परिदान, NI Act, Section 46 ( NI Act, Section 46. Delivery )
परिदान -- वचन-पत्र विनिमय -पत्र या चेक की रचना, या उसका प्रतिहण या पृष्ठांकन, वास्तविक या आन्वयिक, परिदान द्वारा पूरा हो जाता है ।
इसलिए कि जहाँ तक उन पक्षकारों के बीच, जो अत्र्यवहित सम्बन्ध में स्थित हैं. परदान प्रभावी हो वह परिदान उस लिखत को स्वयं रचने, प्रतिगृहीत करने या पृष्ठांकित करने वाले पक्षकार के द्वारा या उसके द्वारा तन्नमित्त प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा किया जाएगा ।
ऐसे पक्षकारों के और लिखत के ऐसे धारक के बीच, जो सम्यक्-अनुक्रम-धारक नहीं है, यह दर्शित किया जा सकेगा कि लिखत सशर्त या विशेष प्रयोजन के लिए ही न कि उसमें की संपनि को आत्यन्तिक्तः अन्तरित करने के प्रयोजन के लिए, परिदत्त की गई थी ।
वाहक को देय वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक उसके परिदान द्वारा परक्राम्य है ।
आदेशानुसार देय वचनपत्र, विनिमय-पत्रे या चेक, धारक द्वारा उसके पृष्ठांकन और परिदान द्वारा पक्राम्य हैं.