केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963
(1963 का अधिनियम संख्यांक 54)
[30 दिसम्बर, 1963]
प्रत्यक्ष करों के लिए और उत्पाद-शुल्क तथा सीमाशुल्क के लिए अलग-अलग राजस्व बोर्डों
के गठन का उपबन्ध करने तथा उक्त बोर्डों को शक्तियां प्रदान करने और उन
पर कर्तव्य अधिरोपित करने के प्रयोजनार्थ कुछ अधिनियमितियों
का संशोधन करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के चौदहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) यह अधिनियम केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 कहा जा सकेगा ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) बोर्ड" से धारा 3 के अधीन गठित केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड या केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड अभिप्रेत है;
(ख) सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू" से सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू ऐक्ट, 1924 (1924 का 4) के अधीन गठित सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू अभिप्रेत है;
(ग) प्रत्यक्ष कर" से अभिप्रेत है-
(1) निम्नलिखित के अधीन उद्ग्रहणीय कोई शुल्क या प्रभार्य कोई कर: -
(i) सम्पदा-शुल्क अधिनियम, 1953 (1953 का 34);
(ii) धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27);
(iii) व्यय-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 29);
(iv) दान-कर अधिनियम, 1958 (1958 का 18);
(v) आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43);
(vi) अधिलाभ-कर अधिनियम, 1963 (1963 का 14) ॥।;
[(vii) ब्याज-कर अधिनियम, 1974 (1974 का 45) ॥।;
[(viii) होटल आमदनी-कर अधिनियम, 1980 (1980 का 54) ॥।;
[(ix) व्यय-कर अधिनियम, 1987 (1987 का 35); और]
(2) कोई अन्य शुल्क या कर जिसे केन्द्रीय सरकार, उसकी प्रकृति और भार को ध्यान में रखते हुए, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, प्रत्यक्ष कर घोषित करे ।
3. प्रत्यक्ष करों और केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क तथा सीमाशुल्क के लिए अलग-अलग केन्द्रीय बोर्डों का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू के स्थान पर दो अलग-अलग राजस्व बोर्डों का गठन करेगी, जो केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड तथा केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड कहलाएंगे, और ऐसा प्रत्येक बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो उस बोर्ड को केन्द्रीय सरकार द्वारा अथवा किसी विधि द्वारा या उसके अधीन सौंपे जाएं ।
(2) प्रत्येक बोर्ड [सात से अनधिक] उतने व्यक्तियों से गठित होगा जितने नियुक्त करना केन्द्रीय सरकार ठीक समझे ।
4. बोर्ड की प्रक्रिया-(1) केन्द्रीय सरकार प्रत्येक बोर्ड द्वारा कार्य को विनियमित करने के प्रयोजनार्थ नियम बना सकेगी और ऐसे नियमों के अनुसार किया गया प्रत्येक आदेश या कार्य उस बोर्ड का, यथास्थिति, आदेश या कार्य समझा जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, उस समय जब वह सत्र में हो, कुल मिलाकर तीस दिन की कालावधि के लिए, जो एक सत्र में या दो क्रमवर्ती सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के, जिसमें वह ऐसे रखा गया हो, या ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई उपान्तर करने के लिए सहमत हो जाएं या दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात्, यथास्थिति, वह नियम ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई भी प्रभाव नहीं होगा, किन्तु इस प्रकार कि ऐसा कोई उपान्तर या बातिलकरण उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा ।
5. कुछ अधिनियमितियों का संशोधन-(1) सम्पदा-शुल्क अधिनियम, 1953 (1953 का 34), धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27), व्यय-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 29), दान-कर अधिनियम, 1958 (1958 का 18), आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) और अधिलाभ-कर अधिनियम, 1963 (1963 का 14) में जहां भी सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू ऐक्ट, 1924 (1924 का 4) के अधीन गठित सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू" या सेण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू" शब्द और अंक आए हैं उनके स्थान पर केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के अधीन गठित केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड" शब्द और अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
(2) केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और नमक अधिनियम, 1944 (1944 का 1) और सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) में जहां भी सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू ऐक्ट, 1924 (1924 का 4) के अधीन गठित सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू" या सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू" शब्द और अंक आए हैं, उनके स्थान पर केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के अधीन गठित केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड" शब्द और अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
(3) किसी अन्य अधिनियमिति द्वारा या उसके अधीन सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू को सौंपे गए कृत्यों का निर्वहन, -
(क) यदि ऐसे कृत्य प्रत्यक्ष करों से सम्बद्ध विषयों के संबंध में हों तो केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा किया जाएगा; तथा
(ख) यदि ऐसे कृत्य किसी अन्य विषय के संबंध में हों तो, जब तक वे केन्द्रीय सरकार द्वारा केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को न सौंपे जाएं, केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड द्वारा किया जाएगा ।
6. कुछ कार्यवाहियों का अन्तरण-(1) सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू के समक्ष इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले लम्बित प्रत्येक कार्यवाही, -
(क) यदि वह प्रत्यक्ष करों से संबद्ध कार्यवाही हो तो केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को अन्तरित हो जाएगी ; तथा
(ख) किसी अन्य दशा में केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड को अन्तरित हो जाएगी ।
(2) यदि यह प्रश्न उठे कि अमुक कार्यवाही केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को अंतरित हो गई है या केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड को, तो वह प्रश्न केन्द्रीय सरकार को निर्देशित किया जाएगा, जिसका उस पर विनिश्चय अंतिम होगा ।
(3) इस अधिनियम के प्रारम्भ के समय लंबित किसी विधिक कार्यवाही में जिसमें सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू पक्षकार है, -
(क) यदि वह प्रत्यक्ष करों से संबद्ध कार्यवाही है तो उस कार्यवाही में सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू के स्थान पर केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड प्रतिस्थापित कर दिया गया समझा जाएगा; तथा
(ख) यदि वह किसी अन्य विषय से संबद्ध कार्यवाही है, तो उस कार्यवाही में सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू के स्थान पर केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड प्रतिस्थापित कर दिया गया समझा जाएगा ।
7. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न हो तो केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबन्ध कर सकेगी जो इस अधिनियम के प्रयोजनों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों ।
(2) उपधारा (1) में अधीन कोई आदेश इस प्रकार किया जा सकेगा कि उसका प्रभाव किसी ऐसी तारीख से भूतलक्षी हो जो इस अधिनियम के प्रारम्भ होने की तारीख से पूर्व की न हो ।
8. निरसन और व्यावृत्ति-(1) सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू ऐक्ट, 1924 (1924 का 4) एतद्द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट कोई भी बात सैण्ट्रल बोर्ड आफ रेवेन्यू द्वारा किसी विधि के अधीन की गई किसी नियुक्ति, निर्धारण, आदेश (जिसके अन्तर्गत न्यायिककल्प आदेश भी है) या बनाए गए नियम अथवा दी गई छूट, अनुमोदन या मान्यता अथवा जारी की गई किसी सूचना, अधिसूचना, निदेश या अनुदेश, अथवा उद्गृहीत किए गए किसी शुल्क, अथवा अधिरोपित की गई किसी शास्ति या जुर्माने अथवा न्यायनिर्णीत किए गए किसी अधिहरण, अथवा विहित किए गए किसी प्ररूप, अथवा की गई किसी बात या कार्रवाई पर प्रभाव नहीं डालेगी और ऐसी कोई नियुक्ति, निर्धारण, आदेश, नियम, छूट, अनुमोदन, मान्यता, सूचना, अधिसूचना, निदेश, अनुदेश, शुल्क, शास्ति, जुर्माना, अधिहरण, प्ररूप, बात या कार्रवाई, यथास्थिति, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड या केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड द्वारा की गई, बनाया गया, दी गई, जारी की गई, उद्गृहीत की गई, अधिरोपित की गई, न्यायनिर्णीत की गई या विहित की गई समझी जाएगी और तब तक प्रवृत्त बनी रहेगी जब तक वह संबंधित बोर्ड द्वारा पुनरीक्षित, प्रत्याहृत या अतिष्ठित न कर दी जाए ।
------------

