भविष्य निधि अधिनियम, 1925
(1925 का अधिनियम संख्यांक 19)1
[27 अगस्त, 1925]
सरकारी भविष्य निधियों और अन्य भविष्य निधियों से
संबंधित विधि संशोधित और समेकित
करने के लिए
अधिनियम
सरकारी भविष्य निधियों और अन्य भविष्य निधियों से संबंधित विधि को संशोधित और समेकित करना समीचीन है;
अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है: -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भविष्य निधि अधिनियम, 1925 है ।
(2) इसका विस्तार 2[जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय 3॥। सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख4 को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं - इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ में विरुद्ध न हो, -
(क) “अनिवार्य” निक्षेप से किसी भविष्य निधि में ऐसा अभिदाय या निक्षेप अभिप्रेत है जो उस निधि के नियमों के अधीन, जीवन बीमा की किसी पालिसी के संबंध में प्रीमियम के संदाय 5[या किसी कुटुम्ब पेंशन निधि के संबंध में अभिदाय या प्रीमियम के संदाय] के प्रयोजन के अन्यथा, मांग पर तब तक प्रतिसंदेय नहीं है जब तक कोई विनिर्दिष्ट घटना न हो जाए और कोई अंशदान 6॥। तथा कोई ऐसा ब्याज या वृद्धि जो किसी ऐसे अभिदाय, निक्षेप या अंशदान पर निधि के नियमों के अधीन प्रोद्भूत हो जाती है और कोई ऐसा अभिदाय, निक्षेप, अंशदान, ब्याज या वृद्धि भी जो ऐसी किसी घटना होने के पश्चात् अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता के खाते में बाकी बच जाती है, इसके अंतर्गत है;
(ख) “अंशदान” से कोई ऐसी रकम अभिप्रेत है जो किसी भविष्य निधि में 7[उस निधि का प्रबन्ध करने वाले किसी प्राधिकारी] द्वारा उस निधि में 8[किसी खाते में जमा अभिदाय, या निक्षेप या अतिशेष] के परिवर्धन के तौर पर जमा की गई है; और “अंशदायी भविष्य निधि” से ऐसी भविष्य निधि अभिप्रेत है जिसके नियम अंशदानों को जमा करने के लिए उपबंध करते हैं;
- इस अधिनियम को 1936 के विनियम सं० 4 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा खोण्डमाल जिले में, 1936 के विनियम सं० 5 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा आंगुल जिले में तथा 1941 के मध्य प्रान्त तथा बरार अधिनियम सं० 4 द्वारा आंशिक रूप में बरार में भी प्रवृत्त घोषित किया गया है; इसका आंशिक रूप में संशोधन उत्तर प्रदेश राज्य में 1953 के उत्तर प्रदेश अधिनियम सं० 19 द्वारा किया गया है ।
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- इस अधिनियम का 1962 के विनियम सं० 12 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा गोवा, दमण और दीव पर; 1963 के विनियम सं० 7 की धारा 3 और अनुसूची 1 द्वारा (1-7-1963 से) पांडिचेरी पर; 1963 के विनियम सं० 6 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा (1-10-1965 से) दादरा और नागर हवेली पर और 1965 के विनियम सं० 8 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा (1-1-1967 से) लक्षद्वीप, मिनीकाय और अमीनदीवी द्वीप समूह पर विस्तार किया गया ।
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- 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा भाग ख राज्यों को छोड़कर के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- भारतीय स्वतन्त्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा ब्रिटिश बलूचिस्तान सहित शब्दों का लोप किया गया ।
- 1 अप्रैल, 1926; देखिए भारत का राजपत्र, 1925 भाग 1, पृ० 1182 ।
- 1930 के अधिनियम सं० 1 की धारा 2 द्वारा अंतःस्थापित ।
- 1930 के अधिनियम सं० 1 की धारा 2 द्वारा ऐसे किसी अभिदाय या निक्षेप की बाबत जमा शब्दों का लोप किया गया ।
- 1925 के अधिनियम सं० 28 की धारा 2 द्वारा प्राधिकार जिसके अधीन निधि गठित की गई है के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1930 के अधिनियम सं० 1 की धारा 2 द्वारा या, अभिदाय या निक्षेप की बाबत से अन्यथा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
(ग) “आश्रित” से किसी भविष्य निधि में अभिदाय या निक्षेप करने वाले किसी मृत व्यक्ति के निम्नलिखित नातेदार अभिप्रेत हैं, अर्थात् पत्नी, पति, माता-पिता, संतान, अवयस्क भाई, अविवाहित बहिन और मृत पुत्र की विधवा तथा संतान, और जहां अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता के माता-पिता में से कोई भी जीवित नहीं है वहां पितामह-पितामही;
(घ) “सरकारी भविष्य निधि” से ऐसी कोई भविष्य निधि अभिप्रेत है जो रेल भविष्य निधि से भिन्न है और जो 1[सेक्रेटेरी आफ स्टेट, केन्द्रीय सरकार, क्राउन रिप्रेजैंटेटिव या किसी राज्य सरकार] के प्राधिकार से, उस 2[सरकार की सेवा में व्यक्तियों] के अथवा 3[शैक्षिक संस्थाओं में नियोजित अथवा केवल शैक्षिक प्रयोजनों के लिए विद्यमान निकायों द्वारा नियोजित] किसी वर्ग के व्यक्तियों या किन्हीं वर्गों के व्यक्तियों के लिए बनाई गई है, 4[तथा इस अधिनियम में सरकार के प्रति निर्देशों का तदनुसार अर्थ किया जाएगा];
(ङ) “भविष्य निधि” से ऐसी निधि अभिप्रेत है जिसमें किसी वर्ग या किन्हीं वर्गों के कर्मचारियों के अभिदाय या निक्षेप प्राप्त किए जाते हैं और उनके पृथक् खातों में रखे जाते हैं, और कोई अंशदान तथा कोई ऐसा ब्याज या वृद्धि जो ऐसे 5॥। अभिदाय, निक्षेप या अंशदान पर निधि के नियमों के अधीन प्रोद्भूत होती है इसके अंतर्गत है;
6[(च) रेल प्रशासन से अभिप्रेत है
(त्) 7[भारत के किसी भाग में] या तो 8[यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेन्] के किसी विशेष अधिनियम या किसी भारतीय विधि के अधीन अथवा सरकार के साथ की गई किसी संविदा के अधीन किसी रेल या ट्राम का प्रशासन करने वाले कोई कम्पनी, या
(त्त्) 9[केन्द्रीय सरकार] द्वारा या किसी राज्य सरकार द्वारा प्रशासित किसी रेल या ट्राम का प्रबंधक,
और उपखंड (त्त्) में निर्दिष्ट किसी दशा में, यथास्थिति, 5[केन्द्रीय सरकार] या वह राज्य सरकार इसके अतंर्गत है;]
(छ) “रेल भविष्य निधि” से किसी रेल प्रशासन के प्राधिकार से उसके किसी वर्ग या किन्हीं वर्गों के कर्मचारियों के लिए बनाई गई भविष्य निधि अभिप्रेत है ।
3. अनिवार्य निक्षेप का संरक्षण-(1) किसी सरकारी भविष्य निधि या रेल भविष्य निधि का कोई अनिवार्य निक्षेप किसी भी प्रकार से समनुदेशित या भारित नहीं किया जा सकेगा और अभिदायकर्ता अथवा निक्षेपकर्ता द्वारा उपगत किसी ऋण या दायित्व के संबंध में किसी सिविल, राजस्व या दाण्डिक न्यायालय की किसी डिक्री या आदेश के अधीन कुर्क नहीं किया जा सकेगा तथा न तो कोई शासकीय समनुदेशिती और न कोई रिसीवर ही, जो प्रांतीय दिवाला अधिनियम, 1920 (1920 का 5) के अधीन नियुक्त किया गया हो, किसी ऐसे अनिवार्य निक्षेप का हकदार होगा और न उसका उस पर कोई दावा ही होगा ।
(2) किसी ऐसी निधि में किसी अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता के खाते में उसकी मृत्यु के समय जमा कोई राशि, जो निधि के नियमों के अधीन उस अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता के किसी आश्रित को अथवा ऐसे व्यक्ति को संदेय है जो इस निमित्त संदाय प्राप्त करने के लिए विधि द्वारा प्राधिकृत किया जाए, इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत किसी कटौती के अधीन रहते हुए और उस दशा को छोड़कर जब आश्रित अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता की विधवा या संतान है, इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व किए गए किसी समनुदेशन के अधीन, किसी समनुदेशिती के अधिकारों के भी अधीन रहते हुए, आश्रित में निहित होगी और मृत
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा सरकार के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1942 के अधिनियम सं० 25 की धारा 3 और अनुसूची 2 द्वारा इसके कर्मचारी के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1927 के अधिनियम सं० 7 की धारा 2 द्वारा शिक्षा संस्थाओं में शिक्षकों के लिए के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा अंतःस्थापित ।
- 1930 के अधिनियम सं० 1 की धारा 2 द्वारा ऐसे अभिदायों या निक्षेपों की बाबत जमा शब्दों का लोप किया गया ।
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा मूल खण्ड (च) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा भाग क राज्य या भाग ग राज्य के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम और अध्यादेश अनुकूलन) आदेश 1948 द्वारा संघीय रेल प्राधिकरण के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
व्यक्ति द्वारा उपगत अथवा उस अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता की मृत्यु से पूर्व आश्रित द्वारा उपगत किसी ऋण या अन्य दायित्व से, यथापूर्वोक्त अधीन रहते हुए मुक्त होगी ।
4. प्रतिसंदायों के बारे में उपबंध-(1) जब किसी सरकारी भविष्य निधि या रेल भविष्य निधि के नियमों के अधीन किसी अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता के खाते में जमा राशि या उसका अतिशेष इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत कोई कटौती करने के पश्चात् संदेय हो गया है तब वह अधिकारी, जिसका कर्तव्य उसका संदाय करना है, यथास्थिति, उस राशि या अतिशेष का अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता को संदाय करेगा अथवा यदि उसकी मृत्यु हो गई तो-
(क) यदि वह राशि या अतिशेष अथवा कोई भाग धारा 3 के उपबंधों के अधीन किसी आश्रित में निहित है तो उसका संदाय उस आश्रित को या ऐसे व्यक्ति को करेगा जो उसके निमित्त संदाय प्राप्त करने के लिए विधि द्वारा प्राधिकृत है; या
(ख) यदि सम्पूर्ण राशि या अतिशेष पांच हजार रुपए से अधिक नहीं है तो उसका या उसके किसी भाग का संदाय, जो खंड (क) के अधीन संदेय नहीं है, निधि के नियमों के अधीन उसे प्राप्त करने के लिए नामनिर्देशित किसी व्यक्ति को अथवा यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार नामनिर्देशित नहीं है तो किसी ऐसे व्यक्ति को करेगा जो उसे प्राप्त करने के लिए अन्यथा उसको हकदार प्रतीत हो; या
(ग) यदि ऐसी राशि या अतिशेष या उसका कोई भाग खण्ड (क) या खंड (ख) के अधीन किसी व्यक्ति को संदाय नहीं है, तो उसका संदाय-
(त्) निधि के नियमों के अधीन उसे प्राप्त करने के लिए नामनिर्देशित किसी व्यक्ति को, ऐसे व्यक्ति द्वारा मृत व्यक्ति की सम्पदा का प्रबंध उसे देना साक्ष्यित करने वाला प्रोबेट या प्रशासन-पत्र अथवा उत्तराधिकार प्रमाणपत्र अधिनियम, 18891 के अधीन या 1827 के मुम्बई विनियम 8 के अधीन दिया गया प्रमाणपत्र, जो उसके धारक को ऐसी राशि, अतिशेष या भाग का संदाय प्राप्त करने का हकदार बनाता हो, पेश किए जाने पर करेगा, या
(त्त्) यदि कोई नामनिर्देशित व्यक्ति नहीं है तो किसी ऐसे व्यक्ति को करेगा जो ऐसा प्रोबेट, प्रशासन-पत्र या प्रमाणपत्र पेश करे:
परन्तु जहां अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता के खाते में जमा सम्पूर्ण राशि या उसका कोई भाग इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व किसी अन्य व्यक्ति को समनुदेशित किया गया है, और समनुदेशन की लिखित सूचना अधिकारी को समनुदेशिती से मिल चुकी है, वहां वह अधिकारी इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत कोई कटौती तथा अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता की विधवा या संतान को या उनके निमित्त खंड (क) के अधीन देय कोई संदाय करने के पश्चात् –
(त्) यदि अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता, अथवा यदि उसकी मृत्यु हो गई है तो वह व्यक्ति, जिसको किसी विधिमान्य समनुदेशन के अभाव में वह राशि या अतिशेष उस उपधारा के अधीन संदेय होता, अपनी लिखित सहमति दे देता है, तो, यथास्थिति, उस राशि या भाग का या उसके अतिशेष का संदाय समनुदेशिती को करेगा, या
(त्त्) यदि ऐसी सहमति प्राप्त नहीं होती है, तो, यथास्थिति, उस राशि, भाग या अतिशेष का संदाय, उसे प्राप्त करने के हकदार व्यक्ति के बारे में किसी सक्षम सिविल न्यायालय के विनिश्चय तक के लिए रोक रखेगा ।
(2) उपधारा (1) द्वारा प्राधिकृत संदाय करने पर, यथास्थिति, सरकार या रेल प्रशासन, अभिकर्ता या निक्षेपकर्ता के खाते में जमा राशि में, इतनी राशि के संबंध में, जितनी इस प्रकार संदत्त की गई रकम के बराबर है समस्त दायित्व से पूर्ण रूप से उन्मोचित हो जाएगा ।
- अब भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (1925 का 39) देखिए ।
5. नामनिर्देशितियों के अधिकार- 1[(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में या किसी सरकारी भविष्य निधि या रेल भविष्य निधि के किसी अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता द्वारा उस निधि में अपने खाते में जमा राशि या उसके किसी भाग के, वसीयती या अन्य, किसी बयान में किसी बात के होते हुए भी, जहां निधि के नियमों के अनुसार सम्यक् रूप से किया गया कोई नामनिर्देशन, उस राशि के संदेय हो जाने के पूर्व, अथवा उस राशि के संदेय हो जाने पर उसका संदाय किए जाने के पूर्व, अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता की मृत्यु पर ऐसी सम्पूर्ण राशि या उसके किसी भाग को प्राप्त करने का अधिकार किसी व्यक्ति को प्रदान करना तात्पर्यित करता है वहां उक्त व्यक्ति अन्य सभी व्यक्तियों का अपवर्जन करते हुए उस अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता को यथापूर्वोक्त मृत्यु पर, यथास्थिति, ऐसी राशि या उसके किसी भाग को प्राप्त करने का हकदार हो जाएगा, किन्तु यदि-
(क) ऐसा नामनिर्देशन उसी प्रकार किए गए दूसरे नामनिर्देशन से किसी समय परिवर्तित किया गया है अथवा उन नियमों द्वारा विहित रीति से और प्राधिकारी को दी गई सूचना से अभिव्यक्ततः रद्द कर दिया गया है; अथवा
(ख) ऐसा नामनिर्देशन किसी समय उसमें विनिर्दिष्ट किसी घटना के होने के कारण अविधिमान्य हो गया है,
तो वह व्यक्ति हकदार नहीं होगा, और यदि उक्त व्यक्ति, अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता से पहले मर जाता है तो नामनिर्देशन, जहां तक वह उक्त व्यक्ति को प्रदत्त अधिकार से संबंधित है, शून्य और प्रभावहीन हो जाएगा:
परन्तु जहां निधि के नियमों के अनुसार, नामनिर्देशन में मृत व्यक्ति के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा अधिकार प्रदान करने के लिए सम्यक् रूप से उपबंध किया गया है वहां ऐसा अधिकार, उक्त व्यक्ति की यथापूर्वोक्त मृत्यु हो जाने पर ऐसे अन्य व्यक्ति को संक्रांत हो जाएगा ।]
(2) 2[भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (1925 का 39)] या 1827 के मुम्बई विनियम 8 में किसी बात के होते हुए भी किसी 3[व्यक्ति को जो यथापूर्वोक्त हकदार हो जाता है] ऐसी राशि या भाग का संदाय प्राप्त करने का हकदार बनाने वाला हक प्रमाणपपत्र, यथास्थिति, उस अधिनियम या उस विनियम के अधीन 3[दिया जा सकेगा] और ऐसा प्रमाणपत्र मृत व्यक्ति की सम्पदा के लिए किसी अन्य व्यक्ति को प्रोबेट या प्रशासन-पत्र दिए जाने से अविधिमान्य या अधिक्रांत हुआ नहीं समझा जाएगा ।
4[(3) भविष्य निधि (संशोधन) अधिनियम, 1946 (1946 का 11) की धारा 2 की उपधारा (1) द्वारा यथासंशोधित इस अधिनियम के उपबंध उस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख से पूर्व किए गए समस्त ऐसे नामनिर्देशनों को भी लागू होंगे:
परन्तु इस प्रकार संशोधित इस उपधारा के उपबंध किसी ऐसे मामले पर प्रभाव नहीं डालेंगे जिसमें उक्त तारीख से पूर्व, किन्हीं नियमों के अनुसार सम्यक्तः किए गए किसी नामनिर्देशन के अनुसरण में किसी राशि का संदाय कर दिया गया है या निधि के नियमों के अधीन वह संदेय हो गई है ।]
6. कटौतियां करने की शक्ति-जब किसी सरकारी भविष्य निधि या रेल भविष्य निधि के, जो अंशदायी भविष्य निधि है, किसी अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता के खाते में जमा राशि संदेय हो जाती है तब, यदि 5[निधि के नियमों में उस निमित्त विनिर्दिष्ट] प्राधिकारी निदेश देता है तो उसमें से निम्नलिखित रकम काट ली जाएगी और,6[यथास्थिति, सरकार या रेल प्रशासन] को संदत्त कर दी जाएगी-
(क) अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता द्वारा उपगत किसी दायित्व के अधीन 1[सरकार या रेल प्रशासन] को देय कोई रकम किन्तु जो किसी भी दशा में अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता के खाते में जमा किन्हीं अंशदानों की तथा किसी ऐसे ब्याज या वृद्धि की, जो ऐसे अनुदानों पर प्रोद्भूत हो गई है, कुल रकम से अधिक नहीं होगी; या
- 1946 के अधिनियम सं० 11 की धारा 2 द्वारा उपधारा (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1950 के अधिनियम सं० 35 की धारा 3 और अनुसूची 2 द्वारा उत्तराधिकार प्रमाणपत्र अधिनियम, 1889 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1946 के अधिनियम सं० 11 की धारा 2 द्वारा कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1946 के अधिनियम सं० 11 की धारा 2 द्वारा अंतःस्थापित ।
- 1925 के अधिनियम सं० 28 की धारा 3 द्वारा जिससे कि निधि गठित हुई है के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1925 के अधिनियम सं० 28 की धारा 3 द्वारा उस प्राधिकरण के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
(ख) जहां अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता को 1[उसके नियोजन से] किन्हीं ऐसे कारणों से, जो निधि के नियमों में इस निमित्त विनिर्दिष्ट हैं, पदच्युत कर दिया गया है अथवा जहां उसने ऐसे नियोजन को उस के प्रारंभ के पांच वर्ष के अन्दर त्याग दिया है, वहां किन्हीं ऐसे अंशदानों, ब्याज और वृद्धि की सम्पूर्ण रकम या उसका कोई भाग ।
2[6क. सेवानिवृत्ति के दो वर्ष के भीतर पूर्व अनुज्ञा के बिना वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करने वाले केन्द्रीय सरकार के अधिकारियों की दशा में सरकारी अंशदानों को रोक लेना या उनकी वूसली -(1) इस धारा में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:
- “केन्द्रीय सरकार का अधिकारी” से केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाई गई अंशदायी भविष्य निधि में कोई ऐसा अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता अभिप्रेत है, जो अपनी सेवानिवृत्ति के ठीक पूर्व केन्द्रीय सेवा वर्ग 1 का सदस्य है, किन्तु किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए किसी सेवा-संविदा के अधीन नियुक्त किया गया कोई अधिकारी इसके अन्तर्गत नहीं है;
- “वाणिज्यिक नियोजन” से व्यापारिक, वाणिज्यिक औद्योगिक वित्तीय या वृत्तिक कारबार में लगी हुई किसी कम्पनी, सहकारी सोसाइटी, फर्म या व्यष्टि के अधीन (अभिकर्ता की हैसियत सहित) किसी भी हैसियत में नियोजन अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी हैं: -
(त्) किसी कम्पनी का निदेशक पद;
(त्त्) किसी सहकारी सोसाइटी में अध्यक्ष, सभापति, प्रबन्धक, सचिव, कोषपाल जैसे किसी भी नाम से ज्ञात किसी पद को, चाहे वह निर्वाचित हो या न हो, धारण करना; और
(त्त्त्) ऐसे विषयों में सलाहकार या परामर्शी के तौर पर या तो स्वतंत्र रूप से या किसी फर्म के भागीदार के रूप में व्यवसाय प्रारम्भ करना, जिनकी बाबत
- केन्द्रीय सरकार के अधिकारी के पास कोई वृत्तिक अर्हताएं नहीं हैं और वे विषय, जिनकी बाबत ऐसा व्यवसाय प्रारम्भ किया जाना है या चलाया जाता है, उसकी शासकीय जानकारी या अनुभव से सम्बद्ध हैं, या
- केन्द्रीय सरकार के अधिकारी के पास वृत्तिक अर्हताएं हैं, किन्तु वे विषय, जिनकी बाबत ऐसा व्यवसाय प्रारम्भ किया जाना है, ऐसे हैं जिनसे यह सम्भव है कि केन्द्रीय सरकार के अधीन उनके द्वारा धारित पदों के कारण उसके व्यवहारियों को नावाजिब फायदा हो; या
- केन्द्रीय सरकार के अधिकारी को ऐसे कार्य का भार ग्रहण करना है जिसमें केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों या अधिकारियों से सम्पर्क या संबंध अन्तर्ग्रस्त है,
किन्तु किसी ऐसे निगम या कंपनी में या उसके अधीन नियोजन, जो पूर्ण रूप से या पर्याप्त रूप से सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में है अथवा किसी ऐसे निकाय में या उसके अधीन नियोजन, जो पूर्ण रूप से या पर्याप्त रूप से सरकार के नियंत्रण में है या उसके द्वारा वित्तपोषित किया जाता है, इसके अन्तर्गत नहीं है;
(ग) सरकारी अंशदान से भविष्य निधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 के प्रारंभ होने के पश्चात् केन्द्रीय सरकार द्वारा या किसी राज्य सरकार द्वारा या स्थानीय प्राधिकारी उधार अधिनियम, 1914 (1914 का 9) के अर्थ में किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् किसी अवधि की बाबत किए गए अंशदान अभिप्रेत हैं;
(घ) “विहित” से केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ।
- 1925 के अधिनियम सं० 28 की धारा 3 द्वारा उस प्राधिकरण के नियोजन के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1975 के अधिनियम सं० 46 की धारा 2 द्वारा (7-2-1977 से) अन्तःस्थापित ।
(2) केन्द्रीय सरकार के किसी भी अधिकारी को, उस दशा में जब वह अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के पूर्व किसी समय, केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना, वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करता है, किसी अंशदायी भविष्य निधि में उसके नाम में जमा किए गए, सरकारी अंशदानों के संबंध में कोई अधिकारी नहीं होगा ।
स्पष्टीकरण 1-इस उपधारा और उपधारा (7) के प्रयोजनों के लिए सेवानिवृत्ति की तारीख से सेवानिवृत्ति के पश्चात् केन्द्रीय सरकार के अधीन उसी या किसी अन्य वर्ग 1 पद पर या किसी राज्य सरकार के अधीन वैसे ही किसी अन्य पद पर सेवा-विच्छेद के बिना पुनर्नियोजित केन्द्रीय सरकार के अधिकारी के संबंध में वह तारीख अभिप्रेत होगी जिसको केन्द्रीय सरकार का ऐसा अधिकारी सरकारी सेवा में अन्ततः पुनर्नियोजित नहीं रहता ।
स्पष्टीकरण 2-केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी के बारे में, जिसे उसकी सेवा-निवृत्ति पूर्व छुट्टी के दौरान किसी विशिष्ट वाणिज्यिक नियोजन को ग्रहण करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुज्ञा दी गई है, इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, यह समझा जाएगा कि उसने सेवानिवृत्ति के पश्चात् ऐसे नियोजन में अपने बने रहने के लिए केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा प्राप्त कर ली है ।
(3) उपधारा (4) के उपबंधों के अधीन रहते हुए यह है कि केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी द्वारा विहित प्ररूप में आवेदन किए जाने पर, केन्द्रीय सरकार लिखित आदेश द्वारा ऐसे अधिकारी को, उस आवेदन में विनिर्दिष्ट वाणिज्यिक नियोजन को ग्रहण करने के लिए ऐसी शर्तों के अधीन, यदि कोई हों, जो वह आवश्यक समझे, अनुज्ञा दे सकती है, या ऐसे कारणों से, जो आदेश में अभिलिखित किए जाएंगे, अनुज्ञा देने से इन्कार कर सकती है ।
(4) केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी को कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करने के लिए इस धारा के अधीन अनुज्ञा देने में या देने से इन्कार करने में, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित बातों को ध्यान रखेगी, अर्थात्: -
- जिस नियोजन को ग्रहण करने का विचार है उसकी प्रकृति और नियोजन के पूर्ववृत्त;
- क्या उस नियोजन में, जिसे ग्रहण करने का उसका विचार है, उसके कर्तव्य ऐसे हो सकते हैं जिनसे उसे सरकार का विरोध करना पड़े;
- क्या ऐसे अधिकारी ने सेवा के दौरान उस नियोजक के साथ, जिसके अधीन उसका नियोजन प्राप्त करने का विचार है, ऐसे कोई संव्यवहार किए थे जो इस संदेह के लिए युक्तियुक्त आधार हो सकते हैं कि ऐसे अधिकारी ने उस नियोजक के साथ पक्षपात किया था;
- कोई अन्य सुसंगत बातें जो विहित की जाएं ।
(5) यदि उपधारा (3) के अधीन आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर, केन्द्रीय सरकार ऐसी अनुज्ञा देने से इन्कार नहीं करती है जिसके लिए आवेदन किया गया है, या आवेदक को ऐसे इन्कार की संसूचना नहीं देती है, तो यह समझा जाएगा कि केन्द्रीय सरकार ने ऐसी अनुज्ञा दे दी है जिसके लिए आवेदन किया गया है ।
(6) यदि केन्द्रीय सरकार ऐसी अनुज्ञा किन्हीं शर्तों के अधीन देती है या ऐसी अनुज्ञा देने से इन्कार करती है जिसके लिए आवेदन किया गया है तो आवेदक, उस आशय के केन्द्रीय सरकार के आदेश की प्राप्ति से तीस दिन के भीतर, किसी ऐसी शर्त या इन्कार के विरुद्ध अभ्यावेदन कर सकता है, और केन्द्रीय सरकार उस पर ऐसे आदेश कर सकती है जो वह ठीक समझे:
परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई आदेश जो ऐसी शर्त को रद्द करने या किन्हीं शर्तों के बिना ऐसी अनुज्ञा देने वाले आदेश से भिन्न है, अभ्यावेदन करने वाले व्यक्ति को प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण दर्शित करने का अवसर दिए बिना नहीं किया जाएगा ।
(7) यदि केन्द्रीय सरकार का कोई अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के पूर्व किसी समय केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना, कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करता है या कोई ऐसी शर्त भंग करता है जिस पर कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करने के लिए उसे इस धारा के अधीन अनुज्ञा दी गई है तो केन्द्रीय सरकार लिखित आदेश द्वारा और ऐसे कारणों से, जो उसमें अभिलिखित किए जाएंगे, यह घोषणा करने के लिए सक्षम होगी कि वह ऐसे सरकारी अंशदानों के, जो उस अधिकारी के संबंध में किए गए हों, इतने भाग का हकदार नहीं होगा जितना उस आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, और यदि वह उसे प्राप्त कर चुका है तो यह निदेश देने के लिए सक्षम होगी कि वह सरकारी अंशदानों के उक्त भाग के बराबर रकम केन्द्रीय सरकार को वापस करे :
परन्तु कोई भी ऐसा आदेश, सम्बन्धित अधिकारी को ऐसी घोषणा या निदेश के विरुद्ध कारण दर्शित करने का अवसर दिए बिना, नहीं किया जाएगा:
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन कोई आदेश करने में, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेगी, अर्थात्:
- संबंधित अधिकारी की वित्तीय परिस्थिति;
- संबंधित अधिकारी द्वारा ग्रहण किए गए वाणिज्यिक नियोजन की प्रकृति और उससे उपलब्धियां;
- ऐसी अन्य सुसंगत बातें जो विहित की जाएं ।
(8) यदि कोई ऐसी रकम, जो उपधारा (7) के अधीन किसी आदेश द्वारा वापस की जानी अपेक्षित है, विहित अवधि के भीतर वापस नहीं की जाती है तो वह भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल की जा सकेगी ।
(9) इस धारा के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा पारित प्रत्येक आदेश संबंधित अधिकारी को संसूचित किया जाएगा ।
(10) इस धारा के उपबंध, इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में या किसी अंशदायी भविष्य निधि को लागू नियमों में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
(11) इस धारा के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पहले उसके अधीन की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
7. सद्भावपूर्वक किए गए कार्यों के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के संबंध में किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी ।
8. अधिनियम को अन्य भविष्य निधियों को लागू करने की शक्ति- 1[(1)] 2[समुचित सरकार], राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि 3[(धारा 6क को छोड़कर) इस अधिनियम के सब उपबन्ध,] स्थानीय प्राधिकारी उधार अधिनियम, 1914 (1914 का 9) के अर्थ में किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अपने कर्मचारियों के फायदे के लिए स्थापित किसी भविष्य निधि को लागू होंगे, और ऐसी घोषणा कर दिए जाने पर, यह अधिनियम तद्नूकूल ऐसे लागू होगा मानो ऐसी भविष्य निधि, सरकारी भविष्य निधि हो और ऐसा स्थानीय प्राधिकारी, सरकार हो ।
4[(2) 5[समुचित सरकार,] राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि 3[(धारा 6क को छोड़कर) इस अधिनियम के सब उपबंध,] अनुसूची में विनिर्दिष्ट संस्थाओं में से किसी के अथवा ऐसी संस्थाओं के किसी समूह के कर्मचारियों के फायदे के लिए स्थापित किसी भविष्य निधि को लागू होंगे और ऐसी घोषणा कर दिए जाने पर, यह अधिनियम तदनुकूल ऐसे लागू होगा मानो ऐसी भविष्य निधि, सरकारी भविष्य निधि हो और वह प्राधिकारी, जिसकी अभिरक्षा में निधि है, सरकार हो:
परन्तु धारा 6 इस प्रकार लागू होगी मानो उस धारा में निर्दिष्ट अंशदान करने वाला प्राधिकारी, सरकार हो ।
- 1930 के अधिनियम सं० 1 की धारा 3 द्वारा धारा 8 को उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया ।
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा स्थानीय सरकार के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1975 के अधिनियम सं० 46 की धारा 3 द्वारा (7-2-1977 से) अंतःस्थापित ।
- 1930 के अधिनियम सं० 1 की धारा 3 द्वारा जोड़ा गया ।
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश 1937 द्वारा सपरिषद् गवर्नर जनरल के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
(3) 5[समुचित सरकार] राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अनुसूची में किसी ऐसी सार्वजनिक संस्था का नाम जोड़ सकेगी जिसे वह ठीक समझे और इस प्रकार जोड़ा जाना ऐसे प्रभावी होगा मानो वह इस अधिनियम द्वारा किया गया हो ।]
1[(4) इस धारा में “समुचित सरकार” से अभिप्रेत है-
- किसी छावनी प्राधिकरण, किसी महापत्तन के लिए पत्तन प्राधिकरण और किसी ऐसी संस्था के संबंध में, जो या जिसके उद्देश्य केन्द्रीय सरकार की 2[संविधान] की सप्तम अनुसूची की सूची 1 के अन्तर्गत प्रतीत हों, केन्द्रीय सरकार; और
- अन्य मामलों में राज्य सरकार ।
स्पष्टीकरण-सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी संस्था के संबंध में राज्य सरकार से उस राज्य की राज्य सरकार अभिप्रेत है जिसमें यह सोसाइटी रजिस्ट्रीकृत है ।]
9. सैनिकों की सम्पदाओं के बारे में व्यावृत्तियां-धारा 4 या धारा 5 की कोई बात किसी ऐसी सम्पदा के धन को लागू नहीं होगी जिसके प्रबन्ध के प्रयोजन के संबंध में रेजीमैंटल डैट ऐक्ट, 1893 (56 और 57 विक्ट० सी० 5) लागू होता है ।
- [निरसन ।]-निरसन अधिनियम, 1927 (1927 का 12) की धारा 2 और अनुसूची द्वारा निरसित ।
3[अनुसूची
[धारा 8 की उपधारा (2) देखिए]
संस्थाओं की सूची
1. पास्चर इंस्टीच्यूट ऑफ इंडिया, कसौली ।
2. कलकत्ता सुधार अधिकरण ।
3. प्रतिपाल्य अधिकरण ।
4. भारतीय केन्द्रीय कपास समिति ।
5. रांची में मानसिक रोगों के लिए यूरोपियन अस्पताल के न्यासी ।
6. भारतीय महिलाओं को महिला चिकित्सा सहायता उपलब्ध करने के लिए राष्ट्रीय संस्था ।
7. कानून द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कोई महाविद्यालय ।
8. भारतीय कोयला श्रेणीकरण बोर्ड ।
9. लेडी मिन्टो इंडियन नर्सिंग एसोसिएशन ।
10. भारतीय रैडक्रास सोसाइटी ।
11. भारतीय लाख उपकर समिति ।
12. भारतीय रैडक्रास सोसाइटी की मद्रास राज्य शाखा ।
13. इम्पीरियल बैंक आफ इंडिया ।
14. बिहार और उड़ीसा चिकित्सा परीक्षा बोर्ड ।
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश 1937 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा भारत शासन अधिनियम, 1935 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1930 के अधिनियम सं० 1 की धारा 4 द्वारा मद 1 से 7 से युक्त अनुसूची जोड़ी गई । 1927 के अधिनियम सं० 12 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा मूल अनुसूची का लोप किया गया ।
- अधिनियम की धारा 8(3) के अधीन अधिसूचनाओं द्वारा समय-समय पर 7 के पश्चात् मदें जोड़ी गईं ।
1। । । । ।
16. चाय जिला उत्प्रवासी अधिनियम, 1932 (1932 का 22) के अधीन उत्प्रवासी श्रमिकों के नियंत्रण के लिए बनाई गई संस्था ।
17. मुम्बई फिल्म सैंसर बोर्ड ।
18. कलकत्ता विश्वविद्यालय ।
19. केन्द्रीय सिंचाई बोर्ड ।
20. भारतीय रिजर्व बैंक ।
2। । । । ।
22. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ।
23. भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् ।
24. भारतीय काफी उपकर समिति ।
25. आंग्ल-भारतीय तथा यूरेपियन शिक्षा के लिए अंतर्राज्यिक बोर्ड ।
26. भारतीय अनुसंधान निधि संस्था ।
27. दिल्ली संयुक्त जल और मल बोर्ड ।
28. भारतीय क्षय रोग संस्था ।
29. कोयला खान भरण बोर्ड ।
30. भारतीय रेल स्लीपर पूल ग्रूप समिति ।
31. भारतीय काफी मंडी वृद्धि बोर्ड ।
32. कोयला खान बचाव स्टेशन समिति ।
33. भारतीय काफी बोर्ड ।
3। । । । ।
35. भारतीय रबड़ बोर्ड ।
36. भारतीय केन्द्रीय गन्ना समिति ।
37. अखिल भारतीय पशु प्रदर्शन समिति ।
38. कोयला खान श्रम कल्याण निधि ।
39. भारतीय नारियल समिति ।
40. भारतीय केन्द्रीय तम्बाकू समिति ।
41. कर्मचारी राज्य बीमा निगम ।
42. भारतीय चाय अनुज्ञापन समिति ।
- भारतीय स्वतन्त्रता (केन्द्रीय अधिनियम और अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा प्रविष्टि 15. पंजाब विश्वविद्यालय । का लोप किया गया ।
- भारतीय स्वतन्त्रता (केन्द्रीय अधिनियम और अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा प्रविष्टि 21. दि ट्रस्टीज आफ दि विक्टोरिया मेमोरियल पार्क रंगून का लोप किया गया ।
- भारतीय स्वतन्त्रता (केन्द्रीय अधिनियम और अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा प्रविष्टि 34. दी एन० डब्ल्यू० एफ० प्रोविन्शियल ब्रांच आफ दी इण्डियन रेड क्रास सोसाइटी का लोप किया गया ।
43. कोयला खान (संरक्षण और सुरक्षा) अधिनियम, 1952 (1952 का 12) के अधीन स्थापित कोयला बोर्ड ।
44. दिल्ली सड़क परिवहन प्राधिकारी, नई दिल्ली ।
45. केन्द्रीय चाय बोर्ड ।
46. भारतीय केन्द्रीय तिलहन समिति ।
47. औषधियों की देशी पद्धतियों के बारे में केन्द्रीय अनुसंधान संस्था, जामनगर ।
48. भारतीय मानक संस्थान, दिल्ली ।
49. सूती कपड़ा निधि समिति ।
50. देशबंधु कालेज, कालका जी ।
51. दमोदर घाटी निगम ।
52. केन्द्रीय रेशम बोर्ड ।
53. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली ।
54. खादी और ग्रामोद्योग आयोग ।
55. लारेंस स्कूल (सनावर) सोसाइटी ।
56. कलावती सरन शिशु अस्पताल, नई दिल्ली ।
57. श्री गुरू तेगबहादुर खालसा कालेज, दिल्ली ।
58. चाय बोर्ड, नई दिल्ली ।
59. लेड़ी श्रीराम महिला कालेज, नई दिल्ली ।
60. भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली ।
61. केन्द्रीय कर्मकार शिक्षा बोर्ड ।
62. तेल और प्राकृतिक गैस आयोग ।
63. योजना तथा वास्तुकला स्कूल, नई दिल्ली ।
64. कर्मचारी भविष्य निधि स्कीम, 1952 के अधीन स्थापित भविष्य निधि के प्रशासन के लिए केन्द्रीय न्यासी बोर्ड ।
65. गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम ।
66. राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन (निगमित) स्थापित उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम ।
67. इंडियन इंस्टीच्यूट आफ टैक्नालोजी, मुम्बई ।
68. भारतीय नर्सिंग काउंसिल ।
69. राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन (निगमित) स्थापित गुजरात राज्य वित्तीय निगम ।
70. इंडियन इंस्टीच्यूट आफ टैक्नालोजी, मद्रास ।
71. राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन निगमित राजस्थान वित्तीय निगम ।
72. एयर इंडिया इन्टरनेशनल कापोरेशन ।
73. साहित्य अकादमी, नई दिल्ली ।
74. पन्नालाल गिरधारी लाल डी०ए०वी० कालेज, नई दिल्ली ।
75. दिल्ली सामाजिक कार्य स्कूल, दिल्ली ।
76. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ।
77. कोयला खान भविष्य निधि स्कीम, 1948 के अधीन स्थापित भविष्य निधि के प्रबंध के लिए न्यासी बोर्ड ।
78. जानकी देवी महाविद्यालय, नई दिल्ली ।
79. भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद्, नई दिल्ली ।
80. राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद् ।
81. राष्ट्रीय औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड ।
82. आयुर्वेदिक स्नातकोत्तर प्रशिक्षण केन्द्र, जामनगर ।
83. भारतीय विनिधान केन्द्र, नई दिल्ली ।
84. इंडियन एयर लाइंस कार्पोरेशन ।
85. इंडियन इंस्टीच्यूट आफ टैक्नालोजी, कानपुर ।
86. डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 (1948 का 9) के अधीन स्थापित विशाखापत्तनम डॉक श्रमिक बोर्ड ।
87. केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड ।
88. राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन निगमित उड़ीसा राज्य वित्तीय निगम ।
89. संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली ।
90. आर्थिक विकास संस्थान, दिल्ली ।
91. दिल्ली वक्फ बोर्ड ।
92. अनुप्रयुक्त जनशक्ति अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ।
93. भारतीय विधि संस्थान ।
94. इंडियन इंस्टीच्यूट आफ टैक्नालोजी, दिल्ली ।
95. दयाल सिंह कालेज, नई दिल्ली ।
96. प्रमिला कालेज, दिल्ली ।
97. सनातन धर्म कालेज, नई दिल्ली ।
98. भारतीय फार्मेसी परिषद् ।
99. भारतीय प्रबंध संस्थान, कलकत्ता ।
100. सैनिक स्कूल सोसाइटी ।
101. सालार जंग संग्रहालय बोर्ड, हैदराबाद ।
102. ललित कला अकादमी, नई दिल्ली ।
103. राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन निगमित मध्य प्रदेश वित्तीय निगम ।
104. केन्द्रीय गोसंवर्धन परिषद् ।
105. भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) द्वारा गठित भारतीय स्टेट बैंक ।
106. अखिल भारतीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, बंगलौर ।
107. भारतीय विदेश व्यापार संस्थान, नई दिल्ली ।
108. दिल्ली पुस्तकालय बोर्ड, दिल्ली ।
109. राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, नई दिल्ली ।
110. अखिल भारतीय वाक् और श्रवण संस्थान, मैसूर ।
111. भारतीय संग्रहालय, कलकत्ता ।
112. भारतीय प्रेम परिषद् ।
113. राष्ट्रीय शैक्षिक, अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् ।
114. भारतीय जनसंचार-संस्थान ।
115. राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरी प्रशिक्षण संस्थान, मुम्बई ।
116. कोचीन पत्तन न्यास ।
117. विशाखापत्तनम पत्तन न्यास ।
118. कांदला पत्तन न्यास ।
119. मोरमुगाव पत्तन न्यास ।
120. प्रदीप पत्तन न्यास ।
121. नेहरू स्मारक म्यूजियम और लाइब्रेरी, नई दिल्ली ।
122. नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया, नई दिल्ली ।
123. भारतीय निर्यात निरीक्षण परिषद् ।
124. निर्यात निरीक्षण अभिकरण, मुम्बई ।
125. निर्यात निरीक्षण अभिकरण, दिल्ली ।
126. निर्यात निरीक्षण अभिकरण, कलकत्ता ।
127. निर्यात निरीक्षण अभिकरण, मद्रास ।
128. निर्यात निरीक्षण अभिकरण, कोचीन ।
129. ढलाई एवं गढ़ाई तकनीक का राष्ट्रीय संस्थान, रांची ।
130. भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट ।
131. भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली ।
132. नेशनल इन्स्टीट्यूट आफ बैंकिंग मैनेजमें, मुम्बई ।
133. स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान, चंडीगढ़ ।
134. इलायची अधिनियम, 1965 (1965 का 42) के अधीन स्थापित इलायची बोर्ड ।
135. विक्टोरिया मेमोरियल हाल, कलकत्ता ।
136. केन्द्रीय जल सहयोग अनुसंधान तथा प्रशिक्षण संस्थान, नई दिल्ली ।
137. डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 (1948 का 9) के अधीन मोरमुगाव डॉक श्रम बोर्ड ।
138. डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 (1948 का 9) के अधीन स्थापित कोचीन डॉक श्रम बोर्ड ।
139. सांविधानिक तथा संसदीय अध्ययन संस्थान, नई दिल्ली ।
140. रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान, नई दिल्ली ।
141. नीति अनुसंधान केन्द्र, नई दिल्ली ।
142. लौह अयस्क बोर्ड ।
143. भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली ।
144. भारतीय खनिज विद्यापीठ, धनबाद ।
145. नाविक भविष्य निधि संगठन ।
146. रुरल इलैक्ट्रीफिकेशन कारर्पोरेशन लिमिटेड ।
147. भारतीय भुचुंबकत्व संस्थान, मुम्बई ।
148. केन्द्रीय विद्यालय संगठन ।
149. बाल भवन सोसाइटी (इंडिया) ।
150. पावर इंजीनियर्स ट्रैनिंग सोसाइटी ।
151. राष्ट्रीय जन विज्ञान संस्थान ।
152. रमण रिसर्च इंस्टीट्यूट, बंगलौर ।
153. राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली ।
154. राष्ट्रीय श्रम संस्थान ।
155. राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम, नई दिल्ली ।
156. राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण, नई दिल्ली ।
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