आवश्यक सेवा (असम) अधिनियम, 1980
(1980 का अधिनियम संख्यांक 41)
[19 जुलाई, 1980]
असम में कुछ आवश्यक सेवाएं तथा
प्रसामान्य सामुदायिक जीवन
बनाए रखने का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के इकतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम आवश्यक सेवा (असम) अधिनियम, 1980 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण असम राज्य पर है ।
2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) समुचित सरकार" से अभिप्रेत है,-
(i) संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 1 में प्रगणित प्रविष्टियों में से किसी से संबंधित विषयों से सम्बद्ध किसी सेवा के संबंध में, केन्द्रीय सरकार;
(ii) संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 2 में प्रगणित प्रविष्टियों में से किसी से संबंधित विषयों से सम्बद्ध किसी सेवा के संबंध में, असम राज्य सरकार; और
(iii) संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 3 में प्रगणित प्रविष्टियों में से किसी से संबंधित विषयों से सम्बद्ध किसी सेवा के संबंध में, केन्द्रीय सरकार और असम राज्य सरकार;
(ख) आवश्यक सेवा" के अभिप्रेत है,-
(i) कोई डाक, ट्रेलीग्राफ या टेलीफोन सेवा;
(ii) कोई रेल सेवा या भू-मार्ग, जल-मार्ग या वायु-मार्ग द्वारा यात्रियों या माल को ले जाने के लिए कोई अन्य परिवहन सेवा;
(iii) माल को लादने और उतारने से सम्बद्ध कोई सेवा;
(iv) विमान-क्षेत्रों को चालू रखने या बनाए रखने से अथवा वायुयान को चलाने, उसकी मरम्मत करने या उसे बनाए रखने से सम्बद्ध कोई सेवा;
(v) माल या यात्रियों की सीमाशुल्क से निकासी से या तस्करी के निवारण से सम्बद्ध कोई सेवा;
(vi) संघ के सशस्त्र बलों के किसी स्थापन में या उससे संबद्ध कोई सेवा, या रक्षा से सम्बद्ध किन्हीं अन्य स्थापनों या प्रतिष्ठानों की कोई सेवा;
(vii) किसी औद्योगिक स्थापन या उपक्रम के किसी अनुभाग में कोई सेवा जिसके कार्यकरण पर ऐसे स्थापन या उपक्रम या उसमें नियोजित कर्मचारियों की सुरक्षा निर्भर है;
(viii) सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी ऐसे उपक्रम के कार्यकरण में या उससे सम्बद्ध, कोई सेवा, जो खाद्यान्न के क्रय, उपापन, भंडारण, प्रदाय या वितरण के कारबार में लगा उपक्रम है;
(ix) सार्वजनिक सफाई या स्वच्छता प्रणाली में कोई सेवा;
(x) बैंककारी से संसक्त या सम्बद्ध कोई सेवा;
(xi) ऐसे किसी स्थापन या उपक्रम में कोई सेवा, जो कोयले के उत्पादन, प्रदाय और वितरण का कारबार करता है;
(xii) किसी तेल क्षेत्र या परिष्करणी या ऐसे किसी स्थापन या उपक्रम में कोई सेवा, जो पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, प्रदाय या वितरण का कारबार करता है;
(xiii) संघ या असम राज्य के कार्यकलापों से संसक्त ऐसी कोई सेवा जो पूर्वगामी किसी उपखंड में विनिर्दिष्ट नहीं की गई है;
(xiv) ऐसी कोई अन्य सेवा जो ऐसे विषयों से संसक्त है जिनके बारे में विधि बनाने की शक्ति संसद् या असम राज्य की विधान सभा को प्राप्त है और जिसे, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या असम सरकार, यह राय होने पर कि उसमें हड़ताल किसी लोकोपयोगी सेवा को बनाए रखने पर या लोकसुरक्षा पर या सामुदायिक जीवन के लिए आवश्यक प्रदाय और सेवाओं को बनाए रखने पर, प्रतिकूल प्रभाव डालेगी या उसके परिणामस्वरूप समुदाय को बड़ी कठिनाई होगी, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक सेवा घोषित करे;
(ग) हड़ताल" से किसी आवश्यक सेवा में नियोजित व्यक्तियों के निकाय द्वारा मिलकर कार्य बन्द कर दिया जाना या कितने ही ऐसे व्यक्तियों का, जो इस प्रकार नियोजित हैं या नियोजित रहे हैं, कार्य करते रहने से या नियोजन प्रतिगृहीत करने से सम्मिलित रूप से इंकार करना या सामान्य मति से इंकार करना, अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी हैं,-
(i) जहां अतिकाल कार्य किसी आवश्यक सेवा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, वहां अतिकाल कार्य करने से इंकार करना;
(ii) ऐसा कोई अन्य आचरण, जिसके परिणामस्वरूप किसी आवश्यक सेवा में काम का बन्द हो जाना या उसकी गति पर्याप्त रूप में मंद हो जाना संभाव्य है या हो जाती है ।
(2) उपधारा (1) के खंड (ख) के उपखंड (xiv) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, जारी किए जाने के पश्चात् तुरन्त संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो और यदि वह सत्र में न हो तो उस सदन के आगामी सत्र के प्रारंभ के प्रथम दिन रखी जाएगी और ऐसी अधिसूचना, यथास्थिति, इस प्रकार रखे जाने की तारीख से या संसद् के पुनः समवेत होने से चालीस दिन के अवसान पर, जब तक कि उस अधिसूचना के जारी किए जाने का अनुमोदन करने वाला संकल्प संसद् के दोनों सदनों द्वारा उस अवधि के अवसान के पूर्व पारित न कर दिया जाए प्रवर्तन में नहीं रह जाएगी ।
स्पष्टीकरण-जहां संसद् के सदन भिन्न-भिन्न तारीखों को पुनः समवेत होने के लिए आहूत किए जाएं, वहां चालीस दिन की अवधि की गणना उन तारीखों में से पश्चात्वर्ती तारीख से की जाएगी ।
(3) इस अधिनियम में किसी ऐसी विधि के, जो असम राज्य के किसी भी क्षेत्र में प्रवृत्त नहीं है, और ऐसी विधि के अधीन किसी प्राधिकारी के प्रति निर्देश का उस क्षेत्र के संबंध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि और ऐसी तत्स्थानी विधि के अधीन तत्स्थानी प्राधिकारी के प्रति निर्देश है ।
3. कुछ नियोजनों में हड़ताल का प्रतिषेध करने की शक्ति-(1) यदि समुचित सरकार का समाधान हो जाता है कि ऐसा करना लोकहित में आवश्यक या समीचीन है तो वह साधारण या विशेष आदेश द्वारा, असम राज्य में ऐसी किसी भी आवश्यक सेवा में, जो आदेश में विनिर्दिष्ट हो, हड़तालों को प्रतिषिद्ध कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया आदेश ऐसी रीति से प्रकाशित किया जाएगा जिसे समुचित सरकार आदेश द्वारा प्रभावित होने वाले व्यक्तियों की जानकारी में उसे लाने के लिए, सर्वाधिक ठीक समझे ।
(3) उपधारा (1) के अधीन किया गया आदेश केवल छह मास तक प्रवृत्त रहेगा, किन्तु यदि समुचित सरकार का समाधान हो जाता है कि ऐसा करना लोकहित में आवश्यक और समीचीन है तो वह उस आदेश को, वैसे ही आदेश द्वारा, छह मास से अनधिक की किसी अवधि के लिए बढ़ा सकेगी ।
(4) उपधारा (1) के अधीन आदेश जारी किए जाने पर,-
(क) ऐसी किसी आवश्यक सेवा में, जिसके संबंध में वह आदेश है, नियोजित कोई व्यक्ति न तो हड़ताल पर जाएगा और न हड़ताल पर रहेगा;
(ख) यदि ऐसी किसी सेवा में नियोजित व्यक्तियों ने, ऐसे आदेश के जारी किए जाने के पूर्व या पश्चात्, कोई हड़ताल घोषित या प्रारंभ की है तो वह अवैध होगी ।
4. अवैध हड़तालों में भाग लेने वाले कर्मचारियों की पदच्युति-यदि कोई व्यक्ति ऐसी कोई हड़ताल, जो इस अधिनियम के अधीन अवैध है, प्रारंभ करेगा अथवा ऐसी हड़ताल पर जाएगा या रहेगा या उसमें अन्यथा भाग लेगा तो वह उन्हीं उपबंधों के अनुसार अनुशासनिक कार्यवाही के लिए (जिसके अन्तर्गत पदच्युति भी है) दायी होगा जो उसके नियोजन के संबंध में उसे लागू सेवा की शर्तों और निबंधनों के अधीन किसी अन्य आधार पर ऐसी अनुशासनिक कार्यवाही (जिसके अन्तर्गत पदच्युति भी है) करने के प्रयोजन के लिए लागू हैं ।
5. अवैध हड़तालों के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति ऐसी कोई हड़ताल, जो इस अधिनियम के अधीन अवैध है, प्रारम्भ करेगा या ऐसी हड़ताल पर जाएगा या रहेगा या उसमें अन्यथा भाग लेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दंडनीय होगा ।
6. उकसाने आदि के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति ऐसी हड़ताल के लिए, जो इस अधिनियम के अधीन अवैध है, अन्य व्यक्तियों को उकसाएगा या उसमें भाग लेने के लिए उन्हें उद्दीप्त करेगा या उसे अग्रसर करने में अन्यथा कार्य करेगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डनीय होगा ।
7. अवैध हड़तालों को वित्तीय सहायता देने के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति ऐसी हड़ताल को, जो इस अधिनियम के अधीन अवैध है, जानते हुए अग्रसर करने में या उसके समर्थन में धन का व्यय या प्रदाय करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा ।
8. बिना वारण्ट गिरफ्तार करने की शक्ति-दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई पुलिस अधिकारी किसी ऐसे व्यक्ति को जिसके विरुद्ध युक्तियुक्त रूप से यह संदेह हो कि उसने इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया है बिना वारंट गिरफ्तार कर सकेगा ।
9. अपराधों का संक्षिप्त विचारण-दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन सभी अपराधों का संक्षिप्त विचारण प्रथम वर्ग का कोई ऐसा न्यायिक मजिस्ट्रेट करेगा, जिसे समुचित सरकार इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त करे और उक्त संहिता की धारा 262 से धारा 265 तक (जिसके अन्तर्गत दोनों सम्मिलित हैं) के उपबंध ऐसे विचारण को यावत्शक्य लागू होंगे :
परन्तु इस धारा के अधीन संक्षिप्त विचारण में किसी अपराध के लिए दोषसिद्धि के मामले में मजिस्ट्रेट के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह किसी भी ऐसी अवधि के लिए कारावास का दंडादेश पारित करे जिसके लिए इस अधिनियम के अधीन ऐसा अपराध दंडनीय है ।
10. अधिनियम का अन्य विधियों पर अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम के और उसके अधीन जारी किए गए किसी आदेश के उपबंध, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) में या उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात से अंसगत होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
11. निरसन और व्यावृत्ति-(1) आवश्यक सेवाएं (असम) अध्यादेश, 1980 (1980 का 2) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई भी बात या कार्रवाई इस अधिनियम के अधीन वैसे ही की गई समझी जाएगी मानो यह अधिनियम 6 अप्रैल, 1980 को प्रवृत्त हो गया था ।
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