तात्विक परिवर्तन का प्रभाव, NI Act, Section 87 ( NI Act, Section 87. Affect of material alteration )
तात्विक परिवर्तन का प्रभाव -- परक्राम्य लिखत में का कोई भी तात्विक परिवर्तन उसे किसी के विरुद्ध भी, जो कि ऐसे परिवर्तन के समय उसका पक्षकार और उसके प्रति सम्मत नहीं हुआ है, तब के सिवाय शून्य कर देता है जब कि वह परिवर्तन मूल पक्षकारों के सामान्य आशय को पूरा करने के लिए किया गया हो;
पृष्ठांकिती द्वारा परिवर्तन -- और यदि ऐसा कोई परिवर्तन पृष्ठांकिती द्वारा किया गया है, तो वह उसके प्रतिफल की बाबत् उसके सब दायित्व से उसके पृष्ठांकक को उन्मोचित कर देता है ।
इस धारा के उपबंध धाराएँ 20, 49, 86 और 125 के उपबंधों के अध्यधीन हैं ।