उत्तरांचल (नाम-परिवर्तन) अधिनियम, 2006
(2006 का अधिनियम संख्यांक 52)
[21 दिसम्बर, 2006]
उत्तरांचल राज्य का नाम परिवर्तित करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के सतावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम उत्तरांचल (नाम-परिवर्तन) अधिनियम, 2006 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) नियत दिन" से इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के लिए धारा 1 की उपधारा (2) के अधीन नियत की गई तारीख अभिप्रेत है;
(ख) समुचित सरकार" से, संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 1 में प्रगणित किसी विषय से संबंधित किसी विधि की बाबत, केन्द्रीय सरकार और किसी अन्य विधि की बाबत राज्य सरकार अभिप्रेत है;
(ग) विधि" के अन्तर्गत संपूर्ण उत्तरांचल राज्य या उसके किसी भाग में विधि का बल रखने वाली कोई अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, उपविधि, नियम, स्कीम, अधिसूचना या अन्य लिखत भी है ।
3. उत्तरांचल राज्य का नाम-परिवर्तन-नियत दिन से उत्तरांचल राज्य, उत्तराखंड राज्य के नाम से ज्ञात होगा ।
4. संविधान की पहली अनुसूची का संशोधन-संविधान की पहली अनुसूची में, 1. राज्य " शीर्षक के अधीन प्रविष्टि 27 के, स्तंभ नाम" के अधीन उत्तरांचल" शब्द के स्थान पर उत्तराखंड" शब्द रखा जाएगा ।
5. संविधान की चौथी अनुसूची का संशोधन-संविधान की चौथी अनुसूची में, सारणी" शीर्षक के अधीन प्रविष्टि 18 के, दूसरे स्तंभ में उत्तरांचल" शब्द के स्थान पर उत्तराखंड" शब्द रखा जाएगा ।
6. विधियों के अनुकूलन की शक्ति-(1) समुचित सरकार, धारा 3 द्वारा उत्तरांचल राज्य के नाम-परिवर्तन को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए, नियत दिन से एक वर्ष की समाप्ति के पूर्व, आदेश द्वारा, नियत दिन से पूर्व बनाई गई किसी विधि में, निरसन के रूप में या संशोधन के रूप में ऐसे अनुकूलन और उपांतरण कर सकेगी, जो आवश्यक या समीचीन हों और तब प्रत्येक ऐसी विधि इस प्रकार किए गए अनुकूलनों और उपांतरणों सहित प्रभावी होगी ।
(2) उपधारा (1) की कोई बात किसी सक्षम विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी को, उक्त उपधारा के अधीन समुचित सरकार द्वारा अनुकूलित या उपांतरित की गई किसी विधि को निरसित या संशोधित करने से, निवारित करने वाली नहीं समझी जाएगी ।
7. विधियों के अर्थान्वयन की शक्ति-इस बात के होते हुए भी कि नियत दिन से पूर्व बनाई गई किसी विधि के अनुकूलन के लिए धारा 6 के अधीन उपबंध नहीं किया गया है या अपर्याप्त उपबंध किया गया है ऐसी विधि को प्रवर्तित कराने के लिए अपेक्षित या सशक्त कोई न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण, उसके सार पर प्रभाव डाले बिना उस विधि का अर्थान्वयन उस न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण के समक्ष विषय के संबंध में, ऐसी रीति से कर सकेगा जो आवश्यक या उचित हो ।
8. विधिक कार्यवाहियां-जहां, नियत दिन से ठीक पूर्व कोई विधिक कार्यवाहियां लंबित हैं जिनमें उत्तरांचल राज्य पक्षकार है, वहां उन कार्यवाहियों में उत्तरांचल राज्य के स्थान पर उत्तराखण्ड राज्य प्रतिस्थापित किया गया समझा जाएगा ।
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