐसी सहमति के अभाव में ऐसी रीति से जिसका केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त मध्यस्थ विनिश्चय करे प्रभाजन किया जाएगा ।
7ग. जानकारी अभिप्राप्त करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, धारा 7क के अधीन किसी संपत्ति का अधिग्रहण करने या धारा 7ख के अधीन प्रतिकर का अवधारण करने की दृष्टि से, किसी व्यक्ति से, आदेश द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह ऐसे प्राधिकारी को जो आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसी संपत्ति से संबंधित अपने कब्जे में की ऐसी जानकारी दे, जो इस प्रकार विनिर्दिष्ट की जाए ।
7घ. परिसर, आदि में प्रवेश करने और उनका निरीक्षण करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई व्यक्ति, यह अवधारण करने के प्रयोजन के लिए कि क्या किसी परिसर, किसी यान, जलयान या जीवजन्तु के संबंध में धारा 7क के अधीन कोई आदेश किया जाए और यदि किया जाए तो किस रीति से किया जाए अथवा इस दृष्टि से कि उस धारा के अधीन किए गए किसी आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ऐसे परिसर में प्रवेश कर सकेगा तथा ऐसे परिसर और उनमें के किसी यान, जलयान या जीवजन्तु का निरीक्षण कर सकेगा ।
7ङ. अधिगृहीत परिसर से बेदखली-(1) किसी अधिगृहीत परिसर पर धारा 7क के अधीन किए गए किसी आदेश के उल्लंघन में कब्जा किए रहने वाले किसी व्यक्ति को केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त सशक्त कोई अधिकारी उस परिसर से संक्षेपतः बेदखल कर सकेगा ।
(2) इस प्रकार सशक्त कोई अधिकारी, किसी ऐसी स्त्री को, जो लोगों के सामने नहीं आती है, युक्तियुक्त चेतावनी देने और हट जाने के लिए सुविधा देने के पश्चात्, किसी भवन के किसी ताले या चटखनी को हटा सकेगा या खोल सकेगा अथवा किसी दरवाजे को तोड़कर खोल सकेगा अथवा कोई अन्य कार्य कर सकेगा जो ऐसी बेदखली के लिए आवश्यक हो ।
7च. अधिग्रहण से परिसर की निर्मुक्ति-(1) जब धारा 7क के अधीन अधिगृहीत किसी परिसर को अधिग्रहण से निर्मुक्त किया जाना हो तब उसका कब्जा उस व्यक्ति को, जिससे कब्जा परिसर के अधिगृहीत किए जाने के समय लिया गया था, या यदि कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है तो उस व्यक्ति को, जिसके बारे में केन्द्रीय सरकार यह समझती है कि वह ऐसे परिसर का स्वामी है, परिदत्त किया जाएगा और कब्जे का ऐसा परिदान केन्द्रीय सरकार का ऐसे परिदान की बाबत सभी दायित्वों से पूर्ण उन्मोचन होगा, किन्तु उससे परिसर की बाबत किन्हीं ऐसे अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा जिन्हें कोई अन्य व्यक्ति उस व्यक्ति के विरुद्ध, जिसे परिसर का कब्जा इस प्रकार परिदत्त किया गया है, विधि की सम्यक् प्रक्रिया द्वारा प्रवर्तित कराने के लिए हकदार है ।
(2) जहां वह व्यक्ति, जिसे धारा 7क के अधीन अधिगृहीत किसी परिसर का कब्जा, उपधारा (1) के अधीन दिया जाना है, पाया नहीं जा सकता है या जिसका आसानी से अभिनिश्चय नहीं हो पाता या उसका ऐसा कोई अभिकर्ता या कोई अन्य व्यक्ति नहीं है जो उसकी ओर से परिदान प्रतिगृहीत करने के लिए सशक्त किया जाता है वहां केन्द्रीय सरकार यह घोषणा करते हुए कि ऐसे परिसर को अधिग्रहण से निर्मुक्त कर दिया गया है, एक सूचना ऐसे परिसर के किसी सहजदृश्य भाग पर लगवाएगी और उस सूचना को राजपत्र में प्रकाशित करेगी ।
(3) जब उपधारा (2) में निर्दिष्ट सूचना राजपत्र में प्रकाशित कर दी जाती है तब उस सूचना में विनिर्दिष्ट परिसर ऐसे प्रकाशन की तारीख से ही अधिग्रहण के अधीन नहीं रहेगा और उसके बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस व्यक्ति को परिदत्त कर दिया गया है जो उसके कब्जे का हकदार है, और केन्द्रीय सरकार ऐसे परिसर की बाबत उक्त तारीख के पश्चात् किसी अवधि के लिए प्रतिकर या अन्य दावेके लिए दायी नहीं होगी ।
7छ. अधिग्रहण की बाबत केन्द्रीय सरकार के कृत्यों का प्रत्यायोजन-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि धारा 7क से धारा 7च के किसी उपबंध द्वारा उस सरकार को प्रदत्त किसी शक्ति का प्रयोग या उस पर अधिरोपित किसी कर्तव्य का निर्वहन, ऐसी शर्तों के अधीन, यदि कोई हों, जो उस निदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे अधिकारी द्वारा किया जा सकेगा, जो विनिर्दिष्ट किया जाए ।
7ज. अधिग्रहण की बाबत किसी आदेश के उल्लंघन के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति धारा 7क या धारा 7ग के अधीन किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
8. प्रश्नों का पूछा जाना और उत्तर देने की बाध्यता-(1) जनगणना अधिकारी उस स्थानीय क्षेत्र की सीमा में, जिसके लिए नियुक्ति की गई है सभी व्यक्तियों से ऐसे सभी प्रश्न पूछ सकेगा जिन्हें पूछने के लिए, उसे [केन्द्रीय सरकार] द्वारा इस निमित्त जारी और राजपत्र में प्रकाशित किए गए अनुदेशों द्वारा निदिष्ट किया जाए ।
(2) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिससे उपधारा (1) के अधीन कोई प्रश्न पूछा जाता है, अपनी सर्वोत्तम जानकारी या विश्वास के अनुसार उस प्रश्न का उत्तर देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होगा :
परन्तु कोई भी व्यक्ति अपने परिवार के किसी स्त्री सदस्य का नाम बताने के लिए आबद्ध नहीं होगा, जो कोई भी स्त्री अपने पति या मृत पति का अथवा ऐसे किसी अन्य व्यक्ति का नाम बताने के लिए आबद्ध नहीं होगी जिसका नाम बताने के लिए वह रूढ़ि द्वारा निषिद्ध की गई हो ।
9. अधिभोगी प्रवेश करने और संख्यांक लगाने देना-किसी गृह, अहाते, जलयान या अन्य स्थान का अधिभोग करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, जनगणना अधिकारियों को उसमें ऐसा प्रवेश करने देने की अनुज्ञा देगा जिसकी वे जनगणना के प्रयोजनों के लिए अपेक्षा करें तथा जो देश की रूढ़ियों को ध्यान में रखते हुए युक्तियुक्त हों, और वह उनको ऐसे अक्षरों, चिह्नों या संख्यांकों से जो जनगणना के प्रयोजनों के लिए आवश्यक हों, उस स्थान को अंकित करने की, या उनको उस स्थान पर लगाने देने की अनुज्ञा देगा ।
10. अधिभोगी या प्रबन्धक द्वारा अनुसूची का भरा जाना-(1) ऐसे आदेशों के अधीन रहते हुए जैसे [जनगणना आयुक्तट इस निमित्त जारी करे, जनगणना अधिकारी, ऐसे स्थानीय क्षेत्र में जिसके लिए उसकी नियुक्ति की गई है, किसी निवासगृह में या किसी वाणिज्यिक अथवा औद्योगिक स्थापन के प्रबन्धक या किसी अधिकारी के पास एक अनुसूची, जनगणना करने के समय, यथास्थिति, ऐसे गृह या उसके किसी भाग में सहवासियों, या ऐसे प्रबन्धक या अधिकारी के अधीन नियोजित व्यक्तियों के बारे में, ऐसे गृह या उसके किसी विनिर्दिष्ट भाग के अधिभोगी द्वारा या ऐसे प्रबन्धक या अधिकारी द्वारा उसमें ऐसी विशिष्टियां, जैसी 2[जनगणना आयुक्त] निदिष्ट करे, भरने के प्रयोजन के लिए रख सकेगा या रखवा सकेगा ।
(2) जब ऐसी अनुसूची इस प्रकार रख दी जाए तब, यथास्थिति, उक्त अधिभोगी, प्रबन्धक या अधिकारी, पूर्वोक्त समय पर, यथास्थिति, ऐसे गृह या उसके किसी भाग के सहवासियों या उसके अधीन नियोजित व्यक्तियों के सम्बन्ध में, उसे अपनी सर्वोत्तम जानकारी या विश्वास के अनुसार भरेगा या भरवाएगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा, और जब उससे ऐसी अपेक्षा की जाए तब वह इस प्रकार भरी गई और हस्ताक्षरित अनुसूची, जनगणना अधिकारी को या ऐसे व्यक्ति को जिसे जनगणना अधिकारी निदिष्ट करे, परिदत्त करेगा ।
11. शास्तियां-(1) [(क) कोई ऐसा जनगणना अधिकारी या जनगणना करने में सहायता देने के लिए विधिपूर्वक अपेक्षित कोई ऐसा व्यक्ति, जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम द्वारा उस पर अधिरोपित किसी कर्तव्य का पालन करने से इंकार करेगा या कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी ऐसे कर्तव्य का पालन करने में अन्य व्यक्ति को प्रतिबंधित या बाधित करेगा, या
(कक) कोई ऐसा जनगणना अधिकारी या जनगणना करने में सहायता देने के लिए विधिपूर्वक अपेक्षित कोई ऐसा व्यक्ति, जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अनुसार उस पर अधिरोपित किसी कर्तव्य का पालन करने में युक्तियुक्त तत्परता बरतने में उपेक्षा करेगा, या कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी ऐसे कर्तव्य का पालन करने में या किसी ऐसे आदेश का पालन करने में अन्य व्यक्ति को प्रतिबाधित या बाधित करेगा, या]
(ख) कोई ऐसा जनगणना अधिकारी, जो साशय कोई संतापकारी या अनुचित प्रश्न करेगा या जानते हुए कोई मिथ्या विवरणी तैयार करेगा, या केन्द्रीय सरकार अथवा राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना, कोई ऐसी जानकारी प्रकट करेगा जो उसने जनगणना विवरणी से, या उसके प्रयोजन के लिए, प्राप्त की है, या
(ग) कोई ऐसा सार्टर, संकलप या जनगणना कर्मचारिवृन्द का अन्य सदस्य, जो किसी जनगणना दस्तावेज का अपसारण करेगा, उसे छिपाएगा, उसको नुकसान पहुंचाएगा या उसे नष्ट करेगा अथवा किसी जनगणना दस्तावेज को इस प्रकार व्यवहार में लाएगा जिससे जनगणना परिणामों के सारणीयन का मिथ्याकरण या ह्रास होना संभाव्य हो, या
[(गक) कोई स्थानीय प्राधिकारी, जो धारा 4क के अधीन किए गए किसी आदेश का पालन करने में असफल रहेगा, या];
(घ) कोई ऐसा व्यक्ति, जो जनगणना अधिकारी द्वारा उससे पूछे गए किसी ऐसे प्रश्न का, जिसका उत्तर देने के लिए वह धारा 8 द्वारा वैध रूप से आबद्ध है, साशय मिथ्या उत्तर देगा, या अपनी सर्वोत्तम जानकारी या विश्वास के अनुसार उत्तर देने से इंकार करेगा, या
(ङ) किसी गृह, अहाते, जलयान या अन्य स्थान का अधिभोग करने वाला कोई ऐसा व्यक्ति, जो जनगणना अधिकारी को उसमें ऐसा युक्तियुक्त प्रवेश करने देने से इन्कार करेगा जैसा कि वह धारा 9 द्वारा अनुज्ञा देने के लिए अपेक्षित है, या
(च) कोई ऐसा व्यक्ति, जो किन्हीं ऐसे अक्षरों, चिह्नों या संख्यांकों को, जिन्हें जनगणना के प्रयोजनों के लिए अंकित किया या लगाया गया है, हटाएगा, मिटाएगा, परिवर्तित करेगा, या उन्हें नुकसान पहुंचाएगा, या
(छ) कोई ऐसा व्यक्ति, जिससे धारा 10 के अधीन अनुसूची भरने की अपेक्षा की गई हो, जानते हुए और बिना पर्याप्त हेतुक के उस धारा के उपबन्धों का अनुपालन करने में असफल रहेगा, या उसके अधीन कोई मिथ्या विवरणी देगा, या
(ज) कोई ऐसा व्यक्ति, जो जनगणना कार्यालय में अतिचार करेगा,
जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा [और भाग (क), भाग (ख) या भाग (ग) के अधीन दोषसिद्धि की दशा में कारावास से भी, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा] ।
(2) जो कोई उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध का दुष्प्रेरण करेगा, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
[12. अभियोजनों के लिए अपेक्षित मंजूरी-दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 197 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस अधिनियम के अधीन कोई अभियोजन,
(क) ऐसे व्यक्ति की दशा में जो
(i) कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 3 में परिभाषित किसी ऐसी कम्पनी में नियोजित है या अभिकथित अपराध के किए जाने के समय नियोजित था, जिसमें समादत्त पूंजी का कम से कम इक्यावन प्रतिशत केन्द्रीय सरकार द्वारा या किसी ऐसी कम्पनी द्वारा धारित है, जो उस अधिनियम के अर्थ में उसकी समनुषंगी है ; या
(ii) किसी केन्द्रीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी ऐसे निगम या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा नियोजित है या अभिकथित अपराध के किए जाने के समय नियोजित था जो केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व और उसके नियंत्रण में है,
केन्द्रीय सरकार या उस सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना ; और
(ख) खण्ड (क) में निर्दिष्ट व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति की दशा में, राज्य सरकार की,
पूर्व मंजूरी से ही संस्थित किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।]
13. अन्य विधियों के प्रवर्तन का वर्जित न होना-इस अधिनियम की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह किसी व्यक्ति का, किसी ऐसे कार्य या लोप के लिए, जो इस अधिनियम के अधीन अपराध बनता है, किसी अन्य विधि के अधीन अभियोजन किए जाने से निवारित करती है :
परन्तु ऐसा कोई भी अभियोजन धारा 12 में निर्दिष्ट पूर्व मंजूरी के बिना संस्थित नहीं किया जाएगा ।
[13क. कतिपय अपराधों का संज्ञेय और संक्षेपतः विचारणीय होना-(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, कोई पुलिस अधिकारी या न्यायालय धारा 11 की उपधारा (1) के भाग (क) , भाग (ख) या भाग (ग) के अधीन किसी अपराध का संज्ञान, यथास्थिति, जनगणना कार्य निदेशक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी से सूचना प्राप्त होने पर या उसके द्वारा किए गए परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहीं ।
(2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी धारा 11 की उपधारा (1) के भाग (क), भाग (ख) या भाग (ग) के अधीन दंडनीय प्रत्येक अपराध का संक्षेपतः विचारण किया जा सकेगा ।]
14. अधिकारिता-[महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट] के न्यायालय से अवर कोई न्यायालय *** किसी ऐसे कार्य या लोप का, जो इस अधिनियम के अधीन अपराध बनता है, चाहे इस अधिनियम के अधीन या किसी अन्य विधि के अधीन, विचारण नहीं करेगा ।
15. जनगणना के अभिलेखों का निरीक्षण नहीं किया जा सकेगा और न वे साक्ष्य हमें ग्राह्य होंगे-किसी भी व्यक्ति को, जनगणना अधिकारी द्वारा उस हैसियत में अपने कर्तव्य के निर्वहन में तैयार की गई किसी पुस्तक, रजिस्टर या अभिलेख का, अथवा धारा 10 के अधीन परिदत्त किसी अनुसूची का, निरीक्षण करने का अधिकार नहीं होगा, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, किसी ऐसी पुस्तक, रजिस्टर, अभिलेख या अनुसूची में की कोई भी प्रविष्टि किसी ऐसे कार्य या लोप के लिए, जो इस अधिनियम के अधीन अपराध बनता है इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन किए गए अभियोजन से भिन्न किसी भी प्रकार की किसी सिविल कार्यवाही में अथवा किसी दाण्डिक कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में ग्राह्य नहीं होगी ।
[15क. जनगणना कर्मचारिवृन्द के सदस्यों के सेवा संबंधी हितों का संरक्षण-जनगणना कर्मचारिवृन्द का कोई सदस्य जनगणना कर्तव्य पर अपने होने के कारण सेवा में किसी निःशक्तता से ग्रस्त नहीं होगा और ऐसे जनगणना कर्तव्य पर उसके द्वारा बिताई गई अवधि के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उसके उधारदाता नियोजक के अधीन कर्तव्यकाल है और इस अधिनियम के अधीन किए गए किसी कर्तव्य से उसकी मूल सेवा में प्रोन्नति या अन्य उन्नति के अधिकार पर किसी भी रीति से प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
15ख. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही जनगणना आयुक्त या किसी जनगणना कार्य निदेशक या किसी जनगणना अधिकारी या जनगणना कर्मचारिवृन्द के किसी सदस्य के विरुद्ध नहीं होगी ।]
16. नगरपालिकाओं में जनगणना करने के ढंग के बारे में अन्य विधियों का अस्थायी निलंबन-किसी नगरपालिका में जिस ढंग से जनगणना की जानी है उसके सम्बन्ध में किसी अधिनियमिति या नियम में किसी बात के होते हुए भी, नगरपालिक प्राधिकारी, [जनगणना-कार्य निदेशक] से या ऐसे अन्य प्राधिकारी से जिसे राज्य सरकार इस निमित्त प्राधिकृत करे, परामर्श करके, जनगणना करने के लिए नियत किए गए समय पर, नगरपालिका की जनगणना पूर्णतः या भागतः इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन प्राधिकृत किसी ढंग से करवाएगा ।
17. सांख्यिकीय संक्षिप्तियां प्रदान करना- [धारा 15 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जनगणना आयुक्त या कोई 1[जनगणना-कार्य निदेशक] यदि वह उचित समझे तो, किसी स्थानीय प्राधिकरण या व्यक्ति के अनुरोध पर और उसके खर्चे पर (जो उसके द्वारा अवधारित किया जाएगा) ऐसी संक्षिप्तियां तैयार करवाएगा और उनका प्रदाय करवाएगा जिनमें ऐसी कोई सांख्यिकीय की जानकारी अन्तर्विष्ट हो जो, यथास्थिति, [भारत या किसी राज्य] से सम्बद्ध जनगणना विवरणियों से व्युत्पन्न हो सकती है तथा वह ऐसी जानकारी हो जो किसी प्रकाशित रिपोर्ट में अन्तर्विष्ट नहीं है और जिनका उसकी राय में उस प्राधिकरण या व्यक्ति द्वारा अपेक्षित किया जाना युक्तियुक्त है ।
[17क. अधिनियम के उपबन्धों का अन्य कार्यों तक विस्तार करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों का विस्तार, ऐसे निबंधनों और उपांतरों सहित, जो वह आवश्यक समझे पूर्व परीक्षणों, प्रारंभिक अध्ययनों, गृहों की गणना, जो जनसंख्या की गणना करने से पहले की जाती है और पश्चगणना जांच और परिगणन अध्ययन या अन्य सांख्यिकी सर्वेक्षण या किसी अन्य संक्रिया के संबंध में, जो जनगणना के प्रयोजन के लिए आवश्यक समझी जाए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, कर सकेगी ।]
18. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम [राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,] बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्रीय सरकार जनगणना अधिकारियों की तथा जनगणना अधिकारियों के कर्तव्यों में से किसी का पालन करने के लिए या जनगणना करने के सम्बन्ध में सहायता देने के लिए व्यक्तियों की नियुक्ति के सम्बन्ध में और ऐसे अधिकारियों और व्यक्तियों को जारी किए जाने वाले साधारण अनुदेशों के सम्बन्ध में उपबन्ध करने के लिए [और परिसर अथवा यान, जलयान या जीवजन्तु के अधिग्रहण के बारे में आदेशों की तामील की रीति और उस समय के संबंध में, जिसके भीतर धारा 7ख के अधीन अवधारित प्रतिकर की रकम से व्यथित कोई हितबद्ध व्यक्ति उसे यह आवेदन कर सकेगा कि वह मामला मध्यस्थ को निर्देशित कर दिया जाए, उपबन्ध करने के लिए] नियम बना सकेगी ।
[(2) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिर्वतन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
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