राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014
(2014 का अधिनियम संख्यांक 40)
[31 दिसम्बर, 2014]
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग द्वारा भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और उच्चतम
न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों तथा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायमूर्तियों
और अन्य न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए व्यक्ितयों की
सिफारिश करने के लिए और उनके स्थानान्तरण के लिए
अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया का तथा
उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक
विषयों का विनियमन
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के पैंसठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम और प्रांरभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) अध्यक्ष" से आयोग का अध्यक्ष अभिप्रेत है;
(ख) आयोग" से संविधान के अनुच्छेद 124क में निर्दिष्ट राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अभिप्रेत है;
(ग) उच्च न्यायालय" से ऐसा उच्च न्यायालय अभिप्रेत है, जिसकी बाबत आयोग द्वारा किसी न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए सिफारिश किए जाने का प्रस्ताव किया जाता है;
(घ) सदस्य" से आयोग का कोई सदस्य अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत उसका चेयरपर्सन भी है;
(ङ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(च) विनियमों" से इस अधिनियम के अधीन आयोग द्वारा बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं ।
3. आयोग का मुख्यालय-आयोग का मुख्यालय दिल्ली में होगा ।
4. रिक्ितयों को भरने के लिए आयोग को निर्देश-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रवृत होने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर, उच्चतम न्यायालय में और किसी उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के पदों में विद्यमान रिक्ितयों के बारे में आयोग को उन रिक्ितयों को भरने के लिए अपनी सिफारिशें करने हेतु संसूचित करेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार, उच्चतम न्यायालय के या किसी उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की पदावधि पूरी होने के कारण कोई रिक्ित होने की तारीख से छह मास पूर्व आयोग को, ऐसी रिक्ित को भरने के लिए अपनी सिफारिशें करने हेतु निर्देश करेगी ।
(3) केन्द्रीय सरकार, उच्चतम न्यायालय के या किसी उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की मृत्यु होने या उसके द्वारा त्यागपत्र दिए जाने के कारण कोई रिक्ति होने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर, आयोग को, ऐसी रिक्ित को भरने के लिए अपनी सिफारिशें करने हेतु निर्देश करेगी ।
5. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के चयन की प्रक्रिया-(1) आयोग, उच्चतम न्यायालय के ज्येष्ठतम न्यायाधीश की भारत के मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में, यदि उसे पद धारण किए जाने के उपयुक्त माना जाता है, नियुक्ित की सिफारिश करेगा:
परंतु आयोग का ऐसा कोई सदस्य, जिसके नाम की सिफारिश के लिए विचार किया जा रहा है, उस बैठक में भाग नहीं लेगा ।
(2) आयोग, योग्यता, गुणता और उपयुक्तता के ऐसे किन्हीं अन्य मानदंडों के आधार पर जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, उन व्यक्ितयों में से, जो संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (3) के अधीन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ित किए जाने के पात्र हैं, उस रूप में उनकी नियुक्ित के लिए उनके नामों की सिफारिश करेगा:
परंतु उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ित के लिए सिफारिश करते समय, ज्येष्ठता के अतिरिक्त, उस न्यायाधीश की योग्यता और गुणता पर विचार किया जाएगा:
परंतु यह और कि यदि आयोग के कोई दो सदस्य ऐसी सिफारिश के लिए सहमत नहीं हैं तो आयोग ऐसे किसी व्यक्ित की नियुक्ति के लिए सिफारिश नहीं करेगा ।
(3) आयोग, उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश के चयन और नियुक्ित के लिए, विनियमों द्वारा, ऐसी अन्य प्रक्रिया और शर्तें विनिर्दिष्ट कर सकेगा, जो वह आवश्यक समझे ।
6. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के चयन की प्रक्रिया-(1) आयोग, किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में नियुक्ति के लिए, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की परस्पर ज्येष्ठता और योग्यता, गुणता तथा उपयुक्तता के ऐसे किन्हीं अन्य मानदंडों के आधार पर, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, सिफारिश करेगा ।
(2) आयोग, किसी व्यक्ित की उस उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ित के लिए सिफारिश किए जाने के प्रयोजनार्थ संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से नामनिर्देशन की ईप्सा करेगा ।
(3) आयोग, योग्यता, गुणता और उपयुक्तता के ऐसे किन्हीं अन्य मानदंडों के आधार पर भी, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, उन व्यक्ितयों में से, जो संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (2) के अधीन उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ित किए जाने के पात्र हैं, उनको उस रूप में नियुक्ित किए जाने के लिए उनके नाम नामनिर्दिष्ट करेगा और उन नामों को संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति को उनके विचारों के लिए अग्रेषित करेगा ।
(4) संबंधित उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति उपधारा (2) के अधीन कोई नामनिर्देशन करने या उपधारा (3) के अधीन अपने विचार प्रकट किए जाने के पूर्व उस उच्च न्यायालय के दो ज्येष्ठतम न्यायाधीशों से और उस उच्च न्यायालय के ऐसे अन्य न्यायाधीशों और प्रख्यात अधिवक्ताओं से, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, परामर्श करेगा ।
(5) आयोग, उपधारा (2) और उपधारा (3) के अधीन विचार और नामनिर्देशन प्राप्त करने के पश्चात् उस व्यक्ित की, जिसे योग्यता, गुणता और उपयुक्तता के किन्हीं अन्य मानदंडों के आधार पर, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, उपयुक्त पाया जाता है, नियुक्ित के लिए सिफारिश कर सकेगा ।
(6) यदि आयोग के कोई दो सदस्य ऐसी सिफारिश के लिए सहमत नहीं है तो आयोग इस धारा के अधीन ऐसे किसी व्यक्ित की नियुक्ित के लिए सिफारिश नहीं करेगा ।
(7) आयोग, ऐसी सिफारिश करने के पूर्व, संबंधित राज्य के राज्यपाल और मुख्य-मंत्री के विचार, ऐसी रीति में, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, लिखित में प्राप्त करेगा ।
(8) आयोग, किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के और उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश के चयन और नियुक्ति के लिए, विनियमों द्वारा, ऐसी अन्य प्रक्रिया और शर्तें विनिर्दिष्ट कर सकेगा, जो आवश्यक समझी जाएं ।
7. राष्ट्रपति की पुनर्विचार की अपेक्षा करने की शक्ित-राष्ट्रपति, आयोग द्वारा की गई सिफारिशों पर, यथास्िथति, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति या उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश अथवा किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की नियुक्ित करेगा:
परंतु राष्ट्रपति, यदि आवश्यक समझे, आयोग से उसके द्वारा की गई सिफारिश पर, साधारणतया या अन्यथा, पुनर्विचार किए जाने की अपेक्षा कर सकेगा :
परंतु यह और कि यदि आयोग, धारा 5 या धारा 6 में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार पुनर्विचार करने के पश्चात् कोई सिफारिश करता है तो राष्ट्रपति तदनुसार नियुक्ित करेगा ।
8. आयोग के अधिकारी और कर्मचारी-(1) केन्द्रीय सरकार, आयोग के परामर्श से, इस अधिनियम के अधीन आयोग के कृत्यों के निर्वहन के लिए उतने अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकेगी, जितने आवश्यक समझे जाएं ।
(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्ति आयोग के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें वे होंगी, जो विहित किए जाएं ।
(3) भारत सरकार के न्याय विभाग का सचिव आयोग का संयोजक होगा ।
9. न्यायाधीशों के स्थानान्तरण की प्रक्रिया-आयोग, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायमूर्तियों और अन्य न्यायाधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को स्थानान्तरण किए जाने की सिफारिश करेगा और इस प्रयोजन के लिए विनियमों द्वारा ऐसे स्थानान्तरण की प्रक्रिया विनिर्दिष्ट करेगा ।
10. आयोग द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया-(1) आयोग को अपने कृत्यों के निर्वहन की प्रक्रिया, विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट करने की शक्ित होगी ।
(2) आयोग ऐसे समय और स्थान पर बैठकें करेगा, जो चेयरपर्सन निदेश दे और वह अपनी बैठकों के कारबार के संव्यवहार के बारे में (जिसके अंतर्गत उसकी बैठकों में गणपूर्ति भी है) ऐसे प्रक्रिया-नियमों का अनुपालन करेगा, जो वह विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।
11. नियम बनाने की शक्ित-(1) केंद्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ित की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्ः-
(क) संविधान के अनुच्छेद 124क के खंड (1) के उपखंड (घ) के अधीन नामनिर्दिष्ट विख्यात व्यक्ितयों को संदेय फीस और भत्ते;
(ख) धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन आयोग के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और अन्य शर्तें;
(ग) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए अथवा जिसकी बाबत नियमों द्वारा उपबंध किया जाना होगा ।
12. विनियम बनाने की शक्ित-(1) आयोग, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से संगत विनियम बना सकेगा ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ित की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियमों में निम्नलिखित सभी या किन्ही विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्ः-
(क) धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश की नियुक्ित की बाबत उपयुक्तता का मानदंड;
(ख) धारा 5 की उपधारा (3) के अधीन उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश के चयन और उसकी नियुक्ति के लिए अन्य प्रक्रिया और शर्तें;
(ग) धारा 6 की उपधारा (3) के अधीन उच्च न्यायलय के किसी न्यायाधीश की नियुक्ति की बाबत उपयुक्तता का मानदंड;
(घ) ऐसे अन्य न्यायाधीश और प्रख्यात अधिवक्ता, जिनसे धारा 6 की उपधारा (4) के अधीन मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा परामर्श किया जा सकेगा;
(ङ) धारा 6 की उपधारा (7) के अधीन राज्यपाल और मुख्यमंत्री के विचार प्राप्त करने की रीति;
(च) धारा 6 की उपधारा (8) के अधीन उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश के चयन और उसकी नियुक्ति के लिए अन्य प्रक्रिया और शर्तें;
(छ) धारा 9 के अधीन उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायमूर्तियों और अन्य न्यायाधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को स्थानान्तरण किए जाने की प्रक्रिया;
(ज) धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन आयोग द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;
(झ) धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन आयोग की बैठकों में कारबार के संव्यवहार के बारे में, जिसके अंतर्गत उसकी बैठकों में गणपूर्ति भी है, प्रकिया-नियम;
(ञ) कोई अन्य विषय, जिसे विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाना अपेक्षित है या विनिर्दिष्ट किया जाए अथवा जिसकी बाबत विनियमों द्वारा उपबंध किया जाना है ।
13. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
14. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ित-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केंद्रीय सरकार, आयोग से परामर्श करने के पश्चात्, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत होंः
परंतु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से पांच वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
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