पीड़ित प्रतिकर स्कीम-(1) प्रत्येक राज्य सरकार केंद्रीय सरकार के सहयोग से ऐसे पीड़ित या उसके आश्रितों को, जिन्हें अपराध के परिणामस्वरूप हानि या क्षति हुई है और जिन्हें पुनर्वास की आवश्यकता है, प्रतिकर के प्रयोजन के लिए निधियां उपलब्ध कराने के लिए एक स्कीम तैयार करेगी ।
(2) जब कभी न्यायालय द्वारा प्रतिकर के लिए सिफारिश की जाती है, तब, यथास्थिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उपधारा (1) में निर्दिष्ट स्कीम के अधीन दिए जाने वाले प्रतिकर की मात्रा का विनिश्चय करेगा ।
(3) यदि विचारण न्यायालय का, विचारण की समाप्ति पर, यह समाधान हो जाता है कि धारा 357 के अधीन अधिनिर्णीत प्रतिकर ऐसे पुनर्वास के लिए पर्याप्त नहीं है या जहां मामले दोषमुक्ति या उन्मोचन में समाप्त होते हैं और पीड़ित को पुनर्वासित करना है, वहां वह प्रतिकर के लिए सिफारिश कर सकेगा ।
(4) जहां अपराधी का पता नहीं लग पाता है या उसकी पहचान नहीं हो पाती है किंतु पीड़ित की पहचान हो जाती है और जहां कोई विचारण नहीं होता है, वहां पीड़ित या उसके आश्रित प्रतिकर दिए जाने के लिए राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवेदन कर सकेंगे ।
(5) उपधारा (4) के अधीन ऐसी सिफारिशें या आवेदन प्राप्त होने पर, राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सम्यक् जांच करने के पश्चात्, दो मास के भीतर जांच पूरी करके पर्याप्त प्रतिकर अधिनिर्णीत करेगा ।
(6) यथास्थिति, राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पीड़ित की यातना को कम करने के लिए, पुलिस थाने के भारसाधक से अन्यून पंक्ति के पुलिस अधिकारी या संबद्ध क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के प्रमाणपत्र पर प्राथमिक चिकित्सा सुविधा या चिकित्सा प्रसुविधाएं उपलब्ध कराने या कोई अन्य अंतरिम अनुतोष दिलाने, जिसे समुचित प्राधिकरण ठीक समझे, के लिए तुरंत आदेश कर सकेगा ।

