कयर उद्योग अधिनियम, 1953
(1953 का अधिनियम संख्यांक 45)
[23 दिसंबर, 1953]
[कयर के विकास के लिए एक बोर्ड की स्थापना करने तथा भारत
से निर्यात किए गए कयर रेशे, कयर सूत और कयर
की बनी वस्तुओं पर उस प्रयोजन के लिए
सीमाशुल्क अधिरोपित करने तथा
उससे सम्बद्ध मामलों के लिए
उपबन्ध करने हेतु
अधिनियम]
संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कयर उद्योग अधिनियम, 1953 है ।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. संघ द्वारा नियंत्रण की समीचीनता के बारे में घोषणा-एतद्द्वारा यह घोषित किया जाता है कि लोकहित में यह समीचीन है कि कयर उद्योग को संघ अपने नियंत्रण में ले ले ।
3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) बोर्ड" से धारा 4 के अधीन गठित कयर बोर्ड अभिप्रेत है;
(ख) उपकर" से धारा 13 द्वारा अधिरोपित सीमाशुल्क अभिप्रेत है;
(ग) कयर" या कयर रेशा" से नारियल के छिलके से निकाला गया रेशा अभिप्रेत है;
(घ) कयर की बनी वस्तुओं" से कयर या कयर सूत से पूर्णतः या अंशतः विनिर्मित चटाई तथा चटाई पट्टियां, नमदे तथा कालीन, रस्से और अन्य वस्तुएं अभिप्रेत हैं;
(ङ) कयर सूत" से कयर की कताई द्वारा प्राप्त सूत अभिप्रेत है;
(च) निर्यात" से उसके व्याकरणिक रूपभेदों तथा सजातीय पदों सहित, उन राज्यक्षेत्रों से, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, भारत से बाहर के किसी ऐसे स्थान को, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त अधिसूचित किसी देश या राज्यक्षेत्र से भिन्न हो, भूमि, समुद्र या वायु-मार्ग द्वारा ले जाना अभिप्रेत है;
(छ) निधि" से धारा 15 में निर्दिष्ट कयर निधि अभिप्रेत है;
(ज) छिलके" से नारियल के छिलके, कच्चे तथा पानी में सड़ाए हुए दोनों ही, अभिप्रेत हैं;
(झ) सदस्य" से बोर्ड का कोई सदस्य अभिप्रेत है;
(ञ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
कयर बोर्ड
4. कयर बोर्ड की स्थापना और उसका गठन-(1) उस तारीख से, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक बोर्ड की स्थापना की जाएगी जो कयर बोर्ड कहलाएगा ।
(2) बोर्ड पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और जिसे जंगम और स्थावर दोनों ही सम्पत्ति के अर्जन, धारण और व्ययन करने तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद ला सकेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा ।
(3) बोर्ड, अध्यक्ष तथा चालीस से अनधिक उतने अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा जितने केन्द्रीय सरकार समचीन समझे और वे उस सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे व्यक्तियों में से नियुक्ति किए जाएंगे जो उसकी राय में निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करने में समर्थ हों: -
(क) नारियल उपजाने वाले तथा छिलके और कयर सूत के उत्पादक;
(ख) छिलके, कयर और कयर सूत के उत्पादन में तथा कयर की बनी वस्तुओं के विनिर्माण में लगे हुए व्यक्ति;
(ग) कयर की बनी वस्तुओं के विनिर्माता;
(घ) कयर और कयर सूत तथा कयर की बनी वस्तुओं के व्यवहारी, जिनमें निर्यातकर्ता तथा अन्तर्देशीय व्यापारी दोनों ही सम्मिलित हैं;
(ङ) संसद्;
(च) नारियल उपजाने वाले प्रधान राज्यों की सरकारें;
(छ) ऐसे अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग, जिनका केन्द्रीय सरकार की राय में बोर्ड में प्रतिनिधित्व होना चाहिए ।
(4) उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट प्रवर्गों में से प्रत्येक से बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, बोर्ड के सदस्यों की पदावधि, उनके द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया, तथा उनमें हुई रिक्तियों को भरने की पद्धति वह होगी, जो विहित की जाए ।
(5) केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी को, जब उस सरकार द्वारा इस निमित्त उसे प्रतिनियुक्त किया जाए तब, बोर्ड की बैठकों में हाजिर होने तथा उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार प्राप्त होगा किन्तु वह मत देने का हकदार नहीं होगा ।
5. कार्यों तथा कार्यवाहियों को रिक्तियां, आदि अविधिमान्य नहीं बनाएगी-इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा किया गया कोई कार्य या की गई कार्यवाहियां केवल इस आधार पर प्रश्नास्पद नहीं की जाएंगी कि, -
(क) बोर्ड में कोई रिक्ति थी या उसके गठन में कोई त्रुटि थी, अथवा
(ख) कोई ऐसा लोप, त्रुटि या अनियमितता हुई थी जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं पड़ता था ।
6. अध्यक्ष के वेतन और भत्ते-अध्यक्ष ऐसे वेतन या भत्तों का हकदार होगा तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य निधि और अन्य विषयों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर नियत की जाएं ।
7. उपाध्यक्ष-बोर्ड अपने सदस्यों में से एक को उपाध्यक्ष निर्वाचित करेगा, जो अध्यक्ष की ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो विहित किए जाएं या जो अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।
8. कार्यपालिका तथा अन्य समितियां-(1) बोर्ड की ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा उसके ऐसे कृत्यों का अनुपालन करने के प्रयोजन के लिए जो विहित किए जाएं या जो बोर्ड कार्यपालिका को प्रत्यायोजित करे उसकी एक कार्यपालिका समिति होगी ।
(2) कार्यपालिका समिति निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, -
(I) अध्यक्ष,
(II) उपाध्यक्ष, और
(III) बोर्ड के सदस्यों द्वारा अपनों में से निर्वाचित पांच अन्य सदस्य, जिनमें से दो से अनधिक सरकारी पदाधिकारी होंगे और एक उन सदस्यों में से होगा जो छिलके, कयर तथा कयर सूत के उत्पादन में तथा कयर की बनी वस्तुओं के विनिर्माण में लगे हुए व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं ।
(3) बोर्ड, ऐसे नियंत्रण तथा निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, अन्य स्थायी समितियां या तदर्थ समितियां गठित कर सकेगा । ये समितियां बोर्ड की किसी शक्ति का प्रयोग करने या बोर्ड के किसी कर्तव्य का निर्वहन करने या किसी ऐसे मामले की, जो बोर्ड उन समितियों को निर्दिष्ट करे, जांच करने या उस पर रिपोर्ट करने तथा उसकी बाबत सलाह देने के लिए होंगी ।
(4) स्थायी समिति केवल बोर्ड के सदस्यों से मिलकर बनेगी ।
(5) तदर्थ समिति में ऐसे व्यक्ति सम्मिलित किए जा सकेंगे जो बोर्ड के सदस्य नहीं हैं, किन्तु उनकी संख्या उस समिति की सदस्य संख्या के आधे से कम होगी ।
9. सचिव तथा कर्मचारिवृन्द-(1) केन्द्रीय सरकार, बोर्ड से परामर्श के पश्चात्, बोर्ड का सचिव नियुक्त करेगी, जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा, जो विहित किए जाएं या जो बोर्ड या अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।
(2) बोर्ड, ऐसे नियंत्रण तथा निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, ऐसे अधिकारियों तथा कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा, जो उसके कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए आवश्यक हों, और उन्हें ऐसे वेतन और भत्ते देगा, जो वह समय-समय पर अवधारित करे ।
(3) बोर्ड का अध्यक्ष, सचिव तथा अन्य अधिकारी और कर्मचारी कोई कार्य, जो इस अधिनियम के अधीन उनके कृत्यों से सम्बद्ध न हो, केन्द्रीय सरकार की मंजूरी के बिना नहीं करेंगे ।
10. बोर्ड के कृत्य-(1) बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण के अधीन कयर उद्योग के विकास की अभिवृद्धि ऐसे उपायों द्वारा करे जैसे वह ठीक समझे ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उसमें निर्दिष्ट उपाय, निम्नलिखित के सम्बन्ध में हो सकेंगे: -
(क) कयर सूत तथा कयर की बनी वस्तुओं के निर्यात में अभिवृद्धि करना तथा उस प्रयोजन के लिए प्रचार करना;
(ख) कयर की बनी वस्तुओं के विनिर्माण के लिए कयर तकलियों तथा करघों को तथा साथ ही कयर की बनी वस्तुओं के विनिर्माताओं को रजिस्टर करके, कयर, कयर सूत तथा कयर की बनी वस्तुओं के निर्यातकर्ताओं को अनुज्ञप्ति देकर तथा ऐसे अन्य समुचित कदम उठाकर, जो विहित किए जाएं, छिलके, कयर सूत तथा कयर की बनी वस्तुओं के उत्पादन को, केन्द्रीय सरकार के पर्यवेक्षण के अधीन विनियमित करना;
(ग) वैज्ञानिक, प्रौद्योगिक तथा आर्थिक अनुसंधान कार्य अपने हाथ में लेना, उसमें सहायता करना या उसे प्रोत्साहन देना, तथा एक या एक से अधिक अनुसंधान संस्थानों को बनाए रखना तथा बनाए रखने में सहायता करना;
(घ) कयर की बनी वस्तुओं के विनिर्माताओं और उसके व्यवहारियों तथा ऐसे अन्य व्यक्तियों से, जो विहित किए जाएं, कयर उद्योग से संबंधित किसी विषय पर आंकड़े संगृहीत करना; इस प्रकार संगृहीत आंकड़ों का या उसके भागों का या उसमें से लिए गए उद्धरणों का प्रकाशन करना;
(ङ) कयर रेशे, कयर सूत तथा कयर की बनी वस्तुओं की श्रेणियों के मानक नियत करना और जब आवश्यक हो तब उनके निरीक्षण की व्यवस्था करना;
(च) नारियल के छिलके, कयर रेशे, कयर सूत तथा कयर की बनी वस्तुओं के भारत में तथा अन्यत्र विपणन में सुधार करना तथा अनुचित प्रतियोगिता को रोकना;
[(चच) विद्युत शक्ति की सहायता से कयर की बनी वस्तुओं के उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करना या ऐसे कारखानों की स्थापना में सहायता देना;]
(छ) छिलके, कयर रेशे तथा कयर सूत के उत्पादकों और कयर की बनी वस्तुओं के विनिर्माताओं को सहकारी संगठन बनाने के लिए बढ़ावा देना;
(ज) छिलके, कयर रेशे तथा कयर सूत के उत्पादकों तथा कयर की बनी वस्तुओं के विनिर्माताओं को लाभप्रद प्रत्यागम सुनिश्चित करना;
(झ) पानी में सड़ाने के स्थानों तथा भांडागारों का अनुज्ञापन और कयर रेशे, कयर सूत तथा कयर की बनी वस्तुओं का, अन्तर्देशीय बाजार तथा निर्यात दोनों के लिए, स्टाक रखने तथा विक्रय करने का अन्यथा विनियमन करना;
(ञ) कयर उद्योग के विकास से सम्बन्धित सभी मामलों में सलाह देना;
(ट) ऐसे अन्य विषय, जो विहित किए जाएं ।
(3) बोर्ड, इस धारा के अधीन के अपने कृत्यों का पालन ऐसे नियमों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए करेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए जाएं ।
11. बोर्ड का विघटन-(1) यदि बोर्ड उसे प्रदत्त शक्तियों के अतिक्रमण में कोई कार्य करता है या नियमों के विरुद्ध या उद्योग के हितों के प्रतिकूल किसी रीति से कार्य करता है ॥। या केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए गए निदेशों के विरुद्ध कार्य करता है, तो केन्द्रीय सरकार बोर्ड से यह कारण दर्शित करने की मांग कर सकेगी कि बोर्ड का विघटन क्यों न किया जाए और यदि कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता या यदि दिए गए स्पष्टीकरण से केन्द्रीय सरकार का समाधान नहीं होता, तो वह बोर्ड को, ऐसी तारीख से, तथा ऐसी अवधि के लिए, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, निलम्बित या विघटित कर सकेगी ।
(2) जब उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन बोर्ड का विघटन कर दिया जाता है, तब-
(क) सभी सदस्य विघटन की तारीख से, ऐसे सदस्यों के रूप में अपना पद रिक्त कर देंगे;
(ख) विघटन की अवधि के दौरान बोर्ड को सभी शक्तियों का प्रयोग तथा कर्तव्यों का निर्वहन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा, जिन्हें केन्द्रीय सरकार, इस निमित्त नियुक्त करे;
(ग) बोर्ड में निहित सभी निधियां और अन्य सम्पत्ति, विघटन की अवधि के दौरान, केन्द्रीय सरकार में निहित होंगी; और
(घ) विघटन की अवधि समाप्त होते ही, बोर्ड का पुनर्गठन इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार किया जाएगा ।
अध्याय 3
कयर रेशे, कयर सूत तथा कयर की बनी वस्तुओं के निर्यात पर नियंत्रण
12. कयर रेशे, कयर सूत तथा कयर की बनी वस्तुओं के निर्यात पर नियंत्रण-कयर रेशे, कयर सूत या कयर की बनी वस्तुओं का निर्यात विहित रीति से बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से जारी की गई अनुज्ञप्ति के अधीन किए जाने से अन्यथा नहीं किया जाएगा और सी कस्टम्स ऐक्ट, 1878 (1878 का 8) के उपबन्ध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो इस धारा द्वारा किए गए उपबन्ध उस अधिनियम की धारा 19 के अधीन जारी की गई अधिसूचना द्वारा किए गए हों:
परन्तु इसमें कोई बात कयर की बनी किसी ऐसी वस्तु को लागू नहीं होगी, जो उन राज्यक्षेत्रों के बाहर, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, डाक द्वारा भेजी गई हों या यात्री के निजी इस्तेमाल के लिए उसके सामान के साथ ले जाई गई हों:
परन्तु यह और कि केन्द्रीय सरकार कयर रेशे, कयर सूत या कयर की बनी वस्तुओं के, भारत से घिरी हुई किसी विदेशी बस्ती को निर्यात, को, इस धारा के प्रवर्तन से या तो पूर्णतया या विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन, छूट दे सकेगी ।
अध्याय 4
वित्त, लेखा तथा लेखापरीक्षा
13. कयर रेशे, कयर सूत तथा कयर की बनी वस्तुओं के निर्यात पर सीमाशुल्क का अधिरोपण-(1) निर्यात किए जाने वाले सभी कयर रेशे, कयर सूत तथा कयर की बनी हुई वस्तुओं पर सीमाशुल्क इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपकर के रूप में उस तारीख से, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, [दो रुपए प्रति क्विंटल से अनधिक की उस दर से] उद्गृहीत और संगृहीत किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार उसी अथवा वैसी ही किसी अधिसूचना द्वारा समय-समय पर नियत करे ।
(2) उपधारा (1) के अधीन उद्गृहीत उपकर, भारतीय टैरिफ अधिनियम, 1934 (1934 का 32) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उद्ग्रहणीय किसी अन्य शुल्क के अतिरिक्त होगा और ऐसे अभिकरणों द्वारा तथा ऐसी रीति से वसूल किया जाएगा, जो विहित की जाए ।
14. उपकर की धनराशि का बोर्ड को संदाय-धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन उद्गृहीत उपकर का आगम प्रथमतः भारत की संचित निधि में जमा किया जाएगा और तत्पश्चात् केन्द्रीय सरकार उस आगम में से उतनी धनराशि जितनी वह ठीक समझे, संग्रहण-व्ययों को काटकर, समय-समय पर बोर्ड को दे सकेगी ।
[14क. केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड को अनुदान-केन्द्रीय सरकार, इस निमित्त संसद् द्वारा विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, अनुदान के तौर पर बोर्ड को ऐसी धनराशियों का संदाय कर सकेगी, जिन्हें केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे ।]
15. निधि का गठन-(1) बोर्ड द्वारा एक निधि बनाई जाएगी, जो कयर निधि कहलाएगी और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे, -
(क) उपकर के आगम जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड को दिए गए हों;
(ख) कोई अन्य फीस जो इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन उद्गृहीत और संगृहीत की जाए;
[(ग) कोई ऐसी धनराशि जो धारा 14क के अधीन अनुदान के तौर पर संदत्त की जाए ।]
(2) निधि का उपयोग बोर्ड के व्यय की तथा धारा 10 में निर्दिष्ट उपायों पर होने वाले खर्चे को पूरा करने के लिए किया जाएगा ।
16. बोर्ड की उधार लेने की शक्तियां-ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त बनाए जाएं, बोर्ड को निधि या किसी अन्य आस्ति की प्रतिभूति पर ऐसे प्रयोजनों के लिए धन उधार लेने की शक्ति होगी जिनके लिए निधि का उपयोग किया जाए ।
[17. लेखा और लेखापरीक्षा-(1) बोर्ड उचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा तथा लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, जिसके अंतर्गत लाभ और हानि लेखा तथा तुलन-पत्र आते हैं, ऐसे प्ररूप में, तैयार करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए ।
(2) बोर्ड के लेखा की, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अन्तरालों पर, जो उसके द्वारा विहित किए जाएं, लेखापरीक्षा की जाएगी और ऐसी लेखापरीक्षा के सम्बन्ध में उपगत कोई भी व्यय बोर्ड द्वारा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।
(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को तथा बोर्ड के लेखाओं की लेखापरीक्षा के सम्बन्ध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को ऐसी लेखापरीक्षा के सम्बन्ध में वे ही अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार प्राप्त होंगे, जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को सरकार लेखाओं की लेखापरीक्षा के सम्बन्ध में प्राप्त हैं और विशिष्टतया उन्हें बहियां, लेखे, सम्बन्धित वाउचर तथा अन्य दस्तावेज और कागज पेश किए जाने की मांग करने और बोर्ड के कार्यालयों में से किसी का भी निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित बोर्ड के लेखे, तद्विषयक लेखापरीक्षा रिपोर्ट सहित, केन्द्रीय सरकार को हर वर्ष भेजे जाएंगे और वह सरकार उन्हें संसद् के हर एक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
अध्याय 5
केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण
18. बोर्ड के कार्यों तथा उसकी कार्यवाहियों पर साधारण नियंत्रण-(1) बोर्ड के सभी कार्य तथा उसकी कार्यवाहियां केन्द्रीय सरकार के नियंत्रणाधीन होंगी, जो बोर्ड द्वारा की गई किसी भी कार्यवाही को रद्द, निलम्बित या उपांतरित, जैसा वह ठीक समझे, कर सकेगी ।
(2) बोर्ड ऐसे निदेशों को कार्यान्वित करेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के दक्षतापूर्ण प्रशासन के लिए उसे जारी किए जाएं ।
(3) बोर्ड के अभिलेख, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा निरीक्षण के लिए सभी उचित समय पर उपलब्ध होंगे ।
19. रिपोर्ट तथा विवरणियां- [(1) बोर्ड, अपने क्रियाकलापों और इस अधिनियम के कार्यकरण के संबंध में पूर्ववर्ती वर्ष के लिए एक वार्षिक रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को और ऐसे अन्य प्राधिकारी को, जो विहित किया जाए, प्रस्तुत करेगा, और ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट की प्रति, केन्द्रीय सरकार को उसके प्राप्त होने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखी जाएगी ।]
(2) बोर्ड कयर उद्योग से सम्बन्धित ऐसी अन्य विवरणियां तैयार तथा प्रस्तुत करेगा, जिनकी उस सरकार द्वारा समय-समय पर अपेक्षा की जाए ।
अध्याय 6
प्रकीर्ण
20. शास्तियां-(1) यदि कोई व्यक्ति धारा 12 के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा, तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(2) किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में, जो धारा 12 के उपबन्धों का उल्लंघन करने का प्रयत्न करेगा या उल्लंघन का दुष्प्रेरण करेगा, यह समझा जाएगा कि उसने उन उपबन्धों का उल्लंघन किया है ।
21. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि धारा 12 के अधीन कोई अपराध करने वाला व्यक्ति कम्पनी है, तो प्रत्येक व्यक्ति, जो उस उल्लंघन के समय कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे उल्लंघन के दोषी समझे जाएंगे तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे:
परन्तु इस धारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि ऐसा अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसा अपराध किए जाने के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां धारा 12 के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित होता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा
(ख) फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
22. अभियोजन के लिए केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी-इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए कोई भी अभियोजन, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना, संस्थित नहीं किया जाएगा ।
23. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी भी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
24. प्रत्यायोजन की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य किसी शक्ति का प्रयोग ऐसे मामलों में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा भी किया जा सकेगा जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
25. अधिनियम के प्रवर्तन का निलम्बन-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का समाधान हो जाता है कि ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो गई हैं जिनमें यह आवश्यक हो गया है कि इस अधिनियम द्वारा अधिरोपित कतिपय निर्बन्धन अधिरोपित न रह जाने चाहिएं या यदि वह लोकहित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के सभी उपबन्धों या उनमें से किसी भी उपबन्ध के प्रवर्तन को या तो अनिश्चित काल के लिए या ऐसी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, निलम्बित या विनिर्दिष्ट सीमा तक शिथिल कर सकेगी ।
(2) जहां कि इस अधिनियम के किसी उपबन्ध का प्रवर्तन उपधारा (1) के अधीन अनिश्चित काल के लिए निलम्बित या शिथिल कर दिया गया है वहां ऐसा निलम्बन या शिथिलीकरण किसी भी समय जब तक यह अधिनियम प्रवृत्त रहता है, केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, हटाया जा सकेगा ।
26. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) बोर्ड का गठन, धारा 4 की उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट प्रत्येक प्रवर्ग से सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, बोर्ड के सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें तथा ऐसे सदस्यों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन के अनुसरण में की जाने वाली प्रक्रिया और उनमें हुई रिक्तियां भरने की रीति;
(ख) वे परिस्थितियां, जिनमें और वह प्राधिकारी, जिसके द्वारा, सदस्यों को हटाया जा सकेगा;
(ग) प्रति वर्ष की जाने वाली बोर्ड की बैठकों की न्यूनतम संख्या;
(घ) सचिव का वेतन तथा भत्ते और उसकी सेवा की अन्य शर्तें;
(ङ) बोर्ड की बैठकों में किए गए कार्यों के अभिलेख तैयार करना और ऐसे अभिलेख की प्रतियां केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करना;
(च) बोर्ड की प्राप्तियों तथा व्यय के बजट-प्राक्कलन तैयार करना और वह प्राधिकारी, जिसके द्वारा वे प्राक्कलन मंजूर किए जाएंगे;
(छ) वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए, और वह पद्धति, जिससे, बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से संविदाएं की जा सकेंगी;
(ज) बोर्ड और कार्यकारिणी समिति तथा अध्यक्ष की व्यय उपगत करने की शक्तियां; तथा किसी बजट-शीर्ष में प्राक्कलित बचत का अन्य ऐसे ही शीर्ष को पुनर्विनियोग;
(झ) वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए बोर्ड धन उधार ले सकेगा;
(ञ) वह प्ररूप जिसमें, तथा वह रीति, जिससे, बोर्ड द्वारा लेखे रखे जाएंगे;
(ट) कयर की बनी वस्तुओं के विनिर्माण के लिए कयर तकलियों तथा करघों का और साथ ही कयर की बनी वस्तुओं के विनिर्माताओं का रजिस्ट्रीकरण तथा ऐसे रजिस्ट्रीकरण की शर्तें; इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति देना या जारी करना; ऐसे रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञप्ति की बाबत उद्गृहीत की जाने वाली फीस; और ऐसे रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञप्तियों का निलम्बन और उनका रद्द किया जाना;
(ठ) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञप्तियों के लिए आवेदन का प्ररूप और किसी ऐसे आवेदन की बाबत दी जाने वाली फीस, यदि कोई हो;
(ड) कयर उद्योग की बाबत किसी जानकारी या आंकड़ों का संग्रहण;
(ढ) कोई अन्य बात जो विहित की जानी है या विहित की जाए ।
[(3) इस धारा के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
27. उपविधियां बनाने की बोर्ड की शक्ति-(1) बोर्ड, इस अधिनियम तथा तद्धीन बनाए गए नियमों से सुसंगत उपविधियां, निम्नलिखित के निमित्त उपबन्ध करने के लिए बना सकेगा, -
(क) अपनी बैठकों तथा कार्यपालिका और अन्य समितियों की बैठकों की तारीखें, समय तथा स्थान, और ऐसी बैठकों के लिए गणपूर्ति और उनमें कार्य प्रक्रिया;
(ख) कार्यपालिका या किसी अन्य समिति को, या उसके अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव या उसके अधिकारियों में से किसी अन्य अधिकारी को शक्तियों तथा कर्तव्यों का प्रत्यायोजन;
(ग) सदस्यों तथा समितियों के सदस्यों के यात्रा-भत्ते;
(घ) अपने अधिकारियों तथा सचिव से भिन्न कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रोन्नति तथा पदच्युति और उनके पदों का सृजन तथा उत्पादन;
(ङ) अपने अधिकारियों तथा सचिव से भिन्न कर्मचारियों की सेवा-शर्तें, जिनमें उनके वेतन, छुट्टी, छुट्टी भत्ते, पेंशन, उपदान, अनुकम्पा-भत्ते तथा यात्रा-भत्ता भी आते हैं, तथा उनके लिए किसी निधि की स्थापना तथा उसे बनाए रखना;
(च) अपने लेखाओं का रखा जाना;
(छ) वे व्यक्ति, जिनके द्वारा तथा वह रीति, जिससे उसकी ओर से संदाय, निक्षेप तथा विनिधान किए जा सकेंगे;
(ज) अपने चालू खर्चे के लिए अपेक्षित धन की अभिरक्षा तथा उस धन का विनिधान जो इस प्रकार अपेक्षित नहीं है;
(झ) केन्द्रीय और राज्य सरकारों के विभागों तथा अन्य संस्थाओं को आबंटित धनराशियां दिखाने वाले विवरण तैयार करना ।
(2) कोई भी उपविधि तब तक प्रभावी नहीं होगी जब तक केन्द्रीय सरकार द्वारा उसकी पुष्टि न की गई हो तथा राजपत्र में उसे प्रकाशित न कर दिया गया हो; और केन्द्रीय सरकार किसी उपविधि की पुष्टि करने में उसमें कोई ऐसा परिवर्तन कर सकेगी जो उसे आवश्यक प्रतीत हो ।
(3) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी ऐसी उपविधि को रद्द कर सकेगी, जिसे उसने पुष्ट किया है और तब वह उपविधि प्रभावी न रह जाएगी ।
[(4) इस अधिनियम के अधीन बनाई गई प्रत्येक उपविधि, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस उपविधि में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह उपविधि नहीं बनाई जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगी । किंतु उपविधि के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
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