सम्यकु-अनुक्रम” में संदाय से लिखत पर कब्जा रखने वाले व्यक्ति को उस लिखत के प्रकट शब्दों के अनुसार सद्भावपूर्वक और उपेक्षा किए बिना ऐसी परिस्थितियों में किया गया संदाय अभिप्रेत है जिससे यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार नहीं पैदा होता कि वह उसमें वर्णित रकम का संदाय पाने का हकदार नहीं है ।