रेल संरक्षण बल अधिनियम, 1957
(1957 का अधिनियम संख्यांक 23)
[29 अगस्त, 1957]
[ [रेल संपत्ति, यात्री क्षेत्र और यात्रियों] के बेहतर संरक्षण और सुरक्षा के
लिए संघ के सशस्त्र बल का गठन और विनियमन करने
का तथा उसे संबद्ध विषयों का
उपबंध करने के लिए
अधिनियम]
भारत गणराज्य के आठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम रेल संरक्षण बल अधिनियम, 1957 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं- [(1)] इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) बल" से धारा 3 के अधीन गठित रेल संरक्षण बल अभिप्रेत है;
[(ख) महानिदेशक" से धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त बल का महानिदेशक अभिप्रेत है;
(खक) भर्ती किया गया बल-सदस्य" से बल का कोई अधीनस्थ अधिकारी, अवर अधिकारी या किसी अवर अधिकारी के रैंक से निम्नतर रैंक का कोई अन्य सदस्य अभिप्रेत है;
(खख) बल अभिरक्षा" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार किसी बल-सदस्य की गिरफ्तारी या उसका परिरोध अभिप्रेत है;]
(ग) बल-सदस्य" से इस अधिनियम के अधीन बल में नियुक्त किया ॥। व्यक्ति अभिप्रेत है;
[(गक) यात्री" का वही अर्थ होगा जो रेल अधिनियम, 1989 (1989 का 24) में है;
(गख) यात्री क्षेत्र" में रेल प्लेटफार्म, रेलगाड़ी, यार्ड और ऐसा अन्य क्षेत्र, जहां बहुधा यात्री आते हैं, सम्मिलित होगा;]
(घ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ङ) रेल-संपत्ति" के अन्तर्गत ऐसा कोई माल, धन या मूल्यवान प्रतिभूति या जीवजंतु है जो या तो रेल प्रशासन का है या उसके प्रभार या कब्जे में है;
[(ङक) अधीनस्थ अधिकारी" से निरीक्षक, उपनिरीक्षक या सहायक उपनिरीक्षक के रूप में बल में नियुक्त कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;]
(च) वरिष्ठ अधिकारी" से धारा 4 के अधीन नियुक्त किए गए अधिकारियों में से कोई अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत कोई अन्य ऐसा अधिकारी भी है जो केंद्रीय सरकार द्वारा बल के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाए;
8[(चक) अवर अधिकारी" से हैड कांस्टेबल या नायक के रूप में बल में नियुक्त कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;]
(छ) जो शब्द और पद इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं किंतु परिभाषित नहीं हैं और भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) में परिभाषित हैं, उनके क्रमशः वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम के अधीन दिए गए हैं ।
[(2) इस अधिनियम में ऐसी किसी विधि के प्रति, जो किसी क्षेत्र में प्रवृत्त नहीं है, किसी निर्देश का, उस क्षेत्र के संबंध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में प्रवृत्त किसी तत्स्थानी विधि के, यदि कोई हो, प्रति निर्देश है ।]
3. बल का गठन-(1) रेल संपत्ति के बेहतर संरक्षण और सुरक्षा के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा [संघ का एक सशस्त्र बल] गठित किया जाएगा और बनाए रखा जाएगा, जो रेल संरक्षण बल कहलाएगा ।
(2) वह बल उस रीति से गठित किया जाएगा, उसमें उतने [वरिष्ठ अधिकारी, अधीनस्थ अधिकारी, अवर अधिकारी और अन्य भर्ती किए गए बल सदस्य] होंगे तथा उन्हें ऐसा वेतन और अन्य पारिश्रमिक मिलेगा, जो विहित किया जाए ।
4. वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति और शक्तियां- [(1) केंद्रीय सरकार किसी व्यक्ति को बल का महानिदेशक नियुक्त कर सकेगी और अन्य व्यक्तियों को बल का महानिरीक्षक, अपर महानिरीक्षक, उप-महानिरीक्षक, सहायक महानिरीक्षक, ज्येष्ठ कमांडेंट, कमांडेंट या सहायक कमाडेंट नियुक्त कर सकेगी ।]
(2) इस प्रकार नियुक्त किए [महानिदेशक] और प्रत्येक अन्य वरिष्ठ अधिकारी को अपने-अपने समादेशाधीन बल-सदस्यों के ऊपर ऐसी शक्तियां और ऐसे प्राधिकार प्राप्त होंगे और वे उनका प्रयोग करेंगे जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उपबंधित हों ।
5. [बल-सदस्यों की श्रेणियां और रैंक ।]-रेल संरक्षण बल (संशोधन) अधिनियम, 1985 (1985 का 60) की धारा 6 द्वारा (20-9-1985 से) लोप किया गया ।
6[6. बल सदस्यों की नियुक्ति-भर्ती किए गए बल-सदस्यों को नियुक्त करने की शक्ति महानिरीक्षक, अपर महानिरीक्षक या उप-महानिरीक्षक में निहित होगी, जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार उस शक्ति का प्रयोग करेगा:
परंतु इस धारा के अधीन नियुक्ति करने की शक्ति का प्रयोग ऐसे अन्य वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किया जा सकेगा जिसे संबद्ध महानिरीक्षक, अपर महानिरीक्षक या उप-महानिरीक्षक आदेश द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ।]
7. बल-सदस्यों को प्रमाणपत्र-(1) प्रत्येक बल-सदस्य को उसकी नियुक्ति पर अनुसूची में विनिर्दिष्ट प्रमाणपत्र मिलेगा जिस पर [महानिरीक्षक, अपर महानिरीक्षक या उप-महानिरीक्षक] या अन्य ऐसे वरिष्ठ अधिकारी की मुद्रा होगी जिसे 7[महानिरीक्षक, अपर महानिरीक्षक या उप-महानिरीक्षक] इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे और ऐसा प्रमाणपत्र धारण करने वाले व्यक्ति में उसके आधार पर बल-सदस्य की शक्तियां निहित होंगी ।
(2) जब प्रमाणपत्र में नामित व्यक्ति किसी भी कारण से बल-सदस्य न रह जाए तो वह प्रमाणपत्र निष्प्रभाव हो जाएगा ॥। ।
[8. बल का अधीक्षण और प्रशासन-(1) बल का अधीक्षण केंद्रीय सरकार में निहित होगा और उसके तथा इस अधिनियम के और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए बल का समादेशन, पर्यवेक्षण और प्रशासन महानिदेशक में निहित होगा ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी रेल के संबंध में ऐसी स्थानीय सीमाओं के भीतर, जो विहित की जाए, बल का प्रशासन इस अधिनियम के और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के उपबंधों के अनुसार महानिरीक्षक, अपर महानिरीक्षक या उप-महानिरीक्षक द्वारा किया जाएगा और वे ऐसे किसी निदेशक के अधीन रहते हुए, जो केंद्रीय सरकार या महानिदेशक द्वारा, इस निमित्त, दिया जाए, रेल के महाप्रबंधक के साधारण पर्यवेक्षण के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करेंगे ।
9. बल-सदस्यों का पदच्युत किया जाना, हटाया जाना, आदि-(1) संविधान के अनुच्छेद 311 के उपबंधों के तथा ऐसे नियमों के जो केंद्रीय सरकार इस निमित्त बनाए, अधीन रहते हुए कोई वरिष्ठ अधिकारी-
(i) किसी ऐसे [भर्ती किया गया बल-सदस्य] को पदच्युत, निलंबित या पंक्तिच्युत कर सकेगा जिसके बारे में उसका विचार हो कि वह अपने कर्तव्य के निर्वहन में असावधानी या उपेक्षा करता है या उसके लिए अयोग्य है; अथवा
(ii) निम्नलिखित दंडों में से कोई एक या अधिक दंड किसी ऐसे [भर्ती किया गया बल-सदस्य] को दे सकेगा जो अपने कर्तव्य का निर्वहन असावधानी या उपेक्षा के साथ करता है या जो स्वयं अपने कार्य द्वारा अपने को उसके निर्वहन के लिए अयोग्य बना लेता है, अर्थात्: -
(क) सात दिन के वेतन से अनधिक रकम का जुर्माना अथवा वेतनमान में अवगत करना;
(ख) चौदह दिन से अनधिक की कालावधि के लिए क्वार्टरों में परिरोध, चाहे उसके साथ में दण्डस्वरूप कवायद, अतिरिक्त गारद, फटीग या अन्य ड्यूटी हो या नहीं;
(ग) विशिष्टता के किसी पद से हटाना या किसी विशेष उपलब्धि से वंचित करना ।
[(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई भर्ती किया गया बल-सदस्य उस तारीख से, जिसको उसे आदेश संसूचित किया जाता है, तीस दिन के भीतर उस आदेश के विरुद्ध अपील ऐसे प्राधिकारी को कर सकेगा जो विहित किया जाए:
परंतु यदि विहित प्राधिकारी का समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी समय के भीतर अपील फाइल करने में पर्याप्त कारण से निवारित हो गया था तो वह तीस दिन की उक्त अवधि के अवसान के पश्चात् अपील ग्रहण कर सकेगा ।
(3) विहित प्राधिकारी अपील निपटाने में ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा जो विहित की जाए:
परंतु उपधारा (2) के अधीन कोई वर्धित शास्ति अधिरोपित करने वाला आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक उस आदेश से प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।]
10. बल के अधिकारियों और बल-सदस्यों का रेल सेवक समझा जाना- [महानिदेशक और प्रत्येक बल-सदस्य] भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9), उसके अध्याय 6क को छोड़कर, के अंतर्गत रेल सेवक समझा जाएगा और उस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन रेल सेवकों को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने का हकदार होगा ।
[11. बल के सदस्यों के कर्तव्य-प्रत्येक वरिष्ठ अधिकारी और बल के सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह, -
(क) अपने वरिष्ठ प्राधिकारी द्वारा विधिपूर्णतः उसे दिए गए सभी आदेशों का तत्परता से निष्पादन करे;
(ख) रेल संपत्ति, यात्री क्षेत्र और यात्रियों का संरक्षण और सुरक्षा करे;
(ग) रेल संपत्ति या यात्री क्षेत्र के संचलन में पड़ने वाली किसी बाधा को दूर करे; और
(घ) कोई अन्य ऐसा कार्य करे जो रेल संपत्ति, यात्री क्षेत्र और यात्रियों के बेहतर संरक्षण और सुरक्षा का साधक हो ।]
[12. वारंट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति-कोई बल-सदस्य किसी मजिस्ट्रेट के किसी आदेश के बिना और वारंट के बिना-
(i) ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा, जो उसको या किसी अन्य बल-सदस्य को, ऐसे सदस्य के रूप में अपना कर्तव्य करने में, या उसको ऐसे सदस्य के रूप में अपना कर्तव्य करने से निवारित करने या भयोपरत करने के आशय से या ऐसे सदस्य के रूप में उसके द्वारा अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की गई या किए जाने के लिए प्रयतित किसी बात के परिणामस्वरूप स्वेच्छया उपहति कारित करता है या स्वेच्छया उपहति कारित करने का प्रयत्न करता है अथवा सदोष अवरुद्ध करता है या सदोष अवरुद्ध करने का प्रयत्न करता अथवा हमला करता है या हमला करने की धमकी देता है अथवा आपराधिक बल का प्रयोग करता है या प्रयोग करने की धमकी देता है या प्रयोग का प्रयत्न करता है; या
(ii) ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा, जो किसी ऐसे संज्ञेय अपराध से संबद्ध रहा है या जिसके विरुद्ध उसके ऐसे अपराध से संबद्ध रहने का समुचित संदेह है या जो अपनी उपस्थिति को छिपाने के लिए पूर्वावधानियां ऐसी परिस्थितियों में बरतता पाया जाता है जिनसे यह विश्वास करने का कारण उत्पन्न होता है कि वह ऐसी पूर्वावधानियां ऐसा संज्ञेय अपराध करने के लिए बरत रहा है जो [रेल संपत्ति, यात्री क्षेत्र और यात्रियों] से संबंधित है; या
(iii) ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा जो रेल की सीमाओं में अपनी उपस्थिति को छिपाने के लिए पूर्वावधानियां ऐसी परिस्थितियों में बरतता पाया जाता है जिनसे यह विश्वास करने का कारण उत्पन्न होता है कि वह ऐसी पूर्वावधानियां 6[रेल संपत्ति, यात्री क्षेत्र और यात्रियों] की चोरी करने या उसे नुकसान पहुंचाने की दृष्टि से बरत रहा है; या
(iv) ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा, जो ऐसा संज्ञेय अपराध करता है या करने का प्रयत्न करता है, जिसमें [रेल संपत्ति, यात्री क्षेत्र और यात्रियों] से संबंधित किसी कार्य को करने में लगे हुए किसी व्यक्ति के जीवन के लिए आसन्न खतरा अंतर्वलित है या अंतर्वलित होने की संभावना है ।]
13. वारंट के बिना तलाशी लेने की शक्ति-(1) जब भी किसी ॥। ज्येष्ठ रक्षक से अनिम्न रैंक के बल-सदस्य के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि धारा 12 में निर्दिष्ट प्रकार का कोई अपराध किया गया है या किया जा रहा है, और अपराधी को भाग जाने अथवा अपराध का साक्ष्य छिपा देने का अवसर दिए बिना तलाशी वारंट अभिप्राप्त नहीं किया जा सकता, तब वह उसे रोक सकेगा और उसके शरीर तथा उसकी वस्तुओं की तुरंत तलाशी ले सकेगा और यदि वह उचित समझे तो किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करन का कारण हो कि उसने वह अपराध किया है ।
(2) [दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2)] के अधीन तलाशी से संबंधित उस संहिता के उपबंध इस धारा के अधीन की गई तलाशी को यथाशक्य लागू होंगे ।
14. गिरफ्तारी के बाद अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया-इस अधिनियम के अधीन गिरफ्तारी करने वाला 2॥। बल-सदस्य इस प्रकार गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को अनावश्यक विलंब के बिना [पुलिस अधिकारी को उन परिस्थितियों की, जिनके कारण ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, ब्यौरेवार रिपोर्ट सहितट सौंप देगा और यदि पुलिस अधिकारी न हो तो उसे निकटतम पुलिस थाने ले जाएगा या भिजवाएगा ।
15. अधिकारियों और बल-सदस्यों का सदा कर्तव्यारूढ़ समझा जाना और रेलों के किसी भी भाग में नियोजनों का दायी होना- [(1) प्रत्येक बल-सदस्य को, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सदैव कर्तव्यारूढ़ समझा जाएगा और वह भारत के भीतर किसी भी स्थान पर, किसी भी समय, नियोजित किए जाने के दायित्व के अधीन होगा ।]
(2) 2॥। बल सदस्य इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों से भिन्न किसी नियोजन या पद पर अपने को नहीं लगाएगा ।
[15क. संगम आदि बनाने के अधिकार की बाबत निर्बंधन-(1) कोई बल-सदस्य केंद्रीय सरकार या विहित प्राधिकारी की लिखित पूर्व मंजूरी के बिना, -
(क) किसी व्यवसाय संघ, श्रम संघ, राजनीतिक संगम का या व्यवसाय संघों, या राजनीतिक संगमों के किसी वर्ग का सदस्य नहीं होगा या उसके साथ किसी भी रूप में सहयुक्त नहीं होगा; या
(ख) किसी ऐसी अन्य सोसाइटी, संस्था, संगम या संगठन का, जिसे बल के भागरूप में मान्यता प्राप्त नहीं है अथवा जो बिल्कुल सामाजिक, आमोद-प्रमोदात्मक या धार्मिक प्रकृति का नहीं है, सदस्य नहीं होगा या उसके साथ किसी भी रूप में सहयुक्त नहीं होगा; या
(ग) प्रेस से सम्पर्क नहीं करेगा या किसी पुस्तक, पत्र या अन्य दस्तावेज का प्रकाशन नहीं करेगा या प्रकाशन नहीं कराएगा । किंतु जहां ऐसा सम्पर्क या प्रकाशन उसके कर्तव्यों के सद्भाविक निर्वहन में है अथवा यह बिल्कुल साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक प्रकृति का अथवा विहित प्रकार का है वहां ऐसा कर सकेगा ।
स्पष्टीकरण-यदि इस बारे में कोई प्रश्न उत्पन्न होता है कि कोई सोसाइटी, संस्था, संगम या संगठन इस उपधारा के खंड (ख) के अधीन बिल्कुल सामाजिक, आमोद-प्रमोदात्मक या धार्मिक प्रकृति का है या नहीं तो उस पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।
(2) कोई बल-सदस्य किन्हीं राजनीतिक प्रयोजनों के लिए या ऐसे किन्हीं अन्य प्रयोजनों के लिए, जो विहित किए जाएं व्यक्तियों के किसी निकाय द्वारा संगठित किसी प्रदर्शन में भाग नहीं लेगा या उसकी किसी बैठक को संबोधित नहीं करेगा या उसमें सम्मिलित नहीं होगा ।]
16. निलंबन के दौरान बल-सदस्यों का उत्तरदायित्व-किसी बल-सदस्य का बल-सदस्य होना उसके पद से निलंबित होने के कारण ही समाप्त नहीं हो जाएगा और उस कालावधि के दौरान वह उन्हीं उत्तरदायित्वों, अनुशासन और शास्तियों के अधीन होगा जिनके अधीन वह कर्तव्यारूढ़ होने पर होता ।
[16क. बल-सदस्य न रह गए व्यक्तियों द्वारा प्रमाणपत्र, आयुध आदि का अभ्यर्पण-(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो किसी कारण बल-सदस्य नहीं रह जाता है, अपना नियुक्ति-प्रमाणपत्र, आयुध, साजसज्जा, वस्त्र और अन्य वस्तुएं, जो उसे बल-सदस्य के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए दी गई हों, ऐसे किसी वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल अभ्यर्पित कर देगा जो उन्हें प्राप्त करने के लिए सशक्त हो ।
(2) कोई व्यक्ति, जो उसको दिए गए नियुक्ति-प्रमाणपत्र, आयुध, साजसज्जा, वस्त्र और अन्य वस्तुओं को उपधारा (1) की अपेक्षानुसार अभ्यर्पित करने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा या अभ्यर्पित करने से इंकार करेगा, दोषसिद्धि पर, कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
(3) इस धारा की कोई बात ऐसी किसी वस्तु को लागू नहीं समझी जाएगी, जो महानिदेशक के आदेशों के अधीन, उस व्यक्ति की सम्पत्ति हो गई जिसे वह दी गई थी ।
[17. कर्तव्य की उपेक्षा आदि के लिए शास्तियां-(1) धारा 9 में अंतर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे प्रत्येक भर्ती किए गए बल-सदस्यों को, जो कर्तव्य के किसी अतिक्रमण का अथवा किसी नियम को या किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किए गए किसी विधिपूर्ण आदेश को जानबूझकर भंग करने या उसकी जानबूझकर उपेक्षा करने का दोषी होगा, अथवा जो अपने पद के कर्तव्यों से अपने को अनुज्ञा के बिना हटा लेगा या जो छुट्टी पर अनुपस्थित रहने पर, उस छुट्टी की समाप्ति पर उचित कारण के बिना अपनी ड्यूटी पर नहीं आएगा अथवा जो भर्ती किए गए बल सदस्य के रूप में अपने कर्तव्य से भिन्न किसी नियोजन के लिए अपने को, प्राधिकार के बिना लगाएगा, या जो कायरता का दोषी होगा, बल की अभिरक्षा में लिया जा सकेगा और दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा ।
(2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन दंडनीय कोई अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होगा ।
(3) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्रीय सरकार, भर्ती किए गए किसी बल-सदस्य द्वारा किए गए और इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध की अथवा भर्ती किए गए किसी बल-सदस्य द्वारा किसी अन्य बल-सदस्य के शरीर या संपत्ति के विरुद्ध किए गए किसी अपराध की जांच करने या उसका विचारण करने के प्रयोजन के लिए किसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट की शक्तियां सहायक महानिरीक्षक, ज्येष्ठ कमांडेंट या कमांडेंट में विनिहित कर सकेगी:
(i) जब अपराधी छुट्टी पर हो या ड्यूटी से अनुपस्थित हो; या
(ii) जब अपराध भर्ती किए गए बल-सदस्य के रूप में अपराधी के कर्तव्यों से संबंधित न हो; या
(iii) जब वह अपराध छोटा हो, भले ही वह अपराध भर्ती किए गए बल-सदस्य के रूप में अपराधी के कर्तव्यों से संबंधित हो; या
(iv) जब ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, ऐसे कमांडेंट के लिए, जिसमें मजिस्ट्रेट की शक्तियां विनिहित हैं, अपराध की जांच या उसका विचारण करना साध्य न हो,
तब उस अपराध की, यदि वह विहित प्राधिकारी जिसकी अधिकारिता की सीमाओं के भीतर अपराध किया गया है ऐसी अपेक्षा करे, जांच या उसका विचारण उस मामले में अधिकारिता रखने वाले मामूली दंड न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा ।
(4) इस धारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह भर्ती किए गए किसी बल-सदस्य को किसी विधि द्वारा दंडनीय बनाए गए किसी अपराध के लिए उस विधि के अधीन अभियोजित किए जाने से अथवा ऐसी किसी विधि के अधीन ऐसी किसी शास्ति या दंड का, जो ऐसे अपराध के लिए इस धारा द्वारा उपबंधित शास्ति या दंड से भिन्न या कठोरतर है भागी होने से निवारित करती है:
परंतु कोई व्यक्ति एक ही अपराध के लिए दो बार दंडित नहीं किया जाएगा ।]
18. 1922 के अधिनियम 22 का बल-सदस्यों को लागू होना-पुलिस (द्रोह उद्दीपन) अधिनियम, 1922, बल-सदस्यों को उसी प्रकार लागू होगा जिस प्रकार वह पुलिस बल-सदस्यों को लागू होता है ।
[19. कुछ अधिनियमों का बल-सदस्यों को लागू न होना-मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) या औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) या औद्योगिक विवादों के अन्वेषण और परिनिर्धारण के संबंध में किसी राज्य में प्रवृत्त किसी तत्स्थानी विधि की कोई बात बल-सदस्यों को लागू नहीं होगी ।]
20. बल-सदस्यों के कार्यों का संरक्षण-(1) किसी ॥। बल-सदस्यों द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए किसी कार्य की बाबत उसके विरुद्ध किए गए वाद या कार्यवाही में उसके लिए यह अभिवचन करना विधिपूर्ण होगा कि वह कार्य उसके द्वारा सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के अधीन किया गया था ।
(2) ऐसा कोई अभिवाक् उस कार्य का निदेश देने वाले आदेश को पेश करके साबित किया जा सकेगा और उसके इस प्रकार साबित किए जाने पर वह ॥। बल-सदस्य उसके द्वारा इस प्रकार किए गए कार्य की बाबत दायित्व से उन्मोचित कर दिया जाएगा, भले ही ऐसा आदेश जारी करने वाले प्राधिकारी की अधिकारिता में कोई त्रुटि रही हो ।
(3) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोई सिविल या दांडिक कार्यवाही, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के किसी उपबंध द्वारा या उसके अनुसरण में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी 1॥। बल-सदस्य के विरुद्ध हो, परिवादित कार्य के किए जाने के पश्चात् तीन मास के अन्दर प्रारंभ की जाएगी अन्यथा नहीं, और ऐसी कार्यवाही तथा उसके कारण भी सूचना संबंध व्यक्ति को और उसके वरिष्ठ अधिकारी को ऐसी कार्यवाही के प्रारम्भ से कम से कम एक मास पूर्व दी जाएगी ।
21. नियम बनाने की शक्ति-(1) केंद्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतः और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे: -
(क) ॥। बल-सदस्यों के वर्गों और श्रेणियों तथा वेतन और पारिश्रमिक का और बल में सेवा की शर्तों का विनियमन;
(ख) इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन किन्हीं कृत्यों को करने के लिए प्राधिकृत 2॥। बल-सदस्यों की शक्तियों और कर्तव्यों का विनियमन;
(ग) 2॥। बल-सदस्यों के लिए सेवा की कालावधि नियत करना;
[(घ) बल सदस्यों को दिए जाने वाले आयुध, साजसज्जा, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का प्रकार और उनकी मात्रा विहित करना;
(ङ) बल-सदस्यों के निवास-स्थान विहित करना;
(च) बल के प्रशासन से संबंधित किसी प्रयोजन के लिए किसी निधि की संस्थापना तथा उसका प्रबंध और विनियमन;
(छ) दंडों का विनियमन और ऐसे प्राधिकारी विहित करना, जिन्हें दंड के अथवा जुर्माने के परिहार के या अन्य दंड के आदेशों से अपीलें की जाएंगी और ऐसी अपीलों को निपटाने के लिए अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;
(ज) इस अधिनियम के अधीन बल-अभिरक्षा से संबंधित विषयों का, जिनके अंतर्गत व्यक्तियों को ऐसी अभिरक्षा में लेने के लिए अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया है, विनियमन करना;
(झ) इस अधिनियम के अधीन अपराधों से संबंधित मामलों के निपटाने से संबंधित विषयों का विनियमन करना और उन स्थानों को, जिनमें इस अधिनियम के अधीन दोषसिद्ध व्यक्तियों को परिरुद्ध किया जा सकेगा, विनिर्दिष्ट करना;
(ञ) ऐसा कोई अन्य विषय जो अधिरोपित किया जाना है या किया जाए अथवा जिसके संबंध में नियम इस अधिनियम के अधीन बनाए जाने अपेक्षित हैं ।]
[(1) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
अनुसूची
(धारा 7 देखिए)
क ख रेल संरक्षण बल अधिनियम, 1957 के अधीन रेल संरक्षण बल का सदस्य नियुक्त किया गया है और उसमें बल-सदस्य की शक्तियां, कृत्य और विशेषाधिकार निहित किए गए हैं ।
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