भारतीय दंड संहिता की धारा 168 के अनुसार, जो कोई लोक सेवक होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते इस बात के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए कि वह व्यापार में न लगे, व्यापार में लगेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
1 2000 के अधिनियम सं0 21 की धारा 91 और पहली अनुसूची द्वारा (17-10-2000 से) कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । भारतीय दंड संहिता, 1860 31
| अपराध | सजा | संज्ञेय | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| लोक सेवक अवैध रूप से व्यापार में संलग्न है | 1 वर्ष या जुर्माना या दोनों के लिए साधारण कारावास | गैर - संज्ञेय | जमानतीय | प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट |

