यदि उच्च न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय में लंबित किसी मामले में इस संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का कोई सारवान् प्रश्न अंतर्वलित है जिसका अवधारण मामले के निपटारे के लिए आवश्यक है तो वह 6*** उस मामले को अपने पास मंगा लेगा और--
(क) मामले को स्वयं निपटा सकेगा, या
(ख) उक्त विधि के प्रश्न का अवधारण कर सकेगा और उस मामले को ऐसे प्रश्न पर निर्णय की प्रतिलिपि सहित उस न्यायालय को, जिससे मामला इस प्रकार मँगा लिया गया है, लौटा सकेगा और उक्त न्यायालय उसके प्राप्त होने पर उस मामले को ऐसे निर्णय के अनुरूप निपटाने के लिए आगे कार्यवाही करेगा।
1 संविधान (चवालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 30 द्वारा (1 -8-1979 से), खंड (7) को खंड (4) के रूप में पुर्नसंख्याकित किया गया।
2 संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 39 द्वारा (1-2-1977 से)
अंतःस्थापित।
3 खंड (1) संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 40 द्वारा (1-2-1977 से) और तत्पश्चात् संविधान (चवालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 31 द्वारा (20-6-1979 से ) प्रतिस्थापित होकर उपरोक्त रूप में आया।
4 संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 40 द्वारा (1-2-1977 से ) खंड (5) अंतःस्थापित किया गया और उसका संविधान (चवालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 31 द्वारा (20-6-1979 से) लोप किया गया।
5 संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 41 द्वारा (1-2-1977 से) '' तो वह उस मामले को अपने पास मँगा लेगा तथा --'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
6 संविधान (तैंतालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1977 की धारा 9 द्वारा (13-4-1978 से) '' अनुच्छेद 131क के उपबंधों के अधीन रहते हुए'' शब्दों, अंकों और अक्षर का लोप किया गया।

