दिल्ली विकास प्राधिकरण (अनुशासनिक शक्तियों
का विधिमान्यकरण) अधिनियम, 1998
(1999 का अधिनियम संख्यांक 6)
[8 जनवरी, 1999]
दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और अधिकारियों
द्वारा प्रयोग की गई अनुशासनिक शक्तियों के
विधिमान्यकरण का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के उनचासवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम के संक्षिप्त नाम दिल्ली विकास प्राधिकरण (अनुशासनिक शक्तियों का विधिमान्यकरण) अधिनियम, 1998 है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, -
(क) प्राधिकरण" से दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 (1957 का 61) की धारा 3 के अधीन स्थापित दिल्ली विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है ;
(ख) उपाध्यक्ष" से प्राधिकरण का उपाध्यक्ष अभिप्रेत है ।
3. उपाध्यक्ष या अन्य अधिकारियों द्वारा प्रयोग की गई अनुशासनिक शक्तियों या की गई कार्रवाई का विधिमान्यकरण-किसी न्यायालय या अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, जहां ऐसी किन्हीं अनुशासनिक शक्तियों का, जिनका या ऐसी कोई कार्रवाई जिसे केन्द्रीय सरकार या प्राधिकरण, दिल्ली विकास प्राधिकरण (वेतन, भत्ते और सेवा की शर्तें) विनियम, 1961 के अधीन प्रयोग कर सकता है या कर सकता है, प्राधिकरण के उपाध्यक्ष या अन्य अधिकारियों द्वारा 22 नवम्बर, 1979 से ही 1 मार्च, 1994 तक की अवधि के दौरान ही प्रयोग किया गया था या की गई थी, वहां ऐसी अनुशासनिक शक्तियों या कार्रवाई के बारे में यह समझा जाएगा कि उनका या वह उपाध्यक्ष या अन्य ऐसे अधिकारी द्वारा विधिमान्य रूप से और प्रभावी रूप से ऐसे प्रयोग किया गया था या की गई थी मानो उपाध्यक्ष या ऐसा अन्य अधिकारी केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से उक्त दिल्ली विकास प्राधिकरण (वेतन, भत्ते और सेवा की शर्तें) विनियम में उस निमित्त विनिर्दिष्ट किया गया हो और तद्नुसार कोई वाद या अन्य कार्यवाही किसी न्यायालय या अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के समक्ष इस आधार पर संस्थित नहीं की जाएगी, चलाई नहीं जाएगी या जारी नहीं रखी जाएगी कि उपाध्यक्ष या ऐसा अन्य अधिकारी ऐसी अनुशासनिक शक्ति का प्रयोग करने या ऐसी कार्रवाई करने के लिए समक्ष नहीं था ।
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