जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969
(1969 का अधिनियम संख्यांक 18)
[31 मई, 1969]
जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण के विनियमन और तत्संबद्ध विषयों का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के बीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) यह अधिनियम जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह किसी राज्य में उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे :
परन्तु किसी राज्य के विभिन्न भागों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
2. परिभाषाएं और निर्वचन-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) जन्म" से जीवित-जन्म या मृत-जन्म अभिप्रेत है ;
(ख) मृत्यु" से जीवित-जन्म हो जाने के पश्चात् किसी भी समय जीवन के सब लक्षणों का स्थायी तौर पर विलोपन अभिप्रेत है ;
(ग) भ्रूण-मृत्यु" से गर्भाधान के उत्पाद का, गर्भ चाहे जितने समय का हो, अपनी माता से पूर्ण निष्कासन या निष्कर्षण से पूर्व जीवन के सब लक्षणों का अभाव हो जाना अभिप्रेत है ;
(घ) जीवित-जन्म" से गर्भाधान के ऐसे उत्पाद का, गर्भ चाहे जितने समय का हो, अपनी माता से पूर्ण निष्कासन या निष्कर्षण अभिप्रेत है, जो ऐसे निष्कासन या निष्कर्षण के पश्चात् श्वास लेता है या जीवन का कोई अन्य लक्षण दर्शित करता है और ऐसे जन्म वाला प्रत्येक उत्पाद जीवित-जात समझा जाता है ;
(ङ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(च) किसी संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में राज्य सरकार" से उसका प्रशासक अभिप्रेत है ;
(छ) मृत-जन्म" से ऐसी भ्रूण-मृत्यु अभिप्रेत है जहां गर्भाधान का उत्पाद कम से कम विहित गर्भावधि प्राप्त कर चुका है ।
(2) इस अधिनियम में किसी ऐसी विधि के प्रति, जो किसी क्षेत्र में प्रवृत्त नहीं है, निर्देश का उस क्षेत्र के संबंध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के प्रति, यदि कोई हो, निर्देश है ।
अध्याय 2
रजिस्ट्रीकरण स्थापन
3. भारत का महारजिस्ट्रार-(1) केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी व्यक्ति को भारत के महारजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त कर सकेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार, ऐसे अन्य अधिकारी भी, ऐसे पदनामों से, जैसे वह ठीक समझे, महारजिस्ट्रार के इस अधिनियम के अधीन ऐसे कृत्यों के, जिनका निर्वहन करने के लिए वह उन्हें समय-समय पर प्राधिकृत करे, महारजिस्ट्रार के अधीक्षण और निदेशन के अधीन निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए नियुक्त कर सकेगी ।
(3) महारजिस्ट्रार उन राज्यक्षत्रों में, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण के बारे में साधारण निदेश जारी कर सकेगा और जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण के विषय के मुख्य रजिस्ट्रारों के क्रियाकलाप के समन्वय और एकीकरण के लिए कदम उठाएगा और उक्त राज्यक्षेत्रों में इस अधिनियम की कार्यान्वयन विषयक वार्षिक रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगा ।
4. मुख्य रजिस्ट्रार-(1) राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी राज्य के लिए एक मुख्य रजिस्ट्रार नियुक्त कर सकेगी ।
(2) राज्य सरकार, ऐसे अन्य अधिकारी भी, ऐसे पदनामों से, जैसे वह ठीक समझे, मुख्य रजिस्ट्रार के ऐसे कृत्यों का जिनका निर्वहन करने के लिए वह उन्हें समय-समय पर प्राधिकृत करे, मुख्य रजिस्ट्रार के अधीक्षण और निदेशन के अधीन निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए, नियुक्त कर सकेगी ।
(3) राज्य सरकार द्वारा दिए गए निदेशों के, यदि कोई हों, अध्यधीन रहते हुए मुख्य रजिस्ट्रार किसी राज्य में इस अधिनियम के उपबन्धों और तद्धीन बनाए गए नियमों और किए गए आदेशों के निष्पादन के लिए मुख्य कार्यपालक प्राधिकारी होगा ।
(4) मुख्य रजिस्ट्रार राज्य में रजिस्ट्रीकरण के कार्य के समन्वय, एकीकरण और पर्यवेक्षण के लिए समुचित अनुदेश निकाल कर या अन्यथा रजिस्ट्रीकरण की दक्ष पद्धति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगा तथा उस राज्य में इस अधिनियम के कार्यान्वयन के बारे में एक रिपोर्ट, ऐसी रीति से और ऐसे अन्तरालों पर, जिन्हें विहित किया जाए, धारा 19 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट सांख्यिकीय रिपोर्ट के साथ तैयार करेगा और राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा ।
5. रजिस्ट्रीकरण खंड-राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, राज्य के भीतर के राज्यक्षेत्र को ऐसे रजिस्ट्रीकरण खण्डों में, जिन्हें वह ठीक समझे, विभक्त कर सकेगी और विभिन्न रजिस्ट्रीकरण खण्डों के लिए विभिन्न नियम विहित कर सकेगी ।
6. जिला रजिस्ट्रार-(1) राज्य सरकार, प्रत्येक राजस्व जिले के लिए एक जिला रजिस्ट्रार और उतने अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार नियुक्त कर सकेगी जितने वह ठीक समझे और जो जिला रजिस्ट्रार के साधारण नियंत्रण और निदेशन के अध्यधीन रहते हुए, जिला रजिस्ट्रार के ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेंगे जिनका निर्वहन करने के लिए जिला रजिस्ट्रार उन्हें समय-समय पर प्राधिकृत करे ।
(2) मुख्य रजिस्ट्रार के निदेशन के अध्यधीन रहते हुए, जिला रजिस्ट्रार जिले में के जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण का अधीक्षण करेगा तथा इस अधिनियम के उपबन्धों और मुख्य रजिस्ट्रार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए समय-समय पर निकाले गए आदेशों का निष्पादन जिले में करने के लिए उत्तरदायी होगा ।
7. रजिस्ट्रार-(1) राज्य सरकार नगरपालिका, पंचायत या अन्य स्थानीय प्राधिकारी की अधिकारिता के भीतर का क्षेत्र समाविष्ट करने वाले प्रत्येक स्थानीय क्षेत्र के लिए या किसी अन्य क्षेत्र के लिए या उनमें से दो या अधिक के समुच्चय के लिए एक रजिस्ट्रार नियुक्त कर सकेगी:
परन्तु राज्य सरकार किसी नगरपालिका, पंचायत या अन्य स्थानीय प्राधिकारी की दशा में उसके किसी अधिकारी या, अन्य कर्मचारी को रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त कर सकेगी ।
(2) प्रत्येक रजिस्ट्रार इस प्रयोजन के लिए रखे गए रजिस्टर में धारा 8 या धारा 9 के अधीन उसे दी गई इत्तिला, फीस या ईनाम के बिना दर्ज करेगा तथा अपनी अधिकारिता के भीतर होने वाले प्रत्येक जन्म और प्रत्येक मृत्यु के विषय में स्वयं जानकारी प्राप्त करने के लिए पूरी सावधानी से कदम उठाएगा तथा रजिस्ट्रीकरण के लिए अपेक्षित विशिष्टियों के अभिनिश्चयन और रजिस्ट्रीकरण के लिए भी कदम उठाएगा ।
(3) प्रत्येक रजिस्ट्रार का कार्यालय उस स्थानीय क्षेत्र में होगा जिसके लिए वह नियुक्त किया गया हो ।
(4) प्रत्येक रजिस्ट्रार जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजन के लिए अपने कार्यालय में ऐसे दिनों और ऐसे समयों पर, जिनका मुख्य रजिस्ट्रार निदेश दे, हाजिर रहेगा और रजिस्ट्रार के कार्यालय के बाहरी द्वार पर या उसके पास के किसी सहजदृश्य स्थान पर एक बोर्ड लगवाएगा जिस पर उसका नाम तथा जिस स्थानीय क्षेत्र के लिए वह नियुक्त हो उसका जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रार तथा उसकी हाजिरी के दिन और घंटे स्थानीय भाषा में लिखे होंगे ।
(5) मुख्य रजिस्ट्रार के पूर्व अनुमोदन से रजिस्ट्रार अपनी अधिकारिता के विनिर्दिष्ट क्षेत्रों के सम्बन्ध में उप-रजिस्ट्रार नियुक्त कर सकेगा और उन्हें अपनी कोई या सभी शक्तियां और कर्तव्य सौंप सकेगा ।
अध्याय 3
जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण
8. जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण कराने के लिए अपेक्षित व्यक्ति-(1) नीचे विनिर्दिष्ट व्यक्तियों का यह कर्तव्य होगा कि वे धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा विहित प्ररूपों में प्रविष्ट किए जाने के लिए अपेक्षित विभिन्न विशिष्टियों की इत्तिला अपने सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार, ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, मौखिक या लिखित रूप में रजिस्ट्रार को दें या दिलवाएं,-
(क) खण्ड (ख) से (ङ) तक में निर्दिष्ट स्थान से भिन्न किसी घर में, चाहे वह निवासीय हो या अनिवासीय, हुए जन्म और मृत्यु की बाबत, उस घर का ऐसा मुखिया, या यदि उस घर में एक से अधिक गृहस्थियां निवास करती हों तो उस गृहस्थी का ऐसा मुखिया, जो उस घर या गृहस्थी द्वारा मान्य मुखिया हो और यदि किसी ऐसी कालावधि के दौरान, जिसमें जन्म या मृत्यु की रिपोर्ट की जानी हो, किसी समय ऐसा व्यक्ति घर में उपस्थित न हो तो मुखिया का वह निकटतम संबंधी जो घर में उपस्थित हो और ऐसे किसी व्यक्ति की अनुपस्थिति में उक्त कालावधि के दौरान उसमें उपस्थित सबसे बड़ा वयस्थ पुरुष ;
(ख) किसी अस्पताल, स्वास्थ्य केन्द्र, प्रसूति या परिचर्या गृह या वैसी ही किसी संस्था में जन्म या मृत्यु की बाबत, वहां का भारसाधक चिकित्सक अधिकारी या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई व्यक्ति ;
(ग) जेल में जन्म या मृत्यु की बाबत, जेल का भारसाधक जेलर ;
(घ) किसी चावड़ी, छत्र, होस्टल, धर्मशाला, भोजनालय, वासा, पांथशाला बैरक, ताड़ीखाना या लोक अभिगम स्थान में जन्म या मृत्यु की बाबत, वहां का भारसाधक व्यक्ति ;
(ङ) लोक स्थान में अभित्यक्त पाए गए किसी नवजात शिशु या शव की बाबत, ग्राम की दशा में ग्रामणी या ग्राम का अन्य तत्स्थानी अधिकारी और अन्यत्र स्थानीय पुलिस थाने का भारसाधक आफिसर:
परन्तु कोई व्यक्ति जो ऐसे शिशु या शव को पाता है या जिसके भारसाधन में ऐसा शिशु या शव रखा जाए, वह उस तथ्य को उस ग्रामणी या पूर्वोक्त अधिकारियों को सूचित करेगा;
(च) किसी अन्य स्थान में, ऐसा व्यक्ति जो विहित किया जाए ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार किसी रजिस्ट्रीकरण खण्ड में विद्यमान दशाओं को ध्यान में रखते हुए, आदेश द्वारा, यह अपेक्षित कर सकेगी कि ऐसी कालावधि के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, उपधारा (1) के खण्ड (क) में निर्दिष्ट घर में जन्म और मृत्यु के सम्बन्ध में इत्तिला उस खण्ड में विनिर्दिष्ट व्यक्तियों के बजाय वह व्यक्ति देगा जो राज्य सरकार द्वारा पदनाम से इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया गया हो ।
9. बागान में जन्म और मृत्यु के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध-किसी बागान में जन्म और मृत्यु की दशा में इस बागान का अधीक्षक धारा 8 में निर्दिष्ट इत्तिला रजिस्ट्रार को देगा या दिलवाएगा:
परन्तु धारा 8 की उपधारा (1) के खण्ड (क) से (च) तक में निर्दिष्ट व्यक्ति उस बागान के अधीक्षक को आवश्यक विशिष्टियां देंगे ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में बागान" पद से चार हैक्टर से अन्यून विस्तार की ऐसी भूमि अभिप्रेत है जो चाय, काफी, काली मिर्च, रबड़, इलायची, सिनकोना या ऐसे अन्य उत्पादों को, जो राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, उपजाने के लिए तैयार की जा रही है या जिसमें ऐसी उपज वस्तुतः होती है तथा बागान का अधीक्षक" पद से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो बागान के श्रमिकों या बागान के कार्य का भार या अधीक्षण रखता हो, चाहे वह प्रबन्धक, अधीक्षक या किसी अन्य नाम से पुकार जाता हो ।
10. जन्म और मृत्यु की सूचना देने और मृत्यु के कारण को प्रमाणित करने का कुछ व्यक्तियों का कर्तव्य-(1) (i) जन्म या मृत्यु के समय उपस्थित दाई या किसी अन्य चिकित्सीय या स्वास्थ्य परिचारक का,
(ii) शवों के व्ययन के लिए अलग कर दिए गए किसी स्थान के प्रबन्धक या स्वामी या ऐसे स्थान पर उपस्थित रहने के लिए स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अपेक्षित किसी व्यक्ति का, अथवा
(iii) किसी अन्य व्यक्ति का, जिसे राज्य सरकार उसके पदनाम से इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे,
यह कर्तव्य होगा कि वह प्रत्येक ऐसे जन्म या मृत्यु या दोनों की, जिसमें उसने परिचर्या की हो या वह उपस्थित था, या जो ऐसे क्षेत्र में, जैसा विहित किया जाए, हुई है, सूचना रजिस्ट्रार को इतने समय के भीतर और ऐसी रीति से दे जिसे विहित किया जाए ।
(2) किसी क्षेत्र में इस निमित्त प्राप्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार यह अपेक्षा कर सकेगी कि मृत्यु के कारण का प्रमाणपत्र, ऐसे व्यक्ति से और ऐसे प्ररूप से, जो विहित किया जाए, रजिस्ट्रार द्वारा अभिप्राप्त किया जाएगा ।
(3) जहां राज्य सरकार ने उपधारा (2) के अधीन यह अपेक्षा की हो कि मृत्यु के कारण का प्रमाणपत्र अभिप्राप्त किया जाए वहां उस व्यक्ति की मृत्यु की दशा में, जो अपनी अन्तिम बीमारी के दौरान किसी चिकित्सा-व्यवसायी की परिचर्या में था, उस व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात् तत्काल वह चिकित्सा-व्यवसायी कोई फीस लिए बिना ऐसे व्यक्ति को, जो इस अधिनियम के अधीन किसी मृत्यु से संबद्ध इत्तिला देने के लिए अपेक्षित हो, मृत्यु के कारण के बारे में, अपने सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार कथन करते हुए, प्रमाणपत्र देगा, और ऐसा व्यक्ति वह प्रमाणपत्र प्राप्त करेगा और इस अधिनियम की अपेक्षानुसार मृत्यु से संबद्ध इत्तिला देते समय रजिस्ट्रार को परिदत्त करेगा ।
11. इत्तिला देने वाले का रजिस्टर पर हस्ताक्षर करना-प्रत्येक व्यक्ति, जिसने रजिस्ट्रार को इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित कोई इत्तिला मौखिक रूप में दी हो, इस निमित्त रखे गए रजिस्टर में अपना नाम, वर्णन और निवास-स्थान लिखेगा तथा यदि वह लिख नहीं सकता है तो रजिस्टर में अपने नाम, वर्णन और निवास-स्थान के सामने अपना अंगुष्ठ-चिह्न लगाएगा और ऐसी दशा में वे विशिष्टियां रजिस्ट्रार द्वारा लिखी जाएंगी ।
12. इत्तिला देने वाले को रजिस्ट्रीकरण की प्रविष्टियों के उद्धरणों का दिया जाना-जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण पूर्ण होते ही, रजिस्ट्रार रजिस्टर में से उस जन्म या मृत्यु से सम्बद्ध विहित विशिष्टियों का अपने हस्ताक्षर सहित उद्धरण उस व्यक्ति को मुफ्त देगा जिसने धारा 8 या धारा 9 के अधीन इत्तिला दी ।
13. जन्म और मृत्यु का विलम्बित रजिस्ट्रीकरण-(1) जिस जन्म या मृत्यु की इत्तिला तदर्थ विनिर्दिष्ट कालावधि के अवसान के पश्चात्, किन्तु उसके होने के तीस दिन के भीतर, रजिस्ट्रार को दी जाए, वह ऐसी विलम्ब-फीस, जो विहित की जाए, दिए जाने पर रजिस्ट्रीकृत की जाएगी ।
(2) जिस जन्म या मृत्यु की विलम्बित इत्तिला उसके होने के तीस दिन के पश्चात् किन्तु एक वर्ष के भीतर, रजिस्ट्रार को दी जाए वह विहित प्राधिकारी की लिखित अनुज्ञा से और विहित फीस दिए जाने तथा नोटरी पब्लिक या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी के समक्ष शपथित शपथ-पत्र के पेश किए जाने पर ही रजिस्ट्रीकृत की जाएगी ।
(3) जो जन्म या मृत्यु होने के एक वर्ष के भीतर रजिस्ट्रीकृत नहीं की गई हो, वह उस जन्म या मृत्यु की शुद्धता का सत्यापन करने के पश्चात् प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट या प्रेसिडेन्सी मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए आदेश पर और विहित फीस दिए जाने पर ही रजिस्ट्रीकृत की जाएगी ।
(4) इस धारा के उपबंध ऐसी किसी कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न डालेंगे जो किसी जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण उसके लिए, विनिर्दिष्ट समय के भीतर कराने में किसी व्यक्ति के असफल रहने पर उसके विरुद्ध की जा सकती हो और ऐसे किसी जन्म या मृत्यु को ऐसी किसी कार्रवाई के लम्बित रहने के दौरान रजिस्ट्रीकृत किया जा सकेगा ।
14. बालक के नाम का रजिस्ट्रीकरण-जहां किसी बालक का जन्म नाम के बिना रजिस्ट्रीकृत किया गया हो वहां ऐसे बालक की माता या पिता या संरक्षक बालक के नाम के सम्बन्ध में इत्तिला, या तो मौखिक या लिखित रूप में, रजिस्ट्रार को विहित कालावधि के भीतर देगा और तब रजिस्ट्रार ऐसे नाम को रजिस्टर में दर्ज करेगा और प्रविष्टि को आद्यक्षरित करेगा और उस पर तारीख डालेगा ।
15. जन्म और मृत्यु के रजिस्टर में प्रविष्टि को ठीक या रद्द करना-यदि रजिस्टर को समाधान प्रदान करने वाले रूप में यह साबित कर दिया जाए कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा रखे गए रजिस्टर में जन्म या मृत्यु की कोई प्रविष्टि प्ररूपतः या सारतः गलत है अथवा कपटपूर्वक या अनुचित तौर पर की गई है तो वह ऐसे नियमों के अध्यधीन रहते हुए, जो राज्य सरकार द्वारा, ऐसी शर्तों की बाबत जिन पर और ऐसी परिस्थितियों की बाबत जिनमें ऐसी प्रविष्टियों को ठीक या रद्द किया जा सकेगा, बनाए जाएं, मूल प्रविष्टि में कोई परिवर्तन किए बिना पार्श्व में यथोचित प्रविष्टि करके उस प्रविष्टि की गलती को ठीक कर सकेगा या उस प्रविष्टि को रद्द कर सकेगा तथा पार्श्व-प्रविष्टि पर अपने हस्ताक्षर करेगा और उसमें ठीक या रद्द करने की तारीख जोड़ देगा ।
अध्याय 4
अभिलेखों और सांख्यिकियों को रखना
16. विहित प्ररूप में रजिस्टरों का रजिस्ट्रारों द्वारा रखा जाना-(1) प्रत्येक रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रीकरण क्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए, जिसके सम्बन्ध में वह अधिकारिता का प्रयोग करता हो, विहित प्ररूप में जन्म और मृत्यु का रजिस्टर रखेगा ।
(2) मुख्य रजिस्ट्रार ऐसे प्ररूपों और अनुदेशों के अनुसार, जो समय-समय पर विहित किए जाएं, जन्म और मृत्यु की प्रविष्टियां करने के लिए पर्याप्त संख्या में रजिस्टर छपपवाएगा और प्रदाय कराएगा; तथा ऐसे प्ररूपों की स्थानीय भाषा में एक प्रति प्रत्येक रजिस्ट्रार के कार्यालय के बाह्य द्वार पर या उसके निकट किसी सहजदृश्य स्थान पर लगाई जाएगी ।
17. जन्म और मृत्यु के रजिस्टर की तलाशी-(1) राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अध्यधीन रहते हुए, जिनके अन्तर्गत फीस और डाक-महसूल के संदाय से संबद्ध नियम भी हैं, कोई व्यक्ति-
(क) जन्म और मृत्यु के रजिस्टर की किसी प्रविष्टि की रजिस्ट्रार द्वारा तलाश करवा सकेगा; तथा
(ख) ऐसे रजिस्टर में से किसी जन्म या मृत्यु से सम्बद्ध कोई उद्धरण अभिप्राप्त कर सकेगा:
परन्तु किसी व्यक्ति को दिया गया मृत्यु सम्बन्धी कोई उद्धरण, मृत्यु का रजिस्टर में यथा प्रविष्ट मृत्यु के कारणों से संबंधित विशिष्टियों को प्रकट नहीं करेगा ।
(2) इस धारा के अधीन दिए गए सभी उद्धरण भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 76 के उपबन्धों के अनुसार, रजिस्ट्रार द्वारा या किसी अन्य ऐसे अधिकारी द्वारा, जिसे ऐसे उद्धरण देने के लिए राज्य सरकार ने प्राधिकृत किया हो, प्रमाणित किए जाएंगे और उस जन्म या मृत्यु को जिससे वह प्रविष्टि संबद्ध हो, साबित करने के प्रयोजन के लिए साक्ष्य में ग्राह्य होंगे ।
18. रजिस्ट्रीकरण कार्यालयों का निरीक्षण- रजिस्ट्रीकरण कार्यालयों का निरीक्षण और उनमें रखे गए रजिस्टरों की परीक्षा ऐसी रीति से, और ऐसे प्राधिकारी द्वारा जिसे जिला रजिस्ट्रार विनिर्दिष्ट करे, किया जाएगा ।
19. कालिक विवरणियों का रजिस्ट्रारों द्वारा मुख्य रजिस्ट्रार को संकलन के लिए भेजा जाना-(1) प्रत्येक रजिस्ट्रार मुख्य रजिस्ट्रार को या उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किसी अन्य अधिकारी को ऐसे अन्तरालों पर और ऐसे प्ररूप में, जो विहित किए जाएं, उस रजिस्ट्रार द्वारा रखे गए रजिस्टर की जन्म और मृत्यु की प्रविष्टियों के बारे में एक विवरणी भेजेगा ।
(2) मृत्यु रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रारों द्वारा विवरणियों में दी गई इत्तिला का संकलन कराएगा और वर्ष के दौरान रजिस्ट्रीकृत जन्म और मृत्यु की सांख्यिकीय रिपोर्ट ऐसे अन्तरालों पर और ऐसे प्ररूप में, जो विहित किए जाएं, सर्वसाधारण की जानकारी के लिए प्रकाशित करेगा ।
अध्याय 5
प्रकीर्ण
20. भारत से बाहर नागरिकों के जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण के बारे में विशेष उपबन्ध-(1) उन नियमों के अध्यधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए जाएं, महारजिस्ट्रार भारत के नागरिकों के भारत से बाहर जन्म और मृत्यु विषयक ऐसी इत्तिला रजिस्ट्रीकृत कराएगा जो उसे नागरिकता अधिनियम, 1955 (1955 का 57) के अधीन बनाए गए और भारतीय कौंसल कार्यालयों में ऐसे नागरिकों के रजिस्ट्रीकरण संबंधी नियमों के अधीन प्राप्त हों और प्रत्येक ऐसा रजिस्ट्रीकरण भी इस अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप में किया गया समझा जाएगा ।
(2) भारत से बाहर जन्मे ऐसे बालक की दशा में जिसकी बाबत उपधारा (1) में यथा उपन्धित इत्तिला प्राप्त न हुई हो, यदि बालक के माता-पिता भारत में बसने की दृष्टि से भारत वापस आएं तो वे बालक के भारत पंहुचने की तारीख से साठ दिन के भीतर किसी भी समय बालक का जन्म इस अधिनियम के अधीन उसी रीति से रजिस्ट्रीकृत करा सकेंगे मानो बालक का जन्म भारत में हुआ था और धारा 13 के उपबन्ध ऐसे बालक के जन्म को पूर्वोक्त साठ दिन की कालावधि के अवसान के पश्चात् लागू होंगे ।
21. जन्म या मृत्यु के सम्बन्ध में इत्तिला अभिप्राप्त करने की रजिस्ट्रार की शक्ति-रजिस्ट्रार किसी व्यक्ति से, या तो मौखिक या लिखित रूप से, यह अपेक्षा कर सकेगा कि जिस परिक्षेत्र में वह व्यक्ति निवास करता है उसमें हुए जन्म या मृत्यु संबंधी कोई इत्तिला जो उसे है, वह उसे दे और वह व्यक्ति ऐसी अपेक्षा का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगा ।
22. निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार किसी राज्य सरकार को ऐसे निदेश दे सकेगी जो इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी आदेश के उपबन्धों में से किसी का उस राज्य में निष्पादन करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों ।
23. शास्तियां-(1) कोई व्यक्ति जो-
(क) धारा 8 और 9 के किन्हीं उपबन्धों के अधीन ऐसी इत्तिला, जिसे देना उसका कर्तव्य है, देने में युक्तियुक्त कारण के बिना असफल रहेगा; अथवा
(ख) जन्म और मृत्यु के किसी रजिस्टर में लिखे जाने के प्रयोजन से कोई ऐसी इत्तिला देगा या दिलवाएगा जिसे वह जानता है या विश्वास करता है कि वह उन विशिष्टियों में से किसी के बारे में मिथ्या है जिन्हें जानना और जिनका रजिस्ट्रीकृत किया जाना अपेक्षित है; अथवा
(ग) धारा 11 द्वारा अपेक्षित रूप से रजिस्टर में अपना नाम, वर्णन और निवास-स्थान लिखने या अपना अंगुष्ठ-चिह्न लगाने से इन्कार करेगा,
वह जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(2) कोई रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार जो अपनी अधिकारिता में होने वाले किसी जन्म या मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण में या धारा 19 की उपधारा (1) द्वारा अपेक्षित विवरणियां भेजने में उपेक्षा या उससे इन्कार युक्तियुक्त कारण के बिना करेगा वह जुर्माने से जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(3) कोई चिकित्सास-व्यवसायी, जो धारा 10 की उपधारा (3) के अधीन प्रमाणपत्र देने में उपेक्षा या उससे इन्कार करेगा और कोई व्यक्ति जो ऐसा प्रमाणपत्र परिदत्त करने में उपेक्षा या उससे इन्कार करेगा वह जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(4) कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के किसी ऐसे उपबन्ध का, युक्तियुक्त कारण के बिना, उल्लंघन करेगा, जिसके उल्लंघन के लिए इस धारा में किसी शास्ति का उपबन्ध नहीं है, वह जुर्माने से, जो दस रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(5) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन अपराध का विचारण मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षेपतः किया जाएगा ।
24. अपराधों के प्रशमन की शक्ति-(1) ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं मुख्य रजिस्ट्रार द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी इस अधिनियम के अधीन किन्हीं दाण्डिक कार्यवाहियों के संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात्, किसी व्यक्ति से, जिसने इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया हो या जिस पर अपराध करने का युक्तियुक्त संदेह हो, उस अपराध के प्रशमन के तौर पर पचास रुपए से अनधिक धनराशि प्रतिगृहीत कर सकेगा ।
(2) ऐसी धनराशि दे देने पर वह व्यक्ति उन्मोचित कर दिया जाएगा और ऐसे अपराध की बाबत उसके विरुद्ध कोई आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी ।
25. अभियोजन के लिए मंजूरी-इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन, मुख्य रजिस्ट्रार द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी द्वारा ही संस्थित किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
26. रजिस्ट्रारों और उप-रजिस्ट्रारों का लोक-सेवक समझा जाना-सभी रजिस्ट्रार और उप-रजिस्ट्रार, जब वे इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी आदेश के उपबंधों के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या कार्य करते तात्पर्यित हों, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे ।
27. शक्तियों का प्रत्यायोजन-राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य कोई शक्ति (जो धारा 30 के अधीन नियम बनाने की शक्ति से भिन्न हो) ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, जो निदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, अध्यधीन रहते हुए, राज्य सरकार के अधीनस्थ ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा भी, जो निदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रयोक्तव्य होंगी ।
28. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए परित्राण-(1) इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किस आदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही सरकार के, महारजिस्ट्रार के, किसी रजिस्ट्रार के, या किसी अन्य व्यक्ति के, जो इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति का प्रयोग या किसी कर्तव्य का पालन कर रहा हो, विरुद्ध न होगी ।
(2) कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी आदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के होते हुए या होने से संभाव्य किसी नुकसान के लिए सरकार के विरुद्ध नहीं होगी ।
29. इस अधिनियम का 1886 के अधिनियम संख्यांक 6 के अल्पीकरण में न होना-इस अधिनियम की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह जन्म, मृत्यु और विवाह रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1886 के उपबन्धों के अल्पीकरण में है ।
30. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम शासकीय राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतः और पूर्वगामी उपबन्ध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे-
(क) इस अधिनियम के अधीन रखे जाने के लिए अपेक्षित जन्म और मृत्यु के रजिस्टरों के प्ररूप;
(ख) वह कालावधि जिसके भीतर तथा वह प्ररूप और रीति जिसमें रजिस्ट्रार को धारा 8 के अधीन इत्तिला दी जानी चाहिए;
(ग) वह कालावधि जिसके भीतर और वह रीति जिससे धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन जन्म और मृत्यु की सूचना दी जाएगी;
(घ) वह व्यक्ति जिससे और वह प्ररूप जिसमें मृत्यु के कारण का प्रमाणपत्र अभिप्राप्त किया जाएगा;
(ङ) वे विशिष्टियां जिनका उद्धरण धारा 12 के अधीन दिया जा सकेगा;
(च) वह प्राधिकारी जो धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन जन्म या मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण की अनुज्ञा दे सकेगा;
(छ) धारा 13 के अधीन किए गए रजिस्ट्रीकरण के लिए संदेय फीसें;
(ज) धारा 4 की उपधारा (4) के अधीन मुख्य रजिस्ट्रार द्वारा रिपोर्टों का प्रस्तुत किया जाना;
(झ) जन्म और मृत्यु के रजिस्टरों की तलाशी और ऐसी तलाशी के लिए तथा रजिस्टरों में से उद्धरण दिए जाने के लिए फीसें;
(ञ) वे प्ररूप जिनमें और वे अन्तराल जिन पर विवरणियां और सांख्यिकीय रिपोर्ट धारा 19 के अधीन दी और प्रकाशित की जाएगी;
(ट) रजिस्ट्रारों द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टरों और अन्य अभिलेखों की अभिरक्षा, उनका पेश किया जाना और अन्तरण;
(ठ) जन्म और मृत्यु के रजिस्टर में गलतियों को ठीक करना और उनकी प्रविष्टियों को रद्द करना;
(ड) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए ।
[(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, राज्य विधान-मण्डल के समक्ष रखा जाएगा ।]
31. निरसन और व्यावृत्ति-(1) धारा 29 के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए यह है कि किसी राज्य या उसके भाग में प्रवृत्त विधि का उतना अंश, जितने का संबंध इस अधिनियम के अन्तर्गत विषयों से है, उस राज्य या भाग में इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के समय से, यथास्थिति, उस राज्य या भाग में निरसित हो जाएगा ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, ऐसी किसी विधि के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई (जिसके अन्तर्गत निकाला गया कोई अनुदेश या निदेश, बनाया गया कोई विनियम या नियम या किया गया कोई आदेश भी है), जहां तक ऐसी बात या कार्रवाई इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हो, पूर्वोक्त उपबन्धों के अधीन ऐसे की गई समझी जाएगी मानो वे उस समय प्रवृत्त थे जब वह बात या कार्रवाई की गई थी और तद्नुसार तब तक प्रवृत्त बनी रहेगी जब तक वह इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या कार्रवाई द्वारा अतिष्ठित न कर दी जाए ।
32. कठिनाई दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को किसी राज्य में प्रभावशील करने में कोई कठिनाई, उनके किसी क्षेत्र में लागू करने में उद्भूत होती है तो केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से, आदेश द्वारा, राज्य सरकार ऐसे उपबन्ध कर सकेगी या ऐसे निदेश दे सकेगी जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए, राज्य सरकार को आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों :
परन्तु इस धारा के अधीन कोई आदेश किसी राज्य के किसी क्षेत्र के सम्बन्ध में उस तारीख को, जब यह अधिनियम उस क्षेत्र में प्रवृत्त हो, दो वर्ष के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
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