Friday, 24, Apr, 2026
 
 
 
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धारा 377 आईपीसी- प्रकॄति विरुद्ध अपराध , IPC Section 377 ( IPC Section 377. Unnatural offences [Declared Unconstitutional by Supreme Court] )


 

भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के अनुसार,

जो भी कोई किसी पुरुष, स्त्री या जीवजन्तु के साथ प्रकॄति की व्यवस्था के विरुद्ध स्वेच्छा पूर्वक संभोग करेगा तो उसे आजीवन कारावास या किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।
 
स्पष्टीकरण--इस धारा में वर्णित अपराध के लिए आवश्यक संभोग संस्थापित करने के लिए प्रवेशन पर्याप्त है।
 
लागू अपराध
प्रकॄति विरुद्ध अपराध अपराध जैसे अप्राकृतिक रूप से संभोग करना।
सजा - आजीवन कारावास या दस वर्ष कारावास + आर्थिक दण्ड।


यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मेजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

यह समझौता करने योग्य नहीं है।

अपराध सजा संज्ञेय जमानत विचारणीय
अप्राकृतिक अपराध आजीवन कारावास या 10 साल + जुर्माना संज्ञेय गैर जमानतीय प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट

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